जोमैटो से खाना मंगवाना ₹2.40 महंगा हुआ:प्लेटफॉर्म फीस 19% बढ़ाई, अब ₹14.90; कच्चे तेल के दाम बढ़ने का असर

फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो से खाना ऑर्डर करने पर अब आपको ₹2.40 ज्यादा देनें होंगे। कंपनी ने शुक्रवार सेऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस में 19% बढ़ोतरी की है। यूजर्स को अब हर ऑर्डर पर ₹12.50 के बजाय ₹14.90 प्लेटफॉर्म फीस देनी होगी। GST जोड़ने के बाद यह राशि और बढ़ जाएगी। जोमैटो के एप पर नई दरें लागू कर दी गई हैं। प्लेटफॉर्म फीस हर एक फूड ऑर्डर पर लागू होने वाला ऐडिशनल चार्ज हैं। ये GST, रेस्तरां चार्ज और डिलीवरी फीस से अलग है। ये प्लेटफॉर्म प्रति दिन 20 से 25 लाख ऑर्डर डिलीवर करता है। स्विगी के करीब पहुंचे प्लेटफॉर्म फीस के दाम जोमैटो की मुख्य प्रतिद्वंदी कंपनी स्विगी अभी टैक्स समेत लगभग ₹14.99 प्लेटफॉर्म फीस वसूल रही है। आमतौर पर देखा गया है कि जब भी इन दोनों में से कोई एक कंपनी फीस बढ़ाती है, तो दूसरी कंपनी भी जल्द ही अपने दाम बढ़ा देती है। जोमैटो ने 2 रुपए से की थी प्लेटफॉर्म फीस की शुरुआत कंपनी ने 7 महीने में दूसरी बार प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाई है। इससे पहले सितंबर-2025 में 20% का इजाफा किया गया था। अगस्त 2023 में जोमैटो ने अपना मार्जिन बढ़ाने और प्रॉफिटेबल बनने के लिए पहली बार 2 रुपए का प्लेटफॉर्म शुल्क शुरू किया था। कंपनी ने बाद में इसे बढ़ाकर 3 रुपए कर दिया और 1 जनवरी 2024 को 4 रुपए कर दिया। फिर इसे धीरे-धारी बढ़ाकर 7 रुपए कर दिया था। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और ऑपरेशनल कॉस्ट बनी वजह दामों में इस बढ़ोतरी के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को एक बड़ी वजह माना जा रहा है। तेल महंगा होने से डिलीवरी पार्टनर्स का खर्च बढ़ता है और कंपनी के लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन्स पर भी असर पड़ता है। इसके अलावा, जोमैटो अपनी प्रॉफिटेबिलिटी (मुनाफा) सुधारने के लिए भी समय-समय पर प्लेटफॉर्म फीस में बदलाव करती रहती है। दीपिंदर ने 2008 में बनाई थी फूडीबे
Anurag Dubey Accident Photos | Vlogging Start Query

12 मिनट पहले कॉपी लिंक यूट्यूबर और ‘बिग बॉस 17’ फेम अनुराग डोभाल को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। इंस्टाग्राम लाइव के दौरान हुए कार एक्सीडेंट के बाद अनुराग अब अपने एक दोस्त के फार्महाउस पर रिकवर कर रहे हैं। गुरुवार को उन्होंने अपनी चोटों की पहली तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की। इसके साथ ही उन्होंने फैंस से राय मांगी कि क्या उन्हें अपनी ‘नई जिंदगी’ के व्लॉग्स फिर से शुरू करने चाहिए। कमर पर टांके और चोट के निशान अनुराग ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक फोटो पोस्ट की है, जिसमें उनकी कमर पर लगा एक लंबा जख्म और टांके दिखाई दे रहे हैं। एक्सीडेंट की वजह से उनके शरीर पर खरोंचों के निशान भी साफ नजर आ रहे हैं। उन्होंने एक पोल के जरिए फैंस से पूछा, “नई जिंदगी की शुरुआत देखोगे?” इस पोल में उन्होंने दो विकल्प दिए- ‘हां, व्लॉग और इंस्टा शुरू करो’ और ‘जैसा आपको सही लगे’। मैनेजर बोले- अनुराग अब सुरक्षित अनुराग के मैनेजर रोहित पांडे ने बताया कि यूट्यूबर फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित हैं। वे एक दोस्त के फार्महाउस पर हैं जहां उनकी देखभाल के लिए सभी जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं। मैनेजर ने कहा, “अनुराग अब स्थिर हैं और रिकवर करने की कोशिश कर रहे हैं। हम उन सभी के आभारी हैं जिन्होंने मुश्किल वक्त में साथ दिया।” ICU से बाहर आने पर कहा-यह एक चमत्कार अस्पताल से डिस्चार्ज होने से पहले अनुराग ने एक इमोशनल पोस्ट लिखी थी। उन्होंने कहा था, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं जिंदा बचूंगा। जिस रास्ते पर मैं गया था, वहां से लौटना नामुमकिन था। मेरे लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। मुझे नहीं पता कि आगे क्या होगा, लेकिन भगवान ने मुझे नया जन्म दिया है तो