जापान के कोडो ग्रुप का वर्ल्ड टूर:ड्रम मास्टर्स बनने के लिए 2 साल बिना फोन-इंटरनेट के रहना पड़ता है, खुद बनाते हैं अपना खाना, चावल की बोरियां लेकर पेरिस पहुंचे

फ्रांस की राजधानी पेरिस के मशहूर ‘साले प्लेयेल हॉल’ के बाहर हाल ही में एक बस रुकी। बस से उतरे 14 लोग आम टूरिस्ट नहीं थे, ये जापान के दुनिया भर में मशहूर ‘कोडो’ ग्रुप के कलाकार थे। यह ग्रुप दुनिया का सबसे प्रसिद्ध ‘ताइको’ यानी पारंपरिक जापानी ड्रम बजाने वाला संगीत समूह है, जो इन दिनों वर्ल्ड टूर पर है। खास बात यह कि बड़े स्टार होने के बावजूद ये अपना सारा सामान, यहां तक कि भारी ड्रम भी खुद उठाते हैं। इनके साथ जापान से खास चावल की बोरियां भी आईं, क्योंकि ये खाना खुद बनाते हैं और जापानी चावल ही खाते हैं। प्रशिक्षण में ड्रम के साथ ही बांसुरी, नाच और संगीत भी सिखाते हैं कोडो का हिस्सा बनना आसान नहीं है। चयन के बाद नए प्रशिक्षुओं को जापान के पश्चिमी तट के ‘साडो द्वीप’ के ट्रेनिंग सेंटर में भेजा जाता है। यह वही द्वीप है, जिसे कभी निर्वासन की जगह माना जाता था। यहां 2 साल तक फोन, इंटरनेट या टीवी जैसी किसी भी टेक्नोलॉजी की अनुमति नहीं होती। दिन की शुरुआत सुबह 5:30 बजे लंबी दौड़ से होती है। रात तक अभ्यास, भोजन और फिर अभ्यास चलता रहता है। ट्रेनिंग में कलाकार सिर्फ ड्रम बजाना नहीं सीखते। वे खेती करके चावल खुद उगाते हैं। देवदार की लकड़ी तराशकर ड्रमस्टिक्स भी खुद बनाते हैं। साथ ही बांसुरी, नृत्य और धातु के वाद्य यंत्रों की दूसरी कलाएं भी सीखते हैं। पहले साल में ही आधे से ज्यादा छोड़ देते हैं ट्रेनिंग इतनी सख्त है कि पहले साल के अंत तक आधे से ज्यादा छात्र बीच में ही हार मानकर घर लौट जाते हैं। दूसरे साल के अंत में भी चयन तय नहीं होता। कभी सिर्फ 1-2 को जूनियर मेंबर चुना जाता है, तो कभी किसी को भी नहीं। जूनियर मेंबर बनने के बाद भी एक साल खुद को साबित करने पर ही कोई स्थाई सदस्य बन पाता है।
Iran Leader Khamenei Killed in Israel Missile Attack on Tehran Office

तेल अवीव/तेहरान16 घंटे पहले कॉपी लिंक ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की शनिवार को इजराइल के हवाई हमले में मौत हो गई। यह हमला तेहरान की पास्चर स्ट्रीट के पास उनके ऑफिस पर हुआ, जहां वे कई बड़े ईरानी नेताओं के साथ बैठक कर रहे थे। इस हमले में इजराइल ने ऑफिस पर 30 मिसाइलें गिराई थीं, जिसमें खामेनेई के साथ 40 अफसर भी मारे गए थे। इजराइल ने कई सालों से इस हमले की तैयारी की थी। उनकी खुफिया एजेंसी मोसाद और यूनिट 8200 ने तेहरान के लगभग सभी ट्रैफिक कैमरों को हैक कर लिया था। इन कैमरों की तस्वीरें एन्क्रिप्ट करके तेल अवीव और दक्षिण इजराइल के सर्वरों पर भेजी जाती थीं। अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA ने भी इस ऑपरेशन में मदद की। इसमें एक खास कैमरा था, क्योंकि उससे पता चलता था कि सीनियर अधिकारियों के बॉडीगार्ड और ड्राइवर अपनी निजी गाड़ियां कहां पार्क करते हैं। इजराइल ने ईरान की फोन टावरों को हैक किया था इन कैमरों से इजराइल को अफसरों के बारे में बहुत जानकारी मिली, जैसे उनका घर कहां है, वे कब ड्यूटी पर आते हैं, कौन सा रास्ता लेते हैं, और सबसे जरूरी बात वे किस नेता की सुरक्षा करते हैं या किसे ले जाते हैं। इसे इंटेलिजेंस में ‘पैटर्न ऑफ लाइफ’ कहते हैं। यह जानकारी इजराइल को खामेनेई की हत्या के लिए बहुत काम आई। यह एकमात्र तरीका नहीं था। इजराइल और CIA ने कई तरह की खुफिया जानकारी जुटाई थी। इजराइल ने पास्चर स्ट्रीट के आसपास के मोबाइल फोन टावरों को भी हैक किया, ताकि हमले के समय फोन व्यस्त दिखें और सुरक्षा टीम को कोई चेतावनी न मिले। 1979 में ईरान की इस्लामिक क्रांति के दौरान एक प्रोटेस्ट में खामेनेई (बीच में)। ईरान के कोने-कोने से वाकिफ है इजराइली अधिकारी इजराइल के एक इंटेलिजेंस अधिकारी ने कहा कि वे तेहरान को उतनी अच्छी तरह जानते हैं जितनी अच्छी तरह यरुशलम को जानते हैं। जब आप किसी जगह को इतनी अच्छी तरह जानते हैं, तो वहां की कोई भी छोटी सी गड़बड़ी भी नजर आ जाती है। यह सब इजराइल की यूनिट 8200 (सिग्नल इंटेलिजेंस), मोसाद के ह्मयुमन सोर्स और मिलिट्री इंटेलिजेंस के डेटा से हुआ। उन्होंने सोशल नेटवर्क एनालिसिस नाम की मैथमैटिकल विधि से अरबों डेटा पॉइंट्स को छांटा और नए टारगेट ढूंढे। इजराइल में टारगेटिंग इंटेलिजेंस बहुत जरूरी है, अगर फैसला होता है कि किसी को मारना है, तो इंटेलिजेंस उसे पूरा करने के लिए तैयार हो जाता है। खामेनेई बोले थे- मेरी मौत से फर्क नहीं पड़ता खामेनेई की हत्या एक राजनीतिक फैसला था, सिर्फ तकनीक का कमाल नहीं। जब CIA और इजराइल को पता चला कि शनिवार सुबह खामेनेई अपने ऑफिस में बैठक कर रहे हैं और कई बड़े नेता साथ हैं, तो मौका बहुत अच्छा लगा। युद्ध शुरू होने के बाद उन्हें ढूंढना मुश्किल हो जाता, क्योंकि वे बंकरों में छिप जाते। खामेनेई हिज्बुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह की तरह छिपकर नहीं रहते थे। नसरल्लाह सालों से बंकर में रहता था, लेकिन खामेनेई ने कभी-कभी सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनकी मौत से फर्क नहीं पड़ता। इस्लामिक आंदोलन के दौरान पहलवी शासन के विरुद्ध भाषण देने के लिए खामेनेई को 6 बार गिरफ्तार किया गया था। 