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uttar pradesh Prayagraj Ashutosh-brahmachari-sexual-abuse-allegations-avimukteshwaranand FIR Jhunsi thana update video

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प्रयागराजकुछ ही क्षण पहले

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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के मामले FIR दर्ज कर ली गई है। प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज FIR में शंकराचार्य के शिष्य मुकुंदानंद का भी नाम है। झूंसी थाना प्रभारी महेश मिश्रा के मुताबिक, 2-3 अज्ञात के खिलाफ भी पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

दरअसल, प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट ने शनिवार को FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने कोर्ट में 2 बच्चों को पेश करके गंभीर आरोप लगाए थे। कोर्ट में कैमरे के सामने बच्चों के बयान दर्ज हुए थे।

स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया की कोर्ट ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नर की जांच रिपोर्ट के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात पर केस दर्ज करने के आदेश जारी किए थे। इससे पहले अदालत ने 13 फरवरी को अपना आदेश रिजर्व रखा था।

शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने बताया-

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हम दर-दर भटक रहे थे। पुलिस के पास जा रहे थे। हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। इसलिए न्याय के मंदिर में आए। आज लगा कि न्याय अभी जिंदा है। न्यायालय ने हमें आज न्याय दिया। मैं अब साफ-साफ कहना चाहता हूं कि शिष्यों के साथ यौन शोषण और समलैंगिक अपराध किया गया। इसकी पुष्टि न्यायालय ने कर दी है।

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अदालत ने माना- शंकराचार्य और उनके शिष्य पर गंभीर आरोप

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया। कहा, हर मामले में FIR दर्ज करना अनिवार्य नहीं होता। मजिस्ट्रेट को अपने विवेक से तय करना होता है कि FIR का निर्देश दिया जाए या शिकायत के रूप में आगे बढ़ाया जाए। यदि मामले में पुलिस जांच जरूरी हो, तो FIR दर्ज कर जांच करना उचित होता है।

कोर्ट ने कहा, आरोप गंभीर और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं और पॉक्सो अधिनियम लागू होता है। साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस जांच आवश्यक है। केवल निजी शिकायत के रूप में मामला आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।

जज ने आदेश दिया कि संबंधित थाना प्रभारी तत्काल FIR दर्ज करें। कानून के अनुसार स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करें। पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों का पालन किया जाए। पीड़ितों की पहचान और गरिमा की रक्षा की जाए। जांच रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए।

शंकराचार्य बोले- रामभद्राचार्य ने अपने चेले से मुकदमा कराया

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। कहा- झूठा केस सच्चा थोड़ी हो जाएगा।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। कहा- झूठा केस सच्चा थोड़ी हो जाएगा।

कोर्ट के फैसले के बाद शंकराचार्य ने कहा- यौन शोषण का केस फर्जी साबित होगा। ये बनाया हुआ मामला है। वह (आशुतोष महाराज) रामभद्राचार्य का एक चेला है। हिस्ट्रीशीटर है। उसने पहले भी लोगों के ऊपर झूठे केस किए हैं। वह लोगों को धमकाता है, धन उगाही करता है। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा-

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रामभद्राचार्य से हम लोगों का वाकयुद्ध चलता रहता है। यह तो सभी लोग जानते ही हैं। उन्होंने हमारे ऊपर अपने चेले को आगे करके फर्जी मुकदमा करवाया है। वो चाहते हैं कि सरकार के खिलाफ गोमाता की रक्षा की आवाज हम नहीं उठाएं। इसलिए हमारे ऊपर यह सब हो रहा है।

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शंकराचार्य ने कहा- न्यायालय का एक प्रोसिजर है, उसका हम सहयोग करेंगे। इसके बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। हमको पछतावा तब होता, जब हम कुछ इस तरह के होते। जब हम ऐसे हैं ही नहीं, तब क्या? बनावटी केस तो बनावटी ही रहने वाला है। इसलिए हम चाहते हैं कि जल्दी से जल्दी जांच हो जाए। पुलिस सरकार के अंडर में ही काम करती है।

