Thursday, 21 May 2026 | 04:28 PM

Trending :

EXCLUSIVE

uttar Pradesh Ghaziabad harish rana case Parents file petition Euthanasia

uttar Pradesh Ghaziabad harish rana case Parents file petition Euthanasia

गाजियाबाद के राज एंपायर सोसाइटी की 13वीं मंजिल। साधारण से फ्लैट के कमरे में मेडिकल बेड पर हरीश (31) बेसुध लेटा है। पेट में पैग सेट पाइप और नाक में ऑक्सीजन पाइप लगा है। घर में परिजन, जानने वाले, अनजान, सरकारी अधिकारी व मीडियावालों का तांता लगा है।

.

पिता अशोक राणा भरे गले से बता रहे हैं कि हमारी साढ़े बारह साल की सेवाओं का हिसाब-किताब अब पूरा हो रहा है, इसलिए यह फैसला आ गया।

पिता बोले- हम जानते हैं उसे , आखिरी बार बिस्तर से क्यों उठा रहे हैं… उसे भगवान की गोद में छोड़ रहे हैं। हरीश की मां ने एक दिन कहा कि अब तो हम भी बूढ़े हो रहे हैं, इसकी देखभाल कौन करेगा? राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से गुहार लगानी चाहिए।

अशोक राणा ने कहा- कोई भी माता-पिता अपने बेटे के लिए ऐसा नहीं चाहेंगे, लेकिन मजबूरी में हमें यह फैसला लेना पड़ा।

ब्रह्मकुमारी परिवार से जुड़ा राणा परिवार

ब्रह्मकुमारी परिवार से जुड़े राणा परिवार ने अपना दर्द दीदी से साझा किया तो उन्होंने एक वकील भेजा। राणा कहते हैं, ‘हाईकोर्ट ने तो हमारी याचिका खारिज ही कर दी थी, पर सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी देकर हरीश पर बड़ा उपकार किया, हमसे उसकी पीड़ा देखी नहीं जाती, बेबसी ये है कि वह बता भी नहीं पाता कि उसे कहां-क्या तकलीफ है।

हमारा तो बच्चा है, सेवा कर रहे हैं और जब तक सामर्थ्य है करते ही रहेंगे। कोर्ट के फैसले के बाद एम्स ने सभी तैयारी कर ली है। बस हमें तय करना है कि उसे आखिरी बार इस बिस्तर से उठाकर कब एम्स ले चलें। हम तो इसे पैसिव यूथेनेशिया भी नहीं बोलना चाहते। हम इसे भगवान की गोद में छोड़ रहे है। हम उसे ऐसे अनुभवी चिकित्सकों के पास छोड़ रहे हैं जो उसे घातक इंजेक्शन नहीं देंगे बल्कि प्राकृतिक रूप से जीवन छोड़ने का रास्ता सुगम करेंगे।

एम्स में अनुभवी डॉक्टरों की निगरानी में सिर्फ फूड पाइप हटाएंगे। हम उसे पानी पिलाते रहेंगे जैसे कोई व्रत करता है। और जब हरीश प्राण त्याग देगा तो बहुत गौरव व सम्मान से घर लाएंगे और अंतिम विदाई देंगे।

ये गाजियाबाद में राज एम्पायर सोसायटी है, यहां फ्लैट A1314 में हरीश राणा के मां-पिता रहते हैं।

ये गाजियाबाद में राज एम्पायर सोसायटी है, यहां फ्लैट A1314 में हरीश राणा के मां-पिता रहते हैं।

कौन मां-बाप अपने बच्चे को इस स्थिति में ले जाना चाहेगा

मां चुप हैं, एकदम भावशून्य चेहरा, न खुशी कि बच्चे को मुक्ति मिल रही है और न गम कि आखिरी घड़ी आ पहुंची। हालांकि कुछ बोलते ही फफक पड़ती हैं… कौन मां-बाप अपने बच्चे को इस स्थिति में ले जाना चाहेगा। जिसे जन्म दिया, पाल-पोसकर बड़ा किया। फिर से अबोध की तरह उसकी देखभाल करनी पड़ी तो उसमें मां को कष्ट कैसा।

