Wednesday, 15 Apr 2026 | 06:36 AM

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चाय नगरी में इंटरएक्टिव स्टॉर्म, हिमंत बिस्वा सरमा के मेगा रोड शो से निकले डिब्रूगढ़, बीजेपी के लिए ये सीट कितनी अहम है

चाय नगरी में इंटरएक्टिव स्टॉर्म, हिमंत बिस्वा सरमा के मेगा रोड शो से निकले डिब्रूगढ़, बीजेपी के लिए ये सीट कितनी अहम है

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार (30 मार्च) को असम के प्रमुख शहर डिब्रूगढ़ में एक विशाल रोड शो का नेतृत्व किया, जिससे पूरा शहर बन गया। आगामी चुनाव से पहले शक्ति के प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग विपक्षियों के साथ तूफान में डूबे और पूरे शहर केसरिया के रंग में रंगा नजर आए। यह हाई-वोल्टेज अभियान बीजेपी की सामुदायिक तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे पार्टी ने अपने मजबूत गढ़ में एक बार फिर जनसमर्थन का प्रदर्शन किया। डिब्रूगढ़ के प्रमुख इलाके में विकी ओस्ट ऑपरेट हो गए, क्योंकि बड़ी संख्या में समर्थक, पार्टी कार्यकर्ता और स्थानीय लोग तट के किनारे जमा हो गए। सीएम के साथ प्रशांत फुकन भी मौजूद रहेरोड शो की शुरुआत एटी रोड डिब्रूगढ़ नगर निगम कार्यालय के पास से हुई, जहां मुख्यमंत्री एक विशेष रूप से सजाए गए वाहनों पर स्थित लोगों का नामकरण कर रहे थे। उस समय उनके साथ प्रशांत फुकन भी मौजूद थे, जो 4 बार के विधायक और राज्य के ऊर्जा मंत्री हैं। इस बार भी वो डिब्रूगढ़ से बीजेपी उम्मीदवार हैं। दोनों नेताओं ने हाथ हिलाकर और मुस्कुराकर लोगों का अभिवादन किया, जबकि पूरे रास्ते जय-जयकार और नारे लगाते रहे। इस शो की खास बात यह रही कि कई जगहों पर स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री को पारंपरिक असमिया गामोसा रोड बनाया। यह न केवल सांस्कृतिक साज़िशों को परिभाषित करता है, बल्कि भाजपा की क्षेत्रीय पहचान के साथ जुड़ाव की रणनीति को भी शामिल करता है। डिब्रूगढ़ में बीजेपी का मजबूत गढ़ है मानकों का मानना ​​है कि यह रोड शो केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि ग्राउंड लेवल पर जनसंख्या से मजबूत करने का एक प्रयास भी था। डिब्रूगढ़ को बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है, जहां शहरी और ग्रामीण इक्विटी का बैलेंस दृष्टि से महत्वपूर्ण है। डबल इंजन सरकार पर जोररोड शो के दौरान मुख्यमंत्री ने चुनाव को लेकर विकास और स्थिरता के मुद्दे पर जोर दिया. उन्होंने राज्य में सुपरमार्केट, सुपरमार्केट और संवैधानिक सुधारों में हुई प्रगति का ज़िक्र किया। उन्होंने इंजनीकरण सरकार की अवधारणा पर भी जोर दिया, जिसमें केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और राज्य सरकार के सामंजस्य को विकास का आधार बताया गया। उन्होंने कहा, “आज यहां की जनता हमारे काम पर भरोसा करती है। डिब्रूगढ़ ने हमेशा हमारा साथ दिया है और हम विकास की इस यात्रा को आगे बढ़ाएंगे।” साथ ही उन्होंने फुकन के लंबे राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में उनके योगदान की भी पुष्टि की। यह रोड शो ऐसे समय में हुआ है जब तानाशाही तानाशाह अपने चरम पर हैं और सभी राजनीतिक दल अंतिम चरण में पूरी तरह से एकजुट हो रहे हैं। बीजेपी के लिए डिब्रूगढ़ ऊपरी असम में एक अहम सीट है, जहां पकड़ बनाए रखना पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा है। ये भी पढ़ें ईडी ड्राइवर राहुल का नया प्रमोशन, केंद्र सरकार ने छोड़ी अब ये बड़ी जिम्मेदारी

PCB ने गेंदबाज नसीम शाह पर जुर्माना लगाया:मुख्यमंत्री मरियम नवाज पर कमेंट किया था; बोर्ड ने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन माना

PCB ने गेंदबाज नसीम शाह पर जुर्माना लगाया:मुख्यमंत्री मरियम नवाज पर कमेंट किया था; बोर्ड ने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन माना

