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महुआ के पेड़ का हर हिस्सा है काम का! पाचन से लेकर त्वचा तक देता है फायदा, ऐसे करें इस्तेमाल

महुआ

Last Updated:March 11, 2026, 15:38 IST गर्मी का मौसम शुरू होते ही महुआ के पेड़ों पर फूलों की बहार आ जाती है. यह फूल स्वाद में हल्के मीठे होते हैं और ग्रामीण इलाकों में इन्हें कई तरह के व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाता है. महुआ सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि अपने औषधीय गुणों के कारण भी खास माना जाता है. इसके फूल, बीज और छाल में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचाते हैं. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई क्षेत्र में महुआ के पेड़ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं. महुआ का फल स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग महुआ के फल की सब्जी बनाकर इसका सेवन करते हैं. यह फल खासतौर पर गर्मियों के मौसम में मिलता है और इसे एक अत्यंत पौष्टिक व औषधीय वनस्पति माना जाता है. महुआ में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं. इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन और विटामिन भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं. महुआ के फूलों को सुखाकर भी खाया जाता है. कई लोग महुआ के फूलों से बने लड्डू और खीर खाना पसंद करते हैं. खासतौर पर सर्दियों के मौसम में महुआ के लड्डू काफी फायदेमंद माने जाते हैं, इसलिए इस समय इसकी डिमांड भी बढ़ जाती है. गर्मी का मौसम शुरू होते ही महुआ के पेड़ों पर फूलों की बहार आ जाती है. हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि इसी पेड़ के बीज से निकलने वाला तेल त्वचा के लिए किसी वरदान से कम नहीं होता. महुआ के बीज का तेल चेहरे की चमक बढ़ाने, रूखी त्वचा को ठीक करने और चर्म रोग में राहत देने में मददगार माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google महुआ के फूलों का इस्तेमाल कई आयुर्वेदिक औषधियों में किया जाता है. यह पाचन तंत्र को मजबूत करने के साथ शरीर को ठंडक भी प्रदान करता है. इसी वजह से गर्मियों के मौसम में महुआ के फूलों की डिमांड बढ़ जाती है. बाजारों में महुआ के फूल 100 रुपये से अधिक कीमत पर बिकते हैं. खाने में हल्का मीठा स्वाद होने के कारण इसकी मांग भी ज्यादा रहती है. महुआ के फूल पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और इनका उपयोग कई प्रकार के पारंपरिक व्यंजन बनाने में किया जाता है. महुआ एक ऐसा पेड़ है जिसकी छाल, फल और बीज तक में औषधीय गुण पाए जाते हैं. यदि कोई व्यक्ति दांत दर्द या दांत हिलने की समस्या से परेशान है, तो सुबह महुआ के पेड़ की टहनियों से दातुन करने पर दांतों के दर्द में राहत मिल सकती है. महुआ की छाल टॉन्सिलाइटिस, मसूड़ों की परेशानी, मधुमेह और अल्सर जैसी समस्याओं में भी उपयोगी मानी जाती है. आयुर्वेदिक आचार्य देवेंद्र कुमार के अनुसार महुआ की पत्तियों में एल्कलॉइड, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, सैपोनिन, टैनिन और ट्राइटरपीनोइड्स जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो कई स्वास्थ्य समस्याओं में लाभकारी माने जाते हैं. गठिया के दर्द और सूजन को कम करने के लिए भी महुआ की छाल का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा महुआ की छाल को पानी में उबालकर उसका काढ़ा बनाकर पीना भी फायदेमंद माना जाता है. First Published : March 11, 2026, 15:38 IST