दुख तो बस इस बात का रहा कि इसने तो अपनी पीड़ा भी नहीं बताई। सुबह-शाम जब उसकी मालिश करती तो मैं उसे घर के किस्से सुनाती आज क्या-क्या हुआ? कई बार घंटों तक बस इंतजार करती कि एक बार बस पलक झपके ताकि मुझे लगे कि उसने सब सुन लिया। कभी उबासी लेता, कभी छींक आती या आंखों के आसपास की त्वचा फड़कती तो हमें उसी से उसके जिंदा होने का सुकून होता था।

हरीश अपनी मां निर्मला राणा के साथ। परिवार ने बताया- बेटे के इलाज के लिए अपनी संपत्ति तक बेच दी, लेकिन अब आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। बेटे की तकलीफ भी नहीं देखी जाती।

हरीश अपनी मां निर्मला राणा के साथ। परिवार ने बताया- बेटे के इलाज के लिए अपनी संपत्ति तक बेच दी, लेकिन अब आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। बेटे की तकलीफ भी नहीं देखी जाती।

2013 में रक्षा बंधन के दिन चंडीगढ़ में उसके चार मंजिल से गिरने की खबर मिली थी। रात को ही हम पहुंचे तो इसे अचेत पाया। पहले 10 दिन वहीं पीजीआई में रहा, फिर एम्स दिल्ली में एक महीने वेंटिलेटर पर रहा। अगले कुछ महीने कभी अपोलो, कभी मेदांता और कई अस्पतालों में रहा। डॉक्टरों ने बताया कि वह लाइलाज स्थिति में पहुंच गया, सिर्फ दुआ और सेवा ही बची है। हम घर ले आए।

अब पढ़िए इच्छामृत्यु के लिए दूसरी संघर्ष की कहानियां

1. कर्नाटकः 30 साल से गरिमापूर्ण मृत्यु की जंग लड़ रही हैं कैंसर पीड़ित करिबासम्मा

कनार्टक के दावनगरे की 86 वर्षीय पूर्व शिक्षिका एचबी करिबासम्मा 3 दशकों से गरिमापूर्ण मृत्यु के हक के लिए संघर्षरत हैं। 1996 में स्लिप डिस्क की असहनीय पीड़ा के बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमिला नेसरगी के सहयोग से 1998 में उन्होंने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस मुद्दे पर कानूनी मोड़ दिया।

कैंसर से जूझ रही करिबासम्मा आश्रय ओल्ड एज होम में रहती हैं। 2025 में कर्नाटक सरकार ने पैसिव यूथनेशिया पर सर्कुलर जारी किया, लेकिन स्पष्ट गाइडलाइंस नहीं है। उनकी मांग है कि सरकारी अस्पतालों में विशेष वार्ड और पारदर्शी प्रक्रिया तय हो ताकि करीब मरीजों को राहत मिले। करिबासम्मा का मानना है कि सम्मानजनक मौत न केवल मरीज, बल्कि उसकी सेवा करने वालों की गरिमा के लिए भी जरूरी है।

2. मध्य प्रदेशः 5 साल से डॉक्टर बेटा कोमा में, माता-पिता कर रहे सेवा, 20 लाख उधार हुआ

मध्य प्रदेश के बड़वानी के होम्योपैथिक डॉक्टर हरीश गोले पिछले 5 वर्षों से कोमा में हैं। 2 मार्च 2021 को क्लिनिक जाते समय सड़क दुर्घटना में उनके सिर और रीढ़ में गंभीर चोटें आई। लंबा इलाज और सर्जरी के बाद भी वे होश में नहीं आ सके। तब से 46 वर्षीय हरीश घर के बिस्तर पर हैं। उनके बुजुर्ग पिता सोहनलाल और मां बीना बाई ही उनकी देखभाल कर रहे हैं।

ट्यूब के जरिए दूध, जूस और दवाएं दी जाती हैं। पिता रोज उन्हें करवट दिलाते हैं, मालिश करते हैं और शरीर की सफाई करते हैं। इलाज और घर के खर्च ने परिवार को आर्थिक संकट में डाल दिया है। करीब 20 लाख रु. उधार हो चुके हैं।

