वेनिस फिल्म फेस्टिवल में ऑस्कर विजेता निर्देशक एलेक्स गिब्नी की करीब चार घंटे लंबी डॉक्यूमेंट्री ने इलॉन मस्क की कहानी को अलग नजरिए से पेश किया है। फिल्म में मस्क की पूर्व पत्नी, पूर्व गर्लफ्रेंड और पुराने सहयोगियों ने उनके व्यवहार, सोच और सत्ता के प्रति रवैये को लेकर कई दावे किए हैं। डॉक्यूमेंट्री की कहानी 1990 के दशक से शुरू होती है, जब मस्क महत्वाकांक्षी कारोबारी के तौर पर आगे बढ़ रहे थे। उस समय उनके लक्ष्य जलवायु संकट से लड़ना और अंतरिक्ष यात्रा को सस्ता बनाना जैसे विचारों से जुड़े थे। हालांकि, गिब्नी का दावा है कि समय के साथ मस्क की महत्वाकांक्षा ऐसी स्थिति में पहुंच गई, जहां उन्होंने अपने लक्ष्यों को नैतिकता और कानून से ऊपर रखना शुरू कर दिया। फिल्म में मंगल पर बस्ती बसाने और ऑटोनॉमस कारों जैसे मस्क के वादों पर भी सवाल उठाए गए हैं। गिब्नी का दावा है कि ये वादे निवेशकों को आकर्षित करने और मस्क की छवि मजबूत करने का जरिया बन गए। ‘इतनी शक्ति किसी एक व्यक्ति के पास होना खतरनाक’ गिब्नी कहते हैं, “लोग मान लेते हैं कि बेहद अमीर व्यक्ति सनकी नहीं हो सकता। लेकिन असल चिंता तब होती है, जब कोई शख्स बेहद अमीर और ताकतवर होने के साथ असामान्य सोच भी रखता हो।” मस्क के करीबी रहे न्यूरोसाइंटिस्ट सैम हैरिस कहते हैं, “बिना जनता के चुने गए व्यक्ति के पास इतनी शक्ति होना खतरनाक है, क्योंकि इसका असर राजनीति, अर्थव्यवस्था और वैश्विक समीकरणों तक पड़ता है।” इंसानों को पेट्स की तरह कंट्रोल करेंगी मशीनें डॉक्यूमेंट्री में मस्क की पहली पत्नी जस्टिन विल्सन का दावा है कि मस्क महिलाओं को बच्चे पैदा करने वाली मशीन के तौर पर देखते हैं। उनके मुताबिक, मस्क मानते हैं कि एक महिला की जगह दूसरी महिला आसानी से ले सकती है। फिल्म में मस्क के AI और भविष्य को लेकर विचारों का भी जिक्र है। उनके मुताबिक, इंसान किसी कृत्रिम सिमुलेशन में रह रहे हो सकते हैं और भविष्य में मशीनें इंसानों को पालतू जानवरों की तरह नियंत्रित कर सकती हैं। डॉक्यूमेंट्री के अनुसार, मस्क ने कंप्यूटर वैज्ञानिक जेफ्री हिंटन के साथ भी ऐसे विचार साझा किए थे।












































