केसर दूध और नारियल पानी पीने से बच्चा सच में गोरा पैदा होता है! सच है या मिथ?

saffron milk coconut water fair baby myth vs reality: ‘वंदना ने जैसे ही कंसीव किया उसे हर तरफ से सलाहें मिलने लगीं. कभी बड़ी बहन फोन पर कहती कि नारियल पानी पीना शुरू कर दे और आखिरी तक नहीं छोड़ना, बच्च दूध सा सफेद होगा. कभी जेठानी और ननद सलाह देने लगती कि संतरा और सौंफ खाती रहना बच्चे रंग एकदम सफेद होगा. तो कभी बैंगन की सब्जी या काले रंग का कोई फल जैसे जामुन या आलू-बुखारा खाती तो सासू मां ही टोक देतीं कि ये क्यों खाया काला बच्चा पैदा करोगी क्या? पहले तो वंदना को ये बातें काफी अच्छी लगीं कि चलो सभी बहुत केयर कर रहे हैं, लेकिन फिर उसे अचानक झुंझलाहट होने लगी कि खाने-पीने से कैसे बच्चे का रंग गोरा या काला हो सकता है? हालांकि वह कई बार अपने लाख मन करने के बाद भी कुछ चीजों से परहेज करने लग गई तो कुछ चीजों को जबदस्ती अपनी डाइट में शामिल कर लिया. ये कहानी सिर्फ वंदना की नहीं है, ऐसी लाखों वंदनाएं हैं जो प्रेग्नेंसी के दौरान ऐसी सलाहों को झेलती हैं या एक बार इससे गुजरने के बाद खुद भी दूसरों को देने लगती हैं.’ लेकिन सवाल उठता है कि क्या वास्तव में नारियल का पानी पीने, संतरा खाने, केसर का दूध पीने, सफेद चीजें खाने से बच्चा गोरा पैदा होता है और काली चीजें खाने से बच्चा काला पैदा होता है? क्या खाने पीने से बच्चे का रंग निर्धारित होता है? ये मिथ है या हकीकत? मेडिकल साइंस क्या कहता है? आइए जानते हैं. आमतौर पर दादी-नानी और महिलाओं की बातों से लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी सलाह भरी पड़ी हैं लेकिन मेडिकल रिसर्च और वैज्ञानिक अध्ययनों की मानें तो रंग की बात पूरी तरह मिथक (myth) है. बच्चे का रंग जीन (genetics) से तय होता है, न कि मां के आहार से. हालांकि कुछ रिसर्च बताती हैं कि अगर मां पोषणयुक्त आहार लेती है या प्रोटीन इंटेक ठीक रहता है तो बच्चे के चेहरे की बनावट पर इसका असर पड़ता है. नेचर कम्यूनिकेशन में प्रकाशित एक स्टडी कहती है कि mTOR सिग्नलिंग पाथवे जानवरों और मनुष्यों में चेहरे की संरचना के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है, जो प्रोटीन और अमीनो एसिड्स के प्रति संवेदनशील होता है. स्टडी कहती है कि ऐसा चूहों और इंसानों में देखा गया है कि गर्भावस्था में प्रोटीन का इंटेक अच्छा रखने से पेट में पल रहे बच्चे के चेहरे का निर्माण काफी बेहतर होता है और उसमें कमियां नहीं रहतीं. बच्चे के बालों पर भी पड़ता है खान-पान का असर अमेरिका में हुई एक अन्य स्टडी दावा करती है कि चूहों पर हुए अध्ययन में देखा गया कि मां द्वारा गर्भ में लिया गया पोषणयुक्त आहार बच्चे के बालों पर भी असर डालता है. इसमें बच्चे के बालों की ग्रोथ से लेकर उसका रंग तक शामिल है. स्टडी कहती है कि जो माएं प्रेग्नेंसी में विटामिन बी12, फॉलिक एसिड, कॉलिन और बीटाइन ठीक मात्रा में लेती हैं तो उनके गर्भ में पल रहे बच्चों के बालों का रंग ज्यादा गहरा और चमकदार हो सकता है. बच्चे के रंग को लेकर क्या है हालांकि अगर बच्चे की त्वचा के रंग की बात करें तो मेलानिन नामक पिगमेंट पर निर्भर करता है, जो माता-पिता दोनों के जीन से आता है. साइंस कहती है कि बच्चे की त्वचा का रंग मां और पिता की त्वचा के रंग का मिला-जुला होता है. गर्भावस्था में कोई भी आहार या पेय बच्चे के जीन को बदल नहीं सकता. अभी तक ऐसा कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो केसर या नारियल पानी को बच्चे के रंग से जोड़ता हो. हालांकि केसर (सैफरन) के बारे में कई मान्यताएं कहती हैं कि इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो मूड बेहतर कर सकते हैं और पाचन सुधार सकते हैं, इसका सीधा असर बच्चे की ग्रोथ पर पड़ता है और बच्चा स्वस्थ होता है लेकिन त्वचा का रंग जेनेटिक फैक्टर से तय हो ऐसा नहीं है. हेल्थलाइन (2021) की एक रिपोर्ट भी लिखती है कि केसर से बच्चे का रंग गोरा होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. उल्टा, ज्यादा मात्रा में केसर लेने से गर्मी बढ़ने और गर्भपात का खतरा बढ़ा सकता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह से ही सीमित मात्रा (आमतौर पर 2-3 धागे) लेनी चाहिए. नारियल पानी के हैं ये फायदे नारियल पानी की बात करें तो यह गर्भावस्था में हाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट्स के लिए अच्छा है.वहीं संतरा विटामिन सी का अच्छा सोर्स है. एक रिसर्च (PMC, 2024) में पाया गया कि ये दोनों मॉर्निंग सिकनेस कम कर सकते हैं लेकिन बच्चे के रंग पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता. कई डॉक्टरों ने इसे साफ तौर पर मिथक बताया है. किसी भी स्टडी में नारियल पानी को फेयर बेबी से जोड़ने का कोई प्रमाण नहीं मिला है. फिर नारियल पानी, संतरा, केसर दूध क्यों लें? वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्भावस्था में आहार बच्चे के समग्र विकास, वजन, दिमाग और इम्यूनिटी के लिए जरूरी है. विटामिन सी, ई, ओमेगा-3, फोलिक एसिड युक्त संतुलित डाइट (फल, सब्जियां, दालें, ड्राई फ्रूट्स) बच्चे की त्वचा को स्वस्थ बनाती हैं, ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को अपने स्वास्थ्य के लिए और बच्चे के लिए न्यूट्रीशनल फूड के साथ इन चीजों को लिया जा सकता है, लेकिन ध्यान रहे कि इससे गोरे होने का कोई प्रमाण नहीं है. मिथकों के चक्कर में न छोड़ें पोषणयुक्त फूड इसलिए जरूरी है कि ऐसे मिथकों पर भरोसा करके महिलाएं जरूरी पोषण और न्यूट्रीशनल फूड लेना न छोड़ें, ऐसा करने से नुकसान हो सकता है. आप ये सब भी ले सकती हैं लेकिन अपनी पूरी डाइट लेने के साथ. गर्भवती महिला को डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट से व्यक्तिगत सलाह लेनी चाहिए.
