कच्ची मुंगफली बनाम भुनी हुई मुंगफली: मूंगफली या फिर भुनी मूंगफली… वजन, वजन और डमाज के लिए सबसे ज्यादा स्वादिष्ट कौन है?

कच्ची मुंगफली बनाम भुनी मुंगफली: मूंगफली को साख के लिए सबसे अच्छा पद माना जाता है। मूंगफली की धूप हो या शाम की चाय, मूंगफली का साथ हमेशा ख़राब होता है। लेकिन जब बात सेहत की होती है, तो बार-बार कंफ्यूज हो जाते हैं कि मकई की फसल या फिर भुनी हुई। आइये इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि वजन, कार्बोहाइड्रेट नियंत्रण और पाचन संबंधी आवश्यकताओं में से कौन सबसे ज्यादा हानिकारक है? मूंगफली में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन-ई की मात्रा अधिक होती है। इसमें तेल सुरक्षित रहते हैं, जो त्वचा और बालों के लिए अच्छे होते हैं। वहीं भुनी मूंगफली में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट बढ़ सकते हैं, लेकिन विटामिन-सी और कुछ बी-विटामिन गर्मी के कारण कम हो सकते हैं। इसलिए आप सोयाबीन खा सकते हैं। वजन के लिए कौन सी मूंगफली? अगर आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं, तो मूंगफली का स्वाद बहुत ज्यादा है। मूंगफली में मूंगफली की मात्रा बनी रहती है, जो लंबे समय तक पेट भरने में मदद करती है। वहीं, भुनी हुई मूंगफली सिलिकॉन नमक वाली अधिक खाने में आती है, जिससे आप ज्यादा मात्रा में कैलोरी ले सकते हैं। बिना नमक के भूनी मूंगफली का वजन भी प्रतिशत में सहायक है, लेकिन मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है। जोड़ों वाले कौन सी मूंगफली? मूंगफली का ग्लाइसेमिक यौगिक के लिए हानिकारक पदार्थ काफी कम होता है, जो शुगर लेवल को अचानक बढ़ने नहीं देता है। वहीं भुनी मूंगफली में मैग्नीशियम की अच्छी मात्रा होती है जो कि बेहतर साबित होती है। हालाँकि, बाज़ार की तली या नमक वाली मूंगफली से नुकसान। यदि आप चिप्स को बेचकर खाते हैं तो यह शुगर की खपत के लिए एक स्वस्थ आधार है। पाचन और खाद्य पदार्थों के लिए कौन सी मूंगफली? पाचन के मामले में मसाला मूंगफली थोड़ी भारी हो सकती है। कच्ची मूंगफली में फंगस का खतरा हो सकता है, जिससे पाचन में समस्या पैदा हो सकती है। भुनी हुई मूंगफली पचाने में सबसे आसान है क्योंकि भूनी के दौरान प्रोटीन केकीनेस को नष्ट कर दिया जाता है। इसलिए आप भुनी फ़ूड साइट। यदि आप सोयाबीन खाना चाहते हैं, तो उसे रात भर सब्जी बेचकर उपयोग करें। इससे उनके एंटी-न्यूट्रिएंट्स निकल जाते हैं और उन्हें पचाने में बहुत आसानी होती है। अगर आप मसाले को सुखाकर खा रहे हैं, तो दिल की सेहत के लिए यह मसाला और जरूरी है। वहीं अगर आप भुनी मूँगफली खा रहे हैं तो यह शाम के संस्करण के लिए सबसे अच्छा है। इस बात का ध्यान रखें कि वह तेल में तली हुई न हो। अधिक मात्रा में नमक वाली मूंगफली हाई ब्लड ड्राई के लिए बिकवाली हो सकती है। (टैग्सटूट्रांसलेट) कच्ची या भुनी हुई मूंगफली(टी) कच्ची मुंगफली बनाम भुनी हुई मुंगफली(टी) कच्ची मुंगफली खाने के नुक्सान(टी) कच्ची मुंगफली खाने के फायदे और नुक्सान(टी) कच्ची मुंगफली की रेसिपी(टी) कच्ची मुंगफली को कैसे भुने(टी) भुनी हुई मुंगफली के फ़ायदे(टी)कौन सी मूंगफली सबसे अच्छी है(टी)भुनी हुई या कच्ची(टी)वजन घटाने के लिए मुंगफली
Sharjeel Imam Gets 10-Day Interim Bail