Laptop & Desktop Prices May Rise Up to 35% in India 2026 – AI Boom Impact

Laptop & Desktop Prices May Rise Up to 35% in India 2026 – AI Boom Impact

Hindi News Business Laptop & Desktop Prices May Rise Up To 35% In India 2026 – AI Boom Impact नई दिल्ली4 मिनट पहले कॉपी लिंक देश में अगले कुछ महीनों में लैपटॉप और डेस्कटॉप खरीदना महंगा पड़ सकता है। प्रोसेसर और ग्राफिक्स कार्ड (GPU) जैसे प्रमुख कंपोनेंट्स के दाम बढ़ने से इस साल लैपटॉप-डेक्सटॉप की कीमतों में 35% तक के उछाल की संभावना है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि कीमतों में इस बढ़ोतरी की वजह से इस साल कंप्यूटर बाजार की ग्रोथ में 8% तक की कमी आ सकती है। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है। मार्च में 10% बढ़ सकती है कीमतें, 12% पहले ही महंगे हो चुके IDC इंडिया के सीनियर मार्केट एनालिस्ट भरत शेनॉय के मुताबिक, रैम (RAM) की कीमतें पहले ही 2.5 से 3 गुना तक बढ़ चुकी हैं। इससे लैपटॉप और डेस्कटॉप की कीमतों में अब तक 10-12% की बढ़ोतरी हो चुकी है। मार्च के महीने में ही 8-10% की एक और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जबकि इसके अगले कुछ महीनों में कीमतें 10% और बढ़ सकती हैं। 35 हजार वाला लैपटॉप अब 45 हजार का होगा शेनॉय ने बताया कि जो डिवाइसेस पहले 30,000 से 35,000 रुपए की रेंज में मिलते थे, उनकी कीमत अब 45,000 रुपए के करीब पहुंच रही हैं। इससे स्टूडेंट्स, होम यूजर्स और पहली बार कंप्यूटर खरीदने वालों के लिए अपग्रेड करना मुश्किल हो जाएगा। जानकारों का कहना है कि यह तेजी अगले 6-7 तिमाहियों तक जारी रह सकती है और 2027 के दूसरे हाफ से पहले राहत मिलने की उम्मीद कम है। अगले 3-4 महीनों में लैपटॉप 35% तक महंगे होंगे समय बढ़ोत्तरी असर (₹35,000 वाले लैपटॉप पर) अब तक 10-12% ₹39,000 मार्च के अंत तक +8-10% ₹42,000 अगले 3-4 महीने +10% ₹45,000 क्यों बढ़ रहे हैं दाम? AI-सप्लाई चेन है बड़ी वजह काउंटरपॉइंट रिसर्च की सीनियर एनालिस्ट अंशिका जैन के अनुसार, मेमोरी (DRAM और NAND) की कीमतों में उछाल का सबसे बड़ा कारण ‘AI इंफ्रास्ट्रक्चर’ की बढ़ती डिमांड है। कंपनियां अब अपना प्रोडक्शन हाई-मार्जिन वाले सर्वर और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी की तरफ मोड़ रही हैं, जिससे आम लैपटॉप के लिए इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स महंगे हो गए हैं। इसके अलावा इंटेल के एंट्री-लेवल प्रोसेसर की कमी ने भी मुश्किल बढ़ा दी है। मिडिल ईस्ट में तनाव का भी असर पड़ेगा इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ में चल रहे तनाव के कारण भविष्य में संकट और गहरा सकता है। यह रूट एनर्जी और पेट्रोकेमिकल के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अगर यहां रुकावट लंबी रहती है, तो सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की इनपुट कॉस्ट बढ़ जाएगी। जिसका असर चिप्स की अवेलेबिलिटी और उनकी कीमतों पर पड़ेगा। 2025 में बना था रिकॉर्ड, अब 8% गिर सकता है मार्केट साल 2025 भारतीय पीसी मार्केट के लिए ऐतिहासिक रहा था। IDC के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल 1.59 करोड़ यूनिट्स की शिपमेंट हुई, जो साल-दर-साल 10.2% की ग्रोथ थी। यह पहली बार था जब सालाना शिपमेंट 1.5 करोड़ के पार पहुंची। हालांकि, इस साल ऊंचे दामों के कारण डिमांड कमजोर रहने की आशंका है। अनुमान है कि कंज्यूमर और कमर्शियल दोनों सेगमेंट में 7-8% की गिरावट आ सकती है। सेल और फाइनेंस स्कीम का सहारा ले रहीं कंपनियां बढ़ती कीमतों के बीच ग्राहकों को लुभाने के लिए टेक ब्रांड्स अब नए रास्ते तलाश रहे हैं। कंपनियां लैपटॉप के कॉन्फिगरेशन में बदलाव कर रही हैं ताकि बेस प्राइस कम रखा जा सके। इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को आसान किस्तों और प्रमोशनल ऑफर्स के जरिए जोड़ने की कोशिश की जा रही है। गेमिंग और प्रोफेशनल सेगमेंट के खरीदार महंगे होने के बावजूद खरीदारी जारी रख सकते हैं, लेकिन बजट सेगमेंट में सुस्ती दिखेगी। अगर आप अगले कुछ महीनों में लैपटॉप या पीसी खरीदने की सोच रहे हैं, तो अभी खरीदना बेहतर है। क्योंकि इनकी कीमतों में कमी आने के आसार 2027 से पहले नहीं दिख रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

रोजर्स ने बताए टेक सेक्टर में नौकरी पाने के गुर:अनुभवी सीईओ की सलाह- बड़ी कंपनियों के मुताबिक तकनीकी कौशल सीखें

रोजर्स ने बताए टेक सेक्टर में नौकरी पाने के गुर:अनुभवी सीईओ की सलाह- बड़ी कंपनियों के मुताबिक तकनीकी कौशल सीखें

बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच एपल, मेटा जैसी टेक कंपनियों में नौकरी करने के इच्छुक युवाओं को एक सीईओ की सलाह काम आ सकती है। 1.8 अरब डॉलर (16,500 करोड़ रुपए) वैल्युएशन वाली वर्कफ्लो सॉफ्टवेयर कंपनी असाना के नए सीईओ डैन रोजर्स खुद भी माइक्रोसॉफ्ट, डेल, अमेजन वेब सर्विसेज, सेल्सफोर्स और सर्विसनाउ सहित प्रमुख तकनीकी कंपनियों में काम कर चुके हैं। रोजर्स का कहना है कि पहले की पीढ़ी के मुकाबले जेन जी के लिए सिलिकॉन वैली में नौकरी पाना ज्यादा आसान है। सबसे अच्छा रास्ता बड़ी कंपनियों की जरूरत के मुताबिक तकनीकी कौशल सीखना है। बड़ी टेक कंपनियां ऐसे लोगों को पसंद करती हैं जो पहले से किसी छोटी या मध्यम कंपनी में अनुभव हासिल करके आते हैं। ऐसा रिजूमे बनाएं जिसे नजरअंदाज करना मुश्किल हो रोजर्स कहते हैं, ‘भले ही इसमें कुछ साल लग जाएं और कम प्रतिष्ठित कंपनियों में काम करना पड़े। लेकिन आपके रेज्यूमे में दर्ज आपके अनुभव और कौशल को खारिज कर पाना एआई के लिए भी आसान नहीं होगा। हो सकता है कि सीधे मुख्य द्वार के बजाय थोड़ा घूमकर टेक सेक्टर की बड़ी कंपनियों में प्रवेश मिले, लेकिन ऐसा होगा जरूर।’ सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है अगर आप छोटी उम्र से ही धीरे-धीरे कौशल विकसित करते हैं, तो अच्छा वेतन और पद बाद में अपने आप मिल जाएंगे। यह किसी अचानक होने वाले कारनामे से धीमा लेकिन ज्यादा भरोसेमंद है। आप जितना ज्यादा सीखेंगे उतनी ही अच्छी नौकरी पाने के अवसर ज्यादा बनेंगे। सफल होने के लिए आवश्यक कौशल हासिल करने का कोई शॉर्टकट नहीं है।’ डैन रोजर्स के सुझाव सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट, तकनीकी कौशल और वास्तविक काम का अनुभव दिखाएं। करियर की शुरुआत छोटे रोल से करें और धीरे-धीरे अपनी विश्वसनीयता बनाएं। सीधे बड़ी कंपनियों में प्रवेश की बजाय अलग-अलग भूमिकाओं का अनुभव लेकर टेक ईकोसिस्टम में जगह बनाएं। ऐसा रिजूमे बनाएं जिसे नजरअंदाज करना मुश्किल हो

