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सिंगर अर्पित बाला ने कॉन्सर्ट में फैन पर थूका:स्टेज पर बोतल फेंकी तो भड़के, वेन्यू से बाहर निकाला

सिंगर अर्पित बाला ने कॉन्सर्ट में फैन पर थूका:स्टेज पर बोतल फेंकी तो भड़के, वेन्यू से बाहर निकाला

सिंगर और रैपर अर्पित बाला ने हैदराबाद में एक लाइव परफॉर्मेंस के दौरान एक दर्शक पर थूक दिया। शो के दौरान एक फैन ने स्टेज पर बोतल फेंक दी, जिससे अर्पित इतने नाराज हुए कि उन्होंने उस व्यक्ति की तरफ थूक दिया और उसे तुरंत वेन्यू से बाहर निकलवा दिया। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 28 मार्च की रात हुआ विवाद यह घटना 28 मार्च को हैदराबाद के ‘किंगडम क्लब एंड किचन’ में हुई। अर्पित वहां अपना कॉन्सर्ट कर रहे थे और भारी भीड़ मौजूद थी। वायरल वीडियो में दिख रहा है कि परफॉर्मेंस के दौरान अचानक दर्शकों के बीच से किसी ने स्टेज की तरफ बोतल फेंकी। बोतल देखते ही अर्पित ने अपना गाना बीच में ही रोक दिया और काफी गुस्से में आ गए। फैन की तरफ थूका और चेतावनी दी बोतल फेंकने वाले की पहचान होने के बाद अर्पित ने गुस्से में प्रतिक्रिया देते हुए उस व्यक्ति की ओर थूक दिया। उन्होंने सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया कि उस शख्स को तुरंत क्लब से बाहर निकाला जाए। अर्पित ने बोतल उठाकर वापस उसकी तरफ फेंकी और माइक पर कहा, “इधर देखना… क्या हुआ? लगा डर। ये अपनी बहन की शादी में दहेज में बांट देना।” अपनी परफॉर्मेंस दोबारा शुरू करने से पहले उन्होंने दर्शकों को चेतावनी दी कि ऐसी हरकतें दोबारा बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। कौन हैं अर्पित बाला? अर्पित बाला एक भारतीय रैपर और कंटेंट क्रिएटर हैं। साल 2025 में उनका गाना ‘बरगद’ सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिससे उन्हें रातोंरात बड़ी पहचान मिली। वह ‘फूसी गैंग’ ग्रुप के को-फाउंडर भी हैं। अर्पित अपनी डिजिटल कॉमेडी और देसी हिप-हॉप को जोड़ने के अनोखे स्टाइल के लिए युवाओं के बीच काफी पॉपुलर हैं।

आपके अस्पताल में भी तुलसी सुख क्या है? आज से ही इन ‘दुश्मन’ कंपनी के पास से कर दूर है

आपके अस्पताल में भी तुलसी सुख क्या है? आज से ही इन 'दुश्मन' कंपनी के पास से कर दूर है

तुलसी के पौधे की देखभाल युक्तियाँ: तुलसी के उपाय हर घर में धार्मिक महत्व के साथ ही स्वास्थ्य और स्वाद का खजाना माने जाते हैं। लोग इसे अक्सर अपने घर में या फिर रसोई और बगीचे में या फिर टुकड़ों में बाक़ी के रूप में उपयोग करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि तुलसी की गलत धारणा को संकट में डाला जा सकता है। असल में, हर औषधि की अपनी तासीर और जरूरत होती है, जिसमें तुलसी के कुछ खास सिद्धांतों को शामिल करके वे एक-दूसरे के विकास में नुकसान पहुंचाते हैं। इन दवाइयों को तुलसी के पास से लगाना सेज जैसे उपचार मिट्टी में बेहतर बढ़ते हैं, जबकि तुलसी को औषधि की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार खेडा और तुलसी दोनों के उपयोग से स्वाद और विकास पर प्रभाव पड़ सकता है। और ऐसे उपाय हैं जो मिट्टी में रसायन के विभिन्न प्रकार हैं, जिससे आस-पास के अवशेषों की स्थिरता बहुत ही कम हो जाती है। जहां पत्तागोभी और केले ठंडे मौसम के उपाय हैं, वहीं तुलसी को गर्म वातावरण पसंद होता है। थाइम को भी कम पानी देना चाहिए, जिससे तुलसी के साथ कोई समानता नहीं मिलती है। तुलसी के साथ कौन से उपाय लगाने से होता है कमाल अगर तुलसी के साथ सही वैज्ञानिकता का आकलन किया जाए, तो इसकी बिक्री बहुत सही है। टमाटर के साथ तुलसी बनाने से उसका स्वाद सबसे अच्छा होता है और पौधा भी काफी मात्रा में रहता है। इसके अलावा बाला, जीनिया, कैमोमाइल, अजमोद और ओरिगैनो जैसे उपचार तुलसी के साथ अच्छे से बढ़ते हैं। लोग तुलसी के उपचार में नमक क्यों डालते हैं? कई लोग तुलसी के उपचारों की अच्छी समानता के लिए नमक सहित सलाह भी देते हैं, लेकिन यह पूरी तरह से सही नहीं होता है। नाममात्र नमक उपचार से नुकसान पहुँचाया जा सकता है। यद्यपि सीमित मात्रा में एप्सम सॉल्ट का उपयोग पोषण संबंधी औषधियों में किया जाता है और उसे हरा-भरा बनाने में मदद की जा सकती है। लोग तुलसी के उपचारों की अच्छी गुणवत्ता के लिए भी नमक की सलाह देते हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)तुलसी के पौधे की देखभाल(टी)तुलसी के साथी पौधे(टी)तुलसी के साथ नहीं उगने वाले पौधे(टी)रसोई उद्यान युक्तियाँ(टी)तुलसी बागवानी गाइड(टी)तुलसी के लाभ(टी)साथ में तुलसी का रोपण(टी)बागवानी की गलतियाँ(टी)घर की बागवानी युक्तियाँ(टी)तुलसी के पौधे की वृद्धि