इंपैक्ट फीचर:सीकर की शिक्षा नगरी का शिखर-CLC, उत्कृष्ट परिणामों की 31 वर्षों की अविरल परंपरा

छोटे शहर से राष्ट्रीय पहचान तक की यात्रा, जहां से निकलते हैं टॉपर्स, बनते हैं संस्कारवान नागरिक और गढ़ा जाता है भारत का भविष्य। आज जब पूरे देश में “शिक्षा नगरी” के रूप में सीकर का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है, तो इसके मूल में एक दूरदर्शी सोच, निरंतर परिश्रम और उत्कृष्ट परिणामों की लंबी परंपरा का योगदान है। वर्ष 1996 में स्थापित CLC ने उस समय एक ऐसे सपने को साकार किया, जिसे उस दौर में कल्पना मात्र माना जाता था। जब बड़े शहरों के बाहर मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी की बात भी नहीं होती थी, तब CLC ने सीकर की धरती पर इस दिशा में एक क्रांतिकारी शुरुआत की। यह वही शुरुआत थी, जिसने न केवल एक संस्थान की नींव रखी, बल्कि पूरे क्षेत्र की शैक्षणिक दिशा को बदल दिया। वर्ष दर वर्ष उत्कृष्ट परिणाम, राष्ट्रीय स्तर की टॉप रैंक और हजारों चयन के साथ CLC ने सीकर को देश के शिक्षा मानचित्र पर स्थापित किया। आज 31 वर्षों की गौरवशाली यात्रा के बाद भी CLC निरंतर अपनी श्रेष्ठता को बनाए रखते हुए छात्रों और अभिभावकों की पहली पसंद बना हुआ है। शिक्षा, संस्कार, सुरक्षा और सफलता—CLC का मूल दर्शन: CLC केवल एक कोचिंग संस्थान नहीं, बल्कि एक संपूर्ण शैक्षणिक प्रणाली है, जहां शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों पर विशेष बल दिया जाता है। यहां का उद्देश्य Doctor, IITian, NDA Officers बनाने के साथ ही ऐसे जिम्मेदार और संस्कारवान नागरिक तैयार करना है, जो समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। यही कारण है कि CLC से निकलने वाला प्रत्येक छात्र अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ-साथ नैतिक मूल्यों से भी समृद्ध होता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्टता का नया मानदंड: NEET और JEE जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में CLC ने वर्षों से शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है। वर्ष 2024 और 2025 में कुल 3002 चयन इस बात का प्रमाण हैं कि यहां की शैक्षणिक गुणवत्ता कितनी सशक्त है। CLC के प्रतिभाशाली छात्र निशांत कुमार ने कक्षा 12 के साथ ही AIIMS Delhi में अपना स्थान सुनिश्चित किया, वहीं ओजल राव और स्वीटी ढाका ने भी AIIMS Delhi में प्रवेश प्राप्त कर संस्थान का नाम गौरवान्वित किया। इसी क्रम में प्रशांत ने IIT-JEE में अपनी श्रेणी में AIR-1 प्राप्त कर प्रतिष्ठित IIT Bombay में प्रवेश लेकर एक नई मिसाल स्थापित की। JEE Main 2026 में शुभम जांगिड़ ने 12वीं के साथ 99.923 percentile प्राप्त किए, वहीं 33 classroom CLCians ने 99 percentile से अधिक स्कोर कर CLC की निरंतर उत्कृष्टता को सिद्ध किया। स्कूल शिक्षा में भी सर्वोच्च स्थान: CLC द्वारा संचालित CBSE स्कूल CLC International School (CIS) और राजस्थान बोर्ड का CLC High School (CHS) शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां स्थापित कर रहे हैं। CIS एक अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त अल्ट्रा मॉडर्न स्कूल है, जहां Robotics, Coding, Language Lab सहित 20 से अधिक एक्टिविटी लैब्स उपलब्ध हैं। यहां राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को खेलों और अन्य गतिविधियों में प्रशिक्षण दिया जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए छात्र अनिरुद्ध किशनावत ने SQAY प्रतियोगिता में 2 Gold, 1 Silver और 1 Bronze Medal प्राप्त कर देश का नाम रोशन किया। वहीं CHS राजस्थान बोर्ड में उत्कृष्ट परिणामों के लिए जाना जाता है। वर्ष 2026 के परिणामों में कक्षा 10 में 11 और कक्षा 12 में 20 State Merits सहित कुल 31 State Merits प्राप्त करना इसकी गुणवत्ता को दर्शाता है। कृषि संकाय में कविता ने 97.20 प्रतिशत अंक प्राप्त कर राज्य मेरिट में प्रथम स्थान हासिल किया, विज्ञान वर्ग में अर्पित कुमावत ने 99 प्रतिशत अंक प्राप्त कर पांचवां स्थान प्राप्त किया, कला वर्ग में भारती स्वामी ने 98.20 प्रतिशत अंक के साथ आठवां स्थान प्राप्त किया, वहीं कक्षा 10 में कनिष्का मील ने 99 प्रतिशत अंक के साथ छठा स्थान प्राप्त किया। Pre Foundation से ही सफलता की मजबूत शुरुआत: CLC का Pre Foundation Wing कक्षा 6 से 10 तक अंग्रेजी माध्यम में संचालित होता है, जहां छात्र प्रारंभिक स्तर से ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर देते हैं। यहां National एवं International Olympiads, STSE, NSEJS जैसी परीक्षाओं की तैयारी करवाई जाती है। STSE 2025 में 91 छात्रों का चयन इस बात का प्रमाण है कि CLC भविष्य के टॉपर्स को प्रारंभिक स्तर से ही तैयार करता है। Foundation और Target Courses—सफलता की सुनिश्चित राह: CLC में कक्षा 11 और 12 के लिए संचालित