3. महाराष्ट्रः ब्रेन डेड श्रेया का चेहरा 4 साल से ऐसे ही, पिता को उम्मीद अब भी ठीक हो जाएगी बेटी

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की 28 वर्षीय श्रेया सॉफ्टवेयर डेवलपर बनने का सपना देखती थीं। श्रेया ने पुणे के डीवाई पाटील कॉलेज से एमसीए किया और फाइनल में टॉप किया था। 3 फरवरी 2022 की रात घर लौटते समय हुई दुर्घटना ने उनकी जिंदगी बदल दी। उनके मस्तिष्क को चोट लगी। डॉक्टरों के अनुसार यह सामान्य स्थिति में लौट पाएंगी या नहीं, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। पिछले 4 वर्षों से श्रेया बिस्तर पर हैं। 2022 में खेन डेड घोषित किया था। उनका चेहरा हमेशा ऐसा ही रहता है। माता-पिता को उम्मीद है कि बेटी अब भी ठीक हो सकती है इसलिए उनहोंने इच्छा मृत्यु की मांग नहीं की।

4. केरलः दुर्लभ बीमारी से जूझते 2 बच्चों के परिवार का दर्द केरल के कोट्टायम जिले के स्मिता एंटनी और मनु जोसेफ संकट से जूझ रहे हैं। उनके 2 बच्चों को सॉल्ट-वेस्टिंग कंजेनिटल एड्रिनल हाइपरप्लासिया नाम की गंभीर बीमारी है, जिसमें लगातार दवाएं और निगरानी जरूरी होती है। एक बच्चे में गंभीर ऑटिज्म भी है, जिससे देखभाल और कठिन हो गई। बच्चों की सेवा के लिए दोनों को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी।

आमदनी बंद हो गई और इलाज का खर्च बढ़ता गया। परिवार ने संपत्ति बेची, घर गिरवी रखा और उधार लिया। 2024 में इस दंपती ने सुप्रीम कोर्ट से पूरे परिवार के लिए मसीं किलिंग की अनुमति मांगने की बात कही। फिर प्रशासन सक्रिय हुआ और कुछ आर्थिक मदद भी मिली।

——————- ये खबर भी पढ़ें सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार इच्छामृत्यु की इजाजत दी:13 साल से कोमा में है बेटा, माता-पिता ने लगाई थी गुहार

13 साल से बिस्तर पर पड़े होने की वजह से हरीश के शरीर पर बेडसोर्स यानी गहरे घाव बन गए हैं। -फाइल फोटो

13 साल से बिस्तर पर पड़े होने की वजह से हरीश के शरीर पर बेडसोर्स यानी गहरे घाव बन गए हैं। -फाइल फोटो

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इच्छामृत्यु मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने 13 साल से कोमा में रह रहे 31 साल के युवक हरीश राणा को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की मंजूरी दे दी। गाजियाबाद के रहने वाले हरीश लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं। पढ़िए पूरी खबर

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
गर्मी में बदला इंदौर जू का मिजाज:शेर-भालू के लिए कुलर, पक्षियों के लिए स्प्रिंकलर से पानी का छिड़काव; डाइट में दे रहे रसीले फल

March 20, 2026/
5:38 am

इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में गर्मी के साथ ही वन्य प्राणियों की देखभाल भी बढ़ गई है। वन्य...

तस्वीर का विवरण

February 27, 2026/
11:37 pm

मैडम अरोड़ा के फिटनेस का हर कोई दीवाना है। वो सिर्फ खुद एक एक्टिव लाइफस्टाइल फॉलो ना करती हैं, बल्कि...

39वें नेशनल गेम्स की तैयारी:मंत्री रेखा आर्या का अल्टीमेटम- 24 घंटे में दें नेशनल गेम्स का एक्शन प्लान, इस बार हमें ज्यादा मेडल चाहिए

April 21, 2026/
6:18 pm

नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में होने वाले आगामी 39वें नेशनल गेम्स में उत्तराखंड का पूरा फोकस पदकों की संख्या में भारी इजाफा...