गेंदा के फूल के फायदे: त्वचा, पाचन और सूजन में प्राकृतिक औषधीय लाभ

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Last Updated:March 29, 2026, 16:11 IST गेंदा का फूल केवल पूजा और सजावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई औषधीय गुणों से भरपूर प्राकृतिक उपचार भी है. त्वचा की समस्याओं से लेकर पाचन सुधारने, सूजन कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तक, गेंदा का उपयोग आयुर्वेद में लंबे समय से किया जाता रहा है. हालांकि, इसका इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतना और विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी माना गया है. गेंदा का फूल औषधीय गुणों से भरपूर होता है और यह कई बीमारियों में राहत देने का काम करता है. आमतौर पर लोग इसे पूजा-पाठ और सजावट के लिए इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि गेंदा एक असरदार औषधि भी है. आयुर्वेद में गेंदा के फूल, पत्तियां और यहां तक कि इसके रस का भी उपयोग कई तरह की समस्याओं के इलाज में किया जाता है. त्वचा से जुड़ी समस्याओं में गेंदा बहुत फायदेमंद है. अगर किसी को खुजली, दाने, फोड़े-फुंसी या जलन की समस्या हो, तो गेंदा के फूल का लेप लगाने से आराम मिलता है. यह त्वचा को ठंडक देता है और जलन को कम करता है. इसके अलावा, गेंदा से बना तेल भी त्वचा को मुलायम और स्वस्थ रखने में मदद करता है. गेंदा का फूल आंखों के लिए भी लाभकारी माना जाता है, अगर आंखों में जलन, लालिमा या सूजन हो, तो गेंदा के फूल को पानी में उबालकर ठंडा करके उससे आंख धोने से राहत मिलती है. हालांकि, आंखों में इस्तेमाल करने से पहले साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. Add News18 as Preferred Source on Google मालती वर्मा बताती है कि पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में भी गेंदा का उपयोग किया जाता है. गेंदा के फूल से बनी चाय या काढ़ा पेट की गैस, अपच और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देता है. यह शरीर के अंदर की सफाई करने में भी मदद करता है और पाचन शक्ति को मजबूत बनाता है. गेंदा का उपयोग सूजन और दर्द कम करने में भी किया जाता है. इसके फूल में ऐसे तत्व होते हैं जो शरीर की सूजन को कम करते हैं. अगर किसी को जोड़ों में दर्द या सूजन की समस्या है, तो गेंदा के तेल से मालिश करने से आराम मिल सकता है. गेंदा का फूल महिलाओं के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसका उपयोग मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं को कम करने के लिए किया जाता है. हालांकि, इसका उपयोग करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है. गेंदा का फूल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं. नियमित रूप से इसका सीमित उपयोग करने से शरीर स्वस्थ रहता है. गांवों और छोटे कस्बों में गेंदा का उपयोग घरेलू इलाज के रूप में काफी समय से किया जा रहा है. यह आसानी से मिलने वाला और सस्ता पौधा है, जिसे लोग अपने घरों में भी उगा सकते हैं. यही वजह है कि यह आम लोगों के लिए एक सुलभ औषधि बन चुका है. मालती वर्मा बताती है गेंदा का उपयोग करते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं. किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी या गर्भवती महिला को उसका प्रयोग करने से पहले किसी किसी डॉक्टर या और आयुर्वेदाचार्य के सलाह बिना किसी भी औषधि पौधे का प्रयोग नहीं करना चाहिए. किसी भी औषधि पौधे का प्रयोग केवल 7 दिन तक ही करना चाहिए. First Published : March 29, 2026, 16:11 IST

लू और गर्मी से बचाएगा देसी नुस्खा, बेल और गुलकंद का मुरब्बा देगा ठंडक, इम्यूनिटी का पावर हाउस!