37 साल से ईरान की सर्वोच्च सत्ता पर काबिज थे खामेनेई आयतुल्ला अली खामेनेई 1989 में रुहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद से ईरान के सर्वोच्च नेता के पद पर काबिज थे। ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति के दौरान, जब शाह मोहम्मद रजा पहलवी को हटाया गया तो खामेनेई ने क्रांति में बड़ी भूमिका निभाई थी। इस्लामिक क्रांति के बाद खामेनेई को 1981 में राष्ट्रपति बनाया गया। वह 8 साल तक इस पद पर रहे। 1989 में ईरान के सुप्रीम लीडर खुमैनी की मौत के बाद उन्हें उत्तराधिकारी बनाया गया था। अब मारे गए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के बारे में जानिए… अयातुल्ला अली खामेनेई रेजा शाह पहलवी की नीतियों के खिलाफ थे और इस्लामी शासन की वकालत करते थे। 1963 में शाह के खिलाफ भाषण देने पर उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। धीरे-धीरे वे सरकार विरोधी आंदोलन का बड़ा चेहरा बन गए और खोमैनी के भरोसेमंद सहयोगी माने जाने लगे। 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति हुई और शाह की सरकार गिर गई। खोमैनी देश लौटे और नई इस्लामिक सरकार बनाई। खामेनेई को क्रांतिकारी परिषद में जगह मिली और बाद में उप रक्षामंत्री बनाया गया। 1981 में तेहरान की एक मस्जिद में भाषण के दौरान खामेनेई पर बम हमला हुआ। उसी साल एक और बम धमाके में तत्कालीन राष्ट्रपति की मौत हो गई। इसके बाद हुए चुनाव में खामेनेई भारी बहुमत से जीतकर ईरान के तीसरे राष्ट्रपति बने। 1989 में खोमैनी के निधन के बाद खामेनेई को देश का सर्वोच्च नेता यानी ‘रहबर’ बनाया गया। इसके लिए संविधान में बदलाव भी किया गया। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का मजबूत रक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक उन पर सख्त और कट्टर शासन चलाने का आरोप लगाते हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की पत्नी की भी मौत ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के 2 दिन बाद उनकी पत्नी मंसूरेह खोझस्तेह बघेरजादेह का भी निधन हो गया है। मंसूरेह दो दिन पहले अमेरिका और इजराइल के हमले में घायल हुई थीं। इसी हमले में खामेनेई मारे गए थे। ईरान की सरकारी मीडिया ने पुष्टि की है कि मंसूरेह ने सोमवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मंसूरेह ने 1964 में अयातुल्ला अली खामेनेई से शादी की थी। उस वक्त खामेनेई एक युवा धर्मगुरु के रूप में सक्रिय थे। 1947 में मशहद में जन्मीं मंसूरेह एक धार्मिक परिवार से आती हैं। उनके पिता आयतुल्लाह मोहम्मद बघेर खोझस्तेह मशहद के प्रतिष्ठित धर्मगुरु थे। सर्वोच्च नेता की पत्नी होने के बावजूद मंसूरेह ने सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन से दूरी बनाए रखी। (फाइल फोटो) पिछले साल ईरान के कई न्यूक्लियर वैज्ञानिक मारे गए थे जून 2025 के 12 दिनों के युद्ध में इजराइल ने ईरान के कई न्यूक्लियर वैज्ञानिकों और बड़े अधिकारियों को मारा था। उस समय ईरान के एयर डिफेंस को साइबर अटैक, छोटे ड्रोन और सटीक मिसाइलों से नष्ट किया गया था। इजराइल ने स्पैरो मिसाइल इस्तेमाल की, जो 1000 किलोमीटर से
अब कस्टमाइज्ड सिनेमा का दौर:बटन दबाते ही रेगिस्तान में बदलेगा बर्फीले इलाके का दृश्य, IIM-IIT की तर्ज पर क्रिएटिव टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट; एनिमेशन, विजुअल इफैक्ट के क्रिएटर होंगे तैयार

आने वाला समय इंटरएक्टिव, कस्टमाइज्ड और इमर्सिव सिनेमा का है। दर्शक सिर्फ फिल्म देखेंगे नहीं, बल्कि महसूस करेंगे। फर्ज कीजिए थिएटर में एक दृश्य में रेगिस्तान का बैकग्राउंड है। आप इसे लद्दाख की बर्फीली वादियों में देखना चाहते हैं। रिमोट कंट्रोल का बटन दबाते ही दृश्य बदल जाएगा। दृश्य 360 डिग्री घुमाकर किसी भी एंगल से देख सकेंगे। थियेटर में अगर 40 दर्शक हैं तो सब अपनी पसंद के एंगल से फिल्म देख सकेंगे। 8 साल पहले आई हॉलीवुड फिल्म रियल प्लेयर वन में दिखाई विशाल वर्चुअल दुनिया ओएसिस की तरह दर्शक स्पर्श, कंपन, गर्मी, सर्दी, हवा और दूरी का अहसास कर पाएंगे। इसके लिए बॉडी सूट, ग्लव्ज और वीआर हेडसेट पहनने होंगे। यह अभी उपलब्ध 4डी सिनेमा से अलग है, जहां सीट हिलती है, पानी के छींटे पड़ते हैं या खुशबू आती है। इमर्सिव सिनेमा में वर्चुअल एक्शन का असर होगा, जिसमें एवीजीसी एक्सआर (एनिमेशन, विजुअल इफैक्ट, गेमिंग, कॉमिक्स व एक्सटेंडेट रियलिटी) का हर पहलू शामिल है। मुंबई के एनएफडीसी कैंपस स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी (आईआईसीटी) में एवीजीसी एक्सआर के हर पहलू के लिए आधुनिक लैब व स्टूडियो हैं। सीईओ निनाद रायकर कहते हैं कि डीम्ड यूनिवर्सिटी दर्जे के बाद एनिमेशन, गेमिंग जैसे स्पेशलाइज्ड यूजी-पीजी कोर्स शुरू होंगे। अभी 19 डिप्लोमा-सर्टिफिकेट कोर्स हैं। संस्थान ने करिकुलम, रिसर्च व इनोवेशन के लिए नेटफ्लिक्स, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एपल, मेटा समेत 24 संस्थानों को भागीदार बनाया है। 