नई दिल्ली3 मिनट पहले कॉपी लिंक तिहाड़ जेल से निकलकर परिवार की कार में बैठे शरजील इमाम। दिल्ली दंगा (2020) मामले में आरोपी शरजील इमाम शुक्रवार दोपहर दिल्ली की तिहाड़ जेल से बाहर आए। 9 मार्च को दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने शरजील को बीमार मां से मिलने और भाई की शादी में शामिल होने के लिए 20 मार्च से 30 मार्च की अंतरिम जमानत मंजूर की थी। तिहाड़ से बहार निकलते ही शरजील खुश नजर आए। हालांकि उन्होंने मीडिया से बात नहीं की। वे मोबाइल पर बात करते हुए कार की तरफ बढ़े। उनके परिवार के लोग भी मीडिया को रोकते हुए नजर आए। इमाम ने अदालत से 6 हफ्ते की राहत मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने उसे सीमित अवधि के लिए ही जमानत दी। इमाम के भाई की शादी 25 मार्च की है। कोर्ट के बाहर शरजील की 3 तस्वीरें… शरजील इमाम जेल से जब बाहर आए तब वे हाथ में कुछ सामान लिए नजर आए। शरजील इमाम 2020 के दिल्ली दंगा मामले में आरोपी हैं। वे 6 साल से जेल में हैं। तिहड़ा से निकलकर कार में बैठे शरजील मोबाइल पर किसी से बात करते दिखे। अंतरिम जमानत पर कोर्ट की शर्तें मामले से जुड़े किसी भी गवाह या व्यक्ति से संपर्क नहीं करना जांच अधिकारी को अपना मोबाइल नंबर देना परिवार और करीबी रिश्तेदारों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति से मिलने की अनुमति नहीं सोशल मीडिया के उपयोग पर भी रोक 30 मार्च की शाम तक जेल में सरेंडर करना जानिए 2020 दिल्ली दंगा केस में कब क्या हुआ… फरवरी 2020: CAA यानी नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के उत्तर-पूर्वी हिस्से में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी, जिसमें 54 लोग मारे गए और 700 से ज्यादा घायल हुए। उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य पर दंगों का मास्टरमाइंड होने का आरोप लगा। उन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और IPC की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। अगस्त 2020: शरजील इमाम को गिरफ्तार किया गया। सितंबर 2020: उमर खालिद अरेस्ट हुआ। अन्य आरोपी भी गिरफ्तार हुए। 2022: निचली अदालत ने आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। 2022-24: कई आरोपियों ने निचली अदालतों के जमानत खारिज करने के आदेशों के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया। 9 जुलाई 2025: दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा। 2 सितंबर 2025ः दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम समेत 9 की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। 13 अक्टूबर 2025ः शरजील इमाम ने बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में अंतरिम जमानत की याचिका दायर की। जनवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने इमाम की रेगुलर बेल याचिका खारिज की, कहा- मामला गंभीर है और ट्रायल जारी रहेगा 9 मार्च 2026: ट्रायल कोर्ट ने शरजील इमाम को 10 दिन की अंतरिम जमानत दी। ……………………… यह खबर भी पढ़ें… पुलिस बोली-दिल्ली दंगे देश में सत्ता परिवर्तन की साजिश थी: हिंसा फैलाने की कोशिश हुई; सुप्रीम कोर्ट में 177 पन्नों का हलफनामा दाखिल 2020 के दिल्ली दंगे कोई अचानक भड़की हिंसा नहीं थे, बल्कि केंद्र में सत्ता परिवर्तन करने की साजिश के तहत किए गए थे। इसका मकसद देश को कमजोर करना था। दिल्ली पुलिस ने यह बात 177 पन्नों के हलफनामे में कही है, जो अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट में उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर दाखिल किया गया था। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
हरे या फिर काले अंगूर: मिठास में कौन आगे और सेहत में कौन निकला नंबर वन? जानकर रह जाएंगे हैरान!