सीएम योगी सदन में खड़े होकर जब हमारे खिलाफ बोलते हैं, तो इसलिए नहीं बोलते कि उनको बोलना है। वह पुलिस को मैसेज देते हैं कि ये करना है। उन्होंने शीश महल के आरोपों पर कहा- यह खुला मठ है। इसमें 100-200 लोग रहते है। हर कोई आता-जाता रहता है।

आशुतोष ब्रह्मचारी का डिप्टी सीएम और अखिलेश यादव को चैलेंज

आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा- अखिलेश यादव और डिप्टी सीएम से कहना चाहता हूं कि मेरे साथ पैदल यात्रा में चलिए। विद्यामठ, बनारस जा रहा हूं, जहां शंकराचार्य रंगरलियां मनाते हैं। पंचम तल दिखाना चाहता हूं, जहां पर इनका शीश महल है। वहां इनकी सखियां रहती हैं, जिनका नाम भी पता है।

आज से मेरी पैदल यात्रा चलेगी। हम न्याय के लिए दर-दर लोगों के बीच में जाएंगे। लोगों को ऐसे पद पर नहीं बैठना चाहिए। ये लोग जेल के अंदर होने चाहिए। इसलिए हम लोग आज से यात्रा शुरू कर रहे हैं।

8 फरवरी को कोर्ट में की थी शिकायत

जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगाया है। उन्होंने 8 फरवरी को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में वाद (शिकायत) दायर की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि गुरुकुल की आड़ में वह बाल उत्पीड़न करते हैं।

शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज शनिवार को वकीलों के साथ कोर्ट पहुंचे।

शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज शनिवार को वकीलों के साथ कोर्ट पहुंचे।

कोर्ट के नोटिस पर अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने 10 फरवरी को जवाब दाखिल किया था। तब शंकराचार्य ने दैनिक भास्कर से कहा था कि हमने कोर्ट में सारे साक्ष्य दिए हैं। हमें न्यायपालिका पर भरोसा है। जबसे हमने गोमाता की रक्षा के लिए आवाज उठानी शुरू की, तब से सरकार और कुछ लोगों को यह पसंद नहीं आ रहा था।

13 फरवरी: आशुतोष महाराज कोर्ट से रोते हुए बाहर निकले

यह तस्वीर 13 फरवरी की है, जब आशुतोष महाराज कोर्ट रूम से रोते और आंसू पोंछते हुए बाहर निकले थे।

यह तस्वीर 13 फरवरी की है, जब आशुतोष महाराज कोर्ट रूम से रोते और आंसू पोंछते हुए बाहर निकले थे।

13 फरवरी को जज विनोद कुमार चौरसिया ने मामले की सुनवाई की थी। शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ने मामले की वकालत खुद की थी। उन्होंने जज से कहा था कि 2 शिष्यों ने मेरे पास आकर अपने साथ हुए यौन शोषण की कहानी सुनाई। शंकराचार्य के खिलाफ FIR दर्ज करके जांच करनी चाहिए। मुझे न्यायपालिका से ही इंसाफ की उम्मीद है।

शंकराचार्य के वकील ने इसका विरोध किया था। कहा था कि ये सिर्फ आरोप हैं। हमें केस की तैयारी के लिए थोड़ा वक्त चाहिए। इस पर आशुतोष महाराज ने जज से कहा था- मेरी कार को बम से उड़ाकर मुझे मारने की धमकी दी जा रही। मेरी हत्या हो सकती है। आपको यौन शोषण का शिकार हुए बच्चों के बयान सुनने चाहिए।

ये शंकराचार्य के शिष्य मुकुंदानंद हैं। कोर्ट ने इन पर भी एफआईआर करने के आदेश दिए हैं।

ये शंकराचार्य के शिष्य मुकुंदानंद हैं। कोर्ट ने इन पर भी एफआईआर करने के आदेश दिए हैं।

