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हिमाचल विधानसभा में गूंजेगा एपल इम्पोर्ट ड्यूटी का मामला:3 लाख परिवारों की रोजी पर संकट, केंद्र ने अमेरिका-न्यूजीलैंड-EU के लिए शुल्क घटाया

हिमाचल विधानसभा में गूंजेगा एपल इम्पोर्ट ड्यूटी का मामला:3 लाख परिवारों की रोजी पर संकट, केंद्र ने अमेरिका-न्यूजीलैंड-EU के लिए शुल्क घटाया

हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली सेब इंडस्ट्री पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने से मंडरा रहे संकट का मुद्दा आज विधानसभा में उठेगा। ठियोग से विधायक कुलदीप सिंह राठौर सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी में की गई कटौती का मामला सदन में उठाने जा रहे हैं। यह मामला प्रदेश की 5500 करोड़ रुपए की सेब आर्थिकी और लगभग 3 लाख बागवान परिवारों की आजीविका से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। दरअसल, केंद्र सरकार ने अमेरिका और न्यूजीलैंड के सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत और यूरोपीय यूनियन (EU) के लिए 20 प्रतिशत कर दी है। इम्पोर्ट ड्यूटी कम होने से अब विदेशी सेब सस्ते दामों पर भारतीय बाजार में उपलब्ध होगा। इससे हिमाचल के साथ साथ जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड के सेब उद्योग पर भी संकट खड़ा हो गया है। हिमाचल का प्रीमियम सेब बुरी तरह होगा प्रभावित कुलदीप राठौर ने बताया कि वाशिंगटन एपल के भारतीय बाजार में आने से हिमाचल का प्रीमियम सेब बुरी तरह प्रभावित होगा। इससे न केवल प्रीमियम सेब के दाम गिरेंगे, बल्कि कोल्ड स्टोर में रखे सेब पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। अभी अमेरिका-न्यूजीलैंड और EU के लिए इम्पोर्ट ड्यूटी घटाई गई गई है। अब इनकी आड़ में दूसरे देश भी इम्पोर्ट ड्यूटी कम करने का दबाव डालेंगे। मोदी ने किया था इम्पोर्ट ड्यूटी 100% का वादा राठौर ने बताया कि प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 100 फीसदी करने का भरोसा दिया था। हकीकत में इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के बजाय कम की जा रही है। इससे सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि सदन में यह मामला उठाकर केंद्र सरकार से इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने के फैसले का विरोध जताएंगे और यह फैसला वापस लेने की मांग की जाएगी। हिमाचल के बागवान सचिवालय का घेराव कर चुके बता दें कि हिमाचल के बागवान इस फैसले के खिलाफ दो महीने पहले सचिवालय के बाहर प्रदर्शन कर चुके हैं। बागवानों का आरोप है कि केंद्र सरकार आयात शुल्क बढ़ाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग देशों के लिए इसे कम कर रही है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है। इस वजह से बागवान ज्यादा चिंतित बागवानों की चिंता की एक बड़ी वजह उत्पादन लागत और उत्पादकता में अंतर भी है। हिमाचल में प्रति हेक्टेयर 7 से 8 मीट्रिक टन सेब उत्पादन होता है, जबकि अमेरिका, न्यूजीलैंड और चीन जैसे देशों में यह 60 से 70 मीट्रिक टन तक पहुंच जाता है। वहीं, हिमाचल में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण प्रति किलो सेब उत्पादन की लागत करीब 27 रुपए आती है। ऐसे में बागवानों को लाभ तभी मिल पाता है, जब उनका सेब कम से कम 50 से 100 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिके। अन्य देश भी भारत पर आयात शुल्क कम करने का बनाएंगे दबाव विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका, न्यूजीलैंड और EU को दी गई रियायतों के बाद अब अन्य देश भी भारत पर आयात शुल्क कम करने का दबाव बना सकते हैं। इससे भारतीय बाजार में विदेशी सेब की हिस्सेदारी बढ़ेगी और स्थानीय उत्पादकों के लिए प्रतिस्पर्धा और कठिन हो जाएगी।

लखनऊ में एअर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग:36 हजार फीट ऊंचाई पर पायलट को धुआं महसूस हुआ; पैसेंजरों ने मास्क लगाए

लखनऊ में एअर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग:36 हजार फीट ऊंचाई पर पायलट को धुआं महसूस हुआ; पैसेंजरों ने मास्क लगाए