Last Updated:March 20, 2026, 16:26 IST डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि अगर बात मिठास की करें, तो हरे और काले अंगूर दोनों में ही प्राकृतिक शुगर पाई जाती है. लेकिन आमतौर पर काले अंगूर थोड़े ज्यादा मीठे महसूस होते हैं क्योंकि इनमें शुगर की मात्रा थोड़ी ज्यादा होती है. वहीं हरे अंगूर हल्के खट्टे-मीठे होते हैं, जो उन्हें रिफ्रेशिंग बनाते हैं. अंगूर एक ऐसा फल है जिसे लगभग हर कोई पसंद करता है. चाहे वो हरे अंगूर हों या काले, दोनों ही स्वाद और पोषण से भरपूर होते हैं. लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि आखिर इनमें से कौन ज्यादा मीठा होता है और सेहत के लिए कौन बेहतर है. डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि अगर बात मिठास की करें, तो हरे और काले अंगूर दोनों में ही प्राकृतिक शुगर पाई जाती है. लेकिन आमतौर पर काले अंगूर थोड़े ज्यादा मीठे महसूस होते हैं क्योंकि इनमें शुगर की मात्रा थोड़ी ज्यादा होती है. वहीं हरे अंगूर हल्के खट्टे-मीठे होते हैं, जो उन्हें रिफ्रेशिंग बनाते हैं. इसलिए मिठास के मामले में काले अंगूर थोड़े आगे माने जाते हैं. सेहत की नजर से देखें तो काले अंगूर एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं. इनमें रेस्वेराट्रॉल नाम का तत्व पाया जाता है जो दिल को स्वस्थ रखने में मदद करता है. यह ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने और शरीर में सूजन को कम करने में भी सहायक होता है. इसलिए काले अंगूर दिल की सेहत के लिए खास तौर पर फायदेमंद माने जाते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google वहीं हरे अंगूर भी किसी से कम नहीं हैं. इनमें विटामिन C और K अच्छी मात्रा में होता है, जो इम्युनिटी बढ़ाने और हड्डियों को मजबूत करने में मदद करता है. इसके अलावा हरे अंगूर शरीर को हाइड्रेट रखने में भी सहायक होते हैं, खासकर गर्मियों में. इनका हल्का स्वाद और रसदार टेक्सचर इन्हें एक बेहतरीन स्नैक बनाता है. अगर वजन कम करने की बात करें, तो हरे अंगूर थोड़ा बेहतर विकल्प हो सकते हैं क्योंकि इनमें कैलोरी थोड़ी कम होती है. यह पेट को भरते हैं और अनहेल्दी स्नैक की क्रेविंग को कम करते हैं. वहीं काले अंगूर भी हेल्दी हैं, लेकिन उनकी मिठास ज्यादा होने के कारण सीमित मात्रा में ही खाने चाहिए, खासकर अगर आप शुगर कंट्रोल कर रहे हैं. त्वचा और बालों के लिए भी दोनों तरह के अंगूर फायदेमंद हैं. काले अंगूर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को एजिंग से बचाते हैं और ग्लो बढ़ाते हैं. वहीं हरे अंगूर त्वचा को हाइड्रेट रखते हैं और फ्रेशनेस देते हैं. बालों के लिए भी दोनों प्रकार के अंगूर फायदेमंद होते हैं, क्योंकि ये स्कैल्प को पोषण देते हैं. डाइजेशन के लिहाज से भी अंगूर काफी अच्छे होते हैं. इनमें फाइबर होता है जो पाचन को बेहतर बनाता है. हरे अंगूर हल्के होते हैं और जल्दी पच जाते हैं, जबकि काले अंगूर थोड़े भारी हो सकते हैं. इसलिए अगर आपका पेट संवेदनशील है, तो हरे अंगूर बेहतर विकल्प हो सकते हैं. दोनों को सही मात्रा में खाने से पाचन बेहतर रहता है. First Published : March 20, 2026, 16:26 IST
रास्ता रोककर गर्भवती महिलाओं को किया परेशान:ड्रम और गाड़ियों से रोका रास्ता, चार महीने तक पुलिस खामोश, इंदौर हाईकोर्ट ने दिए कार्रवाई के आदेश

