टीकमगढ़ में खेत में मिला लड़की का शव, सिर कुचला:10 साल की बच्ची एक दिन पहले से लापता थी, हत्या की आशंका

टीकमगढ़ जिले के पलेरा थाना क्षेत्र में मंगलवार रात एक 10 साल की मासूम बच्ची का शव मिला। बच्ची का शव संदिग्ध हालत में मिला है और उसका सिर बुरी तरह कुचला हुआ था, जिससे आशंका जताई जा रही है कि उसकी हत्या की गई है। पलेरा के वार्ड नंबर 3 की रहने वाली पार्वती आदिवासी सोमवार दोपहर से लापता थी। घरवाले और गांव के लोग उसे हर जगह तलाश रहे थे, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चल रहा था। मंगलवार रात को बच्ची की लाश उसके घर से करीब 600 मीटर दूर एक खेत में पड़ी मिली। मौके पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम घटना की खबर मिलते ही जतारा एसडीओपी अभिषेक गौतम और पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट और डॉग स्क्वॉड को भी जांच के लिए बुलाया गया। पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया और साक्ष्य जुटाए। गांव में दहशत और गुस्से का माहौल मासूम बच्ची के साथ हुई इस हैवानियत से पूरे गांव में दहशत और नाराजगी है। परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है और उन्होंने पुलिस से दोषियों को जल्द पकड़कर सख्त से सख्त सजा देने की मांग की है। एसडीओपी अभिषेक गौतम ने बताया कि पुलिस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्थिति और भी साफ हो पाएगी। फिलहाल पुलिस परिजन और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है।
परीक्षा में पूछा- अल्लाह के सिवा दूसरा कोई नहीं:सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के बीकॉम, बीसीए में पूछे गए प्रश्न पर विवाद, जांच के आदेश

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के बीकॉम और बीसीए तृतीय वर्ष के फाउंडेशन पेपर में पूछे गए एक प्रश्न से विवाद खड़ा हो गया है। सोमवार को आयोजित परीक्षा में पूछा गया-‘अल्लाह के सिवा दूसरा कोई नहीं है’। इसके साथ चार विकल्प दिए गए थे, जिनमें 1. सोमेश्वर, 2. खुदा, 3. शक्तिवान, 4. दंड देने वाला शामिल थे। इस प्रश्न को लेकर हिंदूवादी संगठनों ने आपत्ति जताते हुए प्रश्न पत्र बनाने वाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के बीकॉम और बीसीए तृतीय वर्ष के फाउंडेशन कोर्स का पेपर सोमवार को आयोजित हुआ था। पेपर सामने आने के बाद उज्जैन सहित रतलाम में हिंदूवादी संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि पेपर किसने तैयार किया था। उज्जैन में हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक रितेश माहेश्वरी ने कहा कि जिस प्रोफेसर ने इस तरह का पेपर सेट किया है, उसके खिलाफ विश्वविद्यालय को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए, अन्यथा बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इधर विवाद बढ़ता देख सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलसचिव अनिल शर्मा ने जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने बताया कि मामला परीक्षा समिति को भेजा गया है। यह सवाल बीकॉम और बीसीए के फाउंडेशन पेपर में पूछा गया था। फाउंडेशन कोर्स में विभिन्न धर्मों से जुड़े प्रश्न होते हैं, लेकिन इस तरह का प्रश्न अपेक्षित नहीं है। परीक्षा समिति की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। कुलपति अर्पण भारद्वाज ने बताया कि परीक्षा नियंत्रक से इस संबंध में जवाब मांगा गया है कि ऐसा सवाल क्यों पूछा गया। इसके लिए परीक्षा विभाग की बैठक बुलाई गई है। यदि इस प्रश्न को हटाया जाता है, तो विद्यार्थियों को अंक किस प्रकार दिए जाएंगे, इस पर भी चर्चा की जाएगी।
सुबह प्रोटीन युक्त नाश्ता क्यों है जरूरी, वजन और ऊर्जा पर असर