Foundation Courses छात्रों को बोर्ड परीक्षा के साथ ही अपनी मंजिल तक पहुंचने में मदद करते हैं। AIIMS Delhi और IIT Bombay में 12वीं के साथ चयन इसके सशक्त उदाहरण हैं। इसके साथ ही Target Courses 12वीं के बाद छात्रों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। NDA Academy—देश सेवा की दिशा में उत्कृष्टता: CLC NDA Academy ने NDA, Air Force और Navy की तैयारी में भी अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है। आयुष यादव का NDA में AIR 36 और विनय प्रताप का AIR 45 के साथ चयन इस गुणवत्ता का प्रमाण है। NDA 2025 में 24 छात्रों का SSB के लिए चयन इस दिशा में संस्थान की निरंतर प्रगति को दर्शाता है। विश्वस्तरीय सुविधाएं और छात्र केंद्रित वातावरण: CLC का Stress-free environment छात्रों को परीक्षा के दबाव से दूर रखते हुए उन्हें लक्ष्य के प्रति केंद्रित बनाता है। छात्रावासों में सुरक्षित और घर जैसा वातावरण उपलब्ध कराया जाता है, जहां शुद्ध और स्वच्छ भोजन की व्यवस्था रहती है। Study Camp CLC की एक अनूठी पहल है, जिसमें छात्र Day और Night Study Camp के माध्यम से शांत एवं वातानुकूलित वातावरण में अध्ययन करते हैं। Study Material पूर्णतः NCERT आधारित, अपडेटेड और परीक्षा केंद्रित होता है, जो छात्रों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है। प्रोत्साहन और छात्रवृत्ति की सशक्त व्यवस्था: CLC में नियमित रूप से आयोजित मेडल और मोटिवेशन सेरेमनी छात्रों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती हैं। हर रविवार आयोजित होने वाली iSAT Scholarship Exam के माध्यम से छात्रों को 90 प्रतिशत तक छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है, जिससे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है सीकर की पहचान, CLC की उपलब्धि: AIIMS Delhi और IIT Bombay जैसे संस्थानों में हर
दुनिया की इकलौती एक्सरसाइज, जिसे करने से एक बूंद भी पसीना नहीं आता ! शरीर रहता है कूल-कूल

Last Updated:April 07, 2026, 15:39 IST Swimming Health Benefits: स्विमिंग एक ऐसी एक्सरसाइज है, जो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए फायदेमंद है. यह शरीर को ठंडा रखने के साथ-साथ हार्ट हेल्थ सुधारती है, मांसपेशियों को मजबूत बनाती है और जोड़ों पर दबाव कम करती है. आपको जानकर हैरानी होगी कि स्विमिंग करने से तनाव, एंजायटी और डिप्रेशन को कम करने में मदद मिल सकती है. गर्मी में स्विमिंग करना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है. Swimming Benefits in Summer: गर्मी के मौसम में लोग एक्सरसाइज करने से भी बचते हैं. दरअसल एक्सरसाइज करते वक्त पसीना बहुत आता है. कई लोग पसीने से बचने के लिए वर्कआउट ही नहीं करते हैं या गर्मी की वजह से घर से बाहर नहीं निकलते हैं. अगर आप गर्मी में ऐसी एक्सरसाइज करना चाहते हैं, जिसमें आपको गर्मी न लगे, तो स्विमिंग करना शुरू कर दें. स्विमिंग करते वक्त न आपको पसीना आता है और न ही किसी तरह की परेशानी होती है. ठंडे-ठंडे पानी में स्विमिंग करने से गर्मी से राहत मिलती है और शरीर को गजब के फायदे मिलते हैं. भीषण गर्मी से बचने के लिए तैराकी सबसे प्रभावी विकल्प हैं. गर्मियों में स्विमिंग करना बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए फायदेमंद माना जाता है. क्रोनिक बीमारियों से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए भी तैराकी बेहद फायदेमंद है. स्विमिंग करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पानी का उत्प्लावन बल शरीर का वजन कम कर देता है. इससे जोड़ों पर दबाव नहीं पड़ता और दर्द या चोट का खतरा काफी कम हो जाता है. जो लोग गठिया, घुटनों के दर्द या हड्डियों की कमजोरी से परेशान रहते हैं, उनके लिए तैराकी बहुत सुरक्षित और प्रभावी व्यायाम है. यह एरोबिक व्यायाम के साथ-साथ मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाला व्यायाम है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार स्विमिंग करने से दिल की सेहत बूस्ट हो जाती है. इससे शरीर में ब्लड फ्लो सुधर जाता है और ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है. यह डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी बीमारियों वाले लोगों के लिए भी बहुत उपयोगी है. नियमित तैराकी से मांसपेशियों की ताकत, सहनशक्ति, संतुलन और लचीलापन बढ़ता है. गर्मियों में तैराकी का एक और बड़ा लाभ यह है कि यह शरीर का तापमान नियंत्रित रखती है और डिहाइड्रेशन से बचाती है. स्विमिंग करने से मेंटल हेल्थ भी सुधर सकती है. इससे स्ट्रेस, एंजायटी और डिप्रेशन कम होता है, मूड अच्छा रहता है और नींद की गुणवत्ता बढ़ती है. तैरीका के दौरान एंडोर्फिन, डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे अच्छे हार्मोन रिलीज होते हैं, जो खुशी और सुकून का एहसास कराते हैं. कुछ रिसर्च में यह भी सामने आया कि