कुछ न कुछ जरूर सोचा होगा।” इंटर-कास्ट मैरिज बनी विवाद का कारण विवाद मार्च के पहले हफ्ते में शुरू हुआ था जब अनुराग ने अपने माता-पिता और भाई कलम इंक (अतुल डोभाल) पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि उनकी इंटर-कास्ट मैरिज की वजह से परिवार रीतिका को घर में घुसने नहीं दे रहा है। इसी तनाव के बीच, 7 मार्च को अनुराग दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर इंस्टाग्राम लाइव आए। लाइव के दौरान उनकी कार की रफ्तार 140-150 किलोमीटर प्रति घंटा थी। इसी दौरान उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया था। दूसरी तरफ, उनके भाई कलम इंक ने इन आरोपों को गलत बताया और दावा किया कि अनुराग के दावों की वजह से उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
India Bans 8400 Betting & Casino Platforms

नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक सरकार ने अवैध ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 300 वेबसाइट्स और एप्स को ब्लॉक किया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक अब तक कुल 8400 ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाया जा चुका है, जिनमें से करीब 4900 वेबसाइट्स ऑनलाइन गेमिंग एक्ट लागू होने के बाद ब्लॉक की गई हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक जिन प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई की गई है, वे मुख्य रूप से अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए से जुड़े थे। इनमें ऑनलाइन स्पोर्ट्स बेटिंग प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन कसीनो (स्लॉट्स, रूलेट और लाइव डीलर गेम्स), पी-टू-पी बेटिंग एक्सचेंज, सट्टा/मटका नेटवर्क और रियल मनी कार्ड ऐप्स शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए बड़े स्तर पर अवैध लेनदेन और जुए को बढ़ावा मिल रहा था। इसे रोकने के लिए आईटी एक्ट और अन्य संबंधित कानूनों के तहत लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है। ऑनलाइन गेमिंग एक्ट लागू होने के बाद इस तरह के प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई में तेजी आई है। सरकार का दावा है कि यह कदम डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। ऑनलाइन गेमिंग बिल के बारे में जानें… प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 के तहत देश में रियल मनी गेमिंग पर बैन लगाया जाएगा। यह बिल 20 अगस्त को लोकसभा और 21 अगस्त को राज्यसभा से पास हुआ था। 22 अगस्त को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बना और 1 अक्टूबर से लागू किया गया। ऑनलाइन गेमिंग कानून में 4 सख्त नियम इस कानून में कहा गया है कि चाहे ये गेम्स स्किल बेस्ड हों या चांस बेस्ड दोनों पर रोक है। रियल-मनी गेम्स पर रोक: कोई भी मनी बेस्ड गेम ऑफर करना, चलाना, प्रचार करना गैरकानूनी है। ऑनलाइन गेम खेलने वालों को कोई सजा नहीं होगी। सजा और जुर्माना: अगर कोई रियल-मनी गेम ऑफर करता है या उसका प्रचार करता है, तो उसे 3 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। विज्ञापन चलाने वालों को 2 साल की जेल और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। रेगुलेटरी अथॉरिटी: एक खास अथॉरिटी बनाई जाएगी, जो गेमिंग इंडस्ट्री को रेगुलेट करेगी, गेम्स को रजिस्टर करेगी और ये तय करेगी कि कौन सा गेम रियल-मनी गेम है। ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा: पबजी और फ्री फायर जैसे ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स को सपोर्ट किया जाएगा। ये गेम्स बिना पैसे वाले होते हैं इसलिए इन्हें बढ़ावा मिले। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… ऑनलाइन गेमिंग रेगुलेशन पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- मनी गेमिंग ऐप्स का टेरर फाइनेंस से लिंक केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर बताया कि अनरेगुलेटेड ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स का टेरर फाइनेंस और मनी लॉन्ड्रिंग से लिंक है। इसलिए इन्हें रेगुलेट करने के लिए कानून बनाना जरूरी था। केंद्र ने बताया कि ऑनलाइन पैसों वाले गेम तेजी से बढ़ रहे हैं और इससे धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी और कुछ मामलों में आतंकवाद को फंडिंग हो रही है, जो नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