लखनऊ में एअर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। सोमवार शाम फ्लाइट पश्चिम बंगाल के बागडोगरा से दिल्ली जा रही थी। सूत्रों के मुताबिक, फ्लाइट यूपी के अंबेडकरनगर के ऊपर थी, तभी पायलट के केबिन में धुआं महसूस हुआ। उस समय विमान 36 हजार फीट की ऊंचाई पर था। पायलट ने धुआं महसूस होते ही लखनऊ एयर ट्रैफिक कंट्रोल को मेडे कॉल किया। मेडे कॉल के बाद यात्रियों को ऑक्सीजन मास्क उपलब्ध करा दिए गए। लखनऊ में इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति लेकर विमान को शाम 5:17 बजे सुरक्षित लैंड कराया। तब से फ्लाइट लखनऊ के टर्मिनल-3 पर खड़ी है। फ्लाइट में 148 यात्री और क्रू मेंबर सवार थे। सभी सुरक्षित हैं। कई यात्रियों को दूसरी फ्लाइट्स से दिल्ली भेज दिया गया, जबकि कुछ को होटल में ठहराया गया है। सिक्योरिटी और टेक्निकल टीमें फ्लाइट में जांच कर रही हैं। शुरुआती जांच में धुएं या आग का कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। ‘मेडे कॉल’ के साथ ही ऑक्सीजन मास्क खुल गए सूत्रों के अनुसार, पायलटों को केबिन के एवियोनिक पैनलों (कॉकपिट के इलेक्ट्रिक पैनल) से धुआं निकलने की आशंका हुई। पायलट ने ‘मेडे कॉल’ किया। इसके साथ ही फ्लाइट में लगे ऑक्सीजन मास्क अपने आप खुल गए। केबिन क्रू ने यात्रियों को मास्क इस्तेमाल करने का तरीका बताया, जिसके बाद यात्रियों ने मास्क लगा लिए। यात्री कर रहे कंपनी से शिकायत फ्लाइट में सवार कई यात्री सोशल मीडिया पर कंपनी से शिकायत कर रहे हैं। हेमरॉन माइकल नाम के एक यात्री ने लिखा- मैं बागडोगरा से दिल्ली जा रही फ्लाइट IX-1523 में यात्रा कर रहा था। तकनीकी समस्या के कारण विमान को लखनऊ में उतार दिया गया। पिछले ढाई घंटे से कोई संशोधित टिकट नहीं दिया गया है। मुझे सुबह 6:30 बजे तक दिल्ली पहुंचना था, लेकिन अब 7:23 बज चुके हैं। अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।” मेडे कॉल क्या होता है, जानिए MAYDAY शब्द फ्रेंच शब्द ‘m’aider’ से लिया गया है। इसका मतलब है ‘help me’ यानी ‘मुझे बचाओ’। MAYDAY कॉल आमतौर पर रेडियो के माध्यम से ATC या आसपास के अन्य विमानों को भेजा जाता है। इस सिग्नल का उपयोग तत्काल सहायता प्राप्त करने के लिए किया जाता है, ताकि इमरजेंसी से निपटा जा सके और समय पर मदद मिल सके। अब भास्कर के सबसे बड़े सर्वे में हिस्सा लीजिए… यूपी में विधायकों के 4 साल पूरे हो चुके हैं। क्या आपके मौजूदा विधायक को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना चाहिए? भास्कर सर्वे में हिस्सा लेकर बताइए…

Israel Death Penalty Law | Palestinians Guilty of Attacks Face Execution; Ministers Celebrate

Israel Death Penalty Law | Palestinians Guilty of Attacks Face Execution; Ministers Celebrate

Hindi News International Israel Death Penalty Law | Palestinians Guilty Of Attacks Face Execution; Ministers Celebrate 17 मिनट पहले कॉपी लिंक इजराइल की संसद ने एक नया कानून पास किया है, जिसके तहत हमलों में दोषी ठहराए गए फिलिस्तीनियों को सीधे फांसी दे दी जाएगी। यह कानून प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की दक्षिणपंथी गठबंधन सरकार के वादे को पूरा करने के तौर पर देखा जा रहा है। कानून के मुताबिक, सैन्य अदालतों में दोषी पाए जाने पर फांसी डिफॉल्ट सजा होगी और 90 दिनों के भीतर सजा लागू की जाएगी। इसमें दया याचिका का अधिकार भी नहीं होगा, हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में उम्रकैद का विकल्प दिया गया है। आलोचकों का कहना है कि यह कानून मुख्य रूप से फिलिस्तीनियों पर लागू होगा और इसे भेदभावपूर्ण बताया जा रहा है। जर्मनी, फ्रांस, इटली और ब्रिटेन समेत कई देशों ने भी इसकी आलोचना की है। फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। इजराइल के मानवाधिकार संगठनों ने भी इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून कानूनी जांच के दायरे में आ सकता है। यह कानून पास होते ही नेतन्याहू के मंत्रियों ने संसद में ही शैंपेन की बोतल खोली और जश्न मनाने लगे। इजराइल ने 1954 में हत्या के मामलों में मौत की सजा खत्म कर दी थी और 1962 में नाजी अधिकारी एडोल्फ आइखमैन को फांसी दी गई थी, जो अब तक का एकमात्र मामला है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… चीन में हाईवे टनल में धमाका, 4 की मौत, 9 घायल, ज्वलनशील गैस से विस्फोट की आशंका चीन के चोंगकिंग म्युनिसिपैलिटी के वानझोउ जिले में निर्माणाधीन हाईवे टनल में सोमवार दोपहर जोरदार विस्फोट हुआ। हादसे में 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 9 लोग घायल हैं। शुरुआती रिपोर्ट में 12 लोगों के घायल होने और एक व्यक्ति के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। देर रात रेस्क्यू टीम ने लापता व्यक्ति का शव बरामद कर लिया। अस्पताल में भर्ती घायलों में से तीन ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर चार हो गई। यह हादसा हुबेई और सिचुआन प्रांतों को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे के टनल सेक्शन के पास हुआ। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि टनल के भीतर मौजूद ज्वलनशील गैस के कारण विस्फोट हुआ। हालांकि, प्रशासन ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है। घटना के बाद पूरे इलाके को सील कर दिया गया है। बचाव और जांच टीमें मौके पर तैनात हैं और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Israel Death Penalty Law | Palestinians Guilty of Attacks Face Execution; Ministers Celebrate

Israel Death Penalty Law | Palestinians Guilty of Attacks Face Execution; Ministers Celebrate

