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गर्मियों में शरीर के लिए AC है ये भूरा बीज! खोई हुई ताकत लौटाएगा वापस, जानें आयुर्वेदिक फायदे

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Last Updated:March 30, 2026, 19:43 IST गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडा और ऊर्जावान बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. ऐसे में अलसी (फ्लैक्ससीड) का सेवन एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. आइए आपको अलसी के फायदों के बारे में बताते हैं. पुराने समय में लोग गर्मियों में शरीर को ठंडा बनाए रखने के लिए कई ऐसी चीजों का सेवन करते थे, जो उन्हें धूप से बचने के साथ शरीर में ताकत बनाए रखने में भी काफी सहयोग करती थी. उनमें से एक है अलसी के दाने, यह छोटे दाने शरीर को गर्मियों में ठंडक के साथ शरीर को कई तरह के फायदे भी पहुंचते हैं. इसका प्रयोग करने से किसी प्रकार की समस्या नहीं होती है. डॉ. आतिफ हसन के अनुसार, अलसी कोई साधारण दाने नहीं बल्कि सेहत के लिए किसी आयुर्वेदिक दवा से कम नहीं है. अलसी के पानी का सेवन एक तरह का डिटॉक्स ड्रिंक माना जाता है. इसका प्रयोग करने के लिए एक गिलास पानी लें उसमें 1 चम्मच अलसी के बीज रातभर भिगो दें, फिर सुबह इसे छानकर खाली पेट पिएं. इससे को शरीर ठंडक मिलेगी और पाचन बेहतर होगा. पहले के समय में लोग धूप में खेतों में जाकर काम किया करते थे. ऐसे में वह लोग अलसी के दाने से बने शरबत का भी प्रयोग अपने शरीर को ठंडा बनाए रखने के लिए करते थे. अलसी के दाने से एक बेहतरीन शरबत भी तैयार करने के लिए अलसी को भिगोकर रख दें. फिर भिगोई हुई अलसी को पानी में उबालें. इसे ठंडा होने पर उसमें नींबू का रस और शहद मिलाकर पीने से गर्मी से राहत और शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद मिलती है. Add News18 as Preferred Source on Google उन्होंने कहा कि अलसी के साथ दही खाने का भी काफी फायदा होता है. इसका सेवन करने के लिए एक कटोरी दही में 1 चम्मच भुनी हुई अलसी का पाउडर मिलाकर खाएं. ये पेट को ठंडक और पाचन में सुधार करने में मदद करता है. वही अलसी पाउडर से एक स्वादिष्ट चटनी भी तैयार की जा सकती है, जिसमें अलसी को भूनकर पीस लें. इसके बाद इसके साथ लहसुन, हरी मिर्च और नमक को भी पीसकर एक कटोरी में रखकर थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट बना लें. यह चटनी खाने में बेहद स्वादिष्ट लगती है और पेट के लिए भी काफी फायदेमंद होती है. अलसी में ओमेगा 3 फैटी एसिड फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए काफी फायदेमंद होते हैं. अलसी के दाने को भूनकर इसका पाउडर बनाकर रख लें. इसका सेवन सुबह करने से काफी फायदे मिलते हैं. इसका सेवन करने के लिए रोज सुबह 1 चम्मच गुनगुने पानी के साथ इसे पीएं. ये शरीर में कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में मदद करता है और यह देसी उपाय किसी भी प्रकार से हानिकारक भी नहीं होता है. अलसी का प्रयोग चाट मसाले की तरह भी किया जा सकता है. यह स्वाद के साथ सेहत को भी बहुत लाभ पहुंचता है. इसका प्रयोग करने के लिए इसे भूनकर पीस लें और एक और ऐरटाइट डब्बे में रख लें. फिर इसे खीरा, टमाटर और अन्य सलाद में ऊपर से अलसी पाउडर को छिड़ककर खाने से शरीर में फाइबर की मात्रा बढ़ती है और जिन लोगों को बार-बार भूख लगना महसूस होता है, वह इसका सेवन जरूर करें, क्योंकि इसके सेवन से पेट लंबे समय तक भरा रहता है. डॉ. आतिफ हसन ने बताया कि अलसी दाने का प्रयोग मीठे के तौर पर भी किया जा सकता है. इसकी ठंडी खीर स्वाद के साथ सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होती है. इसे बनाने के लिए दूध में अलसी पाउडर डालकर पकाएं, फिर ठंडा होने पर थोड़ा गुड़ मिलाकर इसका सेवन करें. इससे शरीर में भरपूर पोषण मिलता है और शरीर को ठंडक भी मिलती है. First Published : March 30, 2026, 19:43 IST

