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Gaza Board Peace Meeting 2026; Donald Trump India

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वॉशिंगटन डीसी16 घंटे पहले

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अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में गुरुवार को  बोर्ड ऑफ पीस की पहली मीटिंग हुई। - Dainik Bhaskar

अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में गुरुवार को बोर्ड ऑफ पीस की पहली मीटिंग हुई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ने गुरुवार को ऑब्जर्वर देश के तौर पर हिस्सा लिया। यह बैठक वॉशिंगटन डीसी में हुई। भारत की तरफ से भारतीय दूतावास में तैनात चार्ज द’अफेयर्स (सीनियर अधिकारी) नमग्या सी खम्पा ने हिस्सा लिया।

भारत ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि वह बोर्ड का फुल टाइम मेंबर बनेगा या नहीं। भारत ने पिछले महीने दावोस में इसके लॉन्च कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया था।

‘बोर्ड ऑफ पीस’ की बैठक में गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया गया है। ट्रम्प ने कहा कि 9 सदस्य देश गाजा राहत पैकेज के लिए 63 हजार करोड़ रुपए (7 अरब डॉलर) देंगे। जबकि, अमेरिका खुद 90 हजार करोड़ रुपए (10 अरब डॉलर) देगा।

वहीं, 5 देशों ने युद्ध से तबाह फिलिस्तीनी इलाके में सैनिक तैनात करने पर सहमति दी है। वॉशिंगटन में हुई इस बैठक में करीब 50 देशों के अधिकारी शामिल हुए।

इनमें से 27 देश बोर्ड के सदस्य हैं, जिनमें अजरबैजान, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, इजराइल, जॉर्डन, मोरक्को, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, UAE, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं। भारत और यूरोपीय संघ (EU) सहित बाकी देश ऑब्जर्वर के तौर पर शामिल हुए।

बोर्ड ऑफ पीस से जुड़ी तस्वीरें…

राष्ट्रपति ट्रम्प बोर्ड ऑफ पीस की मीटिंग को संबोधित करते हुए।

राष्ट्रपति ट्रम्प बोर्ड ऑफ पीस की मीटिंग को संबोधित करते हुए।

बोर्ड ऑफ पीस की पहली मीटिंग में 50 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

बोर्ड ऑफ पीस की पहली मीटिंग में 50 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मीटिंग के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प से बात करते हुए।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मीटिंग के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प से बात करते हुए।

बैठक के दौरान ट्रम्प ने पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ को खड़े होने के लिए कहा और वो खड़े हो गए।

बैठक के दौरान ट्रम्प ने पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ को खड़े होने के लिए कहा और वो खड़े हो गए।

बोर्ड ऑफ पीस की पहली मीटिंग में भारत की तरफ से सीनियर अधिकारी नमग्या सी खम्पा ने हिस्सा लिया। (फाइल फोटो)

बोर्ड ऑफ पीस की पहली मीटिंग में भारत की तरफ से सीनियर अधिकारी नमग्या सी खम्पा ने हिस्सा लिया। (फाइल फोटो)

ट्रम्प बोले- ये रकम युद्ध पर खर्च के मुकाबले बहुत छोटी

ट्रम्प ने कहा कि यह रकम युद्ध पर होने वाले खर्च के मुकाबले बहुत छोटी है। उन्होंने सदस्य देशों से कहा कि अगर सभी देश साथ आएं तो उस इलाके में स्थायी शांति लाई जा सकती है, जो सदियों से युद्ध और हिंसा झेलता आया है।

ट्रम्प ने कहा कि गाजा पर खर्च किया गया हर डॉलर इलाके में स्थिरता लाने और बेहतर भविष्य बनाने में निवेश है। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि कितने सैनिक भेजे जाएंगे, वे कब तैनात होंगे और दी गई रकम का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा।

UN की निगरानी करेगा ट्रम्प का बोर्ड ऑफ पीस

5 देशों ने युद्ध से तबाह फिलिस्तीनी इलाके में सैनिक तैनात करने पर सहमति दी है। ट्रम्प ने यह भी साफ किया कि यह बोर्ड अब दुनिया भर के संघर्ष सुलझाने में भी भूमिका निभाएगा।

ट्रम्प ने कहा, बोर्ड संयुक्त राष्ट्र (UN) की निगरानी करेगा और सुनिश्चित करेगा कि वह ठीक से काम कर रहा है। वहीं, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक से ठीक पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक हुई। इसमें वेस्ट बैंक में इजरायल के नियंत्रण बढ़ाने की कोशिशों की आलोचना की गई।

पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ शामिल हुए

बैठक में भारत समेत ज्यादातर देशों ने सीनियर अधिकारियों को भेजा। वहीं पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली और हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन खुद पहुंचे।

जर्मनी, इटली, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और ब्रिटेन उन देशों में हैं, जो बोर्ड में शामिल नहीं हुए हैं, लेकिन ऑब्जर्वर के तौर पर भाग लिया। ट्रम्प ने दावा किया, ‘सभी ने गाजा पर प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है और जिन्होंने नहीं माना है वे भी जल्द इसे मान लेंगे।’

बैठक की चर्चा का केंद्र एक ऑर्मड इंटरनेशनल स्टैबलाइजेशन फोर्स बनाना रहा, जिसका काम सुरक्षा बनाए रखना और हमास को निरस्त्र कराना होगा। यह इजराइल की प्रमुख मांग है और सीजफायर डील का अहम हिस्सा भी। हालांकि हमास ने अब तक निरस्त्रीकरण को लेकर बहुत भरोसा नहीं दिलाया है।

हमास बोला- जब तक इजराइली सेना यहां है, हथियार नहीं छोड़ेंगे

दूसरी ओर हमास ने कहा है कि जब तक इजराइली सेना पूरी तरह नहीं हटती, वह हथियार नहीं डालेगा। हाल ही में हमास लीडर ओसामा हमदान ने अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में कहा कि संगठन ने अभी तक हथियारों पर कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया है।

वहीं, इजराइल का कहना है कि जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं छोड़ता, सेना गाजा से नहीं हटेगी। इजराइल ने हमास को 60 दिन का समय दिया है कि वह पूरी तरह हथियार छोड़ दे।

ट्रम्प के दामाद और वार्ताकार जेरेड कुशनर ने दावोस में गाजा के दक्षिणी हिस्से में छह नए शहर बसाने और समुद्री तट पर पर्यटन परियोजना बनाने की योजना पेश की थी। हालांकि, इसके लिए फंडिंग और समय-सीमा अभी तय नहीं है।

बोर्ड ऑफ पीस क्या है?

ट्रम्प ने पहली बार पिछले साल सितंबर 2025 में गाजा युद्ध खत्म करने की योजना पेश करते हुए इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने करीब 60 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है।

दुनिया के नेताओं को भेजे गए न्योते में बताया गया था कि इस बोर्ड की भूमिका सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर संघर्षों को सुलझाने में भी काम करेगा।

भेजे गए एक मसौदा (चार्टर) में कहा है कि जो देश तीन साल से ज्यादा समय तक इस बोर्ड का सदस्य बनना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा।

ट्रम्प खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं

ट्रम्प खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं। वे चाहते हैं कि यह बोर्ड सिर्फ गाजा के युद्धविराम तक सीमित न रहे, बल्कि दूसरे मुद्दों पर भी काम करे। हालांकि, इससे कुछ देशों को चिंता है कि इससे ग्लोबल डिप्लोमेसी में UN की भूमिका कमजोर हो सकती है।

ट्रम्प ने कहा कि जब यह बोर्ड पूरी तरह बन जाएगा, तब यह बड़े फैसले ले सकेगा और जो भी काम होगा, वह UN के सहयोग से किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि UN में बहुत क्षमता है, लेकिन उसका अब तक पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पांच स्थायी सदस्यों में से अमेरिका के अलावा किसी भी देश ने अभी तक इस बोर्ड में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है।

बैठक में ट्रम्प ने ईरान को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया

इंटरनेशनल स्टैबलाइजेशन फोर्स के प्रमुख मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स ने कहा कि योजना के तहत गाजा के लिए 12,000 पुलिस और 20,000 सैनिकों की जरूरत होगी।

बैठक के दौरा राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए ’10 दिनों का अल्टीमेटम’ दिया है। ट्रम्प ने कहा कि अगले 10 दिनों में यह साफ हो जाएगा कि ईरान के साथ कोई समझौता होगा या अमेरिका को सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुनना पड़ेगा।

ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ समझौता करना आसान नहीं रहा है, लेकिन अगर इस बार सहमति नहीं बनी तो हमें एक कदम आगे (सैन्य कार्रवाई की ओर) बढ़ना पड़ सकता है।

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यह खबर भी पढ़ें…

ट्रम्प बोले- मैंने भारत-PAK को 200% टैरिफ की चेतावनी दी:तब लड़ाई रोकने के लिए माने, संघर्ष में 11 फाइटर जेट्स गिरे थे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को वॉशिंगटन में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ कार्यक्रम में फिर से भारत-पाकिस्तान संघर्ष रुकवाने का दावा किया। उन्होंने कहा कि मैंने देशों पर 200% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। इसके बाद वे संघर्ष रोकने के लिए माने। पढ़ें पूरी खबर…