Hindi News International Israel Death Penalty Law | Palestinians Guilty Of Attacks Face Execution; Ministers Celebrate 2 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका के फ्लोरिडा में पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर राष्ट्रपति ट्रम्प के नाम पर रखने का फैसला लिया गया है। गवर्नर रॉन डेसैंटिस ने सोमवार को बिल साइन किया। मंजूरी मिलने पर यह बदलाव 1 जुलाई से लागू हो सकता है। फ्लोरिडा सरकार के फैसले के बाद अब इस नाम को लागू करने के लिए फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) को औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसके बाद फ्लाइट चार्ट, नेविगेशन सिस्टम और एयरपोर्ट साइनेज में बदलाव किया जाएगा। ट्रम्प के फैमिली बिजनेस ने फरवरी में ही इस नए नाम के लिए ट्रेडमार्क आवेदन किया था। इससे साफ है कि नाम बदलने की तैयारी पहले से चल रही थी। अमेरिकी सांसद ब्रायन मस्ट ने एयरपोर्ट का तीन अक्षरों वाला कोड PBI से बदलकर DJT करने का प्रस्ताव भी रखा है, जो ट्रम्प के नाम के शुरुआती अक्षर हैं। ट्रम्प के नाम पर बढ़ रहे हैं संस्थान एयरपोर्ट के अलावा भी ट्रम्प के नाम पर कई सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों के नाम रखे जा रहे हैं। इनमें शामिल हैं: नेवी के नए युद्धपोतों का प्रस्तावित नाम विदेशी निवेशकों के लिए वीजा प्रोग्राम सरकारी दवा वेबसाइट बच्चों के लिए सेविंग अकाउंट स्कीम जॉन एफ केनेडी सेंटर में नाम जोड़ना यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पीस बिल्डिंग इसके अलावा अमेरिकी करेंसी पर भी इस साल से ट्रम्प के सिग्नेचर आने की बात कही गई है। फ्लोरिडा में ही मियामी में ट्रम्प की प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी बनाने की योजना है। ट्रम्प ने इसका एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें एक विशाल कांच की इमारत, गोल्डन स्टैच्यू, प्राइवेट जेट और लग्जरी सुविधाएं दिखाई गईं। इस प्रोजेक्ट के लिए वेबसाइट भी लॉन्च की गई है, जहां कमिंग सून के साथ डोनेशन का विकल्प दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… इजराइल में फिलिस्तीनियों को हमलों में दोषी पाए जाने पर सीधे फांसी की सजा; मंत्रियों ने संसद में शैंपेन की बोतल खोल जश्न मनाया इजराइल की संसद ने एक नया कानून पास किया है, जिसके तहत हमलों में दोषी ठहराए गए फिलिस्तीनियों को सीधे फांसी दे दी जाएगी। यह कानून प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की दक्षिणपंथी गठबंधन सरकार के वादे को पूरा करने के तौर पर देखा जा रहा है। कानून के मुताबिक, सैन्य अदालतों में दोषी पाए जाने पर फांसी डिफॉल्ट सजा होगी और 90 दिनों के भीतर सजा लागू की जाएगी। इसमें दया याचिका का अधिकार भी नहीं होगा, हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में उम्रकैद का विकल्प दिया गया है। आलोचकों का कहना है कि यह कानून मुख्य रूप से फिलिस्तीनियों पर लागू होगा और इसे भेदभावपूर्ण बताया जा रहा है। जर्मनी, फ्रांस, इटली और ब्रिटेन समेत कई देशों ने भी इसकी आलोचना की है। फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। इजराइल के मानवाधिकार संगठनों ने भी इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून कानूनी जांच के दायरे में आ सकता है। यह कानून पास होते ही नेतन्याहू के मंत्रियों ने संसद में ही शैंपेन की बोतल खोली और जश्न मनाने लगे। इजराइल ने 1954 में हत्या के मामलों में मौत की सजा खत्म कर दी थी और 1962 में नाजी अधिकारी एडोल्फ आइखमैन को फांसी दी गई थी, जो अब तक का एकमात्र मामला है। चीन में हाईवे टनल में धमाका, 4 की मौत, 9 घायल, ज्वलनशील गैस से विस्फोट की आशंका चीन के चोंगकिंग म्युनिसिपैलिटी के वानझोउ जिले में निर्माणाधीन हाईवे टनल में सोमवार दोपहर जोरदार विस्फोट हुआ। हादसे में 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 9 लोग घायल हैं। शुरुआती रिपोर्ट में 12 लोगों के घायल होने और एक व्यक्ति के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। देर रात रेस्क्यू टीम ने लापता व्यक्ति का शव बरामद कर लिया। अस्पताल में भर्ती घायलों में से तीन ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर चार हो गई। यह हादसा हुबेई और सिचुआन प्रांतों को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे के टनल सेक्शन के पास हुआ। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि टनल के भीतर मौजूद ज्वलनशील गैस के कारण विस्फोट हुआ। हालांकि, प्रशासन ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है। घटना के बाद पूरे इलाके को सील कर दिया गया है। बचाव और जांच टीमें मौके पर तैनात हैं और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: तारीखें, सीटें और प्रत्येक पार्टी के लिए क्या दांव पर है | चुनाव समाचार

RBSE Rajasthan Board 12th Result 2026 today on rajeduboard.rajasthan.gov.in.