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नई दिल्ली5 मिनट पहले कॉपी लिंक सरकार ने अवैध ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 300 वेबसाइट्स-एप्स को ब्लॉक किया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक अब तक कुल 8400 ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाया जा चुका है। इनमें से करीब 4900 वेबसाइट्स ऑनलाइन गेमिंग एक्ट लागू होने के बाद ब्लॉक की गई हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक जिन प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई की गई है, वे मुख्य रूप से अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए से जुड़े थे। इनके जरिए बड़े स्तर पर अवैध लेनदेन और जुए को बढ़ावा मिल रहा था। इसे रोकने के लिए आईटी एक्ट और अन्य संबंधित कानूनों के तहत लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है। ऑनलाइन गेमिंग एक्ट लागू होने के बाद इस तरह के प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई में तेजी आई है। सरकार का दावा है कि यह कदम डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। ऑनलाइन गेमिंग बिल के बारे में जानें… प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 के तहत देश में रियल मनी गेमिंग पर बैन लगाया जाएगा। यह बिल 20 अगस्त को लोकसभा और 21 अगस्त को राज्यसभा से पास हुआ था। 22 अगस्त को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बना और 1 अक्टूबर से लागू किया गया। ऑनलाइन गेमिंग कानून में 4 सख्त नियम इस कानून में कहा गया है कि चाहे ये गेम्स स्किल बेस्ड हों या चांस बेस्ड दोनों पर रोक है। रियल-मनी गेम्स पर रोक: कोई भी मनी बेस्ड गेम ऑफर करना, चलाना, प्रचार करना गैरकानूनी है। ऑनलाइन गेम खेलने वालों को कोई सजा नहीं होगी। सजा और जुर्माना: अगर कोई रियल-मनी गेम ऑफर करता है या उसका प्रचार करता है, तो उसे 3 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। विज्ञापन चलाने वालों को 2 साल की जेल और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। रेगुलेटरी अथॉरिटी: एक खास अथॉरिटी बनाई जाएगी, जो गेमिंग इंडस्ट्री को रेगुलेट करेगी, गेम्स को रजिस्टर करेगी और ये तय करेगी कि कौन सा गेम रियल-मनी गेम है। ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा: पबजी और फ्री फायर जैसे ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स को सपोर्ट किया जाएगा। ये गेम्स बिना पैसे वाले होते हैं इसलिए इन्हें बढ़ावा मिले। ऑनलाइन गेमिंग मार्केट में 86% रेवेन्यू रियल मनी फॉर्मेट से थी भारत में ऑनलाइन गेमिंग मार्केट अभी करीब 32,000 करोड़ रुपए का है। इसमें से 86% रेवेन्यू रियल मनी फॉर्मेट से आता था। 2029 तक इसके करीब 80 हजार करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद थी। लेकिन अब इन्होंने रियल मनी गेम्स बंद कर दिए हैं। इंडस्ट्री के लोग कह रहे हैं कि सरकार के इस कदम से 2 लाख नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। सरकार को हर साल करीब 20 हजार रुपए के टैक्स का नुकसान भी हो सकता है। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… ऑनलाइन गेमिंग रेगुलेशन पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- मनी गेमिंग ऐप्स का टेरर फाइनेंस से लिंक केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर बताया कि अनरेगुलेटेड ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स का टेरर फाइनेंस और मनी लॉन्ड्रिंग से लिंक है। इसलिए इन्हें रेगुलेट करने के लिए कानून बनाना जरूरी था। केंद्र ने बताया कि ऑनलाइन पैसों वाले गेम तेजी से बढ़ रहे हैं और इससे धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी और कुछ मामलों में आतंकवाद को फंडिंग हो रही है, जो नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
