सुनंदा शर्मा के नए सॉन्ग पर कॉन्ट्रोवर्सी:1.8M व्यूज के बाद यूट्यूब से हटाया; सिंगर बोलीं- फेक डॉक्यूमेंट्स पर कॉपीराइट का दावा किया

पंजाबी सिंगर सुनंदा शर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका कोई नया लुक या शो नहीं, बल्कि उनके नए गाने को लेकर खड़ा हुआ एक बड़ा विवाद है। अपने खुद के म्यूजिक लेबल पर काम कर रहीं सुनंदा शर्मा को तब बड़ा झटका लगा, जब उनका हाल ही में रिलीज हुआ नया गाना ‘जोगी’ (Jogi) अचानक यूट्यूब से गायब हो गया। कॉपीराइट और फर्जी दस्तावेजों के एक आपसी विवाद के चलते यूट्यूब ने इस गाने को 26 मई से फिलहाल के लिए अपने प्लेटफॉर्म से होल्ड (हटा) कर दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद सुनंदा शर्मा ने खुद सोशल मीडिया पर आकर अपने फैंस के साथ पूरा सच साझा किया है। सुनंदा शर्मा ने फैंस को आगाह किया है कि जब भी कोई बिजनेस डील करो तो कागजी कार्रवाई पूरी करो ताकि कोई आपके रास्ते न रोक सके। सुनंदा ने कहा कि उसका नया गीत जोगी फेक डॉक्यूमेंट के जरिए यू-ट्यूब से हटा दिया गया है। उन्होंने अपने फेंस को आश्वस्त किया है कि जल्दी ही जोगी यू-ट्यूब पर सुनने को मिलेगा। सुनंदा शर्मा के बयान की 4 अहम बातें जानिए… 5 दिन में 1.8M व्यूज आ चुके थे सुनंदा शर्मा ने अपने ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर 21 मई को अपना नया सिंगल ‘जोगी’ रिलीज किया और पांच दिन बाद यानि 26 मई को यूट्यूब से हटा दिया। इस गाने को ‘राजा’ ने लिखा था और इसका म्यूजिक ‘एडन’ ने तैयार किया था। गाना रिलीज होते ही तेजी से व्यूज बटोर रहा था। सुनंदा का दावा है कि गाना 1.8M व्यूज बटोर चुका था। लेखक राजा के पुराने प्रमोटर्स ने गाने पर अपना मालिकाना हक जताते हुए यूट्यूब के पास कुछ दस्तावेज सबमिट कर दिए। सुनंदा शर्मा की टीम का दावा है कि ये दस्तावेज पूरी तरह फर्जी हैं। हालांकि, यूट्यूब ने अपनी पॉलिसी के तहत किसी भी विवादित स्थिति से बचने के लिए गाने को अस्थायी रूप से प्लेटफॉर्म से हटा दिया है। अब सुनंदा की लीगल टीम इस कॉपीराइट स्ट्राइक को हटवाने के प्रयास में जुटी है। सुनंदा बोलीं- सिर्फ यही सॉन्ग हटा, बाकी सब मौजूद सुनंदा शर्मा का कहना है कि सोशल मीडिया पर यह अफवाह उड़ रही थी कि सुनंदा शर्मा के कई पुराने गाने भी यूट्यूब से हटा दिए गए हैं। सुनंदा शर्मा ने कहा कि इस विवाद के चलते फिलहाल उनका केवल एक ही नया गाना ‘जोगी’ यूट्यूब से प्रभावित हुआ है। इससे ठीक पहले रिलीज हुआ उनका सुपरहिट गाना ‘दिलबर’ उनके चैनल पर पूरी तरह सुरक्षित है और उसे इस विवाद से कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।्यरह गाना किसी बाहरी बड़ी म्यूजिक कंपनी के चैनल से नहीं, बल्कि खुद सुनंदा के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल से हटाया गया है, क्योंकि अब वह किसी और कंपनी के बजाय अपने खुद के होम लेबल के तहत गाने रिलीज कर रही हैं। सुनंदा शर्मा के ऑल-टाइम हिट गाने यदि आप सुनंदा शर्मा के गानों के शौकीन हैं, तो उनके कई गानों ने यूट्यूब और रील्स पर करोड़ों व्यूज बटोरे हैं। उनका सबसे पहला सुपरहिट गाना ‘बिल्ली अख’ था, जिसने उन्हें पंजाब के घर-घर में पहचान दिलाई। इसके बाद उनका गाना ‘पटाके’ (जानी तेरा ना) रिलीज हुआ, जिसने लड़कियों के बीच सुनंदा को एक यूथ आइकॉन बना दिया और इसके बोल आज भी शादियों में गूंजते हैं। फैमिली ऑडियंस के बीच उनके गाने ‘सैंडल’ को बहुत ज्यादा पसंद किया गया, जो एक हल्के-फुल्के पारिवारिक मिजाज का गाना था। वहीं उनका एक और बड़ा ब्लॉकबस्टर गाना ‘मम्मी नू पसंद’ रहा, जो इतना पॉपुलर हुआ कि बाद में इसे बॉलीवुड फिल्म ‘जय मम्मी दी’ में भी रीमेक किया गया। सुनंदा ने केवल डांस नंबर ही नहीं गाए, बल्कि जानी और बी प्राक के साथ मिलकर बनाया गया उनका गाना ‘दूजी वार प्यार’ एक बेहद इमोशनल और सैड सॉन्ग था, जिसने सुनंदा की गायकी की वर्सटैलिटी को साबित किया। इसके बाद उनके खुद के नए ऑफिशियल लेबल का पहला गाना ‘दिलबर’ आया, जिसे भी दर्शकों ने खूब सराहा।