ईरान की टॉप लीडरशिप खत्म, फिर कैसे जंग लड़ रहा:7 टुकड़ों में ताकत बांट रखी; हर पद के लिए 4 उत्तराधिकारी पहले से तय

ईरान की टॉप लीडरशिप खत्म, फिर कैसे जंग लड़ रहा:7 टुकड़ों में ताकत बांट रखी; हर पद के लिए 4 उत्तराधिकारी पहले से तय

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में कहा कि देश ने दो दशकों तक अमेरिका के युद्धों का अध्ययन किया है। ताकि ऐसा सुरक्षा ढांचा बनाया जा सके जो राजधानी पर हमला होने के बाद भी लड़ाई जारी रख सके। इसके लिए ईरान ने एक खास स्ट्रेटजी बनाई, जिसका नाम रखा ‘डिसेंट्रलाइज्ड मोजेक डिफेंस’। मोजेक का मतलब टाइल्स (छोटे-छोटे टुकड़ों) से बना हुआ डाइग्राम होता है। ठीक वैसे ही इस रणनीति में ईरान की पूरी सैन्य कमान और क्षमता को केंद्रीकृत नहीं रखा जाता, बल्कि 7 छोटे-छोटे, स्वतंत्र हिस्सों में बांट दिया जाता है। इससे अगर दुश्मन टॉप लीडरशिप, सेंट्रल कमांड सेंटर, या बड़े हेडक्वार्टर पर हमला करके उन्हें नष्ट भी कर दे, तब भी बाकी सिस्टम टूटता नहीं है और लड़ाई जारी रख सकता है। ईरान की इसी रणनीति का एक हिस्सा उत्तराधिकार योजना भी है। रिपोर्टों के मुताबिक, सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने मौत से पहले निर्देश दिया था कि हर अहम सैन्य और प्रशासनिक पद के लिए कम से कम 4 संभावित उत्तराधिकारी तय किए जाएं। लंबी जंग के लिए तैयार खुद को तैयार करती है ईरानी सेना ‘डिसेंट्रलाइज्ड मोजेक डिफेंस’ इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से सबसे ज्यादा जुड़ी हुई है। यह पूर्व कमांडर मोहम्मद अली जाफरी (2007-2019) के समय विकसित हुई। इस ढांचे में IRGC, बसीज मिलिशिया, नियमित सेना, मिसाइल यूनिट, नौसेना और स्थानीय कमांड संरचनाएं एक नेटवर्क की तरह काम करती हैं। संचार टूटने की स्थिति में भी स्थानीय यूनिट्स को कार्रवाई की स्वतंत्रता रहती है। ईरान ने 8 ग्रुप में सेना को बांटा ईरान ने अलग-अलग संस्थाओं को अलग-अलग रोल दिए हैं। ईरान ने यह क्यों अपनाई रणनीति? 2001 में अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया और 2003 में इराक पर हमला किया। इससे सद्दाम हुसैन का हाईली सेंट्रलाइज्ड रिजीम कुछ ही दिनों में ढह गया। कमांड स्ट्रक्चर पर हमला हुआ और सब कुछ बिखर गया। ईरान ने देखा और सीखा कि सेंट्रल कमांड पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है। ईरान ने अपनी सेना को और सेंट्रलाइज्ड नहीं बनाया, बल्कि छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा। ईरान जानता है कि दुश्मन की कन्वेंशनल ताकत (एयर पावर, टेक्नोलॉजी, इंटेलिजेंस) ज्यादा होगी, इसलिए उसने सीधे मुकाबले के बजाए सर्वाइवल यानी जंग को लंबी खींचने और दुश्मन को थकाने वाली स्ट्रेटजी अपनाई। 1979 की इस्लामिक रिवॉल्यूशन के बाद मोजाहिदीन -ए-खल्क जैसे ग्रुप्स के अटैक्स और 1980-88 की ईरान-इराक वॉर (8 साल की एट्रिशन जंग) ने भी इसे मजबूत किया। चीन के प्रोलॉन्ग्ड वॉर थ्योरी से स्ट्रेटजी बनाई ईरान के हथियार भी इसमें अहम रोल निभाते हैं। ईरान सस्ते हथियार बनाता है, जैसे शाहेद ड्रोन (कुछ हजार डॉलर में)। दुश्मन को इन्हें रोकने के लिए महंगे इंटरसेप्टर मिसाइल्स इस्तेमाल करने पड़ते हैं। इससे समय के साथ दुश्मन का खर्च बहुत बढ़ जाता है। जंग जितनी लंबी, उतना आर्थिक और राजनीतिक दबाव। ईरान का फोकस क्विक विक्ट्री नहीं, बल्कि दुश्मन को थकाकर और महंगा पड़ने पर मजबूर करना है। ईरान की यह सोच चीनी नेता माओ त्से-तुंग की “प्रोलॉन्ग्ड वॉर” यानी लंबे युद्ध की अवधारणा से मिलती-जुलती है। इस सिद्धांत के मुताबिक कमजोर पक्ष को ताकतवर दुश्मन को तुरंत हराने की जरूरत नहीं होती। वह शुरुआती झटका झेलकर युद्ध को लंबा कर सकता है और धीरे-धीरे दुश्मन की इच्छाशक्ति और संसाधनों को कमजोर कर सकता है। इसे सिद्धांत को ईरान में IRGC के चीफ स्टेटिजिस्ट हसन अब्बासी लेकर आए थे। वहीं, मोहम्मद अली जाफरी ने इन विचारों को सैन्य ढांचे में लागू करने में अहम भूमिका निभाई। ईरान ने हर पद के लिए चार उत्तराधिकारी तय कर रखे ईरान ने कई सैन्य और प्रशासनिक पद के लिए पहले से उत्तराधिकारी तय रखे हैं। कई मामलों में चार-चार उत्तराधिकारी रखने की बात कही गई, जिसे “फोर्थ सक्सेसर” की अवधारणा कहा जाता है। इसका मकसद यह है कि अगर किसी नेता की हत्या हो जाए या संपर्क टूट जाए, तब भी व्यवस्था चलती रहे। ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मुजतबा खामेनेई उत्तराधिकारी बने क्यों महत्वपूर्ण है यह रणनीति अमेरिका और इजराइल की सैन्य रणनीति अक्सर तेज और सटीक हमलों के जरिए दुश्मन के नेतृत्व और कमांड सिस्टम को खत्म करने पर फोकस्ड रही है। ईरान की “मोजेक डिफेंस” इसी रणनीति का जवाब मानी जाती है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि भारी हमलों और बड़े नुकसान के बाद भी सैन्य और राजनीतिक ढांचा पूरी तरह बर्बाद न हो। ईरान की इस सोच के मुताबिक युद्ध का फैसला केवल शुरुआती सैन्य ताकत से नहीं होता। समय, सहनशक्ति और संगठन की क्षमता भी उतनी ही अहम भूमिका निभाती है। अराघची ने हाल ही में कहा था कि ईरान पर बमबारी से जंग की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ा है और ईरान तय करेगा कि जंग कब और कैसे खत्म होगी ———————————— ये खबर भी पढ़ें… ईरान जंग- लोग पालतू कुत्ते-बिल्ली छोड़कर भाग रहे: बिना खाना-पानी दिए खंभे से बांधा, नोट लिखा- सॉरी देश छोड़ रहा हूं; 25 PHOTOS मिडिल ईस्ट में बढ़ते इजराइल-ईरान तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में लोग देश छोड़ने की तैयारी में अपने पालतू कुत्तों, बिल्लियों और दूसरे जानवरों को सड़कों या शेल्टर में छोड़ रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