चार माह तक शिकायतों पर कोई कार्रवाई न होने से परेशान एक गर्भवती महिला ने हाईकोर्ट की शरण ली। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने थाना मल्हारगंज पुलिस को शिकायत पर विधिसम्मत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मामला पंचकुइया रोड, रामनगर क्षेत्र का है। यहां रहने वाली महिला ने आरोप लगाया है कि पड़ोस में रहने वाले उमेश जरवाल, दिनेश जुनवाल, महेश जुनवाल और गायत्री जुनवाल पिछले कई महीनों से उसके परिवार को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। रास्ता रोककर करते हैं परेशान महिला के एडवोकेट शुभम शर्मा और विकास जायसवाल के मुताबिक, याचिकाकर्ता और उसकी देवरानी दोनों गर्भवती हैं और डॉक्टरों ने उन्हें बेड रेस्ट की सलाह दी है। इसके बावजूद जब भी उन्हें डॉक्टर के पास जाना होता है, आरोपी घर के सामने पानी के ड्रम और गाड़ियां खड़ी कर रास्ता बंद कर देते हैं। इस वजह से दोनों महिलाओं को करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर ऑटो तक पहुंचना पड़ता है, जिससे गर्भपात का खतरा बना रहता है। कई जगह शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई पीड़िता ने इस संबंध में थाना मल्हारगंज, डीसीपी जोन-1, पुलिस कमिश्नर और कलेक्टर को लिखित शिकायतें दी थीं, लेकिन कहीं से राहत नहीं मिली। इसके बाद मजबूर होकर महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस को तत्काल उचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पहले भी हो चुकी है मारपीट एडवोकेट के अनुसार, इससे पहले भी आरोपियों ने परिवार का सामान सड़क पर रखकर रास्ता रोका था। विरोध करने पर मारपीट की गई, जिसमें महिला के पति का सिर फोड़ दिया गया था। इस मामले में मल्हारगंज थाने में एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है।
बीजेपी को क्यों भरोसा है कि ममता बनर्जी बंगाल नैरेटिव वॉर हार रही हैं | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 20, 2026, 16:14 IST भाजपा की रणनीति टीम को पूरा विश्वास है कि राज्य के लोगों ने ममता बनर्जी के ‘कुशासन’ के खिलाफ मतदान करने का मन बना लिया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (दाएं) दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर से भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी (बाएं) से भिड़ेंगी। (फ़ाइल छवि: पीटीआई) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 मार्च को अपनी कोलकाता रैली में बंगाल चुनाव के लिए माहौल और दिशा तय कर दी। चुनाव की आधिकारिक घोषणा से ठीक एक दिन पहले भीड़ को संबोधित करते हुए, पीएम ने जनसंख्या असंतुलन और राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा कथित तौर पर की गई हिंसा के मुद्दों पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि 600,000 से अधिक लोगों की भारी भागीदारी और प्रधानमंत्री द्वारा उठाए गए मुद्दों ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को बैकफुट पर ला दिया है। रैली के तुरंत बाद, पीएम ने उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने के लिए भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्यों से मुलाकात की। इस बार, ऐसा प्रतीत होता है कि अंतिम समय में कोई दिक्कत नहीं होगी, क्योंकि पार्टी सभी राज्यों के लिए अपनी सूची तैयार कर चुकी थी। आज तक, कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने बंगाल में भाजपा को स्पष्ट बढ़त देने का साहस किया है। जबकि पार्टी असम को बरकरार रखने