Jharkhand TET 2026 Notification Out

Jharkhand TET 2026 Notification Out

11 मिनट पहले कॉपी लिंक आज की सरकारी नौकरी में जानकारी झारखंड TET 2026 का नोटिफिकेशन जारी होने की, पंजाब में 532 पदों पर भर्ती निकली जिसके लिए आवेदन की शुरुआत 1 अप्रैल से की जाएगी। साथ ही ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में 400 ओपनिंग्स की। इन जॉब्स के बारे में पूरी जानकारी के साथ आवेदन की प्रक्रिया यहां देखिए.… 1, झारखंड TET का नोटिफिकेशन जारी, बिना इंटरव्यू के सिलेक्शन झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) ने नोटिफिकेशन जारी किया है। उम्मीदवार आवेदन शुरू होने के बाद ऑफिशियल वेबसाइट www.jac.jharkhand.gov.in पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : प्राइमरी स्कूल (कक्षा 1 से 5 के लिए) न्यूनतम 50% अंकों के साथ 12वीं पास और दो वर्षीय डीएलएड या उसके समकक्ष डिग्री। अपर प्राइमरी स्कूल (कक्षा 6-8 के लिए) ग्रेजुएशन की डिग्री और दो वर्षीय डीएलएड की डिग्री। या 50% अंकों के साथ पोस्ट ग्रेजुएशन बीएड की डिग्री। मैथ्स और साइंस टीचर : विज्ञान/इंजीनियरिंग/टेक्नोलॉजी/एग्रीकल्चर और मैथ्स में से किसी एक विषय में न्यूनतम 3 वर्षीय ग्रेजुएशन डिग्री। साथ ही 12वीं या उच्चतर माध्यमिक में मैथ्स, फिजिक्स, केमिस्ट्री, बॉटनी और बायोलॉजी में से कम से कम दो विषय के साथ पास होना चाहिए। सोशल साइंस : आर्ट्स/ह्यूमैनिटी /सोशल साइंस / कॉमर्स / मैनेजमेंट में न्यूनतम 03 वर्षीय ग्रेजुएशन की डिग्री। लैंग्वेज टीचर : हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू भाषा में न्यूनतम तीन वर्षीय ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री। एज लिमिट : न्यूनतम 21 साल फीस : सामान्य, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग : 1300 रुपए दिव्यांग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति : 700 रुपए सिलेक्शन प्रोसेस : एग्जाम बेसिस पर। एग्जाम पैटर्न : क्वेश्चन टाइप ऑब्जेटिव और एमसीक्यू एग्जाम मोड ऑफलाइन निगेटिव माकिंग नहीं ड्यूरेशन ढाई घंटा क्वालिफाइंग मार्क्स : सामान्य, आर्थिक रूप से कमजोर : न्यूनतम 60% पिछड़ा वर्ग-1 और पिछड़ा वर्ग-2 : न्यूनतम 55% एससी, एसटी, विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह, दिव्यांग : न्यूनतम 52% एग्जाम सिलेबस : प्राइमरी लेवल : जनरल ट्राइबल एंड रीजनल लैंग्वेजेस : (कक्षा 1 से 5 के लिए) इंट्रोडक्शन टू द लैंग्वेज एंड कम्युनिटी देवनागरी स्क्रिप्ट बेसिक वॉक्येबूलरी बेसिक ग्रामर सिंपल सेंटेंस फॉर्मेश्न एंड डेली यूजेस रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन फाउंडेशनल राइटिंग फॉक लिटरेचर NEP 2020 में लोकल कल्चर एंड ट्राइबल प्रोविजन्स अपर प्राइमरी लेवल : जनरल ट्राइबल एंड रीजनल लैंग्वेजेस (कक्षा 6-8 के लिए) हिस्ट्री एंड इवॉल्यूशन ऑफ लैंग्वेज एंड लिटरेचर एडवांस्ड स्क्रिप्ट प्रजेंटेशन एंड फोनोलॉजी फंक्शनल ग्रामर सेंटेंस स्ट्रक्चर कॉम्प्रिंहेंसिव रीडिंग एंड इंटरप्रिटेशन ट्रांसलेशन एंड शॉर्ट क्रिएटिव राइटिंग डिटेल्ड स्टडी ऑफ लिटरेचर लिटरेरी जेनर्स लैंग्वेज टीचिंग पेडागॉजी इन मल्टीलिंगुअल क्लास प्रोविजन्स इन नेशनल एजुकेशनल पॉलिसी 2020 जरूरी डॉक्यूमेंट्स : पासपोर्ट साइज फोटो साइन शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र शिक्षण योग्यता प्रमाण पत्र कैटेगरी प्रमाण पत्र (यदि लागू हो) ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट jacexamportal.in पर जाएं। होम पेज पर JAC JTET Exam 2024 के लिंक पर क्लिक करें। अगले पेज पर Apply Online के लिंक पर क्लिक करें। मांगे गए सभी डिटेल्स दर्ज करके रजिस्ट्रेशन करें। फॉर्म भरकर फीस जमा करें। फॉर्म सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट लेकर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक 2. पंजाब में 532 पदों पर निकली भर्ती, 1 अप्रैल से करें अप्लाई पंजाब अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड ने 532 पदों पर भर्ती निकाली है। इस भर्ती के लिए आवेदन की शुरुआत 1 अप्रैल 2026 से होगी। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर अप्लाई कर सकेंगे। फीस जमा करने की आखिरी तारीख 30 अप्रैल तय की गई है। वैकेंसी डिटेल्स : पद का नाम पदों की संख्या वार्डर 475 मैट्रन 57 कुल पदों की संख्या 532 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : 12वीं पास, 10वीं तक पंजाबी एक विषय के तौर पर पढ़ी हो। एज लिमिट : न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 27 साल पंजाब सरकार के नियमों के अनुसार आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को अधिकतम उम्र में छूट दी जाएगी। फीस : सामान्य: 1000 रुपए दिव्यांग : 500 रुपए एससी, बीसी, ईडब्ल्यूएस : 250 रुपए पूर्व सैनिक: 200 रुपए सिलेक्शन प्रोसेस : रिटन एग्जाम फिजिकल मेजरमेंट टेस्ट फिजिकल एफिशिएंसी टेस्टडॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन सैलरी : 19,900 – 63,200 रुपए प्रतिमाह पंजाब जेल वार्डर एग्जाम पैटर्न : पार्ट – ए : सब्जेक्ट प्रश्नों की संख्या अंक टाइप पंजाबी 50 50 एमसीक्यू पार्ट बी : सब्जेक्ट प्रश्नों की संख्या अंक ड्यूरेशन जनरल नॉलेज 20 20 बेसिक लॉ एंड कॉन्स्टिट्यूशंस पंजाबी हिस्ट्री एंड कल्चर 20 20 लॉजिकल रीजनिंग एंड मेंटल एबिलिटी 25 25 इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड कंप्यूटर 8 8 लॉजिकल रीजनिंग एंड मेंटल एबिलिटी 25 25 सभी विषय के लिए कुल 2 घंटे पंजाबी एंड इंग्लिश लैंग्वेज 25 25 जरूरी डॉक्यूमेंट्स : ग्रेजुएशन की मार्कशीट और डिग्री आधार कार्ड पैन कार्ड पासपोर्ट साइज फोटो (2-3 कॉपी) बर्थ सर्टिफिकेट (10वीं सर्टिफिकेट) अगर SC/ST/OBC/PwD हो, तो कैटेगरी सर्टिफिकेट ऐसे करें आवेदन ऑफिशियल वेबसाइट sssb.punjab.gov.in पर जाएं। ‘Recruitment/Notification’ पर क्लिक करें। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करें। अपने अकाउंट में लॉगिन करके फीस जमा करें। फॉर्म सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑफिशियल वेबसाइट लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक 3. ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में 400 पदों पर भर्ती, नि:शुल्क करें अप्लाई ऑर्डिनेंस फैक्ट्री, चंदा (महाराष्ट्र) में डेंजर बिल्डिंग वर्कर्स के 400 पदों पर भर्ती निकली है। मुनिशन्स इंडिया लिमिटेड ने इस भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। उम्मीदवार ऑफलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती का विज्ञापन 28 से 3 अप्रैल 2026 के रोजगार समाचार में प्रकाशित किया गया है। कैटेगरी वाइस वैकेंसी डिटेल्स : कैटेगरी का नाम पदों की संख्या सामान्य 162 ओबीसी (एनसीएल) 108 एससी 60 एसटी 30 ईडब्ल्यूएस 40 कुल पदों की संख्या 400 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : NCVT द्वारा जारी नेशनल अप्रेंटिस सर्टिफिकेट होना चाहिए। यह प्रमाण पत्र अटेंडेंट ऑपरेटर केमिकल ट्रेड में होना चाहिए। फीडर ट्रेड्स जैसे केमिकल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और अन्य संबद्ध विषयों के उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं। एज लिमिट : न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 40 साल ओबीसी : 3 साल की छूट एससी, एसटी : 5 साल की छूट सिलेक्शन प्रोसेस : मेरिट बेसिस पर ट्रेड टेस्ट/प्रैक्टिकल टेस्ट डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन मेडिकल एग्जाम सैलरी : 19 हजार 900 रुपए प्रतिमाह अन्य अलाउंस का लाभ भी मिलेगा। ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट से आवेदन फॉर्म का पीडीएफ निकालें। मांगे गए डिटेल्स दर्ज करें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फॉर्म पर अपने सिग्रेचर करें।

