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China Nuclear Submarine Ballistic Missile Launch: Indo-Pacific Tension Escalates

China Nuclear Submarine Ballistic Missile Launch: Indo-Pacific Tension Escalates

बीजिंग/नई दिल्ली18 मिनट पहले

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चीन ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का प्रशांत महासागर में परीक्षण कर अपनी रणनीतिक सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है।

अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ प्रशांत क्षेत्र का मामला नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता का संकेत है, जिसका सीधा असर भारत की सुरक्षा रणनीति पर भी पड़ सकता है।

सितंबर 2024 में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की रॉकेट फोर्स ने प्रशांत महासागर से अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का परीक्षण किया (फाइल फोटो)।

सितंबर 2024 में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की रॉकेट फोर्स ने प्रशांत महासागर से अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का परीक्षण किया (फाइल फोटो)।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार परीक्षण में संभवतः चीन की नई पीढ़ी की JL-3 पनडुब्बी आधारित बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया। यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मानी जाती है और इसकी मारक क्षमता इतनी है कि चीन के समुद्री क्षेत्र से भी हजारों किलोमीटर दूर लक्ष्य साधे जा सकते हैं। चीन इसे नियमित सैन्य अभ्यास बता रहा है, लेकिन क्षेत्रीय देशों का कहना है कि इससे हिंद-प्रशांत में सैन्य प्रतिस्पर्धा और तेज होगी।

भारत के लिए चिंता

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता चीन की बढ़ती समुद्री मौजूदगी है। बीते कुछ वर्षों में चीनी नौसेना की पनडुब्बियां हिंद महासागर में कई बार देखी गई हैं। जिबूती में सैन्य अड्डा, पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह और श्रीलंका के हम्बनटोटा पोर्ट पर चीन की सक्रियता पहले से नई दिल्ली के लिए रणनीतिक चुनौती है। यदि चीन अधिक आधुनिक और कम शोर वाली परमाणु पनडुब्बियों को तैनात करता है, तो हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी सैन्य पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं।

हिंद महासागर में चीन की मौजूदगी लगातार बढ़ रही

अब तक चीन का फोकस दक्षिण चीन सागर और ताइवान तक माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उसकी परमाणु पनडुब्बियां हिंद महासागर में भी नियमित रूप से देखी गई हैं।

चीन का जिबूती में सैन्य अड्डा, पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट तक पहुंच और श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह पर प्रभाव भारत के लिए पहले से रणनीतिक चुनौती हैं।

यदि चीन की नई पनडुब्बियां स्टेल्थ और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस हो जाती हैं, तो वे हिंद महासागर से भी भारत के अधिकांश हिस्सों को निशाना बना सकती हैं।

भारत के परमाणु प्रतिरोधक संतुलन पर असर

भारत की परमाणु नीति क्रेडिबल मिनिमम डेटेरेंस और नो फर्स्ट यूज पर आधारित है। चीन यदि समुद्र आधारित परमाणु क्षमता तेजी से बढ़ाता है तो भारत को भी अधिक परमाणु पनडुब्बियां, लंबी दूरी की K-4 और K-5 मिसाइलें और समुद्री निगरानी नेटवर्क तेजी से मजबूत करना होगा।

दो मोर्चों पर चुनौती

भारत पहले से उत्तरी सीमा पर चीन और पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान का सामना कर रहा है। यदि चीन समुद्री मोर्चे पर भी अपनी क्षमता बढ़ाता है तो भारत को भूमि, वायु और समुद्र—तीनों मोर्चों पर सैन्य संसाधन बढ़ाने पड़ सकते हैं।

अंडमान-निकोबार की रणनीतिक अहमियत बढ़ेगी

भारतीय नौसेना के अंडमान एंड निकोबार कमांड का क्रेस्ट।

भारतीय नौसेना के अंडमान एंड निकोबार कमांड का क्रेस्ट।

भारत का अंडमान एवं निकोबार कमांड मलक्का स्ट्रेट की निगरानी करता है। चीन की पनडुब्बी गतिविधियां बढ़ने पर भारत को समुद्री निगरानी बढ़ाने के अलावा पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare), ड्रोन एवं P-8I निगरानी विमान की क्षमताओं को और मजबूत करना पड़ेगा।

QUAD और इंडो-पैसिफिक साझेदारी मजबूत होगी

चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों से भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच QUAD सहयोग और मजबूत हो सकता है। समुद्री सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों की आवृत्ति बढ़ सकती है।

चीन लगातार क्यों बढ़ा रहा है सैन्य ताकत?

विशेषज्ञों के अनुसार चीन ताइवान पर दबाव बढ़ा रहा है, अमेरिका को प्रशांत क्षेत्र में चुनौती देना चाहता है, अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता मजबूत कर रहा है और हिंद-प्रशांत में सैन्य प्रभाव बढ़ाना चाहता है। इसके साथ ही चीन भविष्य में समुद्र आधारित परमाणु शक्ति के जरिए वैश्विक रणनीतिक संतुलन बदलना चाहता है।

भारत क्या कर रहा है?