सिवनी में तेज रफ्तार ट्रैक्टर पलटा:दबने से ड्राइवर की मौके पर मौत, मृतक कान्हीवाड़ा का रहने वाला

सिवनी जिले के बंडोल इलाके में शुक्रवार दोपहर बलारपुर गांव के पास एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर अचानक बेकाबू होकर पलट गया, जिसमें दबने से ड्राइवर की मौके पर ही जान चली गई। हादसा दोपहर करीब 1 बजे का है। जानकारी के मुताबिक, कान्हीवाड़ा के हिनोतिया गांव का रहने वाला बृजलाल मरकाम ट्रैक्टर लेकर किसी काम से निकला था। जैसे ही वह बलारपुर गांव के पास पहुंचा, ट्रैक्टर की रफ्तार तेज होने की वजह से वह उस पर काबू नहीं रख पाया और गाड़ी पलट गई। बृजलाल ट्रैक्टर के नीचे बुरी तरह दब गया और जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। पुलिस ने शुरू की जांच घटना की खबर मिलते ही बंडोल थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने गांव वालों की मदद से शव को बाहर निकाला और पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवाया। बंडोल थाना प्रभारी मनोज जंघेला ने बताया कि पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और मामले की छानबीन की जा रही है। सावधानी की अपील शुरुआती जांच में यही माना जा रहा है कि हादसा ट्रैक्टर की तेज गति के कारण हुआ है। पुलिस ने एक बार फिर वाहन चालकों से अपील की है कि वे सड़क पर चलते समय सावधानी बरतें और यातायात नियमों का पालन करें ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।
न्यूजीलैंड ने साउथ अफ्रीका को 8 विकेट से हराया:5 टी-20 की सीरीज में 2-1 से बढ़त बनाई, टॉम लैथम ने फिफ्टी लगाई

न्यूजीलैंड ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ टी-20 सीरीज के तीसरे मैच को 8 विकेट से जीत लिया है। इसी के साथ टीम ने 5 मैचों की सीरीज में 2-1 की बढ़त भी बना ली है। चौथा मैच चौथा मैच 22 मार्च को वेलिंग्टन में खेला जाएगा। ऑकलैंड के इडेन पार्क स्टेडियम में न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर गेंदबाजी करने का फैसला लिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी साउथ अफ्रीका की टीम ने 20 ओवर में 9 विकेट पर 136 रन बनाए। 137 रन का टारगेट न्यूजीलैंड ने 16.2 ओवर में दो विकेट पर हासिल कर लिया। टॉम लैथम 63 रन बनाकर नाबाद लौटे। वहीं, लॉकी फर्ग्यूसन ने अपने कोटे के चार ओवर में 9 रन देकर एक विकेट लिया। उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। साउथ अफ्रीका ने पावरप्ले में तीन विकेट गंवाए टॉस हारकर बैटिंग कर रही साउथ अफ्रीका की शुरुआत खराब रही। टीम ने पावरप्ले के 6 ओवर में 41 रन बनाने में टॉप-3 बैटर्स के विकेट गंवा दिए थे। टॉनी डी जॉर्जी 15, वियान मुल्डर जीरो और कॉनर एस्टरहुइजन ने 15 रन बनाए। कोई बैटर फिफ्टी नहीं लगा सका शुरुआती 6 ओवर में खराब शुरुआत के बाद साउथ अफ्रीका की टीम नियमित अंतराल में विकेट गंवाती रही। टीम का कोई भी बल्लेबाज फिफ्टी नहीं लगा सका। यहां तक कि एक भी बैटर 30 रन का आंकड़ा हासिल नहीं कर सका। अफ्रीका की ओर से 10वें नंबर के बल्लेबाज नकोबानी मोकोएना ने सबसे ज्यादा 26 रन बनाए। काइल जैमिसन, मिचेल सैंटनर और बेन सीयर्स ने 2-2 विकेट झटके। लॉकी फर्ग्यूसन, कोल मैकॉन्ची और जिमी नीशाम को एक-एक विकेट मिला। कीवी ओपनर्स की फिफ्टी पार्टनरशिप 137 रन का टारगेट चेज कर रही न्यूजीलैंड के ओपनर्स ने टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। डेवोन कॉन्वे और टॉम लैथम की जोड़ी ने पहले विकेट के लिए 66 बॉल पर 96 रनों ही अहम साझेदारी की। यहां कॉन्वे 39 रन बनाकर आउट हुए। उन्हें केशव महाराज ने कैच आउट कराया। टॉम लैथम की फिफ्टी, मैच जिताकर लौटे कॉन्वे के आउट होने के बाद टॉम लैथम ने टिम रॉबिन्सन (17 रन) के साथ पारी को आंगे बढ़ाया। लेकिन रॉबिन्सन को 17वें ओवर की पहली बॉल पर लुथो सिपामला ने LBW कर दिया। हालांकि, तब टीम ने स्कोर लेवल कर लिया था। सिपामला की दूसरी बॉल पर निक केली ने एक रन लिया और टीम को 8 विकेट की जीत दिला दी। टॉम लैथम 55 बॉल पर 63 रन बनाकर नाबाद लौटे। ——————————————– इंटरनेशनल क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… IPL से चुनी जाएगी वन-डे वर्ल्ड कप 2027 की टीम; 20 इंडियन प्लेयर्स शॉर्टलिस्ट 28 मार्च से शुरू हो रहा IPL भारतीय खिलाड़ियों के लिए खास रहने वाला है। टी–20 फॉर्मेट में खेली जानी वाली इस लीग से टीम इंडिया की वनडे वनडे वर्ल्ड कप 2027 की टीम तय होगी। पढ़ें पूरी खबर
