चुनाव आयोग ने इस बार मतदान प्रक्रिया को समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केरल, असम और पुडुचेरी में 2.37 लाख से अधिक विशाल चर्च को ‘होम वोट’ की सुविधा के लिए मंजूरी दे दी गई है। यानी अब हजारों बुजुर्ग और सदस्य घर बैठे ही अपना वोट दल बनाते हैं।
चुनाव आयोग के मुताबिक, 30 मार्च तक यह पात्र सामने आ गया और कई निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। आयोग ने बताया कि यह प्रक्रिया 5 अप्रैल तक पूरी कर ली जाएगी। अगर किसी कलाकार से पहली बार संपर्क नहीं हो पाता है, तो दूसरी बार भी टीम अपने पद पर आसीन हो जाती है, ताकि कोई भी कलाकार अपने अधिकार से संपर्क न कर सके।
होम बिटकॉइन कैसे काम करता है?
85 वर्ष से अधिक आयु के विकलांग और विकलांग (पीडब्ल्यूडी) श्रेणी के लोगों के लिए होम विहित सुविधा विशिष्टता। यह सुविधा अधिनियम अधिनियम 1951 की धारा 60(सी) के अंतर्गत दी गई है, जिसके माध्यम से ऐसे कलाकार पोस्टल बैलेट के माध्यम से घर से ही मतदान किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित नामांकन अधिसूचना जारी होने के पांच दिन के अंदर अपने रिटर्निंग ऑफिसर के पास आवेदन करना होता है।
मित्र पर भी जोर
चुनाव आयोग ने इस पूरी प्रक्रिया में प्लाट बनाए रखने के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए हैं। सैद्धांतिक रूप से प्राप्त राजनीतिक हितैषी को उन कट्टरपंथियों की सूची दी गई है,मताधिकार होम वोट का विकल्प चुनें। साथ ही, पोलिंग टीम के दौरे का पूरा शेड्यूल भी सबसे पहले बताया जाता है। यदि वे प्रस्थान करते हैं तो अपने प्रतिनिधि को टीम के साथ भेज सकते हैं।
बाकी के लिए भी तैयारी
आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि जो 85+ या मतदाता होम वोट का विकल्प नहीं हैं, उनके लिए मतदान प्रस्ताव विशेष रूप से पेश किए जाएंगे। क्वेश्चन, स्वयंसेवक और अन्य जरूरी सेवाएं शामिल हैं, ताकि उन्हें मतदान में किसी तरह की परेशानी न हो।
वॅाचलिस्ट अनुसूची और अहम तारीखें
चुनाव आयोग ने पहले ही असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान करने की घोषणा की है। इसके अलावा तमिल और पश्चिम बंगाल में भी चुनावी कार्यक्रम जारी हो चुका है। 30 मार्च को तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के पहले चरण की अधिसूचना जारी होगी, जबकि बंगाल के दूसरे चरण की अधिसूचना 2 अप्रैल को जारी होगी।
यह कदम क्यों अहम है?
होम वोटिंग सुविधा को चुनाव आयोग के उस प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जिससे मतदान प्रक्रिया को अधिकाधिक समावेशी और आसान बनाया जा सके। भारत की तरह बड़े लोकतंत्र में जहां करोड़ों लोग हैं, वहां के वृद्धजन और विश्ष्ठों की भागीदारी सुनिश्चित करना हमेशा चुनौती बनी हुई है। ऐसे में सबसे पहले सिर्फ सुविधा को बढ़ावा देना है, बल्कि लोकतंत्र को और मजबूत करना भी है।
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