आखरी अपडेट:मार्च 31, 2026, 08:16 IST पश्चिम बंगाल 2026 चुनाव एक उच्च जोखिम वाली प्रतियोगिता है जो ममता बनर्जी के प्रभुत्व का परीक्षण करेगी और यह निर्धारित करेगी कि क्या भाजपा अंततः गति को सत्ता में बदल सकती है ‘फाइटर दीदी’ थीम पर आधारित टीएमसी अभियान, ममता बनर्जी को बंगाल की पहचान के रक्षक के रूप में प्रस्तुत करता है। (पीटीआई) पश्चिम बंगाल में 294 सदस्यीय नई विधानसभा का चुनाव करने के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होगा, जिसकी गिनती 4 मई, 2026 को होगी। लेकिन यह एक नियमित राज्य चुनाव से बहुत दूर है। यह एक उच्च जोखिम वाली प्रतियोगिता है जो बंगाल की राजनीतिक दिशा को फिर से परिभाषित कर सकती है, ममता बनर्जी के प्रभुत्व का परीक्षण कर सकती है, और यह निर्धारित कर सकती है कि क्या भाजपा अंततः गति को सत्ता में बदल सकती है। सरकार गठन के अलावा, 2026 के पश्चिम बंगाल चुनाव भारत की चुनावी प्रक्रियाओं के लिए एक तनाव परीक्षण भी हैं। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) – जिसमें लाखों विलोपन शामिल हैं – ने चुनाव आयोग पर ध्यान केंद्रित कर दिया है, जिससे यह चुनाव इस बात पर केंद्रित हो गया है कि कौन वोट देगा और कौन जीतेगा। पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: पूर्ण गाइड और कार्यक्रम कुल सीटें: 294 चरण 1 मतदान: 23 अप्रैल 2026 चरण 2 मतदान: 29 अप्रैल 2026 वोटों की गिनती: 4 मई 2026 दो चरण के मतदान से प्रचार की समय-सीमा संकुचित हो जाती है, जिससे पार्टियों को सभी क्षेत्रों में लक्षित, उच्च-तीव्रता वाली रणनीतियों को तैनात करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। बंगाल में क्या दांव पर है: पार्टी-दर-पार्टी विश्लेषण टीएमसी: ममता बनर्जी की सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा तृणमूल कांग्रेस के लिए, यह चुनाव सत्ता बरकरार रखने से कहीं अधिक है – यह एक कथा की रक्षा करने के बारे में है। ‘फाइटर दीदी’ थीम पर आधारित पार्टी का अभियान, ममता बनर्जी को बंगाल की पहचान के रक्षक के रूप में प्रस्तुत करता है। जैसा कि एक अभियान पंक्ति से पता चलता है, चुनावों को “बाहरी ताकतों” के खिलाफ लड़ाई के रूप में तैयार किया जा रहा है। टीएमसी की मुख्य पिच: कल्याण+शासन अभिलेख बंगाली गौरव और सांस्कृतिक पहचान मतदाताओं से ममता का व्यक्तिगत जुड़ाव यह क्यों मायने रखती है: एक जीत ने ममता की विरासत को मजबूत किया; प्रभुत्व में गिरावट असुरक्षा का संकेत देती है। बीजेपी: सत्ता के सबसे करीब पहुंच गई है भाजपा अब बंगाल में सीमांत खिलाड़ी नहीं है – यह प्रमुख चुनौती है। इसकी 2026 रणनीति का मिश्रण है: जाति और समुदाय का गणित धार्मिक लामबंदी (राम नवमी, राम राज्य कथा) बूथ स्तर पर लक्ष्यीकरण यह क्यों मायने रखती है: बंगाल में सरकार बनाने के लिए यह बीजेपी का अब तक का सबसे अच्छा मौका है। कांग्रेस: ​​एक उच्च जोखिम वाली एकल वापसी की बोली एक बड़े बदलाव में, कांग्रेस वाम दलों के साथ अपने गठबंधन को तोड़कर अकेले चुनाव लड़ रही है। प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा, ”कई सालों तक हम गठबंधन के जरिए लड़ते रहे… अब हमारे कार्यकर्ताओं को लगता है कि पार्टी को अपने बैनर तले अपना आधार मजबूत करना चाहिए।” पार्टी को उम्मीद है: मालदा, मुर्शिदाबाद, नादिया में पुनर्निर्माण द्विध्रुवीय मुकाबले में मतदाता की थकान को दूर करें युवा नेतृत्व को बढ़ावा दें वास्तविकता की जाँच: कमजोर संगठन और सीमित संसाधन बड़ी बाधा बने हुए हैं। मुख्य युद्धक्षेत्र: भवानीपुर सबसे ज्यादा क्यों मायने रखता है अगर एक सीट इस चुनाव का सार पकड़ती है, तो वह भबनीपुर है। यहां ममता बनर्जी बनाम सुवेंदु अधिकारी सिर्फ एक निर्वाचन क्षेत्र की लड़ाई नहीं है – यह कथाओं का एक प्रतीकात्मक टकराव है। यह भाजपा की जाति, धर्म और बूथ गणित की सोशल इंजीनियरिंग के खिलाफ टीएमसी की “बंगाल अपनी बेटी चाहता है” की भावनात्मक अपील है। कभी एक किला रहा भबनीपुर अब मतदाताओं के बदलते व्यवहार की अग्निपरीक्षा है। एसआईआर विवाद: चुनाव का एक्स-फैक्टर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने राजनीतिक बातचीत को नाटकीय रूप से बदल दिया है। राज्यभर में करीब 64 लाख नाम हटाए गए कई लाख मतदाता जांच के दायरे में कुछ सीटों पर हार का अंतर जीत के अंतर से अधिक है बीजेपी इसे अवैध अप्रवास से जुड़ा जरूरी सुधार बताती है. टीएमसी इसे लक्षित मताधिकार से वंचित करना कहती है। फिरहाद हकीम ने कहा, ”भाजपा अल्पसंख्यकों के मतदान के अधिकार को छीनना चाहती है।” यह क्यों मायने रखता है: यह चुनाव केवल वोटों के बारे में नहीं है – यह इस बारे में है कि मतदाता के रूप में कौन योग्य है। पहचान बनाम शासन: असली 2026 लड़ाई बंगाल का चुनाव पारंपरिक मुद्दों से आगे बढ़ चुका है। 2021 में, यह एनआरसी-सीएए बहस के बारे में था। अब यह इस बारे में है: मतदाता पहचान और वैधता धार्मिक और सांस्कृतिक लामबंदी स्थायी, जमीनी स्तर का ध्रुवीकरण विश्लेषक मोइदुल इस्लाम ने कहा, “असल में, नौकरशाही की कवायद ने राजनीतिक रंग ले लिया है।” 100 से अधिक सीटें हिंदू एकीकरण और अल्पसंख्यक पुनर्समूहन से प्रभावित हो सकती हैं। बंगाल बैटल 2026 में क्या देखना है पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 एक बहुस्तरीय प्रतियोगिता है: सत्ता की लड़ाई: टीएमसी बनाम बीजेपी अस्तित्व की लड़ाई: कांग्रेस पुनरुद्धार का प्रयास सिस्टम परीक्षण: मतदाता सूची और चुनाव प्रबंधन की विश्वसनीयता कथा युद्ध: पहचान बनाम शासन यह सिर्फ सरकार बनाने का मामला नहीं है. यह इस बारे में है कि आने वाले वर्षों में बंगाल की राजनीति और उसके मतदाताओं को कौन परिभाषित करता है। जगह : पश्चिम बंगाल, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 31, 2026, 08:16 IST समाचार चुनाव पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: तारीखें, सीटें और प्रत्येक पार्टी के लिए क्या दांव पर है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव कार्यक्रम(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव चरण 2026(टी)ममता बनर्जी टीएमसी बनाम बीजेपी(टी)भबानीपुर प्रमुख युद्धक्षेत्र सीट(टी)विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची पश्चिम बंगाल(टी)बंगाल में मतदाता पहचान और वैधता(टी)पश्चिम बंगाल में भाजपा कांग्रेस