मार्च-अप्रैल में बीमारियों से बचने के उपाय: डॉ. परिनीता कौर के सुझाव

मार्च-अप्रैल में लोग सबसे ज्यादा बीमार पड़ते हैं. हर दिन बदलता मौसम इसका एक बड़ा कारण है. ऐसे में अगर आप एयर-कंडीशन्ड ऑफिस से अचानक तेज गर्मी में निकलते हैं तो बीमार होने की संभावना और बढ़ जाती है. यह भले ही हमारी दिनचर्या का हिस्सा लग सकता है, लेकिन हमारा शरीर इसे अलग तरीके से महसूस करता है. तापमान में यह अचानक बदलाव शरीर पर एक तरह का “दोहरा थर्मल शॉक” डालता है, जिससे शरीर पर हल्का लेकिन असरदार दबाव पड़ता है. डॉ. परिनीता कौर, एसोसिएट डायरेक्टर एवं यूनिट हेड – इंटरनल मेडिसिन, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, द्वारका बताती हैं कि हमारा शरीर अपने अंदर का तापमान संतुलित रखने की कोशिश करता है, जिसे थर्मोरेगुलेशन कहा जाता है. जब हम लंबे समय तक एसी में रहते हैं, तो शरीर ठंडे माहौल के अनुसार खुद को ढाल लेता है, जिससे पसीना कम आता है और शरीर की कुछ प्रक्रियाएं धीमी हो जाती हैं. फिर जैसे ही हम बाहर तेज गर्मी में जाते हैं, शरीर को अचानक सक्रिय होना पड़ता है जिससे पसीना आना शुरू होता है, त्वचा में रक्त संचार बढ़ता है और शरीर खुद को ठंडा करने की कोशिश करता है. यह बदलाव हमेशा आसान नहीं होता. टेंपरेचर में बदलाव का असर इसका सबसे आम असर थकान के रूप में दिखता है. शरीर को खुद को ढालने में ज्यादा ऊर्जा लगती है, जिससे बिना ज्यादा काम किए भी थकान महसूस होती है. सिरदर्द भी एक सामान्य समस्या है, जो अक्सर डिहाइड्रेशन या तापमान में अचानक बदलाव से होता है. समय के साथ यह स्थिति काम करने की क्षमता और पूरे सेहत पर भी असर डाल सकती है. रेस्टिरेटरी सिस्टम की गड़बड़ी रेस्पिरेटरी सिस्टम भी इससे प्रभावित होता है. एसी वाले कमरों में नमी कम होती है, जिससे नाक और गला सूख जाता है. इससे एलर्जी, जलन और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इसके तुरंत बाद जब हम गर्म और नमी भरी हवा में जाते हैं, तो यह समस्या और बढ़ सकती है, जिससे खांसी, गले में परेशानी या साइनस की दिक्कत हो सकती है. स्किन प्रॉब्लमत्वचा पर भी इसका असर पड़ता है. एसी में ज्यादा समय बिताने से त्वचा की नमी कम हो जाती है, जिससे सूखापन और संवेदनशीलता बढ़ती है. बाहर की गर्मी, प्रदूषण और धूप के संपर्क में आने पर त्वचा में जलन, टैनिंग या पिंपल्स हो सकते हैं. बार-बार होने वाला यह बदलाव त्वचा की सुरक्षा परत को कमजोर कर देता है. इन लोगों के लिए ज्यादा खतराटेंपरेचर में यह असंतुलन हल्के डिहाइड्रेशन का कारण बन सकता है, जो लंबे समय में ऊर्जा, ध्यान और किडनी के काम पर असर डाल सकता है. इसके साथ ही जिन लोगों को पहले से माइग्रेन, अस्थमा या दिल से जुड़ी समस्याएं हैं, उनके लिए यह तापमान बदलाव ट्रिगर बन सकता है. इससे रक्त वाहिकाओं में बदलाव आता है, सांस लेने में फर्क पड़ता है और लक्षण बढ़ सकते हैं. तो इससे बचाव कैसे किया जाए? सबसे जरूरी है धीरे-धीरे बदलाव को अपनाना और कुछ आदतों में सुधार करना. एसी का तापमान बहुत कम न रखें, बल्कि सामान्य स्तर पर रखें ताकि शरीर को ढलने में आसानी हो. दिनभर पर्याप्त पानी पीते रहें, भले ही प्यास न लगे. बाहर जाते समय हल्का दुपट्टा या जैकेट पहनना अचानक बदलाव को कम कर सकता है. इसके अलावा, त्वचा की देखभाल, मॉइस्चराइज़र का इस्तेमाल और इनडोर हवा की गुणवत्ता का ध्यान रखना भी जरूरी है. Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
सांप-बिच्छू के काटने से लेकर स्किन इंफेक्शन तक… भटवास है काम की जड़ी-बूटी, कैसे करें इस्तेमाल जानें यहां