जज ने कोर्ट रूम खाली कराया, बच्चों के बयान सुने इसके बाद जज ने कोर्ट रूम को खाली कराने का आदेश दिया था। कमरे में सिर्फ दोनों पक्षों के वकील ही बचे थे। इसके बाद बच्चों को कोर्ट रूम में लाया गया। बच्चों ने जज के सामने अपने साथ हुए शोषण की कहानी सुनाई थी। ये सारे बयान बंद कोर्ट रूम के अंदर हुए थे। इन बयानों को कैमरे में भी रिकॉर्ड किया गया था।

जज ने पूछा था- आप बच्चों के कौन हैं? स्पेशल जज विनोद कुमार चौरसिया ने आशुतोष महाराज से कुछ सवाल भी पूछे थे। कहा था कि आप इन पीड़ितों के क्या हैं? अभिभावक किन आधार पर बने? तब आशुतोष महाराज ने कहा था कि गुरु परंपरा के मुताबिक मैं न्याय के लिए आया हूं। पीड़ितों को कहीं न्याय नहीं मिला, तो इन बच्चों ने मुझसे संपर्क किया।

इसके बाद जज ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शंकराचार्य के खिलाफ FIR होगी या केस डिसमिस होगा, इसके लिए 21 फरवरी यानी आज की तारीख तय की थी।

आशुतोष महाराज के साथ 2 नाबालिग लड़के थे, उनके चेहरे ढके थे। कोर्ट रूम के अंदर इनके भी बयान हुए।

आशुतोष महाराज के साथ 2 नाबालिग लड़के थे, उनके चेहरे ढके थे। कोर्ट रूम के अंदर इनके भी बयान हुए।

शंकराचार्य और रामभद्राचार्य माघ मेले में हुए विवाद के बाद आए आमने-सामने चित्रकूट की श्री तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही मस्जिद ईदगाह के मुख्यवादी और पक्षकार भी हैं। माघ मेले में हुए विवाद के बाद रामभद्राचार्य और अविमुक्तेश्वरानंद आमने-सामने आ गए थे।

आशुतोष महाराज ने पहले पुलिस कमिश्नर से शिकायत की, फिर कोर्ट गए 24 जनवरी यानी मौनी अमावस्या के 6 दिन बाद आशुतोष महाराज ने प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर से अविमुक्तेश्वरानंद की 2 शिकायतें की थीं।

पहली शिकायत: अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर और गुरुकुल में नाबालिग बच्चों को रखा जाता है। उनसे निजी सेवा, भीड़ जुटाने, कार्यक्रमों और पालकी उठवाने जैसे काम कराए जाते हैं। बच्चों का यौन शोषण होने की भी आशंका है।

माघ मेले जैसे बड़े आयोजनों में भी बच्चों से काम कराया गया। यह बाल अधिकार और श्रम कानूनों का उल्लंघन है। शिविर में अवैध हथियार होने की भी आशंका है। आय से अधिक संपत्ति और कई बैंक खातों की जांच की जानी चाहिए। मुकुंदानंद नाम के व्यक्ति की भूमिका की जांच कराई जाए।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही मस्जिद ईदगाह के मुख्य वादी, पक्षकार आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने पुलिस-प्रशासन को भी लेटर लिखकर कार्रवाई की मांग की थी।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही मस्जिद ईदगाह के मुख्य वादी, पक्षकार आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने पुलिस-प्रशासन को भी लेटर लिखकर कार्रवाई की मांग की थी।

दूसरी शिकायत: आशुतोष महराज ने अविमुक्तेश्वरानंद पर फर्जी लेटरपैड और दस्तावेज बनाने का आरोप लगाया। कहा कि माघ मेला क्षेत्र में अविमुक्तेश्वरानंद खुद को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य बता रहे। वह “ज्योतिष्पीठ/श्री शंकराचार्य शिविर” के नाम से लेटरपैड और दस्तावेज बनवाकर अफसरों को पत्र भेज रहे।

ये लेटरपैड-पत्र फर्जी और भ्रामक हैं। इनसे प्रशासन और आम लोगों को गुमराह किया जा रहा। इन लेटरपैड पर 24 जनवरी, 2026 (माघ शुक्ल पंचमी) की तारीख दर्ज है। इसी तारीख का इस्तेमाल कर “श्री शंकराचार्य शिविर” के नाम से पत्र जारी किए गए। इनकी वैधता पर सवाल उठाए गए।