क्या नेल पॉलिश लगाना नाखूनों के लिए नुकसानदायक? इस्तेमाल करने से पहले जरूर जानें ये 5 फैक्ट

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Last Updated:March 30, 2026, 19:59 IST Nail Polish Side Effects: नेल पॉलिश लगाने से नाखून अट्रैक्टिव नजर आते हैं और अधिकतर महिलाएं इसका इस्तेमाल करती हैं. हालांकि नेल पॉलिश में कई केमिकल्स होते हैं, जो आपके नाखूनों को कमजोर बना सकते हैं. नेल पॉलिश का ज्यादा उपयोग नाखूनों के लिए अच्छा नहीं माना जाता है. कभी-कभार इसका यूज करने में कोई बुराई नहीं है. नेल पॉलिश का ज्यादा इस्तेमाल करने से नाखूनों को नुकसान हो सकता है. Is Nail Polish Bad for Health: नाखूनों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए नेल पॉलिश का इस्तेमाल किया जाता है. अधिकतर महिलाएं किसी भी फंक्शन में जाने से पहले नेल पॉलिश का यूज करती हैं. ज्यादातर नेल पॉलिश जेल फॉर्म में आती हैं और नाखूनों पर लगाने के बाद कुछ मिनट में सेट हो जाती हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि यह चमकदार रंग आपके नाखूनों की सेहत पर क्या असर डालता है? हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो बार-बार या लंबे समय तक नेल पॉलिश का उपयोग नाखूनों को नुकसान पहुंचा सकता है. अगर आप नियमित रूप से नेल पॉलिश लगाती हैं, तो सावधानी बरतना बेहद जरूरी है. क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकतर नेल पॉलिश में कई केमिकल्स होते हैं, जो नाखूनों को कमजोर और बेजान बना सकते हैं. लगातार नेल पॉलिश लगाने से नाखूनों को प्राकृतिक रूप से मिलने वाली ऑक्सीजन और नमी बाधित हो जाती है. इससे केराटिन ग्रैनुलेशन नामक समस्या हो सकती है, जिसमें नाखूनों की सतह पर सफेद धब्बे दिखाई देने लगते हैं. खासकर गहरे रंगों जैसे लाल, मैरून या काले शेड्स में मौजूद पिगमेंट नाखूनों की ऊपरी परत में समा जाते हैं, जिससे उनका रंग पीला पड़ जाता है. समय के साथ नाखून अपनी प्राकृतिक चमक खो देते हैं, सूखे और कमजोर हो जाते हैं और आसानी से टूटने लगते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. नाखूनों को नुकसान केवल नेल पॉलिश से ही नहीं, बल्कि उसे हटाने वाले रिमूवर से भी होता है. अधिकांश रिमूवर में मौजूद एसीटोन एक तेज रसायन होता है, जो नाखूनों और क्यूटिकल्स से प्राकृतिक तेल और नमी को पूरी तरह खत्म कर देता है. इसके लगातार उपयोग से नाखून बेहद नाजुक, सूखे और कमजोर हो जाते हैं. साथ ही आसपास की त्वचा भी फटने लगती है. इसलिए बेहतर है कि आप एसीटोन-फ्री रिमूवर का उपयोग करें और रिमूवर के इस्तेमाल के बाद क्यूटिकल ऑयल या मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं. विशेषज्ञों का मानना है कि नाखूनों को समय-समय पर बिना किसी केमिकल के छोड़ना बेहद जरूरी है. लगातार नेल पॉलिश लगाने से नाखूनों की प्राकृतिक रिकवरी प्रक्रिया बाधित हो जाती है. इसलिए महीने में कम से कम 5 से 7 दिन नाखूनों को बिना पॉलिश के रखें. इस दौरान नारियल तेल, बादाम तेल या क्यूटिकल ऑयल से हल्की मालिश करें, जिससे नाखूनों में नमी बनी रहे और वे अंदर से मजबूत बनें. यह आदत नाखूनों की सेहत को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करती है. अक्सर लोग सीधे नाखूनों पर नेल पॉलिश लगा लेते हैं, जो एक बड़ी गलती है. एक अच्छा बेस कोट नाखूनों और नेल पॉलिश के बीच एक सुरक्षात्मक परत का काम करता है. यह नाखूनों को दाग-धब्बों, पिगमेंटेशन और हानिकारक रसायनों से बचाता है. साथ ही यह नेल पॉलिश को लंबे समय तक टिकाने में भी मदद करता है और नाखूनों को अतिरिक्त मजबूती देता है. इसलिए हर बार नेल पॉलिश लगाने से पहले बेस कोट का इस्तेमाल जरूर करें. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 30, 2026, 19:59 IST