2030 तक 20 लाख प्रोफेशनल की जरूरत 2030 तक इस इंडस्ट्री को 20 लाख प्रोफेशनल की जरूरत होगी। ऑरेंज इकोनॉमी के लिए बजट में घोषित 15 हजार स्कूलों व 500 कॉलेजों में छात्रों को एनिमेशन, विजुअल इफैक्ट्स जैसे क्षेत्रों में कुशल बनाने के लिए एवीजीसी कंटेंट क्रिएशन लैब का खाका जल्द तैयार होगा। सरकार की योजना एक मॉडल आईआईसीटी विकसित करने के बाद आईआईटी व आईआईएम की तर्ज पर देश में अलग-अलग जगह आईआईसीटी स्थापित करने की है। हॉलीवुड की 60% फिल्मों का प्रोसेस भारत में- सलिल देशपांडे फैकल्टी, आईआईसीटी भारत में भी एवीजीसी एक्सआर सेक्टर के लैब हैं। हॉलीवुड की 60% फिल्मों के कुछ हिस्से और दुनिया की 10% फिल्मों का एवीजीसी एक्सआर जॉब बैकएंड वर्क भारत में होता है। राजामौली जैसे फिल्मकार हैदराबाद की अन्नपूर्णा लैब इस्तेमाल करते हैं। भारत में अभी रोटोमेशन, रोटोस्कॉपिंग, मैचमूव, ट्रैकिंग, क्लीनअप, पेंट, क्राउड सिमुलेशन, लाइटिंग सपोर्ट का काम होता है। भारत बैकएंड पर काम करता है। करीब 80 लाख लोग जुड़े हैं। पर, भारत कॉन्सेप्ट डिजाइन यानी कहानी, कैरेक्टर, क्रिएटिव कंट्रोल, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (आईपी) पर मालिकाना हक नहीं रखता। ऑरेंज इकोनॉमी में हिस्सेदारी बढ़ाने का लाभ बैकएंड से फ्रंटफुट पर जाने में मिलेगा। आईआईसीटी की क्षमता आज ही अवतार जैसी फिल्मों के 40-50 फीसदी निर्माण की है। अभी आईआईसीटी 10 स्टार्टअप को इंक्यूबेट भी कर रही है।
ब्यूटी टिप्स: चेहरे पर पपीते के साथ लगाएं ये एक चीज, चांद जैसा आएगा निखार

सौंदर्य युक्तियाँ: इस भाग में दौड़ भरी जिंदगी, प्रदूषण और तनाव का सबसे पहला असर हमारे चेहरे पर दिखता है। बाजार में मिलने वाले सुपरमार्केट और फ़्लोरिंग के लिए थोड़े समय के लिए तो चमक दे देते हैं, लेकिन लंबे समय में इन केमिकल स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में अगर आप प्राकृतिक और सुरक्षित तरीके से अपनी त्वचा को निखारना चाहती हैं, तो आपकी रसोई में ही छिपा हुआ है। आइए इस लेख में पपीता और दही से बने फेस पैक के बारे में विस्तार से बताया गया है। जिससे आप पर असर दिख सकता है। पपीता और दही के लिए क्यों है स्वादिष्ट? पपीते में पपेन नाम का एंजाइम होता है, जो डेड स्किन सेल्स को स्किन को एक्सफोलिएट करता है। विटामिन ए, सी और ई प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो आहार को कम करने में मदद करते हैं। वहीं दही में लैक्टिक एसिड होता है। यह केवल त्वचा की गहराई से सफाई नहीं करता है, बल्कि पोर्स को टाइट करने में मदद करता है। जब ये दोनों मिलते हैं, तो त्वचा को पोषण और ग्लो का डबल डोज मिलता है। फेसबुक पैक कैसे बनायें? 2-3 बड़े टुकड़े पका हुआ पपीता1 बड़ा जेनरेटर देवीआधा हिस्सा पपीता और दही से फ़ैस पैक कैसे खरीदें? एक कटोरे में मैश किए हुए पपीते और दही को तब तक हिलाया जब तक कि एक स्टोलोजी पेस्ट न बन जाए।अगर तुम्हारी खाल बहुत बड़ी अजीब है, तो इसमें थोड़ा सा शहद भी मिला लें।अपने चेहरे को किसी भी माइल्ड क्लींजर से साफ करें।इस पैक को चेहरे और गर्दन पर समान रूप से पहनें।इसे 15 से 20 मिनट तक इन्वेंटरी डेस्टिनेशन तक।सर्दी या गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। पपीता और दही का फेस पैक लगाने के फायदे पपीता त्वचा की ऊपरी बेजान परत को हटा देता है, जिससे चेहरा तुरंत खिला-खिला और चमकदार दिखने लगता है।नियमित रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले फेस के काले गोदाम, झा अवशेष और दाग-धब्बे के आभूषण समाप्त हो रहे हैं।पपीते के एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा के प्लास्टर को बनाए रखते हैं, जिससे आपकी उम्र पहले से ही कम हो जाती है।दही की ठंडक टैनिंग ख़त्म होती है।
होली सेलिब्रेशन में बच्चों का रखें खास ख्याल, स्किन और हेयर को रंगों से बचाने के लिए अपनाएं ये टिप्स

