Uttar Pradesh Varanasi Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati ‘Chaturangini’ army Live photo Video update

वाराणसी5 घंटे पहलेलेखक: अनुज तिवारी कॉपी लिंक वाराणसी में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को चतुरंगिणी सेना बनाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा- चतुरंगिणी सेना में 2 लाख 18 हजार 700 सैनिक होंगे। इसमें देशभर से लोग भर्ती होंगे। उन्होंने बताया- यह सेना गोरक्षा, धर्म रक्षा, शास्त्र रक्षा और मंदिर रक्षा का कार्य करेगी। उनकी ड्रेस पीली होगी। हाथ में परशु (फरसा) होगा। अविमुक्तेश्वरानंद ने चतुरंगिणी सेना बनाने के लिए श्रीशंकराचार्य चतुरंगिणी सभा का गठन किया है। इसमें 27 सदस्य होंगे। इसका अध्यक्ष वे खुद होंगे। शंकराचार्य ने अपनी सेना के काम करने के तरीके बताए। उन्होंने कहा- पहले टोको, यानी टोकेंगे। कहो कि यह गलत हो रहा है। नहीं माने तो रोको। भाई, आपको रुकना पड़ेगा। नहीं तो फिर ठोको। ठोको का मतलब सीधे प्रहार करना नहीं है। मुकदमा करना, शिकायत करना और पंचायत करना भी ठोको में आएगा। ये सभी संवैधानिक तरीके अपनाते हुए काम करेंगी। चतुरंगिणी सेना यानी हाथी-घोड़े, रथ और पैदल सेना शंकराचार्य बोले- एक टीम में 10 लोग होंगे शंकराचार्य ने कहा- 1 पत्ती (टीम) में 10 लोग होंगे। 21 हजार 870 टीमें बनेंगी तो सेना तैयार हो जाएगी। भारत में अभी करीब 800 जिले हैं। अगर हर जिले में 27 टीमें, यानी 270 लोग तैयार हो गए, तो 2 लाख 16 हजार लोग तैयार हो जाएंगे। ‘धार्मिक परिसर में वही लोग जाएं, जो उस धर्म को मानते हैं’ उत्तराखंड के बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक के मामले में शंकराचार्य ने कहा- मक्का-मदीना में 40 किलोमीटर पहले ही दूसरे धर्म के लोगों को रोक दिया जाता है। वह गलत नहीं है। ठीक है। वैसे ही हमारे भी धर्म स्थल हैं। हमें भी अपनी पवित्रता चाहिए। हमें भी अपने ढंग से पूजा-पाठ करना है। वहां दूसरा क्यों जाएगा। हमारे यहां परंपरा है कि धार्मिक परिसरों में वही लोग जा सकते हैं, जो उस धर्म को मानते हैं। शंकराचार्य ने बताया- चतुरंगिणी सेना की एक टीम में 10 लोग होंगे। शंकराचार्य को चतुरंगिणी सेना बनाने की जरूरत क्यों पड़ी आदि शंकराचार्य ने आठवीं सदी में 13 अखाड़े बनाए थे। इन अखाड़ों का गठन हिंदू धर्म और वैदिक संस्कृति की रक्षा के लिए किया गया था। धर्म की रक्षा के लिए नागा साधुओं की एक सेना की तर्ज पर ही अखाड़ों को तैयार किया गया था। जिसमें उन्हें योग, अध्यात्म के साथ शस्त्रों की भी शिक्षा दी जाती है। इन अखाड़ों को शंकराचार्य की सेना भी कहा जाता था। आजादी के बाद 1954 में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (ABAP) का गठन हुआ था। 1954 के प्रयाग (इलाहाबाद) कुंभ में मची भगदड़ के बाद, व्यवस्था सुधारने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पहल पर, 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने मिलकर इस संस्था की स्थापना की। ऐसा माना जाता है कि अखाड़ा परिषद बनने के बाद इनकी कमान परिषद के अध्यक्ष के हाथ में आ गई और धीरे-धीरे शंकराचार्यों का कमांड इन पर से कम हो गया। 18 जनवरी (मौनी अमावस्या) को शंकराचार्य प्रयागराज माघ मेले में अपने शिविर से पालकी में सवार होकर संगम स्नान के लिए रवाना हुए। पालकी को संगम नोज तक ले जाने को लेकर विवाद हो गया। इसके बाद शंकराचार्य धरने पर बैठ गए, लेकिन किसी भी अखाड़े ने उनका समर्थन नहीं किया। उस वक्त अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने कहा था- मुख्यमंत्री को लेकर शंकराचार्य की कड़े शब्दों में की गई टिप्पणियां गलत हैं। 10 दिन बाद 28 जनवरी को शंकराचार्य बिना स्नान किए काशी लौट गए। इसके बाद वे यूपी सरकार पर लगातार हमलावर रहे। उन्होंने ‘गो-प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ यात्रा का ऐलान किया और साधु-संतों से साथ आने की अपील की। 7 मार्च को काशी से शुरू हुई यात्रा 11 मार्च को लखनऊ पहुंची। यहां शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गोरक्षा अभियान का शंखनाद किया, लेकिन साधु-संतों की भागीदारी सीमित दिखी। 11 मार्च को शंकराचार्य ने कहा था कि साधु समाज में विकृति आ गई है। एक लकीर खिंच गई है। उन्होंने सभी अखाड़ों को पत्र लिखकर यह पूछने की बात कही कि वे किसके साथ हैं। —————- शंकराचार्य से जुड़ी हुई ये खबर भी पढ़ें- लखनऊ में शंकराचार्य से मिले अखिलेश, बोले- नकली संत अब बेनकाब होंगे सपा मुखिया अखिलेश यादव ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से गुरुवार को मुलाकात की। एक घंटे तक बातचीत हुई। इस दौरान अखिलेश जमीन पर बैठे नजर आए। बाहर निकलने पर अखिलेश ने मीडियाकर्मियों से कहा- शंकराचार्य से मिलकर आ रहा हूं। उनके आशीर्वाद से अब नकली संतों का अंत होगा। अब वे लोग भी बेनकाब होंगे, जो धर्म के नाम पर लोगों को गुमराह करते हैं। सबका सच सामने आएगा। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Gudi Padwa Maharashtra | Navratri Uttar Pradesh PM Modi Hindu New Year