‘विशाल व्यक्तित्व’: ‘सीआईए लिंक’ टिप्पणी पर बैजयंत पांडा द्वारा बीजू पटनायक का बचाव करने के बाद बीजेपी बनाम बीजेपी | राजनीति समाचार

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आखरी अपडेट:मार्च 30, 2026, 19:57 IST भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा बीजू पटनायक को 1962 के युद्ध में सीआईए से जोड़ने के बाद बैजयंत पांडा ने बीजू पटनायक का बचाव करते हुए उन्हें एक महान देशभक्त बताया, बीजद नेताओं ने टिप्पणियों की निंदा की और माफी की मांग की। पांडा ने अपने पोस्ट में बीजू पटनायक को ‘महान व्यक्तित्व’ वाला बताया. ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की टिप्पणी पर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच, भाजपा नेता बैजयंत जय पांडा ने भी एक विस्तृत सोशल मीडिया पोस्ट में बीजू पटनायक की विरासत का जोरदार बचाव किया। अपने पोस्ट में, पांडा ने बीजू पटनायक को “महान व्यक्तित्व” और “आधुनिक भारत के महानतम देशभक्तों में से एक” के रूप में वर्णित किया, एक पायलट, उद्योगपति और राजनीतिक नेता के रूप में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाना “पूरी तरह से अस्वीकार्य” है। “बीजू चाचा एक महान व्यक्तित्व थे, न केवल अपने युग के ओडिशा के सबसे बड़े नेता, बल्कि देश की अग्रणी हस्तियों में से एक थे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह आधुनिक भारत के महानतम देशभक्तों में से एक थे। राष्ट्रीय गौरव उनकी रगों में कूट-कूटकर भरा था और उन्होंने अपना जीवन भारत को आज़ाद कराने और ओडिशा के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने एक पायलट, उद्योगपति, राजनीतिक नेता और वैश्विक संकटमोचक के रूप में ऐसा किया,” पांडा ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा। उन्होंने कहा, “उनके वीरतापूर्ण मिशनों, कूटनीतिक और रक्षा पहलों ने हमारे नवोदित गणतंत्र को मजबूत करने में योगदान दिया। उनकी देशभक्ति पर आक्षेप लगाना काल्पनिक और स्पष्ट रूप से हास्यास्पद है। उन पर इस तरह के हमले अयोग्य, जानकारीहीन और पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं।” बीजू चाचा एक महान व्यक्तित्व थे, न केवल अपने युग के ओडिशा के सबसे बड़े नेता, बल्कि देश की अग्रणी हस्तियों में से एक थे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह आधुनिक भारत के सबसे महान देशभक्तों में से एक थे। राष्ट्रीय गौरव उनकी रगों में गहराई तक जला हुआ था और उन्होंने अपना जीवन मुक्ति के लिए समर्पित कर दिया… – बैजयंत जय पांडा (@PandaJay) 30 मार्च 2026 क्या हुआ? विवाद तब शुरू हुआ जब दुबे ने 27 मार्च को एक बयान में आरोप लगाया कि बीजू पटनायक ने 1960 के दशक में चीन के साथ युद्ध के दौरान पूर्व प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू और सीआईए के बीच एक कड़ी के रूप में काम किया था। इस टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया हुई, खासकर ओडिशा में, जहां बीजू पटनायक का व्यापक सम्मान किया जाता है। उनके बेटे और बीजेडी अध्यक्ष नवीन पटनायक ने इस बयान की कड़ी निंदा की. उन्होंने विधानसभा के बाहर संवाददाताओं से कहा, ”मुझे लगता है कि भाजपा सांसद को ये अपमानजनक बातें कहने के लिए किसी मानसिक चिकित्सक के ध्यान की जरूरत है।” विवाद क्यों? नवीन पटनायक ने दुबे के दावों को खारिज कर दिया और उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “दुबे द्वारा बीजू बाबू के बारे में कही गई अपमानजनक बातें जानकर मैं आश्चर्यचकित हूं। मुझे नहीं लगता कि जब बीजू बाबू ओडिशा के मुख्यमंत्री थे, तब नेहरू ने दिल्ली में अपने बगल में कोई कार्यालय बनाया था, ताकि रणनीति अपनाई जा सके और चीनियों से लड़ाई की जा सके।” 1962 के युद्ध के दौर को याद करते हुए उन्होंने कहा, “मैं उस समय बहुत छोटा था, लगभग 13 साल का था और मुझे याद है कि बीजू बाबू चीनी हमले को लेकर कितने गुस्से में थे और उन्होंने इसे पीछे हटाने के लिए कितना कुछ किया था।” इस टिप्पणी से बीजू पटनायक के समर्थकों में व्यापक गुस्सा फैल गया है, कई नेताओं ने दुबे पर ओडिशा के गौरव का अनादर करने का आरोप लगाया है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज बीजद ने अपनी प्रतिक्रिया बढ़ा दी, सांसद सस्मित पात्रा ने दुबे की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति से इस्तीफा दे दिया। मानस मंगराज, सुभाशीष खुंटिया, मुजीबुल्ला खान और निरंजन बिशी सहित अन्य सांसदों ने भाजपा नेता की आलोचना की और उन पर “ओडिशा के गौरव का अपमान” करने का आरोप लगाया। बीजेडी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “कांग्रेस और नेहरू पर आरोप लगाने के लिए बीजेपी सांसद ने बीजू पटनायक के नाम का जिक्र किया है।” बीजद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष देबी प्रसाद मिश्रा ने भी टिप्पणियों की निंदा की और माफी की मांग करते हुए इसे “देशभक्त” का अपमान बताया। पहले प्रकाशित: मार्च 30, 2026, 19:54 IST समाचार राजनीति ‘विशाल व्यक्तित्व’: ‘सीआईए लिंक’ टिप्पणी पर बैजयंत पांडा द्वारा बीजू पटनायक का बचाव करने के बाद बीजेपी बनाम बीजेपी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजू पटनायक विवाद(टी)बीजू पटनायक विरासत(टी)निशिकांत दुबे टिप्पणी(टी)बैजयंत जय पांडा(टी)नवीन पटनायक प्रतिक्रिया(टी)ओडिशा राजनीतिक विवाद(टी)बीजेपी बनाम बीजेडी(टी)सीआईए चीन युद्ध आरोप