Last Updated:March 03, 2026, 11:48 IST Holi 2026 Safety Tips: : होली रंगों और उल्लास का त्योहार है, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को खुशियों से भर देता है. यह त्योहार न केवल रंगों के साथ मनाया जाता है, बल्कि इसमें मिठाइयां, गाना-बजाना और दोस्तों व परिवारजनों के साथ मेलजोल भी शामिल होता है. इस त्योहार के लिए सबसे ज्यादा एक्साइटेड बच्चे रहते हैं. इसलिए होली के दौरान बच्चों की सेफ्टी का खास ध्यान रखना बेहद जरूरी है. (रिपोर्ट: वंदना रेवांचल तिवारी/रीवा) होली के त्योहार का इंतजार बड़ो से ज्यादा बच्चों को रहती है. रंग खेलने की खुमारी उनके सिर चढ़ बोलती है. बच्चे अक्सर इस दिन इतने उत्साहित होते हैं कि वे अपनी सेफ्टी को लेकर लापरवाह हो जाते हैं या उन्हें पता नहीं होता कि किस चीज से उन्हें नुकसान पहुंच सकता है. कई बार छोटी-मोटी लापरवाही इस खुशियों के त्यौहार में रंग में भंग डालने का काम कर देती है. ऐसे में माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ रखें. आइए जानते हैं कि रीवा सुपर स्पेशलिस्टी हॉस्पिटल के अधीक्षक डाॅक्टर अक्षय श्रीवास्तव क्या सलाह दे रहें है होली के दौरान बच्चों को किन चीजों से दूर रखना चाहिए. होली के दौरान बाजार में मिलने वाले ज्यादातर रंग केमिकल से बने होते हैं, जो त्वचा और आंखों के लिए हानिकारक हो सकते हैं. बच्चों की त्वचा नाजुक होती है, इसलिए उन्हें ऐसे रंगों से दूर रखना चाहिए. केमिकल वाले रंगों से एलर्जी, खुजली, रैशेज और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. Add News18 as Preferred Source on Google अपने शिशु को हल्के रंग के लॉन्ग स्लीव्स, मुलायम और ब्रीदेबल कपड़ों से बने कॉटन पैंट्स पहनाएं. इससे रंगों के सीधे संपर्क में आने से बचाव होगा. होली के दौरान उनकी आंखों को सुरक्षित रखने के लिए बेबी-सेफ गॉगल या धूप के चश्मे लगा सकते हैंय बच्चों के लिए हर्बल या नेचुरल रंगों का इस्तेमाल करें, जो घर पर भी बनाए जा सकते हैं. चुकंदर, हल्दी, पालक और गुलाबजल जैसी प्राकृतिक चीजों से बने रंग ज्यादा सेफ होते हैं. बच्चों को होली खेलने के लिए सुरक्षित जगह चुनें. भीड़भाड़ वाले इलाकों या सड़क किनारे होली खेलने से बचें, क्योंकि इससे दुर्घटना होने का खतरा रहता है. बच्चों को घर के आंगन या पार्क में होली खेलने के लिए प्रोत्साहित करें. छत पर भी होली खेलने के लिए बिना किसी की निगरानी के न भेजें. होली के बाद अपने बच्चों साफ पानी से जरूर नहलाएं.बच्चे की त्वचा को ठंडक पहुंचाने के लिए बेबी लोशन लगाएं. इसके खुजली या रैशेज से बचाव के लिए अपने बच्चे को ध्यान से देखें. किसी भी प्रकार के असामान्य लक्षण नजर आते हैं तो तुरंत ही डॉक्टर की सलाह लें. First Published : March 03, 2026, 11:48 IST
विजय-रश्मिका की संगीत नाइट की तस्वीरें सामने आईं:शादी के 5 दिन बाद कपल ने किया पोस्ट; सेरेमनी में किया रोमांटिक डांस

रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने शादी के पांच दिन बाद मंगलवार को अपने संगीत समारोह की कई तस्वीरें और वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किए। रश्मिका और विजय ने अपनी पोस्ट में इस रात को “प्यार, खुशी के आंसू, हंसी, म्यूजिक और डांस से भरी रात” बताया। उन्होंने लिखा, “यह हमारे लिए सबसे मजेदार रात थी। मैं और विजय एक-दूसरे को सरप्राइज देना चाहते थे। परिवार भी हमें सरप्राइज देना चाहता था। हम सभी को खुलकर डांस करते देख बहुत खुश और हैरान थे। 24.2.26 की रात, जब हम दोनों परिवार और दोस्तों के बीच एक साथ डांस कर रहे थे।” देखें संगीत नाइट की तस्वीरें दोनों का संगीत 24 फरवरी को हुआ था। वहीं, दोनों ने 26 फरवरी को राजस्थान के उदयपुर में शादी की। दोनों की शादी एक प्राइवेट सेरेमनी में आईटीसी ममेंटोस रिसॉर्ट में हुई। शादी दो अलग परंपराओं से संपन्न हुई। सुबह तेलुगु रीति-रिवाजों से विवाह हुआ, जबकि शाम को रश्मिका की कोडवा परंपरा के अनुसार रस्में निभाई गईं। 4 मार्च को हैदराबाद में रिसेप्शन अब दोनों 4 मार्च को हैदराबाद में ग्रैंड वेडिंग रिसेप्शन देने वाले हैं। रविवार को जारी ऑफिशियल अनाउंसमेंट लेटर में कपल ने बताया कि यह रिसेप्शन सिर्फ इनविटेशन वाला इवेंट होगा। इसे खास गैदरिंग के तौर पर प्लान किया गया है। इसमें तेलुगु, हिंदी, तमिल, मलयालम और कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को बुलाया गया है। साथ ही कुछ पॉलिटिकल और एडमिनिस्ट्रेटिव सर्कल के खास मेहमान भी शामिल होंगे। हाई-प्रोफाइल गेस्ट्स के कारण सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए हैं। लोकल अधिकारियों से बात कर अतिरिक्त सिक्योरिटी रखी गई है। गेस्ट लिस्ट को सीमित किया गया है। एंट्री सिर्फ वैलिड ऑफिशियल इनविटेशन वाले मेहमानों को ही मिलेगी।