पानी के आस-पास रहने से कोर्टिसोल यानी तनाव हार्मोन कम होता है और ऑक्सीटोसिन बढ़ता है, जिससे व्यक्ति ज्यादा खुश और स्वस्थ महसूस करता है. अकेलापन और सामाजिक अलगाव आजकल बुजुर्गों में आम समस्या है. ग्रुप एक्टिविटी से यह समस्या कम होती है और मानसिक स्वास्थ्य मजबूत होता है. वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि नदियों, झीलों या स्विमिंग पूल जैसे ब्लू स्पेस में समय बिताने से शारीरिक गतिविधि बढ़ती है, तनाव घटता है और स्वास्थ्य बेहतर होता है. अगर आपके घर में स्विमिंग पूल है या आसपास इसकी सुविधा है, तो गर्मियों में आप वहां अक्सर जाकर स्विमिंग करें. इससे न सिर्फ आपकी सेहत बेहतर होगी, बल्कि आप तपिश से भी बच सकते हैं. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 07, 2026, 15:39 IST
आर्टेमिस-II ने अपोलो-13 का गलती से बना रिकॉर्ड तोड़ा:चांद पर जाते समय ऑक्सीजन टैंक फट गया था, मुश्किल से बची थी एस्ट्रोनॉट्स की जान

11 अप्रैल 1970 चांद पर उतरने के मकसद से अमेरिका ने अपोलो-13 मिशन लॉन्च किया। तीन एस्ट्रोनॉट चांद कि तरफ तेजी से बढ़ रहे थे, लेकिन इस दौरान कुछ ऐसा हुआ कि तीनों एस्ट्रोनॉट को बचाने के लिए ग्राउंड कंट्रोल टीम बेहद जटिल रेस्क्यू मिशन चलाना पड़ा। यान पृथ्वी से 400171 किमी दूर पहुंच गया जो एक वर्ल्ड रिकॉर्ड था। कल 6 अप्रैल को रात 11:26 बजे आर्टेमिस II मिशन के 4 एस्ट्रोनॉट्स ने इस रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। इस स्टोरी में अपोलो-13 मिशन की पूरी कहानी। आखिर कैसे एक रेस्क्यू मिशन से वर्ल्ड रिकॉर्ड बना… अपोलो-13 की कहानी को समझने के लिए एक बार इस जानकारी से गुजर जाएं… अपोलो 13 स्पेसक्राफ्ट मुख्य रूप से तीन मॉड्यूल्स से मिलकर बना था: अचानक ऑक्सीजन टैंक नंबर 2 फट गया 13 अप्रैल 1970 अपोलो 13 मिशन को लॉन्च हुए 56 घंटे बीत चुके थे। कमांडर जेम्स ए. लवेल जूनियर, लूनर मॉड्यूल पायलट फ्रेड डब्ल्यू और कमांड मॉड्यूल पायलट जॉन एल. स्विगर्ट इसमें सवार थे। स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी से 3.20 लाख कमी दूर पहुंच चुका था। क्रू इस यान के लैंडिंग मॉड्यूल ‘एक्वेरियस’ की जांच कर रहे थे। अगले दिन अपालो 13 को चांद की कक्षा में प्रवेश करना था। लवेल और हाइस चांद पर चलने वाले पांचवें और छठे इंसान बनने वाले थे। तभी अचानक सर्विस मॉड्यूल का ऑक्सीजन टैंक 2 फट गया। क्रू को लूनर मॉड्यूल में जाने का निर्देश मिला ऑक्सीजन, बिजली और पानी की सप्लाई बंद हो गई। लवेल ने मिशन कंट्रोल को रिपोर्ट किया। उन्होंने कहा- “ह्यूस्टन यहां एक समस्या हो गई है। कमांड मॉड्यूल से ऑक्सीजन लीक हो रही थी और फ्यूल सेल्स तेजी से खत्म हो रहे थे। चांद पर उतरने का मिशन रद्द हो गया। धमाके के एक घंटे बाद, मिशन कंट्रोल ने क्रू को लूनर मॉड्यूल में जाने का निर्देश दिया। इसमें काम चलाने लायक ऑक्सीजन थी। इस मॉड्यूल को केवल अंतरिक्ष यात्रियों को कक्षा में घूम रहे कमांड मॉड्यूल से चांद की सतह तक ले जाने और वापस लाने के लिए बनाया गया था। पानी का कोटा घटाकर पांचवां हिस्सा कर दिया इसकी पावर सप्लाई सिर्फ दो लोगों के लिए 45 घंटे तक चलने लायक थी। अगर अपालो 13 के क्रू को जिंदा धरती पर लौटना था, तो इस लेंडिंग मॉड्यूल को तीन लोगों का बोझ कम से कम 90 घंटे तक उठाना था। अंतरिक्ष में 3 लाख किमी से ज्यादा का रास्ता पार करना था। ऊर्जा बचाने के लिए क्रू ने पानी का कोटा घटाकर पांचवां हिस्सा कर दिया। केबिन का तापमान जमा देने वाली ठंड से बस कुछ ही डिग्री ऊपर रखा। कमांड मॉड्यूल के चौकोर लिथियम हाइड्रोक्साइड कैनिस्टर, लूनर मॉड्यूल के सिस्टम के गोल छेद में फिट नहीं बैठ रहे थे। इसका मतलब था कि कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालना एक बड़ी समस्या थी। मिशन कंट्रोल ने यान में मौजूद चीजों की मदद से एक जुगाड़ू अडैप्टर तैयार किया। अपोलो के क्रू ने उनके मॉडल को कॉपी कर लिया। इसमें लगा नेविगेशन सिस्टम भी बहुत ही साधारण था। 15 अप्रैल को अपोलो 13 ने पृथ्वी से दूरी का रिकॉर्ड बनाया 14 अप्रैल को अपालो 13 ने चांद का चक्कर लगाया। स्विगर्ट और हाइस ने तस्वीरें लीं और लवेल ने सबसे कठिन मैनुअर के बारे में मिशन कंट्रोल से बात की। यह पांच मिनट का इंजन बर्न था, जिससे LM को इतनी रफ्तार मिल सके कि वह ऊर्जा खत्म होने से पहले घर लौट आए। चांद के पिछले हिस्से का चक्कर लगाने के दो घंटे बाद, क्रू ने लैंडिंग मॉड्यूल के छोटे डिसेंट इंजन को चालू किया। अपालो 13 घर वापसी की राह पर था। 