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गोरखपुर: गर्मियों का मौसम आते ही शरीर को ठंडा और तरोताजा रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है. तेज धूप, लू और बढ़ते तापमान के बीच अगर खानपान सही न हो, तो कई तरह की दिक्कतें शुरू हो जाती हैं. ऐसे में पुराने समय से इस्तेमाल होने वाले देसी उपाय आज भी उतने ही कारगर हैं. खासकर मुरब्बे का चलन, जो अब धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, लेकिन इसके फायदे आज भी बरकरार हैं. बेल और गुलकंद का मुरब्बा गर्मियों में शरीर के लिए किसी प्राकृतिक दवा से कम नहीं माना जाता है. गोरखपुर के घंटाघर इलाके में पिछले 60-70 सालों से मुरब्बा बनाने का काम कर रहे प्राणनाथ और उनका परिवार बताते हैं कि पहले के समय में हर घर में मुरब्बा बनता था और इसे रोजाना खाने की आदत होती थी. उनका कहना है कि बेल का मुरब्बा खासतौर पर पेट के लिए बेहद फायदेमंद होता है. यह शरीर को अंदर से ठंडा रखता है और पाचन तंत्र को मजबूत करता है. वहीं गुलकंद की बात करें तो यह न सिर्फ ठंडक देता है, बल्कि एसिडिटी और गर्मी से होने वाली परेशानियों को भी कम करता है. इस खास तरीके से होता है तैयारप्राणनाथ बताते हैं कि बेल का मुरब्बा तैयार करने के लिए पके हुए बेल का गूदा निकालकर उसे उबालकर और फिर चीनी या गुड़ के साथ पकाया जाता है, जिससे यह लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और इसका स्वाद भी बढ़ जाता है. वहीं गुलकंद बनाने की प्रक्रिया थोड़ी अलग और समय लेने वाली होती है. गर्मियों के लिए जबरदस्त फायदाइसमें गुलाब की ताजी पंखुड़ियों को चीनी या मिश्री के साथ कांच के जार में भरकर दो दिन तक धूप में रखा जाता है. इस दौरान यह धीरे-धीरे पककर मुरब्बे का रूप ले लेता है, जिसमें इलायची जैसी चीजें मिलाकर स्वाद और खुशबू को और बेहतर किया जाता है. गर्मी के मौसम में इन मुरब्बों के साथ कुछ और देसी चीजें भी शामिल की जा सकती हैं, जैसे सौंफ, मिश्री, खस का शरबत और आंवला मुरब्बा. ये सभी चीजें शरीर को ठंडा रखने के साथ-साथ ऊर्जा भी प्रदान करती हैं. खासकर लू से बचाव के लिए ये उपाय बेहद कारगर माने जाते हैं. कब्ज, एसिडिटी और पेट के लिए फायदाअगर नियमित रूप से बेल और गुलकंद का सेवन किया जाए, तो यह न सिर्फ शरीर को ठंडा रखता है बल्कि कब्ज, एसिडिटी और पेट से जुड़ी कई समस्याओं से भी राहत दिलाता है. साथ ही यह इम्यूनिटी को भी मजबूत करता है, जिससे शरीर गर्मी के दुष्प्रभावों से बचा रहता है. आज के समय में जहां लोग पैकेज्ड और केमिकल युक्त चीजों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं ये पारंपरिक मुरब्बे एक हेल्दी और नेचुरल विकल्प के रूप में सामने आते हैं. जरूरत है तो बस पुराने तरीकों को फिर से अपनाने की, ताकि स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी पूरा ख्याल रखा जा सके.

रात में देर से सोना शरीर के लिए घातक, इन गंभीर बीमारियों का खतरा! जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

गर्मी में मुरझा रही तुलसी? ये आसान उपाय अपनाएं, पौधा रहेगा बिल्कुल हरा-भरा

Last Updated:March 29, 2026, 15:58 IST अक्सर लोग देर रात तक जागते रहते हैं और मोबाइल चलाते रहते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि देर रात तक मोबाइल चलाना आपकी सेहत के लिए घातक हो सकता है. आइए एक्सपर्ट से इसके नुकसान जानते हैं. देहरादून: आजकल की खराब जीवनशैली और खान-पान के चलते कई बीमारियां आपको घेर लेती हैं. आप यह बात जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि देर रात तक जागने ,फास्टफूड का ज्यादा सेवन और गलत आदतों से बवासीर, पाइल्स जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं. यह ऐसी बीमारी है, जिसे बताने में भी लोग संकोच करते हैं और यह बहुत ही दर्द देने वाली होती है. आपने सही सुना, देर रात तक जागना और खराब लाइफस्टाइल सीधे तौर पर फिशर और पाइल्स के खतरे को बढ़ा सकते हैं. आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. शहरीन बताती हैं कि पाचन तंत्र और नींद का बहुत बड़ा संबंध होता है. उन्होंने कहा कि न सिर्फ आपका गलत खान-पान, बल्कि गलत टाइम पर न सोना भी आपको पाइल्स और फिशर जैसी बीमारियों का शिकार बना सकता है. उन्होंने बताया कि जब आप देर रात तक जागते हैं, तो बॉडी की सर्कैडियन रिदम बिगड़ जाती है. इससे मेटाबॉलिज्म की रफ्तार धीमी पड़ जाती है, जिससे भोजन को पचने में ज्यादा समय लगता है. अधपका भोजन पेट में पैदा करता है कब्जएक्सपर्ट ने कहा कि अधपका भोजन पेट में कब्ज पैदा करता है, जो पाइल्स और फिशर की जड़ है. जो लोग देर रात से खाना खाते हैं, उनका भोजन पच नहीं पाता है, कब्ज और अपच की शिकायत हो जाती है, जो लंबे समय बाद फिशर का रूप ले सकती है. जब शौचालय में देर तक बैठा जाता है, तो एनिस की वेंस नीचे की ओर प्रेशर डालती है, जिसके बाद यह परेशानी होती है. क्यों होती है पाइल्स और फिशर की परेशानी?कई लोग देर रात तक जागते हैं और चाय- कॉफी का सेवन करते हैं. इसमें मौजूद कैफीन डिहाइड्रेशन का कारण बन सकता है, जो मल को सख्त बनाता है. उन्होंने कहा कि आजकल लोग जंक फूड का ज्यादा सेवन कर रहे हैं, जो न ही जल्दी पचता है और न ही इन्हें खाने से पोषक तत्व मिल पाते हैं. इनमें फाइबर मौजूद नहीं होता है, जो पाचन तंत्र को कम करने में मददगार होता है. उन्होंने कहा कि फाइबर की कमी से हमारा पेट साफ नहीं हो पाता और प्रेशर लगाने की वजह से गुदा मार्ग की नसें सूज जाती हैं, जिससे पाइल्स और फिशर की परेशानी हो सकती है. Location : Dehradun,Uttarakhand First Published : March 29, 2026, 15:58 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