यह शिकायत आशुतोष महराज ने प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में दी थी।

यह शिकायत आशुतोष महराज ने प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में दी थी।

दोनों पीड़ित बच्चे आशुतोष महाराज तक कैसे पहुंचे? आशुतोष महाराज ने आरोप लगाया कि जब प्रशासन ने उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की, तो उन्होंने 8 फरवरी को कोर्ट में वाद दायर किया था।

उन्होंने बताया था कि मेरे ट्रस्ट की ओर से माघ मेले में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुक्ति के लिए माता शाकुंभरी देवी का महायज्ञ किया जा रहा था। मेरे शिविर में 2 शिष्य आए, जो नाबालिग थे। उन्होंने मेरे सामने कई खुलासे किए।

उन्होंने मुझसे शिष्य बनने की इच्छा चाही। कहा कि हम असुरक्षित हैं। मुझसे पुलिस संरक्षण और न्यायिक सहायता मांगी। बच्चों ने मुझे बताया कि अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगियों ने हमें अपने साथ रखा। कई बार कुकर्म किया। यह सब एक साल तक किया गया।

महाकुंभ- 2025 के दौरान मेला क्षेत्र में भी कुकर्म किया गया। माघ मेला- 2026 के दौरान दोनों बच्चों से फिर से कुकर्म किया गया। अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य यह कहकर बच्चों पर दबाव बनाते थे कि यह गुरु सेवा है। इससे आशीर्वाद मिलेगा। बच्चों ने यह भी बताया कि उन्हें अविमुक्तेश्वरानंद के साथ भी सोने को कहा जाता है।

आशुतोष महाराज ने कहां-कहां की थी शिकायत आशुतोष महाराज ने बताया कि उन्होंने 24 जनवरी को झूंसी थाने में शिकायत दी थी। 25 जनवरी को पुलिस कमिश्नर और पुलिस अधीक्षक माघ मेला को ई-मेल से शिकायत की थी। 27 जनवरी को डाक से पुलिस अधीक्षक माघ मेला को शिकायत भेजी। लेकिन, कोई FIR दर्ज नहीं हुई। इसके बाद मुझे धमकियां मिलने लगीं। तब कोर्ट की शरण ली।

जानिए आशुतोष महाराज कौन हैं? आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज का जन्म शामली के कांधला कस्बे के एक पंडित परिवार में हुआ था। इनके पिता राजेंद्र पांडे दिल्ली रोड पर चलने वाली प्राइवेट बसों में कंडक्टरी करते थे।

आशुतोष महाराज कांधला के प्राचीन शाकुंभरी सिद्धपीठ मंदिर की कमेटी से जुड़े। वर्तमान में वह इसके प्रबंधक भी हैं। इन्हीं के परिवार के चाचा प्रदीप पांडे मंदिर में पुजारी हैं। 2022 में उन्होंने जगतगुरु रामभद्राचार्य से दीक्षा ली थी। इसके बाद से वह संन्यासी जीवन जी रहे हैं।

जानिए कब से शुरू हुआ विवाद

18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। तभी पुलिस ने उनकी पालकी रोक दी थी। पुलिस ने उनसे पैदल संगम जाने को कहा था। लेकिन, शंकराचार्य के शिष्य नहीं माने थे। वे लोग पालकी लेकर आगे बढ़ने लगे थे।

इस पर शंकराचार्य के शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई थी। पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया था। पुलिस ने एक साधु को चौकी में भी पीटा भी था। इससे शंकराचार्य नाराज हो गए थे और शिष्यों को छुड़वाने पर अड़ गए थे।

तब अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, हाथ जोड़े थे, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य के कई और समर्थकों को हिरासत में ले लिया था। शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम से 1 किमी दूर ले जाया गया था। इस दौरान पालकी का क्षत्रप भी टूट गया था। शंकराचार्य स्नान भी नहीं कर पाए थे। इसके बाद वह धरने पर बैठ गए थे। इसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं होने पर शंकराचार्य 28 जनवरी को वाराणसी लौट आए थे।