15 अप्रैल 1970 को अपालो 13 चांद के पिछले हिस्से में उसकी सतह से 254 किमी और पृथ्वी की सतह से 4,00,171 किमी दूर था। मिशन कंट्रोल को यान की हीट शील्ड खराब होने का डर था 17 अप्रैल को कमांड मॉड्यूल चालू किया गया। पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने से एक घंटे पहले लैंडिंग मॉड्यूल को कमांड मॉड्यूल से अलग किया गया। दोपहर करीब 1 बजे यान ने पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया। मिशन कंट्रोल को यान की हीट शील्ड खराब होने का डर था। उन्होंने क्रू से बिना किसी रेडियो संपर्क के चार मिनट इंतजार किया। फिर, अपालो 13 के पैराशूट दिखाई दिए। तीनों अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित रूप से प्रशांत महासागर में उतर गए। इस तरह गलती से इस मिशन में वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बना और तीनों अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर भी लौट आएं। ये खबर भी पढ़ें… अपोलो-13 का 56 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा:पृथ्वी से 4 लाख किमी से ज्यादा दूर पहुंचे 4 एस्ट्रोनॉट्स; अब चांद की ग्रेविटी की मदद से वापस आएंगे पूरी खबर पढ़े…
LPG Cylinder Limit Doubled for States; Quota for Students & Migrants

नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 5KG वाले फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) सिलेंडरों का डेली लिमिट का कोटा दोगुना कर दिया है। बढ़ा हुआ कोटा खास तौर पर प्रवासी मजदूरों के लिए रिजर्व रहेगा। सरकार ने 2-3 मार्च की औसत सेल के आधार पर 5KG वाले LPG सिलेंडर की एक्स्ट्रा सप्लाई देने का फैसला किया है, जो पहले से तय 20% की लिमिट से अलग होगी। अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से LPG की सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसलिए प्रवासी मजदूरों और कम आय वाले वर्ग को राहत देने के लिए यह फैसला लिया गया है। बिना एड्रेस प्रूफ मिलेगा 5KG वाला सिलेंडर केंद्र सरकार ने एक दिन पहले ही 5Kg वाले LPG सिलेंडर की बिक्री के नियमों को आसान बना दिया है। अब कोई भी व्यक्ति बिना किसी एड्रेस प्रूफ के छोटा गैस सिलेंडर खरीद सकेगा। इस सिलेंडर को खरीदने के लिए कोई सिक्योरिटी राशि जमा करने की जरूरत भी नहीं होगी। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, यह कदम प्रवासी मजदूरों और उन लोगों के लिए उठाया गया है, जिनके पास शहर में कोई स्थायी पता नहीं है। अब ग्राहकों को ऑथोराइज्ड डिस्ट्रीब्यूटर के पास जाकर सिर्फ अपनी कोई भी एक फोटो-ID दिखानी होगी और वे तुरंत सिलेंडर ले सकेंगे। मंत्रालय ने साफ किया है कि 5 किलो वाले सिलेंडर के लिए अब बहुत सारे डॉक्यूमेंट्स की जरूरत नहीं है। ग्राहक आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी जैसे डॉक्यूमेंट दिखाकर सिलेंडर ले सकते हैं। आप साल में जितनी बार चाहें, उतनी बार इसे रिफिल करवा सकते हैं। सप्लाई पर असर के कारण छोटे सिलेंडरों की उपलब्धता बढ़ाई पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव की वजह से एनर्जी लॉजिस्टिक्स पर असर पड़ा है। इसे देखते हुए सरकार ने छोटे सिलेंडरों की उपलब्धता बढ़ाने का भी फैसला किया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 23 मार्च से अब तक लगभग 6.6 लाख छोटे सिलेंडर बेचे जा चुके हैं। अकेले 4 अप्रैल को ही 90,000 यूनिट्स की बिक्री हुई। अधिकारियों का कहना है कि डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट्स पर स्टॉक की कोई कमी नहीं है। कहां से खरीद सकते हैं ‘छोटू’ सिलेंडर? ग्राहक इसे अपनी सुविधा के अनुसार कई जगहों से खरीद सकते हैं: गैस एजेंसियां: इंडेन, एचपी अप्पू या भारतगैस मिनी की अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटरशिप से। पेट्रोल पंप: तेल कंपनियों के रिटेल आउटलेट्स पर यह उपलब्ध है। लोकल स्टोर: चुनिंदा किराना दुकानों और स्थानीय सुपरमार्केट से भी इसे लिया जा सकता है। प्रवासियों के लिए HPCL आउटलेट्स पर 11 हेल्प डेस्क बनाई कामकाज के लिए दूसरे शहरों में रहने वाले लोगों की मदद के लिए सरकार ने HPCL के चुनिंदा आउटलेट्स पर 11 विशेष हेल्प डेस्क बनाई हैं। ये डेस्क उपभोक्ताओं को नजदीकी डिस्ट्रीब्यूटर की जानकारी देंगे और उन्हें बिना किसी परेशानी के सिलेंडर दिलाने में मदद करेंगे। घरेलू गैस की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर है; एक ही दिन में 51 लाख से ज्यादा डोमेस्टिक सिलेंडरों की डिलीवरी की गई है। खास बात यह है कि कुल मांग का 95% हिस्सा अब ऑनलाइन बुकिंग के जरिए आ रहा है। घरेलू गैस की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर है; एक ही दिन में 51 लाख से ज्यादा डोमेस्टिक सिलेंडरों की डिलीवरी की गई है। खास बात यह है कि कुल मांग का 95% हिस्सा अब ऑनलाइन बुकिंग के जरिए आ रहा है। कालाबाजारी पर एक्शन, 50 हजार सिलेंडर जब्त, 36 एजेंसियां सस्पेंड सप्लाई की कमी का फायदा उठाकर मुनाफाखोरी करने वालों पर सरकार सख्त है। मार्च से अब तक जमाखोरी विरोधी अभियान के तहत 50,000 से ज्यादा सिलेंडर जब्त किए गए हैं। नियमों के उल्लंघन पर 1,400 से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर्स को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। 