Last Updated:March 20, 2026, 15:13 IST भटवास, झाड़ियों में उगने वाली यह साधारण जड़ी-बूटी, अपने औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद में विशेष स्थान रखती है. यह पेट, लिवर, त्वचा और बालों की कई समस्याओं में राहत देने के साथ-साथ डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मदद करती है. आइए जानते हैं भटवास के फायदे और इसे इस्तेमाल करने का सही तरीका. भटवास का पौधा दिखने में जितना खूबसूरत है, उतना ही उपयोगी भी है. इसके फूल पहले सफेद होते हैं और धीरे-धीरे रंग बदलते हैं, जिससे यह और आकर्षक लगने लगता है. गांव-देहात में यह आसानी से मिल जाता है, लेकिन इसके असली फायदों को बहुत कम लोग जानते हैं. आयुर्वेद में इसे एक बेहद असरदार जड़ी-बूटी माना गया है. आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद इकबाल बताते हैं कि भटवास में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं. इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व मौजूद हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं. यह शरीर की कई छोटी-बड़ी समस्याओं को ठीक करने में मदद करता है और खास बात यह है कि इसे इस्तेमाल करना भी काफी आसान है. अगर आपको लिवर से जुड़ी समस्या है या पेट खराब रहता है, तो भटवास की पत्तियां काफी फायदेमंद हो सकती हैं. पत्तियों को पीसकर इस्तेमाल करने से डायरिया और सिरदर्द में भी राहत मिलती है. पुराने समय से लोग इसे घरेलू इलाज के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे हैं. Add News18 as Preferred Source on Google भटवास बालों और त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है. अगर डैंड्रफ या स्किन इंफेक्शन की समस्या है, तो इसका लेप लगाने से आराम मिल सकता है. इसके अलावा घाव और सूजन में भी यह जल्दी असर दिखाता है. हालांकि, भटवास को सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है. पहले डॉक्टर की सलाह लें और उपयोग से पहले इसे अच्छे से साफ कर लें. सबसे खास बात यह है कि सांप या बिच्छू के काटने पर भी भटवास का इस्तेमाल किया जाता है. इसकी जड़ का लेप बनाकर लगाने से जहर के असर को कम करने में मदद मिलती है. हालांकि ऐसी स्थिति में डॉक्टर की मदद लेना जरूरी है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इसे प्राथमिक उपचार के तौर पर अपनाया जाता है. आज के समय में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, ऐसे में भटवास काफी लाभकारी साबित हो सकता है. इसकी पत्तियों को चबाकर खाने से शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है और ब्लड प्रेशर भी संतुलित रहता है. यह एक प्राकृतिक और नेचुरल तरीका भी माना जाता है. झाड़ियों में उगने वाला साधारण सा भटवास कोलेस्ट्रॉल और अर्थराइटिस जैसी समस्याओं में भी फायदेमंद माना जाता है. यह शरीर में सूजन को कम करता है और जोड़ों के दर्द में राहत देता है. नियमित रूप से सही तरीके से इसका उपयोग करने पर धीरे-धीरे आराम महसूस होने लगता है. हालांकि भटवास के कई फायदे हैं, लेकिन इसे डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की बिना सलाह के ज्यादा इस्तेमाल करना ठीक नहीं है. हर व्यक्ति की बॉडी अलग होती है, इसलिए किसी भी जड़ी-बूटी का उपयोग करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है. सही जानकारी और सही मात्रा में इस्तेमाल करने से ही इसका पूरा फायदा मिलता है. First Published : March 20, 2026, 15:13 IST
रोज सुबह पिए ये खास ड्रिंक, बढ़ेगी इम्युनिटी और एनर्जी, आएगा स्किन पर अनोखा ग्लो

Last Updated:March 20, 2026, 15:11 IST Chia Seeds Special Drinks: स्वस्थ रहने के लिए लोग अब प्राकृतिक और आसान घरेलू उपायों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. इन्हीं में से एक है सुबह खाली पेट चिया सीड्स का पानी पीना. पोषक तत्वों से भरपूर यह ड्रिंक शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचा सकती है. आइए जानते हैं खास रेसिपी… बदलती लाइफस्टाइल और मौसम के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है. ऐसे में चिया सीड्स बेहतर स्वास्थ्य के लिए अच्छा विकल्प माना जाता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और जरूरी पोषक तत्व शरीर को