PM Balen Shah reform Nepal education no exams class 5

PM Balen Shah reform Nepal education no exams class 5

काठमांडू1 घंटे पहले कॉपी लिंक नेपाल में प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार ने छात्र राजनीति पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके साथ ही कक्षा 5 तक के बच्चों के लिए पारंपरिक परीक्षाएं भी खत्म कर दी गई हैं और स्कूलों-कॉलेजों को अपने विदेशी नाम बदलकर नेपाली में रखने का आदेश दिया गया है। सरकार ने शनिवार रात को जारी आदेश में कहा कि यह सभी फैसले अपने 100 दिन के एक्शन प्लान के तहत लिए हैं, जिसका मकसद शिक्षा को राजनीति से दूर रखना और इसे बेहतर बनाना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब स्कूल और कॉलेजों में किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि नहीं होगी। सभी राजनीतिक पार्टियों से जुड़े छात्र संगठनों को 60 दिनों के अंदर अपने दफ्तर कॉलेज कैंपस से हटाने होंगे। इनकी जगह सरकार 90 दिनों के भीतर ‘स्टूडेंट काउंसिल’ या ‘वॉयस ऑफ स्टूडेंट्स’ जैसे नए प्लेटफॉर्म शुरू करेगी, जो पूरी तरह गैर-राजनीतिक होंगे और सिर्फ छात्रों की समस्याओं पर काम करेंगे। ग्रेजुएशन तक पढ़ाई के लिए नेपाली नागरिकता जरूरी नहीं सरकार ने साफ कहा है कि अब स्कूल और कॉलेज राजनीति के अड्डे नहीं होंगे, बल्कि सिर्फ पढ़ाई के लिए काम करेंगे। लंबे समय से शिक्षा संस्थानों में चल रही राजनीतिक दखल को खत्म करने के लिए यह कदम उठाया गया है। छात्रों के लिए कुछ और अहम बदलाव भी किए गए हैं। अब ग्रेजुएशन तक पढ़ाई के लिए नेपाली नागरिकता जरूरी नहीं होगी, ताकि दस्तावेजों की कमी के कारण किसी की पढ़ाई न रुके। सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि जिन स्कूलों और कॉलेजों के नाम विदेशी हैं, जैसे ऑक्सफोर्ड, पेंटागन या सेंट जेवियर्स, उन्हें इस साल के भीतर अपने नाम बदलने होंगे। परीक्षा के रिजल्ट तय समय पर जारी करने के आदेश इसके अलावा, यूनिवर्सिटीज को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे परीक्षा के रिजल्ट तय समय के भीतर ही जारी करें। सरकार का कहना है कि अब तक रिजल्ट में देरी की वजह से छात्रों का भविष्य प्रभावित होता रहा है और कई बार उन्हें पढ़ाई छोड़कर विदेश जाना पड़ता है। सरकार का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में देरी और गड़बड़ी की बड़ी वजह राजनीतिक दखल रही है। नए नियमों के जरिए अब पढ़ाई का शेड्यूल तय समय पर लागू किया जाएगा। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने शनिवार को अपनी कैबिनेट के साथ बैठक की। नेताओं-अफसरों की संपत्ति की जांच की जाएगी नेपाल सरकार के प्लान के मुताबिक बड़े नेताओं और अफसरों की संपत्ति की जांच की जाएगी। इसके लिए 15 दिनों के अंदर एक कमेटी बनाई जाएगी, जो 2006 के बाद बड़े पद पर रहे लोगों की संपत्ति की जांच करेगी। इसके बाद 1991 से 2006 के बीच के मामलों को भी देखा जाएगा। सरकार चाहती है कि सरकारी कामकाज साफ-सुथरा और जिम्मेदारी से हो। इसके लिए हर मंत्रालय को अपना काम तय समय में पूरा करना होगा। किसे क्या करना है और कब तक करना है, यह पहले से तय रहेगा और इसकी रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को देनी होगी। सरकार संविधान में बदलाव को लेकर भी तैयारी कर रही है। इसके लिए 7 दिनों के अंदर एक पेपर तैयार किया जाएगा, ताकि इस पर खुलकर बात हो सके। सरकार ने यह भी कहा है कि जिन लोगों के साथ पहले अन्याय या भेदभाव हुआ है, उसे 15 दिनों के अंदर स्वीकार किया जाएगा। इसके बाद उनके लिए मदद और सुधार की योजना बनाई जाएगी। काठमांडू में पिछले साल हजारों शिक्षकों ने प्रदर्शन किया था काठमांडू में पिछले साल हजारों शिक्षक सड़कों पर उतर आए थे। मामला इतना बढ़ गया था कि देशभर के करीब 29 हजार सरकारी स्कूल बंद करने पड़े। लाखों छात्रों की पढ़ाई अचानक रुक गई और पूरा सिस्टम जैसे थम सा गया। असल में, यह विरोध संसद में लाए गए एक शिक्षा बिल को लेकर था। शिक्षकों को डर था कि सरकार स्कूलों का कंट्रोल लोकल लेवल पर दे रही है, जिससे उनकी नौकरी दिक्कत में पड़ सकती थी। उनका कहना था कि अगर स्कूलों का कंट्रोल लोकल सरकारों के पास चला गया, तो वहां राजनीति का असर और बढ़ जाएगा और उनके अधिकार कम हो जाएंगे। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने सड़कों पर उतरकर नारेबाजी की, संसद की ओर जाने वाले रास्ते जाम कर दिए और सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की नेपाल में पिछले साल हजारों शिक्षकों ने स्कूलों का कंट्रोल लोकल लेवल पर देने का विरोध किया था। नेपाल का एजुकेशन सिस्टम लंबे वक्त से अस्थिर नेपाल की शिक्षा व्यवस्था लंबे समय से अस्थिर रही है, जहां कभी छात्र संगठन आंदोलन करते हैं तो कभी शिक्षक सड़कों पर उतर आते हैं। इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ता था। सबसे बड़ी समस्या यही थी कि शिक्षा में राजनीति का दखल बहुत ज्यादा था। स्कूल और कॉलेज कई बार पढ़ाई के बजाय राजनीतिक एक्टिविटी का सेंटर बन जाते थे। इसी वजह से क्लासेस रुकती थीं, परीक्षाएं टलती थीं और रिजल्ट में भी देरी होती थी। ————– यह खबर भी पढ़ें… नेपाल- बालेन के प्रधानमंत्री बनते ही पूर्व पीएम ओली गिरफ्तार:Gen-Z प्रोटेस्ट के दौरान लापरवाही बरतने का आरोप; इसमें 77 मौतें हुई थीं नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को शनिवार सुबह गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर आरोप है कि पिछले साल हुए जेन जेड आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में कई लोगों की मौत के लिए वे जिम्मेदार थे। पुलिस ने काठमांडू स्थित उनके घर से उन्हें हिरासत में लिया। उनके साथ तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक को भी गिरफ्तार किया गया है। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