अदा शर्मा के पास 1 महीने से नहीं कोई काम:वीडियो जारी कर सुनाई आपबीती, कहा- प्रोड्यूसर ने डेट्स बदलने के लिए मैनेजर को गाली दी

अदा शर्मा के पास 1 महीने से नहीं कोई काम:वीडियो जारी कर सुनाई आपबीती, कहा- प्रोड्यूसर ने डेट्स बदलने के लिए मैनेजर को गाली दी

द केरला स्टोरी और 1920 जैसी बेहतरीन फिल्मों में नजर आ चुकीं एक्ट्रेस अदा शर्मा को पिछले 1 महीने से कोई काम नहीं मिल रहा है। एक्ट्रेस ने एक वीडियो जारी कर बताया है कि किस तरह एक प्रोड्यूसर ने उन्हें डेट्स के लिए परेशान किया और उनका पूरा शेड्यूल डिस्टर्ब कर दिया। जब एक्ट्रेस ने जिद पर दूसरी फिल्मों का शेड्यूल बदलकर डेट्स दीं, तो वो प्रोड्यूसर कमिटमेंट से मुकर गया। उन्होंने ये भी कहा कि कुछ डायरेक्टर बहुत बदतमीज होते हैं। अदा शर्मा ने हाल ही में ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो जारी कर कहा, ‘मैं तीन फिल्में शूट कर रही हूं। एक टाइम था, जब मेरे पास काम नहीं था। पहली फिल्म की डेट्स बार-बार चेंज होकर, बाकी की दो फिल्मों से क्लैश हो रही थी। मेरी पहली फिल्म के प्रोड्यूसर ने मेरी मैनेजर से कहा कि वही डेट्स चाहिए। गालियां दीं। मैं वो गालियां बताकर अपनी फीड खराब नहीं करूंगी।’ आगे अदा ने कहा, ‘उन्होंने (प्रोड्यूसर ने) कहा कि कैसे भी करके यही डेट्स चाहिए। मेरी मैनेजर ने उसे पूछा कि क्या पक्का यही डेट्स चाहिए, तो उन्होंने कहा कि हां, यही चाहिए, बदल नहीं सकते। ये बात जब दूसरी फिल्म के प्रोड्यूसर को पता चली तो उन्होंने अपनी डेट्स बदल दीं।’ अदा ने जोर देकर आगे कहा, ‘दूसरी फिल्म के प्रोड्यूसर बहुत अच्छे थे। हर कोई बद्तमीज और बुरे स्वाभाव का नहीं होता। तीसरे फिल्म के प्रोड्यूसर ने भी डेट बदल दी। उन्होंने मेरी वजह से पूरी क्रू, कास्ट की डेट्स बदलीं। मैंने उनसे बहुत सॉरी और थैंक्यू बोला। तीनों फिल्म्स की डेट्स सेट होने के बाद, सब सॉर्ट होने के बाद, पहले वाले प्रोड्यूसर कहते हैं कि मुझे अब वो डेट्स नहीं चाहिए। इन शॉर्ट मेरी जिंदगी की वाट लग गई है और अब मैं खाली हूं एक महीने से। मैं पूरी तरह से इमोशनली, मेंटली, प्रोफेशनली, फाइनेंशियली खाली हूं।’ बता दें कि एक्ट्रेस अदा शर्मा आखिरी बार साल 2025 में आई विक्रम भट्ट की ड्रामा फिल्म तुमको मेरी कसम में नजर आई हैं। इस साल उनकी फिल्म हातक रिलीज होने वाली है। अदा शर्मा ने साल 2008 की फिल्म 1920 से बॉलीवुड डेब्यू किया था, जिसके बाद वो कमांडो 2, कमांडो 3, सेल्फी और द केरला स्टोरी जैसी फिल्मों में नजर आ चुकी हैं।

