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Bhojshala Case Hearing Today | Indore High Court to Review Survey Report, Objections

Bhojshala Case Hearing Today | Indore High Court to Review Survey Report, Objections

इंदौर/धार7 घंटे पहले

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भोजशाला को लेकर ASI की सर्वे रिपोर्ट पर अदालत में आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं।

धार के भोजशाला विवाद मामले में 6 अप्रैल से रोज सुनवाई होगी। हाईकोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच सोमवार दोपहर ढाई बजे से सभी याचिकाओं को एक साथ सुनेगी।

गुरुवार को हुई सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट किया है कि पहले याचिकाकर्ताओं के तर्क सुने जाएंगे, फिर आपत्ति लगाने वालों को दलील रखने का अवसर दिया जाएगा।

सुनवाई के दौरान हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन, विनय जोशी मौजूद रहे जबकि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से एडवोकेट सलमान खुर्शीद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े थे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- हाईकोर्ट ही करेगा अंतिम फैसला

इससे पहले बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला विवाद में अहम आदेश देते हुए स्पष्ट किया था कि मामले का अंतिम निर्णय अब हाईकोर्ट ही करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट, वीडियोग्राफी और पक्षकारों की आपत्तियों पर हाईकोर्ट अंतिम सुनवाई में विचार करेगा। सभी मुद्दे हाईकोर्ट के समक्ष खुले रहेंगे और वहीं तय किए जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- ASI द्वारा तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट सभी पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है। कई पक्षों ने इस पर अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराई हैं। ASI द्वारा की गई साइट की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी से जुड़े बिंदुओं को भी हाईकोर्ट गंभीरता से देखेगा। यदि वीडियोग्राफी के आधार पर कोई नई आपत्तियां उठती हैं, तो उन पर भी सुनवाई के दौरान विचार किया जाएगा।

इसके अलावा शीर्ष कोर्ट ने पहले दिए गए निर्देश को बरकरार रखते हुए कहा था कि भोजशाला परिसर के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। साथ ही, 7 अप्रैल 2003 को ASI द्वारा जारी आदेश का पालन जारी रहेगा।

हाईकोर्ट में पेश की जा चुकी ASI की सर्वेक्षण रिपोर्ट

मध्य प्रदेश में धार स्थित भोजशाला को लेकर पुरातात्विक सर्वेक्षण रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की जा चुकी है। रिपोर्ट में परिसर के ऐतिहासिक स्वरूप, स्थापत्य और शिलालेखों से जुड़े कई बड़े खुलासे सामने आए हैं। विशेष रूप से 10वीं से 13वीं शताब्दी के दौरान राजा भोज और राजा अर्जुन वर्मन द्वारा कराए गए निर्माण और सांस्कृतिक कार्यों के सबूत मिले हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पूरे परिसर में कुल 106 स्तंभ मिले हैं, जिन पर अलग-अलग प्रकार की नक्काशी और डिजाइन हैं। इसके अलावा 32 शिलालेख भी हैं। इन शिलालेखों में राजा भोज के समय लिखित और अर्जुन वर्मन के राजगुरु मदन द्वारा रचित ‘पारिजलमंजरी नाटिका’ और ‘विजयश्री’ नाटक के पहले दो अंकों का उल्लेख है। अलग-अलग पत्थरों पर ऐसी कई रचनाएं और नाट्यांश लिखे हैं।

परिसर से मिले कुछ शिलालेखों में 14वीं शताब्दी के दौरान मालवा में मुसलमानों के आने और मुस्लिम शासन की स्थापना का जिक्र भी है। बता दें कि 1389 ईस्वी में दिलावर खान, जिसका मूल नाम हुसैन था, को दिल्ली से मालवा प्रांत का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। बाद में दिलावर खान ने धार में स्वतंत्रता की घोषणा की। इसे अपनी राजधानी बनाया और 1401 ईस्वी में शाही उपाधि धारण कर स्वतंत्र रूप से राज्य चलाया।

रिपोर्ट में दर्ज इन तथ्यों को लेकर ऐतिहासिक और कानूनी परिप्रेक्ष्य में आगे बहस की संभावना जताई जा रही है।