36 गैस डीलरशिप को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। अधिकारियों ने साफ कहा है कि घरेलू सप्लाई में बाधा डालने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। कमर्शियल सप्लाई में 30% की कटौती, घरों और अस्पतालों को प्राथमिकता रसोई गैस के संकट को टालने के लिए सरकार ने प्राथमिकताएं तय कर दी हैं। घरेलू उपभोक्ताओं, अस्पतालों और स्कूलों जैसे जरूरी संस्थानों को पूरी सप्लाई दी जा रही है। इसके लिए कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई को घटाकर प्री-क्राइसिस लेवल का 70% कर दिया गया है। वहीं, फर्टिलाइजर प्लांट्स के लिए राहत की खबर है; 6 अप्रैल से उन्हें 90% गैस सप्लाई मिलनी शुरू हो जाएगी। हमेशा ऑथोराइज्ड गैस एजेंसी से ही सिलेंडर लें। बिना एड्रेस प्रूफ वाला यह सिलेंडर ‘फ्री ट्रेड मार्केट’ का हिस्सा है, इसलिए इसकी कीमत सामान्य डोमेस्टिक सिलेंडर से अलग हो सकती है। सिलेंडर लेते समय उसकी एक्सपायरी डेट जरूर चेक करें। ——————— ये खबर भी पढ़ें… घर के पास PNG पाइपलाइन, तो कनेक्शन लेना ही होगा: कंपनी 3 महीने का नोटिस देगी, कनेक्शन नहीं लिया तो LPG सप्लाई बंद होगी अगर आपके घर के पास गैस पाइपलाइन आ गई है और आपने PNG कनेक्शन नहीं लिया है, तो अगले 3 महीने में आपके घर आने वाला LPG सिलेंडर बंद कर दिया जाएगा। मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध और गैस की किल्लत को देखते हुए केंद्र सरकार ने ‘नेचुरल गैस और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर 2026’ लागू किया है। इसके तहत अब पाइप वाली गैस (PNG) का कनेक्शन लेना अनिवार्य होगा। हालांकि, इसके लिए पहले नोटिस दिया जाएगा। सूचना मिलने के बाद भी अगर कोई कनेक्शन नहीं लेता, तो 90 दिन बाद उसकी LPG सप्लाई रोक दी जाएगी। साथ ही सोसाइटियों को 3 दिन में पाइपलाइन की मंजूरी भी देनी होगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
लंबी उम्र के ‘जेनेटिक ब्लूप्रिंट’ पर काम:लॉन्जिविटी इंडिया बना रहा है भारतीयों के लिए सेहत का ‘स्वदेशी पैमाना’

जब आप ब्लड टेस्ट करवाते हैं और रिपोर्ट में आपकी वैल्यू नॉर्मल आती है, तो क्या आप वाकई सुरक्षित हैं? अब तक भारत में इस्तेमाल होने वाले स्वास्थ्य के मानक या तो पश्चिमी देशों की नकल हैं या बहुत पुराने डेटा पर आधारित हैं। लेकिन अब भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बेंगलुरु इस विसंगति को दूर करने के लिए एक मिशन चला रहा है-लॉन्जिविटी इंडिया प्रोजेक्ट। भारतीयों का शरीर, जेनेटिक्स, खान-पान और प्रदूषण पश्चिमी देशों से बिल्कुल अलग है। इसलिए, हमारे स्वास्थ्य को नापने का पैमाना भी अलग होना चाहिए। वर्तमान में हम जिन नॉर्मल वैल्यू को आधार मानकर इलाज करते हैं, वे भारतीयों के लिए सटीक नहीं हैं। उदाहरण, भारत में महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर अक्सर कम पाया जाता है। अगर हम 20 हजार स्वस्थ भारतीयों के सैंपल का वैज्ञानिक विश्लेषण करें, तो मुमकिन है कि भारत के लिए एक नई और ज्यादा सटीक नॉर्मल वैल्यू सामने आए। यह प्रोजेक्ट स्वदेशी बेसलाइन तैयार करने की कोशिश है। रिसर्चर खोज रहे हैं उम्र बढ़ने के साथ इम्यून सिस्टम में क्या बदलाव आते हैं इस मिशन के तहत दो प्रमुख रिसर्च चल रही हैं। एक है – BHARAT स्टडी। इसका मतलब है बायोमार्कर्स ऑफ हेल्दी एजिंग, रेजिलिएंस, एडवर्सिटी एंड ट्रांजिशन। इसके जरिए स्वस्थ भारतीयों के मॉलिक्यूलर डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि यह समझा जा सके कि उम्र बढ़ने के साथ हमारे इम्यून सिस्टम में क्या बदलाव आते हैं। दूसरी रिसर्च है – ऑर्गन एजिंग प्रोजेक्ट: इसके तहत शोध चल रहा है कि शरीर के अलग-अलग अंग किस रफ्तार से बूढ़े होते हैं। इन प्रोजेक्ट्स के लिए 2030 तक 10,000 स्वस्थ भारतीयों के सैंपल इकट्ठा करना (आदर्श लक्ष्य 1 लाख का)है। इस प्रोजेक्ट में आईआईएससी के साथ-साथ आईआईटी दिल्ली, एम्स और आईआईटी हैदराबाद जैसे संस्थान भी जुड़ रहे हैं। हालांकि अभी यह डेटा कलेक्शन के चरण में है, लेकिन वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि 2027 से 2030 के बीच इसके ऐसे परिणाम आएंगे, जो चिकित्सा जगत की दिशा बदल देंगे। यह कोई ‘अमृत’ खोजने का दावा नहीं है। उम्र को रोका नहीं जा सकता, लेकिन बुढ़ापे में लाचारी को कम किया जा सकता है। इस रिसर्च का अंतिम लक्ष्य भारतीयों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है, ताकि हम उम्र के आखिरी पड़ाव तक सक्रिय और स्वस्थ रहें। इन रिसर्च से होगा यह फायदा – कैंसर के पैटर्न को समझना आसान होगा – ऑर्गन फेल्योर की दर को कम किया जा सकेगा। – भारतीयों की औसत उम्र में इजाफा हो सकेगा।
Lalit Modi Target BCCI; IPL Cricket Business Loss; Format Controversy