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प्रयागराजकुछ ही क्षण पहले

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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के मामले FIR दर्ज कर ली गई है। प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज FIR में शंकराचार्य के शिष्य मुकुंदानंद का भी नाम है। झूंसी थाना प्रभारी महेश मिश्रा के मुताबिक, 2-3 अज्ञात के खिलाफ भी पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

दरअसल, प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट ने शनिवार को FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने कोर्ट में 2 बच्चों को पेश करके गंभीर आरोप लगाए थे। कोर्ट में कैमरे के सामने बच्चों के बयान दर्ज हुए थे।

स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया की कोर्ट ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नर की जांच रिपोर्ट के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात पर केस दर्ज करने के आदेश जारी किए थे। इससे पहले अदालत ने 13 फरवरी को अपना आदेश रिजर्व रखा था।

शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने बताया-

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हम दर-दर भटक रहे थे। पुलिस के पास जा रहे थे। हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। इसलिए न्याय के मंदिर में आए। आज लगा कि न्याय अभी जिंदा है। न्यायालय ने हमें आज न्याय दिया। मैं अब साफ-साफ कहना चाहता हूं कि शिष्यों के साथ यौन शोषण और समलैंगिक अपराध किया गया। इसकी पुष्टि न्यायालय ने कर दी है।

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अदालत ने माना- शंकराचार्य और उनके शिष्य पर गंभीर आरोप

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया। कहा, हर मामले में FIR दर्ज करना अनिवार्य नहीं होता। मजिस्ट्रेट को अपने विवेक से तय करना होता है कि FIR का निर्देश दिया जाए या शिकायत के रूप में आगे बढ़ाया जाए। यदि मामले में पुलिस जांच जरूरी हो, तो FIR दर्ज कर जांच करना उचित होता है।

कोर्ट ने कहा, आरोप गंभीर और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं और पॉक्सो अधिनियम लागू होता है। साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस जांच आवश्यक है। केवल निजी शिकायत के रूप में मामला आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।

जज ने आदेश दिया कि संबंधित थाना प्रभारी तत्काल FIR दर्ज करें। कानून के अनुसार स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करें। पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों का पालन किया जाए। पीड़ितों की पहचान और गरिमा की रक्षा की जाए। जांच रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए।

शंकराचार्य बोले- रामभद्राचार्य ने अपने चेले से मुकदमा कराया

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। कहा- झूठा केस सच्चा थोड़ी हो जाएगा।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। कहा- झूठा केस सच्चा थोड़ी हो जाएगा।

कोर्ट के फैसले के बाद शंकराचार्य ने कहा- यौन शोषण का केस फर्जी साबित होगा। ये बनाया हुआ मामला है। वह (आशुतोष महाराज) रामभद्राचार्य का एक चेला है। हिस्ट्रीशीटर है। उसने पहले भी लोगों के ऊपर झूठे केस किए हैं। वह लोगों को धमकाता है, धन उगाही करता है। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा-

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रामभद्राचार्य से हम लोगों का वाकयुद्ध चलता रहता है। यह तो सभी लोग जानते ही हैं। उन्होंने हमारे ऊपर अपने चेले को आगे करके फर्जी मुकदमा करवाया है। वो चाहते हैं कि सरकार के खिलाफ गोमाता की रक्षा की आवाज हम नहीं उठाएं। इसलिए हमारे ऊपर यह सब हो रहा है।

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शंकराचार्य ने कहा- न्यायालय का एक प्रोसिजर है, उसका हम सहयोग करेंगे। इसके बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। हमको पछतावा तब होता, जब हम कुछ इस तरह के होते। जब हम ऐसे हैं ही नहीं, तब क्या? बनावटी केस तो बनावटी ही रहने वाला है। इसलिए हम चाहते हैं कि जल्दी से जल्दी जांच हो जाए। पुलिस सरकार के अंडर में ही काम करती है।