अंदर से मजबूत बनाते है. रोज सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत मिलती है. यह ड्रिंक शरीर में सूजन कम करने और सेल्स को फ्री रेडिकल्स से बचाने में भी मददगार मानी जाती है. नियमित सेवन से थकान कम महसूस हो सकती है, शरीर ज्यादा एक्टिव रहता है. खासकर बदलते मौसम में यह आदत इम्युनिटी को बनाए रखने में उपयोगी है. चिया सीड्स का पानी वजन घटाने या नियंत्रित रखने वालों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है. इसमें मौजूद फाइबर पानी सोखकर जेल जैसा बन जाता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा महसूस होता है. इससे बार-बार खाने या स्नैकिंग की आदत कम हो सकती है. कम कैलोरी और ज्यादा पोषण वाला यह ड्रिंक डाइट प्लान में आसानी से शामिल किया जा सकता है. सुबह खाली पेट सेवन करने से मेटाबॉलिज्म को सक्रिय करने में मदद मिलती है, जिससे फैट बर्निंग प्रक्रिया बेहतर हो सकती है. हालांकि, केवल इस ड्रिंक पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार और नियमित व्यायाम भी जरूरी है. पाचन से जुड़ी समस्याएं जैसे कब्ज, गैस या अपच आजकल आम हो गई हैं. चिया सीड्स में घुलनशील फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो आंतों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में सहायक मानी जाती है. जब इसे पानी में भिगोया जाता है तो यह एक मुलायम जेल बनाता है, जो भोजन के पाचन को आसान बना सकता है. सुबह इसका सेवन करने से पेट साफ रहने में मदद मिल सकती है और आंतों की सेहत बेहतर हो सकती है. साथ ही यह गट हेल्थ को सपोर्ट कर सकता है, जिससे शरीर पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से अवशोषित कर पाता है. Add News18 as Preferred Source on Google चिया सीड्स पानी को अच्छी तरह सोख लेते हैं, धीरे-धीरे शरीर में नमी बनाए रखने में मदद करते हैं. गर्मियों या ज्यादा मेहनत वाले दिनों में यह खास तौर पर फायदेमंद हो सकता है. सुबह इसका पानी पीने से शरीर में हाइड्रेशन का स्तर बेहतर बना रह सकता है, जिससे सिरदर्द, कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं. यह ड्रिंक इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को भी सपोर्ट कर सकती है. जो लोग कम पानी पीते हैं, उनके लिए यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है. नियमित सेवन से त्वचा और शरीर दोनों तरोताजा महसूस कर सकते हैं. चिया सीड्स में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है, जो दिल के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. सुबह इसका सेवन करने से खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है. साथ ही यह ब्लड प्रेशर संतुलन और रक्त संचार को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है. हेल्दी डाइट के साथ इसे शामिल करने से हृदय संबंधी जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि जिन लोगों को पहले से दिल से जुड़ी समस्या है, उन्हें डॉक्टर की सलाह लेकर ही इसे नियमित रूप से लेना चाहिए. एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर चिया सीड्स त्वचा को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं. सुबह खाली पेट इसका पानी पीने से शरीर में टॉक्सिन्स बाहर निकलने की प्रक्रिया बेहतर हो सकती है, जिससे त्वचा साफ और हेल्दी दिख सकती है. यह ड्रिंक स्किन को अंदर से हाइड्रेट रखने में भी मदद कर सकती है, जिससे रूखापन और बेजानपन कम हो सकता है. नियमित सेवन के साथ संतुलित आहार और पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है, तभी त्वचा पर बेहतर असर देखने को मिल सकता है. चिया सीड्स का अधिकतम लाभ पाने के लिए एक चम्मच बीज को रातभर या कम से कम 30 मिनट पानी में भिगोना चाहिए. सुबह खाली पेट इस पानी को पीना फायदेमंद माना जाता है. स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें नींबू का रस या थोड़ा शहद मिलाया जा सकता है. ध्यान रखें कि इसे सूखा न खाएं, क्योंकि इससे गले या पाचन में दिक्कत हो सकती है. शुरुआत में कम मात्रा से सेवन शुरू करें और शरीर की प्रतिक्रिया को समझें. गर्भवती महिलाएं या गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग डॉक्टर से सलाह लेकर ही इसका नियमित उपयोग करें. First Published : March 20, 2026, 15:09 IST