‘चुप्पी ही त्याग है’: संपादकीय में सोनिया गांधी ने खामेनेई की हत्या पर भारत के रुख पर सवाल उठाए | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 03, 2026, 10:57 IST सोनिया गांधी ने तर्क दिया कि इस तरह की चुप्पी संप्रभुता, गैर-हस्तक्षेप और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर आधारित भारत की लंबे समय से चली आ रही विदेश नीति से विचलन को दर्शाती है। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी | फ़ाइल छवि जैसे ही पश्चिम एशिया युद्ध चौथे दिन में प्रवेश कर गया, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक संपादकीय में अमेरिकी-इजरायल हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली होसैनी खामेनेई की हत्या पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाया। इंडियन एक्सप्रेस. सोनिया गांधी ने क्या कहा? “ईरान नेता की हत्या पर सरकार की चुप्पी तटस्थ नहीं है, यह त्याग है” शीर्षक वाले अपने लेख में सोनिया गांधी ने लिखा कि ईरान ने 1 मार्च को पुष्टि की कि उसके सर्वोच्च नेता की पिछले दिन संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए लक्षित हमले में हत्या कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि चल रही बातचीत के दौरान एक मौजूदा राष्ट्रप्रमुख की हत्या अंतरराष्ट्रीय संबंधों में गंभीर दरार का प्रतीक है, उन्होंने कहा कि नई दिल्ली की चुप्पी इस घटना की तरह ही मजबूती से सामने आई है। उनके अनुसार, भारत सरकार ने हत्या या ईरानी संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा करने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि प्रधान मंत्री कार्यालय ने हत्या की परिस्थितियों का उल्लेख करने से बचते हुए केवल एक संक्षिप्त शोक संदेश जारी किया, और यह अस्पष्टता बाद में वैश्विक राजनयिक प्रतिक्रियाओं के बावजूद “स्पष्ट शांति” में बदल गई। भारत की विदेश नीति पर सोनिया गांधी गांधी ने तर्क दिया कि इस तरह की चुप्पी संप्रभुता, गैर-हस्तक्षेप और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर आधारित भारत की लंबे समय से चली आ रही विदेश नीति से विचलन को दर्शाती है। उन्होंने लिखा कि भारत ने ऐतिहासिक रूप से पश्चिम एशिया और लैटिन अमेरिका सहित सभी क्षेत्रों में लक्षित हत्याओं और बल के अतिरिक्त-क्षेत्रीय उपयोग का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि बातचीत और शांतिपूर्ण संघर्ष समाधान की वकालत करने वाली ग्लोबल साउथ की आवाज के रूप में भारत की विश्वसनीयता कमजोर हो गई है। जिसे कई लोग अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का उल्लंघन मानते हैं, उसकी निंदा न करके उन्होंने कहा कि भारत अपने सिद्धांतों में चयनात्मक दिखने का जोखिम उठा रहा है। संपादकीय में कहा गया है कि संकट के दौरान चुप्पी सहयोगियों, विरोधियों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संकेत भेजती है, जिससे पता चलता है कि भूराजनीतिक सुविधा मानदंडों के प्रति प्रतिबद्धताओं से अधिक हो सकती है। गांधी ने चेतावनी दी कि इससे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और नियम-आधारित बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को आकार देने में मदद करने की उसकी महत्वाकांक्षा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने रक्षा, प्रौद्योगिकी और राजनीतिक सहयोग में इज़राइल के साथ भारत के गहरे संबंधों को स्वीकार किया, लेकिन तर्क दिया कि साझेदारी मूलभूत सिद्धांतों की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने लिखा, विदेश नीति में संतुलन की आवश्यकता है। सोनिया गांधी ने आगाह किया कि शक्तिशाली देशों को बिना परिणाम के विदेशी नेताओं को खत्म करने की अनुमति देने से अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था प्रतिशोधात्मक हिंसा और अस्थिरता की ओर बढ़ सकती है। उन्होंने कहा, छोटे देश जबरदस्ती और एकतरफा आक्रामकता से सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून पर भरोसा करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के सभ्यतागत लोकाचार और संवैधानिक मूल्य शांति, संवाद और संप्रभुता के सम्मान पर जोर देते हैं और इन सिद्धांतों को छोड़ने से नैतिक प्रतिष्ठा और वैश्विक विश्वास दोनों कमजोर हो सकते हैं। स्पष्टता का आह्वान करते हुए, उन्होंने लिखा कि जब सिद्धांतों का परीक्षण किया जाता है तो लोकतंत्र का मूल्यांकन साहस से किया जाता है और उन्होंने भारत से अपनी आवाज पुनः प्राप्त करने का आग्रह किया, उन्होंने कहा कि चिंता की स्पष्ट अभिव्यक्ति एक न्यायपूर्ण और स्थिर विश्व व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि करेगी। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि “इस संदर्भ में, चुप्पी विवेक नहीं है। यह त्याग है।” राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ संपादकीय पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि जब किसी विदेशी नेता की लक्षित हत्या पर भारत की ओर से संप्रभुता या अंतरराष्ट्रीय कानून का कोई स्पष्ट बचाव नहीं होता है, तो यह देश की विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर संदेह पैदा करता है। उन्होंने कहा कि भारत को संप्रभुता और शांति के लिए खड़ा होना चाहिए और अपनी नैतिक ताकत को फिर से खोजना चाहिए। “जब किसी विदेशी नेता की लक्षित हत्या से हमारे देश की संप्रभुता या अंतरराष्ट्रीय कानून की कोई स्पष्ट रक्षा नहीं होती है, और निष्पक्षता को छोड़ दिया जाता है, तो यह हमारी विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता के बारे में गंभीर संदेह पैदा करता है। इस उदाहरण में, चुप्पी नहीं है… pic.twitter.com/LJECs5jPHR– राहुल गांधी (@RahulGandhi) 3 मार्च 2026 शिव सेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस टिप्पणी का समर्थन किया और कहा कि सरकार की चुप्पी “तटस्थ नहीं” थी और उन्होंने कॉलम को एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और कहा कि जब भारत किसी चीज के लिए खड़ा होना बंद कर देता है, तो वह किसी भी चीज के लिए गिरने का जोखिम उठाता है। ‘ईरान नेता की हत्या पर सरकार की चुप्पी तटस्थ नहीं है, यह त्याग है’जैसा कि मैंने पहले कहा था, जिस क्षण भारत किसी चीज के लिए खड़ा होना बंद कर देता है वह किसी भी चीज के लिए गिरने को तैयार हो जाता है। इससे अधिक सहमत नहीं हो सकता, अवश्य पढ़ें, श्रीमती सोनिया गांधी का एक महत्वपूर्ण कॉलम। pic.twitter.com/dwSL95g4gO– प्रियंका चतुवेर्दी🇮🇳 (@priyankac19) 3 मार्च 2026 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में पूर्ण पैमाने पर युद्ध छिड़ गया, जब अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त रूप से ईरानी रणनीतिक स्थलों पर हमला किया, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या कर दी और रुकी हुई परमाणु वार्ता के बीच परमाणु, सैन्य और नेतृत्व के आंकड़ों को निशाना बनाया। जगह : दिल्ली, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 03, 2026, 10:57 IST समाचार राजनीति ‘चुप्पी ही त्याग है’: संपादकीय में सोनिया गांधी ने खामेनेई की हत्या पर भारत के रुख पर सवाल उठाए अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट
Indias Silence on Khameneis Death Criticized by Sonia Gandhi

नई दिल्ली1 दिन पहले कॉपी लिंक सोनिया ने कहा- वर्तमान में जारी कूटनीतिक चर्चा के बीच किसी वर्तमान राष्ट्राध्यक्ष की हत्या समकालीन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में गंभीर टूट है। कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर भारत सरकार की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा- दिल्ली की चुप्पी हैरान करने वाली है, यह तटस्थता (न्यूट्रल) नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से पीछे हटना है। मंगलवार को इंडियन एक्सप्रेस में पब्लिश आर्टिकल में उन्होंने लिखा- 1 मार्च को ईरान ने पुष्टि की कि उसके सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की एक दिन पहले अमेरिका और इजराइल के टारगेटेड अटैक में हत्या कर दी गई। जब दो देशों की डिप्लोमैट लेवल की बातचीत चल रही हो, तब एक मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की हत्या अंतरराष्ट्रीय संबंधों में गंभीर दरार को दिखाती है। सोनिया ने लिखा कि भारत सरकार ने न तो हत्या की निंदा की और न ही ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। मोदी ने अमेरिका-इजराइल के हमले को अनदेखा किया, केवल यूएई पर ईरान की जवाबी कार्रवाई की निंदा की। बाद में पीएम ने ‘गहरी चिंता’ और ‘बातचीत व कूटनीति’ की बात कही। जबकि हमला उस समय हुआ, जब दो देशों के बीच कूटनीतिक प्रक्रिया जारी थी। सोनिया गांधी के आर्टिकल की 5 बड़ी बातें… 1. बिना युद्ध घोषणा के हत्या यह हत्या बिना किसी औपचारिक युद्ध की घोषणा और उस समय की गई, जब बातचीत की प्रक्रिया चल रही थी। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) के मुताबिक, किसी भी देश की सीमाओं या उसकी राजनीतिक आजादी के खिलाफ बल प्रयोग या धमकी देना गलत है। किसी मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की टारगेट किलिंग इन नियमों के खिलाफ है। अगर दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भी इस पर आवाज नहीं उठाता तो अंतरराष्ट्रीय नियम कमजोर पड़ सकते हैं। 2. प्रधानमंत्री का इजराइल दौरा हत्या से सिर्फ 48 घंटे पहले प्रधानमंत्री इजराइल यात्रा से लौटे थे। वहां उन्होंने बेंजामिन नेतन्याहू सरकार के समर्थन की बात दोहराई। यह उस समय हुआ, जब गाजा संघर्ष में बड़ी संख्या में आम नागरिक, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, मारे जाने पर दुनियाभर में नाराजगी है। 3. ग्लोबल साउथ और ब्रिक्स देशों का रुख ग्लोबल साउथ के कई देशों और ब्रिक्स के साझेदार रूस व चीन ने इस मामले में दूरी बनाए रखी है। ऐसे समय में भारत का खुला समर्थन, बिना साफ नैतिक रुख के, गलत संदेश दे सकता है। सोनिया गांधी के अनुसार, इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया भर में दिखेगा। 4. बमबारी और टारगेट किलिंग की निंदा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ईरान की जमीन पर हुई बमबारी और टारगेट किलिंग की साफ निंदा करती है। ये क्षेत्र और दुनिया के लिए खतरनाक कदम है। पार्टी की ईरान की जनता और दुनिया भर के शिया समुदाय के प्रति संवेदनाएं हैं। 