यूरिक एसिड के मरीज क्या खाएं और क्या न खाएं? डाइटिशियन ने बताई फूड लिस्ट, तुरंत कर लें चेक

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Last Updated:March 31, 2026, 08:15 IST Tips To Control Uric Acid: यूरिक एसिड शरीर में प्यूरीन के टूटने से बनता है. इस वजह से हाई यूरिक एसिड के मरीजों को प्यूरीन वाले फूड्स अवॉइड करने की सलाह दी जाती है. डाइटिशियन कामिनी सिन्हा के अनुसार रेड मीट, सीफूड, बीयर और मीठी ड्रिंक्स यूरिक एसिड के स्तर को तेजी से बढ़ाती हैं, इसलिए इनका सेवन तुरंत बंद कर देना चाहिए. यूरिक एसिड के मरीजों को रेड मीट और सीफूड से दूरी बना लेनी चाहिए. Best Diet To Control Uric Acid: आजकल यूरिक एसिड की समस्या तेजी से बढ़ रही है. खराब लाइफस्टाइल और अनहेल्दी खानपान के कारण शरीर में यूरिक एसिड बढ़ रहा है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो जब हमारे शरीर में प्यूरीन नामक तत्व टूटता है, तो यूरिक एसिड बनता है. सामान्य स्थिति में किडनी इसे छानकर शरीर से बाहर निकाल देती है, लेकिन जब इसकी मात्रा बढ़ जाती है, तो यह जोड़ों में क्रिस्टल के रूप में जमा होने लगता है, जिससे जोड़ों में असहनीय दर्द, सूजन और गाउट जैसी बीमारियां पैदा हो जाती हैं. दवा के साथ सही डाइट लेने से यूरिक एसिड की समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है. यूरिक एसिड के मरीज क्या न खाएं? नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया कि यूरिक एसिड के मरीजों को सबसे पहले उन चीजों से दूरी बनानी चाहिए, जिनमें प्यूरीन की मात्रा अधिक होती है. इसमें रेड मीट, ऑर्गन मीट और सीफूड शामिल हैं. अगर आप चाहें, तो कुछ सप्ताह के लिए नॉन वेज से ही दूरी बना लें. इसके अलावा मीठी ड्रिंक्स जैसे सोडा, कोल्ड ड्रिंक्स और पैक्ड फ्रूट जूस यूरिक एसिड के स्तर को तेजी से बढ़ाते हैं. शराब और बीयर का सेवन पूरी तरह बंद कर देना चाहिए, क्योंकि यह यूरिक एसिड के उत्सर्जन को रोक देती है. जंक फूड और ट्रांस फैट वाले बेकरी प्रोडक्ट्स से भी परहेज करें. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. किन फूड्स का सेवन फायदेमंद? डाइटिशियन ने बताया कि यूरिक एसिड को कम करने के लिए फाइबर से भरपूर डाइट लेनी चाहिए. ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस और हरी सब्जियां बेहतरीन विकल्प हैं. हालांकि पालक और मशरूम से परहेज करना चाहिए. इसके अलावा विटामिन C से भरपूर फल जैसे संतरा, नींबू, कीवी और आंवला यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में मदद करते हैं. चेरी और जामुन जैसे एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल जोड़ों की सूजन कम करने में सहायक होते हैं. लो-फैट डेयरी उत्पाद जैसे स्किम्ड मिल्क और दही भी सुरक्षित और फायदेमंद माने जाते हैं. 8-10 गिलास पानी पीना भी जरूरी एक्सपर्ट की मानें तो यूरिक एसिड कंट्रोल करने में पानी अहम भूमिका निभाता है. यूरिक एसिड के मरीजों को दिन भर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए. पर्याप्त पानी पीने से किडनी बेहतर तरीके से यूरिक एसिड को डाइल्यूट कर पाती है और उसे पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकाल देती है. नारियल पानी और बिना चीनी वाला नींबू पानी भी शरीर को हाइड्रेटेड रखने और यूरिक एसिड के स्तर को सामान्य बनाए रखने में बहुत मदद करते हैं. इसके अलावा रोज कम से कम 30 मिनट का व्यायाम या पैदल चलना वजन को कंट्रोल करता है और यूरिक एसिड भी कम होता है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 31, 2026, 08:15 IST