पाकिस्तान के तेज गेंदबाज नसीम शाह पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने 2 करोड़ पाकिस्तानी रुपए का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई मरियम नवाज की आलोचना वाले ट्वीट के बाद हुई, जिसे नसीम के अकाउंट से पोस्ट होने के कुछ देर बाद डिलीट कर दिया गया। PCB ने इसे सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों का उल्लंघन माना। क्या था पूरा मामला विवाद की शुरुआत PSL के पहले मैच के बाद हुई। PCB चेयरमैन मोहसिन नकवी ने पहले घोषणा की थी कि ईंधन बचाने और पश्चिमी एशिया संकट के कारण टूर्नामेंट बिना दर्शकों के होगा। लेकिन मैच के दौरान पूर्व पीएम नवाज शरीफ की बेटी और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज गद्दाफी स्टेडियम पहुंचीं और खिलाड़ियों से मिलीं। नसीम शाह के अकाउंट से PCB के एक पोस्ट को कोट-ट्वीट करते हुए लिखा गया ‘उन्हें लॉर्ड्स की रानी की तरह ट्रीट क्यों किया जा रहा है?’ नसीम ने मीडिया टीम की गलती बताई विवादित ट्वीट के कुछ मिनट बाद ही उसे डिलीट कर दिया गया। इसके बाद नसीम ने एक और पोस्ट कर सफाई दी कि उनका अकाउंट हैक हो गया था। सोमवार को उन्होंने एक नया बयान जारी कर कहा, ‘मेरे अकाउंट से पिछला पोस्ट मेरी मैनेजमेंट टीम ने किया था, वह मेरे विचार नहीं हैं। मैं अपने प्लेटफॉर्म की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं और सोशल मीडिया मैनेजर को हटा दिया है। मैं इस गलती के लिए माफी मांगता हूं।’ PCB ने मैनेजर को किया ब्लैकलिस्ट PCB की तीन सदस्यीय अनुशासन समिति ने इस मामले में सुनवाई की। नसीम ने बिना शर्त माफी मांगी और अपने सोशल मीडिया मैनेजर को बर्खास्त कर दिया। PCB ने न केवल नसीम पर भारी जुर्माना लगाया, बल्कि उनके मैनेजर को भी ब्लैकलिस्ट कर दिया है। अब वह मैनेजर PCB के दायरे में आने वाले किसी भी अन्य खिलाड़ी के साथ काम नहीं कर पाएगा। पहले भी एक्शन हो चुका है PCB इससे पहले भी खिलाड़ियों के राजनीतिक बयान पर सख्त कार्रवाई कर चुका है। पिछले साल आमेर जमाल पर भी एक नारे को लेकर 10 लाख रुपए से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया था। लेकिन नसीम शाह पर लगा जुर्माना उससे करीब 16 गुना ज्यादा है। PSL में सबसे महंगे खिलाड़ियों में शामिल नसीम शाह इस सीजन PSL ऑक्शन में सबसे महंगे खिलाड़ियों में से एक रहे। उन्हें रावलपिंडी टीम ने करीब 8.65 करोड़ पाकिस्तानी रुपए में खरीदा था। ———————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… वैभव की राजस्थान के लिए दूसरी सबसे तेज फिफ्टी 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने राजस्थान रॉयल्स के लिए दूसरी सबसे तेज फिफ्टी लगाकर टीम को जीत दिलाई। गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में राजस्थान ने चेन्नई सुपर किंग्स को 8 विकेट से हराया। पूरी खबर…

PCB ने गेंदबाज नसीम शाह पर जुर्माना लगाया:मुख्यमंत्री मरियम नवाज पर कमेंट किया था; बोर्ड ने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन माना

PCB ने गेंदबाज नसीम शाह पर जुर्माना लगाया:मुख्यमंत्री मरियम नवाज पर कमेंट किया था; बोर्ड ने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन माना

पाकिस्तान के तेज गेंदबाज नसीम शाह पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने 2 करोड़ पाकिस्तानी रुपए का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई मरियम नवाज की आलोचना वाले ट्वीट के बाद हुई, जिसे नसीम के अकाउंट से पोस्ट होने के कुछ देर बाद डिलीट कर दिया गया। PCB ने इसे सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों का उल्लंघन माना। क्या था पूरा मामला विवाद की शुरुआत PSL के पहले मैच के बाद हुई। PCB चेयरमैन मोहसिन नकवी ने पहले घोषणा की थी कि ईंधन बचाने और पश्चिमी एशिया संकट के कारण टूर्नामेंट बिना दर्शकों के होगा। लेकिन मैच के दौरान पूर्व पीएम नवाज शरीफ की बेटी और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज गद्दाफी स्टेडियम पहुंचीं और खिलाड़ियों से मिलीं। नसीम शाह के अकाउंट से PCB के एक पोस्ट को कोट-ट्वीट करते हुए लिखा गया ‘उन्हें लॉर्ड्स की रानी की तरह ट्रीट क्यों किया जा रहा है?’ नसीम ने मीडिया टीम की गलती बताई विवादित ट्वीट के कुछ मिनट बाद ही उसे डिलीट कर दिया गया। इसके बाद नसीम ने एक और पोस्ट कर सफाई दी कि उनका अकाउंट हैक हो गया था। सोमवार को उन्होंने एक नया बयान जारी कर कहा, ‘मेरे अकाउंट से पिछला पोस्ट मेरी मैनेजमेंट टीम ने किया था, वह मेरे विचार नहीं हैं। मैं अपने प्लेटफॉर्म की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं और सोशल मीडिया मैनेजर को हटा दिया है। मैं इस गलती के लिए माफी मांगता हूं।’ PCB ने मैनेजर को किया ब्लैकलिस्ट PCB की तीन सदस्यीय अनुशासन समिति ने इस मामले में सुनवाई की। नसीम ने बिना शर्त माफी मांगी और अपने सोशल मीडिया मैनेजर को बर्खास्त कर दिया। PCB ने न केवल नसीम पर भारी जुर्माना लगाया, बल्कि उनके मैनेजर को भी ब्लैकलिस्ट कर दिया है। अब वह मैनेजर PCB के दायरे में आने वाले किसी भी अन्य खिलाड़ी के साथ काम नहीं कर पाएगा। पहले भी एक्शन हो चुका है PCB इससे पहले भी खिलाड़ियों के राजनीतिक बयान पर सख्त कार्रवाई कर चुका है। पिछले साल आमेर जमाल पर भी एक नारे को लेकर 10 लाख रुपए से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया था। लेकिन नसीम शाह पर लगा जुर्माना उससे करीब 16 गुना ज्यादा है। PSL में सबसे महंगे खिलाड़ियों में शामिल नसीम शाह इस सीजन PSL ऑक्शन में सबसे महंगे खिलाड़ियों में से एक रहे। उन्हें रावलपिंडी टीम ने करीब 8.65 करोड़ पाकिस्तानी रुपए में खरीदा था। ———————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… वैभव की राजस्थान के लिए दूसरी सबसे तेज फिफ्टी 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने राजस्थान रॉयल्स के लिए दूसरी सबसे तेज फिफ्टी लगाकर टीम को जीत दिलाई। गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में राजस्थान ने चेन्नई सुपर किंग्स को 8 विकेट से हराया। पूरी खबर…