के लिए तैयार है और एआईएडीएमके के साथ अपने गठबंधन के माध्यम से तमिलनाडु में बदलाव की उम्मीद कर रही है – तमिल सुपरस्टार विजय पर कड़ी नजर रखते हुए – पश्चिम बंगाल में कहानी अलग है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रशासन और अपने पार्टी कैडर दोनों पर कड़ी पकड़ बनाए रखती हैं, एक ऐसी मशीनरी को नियंत्रित करती हैं जो अक्सर बूथ स्तर पर प्रभाव डालती है। प्रवर्तन निदेशालय को सीधे निशाने पर लेकर बनर्जी ने अपने समर्थकों को संदेश दिया है कि वह अभी भी सड़कों से नेतृत्व कर रही हैं, एक ऐसा कदम जिसने उनके आधार को मजबूत किया है। कोलकाता क्षेत्र के प्रेसीडेंसी क्षेत्र में, उन्हें बंगाली बौद्धिक वर्ग, भद्रलोक के बीच दृढ़ समर्थन प्राप्त है। हालाँकि उन्होंने अल्पसंख्यक तुष्टिकरण का कार्ड प्रभावी ढंग से खेला है, लेकिन हिंदू प्रतिक्रिया के डर से उन्हें हाल ही में मंदिर के पुजारियों और मदरसा इमामों दोनों के लिए पारिश्रमिक की घोषणा करने के लिए मजबूर होना पड़ा। बीजेपी को अपनी सीटें बढ़ने का भरोसा 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 77 सीटें जीतीं. इससे पहले, 2018 के लोकसभा चुनावों में, पार्टी ने 18 सीटें हासिल कीं, हालांकि 2024 के लोकसभा चुनावों में यह संख्या घटकर 10 हो गई। हालाँकि, बंगाल में कई लोगों को आश्चर्य हुआ कि वास्तव में 2024 में भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ गया। लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के पक्ष में पड़े वोटों ने उसे 90 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त दिला दी। भाजपा ने अब गणना की है कि, इन 90 सीटों के अलावा, उसे कोलकाता क्षेत्र में लगभग 16 सीटें मिलने की संभावना है – एक ऐसा क्षेत्र जहां टीएमसी ने पिछली बार सभी 36 सीटें जीती थीं। भाजपा की रणनीति टीम दृढ़ता से आश्वस्त है कि राज्य के लोगों ने ममता बनर्जी के “कुशासन” के खिलाफ मतदान करने का मन बना लिया है, जो 2011 के समान है जब बुद्धदेव भट्टाचार्जी के नेतृत्व वाली सीपीएम को बाहर कर दिया गया था। नेतृत्व को लेकर बीजेपी आलाकमान की ओर से पुख्ता संकेत मिल रहे हैं कि सुवेंदु अधिकारी ही राज्य के स्वाभाविक नेता हैं. पिछले चुनाव में नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराने के बाद, अधिकारी अब उन्हें भबनीपुर विधानसभा सीट से फिर से मैदान में उतार रहे हैं। इसने नेतृत्व के मुद्दे को प्रभावी ढंग से शांत कर दिया है और भाजपा को आश्वस्त कर दिया है कि टीएमसी कथा कथानक खो रही है। अल्पसंख्यक कारक भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को पता है कि राज्य की 50 से अधिक सीटों पर मुस्लिम आबादी 50% से अधिक है। नतीजतन, टीएमसी प्रभावी रूप से 50 सीटों के लाभ के साथ चुनाव की शुरुआत करती है, जबकि भाजपा शून्य से शुरुआत करती है। हालाँकि, इन क्षेत्रों में भारी ध्रुवीकरण हिंदू मतदाताओं को भाजपा के पक्ष में एकजुट कर सकता है, जबकि अल्पसंख्यक वोट आंशिक रूप से कुछ इलाकों में कांग्रेस या वामपंथ की ओर स्थानांतरित हो सकते हैं। बीजेपी का मानना है कि बनर्जी के अल्पसंख्यक वोट बैंक में बड़ी सेंध लगी है. कई बड़े वादों के बावजूद, कई प्रमुख मुद्दों ने इस मुख्य निर्वाचन क्षेत्र को निराश किया है। उदाहरण के लिए, जबकि बनर्जी ने वादा किया था कि वह सीएए-एनआरसी प्रक्रिया की अनुमति नहीं देंगी, चुनाव आयोग सफलतापूर्वक अपनी आवश्यकताओं के साथ आगे बढ़ा। इसी तरह, उनके