सीएम योगी सदन में खड़े होकर जब हमारे खिलाफ बोलते हैं, तो इसलिए नहीं बोलते कि उनको बोलना है। वह पुलिस को मैसेज देते हैं कि ये करना है। उन्होंने शीश महल के आरोपों पर कहा- यह खुला मठ है। इसमें 100-200 लोग रहते है। हर कोई आता-जाता रहता है।

आशुतोष ब्रह्मचारी का डिप्टी सीएम और अखिलेश यादव को चैलेंज

आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा- अखिलेश यादव और डिप्टी सीएम से कहना चाहता हूं कि मेरे साथ पैदल यात्रा में चलिए। विद्यामठ, बनारस जा रहा हूं, जहां शंकराचार्य रंगरलियां मनाते हैं। पंचम तल दिखाना चाहता हूं, जहां पर इनका शीश महल है। वहां इनकी सखियां रहती हैं, जिनका नाम भी पता है।

आज से मेरी पैदल यात्रा चलेगी। हम न्याय के लिए दर-दर लोगों के बीच में जाएंगे। लोगों को ऐसे पद पर नहीं बैठना चाहिए। ये लोग जेल के अंदर होने चाहिए। इसलिए हम लोग आज से यात्रा शुरू कर रहे हैं।

8 फरवरी को कोर्ट में की थी शिकायत

जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगाया है। उन्होंने 8 फरवरी को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में वाद (शिकायत) दायर की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि गुरुकुल की आड़ में वह बाल उत्पीड़न करते हैं।

शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज शनिवार को वकीलों के साथ कोर्ट पहुंचे।

शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज शनिवार को वकीलों के साथ कोर्ट पहुंचे।

कोर्ट के नोटिस पर अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने 10 फरवरी को जवाब दाखिल किया था। तब शंकराचार्य ने दैनिक भास्कर से कहा था कि हमने कोर्ट में सारे साक्ष्य दिए हैं। हमें न्यायपालिका पर भरोसा है। जबसे हमने गोमाता की रक्षा के लिए आवाज उठानी शुरू की, तब से सरकार और कुछ लोगों को यह पसंद नहीं आ रहा था।

13 फरवरी: आशुतोष महाराज कोर्ट से रोते हुए बाहर निकले

यह तस्वीर 13 फरवरी की है, जब आशुतोष महाराज कोर्ट रूम से रोते और आंसू पोंछते हुए बाहर निकले थे।

यह तस्वीर 13 फरवरी की है, जब आशुतोष महाराज कोर्ट रूम से रोते और आंसू पोंछते हुए बाहर निकले थे।

13 फरवरी को जज विनोद कुमार चौरसिया ने मामले की सुनवाई की थी। शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ने मामले की वकालत खुद की थी। उन्होंने जज से कहा था कि 2 शिष्यों ने मेरे पास आकर अपने साथ हुए यौन शोषण की कहानी सुनाई। शंकराचार्य के खिलाफ FIR दर्ज करके जांच करनी चाहिए। मुझे न्यायपालिका से ही इंसाफ की उम्मीद है।

शंकराचार्य के वकील ने इसका विरोध किया था। कहा था कि ये सिर्फ आरोप हैं। हमें केस की तैयारी के लिए थोड़ा वक्त चाहिए। इस पर आशुतोष महाराज ने जज से कहा था- मेरी कार को बम से उड़ाकर मुझे मारने की धमकी दी जा रही। मेरी हत्या हो सकती है। आपको यौन शोषण का शिकार हुए बच्चों के बयान सुनने चाहिए।

ये शंकराचार्य के शिष्य मुकुंदानंद हैं। कोर्ट ने इन पर भी एफआईआर करने के आदेश दिए हैं।

ये शंकराचार्य के शिष्य मुकुंदानंद हैं। कोर्ट ने इन पर भी एफआईआर करने के आदेश दिए हैं।

जज ने कोर्ट रूम खाली कराया, बच्चों के बयान सुने इसके बाद जज ने कोर्ट रूम को खाली कराने का आदेश दिया था। कमरे में सिर्फ दोनों पक्षों के वकील ही बचे थे। इसके बाद बच्चों को कोर्ट रूम में लाया गया। बच्चों ने जज के सामने अपने साथ हुए शोषण की कहानी सुनाई थी। ये सारे बयान बंद कोर्ट रूम के अंदर हुए थे। इन बयानों को कैमरे में भी रिकॉर्ड किया गया था।