सुबह का नाश्ता हमारे पूरे दिन की शुरुआत तय करता है, इसलिए इसे सबसे अहम भोजन माना जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर दिन की शुरुआत सही पोषण के साथ की जाए, तो शरीर लंबे समय तक एक्टिव और फ्रेश बना रहता है. खासतौर पर नाश्ते में प्रोटीन शामिल करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह शरीर को जरूरी ऊर्जा देने के साथ-साथ कई स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है. जो लोग सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं या सिर्फ हल्का-फुल्का खाते हैं, उन्हें दिनभर थकान, कमजोरी और बार-बार भूख लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं. प्रोटीन हमारे शरीर की एक बुनियादी जरूरत है, जो मांसपेशियों को मजबूत बनाने, कोशिकाओं की मरम्मत करने और शरीर को सही तरीके से काम करने में मदद करता है. विशेषज्ञों के अनुसार, अगर सुबह के समय प्रोटीन लिया जाए, तो यह शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करता है और अनावश्यक भूख को भी नियंत्रित करता है. इससे दिन के बीच में बार-बार स्नैक्स खाने की आदत कम हो जाती है. साथ ही, यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को भी बेहतर बनाता है, जिससे वजन नियंत्रण में रखने में मदद मिलती है. प्रोटीन युक्त नाश्ते के फायदेसुबह प्रोटीन से भरपूर नाश्ता करने के कई फायदे होते हैं. यह पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे ओवरईटिंग की समस्या नहीं होती. इसके अलावा, यह शरीर को स्थिर ऊर्जा देता है, जिससे थकान और सुस्ती महसूस नहीं होती. नियमित रूप से प्रोटीन लेने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं और उनकी ग्रोथ बेहतर होती है. जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए भी यह बेहद फायदेमंद होता है, क्योंकि यह भूख को नियंत्रित रखता है और कैलोरी इंटेक को कम करने में मदद करता है. नाश्ते में क्या शामिल करेंप्रोटीन युक्त नाश्ता तैयार करना मुश्किल नहीं है, बल्कि आप रोजमर्रा की चीजों से ही इसे आसानी से बना सकते हैं. जैसे पनीर पराठा या पनीर भुर्जी, दही के साथ फल और थोड़ी मूंगफली, दूध के साथ ओट्स या दलिया, छाछ के साथ स्प्राउट्स, बेसन का चीला या मूंग दाल का चीला जैसे विकल्प शामिल किए जा सकते हैं. ये सभी चीजें न सिर्फ स्वादिष्ट होती हैं, बल्कि शरीर को जरूरी पोषण भी देती हैं. सुबह का नाश्ता कभी न करें स्किपकई लोग व्यस्त दिनचर्या के कारण नाश्ता छोड़ देते हैं, जो सेहत के लिए सही नहीं है. अगर आपके पास समय कम है, तो भी कुछ हल्का और प्रोटीन से भरपूर जरूर खाएं, जैसे एक गिलास दूध, दही या मुट्ठी भर मूंगफली. इससे शरीर को जरूरी ऊर्जा मिलती है और दिनभर काम करने की क्षमता बनी रहती है.
इंदौर को अंगदान में देश में अव्वल बनाने की तैयारी:अस्पतालों में ट्रांसप्लांट कॉर्डिनेटर नियुक्त होंगे; अंगदान के लिए जागरूकता अभियान तेज करने के निर्देश

अंगदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को कमिश्नर डॉ. सुदाम खाड़े ने शहर के विभिन्न अस्पतालों के संचालकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की बैठक आयोजित की। बैठक में अंगदान के क्षेत्र में इंदौर संभाग के प्रयासों की समीक्षा करते हुए इसे जनआंदोलन का रूप देने पर जोर दिया। डॉ. खाड़े ने कहा कि इंदौर संभाग अंगदान के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रहा है। शहर के 13 अस्पतालों के संचालक, चिकित्सक और विभिन्न सामाजिक संस्थाएं लगातार जागरूकता कार्यक्रम चला रही हैं। अब आवश्यकता है कि इन प्रयासों को सकारात्मक आंदोलन में बदला जाए, ताकि इंदौर न केवल प्रदेश बल्कि देश में भी अंगदान के क्षेत्र में अग्रणी बन सके। उन्होंने कहा कि अंगदान मानवता को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए इस कार्य को संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक अस्पताल में ट्रांसप्लांट कॉर्डिनेटर की नियुक्ति की जाए, ताकि अंगदान से संबंधित जानकारी का समय पर आदान-प्रदान हो सके। साथ ही इन