Hrithik Roshans Kabil 2 Shooting Greenlit

February 21, 2026/
1:57 pm

23 मिनट पहले कॉपी लिंक ‘काबिल 2′ बनाएंगे डायरेक्टर संजय गुप्ता, रोशन परिवार से ग्रीन सिग्नल मिलने का इंतजार। बॉलीवुड...

वॉशिंगटन हिल्टन होटल में 45 साल बाद हिस्ट्री रिपीट:हीरोइन को इम्प्रेस करने के लिए शख्स ने राष्ट्रपति रीगन पर चलाई थी गोली

April 27, 2026/
10:12 am

अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में शनिवार रात सालाना व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर के दौरान फायरिंग हो गई। इस कार्यक्रम...

राहुल गांधी की यात्रा से पहले कांग्रेस में कंट्रोवर्सी:3 विधायकों ने किया किनारा, सेतिया की पोस्ट- BJP में मलाई खाके दाढ़ी बढ़ालो

May 8, 2026/
11:46 am

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस लीडर राहुल गांधी आज गुरुग्राम के दौरे पर रहेंगे। वे यहां कांग्रेस नेता और...

हेल्थ & फिटनेस

राजनीति

uttar Pradesh Ghaziabad harish rana case Parents file petition Euthanasia

uttar Pradesh Ghaziabad harish rana case Parents file petition Euthanasia

गाजियाबाद के राज एंपायर सोसाइटी की 13वीं मंजिल। साधारण से फ्लैट के कमरे में मेडिकल बेड पर हरीश (31) बेसुध लेटा है। पेट में पैग सेट पाइप और नाक में ऑक्सीजन पाइप लगा है। घर में परिजन, जानने वाले, अनजान, सरकारी अधिकारी व मीडियावालों का तांता लगा है।

.

पिता अशोक राणा भरे गले से बता रहे हैं कि हमारी साढ़े बारह साल की सेवाओं का हिसाब-किताब अब पूरा हो रहा है, इसलिए यह फैसला आ गया।

पिता बोले- हम जानते हैं उसे , आखिरी बार बिस्तर से क्यों उठा रहे हैं… उसे भगवान की गोद में छोड़ रहे हैं। हरीश की मां ने एक दिन कहा कि अब तो हम भी बूढ़े हो रहे हैं, इसकी देखभाल कौन करेगा? राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से गुहार लगानी चाहिए।

अशोक राणा ने कहा- कोई भी माता-पिता अपने बेटे के लिए ऐसा नहीं चाहेंगे, लेकिन मजबूरी में हमें यह फैसला लेना पड़ा।

ब्रह्मकुमारी परिवार से जुड़ा राणा परिवार

ब्रह्मकुमारी परिवार से जुड़े राणा परिवार ने अपना दर्द दीदी से साझा किया तो उन्होंने एक वकील भेजा। राणा कहते हैं, ‘हाईकोर्ट ने तो हमारी याचिका खारिज ही कर दी थी, पर सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी देकर हरीश पर बड़ा उपकार किया, हमसे उसकी पीड़ा देखी नहीं जाती, बेबसी ये है कि वह बता भी नहीं पाता कि उसे कहां-क्या तकलीफ है।

हमारा तो बच्चा है, सेवा कर रहे हैं और जब तक सामर्थ्य है करते ही रहेंगे। कोर्ट के फैसले के बाद एम्स ने सभी तैयारी कर ली है। बस हमें तय करना है कि उसे आखिरी बार इस बिस्तर से उठाकर कब एम्स ले चलें। हम तो इसे पैसिव यूथेनेशिया भी नहीं बोलना चाहते। हम इसे भगवान की गोद में छोड़ रहे है। हम उसे ऐसे अनुभवी चिकित्सकों के पास छोड़ रहे हैं जो उसे घातक इंजेक्शन नहीं देंगे बल्कि प्राकृतिक रूप से जीवन छोड़ने का रास्ता सुगम करेंगे।

एम्स में अनुभवी डॉक्टरों की निगरानी में सिर्फ फूड पाइप हटाएंगे। हम उसे पानी पिलाते रहेंगे जैसे कोई व्रत करता है। और जब हरीश प्राण त्याग देगा तो बहुत गौरव व सम्मान से घर लाएंगे और अंतिम विदाई देंगे।