यूट्यूब एप से पूरी तरह हटा सकेंगे 'शॉर्ट्स':टाइम मैनेजमेंट में नया 0 मिनट का ऑप्शन मिला; रील की लत छुड़ाने में मदद मिलेगी

यूट्यूब ने ‘टाइम मैनेजमेंट’ का नया फीचर जारी किया है। इसके जरिए अब आप एप पर शॉर्ट्स देखने की समय सीमा को ‘जीरो’ पर सेट कर सकते हैं। इससे शॉर्ट्स फीड पूरी तरह से हट जाएगी। इसका मकसद स्क्रीन टाइम को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद करना है। यूट्यूब ने पिछले साल अक्टूबर में शॉर्ट्स के लिए टाइमर फीचर पेश किया था, जिसमें न्यूनतम समय सीमा 15 मिनट थी। जनवरी में इस फीचर का विस्तार करते हुए माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन टाइम पर कंट्रोल देने के लिए ‘जीरो मिनट’ का विकल्प लाने की घोषणा की गई थी। सभी अकाउंट के लिए फीचर रोलआउट यूट्यूब की प्रवक्ता मैकेंजी स्पिलर के मुताबिक, अब यह विकल्प सभी पैरेंट्स के लिए लाइव हो चुका है और धीरे-धीरे सामान्य एडल्ट अकाउंट्स के लिए भी रोल आउट किया जा रहा है। होम स्क्रीन से भी शॉर्ट्स के सुझाव हट जाएंगे जैसे ही आप ‘जीरो मिनिट’ की लिमिट चुनेंगे, शॉर्ट्स टैब पर कोई वीडियो नहीं दिखेगा। वहां केवल एक नोटिफिकेशन दिखाई देगा कि आपने अपनी ‘शॉर्ट्स फीड लिमिट’ पूरी कर ली है। लिमिट सेट करने के बाद होम स्क्रीन से भी शॉर्ट्स के सुझाव हट जाएंगे। बिंज वॉचिंग और रील की लत छुड़ाने में मदद मिलेगी भारत में यूट्यूब के करोड़ों यूजर्स हैं और शॉर्ट्स का क्रेज बहुत ज्यादा है। ऐसे में यह फीचर उन लोगों के लिए काफी मददगार साबित होगा जो डूम स्क्रॉलिंग यानी अनचाहे स्क्रॉलिंग की आदत छोड़ना चाहते हैं। डिजिटल वेलबीइंग की दिशा में यह यूट्यूब का एक बड़ा कदम माना जा रहा है। फीचर ऑन करने लिए 3 स्टेप्स फॉलो करें नॉलेज पार्ट: क्या है डूमस्क्रॉलिंग लगातार छोटे वीडियो स्क्रॉल करते रहने की आदत को डूमस्क्रॉलिंग कहते हैं। इससे न सिर्फ समय की बर्बादी होती है, बल्कि मानसिक तनाव और नींद न आने जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
Youtube india unprofessional channels and wrong advice content spread

नई दिल्ली37 मिनट पहले कॉपी लिंक देश में लगभग 2.5 करोड़ एक्टिव यूट्यूब चैनल्स में से महज 30 लाख ही प्रोफेशनल हैं, बाकी करोड़ों चैनलों में से कई बिना नियमन या कमाई के गलत सलाह या कॉपी-पेस्ट वाला कंटेंट फैला रहे हैं। देश में यूट्यूब के हर महीने करीब 50 करोड़ एक्टिव यूजर्स है। अब यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक डॉक्टर, मैकेनिक, जिम ट्रेनर और कानूनी सलाहकार तक बन चुका है। यदि इन चैनलों पर बताई गई किसी सलाह से किसी को नुकसान हो जाए तो न्याय पाने का रास्ता इतना पेचीदा है कि अपराधी साफ बच निकलता है। इन्फ्लुएंसर ट्रस्ट रिपोर्ट के मुताबिक देश में हर 10 में से 7 लोग यूट्यूब की सलाह पर भरोसा करते हैं, जिनमें से 60% उसे बिना क्रॉस-चेक किए सही मान लेते हैं। 14 फरवरी 2005 को यूट्यूब लॉन्च हुआ था। अक्टूबर 2006 में इसे गूगल ने खरीद लिया था। ऐसे केस जब यूट्यूबर्स की गलत सलाह भारी पड़ी केस-1 : तमिलनाडु के कृष्णगिरी जिले में एक उच्च शिक्षित दंपती यूट्यूब पर ‘होम डिलीवरी’ के वीडियो देखता था। प्रसव के दौरान पति यूट्यूब वीडियो देखकर निर्देश फॉलो कर रहा था। गंभीर रक्तस्राव से स्थिति बिगड़ी, महिला की मौत हो गई। फरवरी 2026 में मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले में कहा- ‘कुछ यूट्यूब चैनल केवल ‘व्यूज’ और ‘सब्सक्राइबर्स’ बढ़ाने के लिए कुछ भी सामग्री परोस रहे हैं। ये समाज के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।’ केस-2 : मो. नासिरुद्दीन अंसारी यूट्यूब पर ‘बाप ऑफ चार्ट’ नाम से चैनल चलाते थे। वे इस प्लेटफॉर्म्स से लोगों को शेयर बाजार में निवेश, खासकर ‘ऑप्शंस ट्रेडिंग’ की सलाह देते थे। सेबी की जांच में सामने आया कि अंसारी खुद शेयर बाजार में 2.89 करोड़ रुपए के घाटे में थे। सेबी ने अंसारी को निवेशकों से अवैध तरीके से जुटाए गए 17.2 करोड़ रुपए वापस करने का आदेश दिया। लेकिन इसमें भी यूट्यूब की कोई जिम्मेदारी तय नहीं हुई। केस-3 : साल 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े अजीत मोहन (फेसबुक) बनाम दिल्ली विधानसभा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को केवल ‘बिचौलिया’ नहीं माना जा सकता। उनकी एल्गोरिदम तय करती है कि कौन सी खबर फैलेगी, इसलिए दंगों के दौरान उनकी भूमिका की जांच की जा सकती है। एक्सपर्ट बोले- यूट्यूब चैनल्स को टैक्सपेयर के रूप में रजिस्टर करें डिजिटल कानूनों से समृद्ध भारत बुक के लेखक और वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि यूट्यूब चैनल्स को टैक्सपेयर के रूप में रजिस्टर करना चाहिए, तभी इन पर लगाम संभव है। यूट्यूब/फेसबुक जैसी कंपनियों का तर्क है ‘हम सिर्फ प्लेटफॉर्म दे रहे हैं, कंटेंट तो लोग डाल रहे हैं।’ इंटरमीडिएरी की वजह से उन्हें ‘सेफ हार्बर’ (धारा-79) की सुरक्षा मिलती है यानी यूजर के गलत वीडियो के लिए यूट्यूब को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। गुप्ता कहते हैं कि यह गलत है क्योंकि यूट्यूब बिना किसी रजिस्ट्रेशन के चल रहा है। उसे बिचौलिया नहीं, बल्कि मीडिया कंपनी मानना चाहिए। कंपनी कानून व आयकर कानून के मुताबिक, देश में इनकी व्यापारिक उपस्थिति के आधार पर इन पर आयकर लगाने के साथ ही देश का कानून लागू होना चाहिए। डेटा पर जीएसटी: ये कंपनियां भारतीयों के डेटा का इस्तेमाल करके विज्ञापन से मोटा पैसा कमाती हैं। इस डेटा के कारोबार पर जीएसटी लगना चाहिए। यूजर बेस पर टैक्स: टैक्स सिर्फ विज्ञापन आय पर नहीं, ग्लोबल यूजर्स की संख्या के अनुपात में लगाया जाना चाहिए। शिकायत निवारण अफसर: आईटी नियमों के मुताबिक, इन कंपनियों की शिकायत व नामांकित अधिकारियों की डिटेल सार्वजनिक होना चाहिए। ताकि पुलिस और कोर्ट को साइबर क्राइम के समाधान में इनसे आवश्यक मदद मिल सके। यूट्यूब के लिए नियम, जिनमें एक्शन होता है… उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 19: भ्रामक विज्ञापन या गलत दावे पर 10-50 लाख तक का जुर्माना। IT एक्ट की धारा 66D व 69A: गलत जानकारी फैलाने पर वीडियो ब्लॉक व जेल हो सकती है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) : गलत सलाह से जान को खतरा हो तो धारा 318 में एफआईआर। खामियां, जो बचा लेती हैं… डिस्क्लेमर: वीडियो में शैक्षिक उद्देश्य लिखने से ये जानकारी बन जाती है, जवाबदेही खत्म। विशेषज्ञता की परिभाषा: कानून में इन्फ्लुएंसर के लिए कोई न्यूनतम योग्यता तय नहीं। धीमी न्यायिक प्रक्रिया: डिजिटल नुकसान के लिए फास्ट ट्रैक कानून नहीं है। छोटे आर्थिक या शारीरिक नुकसान के लिए पीड़ित कोर्ट नहीं जाता। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
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नई दिल्ली7 घंटे पहले कॉपी लिंक देश में लगभग 2.5 करोड़ एक्टिव यूट्यूब चैनल्स में से महज 30 लाख ही प्रोफेशनल हैं, बाकी करोड़ों चैनलों में से कई बिना नियमन या कमाई के गलत सलाह या कॉपी-पेस्ट वाला कंटेंट फैला रहे हैं। इन्फ्लुएंसर ट्रस्ट रिपोर्ट के मुताबिक देश में यूट्यूब के हर महीने करीब 50 करोड़ एक्टिव यूजर्स है। अब यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक डॉक्टर, मैकेनिक, जिम ट्रेनर और कानूनी सलाहकार तक बन चुका है। यदि इन चैनलों पर बताई गई किसी सलाह से किसी को नुकसान हो जाए तो न्याय पाने का रास्ता इतना पेचीदा है कि अपराधी साफ बच निकलता है। देश में हर 10 में से 7 लोग यूट्यूब की सलाह पर भरोसा करते हैं, जिनमें से 60% उसे बिना क्रॉस-चेक किए सही मान लेते हैं। 