Iran Football Team America Visit; FIFA World Cup 2026

Iran Football Team America Visit; FIFA World Cup 2026

Hindi News Sports Iran Football Team America Visit; FIFA World Cup 2026 | Trump Permission स्पोर्ट्स डेस्क9 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान फुटबॉल टीम ने फरवरी में अमेरिका के एरिजोना में वर्ल्ड कप की तैयारियां करनी शुरू कर दी दी थी। टीम ने 7वीं बार फीफा वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई किया है। टीम अब तक 3 मैच ही जीत सकी है। दुनिया में फुटबॉल संचालित करने वाली संस्था FIFA के अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो ने कहा है कि ईरान की फुटबॉल टीम अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की संयुक्त मेजबानी में हो रहे वर्ल्ड कप में हिस्सा लेगी। इन्फैन्टिनो ने बताया कि उन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भरोसा दिलाया है कि ईरान की नेशनल टीम को 2026 फुटबॉल वर्ल्ड कप खेलने अमेरिका आने दिया जाएगा। अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण ईरान की भागीदारी को लेकर सवाल उठ रहे थे। फुटबॉल वर्ल्ड कप 11 जून से 19 जुलाई तक अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के 16 शहरों में खेला जाएगा। इन्फैन्टिनो ने X पोस्ट पर कहा- मैंने मंगलवार रात ट्रम्प से वर्ल्ड कप की तैयारियों पर चर्चा की। हमने ईरान की स्थिति और उसकी टीम की भागीदारी पर भी बात हुई। ट्रम्प ने मुझे भरोसा दिलाया है कि ईरान को वर्ल्ड कप में खेलने के लिए अमेरिका आने दिया जाएगा। ईरान का पहला मैच कैलिफोर्निया में होगा 2026 वर्ल्ड कप में ईरान के ग्रुप मैच तय हैं। टीम 15 जून को कैलिफोर्निया के इंगलवुड में न्यूजीलैंड से खेलेगी। 21 जून को बेल्जियम और 26 जून को सिएटल में मिस्र से मुकाबला होगा। ईरान को ग्रुप G में बेल्जियम, मिस्र और न्यूजीलैंड के साथ रखा गया है। IFF प्रेसिडेंट मेहदी ताज ने कहा था- ईरान का वर्ल्ड कप खेलना मुश्किल 9 दिन पहले ईरानी फुटबॉल फेडरेशन के प्रेसिडेंट मेहदी ताज ने कहा था कि मौजूदा हालातों में नेशनल टीम का अमेरिका जाकर फुटबॉल खेलना बेहद मुश्किल है। उन्होंने कहा था- ‘इस हमले के बाद हमसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि हम आशा और उत्साह के साथ वर्ल्ड कप की ओर देखें।’ इतना ही नहीं, ट्रम्प सरकार ने ईरानी फैंस को देश में एंट्री देने से मना कर दिया था। 2022 के फीफा वर्ल्ड कप में ईरान और अमेरिका के बीच मुकाबला खेला गया था, जिसे अमेरिका ने 1-0 से जीता था। इस मसले पर फीफा ने कहा है कि टूर्नामेंट को टालना संभव नहीं है। फीफा के वर्ल्ड कप चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर हाइमो शिर्गी ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, लेकिन वर्ल्ड कप तय समय पर ही होगा। उम्मीद है कि क्वालिफाई करने वाली सभी टीमें इसमें हिस्सा लेंगी। क्या कहते हैं FIFA के नियम? फीफा नियमों के मुताबिक यदि मेजबान देश किसी टीम को प्रवेश देने से इनकार करता है तो उसकी मेजबानी भी छीनी जा सकती है। तीन साल पहले इंडोनेशिया ने अंडर-20 वर्ल्ड कप में इजराइल टीम को अनुमति देने से इनकार किया था, जिसके बाद फीफा ने टूर्नामेंट इंडोनेशिया से लेकर अर्जेंटीना को दे दिया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Iran Football Team America Visit; FIFA World Cup 2026