3 मिनट पहले कॉपी लिंक देशभर में नवरात्रि का उत्सव मनाया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर के कटरा में बारिश के बीच भक्त दर्शन करने पहुंचे। वहीं यूपी में भी बड़े मंदिरों में भीड़ नजर आ रही है। उधर महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा उत्सव मनाया जा रहा है। नागपुर में सीएम देवेंद्र फडणवीस भी हिंदू नव वर्ष के कार्यक्रम में शामिल हुए। उधर पीएम ने देशवासियों को नवरात्रि और नव वर्ष पर 9 अलग-अलग तरह से पोस्ट कर बधाई दी। देशभर के मंदिरों में नवरात्रि उत्सव… दिल्ली के झंडेवालान मंदिर में नवरात्रि के पहले दिन देवी मां की आरती की गई। महाराष्ट्र में मुंबा देवी मंदिर में नवरात्रि पर पूजा-अर्चना की गई। दिल्ली में छतरपुर के कात्यायनी शक्तिपीठ मंदिर में आरती की गई। जम्मू-कश्मीर के कटरा में बारिश के बावजूद लोग माता के दर्शन करने पहुंचे। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में चंद्रिका देवी मंदिर में आरती की गई। तमिलनाडु में पेरूमल मंदिर में उगडी पर्व पर पूजा-अर्चना की गई। पीएम की अलग-अलग भाषाओं में बधाई… ——————- ये खबर भी पढ़ें… चैत्र नवरात्रि आज से, घट स्थापना के लिए 8 मुहूर्त: जानिए नौ दिनों की आसान पूजन विधि आज से चैत्र नवरात्रि शुरू हो गई है। नवरात्रि 19 से 27 मार्च तक रहेगी। पहले दिन घट स्थापना के लिए 8 मुहूर्त रहेंगे। वसंत ऋतु में आने से इसे वासंती नवरात्र भी कहते हैं। हिंदू नववर्ष के साथ शुरू होने के कारण ये साल की पहली नवरात्रि होती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Uttar Pradesh Bollwood Actress Madhuri dixit gorakhpur fans dhak dhak song Ravi kishan

अभिजीत सिंह | गोरखपुर23 मिनट पहले कॉपी लिंक गोरखपुर का प्यार हमेशा याद रहेगा। आपसे मिलकर बहुत खुशी हो रही है। आप की आंखों में एक प्यार झलक रहा है। यह देखकर मुझे अपनी ही फिल्म का डॉयलाग याद आ रहा है…देखा है पहली बार गोरखपुर की आंखों में प्यार। चूंकि मैं पहली आ रही हूं और आप सभी से मिलकर बहुत आनंद और खुशी मिल रही है। जब नजर की बात होती है तो मुझे याद आता है मेरा डॉयलाग। यूं नजर की बात की और दिल चुरा गए। हम तो समझे थे बुद्ध आप तो धड़कन सुना गए। ये बातें रविवार को गोरखपुर पहुंची बॉलीवुड एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित ने कही। वह एक ज्वैलरी शॉप का उद्घाटन करने पहुंचीं थीं। इस दौरान सांसद और अभिनेता रवि किशन ने माधुरी दीक्षित को गोरखपुर शहर के बारे में बताया। कहा कि यह शहर संस्कृति और परंपरा से जुड़ा हुआ है। 3 तस्वीरें देखिए… माधुरी दीक्षित ने कहा कि मुझे हमेशा यहां के लोग याद रहेंगे। धक-धक करने लगा गाने पर झूमे फैंस ज्वैलरी शॉप के उद्घाटन के समय जब माधुरी दीक्षित पहुंचीं तो उनका ‘धक-धक करने लगा’ गाने से स्वागत किया गया। इस दौरान फैंस भी माधुरी-माधुरी चिल्लाने लगे। उन्हें देखने के लिए फैंस की भीड़ जुट गई। लोग आसपास के घरों की छतों पर चढ़ गए। इस दौरान हॉस्टल के छत पर छात्राएं पहुंच गई और वहां से अपने मोबाइल के फ्लैश लाइट जलाकर स्वागत किया। माधुरी दीक्षित के पहुंचने पर आसपास के छतों से लोगों ने उनका स्वागत किया। सांसद रवि किशन बोले- पहले भोजपुरी के हिरोइन भी नहीं आना चाहती थीं सांसद और एक्टर रवि किशन ने कहा- बहुत अच्छा लगल सब लोगन के। पूज्य महाराज जी के दिल से धन्यवाद। ई बा गोरखपुर। एके कहल जा ला सरकार। जहां भोजपुरी के हिरोइन आवे के तैयार ना रहनि। आज ईहां के आवत बा माधुरी दीक्षित जी सुपर स्टार। सांसद और एक्टर रवि किशन ने कहा- माधुरी मैम के बारे में सुनते ही मेरे पास फोन आने लगे कि मैम से हमे मिलवा दीजिए। रवि किशन बोले- माधुरी मैम के साथ मेरी आ रही फिल्म सांसद और एक्टर रवि किशन ने कहा- माधुरी मैम के बारे में सुनते ही मेरे पास फोन आने लगे कि मैम से हमे मिलवा दीजिए। वहां कहां रूकी हैं। मैम को देखकर लोग पागल हो गए हैं। उन्होंने कहा- हम लोगों की एक फिल्म भी आ रही है मां- बहन। ………………….. ये खबर भी पढ़िए- खाना नहीं दिया तो सौतेली मां को मार डाला, सिर पर हथौड़े से किए ताबड़तोड़ वार, आरोपी बेटा गिरफ्तार संभल में युवक ने अपनी सौतेली मां के सिर पर हथौड़े से ताबड़तोड़ वार कर मार डाला। वह खाना देर से मिलने से नाराज था। चीखने की आवाज सुनकर जब पिता किचन में पहुंचे तो महिला जमीन पर पड़ी तड़प रही थी। चारों ओर खून बिखरा पड़ा था। पास ही हथौड़ा पड़ा हुआ था। अस्पताल ले जाने के पहले ही महिला ने दम तोड़ दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने आरोपी बेटे को हिरासत में ले लिया। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