तस्वीरों में समझिए, भोजशाला परिसर में क्या-क्या मिला

पूरे परिसर में ऐसे कुल 106 पिलर खड़े हैं। सभी अलग-अलग स्थानों पर हैं और अलग-अलग दिशाओं में हैं।

पूरे परिसर में ऐसे कुल 106 पिलर खड़े हैं। सभी अलग-अलग स्थानों पर हैं और अलग-अलग दिशाओं में हैं।

पुरातत्व विभाग ने इन 106 पिलर्स की वास्तविक डिजाइन की ड्रॉइंग भी कोर्ट में पेश की है।

पुरातत्व विभाग ने इन 106 पिलर्स की वास्तविक डिजाइन की ड्रॉइंग भी कोर्ट में पेश की है।

परिसर में 56 अरबी और फारसी शिलालेख भी मिले

नागपुर के शिलालेख विज्ञान विभाग के एक पुरातत्वविद् ने भोजशाला परिसर की कमाल मौला मस्जिद और कमाल मौला मकबरे में मिले 56 अरबी और फारसी शिलालेखों का अध्ययन किया। इनमें 43 स्याही से लिखे शिलालेख हैं, जिनमें यहां आने वाले लोगों का विवरण है।

कुछ शिलालेखों में इस्लामी मत, प्रार्थना और ईश्वर के गुणों जैसे धार्मिक ग्रंथों के अंश भी हैं जबकि कुछ में फारसी कविता के दोहे और व्यक्तियों के नाम हैं। अरबी और फारसी शिलालेख मालवा के मुस्लिम इतिहास को समझने में सहायक हैं, जो यहां मुसलमानों के आने और धार को राजधानी बनाकर मालवा में शासन की स्थापना के बारे में बताते हैं।

शिलालेखों पर लिखीं कुरान की आयतें

एएसआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कमाल मौला मकबरे के परिसर के अंदर शिलालेख मिले हैं। इन पर कुरान की आयतें लिखी हैं, जो ईश्वर के गुणों और एकेश्वरवाद पर आधारित हैं। ये शिलालेख दो प्रकार के हैं।

अलाउद्दीन महमूद शाह ने बनवाई थी कुछ संरचना

ASI की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां मिला एपी-48 शिलालेख मालवा के सुल्तान महमूद शाह प्रथम का है, जिसे इतिहास में अलाउद्दीन महमूद शाह के नाम से भी जाना जाता है। जिसने हिजरी 861 (1456-57 ईस्वी) में मकबरे के परिसर में गैलरी, आंगन, द्वार का गुंबद, पत्थर की जाली, कोठरियां, कुआं, आंतरिक भाग में एक ऊंचा चबूतरा, मठ, प्रवेश कक्ष, कंगूरे आदि जैसी संरचनाएं बनवाई थीं।

इस शिलालेख को हिजरी 866 (1461-62 ईस्वी) में हबी अल-हाफिज अश-शिराजी अल-मुर्शिदी द्वारा बनवाया गया था। शिलालेख AP-01 कमाल मौला मस्जिद के केंद्रीय मेहराब के आसपास से मिला है। शिलालेख AP-02 उपदेश मंच के ऊपर स्थित है, जबकि शिलालेख AP-03 दक्षिणी दीवार पर मिला है।

ये तीनों कुरान के शिलालेख हैं, जो इस संरचना को इस्लामी पहचान देते हैं। शिलालेख AP-02 कुरान के अध्याय 51 की आयत 55 का आंशिक भाग है। इसे पता चलता है कि यह संरचना इस्लाम धर्म के प्रचार, सांस्कृतिक मूल्यों और शिष्टाचार के संवर्धन और व्यापारिक केंद्र के रूप में काम करती रही है।

ये खबर भी पढ़ें…

भोजशाला पर अलाउद्दीन खिलजी के हमले के 700 साल

भोजशाला का इतिहास करीब 990 साल पुराना है। 1034 ई. में राजा भोज ने इसका निर्माण कराया था और यहां मां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित की थी। 200 सालों से ज्यादा समय तक भोजशाला का वैभव कायम रहा, लेकिन 1305 ई में मोहम्मद खिलजी ने भोजशाला पर आक्रमण कर इसे नेस्तनाबूत करने की कोशिश की। पढ़ें पूरी खबर…