CAG रिपोर्ट: कई जवानों को समय पर वेतन-भत्ते नहीं मिले:मिलिट्री अस्पतालों में कमियां मिली, सेना से जुड़े काम के रिकॉर्ड डिजिटल करने की सिफारिश

CAG रिपोर्ट: कई जवानों को समय पर वेतन-भत्ते नहीं मिले:मिलिट्री अस्पतालों में कमियां मिली, सेना से जुड़े काम के रिकॉर्ड डिजिटल करने की सिफारिश

CAG यानी सरकारी खर्च और कामकाज का ऑडिट करने वाली संस्था की रिपोर्ट सोमवार को संसद में पेश की गई। रिपोर्ट में कई मिलिट्री अस्पतालों के रखरखाव में कमी की ओर भी इशारा किया गया है। यह भी बताया गया है कि काफी संख्या में सेना के जवानों को उनके वेतन-भत्ते समय पर और सही तरीके से नहीं मिले। रिपोर्ट के मुताबिक सेना के निर्माण कार्यों से जुड़े साइट रिकॉर्ड्स ठीक से नहीं रखे गए। इससे काम की क्वालिटी और ठेकेदार की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हुआ। ऑडिट ने सिफारिश की है कि रक्षा मंत्रालय साइट रिकॉर्ड्स को डिजिटाइज करे। ये वही कागज होते हैं जिनमें काम की प्रगति, मटेरियल और टेस्ट रिपोर्ट जैसी जानकारी रिकॉर्ड होती है। रिपोर्ट में तीन प्रमुख हिस्सों की ऑडिट की गई… कई जवानों को समय पर भुगतान नहीं मिला रिपोर्ट के मुताबिक प्रोविजनल फाइनल सेटलमेंट ऑफ अकाउंट्स (PFSA) की समीक्षा तय समय पर नहीं हुई। इसके कारण रिटायरमेंट के समय अधिकारियों, जूनियर कमीशंड ऑफिसर्स (JCOs) और दूसरे रैंक (ORs) के कर्मीयों से एक साथ बड़ी राशि की वसूली करनी पड़ी। आईटी सिस्टम में जरूरी नियम शामिल नहीं होने से कई सेना के जवानों को उनका भुगतान समय पर और सही तरीके से नहीं मिला। PTO में देरी, सिस्टम आपस में ठीक से नहीं जुड़े रिपोर्ट में PTO (प्रिविलेज टिकट ऑर्डर) जारी करने में देरी की बात कही गई है। ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS) में डेटा सही से नहीं मिला, इसलिए कई आवेदन रिजेक्ट हो गए। ऑडिट ने कहा है कि अलग-अलग सिस्टम के बीच तालमेल बेहतर किया जाए और रिजेक्ट मामलों की निगरानी के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम बनाया जाए। मिलिट्री अस्पतालों की इमारतें पुरानी, कई जगह जरूरी सुविधाएं नहीं डिफेंस मंत्रालय के तहत आने वाले मिलिट्री अस्पतालों में कई दिक्कतें मिलीं। कई अस्पतालों की इमारतें पुरानी हैं, लेकिन उनकी नियमित जांच नहीं हुई। एक मामले में जून 2022 में लैंसडाउन के एक मिलिट्री अस्पताल का हिस्सा गिर गया था। कई जगह HVAC (हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग) और फायरफाइटिंग सिस्टम भी पूरे नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल स्टोर्स डिपो (AFMSD) मिलिट्री अस्पतालों की जरूरत की दवाएं पूरी नहीं दे पाए। कॉमन ड्रग लिस्ट की दवाएं भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं थीं। दो डिपो में दवाओं को समय पर बदला नहीं गया, जिससे ₹13.52 करोड़ की दवाएं फंसी रहीं। बिना लाइसेंस X-ray मशीनें चल रही थी ऑडिट में पाया गया कि कई जगह बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का पालन नहीं हुआ। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) से जुड़े दस्तावेज भी नहीं रखे गए। कुछ अस्पतालों में बिना लाइसेंस के X-ray मशीनें चलाई जा रही थी। सात कमांड्स की समीक्षा में वेस्टर्न कमांड में सबसे ज्यादा नियमों का उल्लंघन मिला। रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय ने कुछ मामलों में सुधार के कदम उठाने शुरू किए हैं, लेकिन कई समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। ————