जबलपुर के रादुविवि में हंगामे के बीच बजट पारित:कार्यप्रणाली पर असंतोष, 27 अप्रैल को होगी समीक्षा बैठक

जबलपुर के रादुविवि में हंगामे के बीच बजट पारित:कार्यप्रणाली पर असंतोष, 27 अप्रैल को होगी समीक्षा बैठक

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (रादुविवि) की सभा (कोर्ट) की बैठक सोमवार को आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बहस के बीच संपन्न हुई। इस दौरान विश्वविद्यालय का वार्षिक बजट पारित कर दिया गया, लेकिन प्रशासन की कार्यप्रणाली पर जनप्रतिनिधियों ने गंभीर असंतोष व्यक्त किया। सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों के जनप्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली, वित्तीय प्रबंधन और छात्र-सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए। बैठक में भाजपा विधायक अशोक रोहाणी और ओमप्रकाश धुर्वे, कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया और ओंकार सिंह मरकाम सहित जबलपुर के महापौर भी उपस्थित थे। सदस्यों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पिछले वित्तीय वर्ष में आवंटित बजट के समुचित उपयोग न होने पर सवाल उठाए। कुछ राशि के लैप्स होने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा, जिसे प्रशासनिक लापरवाही बताया गया। कार्यप्रणाली में सुधार न होने पर होगा विरोध जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रशासन अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध खुलकर विरोध किया जाएगा। उन्होंने विभिन्न विभागों से संबंधित पालन प्रतिवेदन और प्रगति रिपोर्ट 27 अप्रैल को होने वाली विशेष समीक्षा बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस बैठक में सभी लंबित मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। याचिकाओं पर चिंता व्यक्त की कर्मचारियों और अधिकारियों के पेंशन प्रकरणों में देरी, बाहरी भुगतान लंबित रहने और इसके कारण न्यायालय में बढ़ती याचिकाओं पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई। सदस्यों ने कहा कि इन मुद्दों से विश्वविद्यालय की साख को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। प्रशासन को इन प्रकरणों पर तत्काल कार्रवाई कर संतोषजनक समाधान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान नवनिर्वाचित कर्मचारी संघ अध्यक्ष संजय यादव भी बैठक में उपस्थित थे। उन्होंने कर्मचारियों की लंबित मांगों को प्रमुखता से उठाते हुए सदस्यों के समक्ष अपनी बात रखी।

200 की स्पीड में दौड़ाई रेंज रोवर, लड़की की मौत:अमेरिका में पुलिस से बचने के लिए भागा था पंजाबी ड्राइवर, ₹9.4 करोड़ जुर्माना

200 की स्पीड में दौड़ाई रेंज रोवर, लड़की की मौत:अमेरिका में पुलिस से बचने के लिए भागा था पंजाबी ड्राइवर, ₹9.4 करोड़ जुर्माना