5. संविधान का हवाला भारत के संविधान के अनुच्छेद 51 में कहा गया है कि देशों के बीच विवाद बातचीत से सुलझाए जाने चाहिए, सभी देशों की बराबरी का सम्मान होना चाहिए और किसी के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। ये सिद्धांत लंबे समय से भारत की विदेश नीति का आधार रहे हैं। मौजूदा चुप्पी इन सिद्धांतों से मेल नहीं खाती। सोनिया ने किया- भारत और ईरान के संबंधों का जिक्र सोनिया गांधी ने कहा कि 1994 में OIC के कुछ देशों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ प्रस्ताव लाने की कोशिश की थी। उस समय ईरान ने अहम भूमिका निभाकर उसे रुकवाया, जिससे कश्मीर मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं पहुंच सका। ईरान ने पाकिस्तान सीमा के पास ज़ाहेदान में भारत को कूटनीतिक मौजूदगी की अनुमति दी, जो ग्वादर पोर्ट और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अप्रैल 2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने तेहरान दौरे में दोनों देशों के गहरे संबंधों को दोहराया था। सोनिया का इजराइल-भारत के संबंध और विश्वसनीयता का सवाल सोनिया ने लिखा कि हाल के सालों भारत-इजराइल संबंध रक्षा, कृषि और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बढ़े हैं। भारत के तेहरान और तेल अवीव दोनों से संबंध हैं, इसलिए वह संयम की अपील कर सकता है। लेकिन यह तभी संभव है जब उसकी विश्वसनीयता बनी रहे और वह सिद्धांत आधारित रुख अपनाए। सोनिया गांधी ने कहा कि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। गल्फ वॉर यमन, इराक और सीरिया जैसे संकटों में भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा इसलिए कर सका, क्योंकि उसे स्वतंत्र और निष्पक्ष देश माना जाता था, न कि किसी शक्ति का प्रतिनिधि। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत की विदेश नीति गुटनिरपेक्षता पर आधारित रही जो निष्क्रिय तटस्थता नहीं, बल्कि रणनीतिक स्वायत्तता थी। मौजूदा स्थिति उस रुख के कमजोर पड़ने का संकेत देती है। यदि ईरान के मामले में संप्रभुता की अनदेखी पर भारत स्पष्ट नहीं बोलता, तो छोटे देश भविष्य में उस पर कैसे भरोसा करेंगे? सोनिया ने संसद में बहस की मांग की सोनिया गांधी ने कहा कि संसद की अगली बैठक में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की टारगेट किलिंग, उस पर भारत सरकार की चुप्पी और इसके चलते अंतरराष्ट्रीय कानून व संप्रभुता के सिद्धांतों का कमजोर होने के मुद्दे पर खुली बहस होनी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का विनाश और पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता भारत के रणनीतिक और नैतिक हितों से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की बात करता रहा है, जो केवल औपचारिक नारा नहीं, बल्कि न्याय, संयम और संवाद की प्रतिबद्धता है। ऐसे समय में जब नियम-आधारित व्यवस्था दबाव में है, चुप रहना जिम्मेदारी से पीछे हटना है। …………………………. सोनिया गांधी का यह आर्टिकल भी पढ़ें… सोनिया बोलीं-ईरान पुराना दोस्त, भारत की चुप्पी परेशान कर रही: इजराइल के हमलों पर सरकार को मजबूती से बोलना चाहिए, अभी देर नहीं हुई कांग्रेस की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने ईरान पर इजराइली हमले की निंदा की थी। उन्होंने द हिंदू में एक आर्टिकल में लिखा थआ इजराइल खुद परमाणु शक्ति है, लेकिन ईरान को परमाणु हथियार न होने पर भी टारगेट किया जा रहा है। ये इजराइल का दोहरा मापदंड है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान भारत का
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Hindi News National Breaking News Headlines Today, Pictures, Videos And More From Dainik Bhaskar 4 मिनट पहले कॉपी लिंक राज्य में आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले, असम सरकार ने सोमवार को पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन में बड़ा फेरबदल किया, जिसके चलते 17 IPS और APS अधिकारियों का ट्रांसफर और पोस्टिंग की गई। आज की बाकी बड़ी खबरें… हाथरस में एक्सप्रेस-वे पर बस-कार की टक्कर, 6 की मौत यूपी के हाथरस में यमुना एक्सप्रेस-वे पर मंगलवार तड़के डबल डेकर बस ने चलती ईको वैन को पीछे टक्कर मार दी। हादसे में कार सवार 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि 7 लोग घायल हो गए। मौके पर चीख-पुकार मच गई। एक्सप्रेस वे पर लंबा जाम लग गया। बस दिल्ली से गोरखपुर, जबकि कार दिल्ली से धौलपुर जा रही थी। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
बाथरूम में युवती की लाश, बदन पर चाकू के जख्म:मां के साथ सो रही थी दूसरी बेटी, कौन था हमलावर…खून किसने साफ किया?