जामुन ज्यादा फायदेमंद है या बेल? पाचन और शुगर के लिए कौन सा फल है बेस्‍ट, जानें किसे जरूर खाना चाहिए

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Last Updated:March 31, 2026, 10:08 IST Jamun vs Bel Health Benefits: गर्मियों की चिलचिलाती धूप और लू से बचने के लिए सिजनल फ्रूट्स खाना अच्‍छा माना जाता है. इन्‍हीं मौसमी फलों में से एक है बेल और दूसरा है जामुन. इन दोनों फलों को ही आयुर्वेद में मेडिसीन की तरह भी इस्‍तेमाल किया जाता है. तो सवाल उठता है कि दोनों ही फलों में बेहतर कौन है और किन लोगों के लिए ये अधिक फायदेमंद साबित होता है. चलिए जानते हैं यहां. आयुर्वेदिक ग्रंथों (Charaka Samhita & Sushruta Samhita) की मानें तो आयुर्वेद में बेल (Bilva) को ‘संग्राही’ और ‘दीपन’ माना गया है, जिसका अर्थ है पाचन अग्नि को बढ़ाना और पेट के विकारों को दूर करना. वहीं जामुन को ‘प्रमेह’ (डायबिटीज) की चिकित्सा में मुख्य औषधि बताया गया है. वहीं, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के शोध के अनुसार जामुन में ‘एंथोसायनिन’ और ‘जम्बोलिन’ नामक ग्लाइकोसाइड होते हैं, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सीधे तौर पर मददगार हैं. तो अगर अगर हम पाचन (Digestion) की बात करें, तो यहाँ बेल का कोई मुकाबला नहीं है. बेल को आयुर्वेद में पेट का ‘डॉक्टर’ कहा गया है. इसमें फाइबर और लैक्सेटिव गुण भरपूर मात्रा में होते हैं, जो पुरानी से पुरानी कब्ज, गैस और एसिडिटी की समस्या को जड़ से खत्म करने की ताकत रखते हैं. बेल का शरबत गर्मियों में पेट की अंदरूनी गर्मी को शांत करता है और आंतों की सफाई करने में रामबाण माना जाता है. जिन लोगों का पेट अक्सर खराब रहता है, उनके लिए बेल किसी वरदान से कम नहीं है. वहीं दूसरी ओर, जब बात शुगर (Diabetes) कंट्रोल करने की आती है, तो जामुन ‘सुपरफूड’ के रूप में उभरता है. जामुन की गुठली से लेकर उसके गूदे तक में ‘जम्बोलिन’ और ‘जम्बोसिन’ नामक तत्व पाए जाते हैं, जो खून में शुगर के लेवल को बढ़ने नहीं देते. यह स्टार्च को एनर्जी में बदलने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है, जिससे शुगर के मरीजों को अचानक होने वाले ‘शुगर स्पाइक’ से राहत मिलती है. डायबिटीज के मरीजों के लिए जामुन एक प्राकृतिक दवा की तरह काम करता है. Add News18 as Preferred Source on Google जामुन का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह हीमोग्लोबिन और स्किन के लिए कमाल का है. इसमें विटामिन-C और आयरन प्रचुर मात्रा में होता है, जो खून साफ करने और चेहरे पर चमक लाने में मदद करता है. इसके एस्ट्रिंजेंट (Astringent) गुणों के कारण यह मुहासों को रोकने में भी सहायक है. अगर आप गर्मियों में एक फ्रेश और ग्लोइंग स्किन चाहते हैं, साथ ही अपना ब्लड काउंट बढ़ाना चाहते हैं, तो जामुन को अपनी डाइट का हिस्सा जरूर बनाएं. बेल के फायदों की बात करें तो यह केवल पेट तक सीमित नहीं है. यह लू और डिहाइड्रेशन से बचने का सबसे बेहतरीन नेचुरल तरीका है. बेल में मौजूद विटामिन-C और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की इम्युनिटी बढ़ाते हैं और गर्मी के कारण होने वाली थकान को मिनटों में दूर कर देते हैं. बेल का शरबत पीने से शरीर को तुरंत एनर्जी मिलती है, जो बाजार में मिलने वाले किसी भी आर्टिफिशियल एनर्जी ड्रिंक से कई गुना बेहतर और सुरक्षित है. अब सवाल यह है कि किसे क्या खाना चाहिए? अगर आप डायबिटीज या प्री-डायबिटीज की स्थिति में हैं, तो जामुन आपके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है. जामुन उन लोगों के लिए भी बेस्ट है जो दांतों और मसूड़ों की समस्याओं से जूझ रहे हैं. वहीं, अगर आप पाचन तंत्र की कमजोरी, अल्सर, या बार-बार होने वाली एसिडिटी से परेशान हैं, तो बेल आपके लिए अनिवार्य है. बेल का फल उन लोगों को भी जरूर लेना चाहिए जो धूप में ज्यादा काम करते हैं और डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाते हैं. लेकिन यहाँ सावधानी भी जरूरी है. बेल का सेवन उन लोगों को सीमित मात्रा में करना चाहिए जिन्हें अक्सर लूज मोशन की शिकायत रहती है, क्योंकि इसके लैक्सेटिव गुण समस्या बढ़ा सकते हैं. वहीं जामुन को कभी भी खाली पेट नहीं खाना चाहिए और न ही इसे खाने के तुरंत बाद दूध पीना चाहिए. सही तरीके से और सही समय पर खाया गया फल ही शरीर को पूरा पोषण देता है, वरना यह फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है. कहा जा सकता है कि जामुन और बेल दोनों ही अपनी जगह ‘किंग’ हैं. यह आपकी शारीरिक जरूरत पर निर्भर करता है कि आपको क्या चुनना है. अगर शुगर कंट्रोल प्राथमिकता है तो जामुन उठाइए, और अगर पेट को राहत देनी है तो बेल का शरबत पीजिए. बेहतर होगा कि आप इस सीजन में दोनों ही फलों का बारी-बारी से आनंद लें और अपनी सेहत को कुदरती तरीके से फिट रखें. (यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य सिद्धांतों पर आधारित है. किसी भी गंभीर बीमारी जैसे क्रोनिक डायबिटीज या किडनी की समस्या की स्थिति में फल को डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.) First Published : March 31, 2026, 10:07 IST

पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए बीजेपी ने जारी की 13 सीटों की चौथी लिस्ट, इस सीट से है परिवर्तनशील विधानसभा

पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए बीजेपी ने जारी की 13 सीटों की चौथी लिस्ट, इस सीट से है परिवर्तनशील विधानसभा

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने दलितों की चौथी सूची जारी की है, जिसमें 13 आदिवासियों के नाम शामिल हैं. (31 मार्च, 2026) मंगलवार को जारी की गई सूची में शामिल की गई कास्ट के लिए रेलवे बागदा सीट से पार्टी ने सोमा ठाकुर को इंटीरियरवार बनाया है तो वहीं दूसरी ओर नाटा बाबा से गिरजा शंकर रॉय को पार्टिकलवार घोषित किया गया है। इसके साथ ही पार्टी ने दूसरी सूची में घोषित एक पार्टिवार को भी बदला है। बीजेपी ने मयनागुड़ी के पूर्व में घोषित खिलाड़ी को बदल दिया है। पार्टी की नई सूची के अनुसार सीट से आशुतोष वर्मा नाता बबी से गिरिजा शंकर रॉय, बागदा से सोमा ठाकुर और मगराहाट पूर्व से उत्तम कुमारिक को अपना अयोग्य घोषित किया गया है। फाल्टा से देबांगशु पांडा को टिकटबीजेपी की इस चौथी लिस्ट में फाल्टा से देबांगशु पांडा को टिकट दिया गया है तो वहीं सोनारपुर उत्तर से देबाशीष पाठक और भालू दक्षिण से श्यामल हाटी को फाइनैंस बनाया गया है। इसके अलावा पंचला सीट से रंजन कुमार पॉल, चांदीपुर से पीयूष कांति दास, गार्बेटा से प्रदीप लोढ़ा, मेमरी सीट से मानव गुला और बाराबनी सीट से अरिजीत रॉय बीजेपी के उम्मीदवार बने हैं। भाजपा ने आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए 13 उम्मीदवारों की चौथी सूची जारी की, मयनागुड़ी निर्वाचन क्षेत्र में उम्मीदवार की जगह भी ली। pic.twitter.com/m36vrRsTQA – एएनआई (@ANI) 31 मार्च 2026 5 अप्रैल को बंगाल में पीएम मोदी की पहली रैलीइस बार बंगाल चुनाव में बीजेपी और शेयर बाजार के बीच टक्कर है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सत्ता से हटाने के लिए भाजपा पूरी कोशिश कर रही है। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पूरे देश में बीजेपी के बड़े नेता बंगाल का दौरा कर रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अप्रैल को बंगाल के कूज बिहार में रैली को बताएंगे। बता दें कि बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर मोदी की ये पहली रैली होगी। बंगाल में विलय करने को लेकर बीजेपी की योजना है कि पहले 2 नामांकन चरण के लिए नामांकन किया जाए जिसके बाद 9 अप्रैल से पूरे राज्य में चुनाव प्रचार किया जाए और तेज किया जाए। बीजेपी के लिए बिहार का विशेष महत्व है क्योंकि 2021 में बीजेपी ने वहां 9 से 8 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी. ये भी पढ़ें ईरान के युद्ध के बीच रुपये को मारा ‘लकवा’, राहुल बोले- पीएम ने देश के भविष्य का अनुमान लगाया (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्रेकिंग न्यूज(टी)एबीपी न्यूज(टी)बीजेपी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)डब्ल्यूबी चुनाव 2026(टी)उम्मीदवार सूची(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)बीजेपी(टी)उम्मीदवार(टी)आवेदन(टी)विधानसभा चुनाव(टी)कांग्रेस(टी)टीएमसी