न्यूयॉर्क में बनेगा ‘राजस्थान भवन’:50 करोड़ की मदद से इंडो-यूएस फ्रेंडशिप सेंटर की घोषणा; राजस्थानी भाषा के लिए उठी मांग

न्यूयॉर्क में बनेगा ‘राजस्थान भवन’:50 करोड़ की मदद से इंडो-यूएस फ्रेंडशिप सेंटर की घोषणा; राजस्थानी भाषा के लिए उठी मांग

राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (RANA) की ओर से न्यूयॉर्क में आयोजित 77वें राजस्थान दिवस और होली स्नेह मिलन समारोह में बड़ी घोषणा की गई। कार्यक्रम का आयोजन भारत के वाणिज्य दूतावास न्यूयॉर्क में किया गया। समारोह में RANA के अध्यक्ष प्रेम भंडारी ने बताया- संगठन के संस्थापक सदस्य और पूर्व अध्यक्ष के. के. मेहता और चंद्रा मेहता के मेहता फैमिली ट्रस्ट की ओर से 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 50 करोड़ रुपए) की प्रारंभिक राशि इंडो–यूएस फ्रेंडशिप सेंटर के निर्माण के लिए दी जाएगी। यह केंद्र न्यूयॉर्क में विकसित किया जाएगा, जिसमें राजस्थान भवन, योग और आयुर्वेद केंद्र, कन्वेंशन सेंटर और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सोशल सेंटर शामिल होंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जिम्मेदारी भी मेहता परिवार ने प्रेम भंडारी को सौंपी है। इस पहल के पीछे एम्बेसडर बिनय के. प्रधान की महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई, जिन्होंने पहले RANA दीप महोत्सव के दौरान इस विचार की नींव रखी थी। कार्यक्रम में प्रेम भंडारी ने राजस्थानी भाषा को भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने और राजस्थान में इसे द्वितीय भाषा का दर्जा देने की मांग भी उठाई। कोविड के दौरान भी निभाई बड़ी भूमिका कोविड महामारी के समय के. के. मेहता ने न्यूयॉर्क स्थित अपने होटल में छात्रों के लिए 100 कमरे उपलब्ध कराए थे और वंदे भारत मिशन-2 के दौरान Air India की टीम की मेजबानी भी की थी। राजस्थान रत्न सम्मान कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित प्रवासी राजस्थानियों को “राजस्थान रत्न” से सम्मानित किया गया। इनमें डॉ. समीन शर्मा, डॉ. नरिंदर कुकर, डॉ. राज बंसल, अशोक संचेती और जुगल किशोर लड़्डा प्रमुख हैं। साथ ही नंद टोडी को भी सम्मान दिया गया। उन्होंने हाल ही फिलाडेल्फिया में बेघर लोगों के लिए 1 मिलियन डॉलर दान किए हैं। टीम ऐड को विशेष सम्मान टीम एआईडी के संस्थापक मोहन नन्नापननी और उनकी टीम को विशेष सम्मान दिया गया। टीम ऐड ने वर्ष 2017 से अब तक 27 देशों में 5000 से अधिक पार्थिव शरीरों की स्वदेश वापसी में मदद की है। 365 दिन खुला रहेगा दूतावास प्रेम भंडारी ने न्यूयॉर्क भारतीय वाणिज्य दूतावास की 365 दिन सेवा देने की पहल की सराहना की। इससे 20 लाख से अधिक भारतीयों को लाभ मिल रहा है। इस मॉडल को अब बोस्टन में भी लागू करने की घोषणा की गई, जहां नए कौंसुल जनरल एस. रघुराम ने इसे अपनाने की बात कही। राजस्थानी भाषा के लिए उठी मांग कार्यक्रम में प्रेम भंडारी ने राजस्थानी भाषा को भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने और राजस्थान में इसे द्वितीय भाषा का दर्जा देने की मांग भी उठाई। इस दौरान उन्होंने जगदीश चंद्र और पवन अरोड़ा को राजस्थानी न्यूज चैनल “गणगौर” के पुनः लॉन्च के लिए बधाई दी गई। सांस्कृतिक रंग और सामाजिक पहल कार्यक्रम में फूलों की होली, सांस्कृतिक नृत्य और कवि अभिनव शुक्ला का काव्य पाठ आकर्षण का केंद्र रहा। RANA कोषाध्यक्ष नीलम मोदी ने स्वागत भाषण दिया, जबकि सचिव रवि जरगढ़ ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। जयपुर फुट कैंप की घोषणा कार्यक्रम में जयपुर फुट के नए कैंप की घोषणा भी की गई, जिसे अजय पटेल के नेतृत्व में आयोजित किया जाएगा। पिछला कैंप पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ था।