ये गाजियाबाद में राज एम्पायर सोसायटी है, यहां फ्लैट A1314 में हरीश राणा के मां-पिता रहते हैं।

ये गाजियाबाद में राज एम्पायर सोसायटी है, यहां फ्लैट A1314 में हरीश राणा के मां-पिता रहते हैं।

कौन मां-बाप अपने बच्चे को इस स्थिति में ले जाना चाहेगा

मां चुप हैं, एकदम भावशून्य चेहरा, न खुशी कि बच्चे को मुक्ति मिल रही है और न गम कि आखिरी घड़ी आ पहुंची। हालांकि कुछ बोलते ही फफक पड़ती हैं… कौन मां-बाप अपने बच्चे को इस स्थिति में ले जाना चाहेगा। जिसे जन्म दिया, पाल-पोसकर बड़ा किया। फिर से अबोध की तरह उसकी देखभाल करनी पड़ी तो उसमें मां को कष्ट कैसा।

दुख तो बस इस बात का रहा कि इसने तो अपनी पीड़ा भी नहीं बताई। सुबह-शाम जब उसकी मालिश करती तो मैं उसे घर के किस्से सुनाती आज क्या-क्या हुआ? कई बार घंटों तक बस इंतजार करती कि एक बार बस पलक झपके ताकि मुझे लगे कि उसने सब सुन लिया। कभी उबासी लेता, कभी छींक आती या आंखों के आसपास की त्वचा फड़कती तो हमें उसी से उसके जिंदा होने का सुकून होता था।

हरीश अपनी मां निर्मला राणा के साथ। परिवार ने बताया- बेटे के इलाज के लिए अपनी संपत्ति तक बेच दी, लेकिन अब आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। बेटे की तकलीफ भी नहीं देखी जाती।

हरीश अपनी मां निर्मला राणा के साथ। परिवार ने बताया- बेटे के इलाज के लिए अपनी संपत्ति तक बेच दी, लेकिन अब आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। बेटे की तकलीफ भी नहीं देखी जाती।

2013 में रक्षा बंधन के दिन चंडीगढ़ में उसके चार मंजिल से गिरने की खबर मिली थी। रात को ही हम पहुंचे तो इसे अचेत पाया। पहले 10 दिन वहीं पीजीआई में रहा, फिर एम्स दिल्ली में एक महीने वेंटिलेटर पर रहा। अगले कुछ महीने कभी अपोलो, कभी मेदांता और कई अस्पतालों में रहा। डॉक्टरों ने बताया कि वह लाइलाज स्थिति में पहुंच गया, सिर्फ दुआ और सेवा ही बची है। हम घर ले आए।

अब पढ़िए इच्छामृत्यु के लिए दूसरी संघर्ष की कहानियां

1. कर्नाटकः 30 साल से गरिमापूर्ण मृत्यु की जंग लड़ रही हैं कैंसर पीड़ित करिबासम्मा

कनार्टक के दावनगरे की 86 वर्षीय पूर्व शिक्षिका एचबी करिबासम्मा 3 दशकों से गरिमापूर्ण मृत्यु के हक के लिए संघर्षरत हैं। 1996 में स्लिप डिस्क की असहनीय पीड़ा के बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमिला नेसरगी के सहयोग से 1998 में उन्होंने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस मुद्दे पर कानूनी मोड़ दिया।

कैंसर से जूझ रही करिबासम्मा आश्रय ओल्ड एज होम में रहती हैं। 2025 में कर्नाटक सरकार ने पैसिव यूथनेशिया पर सर्कुलर जारी किया, लेकिन स्पष्ट गाइडलाइंस नहीं है। उनकी मांग है कि सरकारी अस्पतालों में विशेष वार्ड और पारदर्शी प्रक्रिया तय हो ताकि करीब मरीजों को राहत मिले। करिबासम्मा का मानना है कि सम्मानजनक मौत न केवल मरीज, बल्कि उसकी सेवा करने वालों की गरिमा के लिए भी जरूरी है।