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: कैसे ‘स्ट्रीट फाइटर’ ममता बनर्जी ने अपनी ‘दीदी’ शक्ति का इस्तेमाल किया | चुनाव समाचार

BJP releases manifesto ahead of Assam Assembly elections 2026.

आखरी अपडेट:मार्च 31, 2026, 09:50 IST पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: जैसे-जैसे राज्य 2026 विधानसभा चुनावों के करीब पहुंच रहा है, बनर्जी को अपने राजनीतिक करियर की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में से एक का सामना करना पड़ रहा है। “दीदी” के नाम से मशहूर ममता बनर्जी ने मतदाताओं के साथ सीधा भावनात्मक संबंध बनाया है। (एएफपी) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: साधारण सफेद साड़ी और रबर की चप्पल पहने ममता बनर्जी ने लंबे समय से भारतीय राजनीति में एक बाहरी व्यक्ति की छवि बनाई है। दशकों से, वह बाहरी व्यक्ति सिस्टम के सबसे टिकाऊ शक्ति केंद्रों में से एक बन गया है, जिसने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य को नया आकार दिया है और एक प्रमुख विपक्षी आवाज के रूप में एक राष्ट्रीय भूमिका निभाई है। जैसा कि राजनीतिक विश्लेषक और इतिहासकार संजय कुमार अक्सर कहते हैं, उनका उदय “एक ऐसे नेता का एक दुर्लभ उदाहरण है जिसने संस्थागत समर्थन के बजाय लगभग पूरी तरह से सड़क पर लामबंदी से सत्ता बनाई”। स्ट्रीट पावर से पावर सेंटर तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में बनर्जी का प्रारंभिक राजनीतिक जीवन आंदोलन और दृश्यता से चिह्नित था। उन्होंने उस समय पश्चिम बंगाल में तत्कालीन प्रभुत्वशाली वाम मोर्चे का मुकाबला करने के लिए ख्याति अर्जित की, जब कुछ ही लोगों ने ऐसा करने का साहस किया था। यह भी पढ़ें | वह वोट देती है, वह निर्णय लेती है: कैसे महिलाएं चुपचाप बंगाल का चुनाव चला रही हैं 1998 में कांग्रेस छोड़ने और अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस बनाने का उनका निर्णय एक जुआ था जो न केवल बनर्जी के करियर के लिए बल्कि राज्य के लिए भी एक निर्णायक क्षण साबित होगा। सेंटर फ़ॉर द स्टडी ऑफ़ डेवलपिंग सोसाइटीज़ के विद्वानों सहित कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, बनर्जी की सफलता स्थानीय शिकायतों को एक निरंतर राजनीतिक आंदोलन में परिवर्तित करने में निहित है। भूमि अधिग्रहण के खिलाफ सिंगुर और नंदीग्राम विरोध प्रदर्शन उनके राजनीतिक करियर के निर्णायक क्षण बन गए। सीएसडीएस-आधारित विश्लेषक ने कहा, “ये सिर्फ विरोध प्रदर्शन नहीं थे, ये राजनीतिक मोड़ थे।” “ममता बनर्जी किसानों के गुस्से को शासन बदलने वाली ताकत में बदलने में कामयाब रहीं।” 2011 में, उन्होंने वाम मोर्चे के 34 वर्षों के शासन को समाप्त कर दिया – एक ऐसा परिणाम जिसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था। ‘दीदी’ होना बनर्जी का व्यक्तित्व उनकी राजनीति के केंद्र में है। “दीदी” के नाम से मशहूर उन्होंने मतदाताओं के साथ सीधा भावनात्मक संबंध बनाया है। उनकी व्यक्तिगत मितव्ययिता की छवि आकस्मिक नहीं, राजनीतिक है। जैसा कि राजनीतिक टिप्पणीकार परंजॉय गुहा ठाकुरता ने कहा है, “उनकी सादगी उनका सबसे मजबूत राजनीतिक संदेश है। यह अभिजात्य राजनीति और मजबूत पार्टी संरचनाओं दोनों के साथ एक विरोधाभास पैदा करती है।” साथ ही, आलोचकों का तर्क है कि उनकी शासन शैली अत्यधिक केंद्रीकृत है, जिसमें शक्ति उनके कार्यालय के आसपास केंद्रित है। कल्याण, पहचान और नियंत्रण बनर्जी का शासन मॉडल राजनीतिक संदेश के साथ कल्याण विस्तार को जोड़ता है। महिलाओं, अल्पसंख्यकों