uttar Pradesh Ghaziabad harish rana case Parents file petition Euthanasia

गाजियाबाद के राज एंपायर सोसाइटी की 13वीं मंजिल। साधारण से फ्लैट के कमरे में मेडिकल बेड पर हरीश (31) बेसुध लेटा है। पेट में पैग सेट पाइप और नाक में ऑक्सीजन पाइप लगा है। घर में परिजन, जानने वाले, अनजान, सरकारी अधिकारी व मीडियावालों का तांता लगा है। . पिता अशोक राणा भरे गले से बता रहे हैं कि हमारी साढ़े बारह साल की सेवाओं का हिसाब-किताब अब पूरा हो रहा है, इसलिए यह फैसला आ गया। पिता बोले- हम जानते हैं उसे , आखिरी बार बिस्तर से क्यों उठा रहे हैं… उसे भगवान की गोद में छोड़ रहे हैं। हरीश की मां ने एक दिन कहा कि अब तो हम भी बूढ़े हो रहे हैं, इसकी देखभाल कौन करेगा? राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से गुहार लगानी चाहिए। अशोक राणा ने कहा- कोई भी माता-पिता अपने बेटे के लिए ऐसा नहीं चाहेंगे, लेकिन मजबूरी में हमें यह फैसला लेना पड़ा। ब्रह्मकुमारी परिवार से जुड़ा राणा परिवार ब्रह्मकुमारी परिवार से जुड़े राणा परिवार ने अपना दर्द दीदी से साझा किया तो उन्होंने एक वकील भेजा। राणा कहते हैं, ‘हाईकोर्ट ने तो हमारी याचिका खारिज ही कर दी थी, पर सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी देकर हरीश पर बड़ा उपकार किया, हमसे उसकी पीड़ा देखी नहीं जाती, बेबसी ये है कि वह बता भी नहीं पाता कि उसे कहां-क्या तकलीफ है। हमारा तो बच्चा है, सेवा कर रहे हैं और जब तक सामर्थ्य है करते ही रहेंगे। कोर्ट के फैसले के बाद एम्स ने सभी तैयारी कर ली है। बस हमें तय करना है कि उसे आखिरी बार इस बिस्तर से उठाकर कब एम्स ले चलें। हम तो इसे पैसिव यूथेनेशिया भी नहीं बोलना चाहते। हम इसे भगवान की गोद में छोड़ रहे है। हम उसे ऐसे अनुभवी चिकित्सकों के पास छोड़ रहे हैं जो उसे घातक इंजेक्शन नहीं देंगे बल्कि प्राकृतिक रूप से जीवन छोड़ने का रास्ता सुगम करेंगे। एम्स में अनुभवी डॉक्टरों की निगरानी में सिर्फ फूड पाइप हटाएंगे। हम उसे पानी पिलाते रहेंगे जैसे कोई व्रत करता है। और जब हरीश प्राण त्याग देगा तो बहुत गौरव व सम्मान से घर लाएंगे और अंतिम विदाई देंगे। ये गाजियाबाद में राज एम्पायर सोसायटी है, यहां फ्लैट A1314 में हरीश राणा के मां-पिता रहते हैं। कौन मां-बाप अपने बच्चे को इस स्थिति में ले जाना चाहेगा मां चुप हैं, एकदम भावशून्य चेहरा, न खुशी कि बच्चे को मुक्ति मिल रही है और न गम कि आखिरी घड़ी आ पहुंची। हालांकि कुछ बोलते ही फफक पड़ती हैं… कौन मां-बाप अपने बच्चे को इस स्थिति में ले जाना चाहेगा। जिसे जन्म दिया, पाल-पोसकर बड़ा किया। फिर से अबोध की तरह उसकी देखभाल करनी पड़ी तो उसमें मां को कष्ट कैसा। दुख तो बस इस बात का रहा कि इसने तो अपनी पीड़ा भी नहीं बताई। सुबह-शाम जब उसकी मालिश करती तो मैं उसे घर के किस्से सुनाती आज क्या-क्या हुआ? कई बार घंटों तक बस इंतजार करती कि एक बार बस पलक झपके ताकि मुझे लगे कि उसने सब सुन लिया। कभी उबासी लेता, कभी छींक आती या आंखों के आसपास की त्वचा फड़कती तो हमें उसी से उसके जिंदा होने का सुकून होता था। हरीश अपनी मां निर्मला राणा के साथ। परिवार ने बताया- बेटे के इलाज के लिए अपनी संपत्ति तक बेच दी, लेकिन अब आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। बेटे की तकलीफ भी नहीं देखी जाती। 2013 में रक्षा बंधन के दिन चंडीगढ़ में उसके चार मंजिल से गिरने की खबर मिली थी। रात को ही हम पहुंचे तो इसे अचेत पाया। पहले 10 दिन वहीं पीजीआई में रहा, फिर एम्स दिल्ली में एक महीने वेंटिलेटर पर रहा। अगले कुछ महीने कभी अपोलो, कभी मेदांता और कई अस्पतालों में रहा। डॉक्टरों ने बताया कि वह लाइलाज स्थिति में पहुंच गया, सिर्फ दुआ और सेवा ही बची है। हम घर ले आए। अब पढ़िए इच्छामृत्यु के लिए दूसरी संघर्ष की कहानियां 1. कर्नाटकः 30 साल से गरिमापूर्ण मृत्यु की जंग लड़ रही हैं कैंसर पीड़ित करिबासम्मा कनार्टक के दावनगरे की 86 वर्षीय पूर्व शिक्षिका एचबी करिबासम्मा 3 दशकों से गरिमापूर्ण मृत्यु के हक के लिए संघर्षरत हैं। 