IPL Ban Ineffective? England Batter Duckett Withdraws; Gavaskar Demands Tougher Punishment

IPL Ban Ineffective? England Batter Duckett Withdraws; Gavaskar Demands Tougher Punishment

स्पोर्ट्स डेस्क26 मिनट पहले कॉपी लिंक बेन डकेट ने IPL 2026 से नाम वापस ले लिया। वे अब काउंटी चैंपियनशिप में नॉटिंघमशायर के लिए खेलेंगे। पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने IPL से हटने वाले प्लेयर्स पर कड़ी सजा लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा, अभी IPL में 2 साल का बैन लगता है। लेकिन यह ज्यादा प्रभावी नहीं है। यह बयान इंग्लैंड के बल्लेबाज बेन डकेट के हटने के बाद आया है। डकेट को दिल्ली कैपिटल्स ने 2 करोड़ रुपए में खरीदा था। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय करियर पर ध्यान देने की बात कहकर टूर्नामेंट से दूरी बना ली। इस तरह के मामले लगातार सामने आ रहे गावस्कर ने कहा कि डकेट का फैसला समझा जा सकता है। वे इंग्लैंड टेस्ट क्रिकेट पर फोकस करना चाहते हैं। IPL में बार-बार इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं, जिससे लीग की योजना प्रभावित होती है। सुनील गावस्कर टेस्ट क्रिकेट में 10 हजार रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी हैं। IPL में पेनल्टी लगनी चाहिए गावस्कर ने उदाहरण देते हुए बताया कि स्लो ओवर रेट पर मिलने वाली सजा मैच के दौरान असर डालती है, इसलिए खिलाड़ी तुरंत सुधार करते हैं। इसी तरह IPL में भी ऐसी पेनल्टी होनी चाहिए जो सीधे खिलाड़ी को प्रभावित करे। हालांकि, किस तरह की सजा लागू होनी चाहिए, इस पर गावस्कर ने कोई ठोस सुझाव नहीं दिया। उन्होंने कहा कि इस पर फैसला भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को करना होगा। ऑस्ट्रेलियाई प्लेयर्स पर भी सवाल उठाए इससे पहले गावस्कर ने जोश हेजलवुड, मिचेल स्टार्क और पैट कमिंस के शुरुआती मैच मिस करने पर भी सवाल उठाए थे। हालांकि कमिंस और हेजलवुड टीम से जुड़ चुके हैं, जबकि स्टार्क चोट के कारण बाद में जुड़ेंगे। मिचेल स्टार्क को DC ने 11.75 करोड़ में रिटेन किया था। ———————————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… IPL में दूसरा मैच आज MI vs KKR:मुंबई को 5 साल से खिताब का इंतजार, कोलकाता के खिलाफ रिकॉर्ड शानदार IPL के इस सीजन का दूसरा मुकाबला आज मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच खेला जाएगा। मैच मुंबई के घरेलू मैदान वानखेड़े स्टेडियम में शाम 7:30 बजे से शुरू होगा, जबकि टॉस 7 बजे होगा। पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