14 फरवरी 2005 को यूट्यूब लॉन्च हुआ था। अक्टूबर 2006 में इसे गूगल ने खरीद लिया था। ऐसे केस जब यूट्यूबर्स की गलत सलाह भारी पड़ी केस-1 : तमिलनाडु के कृष्णगिरी जिले में एक उच्च शिक्षित दंपती यूट्यूब पर ‘होम डिलीवरी’ के वीडियो देखता था। प्रसव के दौरान पति यूट्यूब वीडियो देखकर निर्देश फॉलो कर रहा था। गंभीर रक्तस्राव से स्थिति बिगड़ी, महिला की मौत हो गई। फरवरी 2026 में मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले में कहा- ‘कुछ यूट्यूब चैनल केवल ‘व्यूज’ और ‘सब्सक्राइबर्स’ बढ़ाने के लिए कुछ भी सामग्री परोस रहे हैं। ये समाज के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।’ केस-2 : मो. नासिरुद्दीन अंसारी यूट्यूब पर ‘बाप ऑफ चार्ट’ नाम से चैनल चलाते थे। वे इस प्लेटफॉर्म्स से लोगों को शेयर बाजार में निवेश, खासकर ‘ऑप्शंस ट्रेडिंग’ की सलाह देते थे। सेबी की जांच में सामने आया कि अंसारी खुद शेयर बाजार में 2.89 करोड़ रुपए के घाटे में थे। सेबी ने अंसारी को निवेशकों से अवैध तरीके से जुटाए गए 17.2 करोड़ रुपए वापस करने का आदेश दिया। लेकिन इसमें भी यूट्यूब की कोई जिम्मेदारी तय नहीं हुई। केस-3 : साल 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े अजीत मोहन (फेसबुक) बनाम दिल्ली विधानसभा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को केवल ‘बिचौलिया’ नहीं माना जा सकता। उनकी एल्गोरिदम तय करती है कि कौन सी खबर फैलेगी, इसलिए दंगों के दौरान उनकी भूमिका की जांच की जा सकती है। एक्सपर्ट बोले- यूट्यूब चैनल्स को टैक्सपेयर के रूप में रजिस्टर करें डिजिटल कानूनों से समृद्ध भारत बुक के लेखक और वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि यूट्यूब चैनल्स को टैक्सपेयर के रूप में रजिस्टर करना चाहिए, तभी इन पर लगाम संभव है। यूट्यूब/फेसबुक जैसी कंपनियों का तर्क है ‘हम सिर्फ प्लेटफॉर्म दे रहे हैं, कंटेंट तो लोग डाल रहे हैं।’ इंटरमीडिएरी की वजह से उन्हें ‘सेफ हार्बर’ (धारा-79) की सुरक्षा मिलती है यानी यूजर के गलत वीडियो के लिए यूट्यूब को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। गुप्ता कहते हैं कि यह गलत है क्योंकि यूट्यूब बिना किसी रजिस्ट्रेशन के चल रहा है। उसे बिचौलिया नहीं, बल्कि मीडिया कंपनी मानना चाहिए। कंपनी कानून व आयकर कानून के मुताबिक, देश में इनकी व्यापारिक उपस्थिति के आधार पर इन पर आयकर लगाने के साथ ही देश का कानून लागू होना चाहिए। डेटा पर जीएसटी: ये कंपनियां भारतीयों के डेटा का इस्तेमाल करके विज्ञापन से मोटा पैसा कमाती हैं। इस डेटा के कारोबार पर जीएसटी लगना चाहिए। यूजर बेस पर टैक्स: टैक्स सिर्फ विज्ञापन आय पर नहीं, ग्लोबल यूजर्स की संख्या के अनुपात में लगाया जाना चाहिए। शिकायत निवारण अफसर: आईटी नियमों के मुताबिक, इन कंपनियों की शिकायत व नामांकित अधिकारियों की डिटेल सार्वजनिक होना चाहिए। ताकि पुलिस और कोर्ट को साइबर क्राइम के समाधान में इनसे आवश्यक मदद मिल सके। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Arman Malik, Harbhajan Singh Oppose Vulgar Song; Sarkey Chunar Removed YouTube