2. मध्य प्रदेशः 5 साल से डॉक्टर बेटा कोमा में, माता-पिता कर रहे सेवा, 20 लाख उधार हुआ

मध्य प्रदेश के बड़वानी के होम्योपैथिक डॉक्टर हरीश गोले पिछले 5 वर्षों से कोमा में हैं। 2 मार्च 2021 को क्लिनिक जाते समय सड़क दुर्घटना में उनके सिर और रीढ़ में गंभीर चोटें आई। लंबा इलाज और सर्जरी के बाद भी वे होश में नहीं आ सके। तब से 46 वर्षीय हरीश घर के बिस्तर पर हैं। उनके बुजुर्ग पिता सोहनलाल और मां बीना बाई ही उनकी देखभाल कर रहे हैं।

ट्यूब के जरिए दूध, जूस और दवाएं दी जाती हैं। पिता रोज उन्हें करवट दिलाते हैं, मालिश करते हैं और शरीर की सफाई करते हैं। इलाज और घर के खर्च ने परिवार को आर्थिक संकट में डाल दिया है। करीब 20 लाख रु. उधार हो चुके हैं।

3. महाराष्ट्रः ब्रेन डेड श्रेया का चेहरा 4 साल से ऐसे ही, पिता को उम्मीद अब भी ठीक हो जाएगी बेटी

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की 28 वर्षीय श्रेया सॉफ्टवेयर डेवलपर बनने का सपना देखती थीं। श्रेया ने पुणे के डीवाई पाटील कॉलेज से एमसीए किया और फाइनल में टॉप किया था। 3 फरवरी 2022 की रात घर लौटते समय हुई दुर्घटना ने उनकी जिंदगी बदल दी। उनके मस्तिष्क को चोट लगी। डॉक्टरों के अनुसार यह सामान्य स्थिति में लौट पाएंगी या नहीं, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। पिछले 4 वर्षों से श्रेया बिस्तर पर हैं। 2022 में खेन डेड घोषित किया था। उनका चेहरा हमेशा ऐसा ही रहता है। माता-पिता को उम्मीद है कि बेटी अब भी ठीक हो सकती है इसलिए उनहोंने इच्छा मृत्यु की मांग नहीं की।

4. केरलः दुर्लभ बीमारी से जूझते 2 बच्चों के परिवार का दर्द केरल के कोट्टायम जिले के स्मिता एंटनी और मनु जोसेफ संकट से जूझ रहे हैं। उनके 2 बच्चों को सॉल्ट-वेस्टिंग कंजेनिटल एड्रिनल हाइपरप्लासिया नाम की गंभीर बीमारी है, जिसमें लगातार दवाएं और निगरानी जरूरी होती है। एक बच्चे में गंभीर ऑटिज्म भी है, जिससे देखभाल और कठिन हो गई। बच्चों की सेवा के लिए दोनों को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी।

आमदनी बंद हो गई और इलाज का खर्च बढ़ता गया। परिवार ने संपत्ति बेची, घर गिरवी रखा और उधार लिया। 2024 में इस दंपती ने सुप्रीम कोर्ट से पूरे परिवार के लिए मसीं किलिंग की अनुमति मांगने की बात कही। फिर प्रशासन सक्रिय हुआ और कुछ आर्थिक मदद भी मिली।

——————- ये खबर भी पढ़ें सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार इच्छामृत्यु की इजाजत दी:13 साल से कोमा में है बेटा, माता-पिता ने लगाई थी गुहार

13 साल से बिस्तर पर पड़े होने की वजह से हरीश के शरीर पर बेडसोर्स यानी गहरे घाव बन गए हैं। -फाइल फोटो

13 साल से बिस्तर पर पड़े होने की वजह से हरीश के शरीर पर बेडसोर्स यानी गहरे घाव बन गए हैं। -फाइल फोटो

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इच्छामृत्यु मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने 13 साल से कोमा में रह रहे 31 साल के युवक हरीश राणा को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की मंजूरी दे दी। गाजियाबाद के रहने वाले हरीश लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं। पढ़िए पूरी खबर

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.