चैटजीपीटी की मदद से घर ₹9.5 करोड़ में बिका:₹95 लाख ज्यादा कीमत मिली, बिना एजेंट 5 दिन में डील हुई

चैटजीपीटी की मदद से घर ₹9.5 करोड़ में बिका:₹95 लाख ज्यादा कीमत मिली, बिना एजेंट 5 दिन में डील हुई

अमेरिका के फ्लोरिडा में एक शख्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके अपना घर करीब 1 मिलियन डॉलर (लगभग 9.5 करोड़ रुपए) में बेच दिया है। मियामी में रहने वाले रॉबर्ट लेविन ने घर बेचने के लिए किसी रियल एस्टेट एजेंट की मदद नहीं ली, बल्कि चैटजीपीटी को अपना गाइड बनाया। लेविन ने केवल 5 दिनों के अंदर ही अपने घर की डील क्लोज कर दी। खास बात यह है कि घर की जो कीमत लोकल एजेंट्स ने बताई थी, लेविन को AI की सलाह की वजह से उससे 95 लाख रुपए ज्यादा मिले। मार्केटिंग से लेकर कागजी कार्रवाई तक सब AI ने किया न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रॉबर्ट लेविन यह टेस्ट करना चाहते थे कि क्या AI घर बेचने की पूरी प्रोसेस को अकेले संभाल सकता है। उन्होंने घर की सही कीमत तय करने (प्राइसिंग), लिस्टिंग तैयार करने और मार्केटिंग कंटेंट लिखने के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया। लेविन ने बताया कि उन्होंने हर छोटे-बड़े फैसले के लिए टूल पर भरोसा किया। AI ने बताया- घर कब लिस्ट करें और क्या बदलाव करें चैटजीपीटी ने लेविन को न केवल कंटेंट लिखकर दिया, बल्कि यह भी बताया कि घर को मार्केट में उतारने का सबसे सही समय क्या है ताकि खरीदार तुरंत आकर्षित हों। टूल ने उन्हें घर में कुछ छोटे सुधार करने की भी सलाह दी, जिससे प्रॉपर्टी की वैल्यू बढ़ने में मदद मिली। लेविन के मुताबिक हमने वैसा ही किया, जैसा टूल ने बताया। 3 दिन में 5 ऑफर आए, एजेंट्स के अनुमान से ₹95 लाख ज्यादा मिले घर को मार्केट में लिस्ट करने के महज तीन दिनों के भीतर लेविन को 5 खरीदारों के ऑफर मिल गए। उन्होंने घर को 1 मिलियन डॉलर में बेच दिया। यह कीमत रियल एस्टेट एजेंटों द्वारा दिए गए अनुमान से 95 लाख रुपए ज्यादा थी। लाखों का कमीशन बचाया, पर प्रोफेशनल की सलाह भी मानी लेविन ने कहा कि AI के इस्तेमाल से उन्होंने एजेंट को दी जाने वाला कमीशन बचा लिया। हालांकि, उन्होंने सावधानी बरतते हुए कागजी कार्रवाई के लिए एक वकील की मदद जरूर ली। लेविन का मानना है कि AI पूरी तरह से पेशेवरों की जगह नहीं ले सकता, लेकिन यह काम को बहुत आसान और किफायती बना देता है। ये खबर भी पढ़ें… आईफोन-15 और 16 जैसे पुराने मॉडल्स ₹5,000 तक महंगे होंगे: एपल ने इंसेंटिव देना बंद किया, रिटेलर्स ग्राहकों से वसूलेंगे यह कीमत भारत में अब पुराने आईफोन खरीदने पर ग्राहकों को ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। एपल ने आईफोन 15 और 16 जैसे पुराने मॉडल्स पर रिटेलर्स को डिमांड जनरेशन (DG) सपोर्ट यानी इंसेंटिव देना बंद करने का फैसला किया, जिससे कीमतें करीब 5,000 रुपए तक बढ़ सकती हैं। मनीकंट्रोल के मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह फैसला इसी हफ्ते लागू हो सकता है। हाल ही में कैशबैक ऑफर्स 6,000 से घटाकर 1,000 रुपए किए गए थे, जिससे आईफोन 17 सीरीज महंगी हुई और अब पुराने मॉडल्स की कीमतें भी बढ़ जाएंगी। पूरी खबर पढ़ें…

West Asia Crisis & Oil Prices Slow Indian Economy; March 2026 Data Shows Downturn

West Asia Crisis & Oil Prices Slow Indian Economy; March 2026 Data Shows Downturn