और ग्रामीण गरीबों को लक्षित करने वाली कल्याणकारी योजनाएं बनर्जी की राजनीतिक रणनीति के प्रमुख तत्व रहे हैं। सीएसडीएस जैसे थिंक टैंक द्वारा उद्धृत डेटा और फील्ड रिसर्च से संकेत मिलता है कि इन योजनाओं ने बनर्जी को मतदाताओं के बीच वफादारी हासिल करने में मदद की है। राजनीतिक वैज्ञानिक मिलन वैष्णव ने कहा, “उन्होंने वह बनाया है जिसे आप ‘कल्याण-समर्थित राजनीतिक गठबंधन’ कह सकते हैं।” “यह सिर्फ पहचान की राजनीति नहीं है; यह वितरण प्लस पहचान है।” राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाएँ हाल के दिनों में बनर्जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख आलोचकों में से एक बनकर उभरी हैं और उन्होंने खुद को विपक्षी राजनीति की धुरी के रूप में स्थापित किया है। भाजपा के खिलाफ गठबंधन बनाने के उनके प्रयास पूरी तरह से सफल नहीं रहे हैं, लेकिन उनकी दृढ़ता ने यह सुनिश्चित किया है कि वह भारत के राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बनी रहें। राजनीतिक विश्लेषक सुहास पल्शिकर ने कहा, “ममता बनर्जी केंद्रीय प्रभुत्व के लिए क्षेत्रीय प्रतिरोध के एक मॉडल का प्रतिनिधित्व करती हैं।” “लेकिन उस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाना कहीं अधिक जटिल है।” पश्चिम बंगाल से परे उनकी पार्टी के विस्तार प्रयासों के अब तक सीमित परिणाम मिले हैं, जो क्षेत्रीय प्रभुत्व को राष्ट्रीय प्रभाव में बदलने की चुनौती को रेखांकित करता है। इस मॉडल ने उन्हें 2021 के पश्चिम बंगाल चुनावों में भारतीय जनता पार्टी द्वारा पेश की गई तीव्र चुनौती का सामना करने में मदद की, जहां उन्होंने हाई-वोल्टेज अभियान के बावजूद निर्णायक जीत हासिल की। विवाद और आलोचना बनर्जी के कार्यकाल को लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। उनकी सरकार को बड़े भ्रष्टाचार के मामलों में जांच का सामना करना पड़ा है, विशेष रूप से स्कूल भर्ती घोटाला, जिसके कारण पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की गिरफ्तारी हुई। कानून और व्यवस्था भी आलोचना का एक आवर्ती क्षेत्र रहा है। बीरभूम हिंसा, जहां स्थानीय राजनीतिक झड़प के बाद कई लोग मारे गए थे, 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद चुनाव के बाद की हिंसा और आरजी कर मामले जैसी घटनाओं को विरोधियों द्वारा राजनीतिक असहिष्णुता और कमजोर प्रशासनिक नियंत्रण के सबूत के रूप में उद्धृत किया गया है। बनर्जी पर असहमति को रोकने के आरोप भी लगे हैं। नागरिक समाज और विपक्षी दलों के वर्गों सहित आलोचकों ने ऐसे मामलों की ओर इशारा किया है जहां विरोध प्रदर्शन प्रतिबंधित थे या जहां राजनीतिक विरोधियों ने डराने-धमकाने का आरोप लगाया था। विश्लेषकों का कहना है कि उनकी राजनीतिक शैली प्रभावी होने के साथ-साथ ध्रुवीकरण भी कर सकती है। कोलकाता स्थित एक राजनीतिक पर्यवेक्षक ने कहा, ”वह टकराव में पनपती है।” “लेकिन वही दृष्टिकोण आम सहमति बनाना कठिन बना सकता है।” फिर भी, संकटों से निपटने की उनकी क्षमता उल्लेखनीय बनी हुई है। बार-बार, बनर्जी राजनीतिक क्षति को रोकने और अपने मूल समर्थन आधार को बनाए रखने में कामयाब रही हैं। आगे का रास्ता जैसे-जैसे पश्चिम बंगाल 2026 के विधानसभा चुनावों के करीब आ रहा है, बनर्जी को अपने राजनीतिक करियर की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में से एक का सामना करना पड़ रहा है। एक दशक से अधिक समय तक राज्य में अपना दबदबा बनाए रखने के बाद, अब उनका मुकाबला न केवल सत्ता विरोधी लहर से है, बल्कि 2021 की हार