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वॉशिंगटन डीसी16 घंटे पहले

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अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में गुरुवार को  बोर्ड ऑफ पीस की पहली मीटिंग हुई। - Dainik Bhaskar

अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में गुरुवार को बोर्ड ऑफ पीस की पहली मीटिंग हुई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ने गुरुवार को ऑब्जर्वर देश के तौर पर हिस्सा लिया। यह बैठक वॉशिंगटन डीसी में हुई। भारत की तरफ से भारतीय दूतावास में तैनात चार्ज द’अफेयर्स (सीनियर अधिकारी) नमग्या सी खम्पा ने हिस्सा लिया।

भारत ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि वह बोर्ड का फुल टाइम मेंबर बनेगा या नहीं। भारत ने पिछले महीने दावोस में इसके लॉन्च कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया था।

‘बोर्ड ऑफ पीस’ की बैठक में गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया गया है। ट्रम्प ने कहा कि 9 सदस्य देश गाजा राहत पैकेज के लिए 63 हजार करोड़ रुपए (7 अरब डॉलर) देंगे। जबकि, अमेरिका खुद 90 हजार करोड़ रुपए (10 अरब डॉलर) देगा।

वहीं, 5 देशों ने युद्ध से तबाह फिलिस्तीनी इलाके में सैनिक तैनात करने पर सहमति दी है। वॉशिंगटन में हुई इस बैठक में करीब 50 देशों के अधिकारी शामिल हुए।

इनमें से 27 देश बोर्ड के सदस्य हैं, जिनमें अजरबैजान, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, इजराइल, जॉर्डन, मोरक्को, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, UAE, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं। भारत और यूरोपीय संघ (EU) सहित बाकी देश ऑब्जर्वर के तौर पर शामिल हुए।

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राष्ट्रपति ट्रम्प बोर्ड ऑफ पीस की मीटिंग को संबोधित करते हुए।

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बोर्ड ऑफ पीस की पहली मीटिंग में 50 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

बोर्ड ऑफ पीस की पहली मीटिंग में 50 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मीटिंग के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प से बात करते हुए।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मीटिंग के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प से बात करते हुए।

बैठक के दौरान ट्रम्प ने पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ को खड़े होने के लिए कहा और वो खड़े हो गए।

बैठक के दौरान ट्रम्प ने पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ को खड़े होने के लिए कहा और वो खड़े हो गए।

बोर्ड ऑफ पीस की पहली मीटिंग में भारत की तरफ से सीनियर अधिकारी नमग्या सी खम्पा ने हिस्सा लिया। (फाइल फोटो)

बोर्ड ऑफ पीस की पहली मीटिंग में भारत की तरफ से सीनियर अधिकारी नमग्या सी खम्पा ने हिस्सा लिया। (फाइल फोटो)

ट्रम्प बोले- ये रकम युद्ध पर खर्च के मुकाबले बहुत छोटी

ट्रम्प ने कहा कि यह रकम युद्ध पर होने वाले खर्च के मुकाबले बहुत छोटी है। उन्होंने सदस्य देशों से कहा कि अगर सभी देश साथ आएं तो उस इलाके में स्थायी शांति लाई जा सकती है, जो सदियों से युद्ध और हिंसा झेलता आया है।

ट्रम्प ने कहा कि गाजा पर खर्च किया गया हर डॉलर इलाके में स्थिरता लाने और बेहतर भविष्य बनाने में निवेश है। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि कितने सैनिक भेजे जाएंगे, वे कब तैनात होंगे और दी गई रकम का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा।

UN की निगरानी करेगा ट्रम्प का बोर्ड ऑफ पीस

5 देशों ने युद्ध से तबाह फिलिस्तीनी इलाके में सैनिक तैनात करने पर सहमति दी है। ट्रम्प ने यह भी साफ किया कि यह बोर्ड अब दुनिया भर के संघर्ष सुलझाने में भी भूमिका निभाएगा।

ट्रम्प ने कहा, बोर्ड संयुक्त राष्ट्र (UN) की निगरानी करेगा और सुनिश्चित करेगा कि वह ठीक से काम कर रहा है। वहीं, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक से ठीक पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक हुई। इसमें वेस्ट बैंक में इजरायल के नियंत्रण बढ़ाने की कोशिशों की आलोचना की गई।

पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ शामिल हुए

बैठक में भारत समेत ज्यादातर देशों ने सीनियर अधिकारियों को भेजा। वहीं पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली और हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन खुद पहुंचे।