Hindi News Business West Asia Crisis & Oil Prices Slow Indian Economy; March 2026 Data Shows Downturn नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक वित्त मंत्रालय ने मार्च 2026 की अपनी मंथली इकोनॉमिक रिव्यू रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार अब धीमी पड़ गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। मंत्रालय ने माना है कि इन बाहरी झटकों की वजह से देश के अंदर इनपुट कॉस्ट यानी प्रोडक्शन की लागत बढ़ गई है, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर दबाव दिख रहा है। फरवरी तक स्थिति मजबूत थी, मार्च से बिगड़ने लगी रिपोर्ट में कहा गया है कि फरवरी 2026 तक भारतीय इकोनॉमी काफी मजबूत स्थिति में थी। डोमेस्टिक डिमांड, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और सरकारी नीतियों की मदद से सप्लाई और डिमांड दोनों मोर्चों पर प्रदर्शन अच्छा रहा था। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में बढ़त बनी हुई थी, वहीं गाड़ियों की बिक्री और डिजिटल पेमेंट्स (UPI) में भी लगातार ग्रोथ दर्ज की गई थी। इनपुट कॉस्ट और सप्लाई चेन में दिक्कतें बढ़ीं मंत्रालय के अनुसार, मार्च 2026 से ग्लोबल हालात बदलने लगे। वेस्ट एशिया में तनाव बढ़ने से एनर्जी मार्केट और लॉजिस्टिक्स (माल ढुलाई) बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसका सीधा असर भारत के प्रोडक्शन सेक्टर पर पड़ा है। रिपोर्ट में ई-वे बिल जनरेशन में आई कमी और फ्लैश PMI (परचेज मैनेजर इंडेक्स) के कमजोर आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि महीने-दर महीने आधार पर इकोनॉमी की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है। इकोनॉमी पर इन 3 वजहों से बढ़ रहा है दबाव महंगा कच्चा तेल: ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें बढ़ने से कंपनियों की लागत बढ़ गई है। लॉजिस्टिक्स-इंश्योरेंस: समुद्री रास्तों में तनाव की वजह से माल ढुलाई का किराया और इंश्योरेंस प्रीमियम महंगा हो गया है। सप्लाई चेन: जरूरी इनपुट्स की सप्लाई में देरी होने से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर असर पड़ रहा है। डिमांड अब भी बरकरार, पर ग्रामीण इलाकों में चिंता राहत की बात यह है कि देश में घरेलू मांग अभी भी बनी हुई है। व्हीकल रजिस्ट्रेशन और डिजिटल ट्रांजैक्शन के आंकड़े बता रहे हैं कि लोग खरीदारी कर रहे हैं। हालांकि, रिपोर्ट में एक रेड फ्लैग भी दिखाया गया है। मंत्रालय ने नोट किया है कि ग्रामीण इलाकों में सेंटीमेंट थोड़ा कमजोर हुआ है। मांग और सप्लाई के बीच यह अंतर बताता है कि फिलहाल सुस्ती कंजम्पशन की कमी से नहीं, बल्कि बढ़ती लागत और सप्लाई में रुकावटों की वजह से है। रिटेल महंगाई में भी उछाल के संकेत रिटेल महंगाई में भी उछाल के संकेत मिले हैं। अभी तक महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह खाद्य पदार्थों की कीमतें थीं, लेकिन मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों का पूरा असर अभी तक घरेलू बाजार में नहीं दिखा है। अगर वैश्विक स्तर पर एनर्जी की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है। यह अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा रिस्क है। पिछले महीने फरवरी में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.21% पर पहुंच गई थी। स्टील और सीमेंट के भरोसे टिकी उम्मीद सरकार अभी भी इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल एक्सपेंडिचर को ग्रोथ का मुख्य जरिया मान रही है। स्टील और सीमेंट के प्रोडक्शन में हो रही बढ़ोतरी इस बात का सबूत है कि कंस्ट्रक्शन और सरकारी प्रोजेक्ट्स का काम तेजी से चल रहा है। वित्त मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट के में कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है, लेकिन ग्लोबल रिस्क बढ़ रहे हैं। इसलिए आने वाले समय में घरेलू और वैश्विक स्थितियों पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है। ये खबर भी पढ़ें… अप्रैल में 14 दिन बैंकों में काम नहीं होगा: 4 रविवार और 2 शनिवार के अलावा अलग-अलग जगहों पर 8 दिन बैंक बंद रहेंगे अगले महीने यानी अप्रैल में देश के अलग-अलग राज्यों में कुल 14 दिन बैंकों में कामकाज नहीं होगा। RBI की ओर से जारी कैलेंडर के अनुसार, अगले महीने 4 रविवार और दूसरे-चौथे शनिवार के अलावा 8 दिन अलग-अलग जगहों पर बैंक बंद रहेंगे। महीने की शुरुआत यानी 1 अप्रैल को छुट्‌टी से होगी। पूरे देश में बैंक सालाना अकाउंट क्लोजिंग के कारण बंद रहेंगे। इस दिन बैंक में कोई भी ऑफलाइन काम नहीं हो पाएगा। यहां देखें अप्रैल 2026 में आपके राज्य या लोकेशन में बैंक कब-कब बंद रहेंगे। यह खबर भी पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

टीवीके ने तमिलनाडु चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की, विजय पेरम्बूर और त्रिची पूर्व से चुनाव लड़ेंगे चुनाव समाचार

Kerala Lottery Result Today: The first prize winner of Samrudhi SM-48 will take home Rs 1 crore. (Image: Shutterstock)