कॉर्डिनेटरों की एक समेकित सूची तैयार कर शासन स्तर पर समन्वय स्थापित किया जाए। बड़े अस्पतालों को छोटे अस्पतालों को भी इस अभियान से जोड़ने के लिए आगे आने की आवश्यकता बताई गई। बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि अंगदान के प्रति इच्छुक लेकिन आर्थिक अभाव से जूझ रहे लोगों को चिन्हित कर शासन स्तर से सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएं। एक जिले से दूसरे जिले में अंग प्रत्यारोपण के लिए एम्बुलेंस व्यवस्था सुनिश्चित करने और चिकित्सकों के प्रशिक्षण के लिए नियमित शिविर, कार्यशाला एवं सेमिनार आयोजित करने पर भी जोर दिया गया। कमिश्नर ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों, सहायिकाओं और आशा कार्यकर्ताओं को भी अंगदान संबंधी प्रशिक्षण दिया जाए। सभी अस्पतालों में पोस्टर, होर्डिंग और बैनर के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। उन्होंने बताया कि इच्छुक व्यक्ति प्रतिज्ञा पत्र भरकर नोटो (नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन) के साथ पंजीकरण कर सकते हैं। अंगदान केवल ब्रेन डेड घोषित होने और अस्पताल में मृत्यु की स्थिति में ही प्रभावी रूप से संभव होता है। बैठक में बताया गया कि अंगदान वह प्रक्रिया है जिसमें जीवित या मृत व्यक्ति के स्वस्थ अंग या ऊतक निकालकर ऐसे मरीज में प्रत्यारोपित किए जाते हैं, जिनके अंग काम करना बंद कर चुके हैं। इसे “जीवन का उपहार” भी कहा जाता है, जो किसी व्यक्ति को नई जिंदगी दे सकता है। बैठक में इंदौर सोसायटी फॉर ऑर्गन डोनेशन के नोडल अधिकारी डॉ. मनीष पुरोहित, मुस्कान ग्रुप के संदीपन आर्य व जीतू बगानी, किडनी फाउंडेशन के डॉ. अनिल भंडारी, संयुक्त संचालक स्वास्थ्य डॉ. पूर्णिमा गडरिया, इंदौर आई बैंक की उमा झंवर सहित चोइथराम, बॉम्बे हॉस्पिटल, अपोलो राजश्री, जूपिटर, सीएचएल, अमलतास, श्री अरबिंदो, मोहक, शैल्बी, मेदांता एवं एमिनेंट अस्पताल के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
पहली बार विदिशा पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष:कार्यकर्ताओं से बोले—संगठन मजबूत बनाओ, किसानों का एक एक दाना खरीदेगी सरकार

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने विदिशा का दौरा किया। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद यह उनका पहला विदिशा दौरा था, जहां कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। खंडेलवाल ने जिला भाजपा कार्यालय में विभिन्न संगठनात्मक बैठकों में भाग लिया। इन बैठकों में उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाने और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को आमजन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का आह्वान किया। पत्रकारों से बातचीत में खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण वर्ग संगठन का एक नियमित कार्यक्रम है और इसका आगामी चुनावों से सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में प्रवास कार्यक्रम चलाकर संगठन को और सशक्त किया जा रहा है। गेहूं खरीदी 9 अप्रैल से चालू होगी अंतरराष्ट्रीय हालातों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण बारदाने की कमी रही है। हालांकि, उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार उनकी उपज का एक-एक दाना खरीदेगी। समर्थन मूल्य पर खरीदी 9 अप्रैल से शुरू होगी और गेहूं का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 2700 रुपये प्रति क्विंटल किया जाएगा। खंडेलवाल ने कहा कि भाजपा एक बड़ा संगठन है, इसलिए मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन पार्टी में विचारधारा सर्वोपरि है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों पर उन्होंने बताया कि अन्य देशों की तुलना में भारत में कीमतों में कोई विशेष वृद्धि नहीं हुई है। एसएटीआई कॉलेज में वेतन समस्या और किसानों की उपज को मिल पर तौलने के मुद्दे पर उन्होंने जनप्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर जल्द समाधान निकालने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि उनका यह दो दिवसीय प्रवास 7 और 8 अप्रैल को रायसेन, विदिशा, मुरैना और भिंड जिलों में रहेगा, जहां वे संगठनात्मक बैठकों के माध्यम से कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