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राजनीति

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इंदौर/धार7 घंटे पहले

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भोजशाला को लेकर ASI की सर्वे रिपोर्ट पर अदालत में आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं।

धार के भोजशाला विवाद मामले में 6 अप्रैल से रोज सुनवाई होगी। हाईकोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच सोमवार दोपहर ढाई बजे से सभी याचिकाओं को एक साथ सुनेगी।

गुरुवार को हुई सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट किया है कि पहले याचिकाकर्ताओं के तर्क सुने जाएंगे, फिर आपत्ति लगाने वालों को दलील रखने का अवसर दिया जाएगा।

सुनवाई के दौरान हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन, विनय जोशी मौजूद रहे जबकि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से एडवोकेट सलमान खुर्शीद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े थे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- हाईकोर्ट ही करेगा अंतिम फैसला

इससे पहले बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला विवाद में अहम आदेश देते हुए स्पष्ट किया था कि मामले का अंतिम निर्णय अब हाईकोर्ट ही करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट, वीडियोग्राफी और पक्षकारों की आपत्तियों पर हाईकोर्ट अंतिम सुनवाई में विचार करेगा। सभी मुद्दे हाईकोर्ट के समक्ष खुले रहेंगे और वहीं तय किए जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- ASI द्वारा तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट सभी पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है। कई पक्षों ने इस पर अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराई हैं। ASI द्वारा की गई साइट की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी से जुड़े बिंदुओं को भी हाईकोर्ट गंभीरता से देखेगा। यदि वीडियोग्राफी के आधार पर कोई नई आपत्तियां उठती हैं, तो उन पर भी सुनवाई के दौरान विचार किया जाएगा।

इसके अलावा शीर्ष कोर्ट ने पहले दिए गए निर्देश को बरकरार रखते हुए कहा था कि भोजशाला परिसर के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। साथ ही, 7 अप्रैल 2003 को ASI द्वारा जारी आदेश का पालन जारी रहेगा।

हाईकोर्ट में पेश की जा चुकी ASI की सर्वेक्षण रिपोर्ट

मध्य प्रदेश में धार स्थित भोजशाला को लेकर पुरातात्विक सर्वेक्षण रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की जा चुकी है। रिपोर्ट में परिसर के ऐतिहासिक स्वरूप, स्थापत्य और शिलालेखों से जुड़े कई बड़े खुलासे सामने आए हैं। विशेष रूप से 10वीं से 13वीं शताब्दी के दौरान राजा भोज और राजा अर्जुन वर्मन द्वारा कराए गए निर्माण और सांस्कृतिक कार्यों के सबूत मिले हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पूरे परिसर में कुल 106 स्तंभ मिले हैं, जिन पर अलग-अलग प्रकार की नक्काशी और डिजाइन हैं। इसके अलावा 32 शिलालेख भी हैं। इन शिलालेखों में राजा भोज के समय लिखित और अर्जुन वर्मन के राजगुरु मदन द्वारा रचित ‘पारिजलमंजरी नाटिका’ और ‘विजयश्री’ नाटक के पहले दो अंकों का उल्लेख है। अलग-अलग पत्थरों पर ऐसी कई रचनाएं और नाट्यांश लिखे हैं।

परिसर से मिले कुछ शिलालेखों में 14वीं शताब्दी के दौरान मालवा में मुसलमानों के आने और मुस्लिम शासन की स्थापना का जिक्र भी है। बता दें कि 1389 ईस्वी में दिलावर खान, जिसका मूल नाम हुसैन था, को दिल्ली से मालवा प्रांत का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। बाद में दिलावर खान ने धार में स्वतंत्रता की घोषणा की। इसे अपनी राजधानी बनाया और 1401 ईस्वी में शाही उपाधि धारण कर स्वतंत्र रूप से राज्य चलाया।

रिपोर्ट में दर्ज इन तथ्यों को लेकर ऐतिहासिक और कानूनी परिप्रेक्ष्य में आगे बहस की संभावना जताई जा रही है।