15 मिनट पहले कॉपी लिंक अपकमिंग फिल्म ‘केडी: द डेविल’ का नया गाना ‘सरके चुनर तेरी सरके’ रिलीज होते ही विवाद में फंस गया है। आम लोगों के विरोध और कानूनी शिकायतों के बाद यूट्यूब से हटा दिया गया है। संजय दत्त और नोरा फतेही पर फिल्माए गए इस गाने पर अश्लीलता फैलाने का आरोप है। अश्लील लिरिक्स और विजुअल्स को लेकर सोशल मीडिया पर भी गाने का भारी विरोध किया जा रहा है। वहीं ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के चेयरमैन प्रसून जोशी को आधिकारिक पत्र लिखकर गाने के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है। AICWA का कहना है कि इस तरह का अश्लील और डबल मीनिंग कंटेंट भारतीय सिनेमा के लिए स्वीकार्य नहीं है। यूट्यूब से हटा गाने का वीडियो जैसे ही यह गाना स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुआ, यूजर्स ने इसके बोल और विजुअल्स को ‘फूहड़’ और ‘डबल मीनिंग’ बताया। विवाद इतना बढ़ा कि रिलीज के महज एक दिन बाद ही मेकर्स ने इसे हटा लिया। अब यूट्यूब पर गाने के लिंक को क्लिक करने पर वीडियो उपलब्ध नहीं है, यह वीडियो प्राइवेट है का मैसेज दिखाई दे रहा है। नोरा फतेही ने भी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से इस गाने के वीडियो को डिलीट कर दिया है। यूट्यूब पर ‘वीडियो उपलब्ध नहीं है, यह वीडियो प्राइवेट है’ का मैसेज दिखाई दे रहा है। अरमान मलिक और हरभजन सिंह ने जताया विरोध इस गाने को लेकर सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री और खेल जगत की हस्तियों ने भी नाराजगी जताई है। सिंगर अरमान मलिक ने सोशल मीडिया पर इस गाने की आलोचना करते हुए इसे गीत-लेखन के क्षेत्र में “गिरावट की नई मिसाल” बताया। वहीं, पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने भी गाने के कंटेंट का कड़ा विरोध किया है। लोगों का कहना है कि नोरा के डांस स्टेप्स और एक्सप्रेशंस काफी वल्गर हैं, जिसका युवाओं पर गलत असर पड़ेगा। सिंगर अरमान मलिक ने इसे गिरावट की नई मिसाल बताया है। NHRC का नोटिस और दिल्ली पुलिस में शिकायत गाने के खिलाफ कानूनी शिकंजा भी कसता जा रहा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने आपत्तिजनक बोल के इस्तेमाल को लेकर फिल्म के मेकर्स को नोटिस जारी किया है। इसके अलावा, सोशल एक्टिविस्ट और एडवोकेट ने दिल्ली पुलिस की साइबर सेल में इस गाने के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह गाना समाज में अश्लीलता को बढ़ावा देता है। शिकायतकर्ता ने लिरिसिस्ट रकीब आलम, डायरेक्टर प्रेम और कंपोजर अर्जुन जान्या के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिल्म ‘केडी’ का आइटम नंबर है सरके चुनर यह गाना फिल्म ‘केडी: द डेविल’ का एक आइटम नंबर है। इसमें नोरा फतेही ने घाघरा-चोली पहनकर डांस किया है। गाने का हुक स्टेप, जिसमें नोरा अपने पल्लू का इस्तेमाल करती हैं, रिलीज के साथ ही चर्चा में आ गया था। हालांकि, फिल्म के मेकर्स, संजय दत्त या नोरा फतेही की तरफ से अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
munawwar farooqui lashed out at people trolling youtube anurag dobhal, after he tried to commin suicie in live streaming

4 घंटे पहले कॉपी लिंक पॉपुलर यूट्यूबर और बिग बॉस के कंटेस्टेंट रह चुके राइडर अनुराग डोभाल ने शनिवार रात इंस्टाग्राम पर लाइव आकर आत्महत्या करने की कोशिश की। उन्होंने लाइव में तेज रफ्तार में कार चलाते हुए डिवाइडर पर चला दी, जिसके बाद से ही उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। घटना की जानकारी मिलने के बाद अब मुनव्वर फारूकी ने उनकी सलामती की दुआ की है। वहीं एक्टर अली गोनी ने अनुराग की आलोचना करने और उन्हें ट्रोल करने वालों को फटकार लगाई है। मुनव्वर फारूकी ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम से एक वीडियो शेयर करते हुए कहा है कि हम मेंटल की बात करते हैं। हम अक्सर कहते हैं कि किसी को कोई दिक्कत है, तो खुलकर बात करे, लेकिन जब वही शख्स बात करना चाहता है तो हम उसका मजाक उड़ाते हैं। आगे एक्टर ने कहा, ‘इंटरनेट को क्या बना दिया गया है। कोई शेयर करे तो कहते हैं व्यूज के लिए कर रहा है। वो व्यूज के लिए कर रहा है तो भी उसकी बात तो सुनो। लेकिन अगर वो व्यूज के लिए न कर रहा हो तो आप जिम्मेदार हो। किसी भी मर्द के लिए फैमिली प्रॉब्लम से बड़ा कुछ नहीं। वो दुनिया से लड़ लेगा, अगर घर में दिक्कत है तो वो परेशान ही रहेगा।’ आखिर में मुनव्वर ने कहा, ‘किसी का मजाक उड़ाने के लिए हजार चीजें मिल जाएंगी, लेकिन कभी ऐसी चीजों पर बात सुना करो। इंटरनेट को ऐसा मत बनाओ कि आपको पसंद न आए कि कोई अपनी बात कर रहा है। रही बात अनुराग की, तो पहली बार जब मैंने उसका वीडियो देखा, तो उससे संपर्क करने की कोशिश की। मैंने उसके सबसे करीबी से बात की, मुझे कई बातें पता चलीं। मैंने उससे कहा कि ध्यान रखो। फैमिली प्रॉब्लम कोई सॉल्व नहीं कर सकता। मैं उम्मीद करता हूं कि वो हमेशा ठीक रहे।’ मुनव्वर के अलावा एक्टर अली गोनी ने भी अनुराग डोभाल की लगातार हो रही ट्रोलिंग पर नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था, ‘उसका मजाक उड़ाने वालों को शर्म आनी चाहिए। हर किसी को ऊपरवाला देख रहा है।’ साथ ही अली गोनी ने उनकी सलामती की भी दुआ की। यूट्यूबर और इंटरनेट पर्सनालिटी एलविश यादव ने भी अनुराग के सपोर्ट में एक वीडियो पोस्ट की थी। इसके अलावा भी कई सेलेब्स उनके सपोर्ट में आए हैं और उनके जल्द ठीक होने की दुआ कर रहे हैं। क्या है पूरा विवाद? हाल ही में अनुराग डोभाल (UK07) ने यूट्यूबर पर दो घंटे का एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने बताया कि इंटरकास्ट मैरिज के चलते उनके परिवार वाले उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं। उनकी पत्नी भी छोड़कर चली गई है। रोते हुए वो बार-बार आत्महत्या की बातें कर रहे थे। वीडियो वायरल होने के बाद से ही अनुराग को जमकर ट्रोल किया जा रहा था। इसके बाद शनिवार को अनुराग इंस्टाग्राम पर लाइव आए, उन्होंने कार ड्राइव करते हुए लाइव स्ट्रीमिंग में कहा- “मम्मी अगले जन्म आऊं तो प्यार दे देना बस… बहुत जरूरत थी प्यार की। लोग ही नहीं बचे, किसको फोन करूं।” इसके बाद उन्होंने कहा, “लेट्स गो फॉर द फाइनल ड्राइव।” लाइव में दिखाई देता है कि अनुराग कार में एक अंग्रेजी गाना लगाते हैं और तेज रफ्तार में गाड़ी चलाने लगते हैं। कुछ ही देर में स्पीड करीब 144 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच जाती है। इसी दौरान वह अचानक स्टीयरिंग घुमाते नजर आते हैं, जैसे गाड़ी को डिवाइडर से टकराने की कोशिश की हो। हालांकि उसी समय इंस्टाग्राम लाइव अचानक बंद हो जाता है। देहरादून के फेमस यूट्यूबर अनुराग डोभाल ने शनिवार रात इंस्टाग्राम पर लाइव आकर आत्महत्या करने का प्रयास किया था, जिसके बाद से उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। उनके गर्दन और पीछे के हिस्से में गहरी चोटें आई हैं। घटना के बाद उन्हें मेरठ के शुभारती अस्पताल में भर्ती कराया गया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
AI Content Rules 2026; Social Media Deepfake Labelling Regulations

नई दिल्ली14 घंटे पहले कॉपी लिंक अगर कोई फोटो, वीडियो या ऑडियो एआई की मदद से बनाया गया है, तो उस पर ‘लेबल’ लगाना जरूरी कर दिया गया है। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट को शिकायत मिलने के महज 3 घंटे के भीतर हटाना होगा। ये नए नियम 20 फरवरी 2026 से लागू हो गए हैं। 10 फरवरी को इसका नोटिफिकेशन जारी हुआ था। पीएम बोले- कंटेंट पर ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ की जरूरत इन नियमों के लागू होने से एक दिन पहले यानी, 19 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने AI समिट में भी लेबल को लेकर सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था कि जैसे खाने के सामान पर ‘न्यूट्रिशन लेबल’ होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी लेबल होना चाहिए। इससे लोगों को पता चल सकेगा कि क्या असली है और क्या फैब्रिकेटेड, यानी एआई से बनाया गया है। मेटाडेटा से छेड़छाड़ की तो डिलीट होगा पोस्ट 1. एआई लेबल: वीडियो पर ‘डिजिटल स्टैम्प’ जैसे खाने के पैकेट पर लिखा होता है कि वह ‘शाकाहारी’ है या ‘मांसाहारी’, ठीक वैसे ही अब हर एआई वीडियो, फोटो या ऑडियो पर एक लेबल लगा होगा। मान लीजिए आपने एआई से एक वीडियो बनाया जिसमें कोई नेता भाषण दे रहा है, तो उस वीडियो के कोने में साफ लिखा होना चाहिए- “AI जनरेटेड”। 