काम करते-करते देखने लगते हैं रील्स? लग चुकी है भयंकर लत, ऐसे करें कंट्रोल

आज के समय में सोशल मीडिया हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. लोग दिन की शुरुआत से लेकर रात तक मोबाइल और स्क्रीन से जुड़े रहते हैं. जहां एक तरफ यह हमें जानकारी और कनेक्टिविटी देता है, वहीं इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सोशल मीडिया का उपयोग सीमित न किया जाए, तो यह धीरे-धीरे आदत से लत में बदल जाता है, जो आगे चलकर कई समस्याओं का कारण बन सकता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने से व्यक्ति की सोचने की क्षमता प्रभावित होती है और वह धीरे-धीरे असली दुनिया से कटने लगता है. इसका असर एकाग्रता पर पड़ता है, जिससे काम या पढ़ाई में ध्यान नहीं लग पाता. इसके अलावा चिड़चिड़ापन, अकेलापन और रिश्तों में दूरी जैसी समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं. कई लोग बिना जरूरत के बार-बार फोन चेक करते रहते हैं, जिससे उनकी दिनचर्या बिगड़ जाती है और मानसिक शांति भी प्रभावित होती है. सोशल मीडिया कैसे कर रहा प्रभावित?सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक्स, कमेंट्स और नोटिफिकेशन की आदत लोगों को बार-बार फोन उठाने के लिए मजबूर करती है. यह एक तरह की मानसिक निर्भरता बन जाती है, जिससे व्यक्ति हमेशा ऑनलाइन रहने की कोशिश करता है. इसका सीधा असर नींद पर पड़ता है, क्योंकि लोग देर रात तक फोन इस्तेमाल करते रहते हैं. इसके कारण तनाव, थकान और उदासी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. खासकर युवाओं में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे उनकी लाइफस्टाइल और मानसिक संतुलन दोनों प्रभावित हो रहे हैं. समय सीमा तय करना है जरूरीसोशल मीडिया के उपयोग को सीमित करने के लिए सबसे पहले एक निश्चित समय तय करना जरूरी है. रोजाना 30 से 45 मिनट का समय निर्धारित करें और उसी के अनुसार इस्तेमाल करें. इससे अनावश्यक स्क्रॉलिंग से बचा जा सकता है. डिजिटल डिटॉक्स अपनाएंदिन में कुछ समय ऐसा जरूर रखें जब आप पूरी तरह स्क्रीन से दूर रहें. कम से कम 4–5 घंटे डिजिटल डिवाइस से दूरी बनाना फायदेमंद होता है. खासकर सुबह उठते ही और सोने से पहले फोन से दूरी बनाए रखना जरूरी है. बार-बार आने वाले नोटिफिकेशन हमें फोन उठाने के लिए मजबूर करते हैं. इसलिए जरूरी है कि गैर-जरूरी नोटिफिकेशन बंद कर दिए जाएं, ताकि ध्यान भटकने से बचा जा सके. ऑफलाइन एक्टिविटीज पर ध्यान देंखाली समय में सोशल मीडिया चलाने के बजाय कुछ रचनात्मक काम करें. जैसे किताब पढ़ना, एक्सरसाइज करना, परिवार के साथ समय बिताना या अपने शौक को पूरा करना. इससे मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है. आजकल स्मार्टफोन में स्क्रीन टाइम ट्रैक करने की सुविधा होती है. इसकी मदद से आप यह जान सकते हैं कि आप दिनभर में कितना समय मोबाइल पर बिताते हैं और जरूरत पड़ने पर इसे कम कर सकते हैं. नींद को प्राथमिकता देंअच्छी नींद के लिए जरूरी है कि सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल का इस्तेमाल बंद कर दिया जाए. इससे दिमाग को आराम मिलता है और नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है. इसके अलावा घर में कुछ नियम तय करना भी फायदेमंद हो सकता है, जैसे खाने के समय फोन का इस्तेमाल न करना या परिवार के साथ समय बिताते वक्त मोबाइल दूर रखना. इससे रिश्ते मजबूत होते हैं और सोशल मीडिया पर निर्भरता कम होती है.