Iran Football Team America Visit; FIFA World Cup 2026

Hindi News Sports Iran Football Team America Visit; FIFA World Cup 2026 | Trump Permission स्पोर्ट्स डेस्क5 घंटे पहले कॉपी लिंक ईरान फुटबॉल टीम ने फरवरी में अमेरिका के एरिजोना में वर्ल्ड कप की तैयारियां करनी शुरू कर दी थी। टीम ने 7वीं बार फीफा वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई किया है। टीम अब तक 3 मैच ही जीत सकी है। ईरान के खेल मंत्री अहमद दुन्यामाली ने बुधवार को कहा कि फुटबॉल टीम 2026 फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं ले सकती। उनका कहना है कि अमेरिकी-इजराइली हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या के बाद ऐसी परिस्थितियों में टूर्नामेंट में भाग लेना संभव नहीं है। हालांकि, इस मसले में FIFA का मानना है कि फिलहाल 2026 फीफा वर्ल्ड कप से ईरान के बाहर होने की बात कहना जल्दबाजी होगी। अंतिम फैसला ईरान के फुटबॉल फेडरेशन के हाथ में होगा। खेल मंत्री के बयान के बावजूद वही तय करेगा कि टीम वर्ल्ड कप में भाग लेगी या नहीं। इससे पहले FIFA के अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो ने बताया कि उन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भरोसा दिलाया है कि ईरान की नेशनल टीम को 2026 फुटबॉल वर्ल्ड कप खेलने अमेरिका आने दिया जाएगा। इस बार फीफा वर्ल्ड कप 11 जून से 19 जुलाई तक अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की संयुक्त मेजबानी में हो रहा है। अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण ईरान पर ट्रैवल और वीजा बैन के बाद टीम की भागीदारी को लेकर सवाल उठ रहे थे। इन्फैन्टिनो ने X पोस्ट पर कहा- मैंने मंगलवार रात ट्रम्प से वर्ल्ड कप की तैयारियों पर चर्चा की। हमने ईरान की स्थिति और उसकी टीम की भागीदारी पर भी बात हुई। ट्रम्प ने मुझे भरोसा दिलाया है कि ईरान को वर्ल्ड कप में खेलने के लिए अमेरिका आने दिया जाएगा। ईरान का पहला मैच कैलिफोर्निया में होगा 2026 वर्ल्ड कप में ईरान के ग्रुप मैच तय हैं। टीम 15 जून को कैलिफोर्निया के इंगलवुड में न्यूजीलैंड से खेलेगी। 21 जून को बेल्जियम और 26 जून को सिएटल में मिस्र से मुकाबला होगा। ईरान को ग्रुप G में बेल्जियम, मिस्र और न्यूजीलैंड के साथ रखा गया है। ईरानी फुटबॉल प्रेसिडेंट ने कहा था- हमारा वर्ल्ड कप खेलना मुश्किल 9 दिन पहले ईरानी फुटबॉल फेडरेशन के प्रेसिडेंट मेहदी ताज ने कहा था कि मौजूदा हालातों में नेशनल टीम का अमेरिका जाकर फुटबॉल खेलना बेहद मुश्किल है। उन्होंने कहा था- ‘इस हमले के बाद हमसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि हम आशा और उत्साह के साथ वर्ल्ड कप की ओर देखें।’ इतना ही नहीं, ट्रम्प सरकार ने ईरानी फैंस को देश में एंट्री देने से मना कर दिया था। 2022 के फीफा वर्ल्ड कप में ईरान और अमेरिका के बीच मुकाबला खेला गया था, जिसे अमेरिका ने 1-0 से जीता था। इस मसले पर फीफा ने कहा है कि टूर्नामेंट को टालना संभव नहीं है। फीफा के वर्ल्ड कप चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर हाइमो शिर्गी ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, लेकिन वर्ल्ड कप तय समय पर ही होगा। उम्मीद है कि क्वालिफाई करने वाली सभी टीमें इसमें हिस्सा लेंगी। क्या कहते हैं FIFA के नियम? फीफा नियमों के मुताबिक यदि मेजबान देश किसी टीम को प्रवेश देने से इनकार करता है तो उसकी मेजबानी भी छीनी जा सकती है। तीन साल पहले इंडोनेशिया ने अंडर-20 वर्ल्ड कप में इजराइल टीम को अनुमति देने से इनकार किया था, जिसके बाद फीफा ने टूर्नामेंट इंडोनेशिया से लेकर अर्जेंटीना को दे दिया था। पांच ईरानी फुटबॉल खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया ने शरण दी स्ट्रेलिया के गृह मंत्री टोनी बर्क उन 5 महिला खिलाड़ियों के साथ, जिन्हें मानवीय आधार पर ऑस्ट्रेलिया का वीजा दिया गया है। एशियन कप से बाहर होने के बाद ईरान की महिला फुटबॉल टीम की पांच खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया ने मानवीय वीजा देकर अपने देश में रहने की इजाजत दे दी है। ऑस्ट्रेलिया के होम अफेयर्स मिनिस्टर टोनी बर्क ने बताया कि इन खिलाड़ियों को पुलिस ने सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया है। दरअसल, पिछले हफ्ते दक्षिण कोरिया के खिलाफ मैच से पहले ईरान की टीम ने अपना राष्ट्रगान नहीं गाया था। इसके बाद ईरान में कुछ लोगों ने टीम की आलोचना की और उन्हें सख्त सजा देने की मांग भी की। इसी वजह से खिलाड़ियों ने शरण मांगी थी।। टीम में कुल 26 खिलाड़ी और स्टाफ मौजूद थे, लेकिन फिलहाल सिर्फ पांच खिलाड़ियों ने ही शरण मांगी थी। बाकी खिलाड़ी अभी अपने फैसले पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि उनके परिवार ईरान में रहते हैं और उन्हें उनके खिलाफ कार्रवाई का डर है। एशियन कप के पहले मैच के दौरान 2 मार्च को ईरान की खिलाड़ी राष्ट्रीय गान के दौरान लाइन में खड़ी रहीं, लेकिन उन्होंने गाना नहीं गाया। इसके बाद इन्हें गद्दार करार दिया गया। ———————– ये खबर भी पढ़ें… ईरान जंग- लोग पालतू कुत्ते-बिल्ली छोड़कर भाग रहे:बिना खाना-पानी दिए खंभे से बांधा, नोट लिखा- सॉरी देश छोड़ रहा हूं; 25 PHOTOS मिडिल ईस्ट में बढ़ते इजराइल-ईरान तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में लोग देश छोड़ने की तैयारी में अपने पालतू कुत्तों, बिल्लियों और दूसरे जानवरों को सड़कों या शेल्टर में छोड़ रहे हैं। रेस्क्यू संगठनों के अनुसार, लोग जानवरों को बिना खाना-पानी के भीषण गर्मी में रास्ते में पोल से बांध कर छोड़ रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Prof Michel Denino Removed from Curriculum Over Corruption in Judiciary Chapter