आखरी अपडेट:मार्च 29, 2026, 15:06 IST विजय के नेतृत्व वाले तमिलागा वेट्री कज़गम ने तमिलनाडु चुनाव में टी नगर के लिए एन आनंद, मायलापुर के लिए वेंकट रामानन और विल्लीवाक्कम के लिए आधव अर्जुन को नामित किया है। अभिनेता से नेता बने टीवीके विजय अभिनेता से नेता बने विजय ने रविवार को आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पार्टी तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) के तहत उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की। विजय जहां पेरम्बूर और त्रिची पूर्व से चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं पार्टी के महासचिव एन आनंद को टी नगर से मैदान में उतारा गया है। कोषाध्यक्ष वेंकट रामानन मायलापुर से चुनाव लड़ेंगे और आधव अर्जुन को विल्लीवाक्कम निर्वाचन क्षेत्र से नामांकित किया गया है। “आज एक महत्वपूर्ण दिन है, एक ऐसा दिन जहां हम लोगों के सच्चे रक्षकों का परिचय देते हैं। हमारे उम्मीदवार सामान्य पृष्ठभूमि से आते हैं। वे बहुत अधिक धन या शक्ति वाले लोग नहीं हैं। वे ऐसे लोग हैं जो आम आदमी के संघर्ष को समझते हैं। अन्य विधायकों की तरह नहीं जो भ्रष्ट हैं। एक विधायक को केवल अनुभव पर भरोसा नहीं करना चाहिए। जो मायने रखता है वह ईमानदारी, जिम्मेदारी और लोगों के प्रति प्रतिबद्धता है। एक विधायक सिर्फ एक प्रतिनिधि नहीं है; वे विधानसभा के रक्षक और लोगों की आवाज हैं। मैंने व्यक्तिगत रूप से सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद प्रत्येक उम्मीदवार का चयन किया है।” चेन्नई में सूची की घोषणा। #घड़ी | चेन्नई, तमिलनाडु: अभिनेता और टीवीके प्रमुख विजय ने आज 2026 विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों की सूची की घोषणा की। विजय 2 निर्वाचन क्षेत्रों- त्रिची पूर्व और पेरम्बूर (चेन्नई) से चुनाव लड़ रहे हैं। (स्रोत: टीवीके) pic.twitter.com/20Ga9CvY5Z – एएनआई (@ANI) 29 मार्च 2026 “मैं लोगों से टीवीके और हमारे ‘सीटी’ प्रतीक के लिए वोट करने का आग्रह करता हूं। हम यहां केवल लोगों के लिए हैं, और हमेशा लोगों के लिए हैं। जीतने के बाद, मैं वादा करता हूं कि हम कभी भी सार्वजनिक धन का दुरुपयोग नहीं करेंगे या भ्रष्टाचार में शामिल नहीं होंगे। हम महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे, नशा मुक्त तमिलनाडु बनाएंगे और सख्त कानून व्यवस्था बनाए रखेंगे। मैं आपको आश्वासन देता हूं – हम इस राज्य के लोगों के हितों के खिलाफ कभी काम नहीं करेंगे। यह मेरा वादा है। मैं टीएन के लोगों से अनुरोध करता हूं कि वे टीवीके के कल्याण के लिए एक मौका दें। तमिलनाडु, “उन्होंने कहा। उम्मीदवारों की पूरी सूची निर्वाचन क्षेत्र उम्मीदवार पेराम्बुर सी जोसेफ विजय तिरुचि पूर्व सी जोसेफ विजय टी नगर एन आनंद मायलापुर पी वेंकटरमणन Villivakkam अदव अर्जुन गोपीचेट्टीपलायम Sengottaiyan तिरुचेंगोडे अरुण राज कुमारपालयम विजयलक्ष्मी थिरुप्पारनकुंड्रम सीटीआर निर्मल कुमार तित्ताकुडी राजशेखर सैदापेट अरुल प्रकाशम एग्मोर राजमोहन लालगुडी कू पा कृष्णन तिरुपुर उत्तर सत्यभामा अय्याराम विलक्क – कोलाथुर वीएस बाबू आरके नगर मैरी विल्सन मदुरावोयाल रेवंत सारण अवादी रमेश कुमार बंदरगाह सिनोरा अशोक चेपॉक सेल्वम अन्ना नगर रामकुमार Virugambakkam सबरीनाथन वेलाचेरी कुमार Sholinganallur ईसीआर सरवनन अलान्दुर हरीश तिरुप्पूर थेनारासु पल्लावरम जे कामची ताम्बरम सार्थकुमार ये घोषणाएं चुनाव के लिए टीवीके की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण कदम हैं, क्योंकि पार्टी विजय के नेतृत्व में पूरे तमिलनाडु में अपनी उपस्थिति स्थापित करना चाहती है। तमिलनाडु में चुनाव 23 अप्रैल, 2026 को होंगे और परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। जगह : तमिलनाडु, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 29, 2026, 11:54 IST समाचार चुनाव टीवीके ने तमिलनाडु चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की, विजय पेरम्बूर और त्रिची पूर्व से चुनाव लड़ेंगे अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)विजय राजनीतिक दल(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)टीवीके उम्मीदवारों की सूची(टी)विजय तमिलनाडु की राजनीति(टी)टी नगर निर्वाचन क्षेत्र(टी)मायलापुर निर्वाचन क्षेत्र(टी)विल्लीवाक्कम निर्वाचन क्षेत्र