जज ने पूछा था- आप बच्चों के कौन हैं? स्पेशल जज विनोद कुमार चौरसिया ने आशुतोष महाराज से कुछ सवाल भी पूछे थे। कहा था कि आप इन पीड़ितों के क्या हैं? अभिभावक किन आधार पर बने? तब आशुतोष महाराज ने कहा था कि गुरु परंपरा के मुताबिक मैं न्याय के लिए आया हूं। पीड़ितों को कहीं न्याय नहीं मिला, तो इन बच्चों ने मुझसे संपर्क किया।

इसके बाद जज ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शंकराचार्य के खिलाफ FIR होगी या केस डिसमिस होगा, इसके लिए 21 फरवरी यानी आज की तारीख तय की थी।

आशुतोष महाराज के साथ 2 नाबालिग लड़के थे, उनके चेहरे ढके थे। कोर्ट रूम के अंदर इनके भी बयान हुए।

आशुतोष महाराज के साथ 2 नाबालिग लड़के थे, उनके चेहरे ढके थे। कोर्ट रूम के अंदर इनके भी बयान हुए।

शंकराचार्य और रामभद्राचार्य माघ मेले में हुए विवाद के बाद आए आमने-सामने चित्रकूट की श्री तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही मस्जिद ईदगाह के मुख्यवादी और पक्षकार भी हैं। माघ मेले में हुए विवाद के बाद रामभद्राचार्य और अविमुक्तेश्वरानंद आमने-सामने आ गए थे।

आशुतोष महाराज ने पहले पुलिस कमिश्नर से शिकायत की, फिर कोर्ट गए 24 जनवरी यानी मौनी अमावस्या के 6 दिन बाद आशुतोष महाराज ने प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर से अविमुक्तेश्वरानंद की 2 शिकायतें की थीं।

पहली शिकायत: अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर और गुरुकुल में नाबालिग बच्चों को रखा जाता है। उनसे निजी सेवा, भीड़ जुटाने, कार्यक्रमों और पालकी उठवाने जैसे काम कराए जाते हैं। बच्चों का यौन शोषण होने की भी आशंका है।

माघ मेले जैसे बड़े आयोजनों में भी बच्चों से काम कराया गया। यह बाल अधिकार और श्रम कानूनों का उल्लंघन है। शिविर में अवैध हथियार होने की भी आशंका है। आय से अधिक संपत्ति और कई बैंक खातों की जांच की जानी चाहिए। मुकुंदानंद नाम के व्यक्ति की भूमिका की जांच कराई जाए।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही मस्जिद ईदगाह के मुख्य वादी, पक्षकार आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने पुलिस-प्रशासन को भी लेटर लिखकर कार्रवाई की मांग की थी।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही मस्जिद ईदगाह के मुख्य वादी, पक्षकार आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने पुलिस-प्रशासन को भी लेटर लिखकर कार्रवाई की मांग की थी।

दूसरी शिकायत: आशुतोष महराज ने अविमुक्तेश्वरानंद पर फर्जी लेटरपैड और दस्तावेज बनाने का आरोप लगाया। कहा कि माघ मेला क्षेत्र में अविमुक्तेश्वरानंद खुद को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य बता रहे। वह “ज्योतिष्पीठ/श्री शंकराचार्य शिविर” के नाम से लेटरपैड और दस्तावेज बनवाकर अफसरों को पत्र भेज रहे।

ये लेटरपैड-पत्र फर्जी और भ्रामक हैं। इनसे प्रशासन और आम लोगों को गुमराह किया जा रहा। इन लेटरपैड पर 24 जनवरी, 2026 (माघ शुक्ल पंचमी) की तारीख दर्ज है। इसी तारीख का इस्तेमाल कर “श्री शंकराचार्य शिविर” के नाम से पत्र जारी किए गए। इनकी वैधता पर सवाल उठाए गए।