मुखर विरोध के बावजूद संसद द्वारा वक्फ विधेयक के पारित होने और तीन तलाक के उन्मूलन को उनके अल्पसंख्यक मतदाताओं के लिए झटके के रूप में देखा गया है। बीजेपी सूत्र मानते हैं कि इसका मतलब यह नहीं है कि अल्पसंख्यक भगवा मोर्चे को वोट देंगे, लेकिन ये कारक कांग्रेस या वामपंथी दलों की ओर आंशिक बदलाव का कारण बन सकते हैं। रणनीतिकारों को उम्मीद है कि कांग्रेस मुस्लिम बहुल इलाकों में कम से कम आठ सीटें जीतेगी, जबकि फुरफुरा शरीफ के हुमायूं कबीर को कम से कम तीन सीटें मिलने की उम्मीद है। किशनगंज और बिहार की सीमा से लगे क्षेत्र, विशेष रूप से मालदा और दिनाजपुर जिले, भारी ध्रुवीकृत बने हुए हैं। जाति आधारित ध्रुवीकरण यह लंबे समय से तर्क दिया गया था कि बंगाल चुनावों में जाति की कोई भूमिका नहीं है और वामपंथ और टीएमसी दोनों के तहत अल्पसंख्यक तुष्टिकरण एकमात्र प्रमुख विषय था। हालाँकि, भाजपा के सूत्र बताते हैं कि चार विशिष्ट जातियों के लिए राज्य आयोगों की घोषणा करने का बनर्जी का निर्णय घबराहट की स्थिति का संकेत देता है। भाजपा ने बर्धमान, झाड़ग्राम, मेदिनीपुर और झारखंड की सीमा से लगे जिलों में महतो (कुर्मी) को एक प्रमुख जनसांख्यिकीय के रूप में पहचाना है। कुल आबादी के 5% का प्रतिनिधित्व करते हुए, वे छह जिलों में 20 से अधिक सीटों को प्रभावित करते हैं। भाजपा ने यादव या अहीर समुदायों के बीच जाति-आधारित ध्रुवीकरण के माध्यम से भी अपनी पकड़ बना ली है, जिनका छह से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में
Packaged food market to reach ₹14 lakh crore, midnight orders for chocolates and snacks surge

Hindi News Business Packaged Food Market To Reach ₹14 Lakh Crore, Midnight Orders For Chocolates And Snacks Surge बेंगलुरु.पीरजादा अबरार15 मिनट पहले कॉपी लिंक रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा रफ्तार पर यह बाजार 2030 तक 50% बढ़ेगा। – प्रतीकात्मक फोटो देश का पैकेज्ड फूड और बेवरेज मार्केट रफ्तार पकड़ रहा है। इसकी ग्रोथ का केंद्र अब सिर्फ प्रोडक्ट नहीं, बल्कि खरीदने का तरीका भी बनता जा रहा है। बेंगलुरु की कंसल्टिंग फर्म रेडसीर की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा रफ्तार पर यह बाजार 2030 तक 50% बढ़कर करीब 14 लाख करोड़ रुपए का हो जाएगा। असल में ब्लिंकिट और इंस्टामार्ट जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता बढ़ रही है। ये लोगों के खान-पान की आदतों में बदलाव ला रहे हैं। अब उपभोक्ता ऑर्डर करने से पहले ज्यादा प्लानिंग नहीं करते, बल्कि एप पर जाकर 10-15 मिनट के भीतर ही फूड आइटम ऑर्डर कर देते हैं। साथ ही कंपनियां छोटे साइज के पैकेट्स पर फोकस कर रही हैं, ताकि यूजर बार-बार खरीदे। सेल्फ रिवॉर्ड इकोनॉमी नए ट्रेंड से रेडी-टू-कुक, फ्रोजन और चिल्ड फूड सेगमेंट में तेज ग्रोथ देखने को मिल रही है। इसके अलावा चॉकलेट जैसी कैटेगरी में भी बिक्री रात 9 बजे से आधी रात के बीच अचानक बढ़ रही है। इसे ‘सेल्फ रिवॉर्ड इकोनॉमी’ कहा जा रहा है, जहां लोग दिन खत्म होने पर खुद को ट्रीट देते है। युवाओं के बीच ‘मिडनाइट स्नैकिंग’ या आधी रात को स्नैक्स मंगाकर खाने की आदत बढ़ी है। इस ट्रेंड ने एफएमसीजी कंपनियों के लिए नया ग्रोथ सेगमेंट बना दिया है। क्विक कॉमर्स के हिसाब से प्रोडक्ट ला रहीं कंपनियां क्विक कॉमर्स अब निवेशकों और स्टार्टअप्स के लिए बड़ा अवसर बन रहा है। इस सेगमेंट में 2030 तक कुल कारोबार 2.3 लाख करोड़ रुपए तक जा सकता है। ये अब महज एक डिलिवरी चैनल न रहकर बाजार को रफ्तार देने वाला सेक्टर बन गया है। कंपनियां प्रोडक्ट लॉन्च, प्राइसिंग और पैकेजिंग तक की रणनीति क्विक कॉमर्स को ध्यान में रखकर तय कर रही हैं। पैकेज्ड फूड और बेवरेज के कुल बाजार में इसकी हिस्सेदारी 4% से बढ़कर 20% तक पहुंच सकती है। पारंपरिक रिटेल मार्केट पर इस ट्रेंड का नकारात्मक असर पड़ेगा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