अमेरिका के ओहियो सूबे में पुलिस से बचने के लिए पंजाबी मूल के तरसेम सिंह (33) ने रेंज रोवर को 200 की स्पीड में भगाते हुए जीप को टक्कर मार दी। जिसमें प्रेग्नेंट लड़की (17) की मौके पर मौत हो गई। वहीं पेट में पल रहे बच्चे की भी जान चली गई। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए तरसेम सिंह पर 1 मिलियन डॉलर (9.4 करोड़ रुपए) जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने अब अगली सुनवाई की तारीख 3 अप्रैल तय की है। कोर्ट के फैसले के बाद ओहियो पुलिस ने बताया कि हादसा 16 फरवरी 2026 की रात करीब 8 बजकर 15 मिनट पर हुआ था। उसी समय आरोपी को गिरप्तार कर लिया गया था। 23 मार्च 2026 को उसकी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेशी की गई। वहीं, लड़की की एक्सीडेंट में मौत के बाद लोकल लोगों में सोशल मीडिया पर इंडियन ड्राइवरों को लेकर बहस छिड़ गई है। एक्सीडेंट में मारी गई लड़की और आरोपी के संबंधों को लेकर भी पुलिस जांच कर रही है। पुलिस से बचने के लिए भगाई रेंज रोवर डार्क काउंटी शेरिफ डिपार्टमेंट के अनुसार डिप्टी ने स्टेट रूट 47 (SR-47) पर रेंज रोवर वेलार को निर्धारित 55 माइल प्रति घंटा की स्पीड लिमिट के बजाय 79 माइल प्रति घंटा की रफ्तार से जाते देखा। जब पुलिस ने इमरजेंसी लाइट्स और सायरन के जरिए गाड़ी रोकने का इशारा किया, तो ड्राइवर तरसेम सिंह ने रुकने के बजाय गाड़ी की स्पीड बढ़ा दी। पुलिस और आरोपी के बीच लगभग 5 मील (8 किमी) तक पीछा चला, जिसमें रेंज रोवर की स्पीड 124 माइल प्रति घंटा (लगभग 200 किमी/घंटा) तक पहुंच गई। अनियंत्रित रफ्तार के कारण तरसेम ने मोड़ पर नियंत्रण खो दिया और सामने से आ रही एक जीप में सीधी टक्कर हो गई। जीप में सवार किशोरी उछलकर सड़क पर गिरी टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि रेंज रोवर कई बार पलटी। इस दौरान जीप में सवार 17 वर्षीय ऐशली होम्स उछलकर बाहर गिर गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। ऐशली गर्भवती थी और इस हादसे में उनके अजन्मे बच्चे की भी जान चली गई। जीप ड्राइवर रोक्साना कैसारेज सेंटियागो को मामूली चोटें आईं, जबकि आरोपी तरसेम सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिल बोली-आरोपी पर कसेगा कानून का शिकंजा ओहियो स्टेट हाईवे पेट्रोलिंग पुलिस की जांच और क्रूजर कैमरा वीडियो के आधार पर तरसेम सिंह के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। 23 मार्च 2026 को डार्क काउंटी ग्रैंड ज्यूरी ने सिंह पर 8 गंभीर चार्ज लगाए, जिनमें गैर इरादतन हत्या, लापरवाही से हत्या और एग्रवेटेड व्हीकुलर होमिसाइड शामिल हैं। अमेरिका में अवैध तरीके से रह रहा था तरसेम जांच में सामने आया कि तरसेम सिंह अनडॉक्यूमेंटेड इंडियन नेशनल (अवैध) है। इसके चलते इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट ने उस पर डिटेनर लगा दिया है। 24 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई पेशी में सिंह ने खुद को बेकसूर बताया।

वह वोट देती है, वह निर्णय लेती है: कैसे महिलाएं चुपचाप बंगाल का चुनाव चला रही हैं | चुनाव समाचार

Rajasthan Royals' Vaibhav Sooryavanshi plays a shot during the Indian Premier League cricket match between Chennai Super Kings and Rajasthan Royals in Guwahati, India, Monday, March 30, 2026. (AP Photo/Anupam Nath)

आखरी अपडेट:मार्च 31, 2026, 07:45 IST पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: भारत भर के राज्यों की नजर है। जो कोई भी बंगाल में महिलाओं के वोट में सेंध लगाता है वह देश के बाकी हिस्सों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। 2024 में बंगाल की 53% महिलाओं ने टीएमसी का समर्थन किया – 2019 की तुलना में 11% अधिक। अधिकांश भारतीय राज्यों में, राजनीतिक बातचीत में पुरुषों का वर्चस्व है। बंगाल अलग है. यहां, महिला मतदाता यकीनन सबसे निर्णायक शक्ति हैं – और हर पार्टी यह जानती है। संख्याएँ कहानी बताती हैं। बंगाल के सात करोड़ योग्य मतदाताओं में से 3.44 करोड़ से अधिक महिलाएँ हैं – लगभग आधे मतदाता। और वे सिर्फ पंजीकरण नहीं करते; वे वास्तव में वोट देने के लिए आते हैं, अक्सर पुरुषों की तुलना में अधिक संख्या में। ममता का मास्टरस्ट्रोक: लक्ष्मीर भंडार. इसे बंगाल की सबसे शक्तिशाली राजनीतिक योजना के रूप में सोचें। सरकार हर महीने महिलाओं के बैंक खातों में सीधे नकदी स्थानांतरित करती है – कोई बिचौलिया नहीं, कोई परेशानी नहीं। यह योजना वर्तमान में लगभग 2.5 करोड़ महिलाओं को कवर करती है। सीमित आय वाली एक ग्रामीण महिला के लिए, यह मासिक पैसा जीवन बदलने वाला है – और जब वह वोट देती है तो उसे याद आता है कि यह पैसा उसे किसने दिया था। 2026 के लिए, टीएमसी ने सामान्य श्रेणी की महिलाओं के लिए इसे बढ़ाकर 1,500 रुपये प्रति माह और एससी/एसटी महिलाओं के लिए 1,700 रुपये करने का वादा किया है। यह प्रति वर्ष 20,400 रुपये तक है – सीधे उसके हाथ में। इसने जो वफादारी बनाई है वह चौंका देने वाली है. सीएसडीएस-लोकनीति के आंकड़ों के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनावों में 53 प्रतिशत महिलाओं ने टीएमसी को वोट दिया – 2019 की तुलना में 11% अधिक। वर्षों से जारी इस तरह का रुझान ही ममता को सत्ता में बनाए रखता है। बीजेपी इसे तोड़ने की कोशिश कर रही है. भाजपा ने सत्ता में आने पर लक्ष्मीर भंडार भत्ता बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह करने का वादा करके जवाबी कार्रवाई की है – यह दर्शाता है कि महिला मतदाताओं को जीतना वास्तव में बंगाल जीतने का एकमात्र तरीका है। यह राष्ट्रीय स्तर पर क्यों मायने रखता है? ऐसा इसलिए है क्योंकि बंगाल एक टेम्पलेट साबित हो रहा है: महिलाओं को सीधे नकद हस्तांतरण = वफादार वोट। भारत भर के राज्य देख रहे हैं। जो कोई भी बंगाल में महिलाओं के वोट में सेंध लगाता है वह देश के बाकी हिस्सों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। जैसा कि एक विश्लेषक का कहना है, अगर महिला गुट का एक छोटा सा हिस्सा भी बदलता है, तो यह पूरे चुनावी गणित को महत्वपूर्ण रूप से बदल सकता है। यह वोट बैंक वास्तव में कितना शक्तिशाली और मौन है। पहले प्रकाशित: मार्च 31, 2026, 07:45 IST समाचार चुनाव वह वोट देती है, वह निर्णय लेती है: कैसे महिलाएं चुपचाप बंगाल का चुनाव चला रही हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