स्पोर्ट्स डेस्क1 घंटे पहले कॉपी लिंक IPL के पूर्व कमिश्नर ने कहा कि मौजूदा IPL फॉर्मेट से BCCI और फ्रेंचाइजी को हर सीजन करीब 2,400 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। उनके मुताबिक, कम मैच इसकी सबसे बड़ी वजह है। उन्होंने कहा, यह वो नहीं जो हमने बेचा था। उन्होंने स्पोर्ट्स स्टार के इंटरव्यू में कहा, शुरू में हर टीम को एक-दूसरे से दो बार खेलने का प्लान था। 2022 में 10 टीम होने पर 90 लीग मैच और चार नॉकआउट मैच होते। हालांकि, IPL ने होम-एंड-अवे सिस्टम बदलकर 74 मैच ही रखे। इससे फ्रेंचाइजियों को नुकसान हो रहा है। यह वो नहीं जो हमने बेचा था। उन्होंने कहा, हर मैच के लिए BCCI को 50% और बाकी 50% टीमों में बांटा जाता है। इससे टीमों को 20 मैचों का नुकसान हो रहा है। ललित मोदी के खिलाफ IPL में खिलाड़ियों की बोली में हेराफेरी, मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के उल्लंघन के मामले चल रहे हैं। होम-एंड-अवे फॉर्मेट में छिपी है असली वैल्यू उन्होंने स्पोर्ट्सस्टार से कहा, IPL की असली वैल्यू होम-एंड-अवे फॉर्मेट में है। अगर कैलेंडर में मैचों की जगह नहीं थी, तो टीमों की संख्या नहीं बढ़ानी चाहिए थी। उन्होंने कहा, हमने IPL इस तरह नहीं बेचा था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सभी टीमों ने इस बदलाव पर सहमति दी थी और कहा कि ऐसा नहीं हुआ होगा। 94 मैच होते तो बढ़ती कमाई उन्होंने कहा, अगर होम-एंड-अवे फॉर्मेट में 94 मैच होते और हर मैच की कीमत 118 करोड़ रुपए होती, तो मीडिया राइट्स से 2,400 करोड़ रुपए की अतिरिक्त कमाई होती। यानी BCCI को 2,400 करोड़ रुपए का अतिरिक्त रेवेन्यू मिलता। इसमें 1,200 करोड़ रुपए 10 टीमों को मिलते, हर टीम को 120 करोड़ रुपए, और टीमों की वैल्यू बढ़ती। IPL के तीसरे सीजन में सस्पेंड हुए ललित मोदी को 2010 में IPL के तीसरे सीजन के फाइनल के तुरंत बाद BCCI ने सस्पेंड कर दिया। उसी साल अंडरवर्ल्ड से धमकियों का हवाला देते हुए वे भारत छोड़कर लंदन चले गए। बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनके खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया और उनका पासपोर्ट भी रद्द कर दिया गया। तब से ललित मोदी लंदन में रह रहे हैं। उनके खिलाफ IPL में खिलाड़ियों की बोली में हेराफेरी, मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के उल्लंघन के मामले चल रहे हैं। ——————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… IPL में आज राजस्थान vs मुंबई मैच:हार्दिक की फिटनेस पर सस्पेंस IPL में मंगलवार को मुंबई इंडियंस (MI) का सामना राजस्थान रॉयल्स (RR) से होगा। यह मुकाबला गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में खेला जाएगा। टॉस शाम 7 बजे होगा। जबकि 7:30 बजे से मैच शुरू होगा। मुंबई के लिए सबसे बड़ी चिंता उनके कप्तान हार्दिक पांड्या की फिटनेस है। वे पिछला मैच बीमारी के कारण नहीं खेल पाए थे। पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
ऑल्टोस लैब खोज रही है जवान रहने का फॉर्मूला:अब बीमारी नहीं, बुढ़ापे का भी होगा इलाज

कैलिफोर्निया की सिलिकॉन वैली। इंसान ने सदियों से अमृत की तलाश की है और विज्ञान की दुनिया में अब यह तलाश माइक्रोस्कोप के नीचे कोशिकाओं तक पहुंच गई है। इसी काम में लगी है ऑल्टोस लैब्स। हालांकि इसका लक्ष्य सिर्फ उम्र बढ़ाना नहीं, बुढ़ापे का उपचार करना भी है। असल में उम्र बढ़ना केवल जेनेटिक्स का खेल नहीं है। यह एपिजेनेटिक बदलावों का परिणाम है। सरल शब्दों में कहें तो हमारे शरीर की कोशिकाओं के पास एक बायोलॉजिकल सॉफ्टवेयर होता है। समय के साथ, प्रदूषण, तनाव और उम्र के कारण इस सॉफ्टवेयर में बग्स आ जाते हैं, जिससे कोशिकाएं अपना काम भूलने लगती हैं। ऑल्टोस लैब्स इसी सॉफ्टवेयर को रीसेट करने पर काम कर रही हैं। इसके केंद्र में हैं यामानाका फैक्टर्स। यानी वो जादुई प्रोटीन जो किसी बूढ़ी कोशिका को वापस उसकी युवा अवस्था में ले जा सकते हैं। हम कोशिकाओं की आंशिक रीप्रोग्रामिंग कर रहे हैं। यानी कोशिका की पहचान वही रहेगी, बस उसकी ऊर्जा और मरम्मत करने की क्षमता युवा जैसी हो जाएगी। इस प्रोजेक्ट में बेजोस का धन और नोबेल विजेता वैज्ञानिकों का दिमाग ऑल्टोस लैब्स की ताकत दो स्तंभों पर टिकी है- पूंजी और नोबेल स्तर का ज्ञान। अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस और यूरी मिलनर जैसे अरबपतियों ने इसमें लगभग 25,000 करोड़ रुपए (3 अरब डॉलर) का निवेश किया है। यह इतिहास का सबसे बड़ा स्टार्टअप निवेश माना जाता है। जबकि लैब की कमान नोबेल विजेता वैज्ञानिक शिन्या यामानाका (कोशिका रीप्रोग्रामिंग के जनक) और स्टीव होर्वाथ (बायोलॉजिकल क्लॉक के विशेषज्ञ) जैसे दिग्गजों के हाथों में है। 80 साल की उम्र में कोशिकाओं में होगी 30 की उम्र जैसी ऊर्जा और क्षमता 2022 में शुरुआत के बाद से लैब ने प्रयोगों से साबित कर दिया है कि उम्र के संकेतों को पलटना संभव है। एआई अब कोशिकाओं के व्यवहार को ट्रैक कर रहा है, जिससे यह समझना आसान हो गया है कि कोशिकाएं कब थकती हैं। यदि ऑल्टोस लैब्स सफल होती है, तो हम लंबे समय तक जिएंगे ही नहीं, अंतिम सांस तक स्वस्थ भी रहेंगे। कैंसर, हृदय रोगों का इलाज करने के बजाय, डॉक्टर सीधे बुढ़ापे का इलाज करेंगे। खराब अंगों को बदलने के बजाय, शरीर उन्हें भीतर से खुद ठीक कर लेगा। हम ऐसे भविष्य की ओर जा रहे हैं, जहां 80 साल की उम्र में भी शरीर की कोशिकाएं 30 साल जैसी ऊर्जा से भरी होंगी। हम उम्र के साथ आने वाली कमजोरी को हराना चाहते हैं।