महाकवि कालिदास के चैत का मजा उठाइए,बस लोककवि घाघ का रखिए ध्यान, जान लें फिट रहने के लिए क्या न खाएं

चैत्र या चैत को मधुमास भी कहते हैं. महानगरों को छोड़ दें तो हर और कुदरत मधु बरसाती सी दिखती है. नए पत्तों के परिधान पहने पेड़ शायद इसी आनंद का स्वागत करते हैं. जिन इलाकों में अभी भी महुए के पेड़ हैं वहां से गुजर भर जाइए, खुशबू भर से मस्ती चढ़ जाएगी. हां, मौसम के बदलवा के कारण इस दौर में खाने पीने में कुछ सावधानी रखनी पड़ती है. हालांकि लोक से जुड़े लोग जानते हैं कि इस मौमस में क्या खाना चाहिए क्या नहीं. इसके लिए उनके पास महाकवि घाघ की कहन या लोकोक्त्ति जुबान पर रहती है- चैते गुड़ बैसाखे तेल, जेठे पन्थ असाढ़े बेल.सावन साग न भादों दही, क्वार करेला न कातिक मही.अगहन जीरा पूसे धना, माघे मिश्री फागुन चना.ई बारह जो देय बचाय, वहि घर बैद कबौं न जाय. घाघ भड्डरी को समझिएमतलब ये है कि चैत के महीने में गुड़, बैसाख में तेल का सेवन नहीं करना चाहिए. तला भुना मत खाइए. जेठ में पंथ यानी यात्रा से बचना चाहिए. असाढ़ के महीने में बेल ( बेल पत्थर या श्रीफल), सावन में साग, भादों में दही, क्वार में करेले, कातिक में मट्ठा या छाछ नहीं पीनी चाहिए. अहगन के महीने में जीरा, पूस में धान, माघ में मिश्री, फागुन में चना नहीं खाना चाहिए. बारह ऋतुओं में इन बारह चीजों से जो बचेगा उसके घर बैद्य नहीं जाएगा. मतलब वो अस्वस्थ नहीं होगा. मौसम के मिजाज और खाने की चीजों की तासीर के मुताबिक घाघ भड्डरी ने ये दोहा रचा होगा. इसे कम से कम उत्तर प्रदेश और बिहार में लोग खूब कोट करते हैं और बहुत से लोग मानते भी हैं. महाकवि कालिदास ने चैत्र के महीने पर बहुत रोचक श्लोक लिखें हैं. (AI फोटो) चैत्र की खूबियों पर महाकवि कालिदासखैर, वसंत के आनंद के लिए सेहतमंद रहना जरूरी है, इस लिहाज से इसका जिक्र मौजूं लगा. लेकिन चैत्र के रंगीन चरित्र को महाकवि कालिदास ने खूब समझा है. उन्होंने ऋतुसंहार में इसका जिक्र भी किया है. लिखते हैं ये मौसम आते ही – अन्योन्यस्पर्शसुखस्पृहया परस्परंप्राप्तौ युवानौ युवती च यूनि ।अन्योन्यस्पर्शसुखस्पृहया परस्परंप्राप्तौ युवानौ युवती च यूनि ॥ मतलब चैत के साथ वसंत में ऐसा मादक मौसम होता है कि युवक-युवतिया एक दूसरे को छूने के सुख की लालसा से परस्पर मिलते हैं. दोनो एक दूसरे के स्पर्श की तीव्र इच्छा से व्याकुल हैं. सजी हुई मादक प्रकृति युवाओं में प्रेम की इच्छा को तेजी से हवा देती है. इसकी अनुभूति करनी हो तो किसी उस इलाके में चले जाइए जहां महुए के पेड़ हों. खास तौर से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में जहां हर साल 55 हजार टन महुआ पैदा होता है. महुए की उपज झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, गुजरात से लेकर महाराष्ट्र तक में अच्छा खासा होता है. हमने तो पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी कई इलाकों में महुए की पैदावार होते देखा है. इन इलाकों में भोर में आप निकल जाएं तो दिव्य मादक गंध हवा में फैली मिलेगी. दिल्ली में भी दिखेगी चैत की चमकपहले दिल्ली के भी कुछ इलाकों में महुए के पेड़ थे. वहां से गुजरते ही मन खुश हो उठता था. चैत्र ही वो महीना होता है जिसमें ज्यादातर महुए के फूल नीचे गिर कर बिखर जाते हैं. इनकी खुशबू के अलावा इससे खाने के लिए बहुत सारे पुष्टिकर व्यंजन बनाए जाते रहे हैं. साथ ही इसके सबसे बड़े हिस्से को शराब बनाने में इस्तेमाल किया जाता है. फिर शराब अपनी मादकता फैलती है. कहने का मतलब ये है कि अगर घाघ भड्डरी जैसे रचनाकारों की लोकोक्तियां मान कर सेहदमंद रहा जाय तो चैत्र महीने और वसंत का आनंद उठाया जा सकता है. अगर आप भी चैत को समझना चाहते हैं तो चैत का शुक्ल पक्ष शुरु हो गया है. कहीं ऐसी जगह पहुंच जाएं जहां कंकरीट के ऊंचे जंगल न हों. पेड़ पौधे लगे हों. आसमान साफ दिख रहा हो. वहां खड़े भर हो जाइए और चैत की मस्ती आपको मिल जाएगी.