गर्मी में क्यों बार-बार हो रही है थकान और पेट खराब? इसका देसी इलाज है ये खास शर्बत…

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गर्मी का मौसम आते ही शरीर में कई तरह की परेशानियां बढ़ने लगती हैं, जैसे थकान, कमजोरी, पेट खराब होना और डिहाइड्रेशन. तेज धूप और लू के कारण शरीर का तापमान बढ़ जाता है, जिससे एनर्जी लेवल भी गिरने लगता है. ऐसे समय में अगर आप प्राकृतिक और देसी उपाय अपनाते हैं, तो शरीर को राहत मिलती है. इन्हीं में से एक बेहद असरदार और पारंपरिक ड्रिंक है बेल का शर्बत, जिसे गर्मियों का नेचुरल कूलर भी कहा जाता है. यह न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि कई स्वास्थ्य समस्याओं से भी बचाने में मदद करता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बेल का नियमित सेवन गर्मियों में शरीर को संतुलित रखने का एक आसान और सस्ता तरीका है. आजकल लोग बाजार में मिलने वाले कोल्ड ड्रिंक्स और शुगर से भरपूर जूस पर ज्यादा निर्भर हो गए हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके मुकाबले घर पर बना बेल का शर्बत पूरी तरह नेचुरल होता है और इसमें किसी तरह के केमिकल या प्रिजर्वेटिव नहीं होते. यह शरीर को अंदर से ठंडा रखने के साथ-साथ लंबे समय तक हाइड्रेटेड भी रखता है, जिससे गर्मी का असर कम महसूस होता है. भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, बेल एक ऐसा फल है जिसमें फाइबर, विटामिन C, आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. यही वजह है कि यह गर्मियों में शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाता है. बेल का शर्बत पीने से प्यास जल्दी बुझती है और शरीर में पानी की कमी पूरी होती है. साथ ही यह इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने में भी मदद करता है, जिससे बार-बार होने वाली कमजोरी और चक्कर आने की समस्या कम होती है. गर्मी में ज्यादा पसीना आने से शरीर में जरूरी मिनरल्स की कमी हो जाती है, लेकिन बेल का शर्बत इस कमी को पूरा करने में सहायक होता है. पाचन तंत्र के लिए बेल का शर्बत किसी वरदान से कम नहीं है. इसमें मौजूद फाइबर पेट को साफ रखने में मदद करता है और कब्ज, गैस, अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है. अगर किसी को दस्त या डायरिया की समस्या हो, तो बेल का शर्बत बहुत फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि यह आंतों को मजबूत करता है और पाचन प्रक्रिया को संतुलित बनाए रखता है. यह पेट की सूजन को कम करता है और खाना जल्दी पचाने में मदद करता है, जिससे पेट हल्का और आरामदायक महसूस होता है. दिल की सेहत के लिए भी बेल काफी लाभकारी माना जाता है. इसका नियमित सेवन शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद करता है, जिससे हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. इसके अलावा, बेल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में मदद करते हैं और खून को साफ रखते हैं. इसका असर त्वचा पर भी दिखाई देता है, जिससे स्किन ज्यादा साफ, हेल्दी और ग्लोइंग नजर आती है. महिलाओं के लिए भी बेल का शर्बत काफी फायदेमंद होता है, खासकर प्रसव के बाद. यह शरीर को ताकत देने के साथ-साथ पोषण की कमी को पूरा करता है और दूध बढ़ाने में भी मदद कर सकता है. साथ ही, यह शरीर को अंदर से ठंडा रखता है, जिससे हार्मोनल बैलेंस बेहतर बना रहता है. बेल का शर्बत बनाना भी बहुत आसान है. सबसे पहले पके हुए बेल को तोड़कर उसका गूदा निकाल लें और उसे अच्छे से मसल या पीस लें. फिर इसमें ठंडा पानी मिलाकर छान लें. इसके बाद स्वाद के अनुसार काला नमक, भुना जीरा पाउडर और थोड़ा सा गुड़ या शहद मिलाएं. चाहें तो इसमें कुछ पुदीना पत्तियां भी डाल सकते हैं, जिससे इसका स्वाद और भी ताजगी भरा हो जाता है. गर्मियों में रोज एक गिलास बेल का शर्बत पीने से शरीर दिनभर ठंडा, एनर्जेटिक और फ्रेश महसूस करता है.

अनूपपुर में कांग्रेस का महंगाई, ईंधन कमी पर प्रदर्शन:हाथ ठेले पर बाइक-सिलेंडर रखकर जताया विरोध, कहा- गलत नीतियों से जनता परेशान

अनूपपुर में कांग्रेस का महंगाई, ईंधन कमी पर प्रदर्शन:हाथ ठेले पर बाइक-सिलेंडर रखकर जताया विरोध, कहा- गलत नीतियों से जनता परेशान

अनूपपुर जिला मुख्यालय में सोमवार को जिला कांग्रेस कमेटी ने पेट्रोल-डीजल की कमी और बढ़ती महंगाई के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। जिला अध्यक्ष गुड्डू चौहान की अगुवाई में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इंदिरा तिराहे से स्टेशन चौक तक रैली निकाली। प्रदर्शन के दौरान अनोखा नजारा देखने को मिला, जब कार्यकर्ताओं ने हाथ ठेले पर मोटरसाइकिल और गैस सिलेंडर रखकर केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के प्रति अपना गुस्सा जाहिर किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना था कि सरकार की गलत नीतियों की वजह से जनता बेहाल है। महंगाई और किल्लत से जनता परेशान जिला अध्यक्ष गुड्डू चौहान ने कहा कि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम लगातार बढ़ रहे हैं और इनकी कमी ने लोगों की मुसीबतें और बढ़ा दी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई सातवें आसमान पर है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए घर चलाना मुश्किल हो गया है। बिजली के बढ़ते बिलों पर भी घेरा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केवल पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि बिजली की बढ़ती कीमतों का भी विरोध किया। उनका कहना था कि एक तरफ तो लोग तेल और गैस के दामों से परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार बिजली महंगी करके जनता पर दोहरी मार मार रही है। तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन रैली के आखिर में स्टेशन चौक पर कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा गया। इसमें मांग की गई कि पेट्रोलियम पदार्थों की सप्लाई ठीक की जाए और बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाकर जनता को राहत दी जाए। इस मौके पर पूर्व विधायक मनोज अग्रवाल समेत कांग्रेस के कई बड़े नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