यह शिकायत आशुतोष महराज ने प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में दी थी।

यह शिकायत आशुतोष महराज ने प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में दी थी।

दोनों पीड़ित बच्चे आशुतोष महाराज तक कैसे पहुंचे? आशुतोष महाराज ने आरोप लगाया कि जब प्रशासन ने उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की, तो उन्होंने 8 फरवरी को कोर्ट में वाद दायर किया था।

उन्होंने बताया था कि मेरे ट्रस्ट की ओर से माघ मेले में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुक्ति के लिए माता शाकुंभरी देवी का महायज्ञ किया जा रहा था। मेरे शिविर में 2 शिष्य आए, जो नाबालिग थे। उन्होंने मेरे सामने कई खुलासे किए।

उन्होंने मुझसे शिष्य बनने की इच्छा चाही। कहा कि हम असुरक्षित हैं। मुझसे पुलिस संरक्षण और न्यायिक सहायता मांगी। बच्चों ने मुझे बताया कि अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगियों ने हमें अपने साथ रखा। कई बार कुकर्म किया। यह सब एक साल तक किया गया।

महाकुंभ- 2025 के दौरान मेला क्षेत्र में भी कुकर्म किया गया। माघ मेला- 2026 के दौरान दोनों बच्चों से फिर से कुकर्म किया गया। अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य यह कहकर बच्चों पर दबाव बनाते थे कि यह गुरु सेवा है। इससे आशीर्वाद मिलेगा। बच्चों ने यह भी बताया कि उन्हें अविमुक्तेश्वरानंद के साथ भी सोने को कहा जाता है।

आशुतोष महाराज ने कहां-कहां की थी शिकायत आशुतोष महाराज ने बताया कि उन्होंने 24 जनवरी को झूंसी थाने में शिकायत दी थी। 25 जनवरी को पुलिस कमिश्नर और पुलिस अधीक्षक माघ मेला को ई-मेल से शिकायत की थी। 27 जनवरी को डाक से पुलिस अधीक्षक माघ मेला को शिकायत भेजी। लेकिन, कोई FIR दर्ज नहीं हुई। इसके बाद मुझे धमकियां मिलने लगीं। तब कोर्ट की शरण ली।

जानिए आशुतोष महाराज कौन हैं? आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज का जन्म शामली के कांधला कस्बे के एक पंडित परिवार में हुआ था। इनके पिता राजेंद्र पांडे दिल्ली रोड पर चलने वाली प्राइवेट बसों में कंडक्टरी करते थे।

आशुतोष महाराज कांधला के प्राचीन शाकुंभरी सिद्धपीठ मंदिर की कमेटी से जुड़े। वर्तमान में वह इसके प्रबंधक भी हैं। इन्हीं के परिवार के चाचा प्रदीप पांडे मंदिर में पुजारी हैं। 2022 में उन्होंने जगतगुरु रामभद्राचार्य से दीक्षा ली थी। इसके बाद से वह संन्यासी जीवन जी रहे हैं।

जानिए कब से शुरू हुआ विवाद

18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। तभी पुलिस ने उनकी पालकी रोक दी थी। पुलिस ने उनसे पैदल संगम जाने को कहा था। लेकिन, शंकराचार्य के शिष्य नहीं माने थे। वे लोग पालकी लेकर आगे बढ़ने लगे थे।

इस पर शंकराचार्य के शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई थी। पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया था। पुलिस ने एक साधु को चौकी में भी पीटा भी था। इससे शंकराचार्य नाराज हो गए थे और शिष्यों को छुड़वाने पर अड़ गए थे।

तब अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, हाथ जोड़े थे, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य के कई और समर्थकों को हिरासत में ले लिया था। शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम से 1 किमी दूर ले जाया गया था। इस दौरान पालकी का क्षत्रप भी टूट गया था। शंकराचार्य स्नान भी नहीं कर पाए थे। इसके बाद वह धरने पर बैठ गए थे। इसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं होने पर शंकराचार्य 28 जनवरी को वाराणसी लौट आए थे।

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