सुकन्या में 8.2% और PPF पर 7.1% ब्याज मिलता रहेगा:स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरों में बदलाव नहीं, लगातार 9वीं तिमाही ब्याज दर स्थिर

सुकन्या में 8.2% और PPF पर 7.1% ब्याज मिलता रहेगा:स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरों में बदलाव नहीं, लगातार 9वीं तिमाही ब्याज दर स्थिर

सरकार ने अप्रैल-जून (Q1FY27) तिमाही के लिए स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स जैसे- पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), पोस्ट ऑफिस FD, सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) और नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) के ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। यह लगातार 9वीं तिमाही है, जब ब्याज दरें अपरिवर्तित रहेंगी। सरकार ने आखिरी बार दिसंबर 2023 में इंटरेस्ट रेट्स में बढ़ोतरी की थी। पब्लिक प्रोविडेंट फंड पर 7.1% ब्याज दर पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) पर 7.1% और सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.2% ब्याज मिलता रहेगा। स्मॉल सेविंग्स स्कीमों पर ब्याज दरें 4% से 8.2% के बीच हैं। सरकार छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों पर फैसला लेने से पहले देश में कैश और महंगाई की स्थिति पर भी नजर रखती है। इनकी समीक्षा हर तीन महीने पर होती है। ब्याज दरों का हर तिमाही में रिव्यू होता है स्मॉल सेविंग्स स्कीम की ब्याज दरों का हर तिमाही में रिव्यू होता है। इनकी ब्याज दरें तय करने का फॉर्मूला श्यामला गोपीनाथ समिति ने दिया था। समिति ने सुझाव दिया था कि इन स्कीम की ब्याज दरें समान मैच्योरिटी वाले सरकारी बॉन्ड के यील्ड से 0.25-1.00% ज्यादा होनी चाहिए। हाउसहोल्ड सेविंग का मेजर सोर्स हैं ये स्कीम स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स भारत में हाउसहोल्ड सेविंग का मेजर सोर्स हैं। इन स्कीम्स में डिपॉजिटर्स को उनके पैसे पर तय ब्याज मिलता है। सभी स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स से हुए कलेक्शन को नेशनल स्मॉल सेविंग्स फंड (NSSF) में जमा किया जाता है। क्लासिफिकेशन स्मॉल सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट को तीन भागों में बांटा जा सकता है:

Dhurandhar’s Major iqbal aka arjun rampal gets emotional with film’s success, said dreams comes true, calls ranveer singh babbar sher

Dhurandhar's Major iqbal aka arjun rampal gets emotional with film's success, said dreams comes true, calls ranveer singh babbar sher

Hindi News Entertainment Bollywood Dhurandhar’s Major Iqbal Aka Arjun Rampal Gets Emotional With Film’s Success, Said Dreams Comes True, Calls Ranveer Singh Babbar Sher 1 घंटे पहले कॉपी लिंक रणवीर सिंह स्टारर धुरंधर-2 ने 11 दिनों में कई रिकॉर्ड बनाए हैं। फिल्म 1365 करोड़ कलेक्शन के साथ बॉलीवुड की तीसरी हाईएस्ट ग्रॉसिंग और इंडियन सिनेमा की पांचवीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है। फिल्म की सफलता से मेजर इकबाल का किरदार निभाने वाले अर्जुन रामपाल भावुक हो गए और उन्होंने टीम का धन्यवाद किया। अर्जुन रामपाल ने पहली फिल्म मोक्ष से अब तक की तस्वीरें शेयर कर सोशल मीडिया पर लिखा है, ‘बचपन में काउबॉय बनने से लेकर धुरंधर तक मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि इस सफर में इतने लोग साथ रहे। मेरे प्यारे फैंस, साथ देने के लिए दिल से धन्यवाद।’ आगे उन्होंने लिखा, ‘धुरंधर की इस शानदार टीम का शुक्रिया, आप सब मेरे मजबूत सहारा रहे। और मेरा “बब्बर शेर” रणवीर सिंह, तुम्हारा खास धन्यवाद। लोकेंद्र धर, ज्योति देशपांडे, श्वेता, कास्टिंग टीम, आर. माधवन, राकेश बेदी, संजय दत्त, प्रीति शील, स्मृति, आप सभी का आभार। यह लिस्ट और लंबी होगी। मैं बहुत खुश हूं। धैर्य, मेहनत और जुनून के साथ बने रहें, तो सपने सच होते हैं।’ अपनी पोस्ट में अर्जुन रामपाल ने धुरंधर की बिहाइंड द सीन तस्वीरें भी शेयर कीं। फिल्म 19 मार्च को रिलीज हुई और 11 दिनों में 1365 करोड़ कमा चुकी है, जिससे यह बॉलीवुड की तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है। हालांकि आमिर की दंगल और धुरंधर पार्ट-1 अब भी आगे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

सतना में नाबालिग को आत्महत्या के लिए उकसाया:महिला समेत तीन आरोपी गिरफ्तार, कोर्ट ने जेल भेजा

सतना में नाबालिग को आत्महत्या के लिए उकसाया:महिला समेत तीन आरोपी गिरफ्तार, कोर्ट ने जेल भेजा

सतना में एक नाबालिग को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में पुलिस ने एक महिला सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कोलगवां थाना पुलिस ने यह कार्रवाई की। थाना प्रभारी सुदीप सोनी ने बताया कि बीते 11 फरवरी को एक 17 वर्षीय नाबालिग ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसके पिता की सूचना पर मर्ग कायम कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी पिंटू डोहर उर्फ पुरुषोत्तम (25 वर्ष) और लल्ली वर्मा (21 वर्ष) काफी समय से नाबालिग को परेशान कर रहे थे। वहीं, मोहल्ले में रहने वाली लक्षमिनिया चौधरी (43 वर्ष) उसके बारे में आपत्तिजनक बातें कहकर उसे बदनाम कर रही थी। पुलिस ने तीन पर केस दर्ज किया इन तथ्यों के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 107 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया। सोमवार सुबह तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।