1996 में स्लिप डिस्क की असहनीय पीड़ा के बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमिला नेसरगी के सहयोग से 1998 में उन्होंने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस मुद्दे पर कानूनी मोड़ दिया। कैंसर से जूझ रही करिबासम्मा आश्रय ओल्ड एज होम में रहती हैं। 2025 में कर्नाटक सरकार ने पैसिव यूथनेशिया पर सर्कुलर जारी किया, लेकिन स्पष्ट गाइडलाइंस नहीं है। उनकी मांग है कि सरकारी अस्पतालों में विशेष वार्ड और पारदर्शी प्रक्रिया तय हो ताकि करीब मरीजों को राहत मिले। करिबासम्मा का मानना है कि सम्मानजनक मौत न केवल मरीज, बल्कि उसकी सेवा करने वालों की गरिमा के लिए भी जरूरी है। 2. मध्य प्रदेशः 5 साल से डॉक्टर बेटा कोमा में, माता-पिता कर रहे सेवा, 20 लाख उधार हुआ मध्य प्रदेश के बड़वानी के होम्योपैथिक डॉक्टर हरीश गोले पिछले 5 वर्षों से कोमा में हैं। 2 मार्च 2021 को क्लिनिक जाते समय सड़क दुर्घटना में उनके सिर और रीढ़ में गंभीर चोटें आई। लंबा इलाज और सर्जरी के बाद भी वे होश में नहीं आ सके। तब से 46 वर्षीय हरीश घर के बिस्तर पर हैं। उनके बुजुर्ग पिता सोहनलाल और मां बीना बाई ही उनकी देखभाल कर रहे हैं। ट्यूब के जरिए दूध, जूस और दवाएं दी जाती हैं। पिता रोज उन्हें करवट दिलाते हैं, मालिश करते हैं और शरीर की सफाई करते हैं। इलाज और घर के खर्च ने परिवार को आर्थिक संकट में डाल दिया है। करीब 20 लाख रु. उधार हो चुके हैं। 3. महाराष्ट्रः ब्रेन डेड श्रेया का चेहरा 4 साल से ऐसे ही, पिता को उम्मीद अब भी ठीक हो जाएगी बेटी महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की 28 वर्षीय श्रेया सॉफ्टवेयर डेवलपर बनने का सपना देखती थीं। श्रेया ने पुणे के डीवाई पाटील कॉलेज से एमसीए किया और फाइनल में टॉप किया था। 3 फरवरी 2022 की रात घर लौटते समय हुई दुर्घटना ने उनकी जिंदगी बदल दी। उनके मस्तिष्क को चोट लगी। डॉक्टरों के अनुसार यह सामान्य स्थिति में लौट पाएंगी या नहीं, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। पिछले 4 वर्षों से श्रेया बिस्तर पर हैं। 2022 में
सेहत और सुंदरता का सुपरस्टार! इस पौधे में छिपा है कई रोगों का इलाज, जानें अनेको फायदे – Uttar Pradesh News

Last Updated:February 25, 2026, 13:23 IST हर जगह दिखाई देने वाला एक ऐसा पौधा, जिसके कई गुणों की बखान आयुर्वेद में किया गया है. जी हां एलोवेरा, जिसे घृतकुमारी के नाम से भी जाना जाता है. यह न केवल त्वचा, बल्कि बाल, इम्युनिटी पॉवर और पाचन से जुड़ी समस्याओं में बहुत उपयोगी है. इसके अलावा भी यह कई रोगों से छुटकारा दिला सकता है. आगे जानिए… एलोवेरा का पौधा कई गुणों से भरपूर होता है. इसमें 90% से अधिक पानी पाए जाते है, जो त्वचा को गहराई तक नमी प्रदान करते हैं. यह सुखी त्वचा, रुखापन और खिंचाव जैसी परेशानियों में बहुत उपयोगी है. इसके सही उपयोग से त्वचा मुलायम और ताजा दिख सकती है. अब केमिकल क्रीम की जगह कई लोग इसे प्राकृतिक मॉइस्चराइजर के रूप में प्रयोग कर रहे हैं. इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो मुहांसे, कील और दाग-धब्बों को कम करने में मदद करते हैं. चेहरे पर हल्के हाथ से जेल लगाने से सूजन से भी राहत मिल सकती है. यह तैलीय त्वचा वालों के लिए भी हल्का और उपयोगी है. उसे घरेलू उपचार के रूप में साफ-सुथरी और संतुलित त्वचा के लिए भी इस्तेमाल किया जाता आ रहा है. एलोवेरा धूप से झुलसी त्वचा को भी ठंडक पहुंचाती हैं. यह मामूली जलन, कट या खरोंच में लाभकारी और गुणकारी है. इसके अलावा, इसमें ऐसे भी तत्व होते हैं, जो त्वचा की लोच बनाए रखने में सहायक हैं, इसी के कारण ही झुर्रियां और महीन रेखाएं कम नजर आ सकती हैं. इसे एंटी-एजिंग देखभाल में भी शामिल किया जा सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ वंदना तिवारी के अनुसार, एलोवेरा सीधे स्कैल्प को पोषण देकर बालों कि जड़ों को मजबूत बनाने में सहायक हो सकता है. डैंड्रफ की समस्या में भी यह उपयोगी माना जाता है. एक सप्ताह में एक-दो बार इसे लगाने से बालों में चमक और कोमलता आ सकती है. यह एक प्राकृतिक कंडीशनर से कम नहीं हैं. इसके जूस को सीमित मात्रा में सेवन करने से पाचन तंत्र मजबूत होता है. यह कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याओं में राहत दे सकता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी पॉवर मजबूत करने में बेहद लाभकारी हैं. इसके सूजनरोधी गुण जोड़ों के दर्द में लाभ देते हैं. उन्होंने आगे कहा कि, एलोवेरा ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में भी कुछ हद तक मदद कर सकता है. हालांकि, शुगर के मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए. यह प्राकृतिक जरूर है, लेकिन सही मात्रा और सावधानी बहुत जरूरी है. ध्यान दे कि, एलोवेरा का ताजा जेल ही त्वचा या बालों पर लगाएं. इसके जूस सुबह खाली पेट लगभग 20 मिली बराबर पानी में मिलाकर लिया जाता है. सही उपयोग से पहले पैच टेस्ट करना चाहिए. हां गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं या नियमित दवा लेने वाले लोग बगैर आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श लिए इसका सेवन न करें. First Published : February 25, 2026, 13:23 IST