2. टेक्निकल मार्कर: डिजिटल डीएनए मेटाडेटा को आप उस फाइल का ‘डिजिटल डीएनए’ मान सकते हैं। यह स्क्रीन पर तो नहीं दिखता, लेकिन फाइल की कोडिंग के अंदर छिपा होता है। इसमें यह जानकारी दर्ज होगी कि यह फोटो या वीडियो किस तारीख को बना, किस AI टूल से बना और किस प्लेटफॉर्म पर पहली बार अपलोड हुआ। अगर कोई एआई का इस्तेमाल करके अपराध करता है, तो पुलिस इस ‘टेक्निकल मार्कर’ के जरिए उसके असली सोर्स तक पहुंच सकेगी। 3. छेड़छाड़ पर रोक: मिटाया नहीं जा सकेगा लेबल पहले लोग एआई से बनी फोटो का कोना काटकर या एडिटिंग करके उसका ‘वॉटरमार्क’ हटा देते थे ताकि वह असली लगे। अब सरकार ने इसे गैर-कानूनी बना दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसी तकनीक अपनानी होगी कि अगर कोई उस लेबल या मेटाडेटा को हटाने की कोशिश करे, तो या तो वह कंटेंट ही डिलीट हो जाए। चाइल्ड पोर्नोग्राफी और डीपफेक पर सख्त एक्शन अगर AI का इस्तेमाल चाइल्ड पोर्नोग्राफी, अश्लीलता, धोखाधड़ी, हथियारों से जुड़ी जानकारी या किसी की नकल उतारने के लिए किया जाता है, तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा। नवंबर में रश्मिका मंदाना का डीपफेक वीडियो वायरल हुआ था। सचिन तेंदुलकर का डीपफेक वीडियो, जिसमें वे गेमिंग ऐप को प्रमोट करते दिखे थे। 3 घंटे की डेडलाइन, पहले 36 घंटे का समय मिलता था आईटी नियमों में हुए नए बदलाव के बाद अब सोशल मीडिया कंपनियों के पास कार्रवाई के लिए बहुत कम समय होगा। पहले किसी गैर-कानूनी कंटेंट को हटाने के लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था, जिसे अब घटाकर सिर्फ 3 घंटे कर दिया गया है। यूजर ने गलत जानकारी दी तो प्लेटफॉर्म जिम्मेदार अब जब भी कोई यूजर सोशल मीडिया पर कुछ अपलोड करेगा, तो प्लेटफॉर्म को उससे यह डिक्लेरेशन लेनी होगी कि क्या यह कंटेंट एआई से बनाया गया है। कंपनियों को ऐसे टूल्स तैनात करने होंगे जो यूजर के इस दावे की जांच कर सकें। अगर कोई प्लेटफॉर्म एआई कंटेंट को बिना डिस्क्लोजर के पब्लिश होने देता है, तो इसके लिए वह खुद जिम्मेदार माना जाएगा। केंद्र ने कहा- इससे इंटरनेट ज्यादा भरोसेमंद बनेगा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने साफ कहा कि ये स्टेप ‘ओपन, सेफ, ट्रस्टेड और अकाउंटेबल इंटरनेट’ बनाने के लिए है। यह जनरेटिव AI से आने वाली मिस-इनफॉर्मेशन, इम्पर्सनेशन और इलेक्शन मैनिपुलेशन जैसी रिस्क्स को हैंडल करेगा। इससे इंटरनेट ज्यादा भरोसेमंद बनेगा। सरकार के नोटिफिकेशन में दिए जरूरी सवालों के जवाब… सेक्शन 1: नए नियम और उनके उद्देश्य 1. आईटी संशोधन नियम, 2026 क्या हैं? यह नियम 2021 के आईटी नियमों को मजबूत करते हैं, ताकि एआई द्वारा बनाई गई जानकारी (SGI) और ऑनलाइन होने वाले नुकसानों को रोका जा सके । 2. इन संशोधनों की जरूरत क्यों पड़ी? एआई के जरिए अब असली दिखने वाले डीपफेक बनाना आसान हो गया है । इनसे गलत सूचनाएं फैलने, पहचान चोरी होने और अश्लीलता (NCII) जैसे खतरों को रोकने के लिए ये नियम लाए गए हैं। ये नियम 20 फरवरी, 2026 से पूरे देश में लागू हो चुके हैं । सेक्शन 2: मुख्य परिभाषाएं और दायरा 3. ‘ऑडियो, विजुअल या ऑडियो-विजुअल जानकारी’ का क्या मतलब है? कंप्यूटर के जरिए बनाई या बदली गई कोई भी आवाज, फोटो, ग्राफिक या वीडियो कंटेंट। 4. ‘सिंथेटिकली जनरेटेड इंफॉर्मेशन’ (SGI) क्या है? ऐसी जानकारी जिसे एआई या एल्गोरिदम से बनाया गया हो और वह बिल्कुल असली व्यक्ति या घटना की तरह लगे। जिसे देखकर कोई भी धोखा खा जाए। 