विधानसभा चुनाव 2026: घर बैठे वोट डालेंगे 2.3 लाख से अधिक लोग: EC की ‘होम वोट’ सुविधा शुरू, बुजुर्गों और आदिवासियों को बड़ी राहत

विधानसभा चुनाव 2026: घर बैठे वोट डालेंगे 2.3 लाख से अधिक लोग: EC की 'होम वोट' सुविधा शुरू, बुजुर्गों और आदिवासियों को बड़ी राहत

चुनाव आयोग ने इस बार मतदान प्रक्रिया को समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केरल, असम और पुडुचेरी में 2.37 लाख से अधिक विशाल चर्च को ‘होम वोट’ की सुविधा के लिए मंजूरी दे दी गई है। यानी अब हजारों बुजुर्ग और सदस्य घर बैठे ही अपना वोट दल बनाते हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक, 30 मार्च तक यह पात्र सामने आ गया और कई निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। आयोग ने बताया कि यह प्रक्रिया 5 अप्रैल तक पूरी कर ली जाएगी। अगर किसी कलाकार से पहली बार संपर्क नहीं हो पाता है, तो दूसरी बार भी टीम अपने पद पर आसीन हो जाती है, ताकि कोई भी कलाकार अपने अधिकार से संपर्क न कर सके। होम बिटकॉइन कैसे काम करता है?85 वर्ष से अधिक आयु के विकलांग और विकलांग (पीडब्ल्यूडी) श्रेणी के लोगों के लिए होम विहित सुविधा विशिष्टता। यह सुविधा अधिनियम अधिनियम 1951 की धारा 60(सी) के अंतर्गत दी गई है, जिसके माध्यम से ऐसे कलाकार पोस्टल बैलेट के माध्यम से घर से ही मतदान किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित नामांकन अधिसूचना जारी होने के पांच दिन के अंदर अपने रिटर्निंग ऑफिसर के पास आवेदन करना होता है। मित्र पर भी जोरचुनाव आयोग ने इस पूरी प्रक्रिया में प्लाट बनाए रखने के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए हैं। सैद्धांतिक रूप से प्राप्त राजनीतिक हितैषी को उन कट्टरपंथियों की सूची दी गई है,मताधिकार होम वोट का विकल्प चुनें। साथ ही, पोलिंग टीम के दौरे का पूरा शेड्यूल भी सबसे पहले बताया जाता है। यदि वे प्रस्थान करते हैं तो अपने प्रतिनिधि को टीम के साथ भेज सकते हैं। बाकी के लिए भी तैयारीआयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि जो 85+ या मतदाता होम वोट का विकल्प नहीं हैं, उनके लिए मतदान प्रस्ताव विशेष रूप से पेश किए जाएंगे। क्वेश्चन, स्वयंसेवक और अन्य जरूरी सेवाएं शामिल हैं, ताकि उन्हें मतदान में किसी तरह की परेशानी न हो। वॅाचलिस्ट अनुसूची और अहम तारीखेंचुनाव आयोग ने पहले ही असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान करने की घोषणा की है। इसके अलावा तमिल और पश्चिम बंगाल में भी चुनावी कार्यक्रम जारी हो चुका है। 30 मार्च को तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के पहले चरण की अधिसूचना जारी होगी, जबकि बंगाल के दूसरे चरण की अधिसूचना 2 अप्रैल को जारी होगी। यह कदम क्यों अहम है?होम वोटिंग सुविधा को चुनाव आयोग के उस प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जिससे मतदान प्रक्रिया को अधिकाधिक समावेशी और आसान बनाया जा सके। भारत की तरह बड़े लोकतंत्र में जहां करोड़ों लोग हैं, वहां के वृद्धजन और विश्ष्ठों की भागीदारी सुनिश्चित करना हमेशा चुनौती बनी हुई है। ऐसे में सबसे पहले सिर्फ सुविधा को बढ़ावा देना है, बल्कि लोकतंत्र को और मजबूत करना भी है। इसे भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल में चुनावी ‘हाईजैक’ की साजिश? किरण रिजिजू का बड़ा आरोप, EC से सख्त कार्रवाई की मांग (टैग्सटूट्रांसलेट)ईसी(टी)विधानसभा चुनाव(टी)समाचार(टी)विधानसभा चुनाव 2026(टी)मतदाताओं ने घर से मतदान किया(टी)ईसी ने होम वोटिंग सुविधा शुरू की(टी)बुजुर्ग मतदाता(टी)विकलांग व्यक्ति(टी)ताजा समाचार(टी)अपडेट समाचार(टी)चुनाव समाचार(टी)असम(टी)पश्चिम बंगाल(टी)तमिलनाडु(टी)केरल(टी)ईसी(टी)विधान सभा चुनाव(टी)समाचार(टी)विधानसभा चुनाव 2026(टी)मतदाता घर से वोट डालेंगे(टी)ईसी ने

पन्ना की सकरिया हवाई पट्टी पर भीषण आग:आग बुझाते समय फायरमैन घायल; साथियों ने पहुंचाया अस्पताल

पन्ना की सकरिया हवाई पट्टी पर भीषण आग:आग बुझाते समय फायरमैन घायल; साथियों ने पहुंचाया अस्पताल