भगवान भी खुश, भक्त भी हेल्दी…ये पत्ता इतना चमत्कारी, शरीर के तीनों दोषों का दुश्मन, चबाते ही तुरंत राहत – Uttar Pradesh News

Last Updated:February 24, 2026, 20:48 IST बेलपत्र भोलेनाथ का प्रिय है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि बेलपत्र हमारे शरीर के लिए भी जादुई है, खासकर पाचन, मधुमेह और इम्युनिटी के लिए. लोकल 18 से बात करते हुए सुल्तानपुर के आयुष चिकित्सक डॉ. हर्ष बताते हैं कि सुबह खाली पेट 2-3 ताजी पत्तियां चबाने से कब्ज, पेट के कीड़े, दस्त और एसिडिटी दूर होती है, क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. यह ब्लड शुगर, उच्च रक्तचाप (BP) और हृदय स्वास्थ्य को भी नियंत्रित करता है. डॉ. हर्ष कहते हैं कि बेलपत्र शरीर के तीन दोषों वात, पित्त और कफ तीनों को शांत करता है. सहारनपुर. बेलपत्र भगवान शिव का प्रिया माना जाता है. इसे शिवलिंग के ऊपर जलाभिषेक के दौरान चढ़ाया जाता है. बेलपत्र मानव शरीर के लिए भी चमत्कारी है. बेल के पौधे पर आने वाला फल भी हमारे पेट के लिए रामबाण हैं. ये शरीर को ठंडक पहुंचाते हैं. बेल के पत्ते भी रामबाण से कम नहीं हैं. बेलपत्र से कई आयुर्वेदिक दवाइयां भी बनाई जाती हैं. अगर आपको बेल का फल नहीं मिल रहा तो बेलपत्र से भी शरीर को ठंडक पहुंचा सकते हैं. इससे पेट की समस्या से तुरंत छुटकारा मिलता है. बेलपत्र मधुमेह नियंत्रण और इम्युनिटी बढ़ाने में भी काम आता है. लोकल 18 से बात करते हुए सुल्तानपुर के आयास आयुर्वेदिक चिकित्सालय से बीएएमएस/ एमडी डॉ. हर्ष बताते हैं कि बेलपत्र ब्लड शुगर, उच्च रक्तचाप (BP) और हृदय स्वास्थ्य को भी ठीक रखता है. बेलपत्र से बनी हुई कई आयुर्वेदिक दवाइयां मार्केट में उपलब्ध हैं. घर पर भी इससे दवा बना सकते हैं. सुबह खाली पेट 2-3 ताजी पत्तियां चबाने से कब्ज, पेट के कीड़े, दस्त और एसिडिटी दूर होती है. इसके पत्तों में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. इसमें भी फायदा डॉ. हर्ष के मुताबिक, बेलपत्र शरीर के तीन दोषों वात, पित्त और कफ तीनों का शमन करता है. गर्मी में डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा होता है, बेलपत्र इससे बचाता है. हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए भी बेलपत्र का सेवन लाभदायक है. जिनका लिपिड प्रोफाइल गड़बड़ हो जाता है, कोलेस्ट्रॉल लेवल मेंटेन नहीं रहता, उनके लिए भी बेलपत्र रामबाण है. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Saharanpur,Uttar Pradesh First Published : February 24, 2026, 20:48 IST
मशरूम है सेहत का सुपरफूड! दिल, डायबिटीज और वजन कंट्रोल में फायदेमंद, जानें एक्सपर्ट की राय – Uttar Pradesh News

रायबरेली. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग सेहतमंद रहने के लिए अपने खानपान पर विशेष ध्यान दे रहे हैं. ऐसे में मशरूम एक ऐसा सुपरफूड बनकर उभरा है, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी ख्याल रखता है. पोषक तत्वों से भरपूर मशरूम का नियमित सेवन शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाने में मददगार साबित हो सकता है. रायबरेली के आयुष चिकित्सा विशेषज्ञ गौरव कुमार ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि मशरूम में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन बी, विटामिन डी, आयरन, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. खास बात यह है कि इसमें कैलोरी और फैट बहुत कम होता है, जिससे यह वजन नियंत्रित रखने वालों के लिए बेहतरीन विकल्प माना जाता है. मशरूम मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है. हृदय रोगों से बचाव में कारगरगौरव कुमार के मुताबिक, मशरूम हृदय संबंधी बीमारियों से बचाव में अहम भूमिका निभाता है. इसमें मौजूद फाइबर और पोटैशियम रक्तचाप को संतुलित रखने में मदद करते हैं, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. इसके अलावा, मशरूम में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होते हैं. डायबिटीज और हड्डियों के लिए फायदेमंदमशरूम डायबिटीज के मरीजों के लिए भी लाभकारी माना जाता है. इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम और फाइबर अधिक होता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रखने में मदद मिलती है. साथ ही, विटामिन डी की मौजूदगी हड्डियों को मजबूत बनाती है और जोड़ों के दर्द में राहत दिलाने में सहायक हो सकती है. त्वचा और बालों के लिए भी लाभकारीमशरूम में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और समय से पहले बूढ़ा होने के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं. इसके पोषक तत्व बालों को मजबूत और चमकदार बनाने में भी सहायक हैं. ऐसे करें सेवनविशेषज्ञों के अनुसार, मशरूम को सब्जी, सूप, सलाद या स्नैक्स के रूप में डाइट में शामिल किया जा सकता है. हालांकि, इसे हमेशा ताजा और साफ-सुथरे तरीके से पकाकर ही सेवन करना चाहिए, ताकि इसके पोषक तत्वों का पूरा लाभ मिल सके.
uttar pradesh Prayagraj Ashutosh-brahmachari-sexual-abuse-allegations-avimukteshwaranand FIR Jhunsi thana update video

प्रयागराजकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के मामले FIR दर्ज कर ली गई है। प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज FIR में शंकराचार्य के शिष्य मुकुंदानंद का भी नाम है। झूंसी थाना प्रभारी महेश मिश्रा के मुताबिक, 2-3 अज्ञात के खिलाफ भी पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। दरअसल, प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट ने शनिवार को FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने कोर्ट में 2 बच्चों को पेश करके गंभीर आरोप लगाए थे। कोर्ट में कैमरे के सामने बच्चों के बयान दर्ज हुए थे। स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया की कोर्ट ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नर की जांच रिपोर्ट के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात पर केस दर्ज करने के आदेश जारी किए थे। इससे पहले अदालत ने 13 फरवरी को अपना आदेश रिजर्व रखा था। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने बताया- हम दर-दर भटक रहे थे। पुलिस के पास जा रहे थे। हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। इसलिए न्याय के मंदिर में आए। आज लगा कि न्याय अभी जिंदा है। न्यायालय ने हमें आज न्याय दिया। मैं अब साफ-साफ कहना चाहता हूं कि शिष्यों के साथ यौन शोषण और समलैंगिक अपराध किया गया। इसकी पुष्टि न्यायालय ने कर दी है। अदालत ने माना- शंकराचार्य और उनके शिष्य पर गंभीर आरोप कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया। कहा, हर मामले में FIR दर्ज करना अनिवार्य नहीं होता। मजिस्ट्रेट को अपने विवेक से तय करना होता है कि FIR का निर्देश दिया जाए या शिकायत के रूप में आगे बढ़ाया जाए। यदि मामले में पुलिस जांच जरूरी हो, तो FIR दर्ज कर जांच करना उचित होता है। कोर्ट ने कहा, आरोप गंभीर और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं और पॉक्सो अधिनियम लागू होता है। साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस जांच आवश्यक है। केवल निजी शिकायत के रूप में मामला आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। जज ने आदेश दिया कि संबंधित थाना प्रभारी तत्काल FIR दर्ज करें। कानून के अनुसार स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करें। पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों का पालन किया जाए। पीड़ितों की पहचान और गरिमा की रक्षा की जाए। जांच रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए। शंकराचार्य बोले- रामभद्राचार्य ने अपने चेले से मुकदमा कराया शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। कहा- झूठा केस सच्चा थोड़ी हो जाएगा। कोर्ट के फैसले के बाद शंकराचार्य ने कहा- यौन शोषण का केस फर्जी साबित होगा। ये बनाया हुआ मामला है। वह (आशुतोष महाराज) रामभद्राचार्य का एक चेला है। हिस्ट्रीशीटर है। उसने पहले भी लोगों के ऊपर झूठे केस किए हैं। वह लोगों को धमकाता है, धन उगाही करता है। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- रामभद्राचार्य से हम लोगों का वाकयुद्ध चलता रहता है। यह तो सभी लोग जानते ही हैं। उन्होंने हमारे ऊपर अपने चेले को आगे करके फर्जी मुकदमा करवाया है। वो चाहते हैं कि सरकार के खिलाफ गोमाता की रक्षा की आवाज हम नहीं उठाएं। इसलिए हमारे ऊपर यह सब हो रहा है। शंकराचार्य ने कहा- न्यायालय का एक प्रोसिजर है, उसका हम सहयोग करेंगे। इसके बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। हमको पछतावा तब होता, जब हम कुछ इस तरह के होते। जब हम ऐसे हैं ही नहीं, तब क्या? बनावटी केस तो बनावटी ही रहने वाला है। इसलिए हम चाहते हैं कि जल्दी से जल्दी जांच हो जाए। पुलिस सरकार के अंडर में ही काम करती है। सीएम योगी सदन में खड़े होकर जब हमारे खिलाफ बोलते हैं, तो इसलिए नहीं बोलते कि उनको बोलना है। वह पुलिस को मैसेज देते हैं कि ये करना है। उन्होंने शीश महल के आरोपों पर कहा- यह खुला मठ है। इसमें 100-200 लोग रहते है। हर कोई आता-जाता रहता है। आशुतोष ब्रह्मचारी का डिप्टी सीएम और अखिलेश यादव को चैलेंज आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा- अखिलेश यादव और डिप्टी सीएम से कहना चाहता हूं कि मेरे साथ पैदल यात्रा में चलिए। विद्यामठ, बनारस जा रहा हूं, जहां शंकराचार्य रंगरलियां मनाते हैं। पंचम तल दिखाना चाहता हूं, जहां पर इनका शीश महल है। वहां इनकी सखियां रहती हैं, जिनका नाम भी पता है। आज से मेरी पैदल यात्रा चलेगी। हम न्याय के लिए दर-दर लोगों के बीच में जाएंगे। लोगों को ऐसे पद पर नहीं बैठना चाहिए। ये लोग जेल के अंदर होने चाहिए। इसलिए हम लोग आज से यात्रा शुरू कर रहे हैं। 8 फरवरी को कोर्ट में की थी शिकायत जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगाया है। उन्होंने 8 फरवरी को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में वाद (शिकायत) दायर की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि गुरुकुल की आड़ में वह बाल उत्पीड़न करते हैं। शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज शनिवार को वकीलों के साथ कोर्ट पहुंचे। कोर्ट के नोटिस पर अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने 10 फरवरी को जवाब दाखिल किया था। तब शंकराचार्य ने दैनिक भास्कर से कहा था कि हमने कोर्ट में सारे साक्ष्य दिए हैं। हमें न्यायपालिका पर भरोसा है। जबसे हमने गोमाता की रक्षा के लिए आवाज उठानी शुरू की, तब से सरकार और कुछ लोगों को यह पसंद नहीं आ रहा था। 13 फरवरी: आशुतोष महाराज कोर्ट से रोते हुए बाहर निकले यह तस्वीर 13 फरवरी की है, जब आशुतोष महाराज कोर्ट रूम से रोते और आंसू पोंछते हुए बाहर निकले थे। 13 फरवरी को जज विनोद कुमार चौरसिया ने मामले की सुनवाई की थी। शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ने मामले की वकालत खुद की थी। उन्होंने जज से कहा था कि 2 शिष्यों ने मेरे पास आकर अपने साथ हुए यौन शोषण की कहानी सुनाई। शंकराचार्य के खिलाफ FIR दर्ज करके जांच करनी चाहिए। मुझे न्यायपालिका से ही इंसाफ की उम्मीद है। शंकराचार्य के वकील ने इसका विरोध किया था। कहा था कि ये सिर्फ आरोप हैं। हमें केस की तैयारी के लिए थोड़ा वक्त चाहिए। इस पर आशुतोष महाराज ने जज से कहा था- मेरी कार को बम से उड़ाकर मुझे मारने की धमकी दी जा रही। मेरी हत्या हो सकती है। आपको यौन शोषण का शिकार हुए बच्चों के
नाक से खून, कब्ज और पीसीओएस में मददगार, जानें आयुर्वेद में दूब का महत्व, कई बीमारियों में असरदार – Uttar Pradesh News

Last Updated:February 21, 2026, 21:41 IST सनन्दन उपाध्याय/बलिया: हर जगह दिखने वाली साधारण घास, जो खेत से लेकर आंगन और आयुर्वेद से लेकर आस्था तक अपनी अलग पहचान रखती है. जी हां आमतौर पर पैरों तले बिछी रहने वाली यह घास औषधीय गुणों का खजाना है. इसका सही तरीके से प्रयोग कर कई रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है. आगे विस्तार से जानिए… सेहत की दुनिया में दूब घास को प्राकृतिक उपचार के रूप में बेहद उपयोगी बताया गया है. इसे शीतल, रक्तस्तंभक और पाचन सुधारक भी कहा गया है. इसके अलावा, नकसीर यानी नाक से खून आने पर दूब का ताजा रस माथे पर लगाने और कुछ मात्रा में सेवन करने से राहत मिल सकती है. यहीं नहीं, गर्मियों में शरीर की आंतरिक गर्मी शांत करने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. दुर्वा यानी दूब महिलाओं के लिए भी फायदेमंद है. पीसीओएस जैसी हार्मोनल असंतुलन की स्थिति में भी दूब का रस दही के साथ लेने से अत्यधिक रक्तस्राव और दर्द में आराम मिल सकता है. ध्यान रखें कि, विशेषज्ञ सलाह के बिना किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाना उचित नहीं होता है. हालांकि, ग्रामीण परंपराओं में इसका प्रयोग आज भी किया जाता है. राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की सात साल अनुभवी आयुर्वेदाचार्य डॉ प्रियंका सिंह के अनुसार, दूब कब्ज से राहत दिलाने और पेट को साफ रखने में बेहद लाभकारी और गुणकारी साबित हो सकती है. इसका हल्का काढ़ा बनाकर पीने से गैस और अपच में आराम मिलने की बात कही जाती है. इसके अलावा, इसमें प्राकृतिक तत्व भी पाए जाते हैं, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मददगार