सरकार बोली- LPG की पैनिक बुकिंग घटी, लेकिन हालत चिंताजनक:7500 उपभोक्ता PNG पर शिफ्ट; ईरान से आर्मेनिया-अजरबैजान के रास्ते 913 भारतीय लौट रहे
LPG संकट को लेकर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि पैनिक बुकिंग में कमी आई है। एक दिन में करीब 55 लाख रीफिल की मांग दर्ज की गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया कि करीब 7500 उपभोक्ता LPG से PNG में शिफ्ट हुए हैं। उन्होंने कहा कि हालात चिंता वाले जरूर हैं, लेकिन किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर पर गैस खत्म होने की स्थिति नहीं है। सिलेंडर की डिलीवरी सामान्य तरीके से हो रही है। ऑथेंटिकेशन कोड के जरिए वितरण किया जा रहा है। सुजाता शर्मा ने कहा कि पिछले एक हफ्ते में करीब 11,300 टन कमर्शियल LPG उपभोक्ताओं को दी गई है और 18 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में इसका आवंटन किया गया है। वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि ईरान से 913 भारतीय आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते वापस लौट रहे हैं। खबर लगातार अपडेट की जा रही है…
सरकार बोली- LPG की पैनिक बुकिंग घटी, लेकिन हालत चिंताजनक:7500 उपभोक्ता PNG पर शिफ्ट; ईरान से आर्मेनिया-अजरबैजान के रास्ते 913 भारतीय लौट रहे
LPG संकट को लेकर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि पैनिक बुकिंग में कमी आई है। एक दिन में करीब 55 लाख रीफिल की मांग दर्ज की गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया कि करीब 7500 उपभोक्ता LPG से PNG में शिफ्ट हुए हैं। उन्होंने कहा कि हालात चिंता वाले जरूर हैं, लेकिन किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर पर गैस खत्म होने की स्थिति नहीं है। सिलेंडर की डिलीवरी सामान्य तरीके से हो रही है। ऑथेंटिकेशन कोड के जरिए वितरण किया जा रहा है। सुजाता शर्मा ने कहा कि पिछले एक हफ्ते में करीब 11,300 टन कमर्शियल LPG उपभोक्ताओं को दी गई है और 18 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में इसका आवंटन किया गया है। वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि ईरान से 913 भारतीय आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते वापस लौट रहे हैं। खबर लगातार अपडेट की जा रही है…
भाजपा सिर्फ श्रेय लेने की राजनीति कर रही है-नकुलनाथ:एयरपोर्ट मुद्दे पर भाजपा पर साधा निशाना, बोले—शुरुआत कमलनाथ सरकार में हुई थी