केरलम चुनाव 2026: त्रिपुनिथुरा सीट के प्रमुख उम्मीदवार, पिछले रुझान और क्या देखना है | भारत समाचार

आखरी अपडेट:07 अप्रैल, 2026, 21:45 IST केरलम विधानसभा चुनाव 2026: कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने दीपक जॉय को मैदान में उतारा है, जबकि एलडीएफ ने केएन उन्नीकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है। (फोटो: पीटीआई फाइल) केरलम विधानसभा चुनाव 2026: केरल के एर्नाकुलम जिले में स्थित त्रिपुनिथुरा विधानसभा क्षेत्र राज्य की राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहरी सीटों में से एक है। एर्नाकुलम लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा, त्रिपुनिथुरा में पारंपरिक रूप से कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) और सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के बीच सीधा मुकाबला देखा गया है। हालाँकि, 2021 के चुनाव में एक बड़ा बदलाव आया, जब भाजपा ने इस सीट पर अपना खाता खोला। प्रमुख उम्मीदवार कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने दीपक जॉय को मैदान में उतारा है, जबकि एलडीएफ ने केएन उन्नीकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है। एनडीए समर्थित ट्वेंटी-20 बैनर से अंजलि नायर के प्रवेश से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। इसके अलावा, कई स्वतंत्र उम्मीदवार और छोटी पार्टियां मैदान में हैं, जिससे वोटों का बिखराव हो रहा है और चुनावी लड़ाई और अधिक प्रतिस्पर्धी हो गई है। त्रिपुनिथुरा सीट: 2021 में एक ऐतिहासिक बदलाव 2021 के केरल विधानसभा चुनाव में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के के. बाबू ने लगभग 40.38% वोट शेयर हासिल करते हुए 65,669 वोटों के साथ सीट दोबारा हासिल की। उन्होंने सीपीआई (एम) के एम. स्वराज को 2,903 वोटों के अंतर से हराया, जिन्हें 62,766 वोट (38.59%) मिले थे। तीसरे स्थान पर रहने के बावजूद, भाजपा ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। कुम्मनम राजशेखरन ने 45,206 वोट (27.79%) हासिल किए, जो निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी के सबसे मजबूत प्रदर्शन को दर्शाता है और केरल के शहरी इलाकों में इसकी बढ़ती उपस्थिति का संकेत देता है। त्रिपुनिथुरा पिछले 5 चुनाव: विजेता और वोट रुझान 2021 में, के. बाबू (कांग्रेस) ने कड़े मुकाबले में सीपीआई (एम) को हराकर 40.38% वोट शेयर के साथ जीत हासिल की, जबकि बीजेपी एक मजबूत तीसरी ताकत के रूप में उभरी। 2016 में, एम. स्वराज (सीपीआई (एम)) ने 58,098 वोटों और लगभग 39.64% वोट शेयर के साथ के. बाबू (कांग्रेस) को हराकर सीट जीती, जिन्होंने 54,320 वोट हासिल किए थे। यह लंबे समय तक कांग्रेस के कब्जे वाले निर्वाचन क्षेत्र में वामपंथियों के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है। 2011 में, के. बाबू (कांग्रेस) ने 65,342 वोटों और लगभग 53% वोट शेयर के साथ आराम से जीत हासिल की, और सीपीआई (एम) को 12,000 से अधिक वोटों के अंतर से हराया। 2006 में, के. बाबू (कांग्रेस) ने 58,952 वोटों के साथ सीट बरकरार रखी और त्रिपुनिथुरा में कांग्रेस का प्रभुत्व जारी रखा। 2001 में, के. बाबू (कांग्रेस) ने 59,248 वोटों से जीत हासिल की और एक दशक से अधिक समय तक कायम रहने वाला गढ़ स्थापित किया। त्रिपुनिथुरा मतदान रुझान और राजनीतिक गतिशीलता त्रिपुनिथुरा को कई वर्षों तक कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, जिसका मुख्य कारण के. बाबू का प्रभुत्व था। हालाँकि, 2016 में सीपीआई (एम) की जीत और 2021 में भाजपा की बढ़त ने निर्वाचन क्षेत्र को त्रिकोणीय मुकाबले में बदल दिया है। त्रिपुनिथुरा जनसांख्यिकी त्रिपुनिथुरा में मध्य केरल की तरह एक विविध शहरी आबादी है, जिसमें नायर और अन्य उच्च