हैं. Add News18 as Preferred Source on Google शुगर और खून की कमी जैसी समस्याओं में भी दूब का उल्लेख मिलता है। पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसके अर्क को ब्लड शुगर संतुलित करने में सहायक माना गया है. इसमें आयरन तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो खून की कमी दूर करने में उपयोगी सिद्ध हो सकती है. धार्मिक दृष्टिकोण से दूब का अत्यंत पवित्र स्थान है. हिंदू परंपरा में इसे भगवान गणेश जी को अर्पित किया जाता है और शुभ का प्रतीक माना जाता है. पूजा-पाठ में दूर्वा चढ़ाने की परंपरा केवल आस्था नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश भी देती है. इस छोटी सी घास को भारतीय संस्कृति से गहरा जुड़ाव है. खेती और पशुपालन में भी दूब का महत्त्व कम नहीं है. लमसम 10 से 12% प्रोटीन युक्त यह घास पशुओं के लिए पौष्टिक चारे का काम करती है. सूखे की स्थिति में भी तेजी से उगने की इसकी क्षमता रखने के कारण किसानों का भरोसेमंद साथी भी है. कई जगहों पर तो प्राकृतिक चारे के रूप में भी इसको प्राथमिकता दी जाती है. दूब का पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका होती है. इसकी जड़ें मिट्टी को मजबूती से पकड़ती हैं, जिससे कटाव रुक जाती है. यही कारण है कि इसे लॉन, पार्क और गोल्फ कोर्स में बड़े पैमाने पर लगाया जाता है. कम देखभाल में भी हरी-भरी रहने वाली यह घास सचमुच धरती की हरी और मजबूत ढाल है. First Published : February 21, 2026, 21:41 IST
सूजन से लेकर वेट लॉस तक…कच्ची हल्दी सेहत का सोना, इम्युनिटी बूस्टर के लिए वरदान – Uttar Pradesh News

Last Updated:February 20, 2026, 23:56 IST भारतीय रसोई में आसानी से मिलने वाली कच्ची हल्दी इन दिनों सेहत की दुनिया में फिर सुर्खियां बटोर रही है. आयुर्वेद में इसे संजीवनी समान कहा गया है. इसमें करक्यूमिन और शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो शरीर को भीतर से मजबूत बनाते हैं. यह कई रोगों से निजात दिला सकती है. कच्ची हल्दी को इम्यूनिटी बूस्टर कहा गया है. इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीवायरल गुण होते हैं, जो संक्रमण से बचाव में सहायक होते हैं. इसके नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे मौसमी बीमारियों के खतरे की संभावना कम रहती हैं. कच्ची हल्दी जोड़ों के दर्द और सूजन से परेशान लोगों के लिए भी फायदेमंद होती है. इसकी सूजनरोधी क्षमता गठिया जैसी समस्याओं में राहत दे सकती है. कच्ची हल्दी के करक्यूमिन तत्व सूजन को कम करने में मदद करते है, जिससे जोड़ों की जकड़न और दर्द में आराम मिलता हैं. कच्ची हल्दी का पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी योगदान बेहद महत्वपूर्ण है. यह गैस, अपच और ब्लोटिंग जैसी दिक्कतों को कम करने में लाभकारी सिद्ध हो सकती है. इसके नियमित सेवन से आंतों की कार्यप्रणाली बेहतर होती है और पेट हल्का महसूस होता है, जिससे दिनभर शरीर ऊर्जावान रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ वंदना तिवारी के अनुसार, कच्ची हल्दी की भूमिका शरीर को डिटॉक्स करने में खास मानी जाती है. यह लिवर की कार्यक्षमता को समर्थन दे सकती है और शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मददगार साबित हो सकती है. खून को साफ करने में भी इसके गुण उपयोगी होते हैं, जिससे त्वचा पर भी सकारात्मक असर दिखता है. कच्ची हल्दी का गुनगुना दूध या काढ़ा सर्दी-खांसी या गले में खराश को दूर करने में बेहद लाभकारी और गुणकारी है. इसकी तासीर गर्म होती है, जो गले को आराम देने में सहायक हो सकती है. कई घरों में बदलते मौसम में इसे रोगों से बचाव के उपाय के तौर पर प्रयोग किया जाता है. कच्ची हल्दी एक शानदार औषधि है. वजन को कंट्रोल करने में भी कच्ची हल्दी लाभकारी है. यह मेटाबॉलिज्म को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है, जिससे कैलोरी बर्न की प्रक्रिया शानदार होती है. यही नहीं, कच्ची हल्दी सूजन कम करने और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में भी बहुत उपयोगी हैं, क्योंकि यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती हैं. कच्ची हल्दी को कद्दूकस कर दूध में उबालकर, चाय में मिलाकर या सुबह गुनगुने पानी के साथ सेवन जा सकता है. हालांकि, यदि किसी को पित्त की पथरी, मधुमेह या खून पतला करने वाली दवाएं चल रही हों, तो सेवन से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट से सलाह जरूरी ले. क्योंकि किन्हीं परिस्थितियों में यह हानिकारक भी हो सकती हैं. First Published : February 20, 2026, 23:56 IST