शादीशुदा महिला से बीच सड़क गैंगरेप की कोशिश,वीडियो बनाया:पीड़िता बोली- 3 लोगों ने पकड़ा, कपड़े फाड़े, सीने पर हाथ लगाया; गांव वालों ने बचाया

शादीशुदा महिला से बीच सड़क गैंगरेप की कोशिश,वीडियो बनाया:पीड़िता बोली- 3 लोगों ने पकड़ा, कपड़े फाड़े, सीने पर हाथ लगाया; गांव वालों ने बचाया

बिहार के नालंदा में एक शादीशुदा महिला के साथ सरेआम गैंगरेप की कोशिश की गई। बीच सड़क कुछ बदमाशों ने महिला को गलत ढंग से पकड़ लिया। रेप की कोशिश का बदमाशों ने वीडियो भी बनाया। महिला ने जब थाने में इसकी शिकायत की तो आरोपियों ने गंदा वीडियो वायरल कर दिया। मामला सीएम नीतीश के गृह जिले नालंदा के नूरसराय थाना इलाके का है। पीड़िता ने थाने में शिकायत की है। पुलिस ने 2 आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। महिला से बीच सड़क छेड़खानी की कुछ तस्वीरें देखिए राशन लेने गई थी, 3 लोगों ने पकड़ा महिला शादीशुदा है। उसके 2 बच्चे हैं। उसका पति रोजगार के सिलसिले में महाराष्ट्र के नासिक में रहता है। वो अपने सास-ससुर के साथ नूरसराय थाना इलाके के एक गांव में रहती है। महिला के मुताबिक 26 मार्च की शाम वो घर से राशन लाने के लिए निकली। राशन लेकर वो घर लौट रही थी, तभी गांव के ही तीन लड़कों ने अंधेरे का फायदा उठाकर उसे पकड़ लिया। तीनों ने उसके साथ रेप करने की कोशिश की, लेकिन महिला ने किसी तरह खुद को बचा लिया। अब जानिए वायल वीडियो में क्या है घटना 26 मार्च की है। महिला ने 27 मार्च को थाने में केस किया। केस करने के बाद आरोपियों ने वीडियो को वायरल कर दिया। 42 सेकेंड के वीडियो को 3 क्लीप में वायरल किया गया। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है। कुछ लड़के एक महिला को गंदे ढंग से पकड़कर ले जा रहे हैं। महिला बार-बार छोड़ने की गुहार लगा रही है, लेकिन सभी आरोपी उसे छोड़ने को तैयार नहीं होते। वो अपने साथियों से कहते हैं कि इसका वीडियो बनाओ। इस दौरान महिला को पकड़े आरोपी भद्दी-भद्दी गालियां भी दे रहे हैं। वीडियो में दिख रहा है कि, आरोपियों के साथ पीछे बड़ी संख्या में लोग चल रहे हैं। दोषियों को किसी सूरत में छोड़ा नहीं जाएगा सदर डीएसपी-2 संजय कुमार जायसवाल ने बताया कि, पुलिस की विशेष टीम ने गांव में छापेमारी कर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जिसकी पहचान अशोक यादव और महालू महतो उर्फ नवनीत कुमार नरोत्तम के तौर पर हुई है। तीसरे नामजद आरोपी रविकांत कुमार की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री जी, लानत है आपके कानून के राज पर: रोहिणी राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडियो X पर लिखा, ‘नीतीश कुमार जी .. आप बिहार को दुशासनी राज के तांडव का दर्द दे कर जा रहे हैं। मुख्यमंत्री जी, आपके ही गृह जिले नालंदा में मानवता को शर्मसार करने, स्त्री अस्मिता को तार-तार कर देनी वाली घटना को बिना कानून के किसी खौफ के असामाजिक तत्वों और दुराचारियों के द्वारा सरेआम सड़क पर अंजाम दिया गया। फिर पूरे दुःसाहस के साथ वीडियो बना कर वायरल कर दिया गया। लानत है कानून के राज, महिला सुरक्षा के संदर्भ में आपके तमाम दावों पर .. मुख्यमंत्री जी .. उम्मीद है आप खुद को जबरन बिहार से रुखसत किए जाने के सदमे से उबर गए होंगे और आपको ये पता होगा कि आपके ही गृह जिले में घर का राशन ले कर लौट रही एक विवाहित महिला के साथ ये शर्मनाक वाकया हुआ है।