पन्ना में नेशनल हाईवे 39 स्थित सकरिया हवाई पट्टी के पास सोमवार शाम आग लग गई। आग इतनी विकराल थी कि लपटें और धुएं का गुबार दूर से दिखाई दे रहा था। सूचना मिलने पर नगर पालिका की दमकल टीमें आग बुझाने मौके पर पहुंचीं। आग पर काबू पाने का प्रयास जारी था। इसी दौरान, धाम मोहल्ला निवासी फायरमैन रविंद्र प्रताप सिंह (30) फायर ब्रिगेड की गाड़ी पर चढ़कर आग बुझाने में लगे थे। तभी अचानक एक तेज लपट उठी, जिससे उनका संतुलन बिगड़ गया और वे नीचे गिर गए। साथियों ने पहुंचाया अस्पताल इस हादसे में रविंद्र प्रताप सिंह के दोनों पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। उनके साथी जितेंद्र यादव (चालक), प्रमोद रैकवार (फायरमैन) और उत्तम सोनकर (चालक) ने तुरंत कार्रवाई करते हुए घायल रविंद्र को उसी फायर ब्रिगेड वाहन से पन्ना के जिला चिकित्सालय पहुंचाया। रविंद्र प्रताप सिंह, जो स्वर्गीय रणमत सिंह के पुत्र हैं, फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में हैं। समय पर उपचार मिलने से उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। घटना के बाद शहर में इस हादसे और फायरमैन के प्रयासों की चर्चा हो रही है।

रोज के खाने को हेल्दी कैसे बनाएं? पकाते वक्त क्या गलतियां न करें, एक्सपर्ट से जानें कुकिंग से जुड़ी 5 बातें

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Healthy Cooking Hacks: अधिकतर लोग इस बात पर काफी ध्यान देते हैं कि वे क्या खा रहे हैं, लेकिन इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं कि उन चीजों को कैसे पका रहे हैं. खाने-पीने की चीजों को पकाने का तरीका सही होगा, तो शरीर को ज्यादा पोषक तत्व मिल सकेंगे. न्यूट्रिशनिस्ट का मानना है कि गलत तरीके से खाना पकाने से सब्जियों और अनाज के 50% से 70% तक पोषक तत्व नष्ट हो सकते हैं. एक हेल्दी मील का मतलब सिर्फ सलाद खाना नहीं है, बल्कि खाना पकाने की उन वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना है. कुकिंग से जुड़ी वे 5 बातें जानते हैं, जो आपके रोज के खाने को हेल्दी बना सकती हैं. यूपी के गाजियाबाद की डाइटिशियन रंजना सिंह ने News18 को बताया कि खाना पकाने में सबसे बड़ी गलती तेल को उसके स्मोकिंग पॉइंट से ज्यादा गर्म करना है. जब तेल से धुआं निकलने लगता है, तो वह जहरीले तत्व छोड़ने लगता है और उसके अच्छे फैट नष्ट हो जाते हैं. कुकिंग के लिए सरसों का तेल, मूंगफली का तेल या घी का उपयोग करें, क्योंकि इनका स्मोकिंग पॉइंट अधिक होता है. एक ही तेल को बार-बार गर्म करके इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि यह सेहत के लिए खतरनाक होता है. डाइटिशियन ने बताया कि अक्सर लोग सब्जियों को काटने के बाद धोते हैं, जो पोषण के लिहाज से एक बड़ी गलती है. सब्जियों में विटामिन B और विटामिन C जैसे वॉटर सॉल्यूबल विटामिन होते हैं. अगर आप काटने के बाद सब्जियां धोते हैं, तो ये जरूरी पोषक तत्व पानी के साथ बह जाते हैं. हमेशा सब्जियों को पहले अच्छी तरह धो लें और उसके बाद ही काटें. इसके अलावा सब्जियों को बहुत छोटे टुकड़ों में काटने से भी बचें, क्योंकि हवा के संपर्क में आने से उनके एंटीऑक्सीडेंट्स कम हो जाते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. एक्सपर्ट के मुताबिक तेज आंच पर खाना पकाने से खाने का स्वाद तो जल्दी आ जाता है, लेकिन उसके एंजाइम्स और विटामिन्स जल जाते हैं. हेल्दी कुकिंग के लिए स्टीमिंग, स्टिर-फ्राइंग या धीमी आंच पर ढंककर पकाना सबसे अच्छा माना जाता है. प्रेशर कुकर का उपयोग दालों और सख्त अनाज के लिए तो ठीक है, लेकिन हरी सब्जियों को खुले बर्तन में या हल्के भाप में पकाना बेहतर है ताकि उनका रंग और क्लोरोफिल बरकरार रहे. मसाले सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि औषधीय गुणों के लिए जाने जाते हैं. हल्दी में मौजूद करक्यूमिन और काली मिर्च के गुण तब सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं, जब उन्हें सही तापमान पर डाला जाए. मसालों को बहुत ज्यादा देर तक तेल में भूनने से उनके तेल उड़ जाते हैं. एक्सपर्ट का सुझाव है कि मसालों को खाना पकने के बीच में या अंत में डालें, ताकि उनके स्वास्थ्य लाभ शरीर को मिल सकें. नमक का इस्तेमाल भी अंत में करना बेहतर है, ताकि आयोडीन की मात्रा बनी रहे. आपको जानकर हैरानी होगी कि आधुनिक नॉन-स्टिक बर्तनों में इस्तेमाल होने वाली टेफ्लॉन कोटिंग अधिक गर्म होने पर सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है. इसकी जगह पारंपरिक लोहे की कढ़ाई या मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करें. लोहे के बर्तन में खाना पकाने से भोजन में आयरन की मात्रा प्राकृतिक रूप से बढ़ जाती है, जो एनीमिया से बचाता है. मिट्टी के बर्तन खाने के pH लेवल को बनाए रखते हैं और खाने की पौष्टिकता को 100% तक सुरक्षित रखते हैं. एल्युमिनियम के बर्तनों का उपयोग कम से कम करें, क्योंकि यह शरीर में जमा होकर नुकसान पहुंचा सकता है.