मध्यप्रदेश क्राइम फाइल्स में आज एक ऐसे मर्डर केस की कहानी, जिसने दो राज्यों में सुर्खियां बटोरीं। मामला नरसिंहपुर जिले में एक युवती की संदिग्ध मौत का था। इसने पुलिस को उलझन में डाल दिया था। परिवार इसे बाथरूम में फिसलकर हुई दुर्घटना बता रहा था, लेकिन जांच में जो सच सामने आया, उसने सभी के होश उड़ा दिए। उसकी हत्या किसने और क्यों की? क्या मां-बेटी ही कातिल थीं या कोई बाहरी कत्ल करके फरार हो चुका था? आखिर क्या था पूरा मामला-पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 22 फरवरी की शाम करीब 4 बजे सुरेंद्र ढिमोले अपने फार्महाउस पर काम कर रहे थे। तभी उनकी भांजी खुशबू का घबराया हुआ फोन आया-“मामा, जल्दी आइए… शिखा बाथरूम में गिर गई है… हालत ठीक नहीं है… अस्पताल ले जाना है।” सुरेंद्र बिना देर किए बहन के घर पहुंचे। घर के भीतर अजीब-सी खामोशी थी। बाथरूम के पास शिखा बेहोश पड़ी थी। शरीर ढीला, चेहरा नीला। सुरेंद्र ने तुरंत एंबुलेंस को कॉल किया और शिखा को लेकर अस्पताल पहुंचे। घर में सिर्फ तीन लोग, दोपहर तक सब सामान्य घर में सिर्फ तीन लोग ही रहते थे। शिखा, खुशबू और उनकी मां बबली। शिखा घर की सबसे छोटी बेटी थी। दोपहर को सभी ने खाना खाया और सोने चले गए। 4 बजे खुशबू की नींद खुली तो वह बाथरूम की तरफ गई, जहां देखा कि शिखा बेहोश पड़ी है। मां और बहन को कुछ समझ नहीं आ रहा था यह सब अचानक कैसे हो गया। परिजन हैरान थे कि बाथरूम में फिसलने से मौत कैसे हो गई? दोपहर तक सबके साथ हंसती-खेलती घर वालों की दुलारी शिखा अब उनके बीच नहीं रही। डॉक्टरों को दिखे संदिग्ध निशान डॉक्टरों ने देखा कि शरीर पर कई जगह चोट के निशान थे। गर्दन के आसपास के घाव सामान्य गिरने जैसे नहीं लग रहे थे। कुछ कटे हुए निशान भी थे। डॉक्टरों को मामला संदिग्ध लगा तो पुलिस को सूचना दी। अस्पताल पहुंची पुलिस को शिखा की मौत संदेहास्पद लगी, लिहाजा शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घर वाले शिखा की मौत बाथरुम में गिरने से बता रहे थे। पुलिस ने घर का निरीक्षण किया। बाथरूम के फर्श पर पानी था, लेकिन खून के स्पष्ट निशान नहीं। शिखा का किसी से विवाद नहीं था पुलिस कों संदेह था कि शिखा की हत्या की गई, लेकिन घर वालों को खुद समझ नहीं आ रहा था कि आखिर शिखा की हत्या कौन और क्यों करेगा? न शिखा का कोई बॉयफ्रेंड था और ना ही कभी उसने किसी ऐसे लड़के के परेशान करने की बात का जिक्र किया था। लिहाजा जांच अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिक गई जो सबसे अहम थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही शिखा की मौत की असली वजह साफ हो सकती थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदली कहानी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो उसने कहानी की दिशा ही बदल दी। रिपोर्ट में शरीर पर धारदार हथियार से किए गए कई घाव पाए गए, जिनमें सबसे गंभीर जख्म गर्दन पर थे। गर्दन पर 6 गहरे घाव थे, श्वास नली कटी हुई थी। सिर और चेहरे पर भी बेरहमी से हमला सिर के बाएं हिस्से में घाव और खोपड़ी के अंदर रक्तस्राव मिला। बाएं गाल, आंख, जबड़े और कान पर कटे घाव व सूजन थी। चेहरे पर भी हमला किया गया था। कोहनी, हाथ की अंगुली पर छिले घाव व नीले निशान थे। छाती के बीच में सूजन था। चाकू से कटने का निशान भी था। दोनों पैरों के जोड़ों पर रस्सी से बांधने जैसे निशान थे। हाथ-पैर बांधकर चाकू मारा गया पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने अपना मत दिया कि लड़की की मौत फिसलने से नहीं हुई, बल्कि उसकी बर्बर तरीके से हत्या की गई है। उसके हाथ-पैर बांधकर उसकी गर्दन पर कई बार चाकू मारा गया। फिर पत्थर जैसी वस्तु पर उसे पटका गया। क्या घर के भीतर ही छिपा था राज? अब यह साफ हो चुका था कि यह कोई साधारण हादसा नहीं है, बल्कि शिखा की बेरहमी से हत्या की गई। अब सवाल ये था कि अगर यह हत्या है, तो हत्यारा कौन है? घर में जबरन किसी के घुसने के निशान नहीं थे। लूटपाट नहीं तो क्या हत्यारा घर का ही कोई था? पुलिस ने मां और बहन से पूछताछ की। मां ने बताया कि दोपहर करीब 12 बजे खाना खा कर सो गई थी, करीब चार बजे जब उठी तो देखा कि शिखा बाथरूम में बेसुध हालत में गिरी है। खुशबू ने भी बेहोशी की हालत में शिखा को देखने के बाद मामा को फोन कर घर आने और शिखा को अस्पताल ले जाने की बात कही। दोनों का बयान एक जैसा था- ‘वह बाथरूम में फिसल गई थी।’ कॉल डिटेल में मिला नया सुराग पुलिस ने कॉल डिटेल खंगालनी शुरू की, वह किससे बात करती थी? घटना के समय लोकेशन पर कौन-कौन मौजूद था, पुलिस ने रिकॉर्ड मोबाइल कंपनी से निकलवाया। तो एक ऐसे शख्स का सुराग हाथ लगा जिसकी मोबाइल लोकेशन इससे पहले उस इलाके में कभी नहीं पाई गई थी। ये हादसा अब एक पहेली बन चुका था। इन सवालों के जवाब जानिए पार्ट 2 में- – क्या इस दौरान कोई बाहरी आदमी आया था? – शिखा की हत्या किसने और क्यों की? – शिखा का कत्ल घर के अंदर बेरहमी से किया गया तो उसकी मां और बहन खुशबू को पता क्यों नहीं चला। – क्या उसकी जिंदगी में कोई ऐसा राज था जो अब तक सामने नहीं आया? – वह कौन था जिसकी लोकेशन उस इलाके में पहली बार पाई गई थी?