5. किन चीजों को SGI नहीं माना जाएगा? फोटो की ब्राइटनेस बढ़ाना, वीडियो कंप्रेस करना या बैकग्राउंड शोर कम करना । या फिर पीपीटी बनाना, डायग्राम बनाना या रिसर्च के लिए काल्पनिक केस स्टडी बनाना । वीडियो में सबटाइटल जोड़ना, अनुवाद करना या ऑडियो को टेक्स्ट में बदलना। वहीं अगर एआई से फर्जी मार्कशीट या सरकारी लेटर बनाया, तो उसे छूट नहीं मिलेगी। 6. क्या ये नियम सिर्फ वीडियो पर लागू हैं? SGI मुख्य रूप से फोटो, वीडियो और ऑडियो पर केंद्रित है। सिर्फ टेक्स्ट SGI नहीं है, लेकिन अगर टेक्स्ट का इस्तेमाल गैर-कानूनी काम में होता है, तो IT नियमों के दायरे में आएगा । सेक्शन 3: यूजर्स और कंपनियों की जिम्मेदारी 7. क्या प्लेटफॉर्म्स पर ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा बनी रहेगी? हां, अगर कंपनियां इन नियमों का पालन करते हुए एआई कंटेंट को हटाती हैं, तो उनकी कानूनी सुरक्षा (धारा 79) बनी रहेगी । यानी, कंपनी पर कार्रवाई नहीं होगी। सेफ हार्बर’ को आसान भाषा में ऐसे समझें: कानूनी ढाल: यह सोशल मीडिया कंपनियों को मिला एक सुरक्षा कवच है, जो कहता है कि अगर किसी यूजर ने प्लेटफॉर्म पर कोई गलत पोस्ट या वीडियो डाला है, तो उसके लिए कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा। शर्तिया सुरक्षा: यह सुरक्षा तभी तक मिलती है जब तक कंपनियां सरकार के नियमों को मानती हैं। अगर वे शिकायत मिलने पर 3 घंटे के भीतर SGI नहीं हटातीं, तो
YouTube Down Global Outage | Something Went Wrong App Error Affects Millions

Hindi News Tech auto YouTube Down Global Outage | Something Went Wrong App Error Affects Millions नई दिल्ली3 दिन पहले कॉपी लिंक दुनिया का सबसे पॉपुलर वीडियो प्लेटफॉर्म यूट्यूब की सर्विस अचानक ठप हो गई। डाउनडिटेक्टर के मुताबिक, दुनियाभर में सुबह करीब 6 बजकर 20 मिनट से लगभग 8 बजे तक लाखों यूजर्स को इसे एक्सेस करने में परेशानी हो रही थी। सबसे ज्यादा दिक्कत इसके मोबाइल एप में आई जहां यूजर्स को समथिंग वेंट रॉन्ग मैसेज दिख रहा था। हालांकि जब इसे दो-तीन बार रिफ्रेश किया तो वीडियोज दिखने लगे थे। लेकिन पूरी तरह से ये काम नहीं कर रहा था। वहीं इसकी वेबसाइट एक्सेस हो रही थी। आउटेज ट्रैकिंग वेबसाइट डाउनडिटेक्टर के मुताबिक अमेरिका में करीब 2.83 लाख लोगों ने यूट्यूब न चलने की शिकायत की। भारत में आज सुबह 7 बजे के करीब डाउनडिटेक्टर पर शिकायतों का आंकड़ा 18 हजार को पार कर गया। यहां 71% यूजर्स एप इस्तेमाल में दिक्कत हुई। यूट्यूब टीम ने कहा- रिकमेंडेशन सिस्टम में खराबी आई यूट्यूब की टीम ने इस आउटेज को लेकर आज सुबह 07:26 मिनट पर एक X पोस्ट में कहा- अगर आपको अभी यूट्यूब चलाने में दिक्कत आ रही है, तो आप अकेले नहीं हैं। हमारी टीमें इस मामले की जांच कर रही हैं और जो भी अपडेट होगा, हम यहां जानकारी देंगे। इसके बाद एक और अपडेट में यूट्यूब ने कहा कि हमारे रिकमेंडेशन सिस्टम में एक खराबी की वजह से यूट्यूब के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स जैसे होमपेज, यूट्यूब एप, यूट्यूब म्यूजिक और यूट्यूब किड्स पर वीडियो नहीं दिख रहे थे। होमपेज अब ठीक हो गया है, लेकिन हम अभी भी इसे पूरी तरह ठीक करने पर काम कर रहे हैं। जल्द ही और जानकारी दी जाएगी! नॉलेज बॉक्स: क्या होता है आउटेज? आउटेज एक ऐसी स्थिति होती है जब कोई सर्विस जैसे इंटरनेट, एप, वेबसाइट अचानक काम करना बंद कर देती है या उपलब्ध नहीं रहती। यह कुछ समय के लिए हो सकता है। जैसे कुछ मिनट से लेकर घंटों तक। इसका कारण सर्वर फेल होना, नेटवर्क समस्या, रखरखाव, मौसम की मार, हार्डवेयर खराबी या ज्यादा लोड पड़ना हो सकता हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…