Prof Michel Denino Removed from Curriculum Over Corruption in Judiciary Chapter

Hindi News Career NCERT: Prof Michel Denino Removed From Curriculum Over Corruption In Judiciary Chapter 9 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट NCERT के कक्षा 8वीं की सोशल साइंस की किताब में ‘करप्शन इन द ज्यूडिशियरी’ नाम का सब-चैप्टर तैयार करने वाली टीम को हटाने की तैयारी में है। कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों और पब्लिक फंडेड इंस्टीट्यूशन्स को निर्देश दिया है कि NCERT के सोशल साइंस करिकुलम के चेयरपर्सन प्रोफेसर मिशेल डेनिनो को पाठ्यक्रम से अलग करें। साथ ही, उनके दो अन्य सहयोगी सदस्यों दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार को भी किसी भी तरह से पाठ्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल न किया जाए। इसके अलावा, तीनों को नेक्स्ट जनरेशन टेक्स्टबुक्स को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया से भी अलग किया जाए। प्रोफेसर मिशेल डेनिनो ने अपने 2 सहयोगियों- दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार के साथ मिलकर कक्षा 8 की NCERT सोशल साइंस की किताब के पार्ट-2 में सब-चैप्टर ‘करप्शन इन ज्यूडिशियरी’ तैयार किया था। पब्लिक फंडेड इंस्टीट्यूशन में सेवा देने से भी रोका चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यानी CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने प्रो. मिशेल डेनिनो और उनकी टीम को इस चैप्टर की तैयारी और उसे करिकुलम में शामिल करने की प्रक्रिया से अलग किए जाने का निर्देश दिया है। साथ ही उन्हें ऐसे किसी भी पब्लिक फंडेड इंस्टीट्यूशन में सेवा देने से भी रोकने का निर्देश दिया है। जानबूझकर ज्यूडिशियरी की नेगेटिव छवि बनाने की कोशिश अदालत ने कहा कि पहली नजर में ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है कि प्रोफेसर मिशेल डेनिनो, दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार को भारतीय न्यायपालिका के बारे में जानकारी नहीं है। यह भी माना जा सकता है कि उन्होंने जानबूझकर तथ्यों को इस तरह पेश किया, जिससे कक्षा 8 के छात्रों के सामने न्यायपालिका की नकारात्मक छवि बने। कोर्ट ने कहा कि कक्षा 8 के छात्र कम उम्र के होते हैं और उन पर ऐसी बातों का असर पड़ सकता है। इसलिए यह समझ से बाहर है कि ऐसे लोगों को करिकुलम बनाने या नेक्स्ट जनरेशन की किताबें तैयार करने में उन्हें क्यूं शामिल किया जाए। NCERT ने बिना शर्त कोर्ट से माफी मांगी इससे पहले मंगलवार, 10 मार्च को NCERT ने किताब के ‘करप्शन इन ज्यूडीशियरी’ चैप्टर को लेकर बिना शर्त माफी मांगी थी। इस चैप्टर को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद किताब की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। CJI सूर्यकांत ने कहा था कि न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दे सकते। सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद किताब की बिक्री पर रोक 25 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद ‘करप्शन इन ज्यूडीशियरी’ चैप्टर वाली NCERT किताब की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी। NCERT के सूत्रों ने इसकी पुष्टि की थी। सूत्रों के अनुसार, NCERT ने चैप्टर का सुझाव देने वाले एक्सपर्ट्स और इसे मंजूरी देने वाले अधिकारियों की इंटरनल मीटिंग बुलाई। किताब को वेबसाइट से भी हटा लिया गया है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… अब 8वीं के बच्चे पढ़ेंगे ज्यूडीशियरी में करप्शन क्या है: NCERT ने सोशल साइंस में जोड़ा नया सेक्शन; इसमें पेंडिंग केस, पूर्व CJI का भी जिक्र नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने 8वीं क्लास की नई सोशल साइंस टेक्स्टबुक में ज्यूडिशियरी में करप्शन पर एक सेक्शन शुरू किया है। यह पहली बार है जब 8वीं के बच्चे ज्यूडीशियरी में करप्शन क्या होता है इसके बारे में पढ़ेंगे। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

महिला की हत्या और नाबालिग से रेप का आरोपी गिरफ्तार:डिंडौरी पुलिस ने कटनी से पकड़ा; पैदल ले जाकर कोर्ट में पेश किया

महिला की हत्या और नाबालिग से रेप का आरोपी गिरफ्तार:डिंडौरी पुलिस ने कटनी से पकड़ा; पैदल ले जाकर कोर्ट में पेश किया