तस्वीरों में समझिए, भोजशाला परिसर में क्या-क्या मिला

पूरे परिसर में ऐसे कुल 106 पिलर खड़े हैं। सभी अलग-अलग स्थानों पर हैं और अलग-अलग दिशाओं में हैं।

पूरे परिसर में ऐसे कुल 106 पिलर खड़े हैं। सभी अलग-अलग स्थानों पर हैं और अलग-अलग दिशाओं में हैं।

पुरातत्व विभाग ने इन 106 पिलर्स की वास्तविक डिजाइन की ड्रॉइंग भी कोर्ट में पेश की है।

पुरातत्व विभाग ने इन 106 पिलर्स की वास्तविक डिजाइन की ड्रॉइंग भी कोर्ट में पेश की है।

परिसर में 56 अरबी और फारसी शिलालेख भी मिले

नागपुर के शिलालेख विज्ञान विभाग के एक पुरातत्वविद् ने भोजशाला परिसर की कमाल मौला मस्जिद और कमाल मौला मकबरे में मिले 56 अरबी और फारसी शिलालेखों का अध्ययन किया। इनमें 43 स्याही से लिखे शिलालेख हैं, जिनमें यहां आने वाले लोगों का विवरण है।

कुछ शिलालेखों में इस्लामी मत, प्रार्थना और ईश्वर के गुणों जैसे धार्मिक ग्रंथों के अंश भी हैं जबकि कुछ में फारसी कविता के दोहे और व्यक्तियों के नाम हैं। अरबी और फारसी शिलालेख मालवा के मुस्लिम इतिहास को समझने में सहायक हैं, जो यहां मुसलमानों के आने और धार को राजधानी बनाकर मालवा में शासन की स्थापना के बारे में बताते हैं।

शिलालेखों पर लिखीं कुरान की आयतें

एएसआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कमाल मौला मकबरे के परिसर के अंदर शिलालेख मिले हैं। इन पर कुरान की आयतें लिखी हैं, जो ईश्वर के गुणों और एकेश्वरवाद पर आधारित हैं। ये शिलालेख दो प्रकार के हैं।

अलाउद्दीन महमूद शाह ने बनवाई थी कुछ संरचना

ASI की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां मिला एपी-48 शिलालेख मालवा के सुल्तान महमूद शाह प्रथम का है, जिसे इतिहास में अलाउद्दीन महमूद शाह के नाम से भी जाना जाता है। जिसने हिजरी 861 (1456-57 ईस्वी) में मकबरे के परिसर में गैलरी, आंगन, द्वार का गुंबद, पत्थर की जाली, कोठरियां, कुआं, आंतरिक भाग में एक ऊंचा चबूतरा, मठ, प्रवेश कक्ष, कंगूरे आदि जैसी संरचनाएं बनवाई थीं।

इस शिलालेख को हिजरी 866 (1461-62 ईस्वी) में हबी अल-हाफिज अश-शिराजी अल-मुर्शिदी द्वारा बनवाया गया था। शिलालेख AP-01 कमाल मौला मस्जिद के केंद्रीय मेहराब के आसपास से मिला है। शिलालेख AP-02 उपदेश मंच के ऊपर स्थित है, जबकि शिलालेख AP-03 दक्षिणी दीवार पर मिला है।

ये तीनों कुरान के शिलालेख हैं, जो इस संरचना को इस्लामी पहचान देते हैं। शिलालेख AP-02 कुरान के अध्याय 51 की आयत 55 का आंशिक भाग है। इसे पता चलता है कि यह संरचना इस्लाम धर्म के प्रचार, सांस्कृतिक मूल्यों और शिष्टाचार के संवर्धन और व्यापारिक केंद्र के रूप में काम करती रही है।

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भोजशाला पर अलाउद्दीन खिलजी के हमले के 700 साल

भोजशाला का इतिहास करीब 990 साल पुराना है। 1034 ई. में राजा भोज ने इसका निर्माण कराया था और यहां मां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित की थी। 200 सालों से ज्यादा समय तक भोजशाला का वैभव कायम रहा, लेकिन 1305 ई में मोहम्मद खिलजी ने भोजशाला पर आक्रमण कर इसे नेस्तनाबूत करने की कोशिश की। पढ़ें पूरी खबर…

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