जर्मनी, इटली, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और ब्रिटेन उन देशों में हैं, जो बोर्ड में शामिल नहीं हुए हैं, लेकिन ऑब्जर्वर के तौर पर भाग लिया। ट्रम्प ने दावा किया, ‘सभी ने गाजा पर प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है और जिन्होंने नहीं माना है वे भी जल्द इसे मान लेंगे।’

बैठक की चर्चा का केंद्र एक ऑर्मड इंटरनेशनल स्टैबलाइजेशन फोर्स बनाना रहा, जिसका काम सुरक्षा बनाए रखना और हमास को निरस्त्र कराना होगा। यह इजराइल की प्रमुख मांग है और सीजफायर डील का अहम हिस्सा भी। हालांकि हमास ने अब तक निरस्त्रीकरण को लेकर बहुत भरोसा नहीं दिलाया है।

हमास बोला- जब तक इजराइली सेना यहां है, हथियार नहीं छोड़ेंगे

दूसरी ओर हमास ने कहा है कि जब तक इजराइली सेना पूरी तरह नहीं हटती, वह हथियार नहीं डालेगा। हाल ही में हमास लीडर ओसामा हमदान ने अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में कहा कि संगठन ने अभी तक हथियारों पर कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया है।

वहीं, इजराइल का कहना है कि जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं छोड़ता, सेना गाजा से नहीं हटेगी। इजराइल ने हमास को 60 दिन का समय दिया है कि वह पूरी तरह हथियार छोड़ दे।

ट्रम्प के दामाद और वार्ताकार जेरेड कुशनर ने दावोस में गाजा के दक्षिणी हिस्से में छह नए शहर बसाने और समुद्री तट पर पर्यटन परियोजना बनाने की योजना पेश की थी। हालांकि, इसके लिए फंडिंग और समय-सीमा अभी तय नहीं है।

बोर्ड ऑफ पीस क्या है?

ट्रम्प ने पहली बार पिछले साल सितंबर 2025 में गाजा युद्ध खत्म करने की योजना पेश करते हुए इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने करीब 60 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है।

दुनिया के नेताओं को भेजे गए न्योते में बताया गया था कि इस बोर्ड की भूमिका सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर संघर्षों को सुलझाने में भी काम करेगा।

भेजे गए एक मसौदा (चार्टर) में कहा है कि जो देश तीन साल से ज्यादा समय तक इस बोर्ड का सदस्य बनना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा।

ट्रम्प खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं

ट्रम्प खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं। वे चाहते हैं कि यह बोर्ड सिर्फ गाजा के युद्धविराम तक सीमित न रहे, बल्कि दूसरे मुद्दों पर भी काम करे। हालांकि, इससे कुछ देशों को चिंता है कि इससे ग्लोबल डिप्लोमेसी में UN की भूमिका कमजोर हो सकती है।

ट्रम्प ने कहा कि जब यह बोर्ड पूरी तरह बन जाएगा, तब यह बड़े फैसले ले सकेगा और जो भी काम होगा, वह UN के सहयोग से किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि UN में बहुत क्षमता है, लेकिन उसका अब तक पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पांच स्थायी सदस्यों में से अमेरिका के अलावा किसी भी देश ने अभी तक इस बोर्ड में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है।

बैठक में ट्रम्प ने ईरान को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया

इंटरनेशनल स्टैबलाइजेशन फोर्स के प्रमुख मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स ने कहा कि योजना के तहत गाजा के लिए 12,000 पुलिस और 20,000 सैनिकों की जरूरत होगी।

बैठक के दौरा राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए ’10 दिनों का अल्टीमेटम’ दिया है। ट्रम्प ने कहा कि अगले 10 दिनों में यह साफ हो जाएगा कि ईरान के साथ कोई समझौता होगा या अमेरिका को सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुनना पड़ेगा।

ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ समझौता करना आसान नहीं रहा है, लेकिन अगर इस बार सहमति नहीं बनी तो हमें एक कदम आगे (सैन्य कार्रवाई की ओर) बढ़ना पड़ सकता है।

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ट्रम्प बोले- मैंने भारत-PAK को 200% टैरिफ की चेतावनी दी:तब लड़ाई रोकने के लिए माने, संघर्ष में 11 फाइटर जेट्स गिरे थे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को वॉशिंगटन में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ कार्यक्रम में फिर से भारत-पाकिस्तान संघर्ष रुकवाने का दावा किया। उन्होंने कहा कि मैंने देशों पर 200% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। इसके बाद वे संघर्ष रोकने के लिए माने। पढ़ें पूरी खबर…

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