छिंदवाड़ा के पूर्व सांसद नकुलनाथ तीन दिवसीय दौरे पर शुक्रवार को छिंदवाड़ा पहुंचे। दोपहर में वे विशेष विमान से ईमलीखेड़ा हवाई पट्टी पर उतरे, जहां कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। मीडिया से चर्चा में नकुलनाथ ने छिंदवाड़ा एयरपोर्ट निर्माण को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना की शुरुआत कमलनाथ सरकार के समय हो चुकी थी, लेकिन अब भाजपा नेता उसी फाइल को दोबारा घुमा रहे हैं। पहले दिन धार्मिक कार्यक्रम और बैठकें दौरे के पहले दिन वे नरसिंहपुर के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के सालीवाड़ा शारदा पहुंचे। यहां उन्होंने नवरात्र के अवसर पर माता रानी के दर्शन कर प्रदेश और देश की खुशहाली की कामना की। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठक में भी शामिल हुए। शाम को वे शिकारपुर पहुंचे, जहां जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यक्रम में भाग लिया। दूसरे दिन शोक संवेदना और जनसंपर्क 21 मार्च को नकुलनाथ जुन्नारदेव विधानसभा के नीमकुही पहुंचे। यहां उन्होंने पूर्व मंत्री स्व. तेजीलाल सरेयाम के निवास पर पहुंचकर शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। इसके बाद पांढुर्ना जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठकों में हिस्सा लिया। तीसरे दिन 22 मार्च को नकुलनाथ छिंदवाड़ा से सीहोर जिले के सलकनपुर के लिए रवाना होंगे, जहां वे एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होंगे।
जोमैटो से खाना मंगवाना महंगा हुआ:प्लेटफॉर्म फीस 19% बढ़ाई, हर ऑर्डर पर ₹12.50 के बजाय अब ₹14.90 देने होंगे

फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो से खाना ऑर्डर करना अब महंगा हो गया है। कंपनी ने आज 20 मार्च से ऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस में 19% बढ़ोतरी की है। यूजर्स को हर ऑर्डर पर ₹12.50 के बजाय अब ₹14.90 यानी ₹2.40 ज्यादा प्लेटफॉर्म फीस देनी होगी। प्लेटफॉर्म फीस हर एक फूड ऑर्डर पर लागू होने वाला ऐडिशनल चार्ज हैं। ये GST, रेस्तरां चार्ज और डिलीवरी फीस से अलग है। जोमैटो रोजाना 20 से 25 लाख ऑर्डर डिलीवर करता है। स्विगी के करीब पहुंचे प्लेटफॉर्म फीस के दाम जोमैटो की मुख्य प्रतिद्वंदी कंपनी स्विगी अभी टैक्स समेत लगभग ₹14.99 प्लेटफॉर्म फीस वसूल रही है। आमतौर पर देखा गया है कि जब भी इन दोनों में से कोई एक कंपनी फीस बढ़ाती है, तो दूसरी कंपनी भी जल्द ही अपने दाम बढ़ा देती है। प्लेटफॉर्म फीस 7 महीने में दूसरी बार बढ़ाई कंपनी ने 7 महीने में दूसरी बार प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाई है। इससे पहले सितंबर-2025 में 20% का इजाफा किया गया था। अगस्त 2023 में जोमैटो ने अपना मार्जिन बढ़ाने और प्रॉफिटेबल बनने के लिए पहली बार 2 रुपए का प्लेटफॉर्म शुल्क शुरू किया था। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और ऑपरेशनल कॉस्ट बनी वजह दामों में इस बढ़ोतरी के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को एक बड़ी वजह माना जा रहा है। तेल महंगा होने से डिलीवरी पार्टनर्स का खर्च बढ़ता है और कंपनी के लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन्स पर भी असर पड़ता है। इसके अलावा, जोमैटो अपनी प्रॉफिटेबिलिटी (मुनाफा) सुधारने के लिए भी समय-समय पर प्लेटफॉर्म फीस में बदलाव करती रहती है। दीपिंदर ने 2008 में बनाई थी फूडीबे ये खबर भी पढ़ें… प्रीमियम पेट्रोल ₹2.35 प्रति लीटर तक महंगा हुआ: भोपाल में दाम 117 रुपए प्रति लीटर तक हुए, सामान्य पेट्रोल पुरानी कीमत पर ही मिलेगा सरकारी तेल कंपनियों ने आज यानी 20 मार्च को स्पीड और पावर जैसे प्रीमियम पेट्रोल की कीमतें ₹2.09-₹2.35 प्रति लीटर तक बढ़ा दी है। भोपाल में इसकी कीमत बढ़कर करीब 117 रुपए पहुंच गई है। सामान्य पेट्रोल की कीमत में बदलाव नहीं हुआ है। पूरी खबर पढ़ें…