जाति के हिंदू समुदाय एक प्रमुख सामाजिक समूह बनाते हैं। निर्वाचन क्षेत्र के अन्य प्रमुख समुदायों में बड़ी संख्या में ईसाई और मुस्लिम आबादी के साथ-साथ एझावा भी शामिल हैं। धर्म के संदर्भ में, हिंदू बहुसंख्यक हैं, जबकि ईसाई एक महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक का प्रतिनिधित्व करते हैं और मुस्लिम, हालांकि संख्या में कम हैं, मतदाताओं का एक प्रभावशाली वर्ग बने हुए हैं। जगह : तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम), भारत, भारत पहले प्रकाशित: 07 अप्रैल, 2026, 21:44 IST न्यूज़ इंडिया केरलम चुनाव 2026: त्रिपुनिथुरा सीट के प्रमुख उम्मीदवार, पिछले रुझान और क्या देखना है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल चुनाव(टी)केरल चुनाव 2026(टी)थ्रिपुनिथुरा निर्वाचन क्षेत्र(टी)थ्रिपुनिथुरा चुनाव 2026(टी)केरल चुनाव(टी)केरल चुनाव 2026(टी)थ्रिपुनिथुरा उम्मीदवार(टी)केरल वोटिंग रुझान(टी)केरल की राजनीति
दमोह में आईपीएल का सट्टा खिलाते आरोपी गिरफ्तार:पुलिस को मोबाइल फोन, सट्टा पर्ची और एक बॉल पेन मिला

दमोह कोतवाली पुलिस ने शहर की पीडब्ल्यूडी कॉलोनी के पास से एक व्यक्ति को आईपीएल का सट्टा खिलाते हुए गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के पास से मोबाइल फोन और सट्टा खिलाने में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री बरामद की है। इस मामले का खुलासा मंगलवार रात को किया गया। कोतवाली टीआई मनीष कुमार ने बताया कि एसपी श्रुत कीर्ति सोमवंशी के निर्देश पर पूरे जिले में आईपीएल का सट्टा खिलाने वाले आरोपियों पर कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में मंगलवार दोपहर मुखबिर से सूचना मिली थी कि पीडब्ल्यूडी कॉलोनी में एक आरोपी आईपीएल का सट्टा खिला रहा है। मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने मौके पर दबिश दी और आरोपी दीपक अहिरवार को आईपीएल मैच में सट्टा खिलाते हुए पकड़ा। उसके कब्जे से एक मोबाइल फोन, सट्टा पर्ची और एक बॉल पेन जब्त किया गया। जब्त किए गए मोबाइल फोन की जांच में क्रोम ऐप पर ‘IPL CRIKET ID KHELO 7.COM’ नाम की एक आईडी बनी हुई मिली। इस आईडी में कॉइन और बैलेंस भी मौजूद था, जो सट्टेबाजी में इस्तेमाल किया जा रहा था। आरोपी दीपक अहिरवार के खिलाफ सट्टा एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। टीआई ने बताया कि आरोपी दीपक ने आईडी उपलब्ध कराने वाले कुछ अन्य लोगों के नाम बताए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।
केरल चुनाव 2026: पिनाराई विजयन से लेकर राजीव चन्द्रशेखर तक, स्टार उम्मीदवार फोकस में | भारत समाचार

आखरी अपडेट:07 अप्रैल, 2026, 21:12 IST केरल चुनाव 2026: मुख्य लड़ाई एलडीएफ बनाम यूडीएफ है, जिसमें भाजपा नेमोम पर जोर दे रही है और विजयन और चेन्निथला जैसे नेता फोकस में हैं। केरल में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के बीच सीधी लड़ाई देखी जा रही है, भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में अपना विस्तार करने का प्रयास कर रहा है। केरल चुनाव 2026: 2026 के केरल विधानसभा चुनावों के लिए उच्च-ओक्टेन अभियान मंगलवार को समाप्त हो गया, जिसने एक निर्णायक मुकाबले के लिए मंच तैयार किया। एकल चरण के चुनाव के लिए मतदान 9 अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना 4 मई को होनी है। केरल में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के बीच सीधी लड़ाई देखी जा रही है, भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में अपना विस्तार करने का प्रयास कर रहा है। यहां स्टार उम्मीदवार, उनकी सीटें और देखने लायक लड़ाई हैं: पिनाराई विजयन – धर्मदम कन्नूर में धर्मदाम पिनाराई विजयन के राजनीतिक अधिकार का पर्याय बन गया है। सीपीआई (एम) का गढ़, उन्होंने 2016 से इस सीट का प्रतिनिधित्व किया है, 2021 में 50,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की है – जो राज्य में सबसे बड़े वोटों में से एक है। पार्टी के पूर्व कद्दावर नेता और हाल के दिनों में केरल के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले विजयन का अभियान शासन, कल्याण वितरण और बुनियादी ढांचे पर जोर देने पर निर्भर है। धर्मदाम में, प्राथमिक चुनौती कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ से आती है, जिसने ऐतिहासिक रूप से यहां वामपंथ के प्रभुत्व को कम करने के लिए संघर्ष किया है। भाजपा भी इस निर्वाचन क्षेत्र में सीमांत खिलाड़ी बनी हुई है। रमेश चेन्निथला – हरिपद वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व विपक्ष नेता, चेन्निथला यूडीएफ की सबसे सुरक्षित सीटों में से एक, हरिपद से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने 2021 में 13,000 से अधिक वोटों से जीतकर 48% से अधिक वोट शेयर हासिल किया। अपने संगठनात्मक कौशल और प्रशासनिक अनुभव के लिए जाने जाने वाले, वह यूडीएफ के प्रमुख सीएम चेहरों में से एक हैं। एलडीएफ ने यहां एक सीपीआई उम्मीदवार खड़ा किया है, लेकिन हरिपद का ऐतिहासिक रुझान – दृढ़ता से कांग्रेस की ओर झुका हुआ – चेन्निथला को स्पष्ट पसंदीदा बनाता है। इस तटीय क्षेत्र में भाजपा का प्रभाव सीमित है। वीडी सतीसन – परवूर विपक्ष के नेता वीडी सतीसन ने 2001 से अजेय रहते हुए, परवूर में एक अटल आधार बनाया है। 2021 में, उन्होंने 21,000 से अधिक वोटों के अंतर के साथ सीट बरकरार रखी। कांग्रेस अभियान के आक्रामक चेहरे के रूप में देखे जाने वाले सतीसन ने खुद को सत्तारूढ़ वामपंथ के लिए एक प्रमुख चुनौती के रूप में स्थापित किया है। सीपीआई (एम) ने उनके खिलाफ एक मजबूत उम्मीदवार खड़ा करना जारी रखा है, लेकिन परवूर का लगातार कांग्रेस समर्थक झुकाव और सतीसन का व्यक्तिगत जुड़ाव एलडीएफ के लिए इस कठिन पहाड़ी पर चढ़ना जारी रखता है। राजीव चन्द्रशेखर – नेमोम नेमोम केरल भाजपा का राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र है। इसने 2021 में वामपंथ में लौटने से पहले 2016 में पार्टी को पहली और एकमात्र विधानसभा जीत दिलाई। टेक्नोक्रेट से राजनेता और केंद्रीय मंत्री बने राजीव चंद्रशेखर यहां भाजपा के हाई-प्रोफाइल दांव हैं। उनकी उम्मीदवारी नेमोम को दीर्घकालिक आधार में बदलने की पार्टी की मंशा का संकेत देती है। सीपीआई (एम) सीट बरकरार रखने के लिए एक मजबूत उम्मीदवार खड़ा कर रही है, जबकि कांग्रेस भी एक गंभीर दावेदार है – जिससे नेमोम बड़े पैमाने पर द्विध्रुवीय राज्य में एक दुर्लभ त्रिकोणीय मुकाबला बन गया है। जोस के. मणि – पाला केरल कांग्रेस (एम) के प्रमुख जोस के. मणि, जो अब एलडीएफ के साथ गठबंधन कर चुके हैं, पाला पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह सीट ऐतिहासिक रूप से पांच दशकों से अधिक समय तक स्वर्गीय केएम मणि के नेतृत्व में केरल कांग्रेस (एम) के पास रही है, इससे पहले कि यूडीएफ उम्मीदवार मणि सी कप्पन ने 2019 के उपचुनाव में जोस के मणि को हराया था। केके शैलजा – पेरावूर निपाह प्रकोप और सीओवीआईडी -19 से निपटने के लिए जानी जाने वाली एक व्यापक रूप से सम्मानित नेता, केके शैलजा वामपंथ के सबसे पहचानने योग्य चेहरों में से एक हैं। 