तुलसी के पौधे की देखभाल युक्तियाँ: तुलसी के उपाय हर घर में धार्मिक महत्व के साथ ही स्वास्थ्य और स्वाद का खजाना माने जाते हैं। लोग इसे अक्सर अपने घर में या फिर रसोई और बगीचे में या फिर टुकड़ों में बाक़ी के रूप में उपयोग करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि तुलसी की गलत धारणा को संकट में डाला जा सकता है। असल में, हर औषधि की अपनी तासीर और जरूरत होती है, जिसमें तुलसी के कुछ खास सिद्धांतों को शामिल करके वे एक-दूसरे के विकास में नुकसान पहुंचाते हैं।
इन दवाइयों को तुलसी के पास से लगाना
सेज जैसे उपचार मिट्टी में बेहतर बढ़ते हैं, जबकि तुलसी को औषधि की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार खेडा और तुलसी दोनों के उपयोग से स्वाद और विकास पर प्रभाव पड़ सकता है। और ऐसे उपाय हैं जो मिट्टी में रसायन के विभिन्न प्रकार हैं, जिससे आस-पास के अवशेषों की स्थिरता बहुत ही कम हो जाती है। जहां पत्तागोभी और केले ठंडे मौसम के उपाय हैं, वहीं तुलसी को गर्म वातावरण पसंद होता है। थाइम को भी कम पानी देना चाहिए, जिससे तुलसी के साथ कोई समानता नहीं मिलती है।
तुलसी के साथ कौन से उपाय लगाने से होता है कमाल
अगर तुलसी के साथ सही वैज्ञानिकता का आकलन किया जाए, तो इसकी बिक्री बहुत सही है। टमाटर के साथ तुलसी बनाने से उसका स्वाद सबसे अच्छा होता है और पौधा भी काफी मात्रा में रहता है। इसके अलावा बाला, जीनिया, कैमोमाइल, अजमोद और ओरिगैनो जैसे उपचार तुलसी के साथ अच्छे से बढ़ते हैं।
लोग तुलसी के उपचार में नमक क्यों डालते हैं?
कई लोग तुलसी के उपचारों की अच्छी समानता के लिए नमक सहित सलाह भी देते हैं, लेकिन यह पूरी तरह से सही नहीं होता है। नाममात्र नमक उपचार से नुकसान पहुँचाया जा सकता है। यद्यपि सीमित मात्रा में एप्सम सॉल्ट का उपयोग पोषण संबंधी औषधियों में किया जाता है और उसे हरा-भरा बनाने में मदद की जा सकती है। लोग तुलसी के उपचारों की अच्छी गुणवत्ता के लिए भी नमक की सलाह देते हैं।
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