डिंडौरी जिले में महिला की हत्या और नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मुख्य आरोपी हरिओम चौधरी को शहपुरा पुलिस ने कटनी से गिरफ्तार कर लिया है। बुधवार को पुलिस ने आरोपी को थाने से पैदल ले जाकर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। लिव-इन पार्टनर ने की थी हत्या पुलिस जांच के अनुसार, 26 फरवरी को हुई इस वारदात का मुख्य आरोपी हरिओम चौधरी पिछले तीन माह से मृतका के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा था। पीड़िता (नाबालिग) घटना से एक माह पूर्व ही अपनी मां के पास रहने के लिए आई थी। मामले का सह-आरोपी छोटू उर्फ देवेंद्र चौधरी 4 मार्च को ही गिरफ्तार किया जा चुका है। कटनी में दोस्त की झोपड़ी में छिपा था आरोपी थाना प्रभारी अनुराग जामदार ने बताया कि वारदात के बाद से हरिओम लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। पुलिस ने कटनी जिले में घेराबंदी कर उसे उस समय दबोचा जब वह अपने एक मित्र की झोपड़ी में छिपा हुआ था। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी वहां ऑटो चलाकर फरारी काट रहा था। विशेष टीम ने पकड़ा आरोपी को पकड़ने में सब इंस्पेक्टर ताकेश्वरी मरकाम, एएसआई विपिन जोशी और राकेश यादव सहित 10 से अधिक पुलिसकर्मियों की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस अब इस मामले में कानूनी औपचारिकताओं को पूरा कर त्वरित सुनवाई की तैयारी कर रही है।

Air India Express Flight Hard Landing in Thailand Phuket, Nose Gear Broken All 133 Passengers Safe

Air India Express Flight Hard Landing in Thailand Phuket, Nose Gear Broken All 133 Passengers Safe

Hindi News International Air India Express Flight Hard Landing In Thailand Phuket, Nose Gear Broken All 133 Passengers Safe बैंकॉक1 घंटे पहले कॉपी लिंक थाईलैंड के फुकेत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बुधवार को हैदराबाद से आ रहे एयर इंडिया एक्सप्रेस के विमान की हार्ड लैंडिंग हुई थाईलैंड में एअर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट बुधवार दोपहर लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हो गई। विमान के रनवे पर उतरते ही उसका नोज गियर टूट गया और आगे का पहिया अलग हो गया। फ्लाइट हैदराबाद से फुकेट जा रही थी। थाई अखबार द नेशन के मुताबिक घटना के बाद कुछ समय के लिए रनवे बंद करना पड़ा, हालांकि विमान में सवार सभी 133 यात्री सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए और किसी के घायल होने की खबर नहीं है। यह फ्लाइट तय समय से पहले फुकेट पहुंच गई थी। विमान का निर्धारित लैंडिंग का समय सुबह 11:40 था, लेकिन यह 11:24 बजे ही उतर गया। बताया जा रहा है कि विमान की लैंडिंग काफी तेज हुई, जिसकी वजह से उसके आगे वाले लैंडिंग गियर को नुकसान पहुंचा। पहिया अलग हो जाने की वजह से विमान तुरंत रनवे से हटाया नहीं जा सका। रनवे पर सफेद पाउडर भी दिखाई दे रहा है, जिसे आमतौर पर एयरपोर्ट की रेस्क्यू टीम सुरक्षा के लिए छिड़कती है, ताकि अगर ईंधन लीक हो तो आग लगने का खतरा कम किया जा सके। नोज गियर (सामने का लैंडिंग गियर) को नुकसान पहुंचा हुआ दिखाई दे रहा है। हार्ड लैंडिंग के दौरान विमान का अगला पहिया अलग हो गया, जिससे उसका हिस्सा टूट गया या मुड़ गया। एअर इंडिया बोला- नोज व्हील में दिक्कत आई एयरपोर्ट अधिकारियों ने स्थिति को जल्दी काबू में कर लिया। विमान में सात क्रू सदस्य, 131 यात्री और दो बच्चे सवार थे। इस घटना के बाद फुकेट इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने रनवे को अस्थायी रूप से बंद कर दिया ताकि विमान को हटाया जा सके और रनवे की सुरक्षा जांच की जा सके। एयरपोर्ट के मुताबिक एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट AXB938 हैदराबाद से फुकेट आई थी। यह विमान बोइंग 737-800 था, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर VT-BWQ है। एअर इंडिया एक्सप्रेस ने एक बयान में कहा, “हम पुष्टि करते हैं कि 11 मार्च को हमारी हैदराबाद-फुकेट फ्लाइट में फुकेट एयरपोर्ट पर नोज व्हील में दिक्कत आ गई थी।” नोज व्हील एयरक्राफ्ट के लैंडिंग गियर सिस्टम का एक जरूरी हिस्सा होता है। 6 बजे तक फुकेट एयरपोर्ट का रनवे बंद प्रारंभिक जांच में पता चला कि विमान की लैंडिंग काफी तेज हुई थी, जिससे नोज लैंडिंग गियर को नुकसान पहुंचा और विमान रनवे से हट नहीं सका। फुकेट इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने दोपहर 12:08 बजे से शाम 6 बजे तक रनवे बंद रहने की सूचना जारी की। साथ ही एयरपोर्ट प्रशासन ने संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर स्थिति संभाली और सभी सुरक्षा नियमों का पालन किया। एयरपोर्ट ने प्रभावित यात्रियों से कहा है कि वे एयरपोर्ट आने से पहले अपनी एयरलाइन से संपर्क कर फ्लाइट की स्थिति और यात्रा से जुड़ी जानकारी जरूर जांच लें, ताकि किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके। ————————- ये खबर भी देखें… बेरूत में हमलों के बीच पैसेंजर प्लेन ने उड़ान भरी:ईरान के 500 साल पुराने महल पर हमला; अमेरिका- ईरान जंग की 32 PHOTOS ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल हमले का आज चौथा दिन है। इजराइली और अमेरिकी सेनाओं ने मंगलवार को भी ईरान के अहम ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। ईरान ने भी इजराइल पर जवाबी हमले किए। उसने गल्फ देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बर्बाद करने का दावा भी किया। पूरी खबर देखें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…