2021 में मट्टनूर से भारी जीत के बाद, उन्हें पेरावूर से मैदान में उतारा गया है – जो परंपरागत रूप से कांग्रेस के झुकाव वाली सीट है। उनका मुकाबला मौजूदा विधायक सनी जोसेफ से है, जो 2021 में केवल 3,000 से अधिक वोटों से जीते थे। कांग्रेस के ऐतिहासिक रूप से प्रभावी होने लेकिन मार्जिन घटने के साथ, पेरावूर राज्य में सबसे अधिक उत्सुकता से देखे जाने वाले मुकाबलों में से एक बनकर उभरा है। चांडी ओमन – पुथुपल्ली पुथुपल्ली एक निर्वाचन क्षेत्र से कहीं अधिक है – यह कांग्रेस की विरासत सीट है। पांच दशकों से अधिक समय तक इसका प्रतिनिधित्व पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने किया था। उनके बेटे चांडी ओमन ने 2023 के उपचुनाव में 35,000 से अधिक वोटों के अंतर से शानदार जीत हासिल करके उस विरासत को आगे बढ़ाया। पहली बार विधायक बने और बढ़ती राजनीतिक पहचान के साथ, अब उनके सामने इस भावनात्मक गढ़ की रक्षा करने की चुनौती है। सीपीआई (एम) एक बार फिर प्रमुख चुनौती है, लेकिन पुथुप्पल्ली की गहरी कांग्रेस निष्ठा इसे वामपंथियों के लिए एक कठिन मुकाबला बनाती है। जगह : तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम), भारत, भारत पहले प्रकाशित: 07 अप्रैल, 2026, 21:12 IST न्यूज़ इंडिया केरल चुनाव 2026: पिनाराई विजयन से लेकर राजीव चंद्रशेखर तक, स्टार उम्मीदवार फोकस में अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, 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रेप केस में सजा काट रहे नारायण साईं को तलाक:इंदौर की फैमिली कोर्ट ने दी मंजूरी; पत्नी को 2 करोड़ रुपए एलुमनी का आदेश

मध्यप्रदेश के इंदौर में फैमिली कोर्ट ने नारायण साईं और उनकी पत्नी जानकी के बीच लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद में तलाक को मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने नारायण साईं को पत्नी को 2 करोड़ रुपए स्थायी भरण-पोषण (एलुमनी) देने का आदेश दिया है। यह मामला करीब आठ साल तक कोर्ट में चला। कोर्ट ने 2 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रखने के बाद आदेश पारित किया था, जिसकी जानकारी मंगलवार को पीड़िता के वकील अनुराग गोयल ने दी। बता दें कि नारायण सांई अभी दुष्कर्म के एक मामले में सूरत जेल में बंद है। 24 मार्च को ही उसे इंदौर की फैमिली कोर्ट में पेशी के लिए लाया गया था। 2008 में शादी, 2013 से अलग रह रहे थे याचिका के मुताबिक, जानकी और नारायण साईं की शादी 2008 में हुई थी, लेकिन 2013 से दोनों अलग रह रहे हैं। पत्नी ने पति पर परित्याग का आरोप लगाया और कहा कि लंबे समय से उनके बीच वैवाहिक संबंध नहीं हैं। 5 करोड़ मांगे, कोर्ट ने 2 करोड़ तय किए याचिका में नारायण साईं पर अन्य महिलाओं से संबंध होने के आरोप लगाए गए। साथ ही सूरत की अदालत में दुष्कर्म मामले में सुनाई गई सजा का भी उल्लेख किया गया। पत्नी ने 5 करोड़ रुपए एलुमनी की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 2 करोड़ रुपए देने का आदेश दिया। 50 लाख भरण-पोषण बकाया धारा 125 सीआरपीसी के तहत पहले 50 हजार रुपए प्रतिमाह भरण-पोषण तय किया गया था, लेकिन यह नियमित रूप से नहीं दिया गया। वकील के मुताबिक, करीब 50 लाख रुपए बकाया हैं, जिसकी वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हाई कोर्ट में चुनौती की संभावना जानकारी के अनुसार, इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। संपत्ति के सत्यापन को लेकर इंदौर कलेक्टर को निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक पूरी जानकारी कोर्ट में पेश नहीं हो सकी है। यौन शोषण केस में आजीवन कारावास नारायण साईं को सूरत की दो बहनों के साथ रेप के मामले में आजीवन कारावास की सजा हुई थी। साल 2013 में सूरत की दो बहनों ने केस दर्ज कराया था। छोटी बहन ने नारायण साईं के खिलाफ यौन शोषण का मामला दर्ज कराया था, जबकि बड़ी बहन ने उसके पिता आसाराम के खिलाफ शिकायत की थी। छोटी बहन के आरोप के अनुसार, नारायण साईं ने 2002 से 2005 के बीच उसके साथ कई बार रेप किया था। पीड़िता आसाराम के आश्रम की ‘सेविका’ थी। उसने सूरत के जहांगीरपुरा आश्रम, गांभोई आश्रम, पटना आश्रम, काठमांडू आश्रम और मध्य प्रदेश के मेघनगर आश्रम ले जाकर रेप करने का आरोप लगाया था।