भारतीय न्यूक्लियर सबमरीन आईएनएस अरिघात (फाइल)।

भारतीय न्यूक्लियर सबमरीन आईएनएस अरिघात (फाइल)।

भारत पहले से अपनी समुद्री शक्ति बढ़ाने पर काम कर रहा है। इस दिशा में भारत जो कदम उठा रहा है उनमें INS अरिहंत और अरिघात जैसी परमाणु पनडुब्बियों का विकास, K-15 और K-4 बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, P-8I समुद्री निगरानी विमान, अंडमान-निकोबार कमांड का विस्तार और QUAD के तहत अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास (मालाबार) शामिल हैं।

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बीजिंग/नई दिल्ली18 मिनट पहले

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चीन ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का प्रशांत महासागर में परीक्षण कर अपनी रणनीतिक सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है।

अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ प्रशांत क्षेत्र का मामला नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता का संकेत है, जिसका सीधा असर भारत की सुरक्षा रणनीति पर भी पड़ सकता है।

सितंबर 2024 में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की रॉकेट फोर्स ने प्रशांत महासागर से अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का परीक्षण किया (फाइल फोटो)।

सितंबर 2024 में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की रॉकेट फोर्स ने प्रशांत महासागर से अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का परीक्षण किया (फाइल फोटो)।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार परीक्षण में संभवतः चीन की नई पीढ़ी की JL-3 पनडुब्बी आधारित बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया। यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मानी जाती है और इसकी मारक क्षमता इतनी है कि चीन के समुद्री क्षेत्र से भी हजारों किलोमीटर दूर लक्ष्य साधे जा सकते हैं। चीन इसे नियमित सैन्य अभ्यास बता रहा है, लेकिन क्षेत्रीय देशों का कहना है कि इससे हिंद-प्रशांत में सैन्य प्रतिस्पर्धा और तेज होगी।

भारत के लिए चिंता

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता चीन की बढ़ती समुद्री मौजूदगी है। बीते कुछ वर्षों में चीनी नौसेना की पनडुब्बियां हिंद महासागर में कई बार देखी गई हैं। जिबूती में सैन्य अड्डा, पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह और श्रीलंका के हम्बनटोटा पोर्ट पर चीन की सक्रियता पहले से नई दिल्ली के लिए रणनीतिक चुनौती है। यदि चीन अधिक आधुनिक और कम शोर वाली परमाणु पनडुब्बियों को तैनात करता है, तो हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी सैन्य पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं।

हिंद महासागर में चीन की मौजूदगी लगातार बढ़ रही

अब तक चीन का फोकस दक्षिण चीन सागर और ताइवान तक माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उसकी परमाणु पनडुब्बियां हिंद महासागर में भी नियमित रूप से देखी गई हैं।

चीन का जिबूती में सैन्य अड्डा, पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट तक पहुंच और श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह पर प्रभाव भारत के लिए पहले से रणनीतिक चुनौती हैं।

यदि चीन की नई पनडुब्बियां स्टेल्थ और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस हो जाती हैं, तो वे हिंद महासागर से भी भारत के अधिकांश हिस्सों को निशाना बना सकती हैं।

भारत के परमाणु प्रतिरोधक संतुलन पर असर

भारत की परमाणु नीति क्रेडिबल मिनिमम डेटेरेंस और नो फर्स्ट यूज पर आधारित है। चीन यदि समुद्र आधारित परमाणु क्षमता तेजी से बढ़ाता है तो भारत को भी अधिक परमाणु पनडुब्बियां, लंबी दूरी की K-4 और K-5 मिसाइलें और समुद्री निगरानी नेटवर्क तेजी से मजबूत करना होगा।

दो मोर्चों पर चुनौती

भारत पहले से उत्तरी सीमा पर चीन और पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान का सामना कर रहा है। यदि चीन समुद्री मोर्चे पर भी अपनी क्षमता बढ़ाता है तो भारत को भूमि, वायु और समुद्र—तीनों मोर्चों पर सैन्य संसाधन बढ़ाने पड़ सकते हैं।

अंडमान-निकोबार की रणनीतिक अहमियत बढ़ेगी

भारतीय नौसेना के अंडमान एंड निकोबार कमांड का क्रेस्ट।

भारतीय नौसेना के अंडमान एंड निकोबार कमांड का क्रेस्ट।

भारत का अंडमान एवं निकोबार कमांड मलक्का स्ट्रेट की निगरानी करता है। चीन की पनडुब्बी गतिविधियां बढ़ने पर भारत को समुद्री निगरानी बढ़ाने के अलावा पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare), ड्रोन एवं P-8I निगरानी विमान की क्षमताओं को और मजबूत करना पड़ेगा।

QUAD और इंडो-पैसिफिक साझेदारी मजबूत होगी

चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों से भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच QUAD सहयोग और मजबूत हो सकता है। समुद्री सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों की आवृत्ति बढ़ सकती है।

चीन लगातार क्यों बढ़ा रहा है सैन्य ताकत?

विशेषज्ञों के अनुसार चीन ताइवान पर दबाव बढ़ा रहा है, अमेरिका को प्रशांत क्षेत्र में चुनौती देना चाहता है, अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता मजबूत कर रहा है और हिंद-प्रशांत में सैन्य प्रभाव बढ़ाना चाहता है। इसके साथ ही चीन भविष्य में समुद्र आधारित परमाणु शक्ति के जरिए वैश्विक रणनीतिक संतुलन बदलना चाहता है।

भारत क्या कर रहा है?

भारतीय न्यूक्लियर सबमरीन आईएनएस अरिघात (फाइल)।

भारतीय न्यूक्लियर सबमरीन आईएनएस अरिघात (फाइल)।

भारत पहले से अपनी समुद्री शक्ति बढ़ाने पर काम कर रहा है। इस दिशा में भारत जो कदम उठा रहा है उनमें INS अरिहंत और अरिघात जैसी परमाणु पनडुब्बियों का विकास, K-15 और K-4 बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, P-8I समुद्री निगरानी विमान, अंडमान-निकोबार कमांड का विस्तार और QUAD के तहत अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास (मालाबार) शामिल हैं।

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