गुड़ शरबत रेसिपी: लू और थकान को कहें बाय-बाय, सिर्फ 5 मिनट में तैयार करें यह देसी एनर्जी ड्रिंक

गुड़ शरबत रेसिपी: बढ़ती धूप और बढ़ती तापमान के बीच बॉडी को चिपकाना टैप करना बेहद जरूरी है। ऐसे में बाजार में मिलने वाले उत्पाद वाले कोल्ड ड्रिंक्स न पीने के बजाय नोबेल से बनी हुई शरबत ही स्वादिष्ट साबित होते हैं। ये सेहत के लिए सबसे अच्छे माने जाते हैं, मूंगफली में गुड़ का शरबत, एक ऐसा ही समय के साथ खाया जाने वाला देसी ड्रिंक। ये सिर्फ शरीर को ही ठंड़ा नहीं करता है, बल्कि इसमें आयरन और कैल्शियम जैसे तत्व लू लगने से बचाते हैं। यह ड्रिंक उन लोगों के लिए सबसे अच्छा है, जो फिट के शौकीन हैं लेकिन सेहत से समझौता नहीं करना चाहते हैं। आइये जानते हैं कि इस ड्रिंक को कैसे तैयार करना सबसे बेहतर तरीका माना जाता है। गुड़ का शरबत बनाने के लिए आवश्यक सामग्री घर पर ये हैं स्वादिष्ट गुड़ के शर्बत बनाने के लिए जरूरी चीजें, उस लिस्ट में सबसे पहले 3 से 4 टेबलस्पून गुड़ के टुकड़े, 1 मोटा स्वादिष्ट ठंडा पानी, आधा छोटा नारियल का रस, एक चुटकी काला नमक, एक चौथाई स्तर का जीरा पाउडर, स्वादिष्ट पुदीने के पत्ते और आवश्यकता अनुसार टुकड़ों के टुकड़े शामिल हैं। गुड़ को चबाने का तरीका रेसिपी की शुरुआत के लिए सबसे पहले एक पेस्टिल जैसे पॉट में पानी लें और इसमें कद्दूकस किया हुआ गुड़ डाल दें। गुड़ को पानी में अच्छी तरह से थपथपाने के लिए कम से कम 5 से 10 मिनट का समय निकालें। इससे गुड़ का स्वादिष्ट फ्लेवर पानी में अच्छा स्वाद मिलता है। मूर्तियाँ या नामचीन कण्ठ को हटा दिया गया जब गुड़ पानी में पूरी तरह से ठंडा हो जाए, तो एक इलेक्ट्रिक चटनी की मदद से इस मिश्रण को दूसरे बर्तन में अच्छा लें। ऐसा करने से गुड़ में मौजूद किसी भी तरह की कलाकृतियां या हीरा कान निकल जाते हैं और आपको एक साफ शरबत मिल जाता है। प्रोडक्ट का ज़ानकारी अब इसमें गुड़ के पानी में नींबू का रस, काला नमक और साथ में जीरा पाउडर मिला हुआ है। नींबू के खटास और काले नमक का स्वाद गुड़ की मिलावट करने का काम करता है, जिससे शरबत का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। ताजगी का खास तड़का अगर आप शरबत में और भी ज्यादा ताजगी चाहते हैं तो पुदीने के टुकड़ों को हाथों से पीसकर दाल दें। पुदीने की चटनी और गुड़ से बनी हुई ये ड्रिंक, एक अलग ही स्तर का तैयार होता है। आदत बनाने का तरीका आखिरी में एक सर्विंग टिलर लें और इसमें अपनी पसंद के हिसाब से बर्फ के टुकड़े डालें। तैयार किए गए मिश्रण को बोतलों में पलटें और ठंडा-ठंडा बनाएं। यह शरबत सिर्फ प्यासा ही नहीं है, बल्कि आपको दिन भर के फ़ुर्टिला भी लेना है। यह भी पढ़ें: दिशा वकानी ने दुखों का पहाड़ तोड़ा, पिता का हुआ निधन
दमोह में कुत्तों ने किया हिरण पर हमला:फुटेरा तालाब पर पानी पीने आया था, बचने के लिए तालाब में लगाई छलांग

दमोह के फुटेरा तालाब पर मंगलवार दोपहर पानी पीने आए एक हिरण पर आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया। इस हमले में हिरण गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय लोगों ने उसे बचाया और वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद हिरण को पशु अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, फुटेरा मोहल्ला स्थित रेलवे क्रॉसिंग के पास फुटेरा तालाब पर हिरण पानी पीने पहुंचा था। तभी आवारा कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया और कई जगह काट कर घायल कर दिया। अपनी जान बचाने के लिए हिरण तालाब में छलांग लगा दी। स्थानीय लोगों ने निकाला बाहर स्थानीय निवासी ऐलू रैकवार ने बताया कि बच्चों ने उन्हें हिरण पर कुत्तों के हमले की सूचना दी। वह तुरंत अपने पड़ोसियों के साथ तालाब पर पहुंचे और कुत्तों को भगाकर हिरण को तालाब से बाहर निकाला। उन्होंने वन विभाग और कोतवाली पुलिस को घटना की जानकारी दी। दो घंटे बाद पहुंचे वनकर्मी रैकवार के अनुसार, वनकर्मी करीब दो घंटे बाद मौके पर पहुंचे। तब तक स्थानीय लोगों ने हिरण को तालाब से बाहर निकाल लिया था और उसके घावों पर प्राथमिक उपचार भी किया था। कुत्तों के काटने से हिरण के शरीर पर कई गहरे घाव हो गए थे। वन विभाग की टीम बाद में घायल हिरण को अपने साथ ले गई। दमोह के डीएफओ ईश्वर जरांडे ने बताया कि घायल हिरण को पशु अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। उन्होंने पुष्टि की कि हिरण की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।







