Indias 500 MW Fast Breeder Reactor Reaches Criticality Stage

Hindi News National Indias 500 MW Fast Breeder Reactor Reaches Criticality Stage | Kalpakkam 5 घंटे पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु के कलपक्कम में सोमवार रात भारत के 500 मेगावॉट ‘प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ का दूसरा स्टेज पूरा हो गया। वो अब ‘क्रिटिकलिटी’ हासिल कर चुका है। इसका मतलब अब वो खुद से परमाणु रिएक्शन करे रहा है और ऊर्जा पैदा करना भी शुरु कर चुका है। रिएक्टर पूरी तरह तैयार होने से अब सिर्फ एक चरण दूर है। इस प्रोजेक्ट में 80% से ज्यादा स्वदेशी तकनीक और उपकरणों का इस्तेमाल हुआ है। अभी सिर्फ रूस के पास फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है। अगर भारत इसे पूरी तरह तैयार कर लेता है, तो ऐसा करने वाला दूसरा देश बन जाएगा। इस रिएक्टर का डिजाइन इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र ने तैयार किया है। रिएक्टर के पूरा होने के बाद पीएम मोदी ने X पर लिखा कि आज भारत ने अपनी परमाणु यात्रा में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है और देश का न्यूक्लियर प्रोग्राम अब और तेजी से आगे बढ़ेगा। कलपक्कम के रिएक्टर प्रोजेक्ट में शामिल वैज्ञानिक। जितना ईंधन खर्च करता है, उससे ज्यादा पैदा करता है इस प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 2003 में हुई थी। इसे बनाने के लिए भारत की 200 से ज्यादा कंपनियों को एक किया गया। फास्ट ब्रीडर रिएक्टर एक खास तरह का परमाणु रिएक्टर है, जिसमें यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ईंधन (MOX) का इस्तेमाल होता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जितना ईंधन खर्च करता है, उससे ज्यादा ईंधन पैदा कर सकता है। यह तकनीक भविष्य में थोरियम आधारित ऊर्जा उत्पादन के लिए भी रास्ता तैयार करती है, जो भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारत के लिए क्यों जरूरी बिजली की बढ़ती मांग: सोलर और विंड एनर्जी मौसम पर निर्भर हैं, जबकि न्यूक्लियर प्लांट लगातार बिजली देते हैं। एक रिएक्टर लाखों घरों की जरूरत पूरी कर सकता है। थोरियम का भंडार: भारत के पास यूरेनियम कम है, लेकिन थोरियम का दुनिया में सबसे बड़ा भंडार है। फास्ट ब्रीडर रिएक्टर थोरियम को यूरेनियम-233 में बदल सकता है। पर्यावरण: भारत ने 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। कोयले के मुकाबले न्यूक्लियर एनर्जी साफ (क्लीन) मानी जाती है। कम जमीन में ज्यादा बिजली: न्यूक्लियर प्लांट, सोलर प्लांट की तुलना में बहुत कम जमीन में उतनी ही बिजली पैदा कर सकते हैं। दुनिया के बाकी देश कहां चीन: दुनिया में सबसे तेजी से नए न्यूक्लियर प्लांट बना रहा है और वैश्विक स्तर पर नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अमेरिका: दुनिया में सबसे ज्यादा चालू परमाणु रिएक्टर हैं, लेकिन अधिकांश प्लांट पुराने हो चुके हैं। भारत: अभी लगभग 3% बिजली परमाणु ऊर्जा से आती है, लेकिन सरकार का लक्ष्य 2047 तक इसे 12 गुना बढ़ाना है। रूस: दुनिया की सबसे एडवांस्ड न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में अग्रणी है और भारत, तुर्की व बांग्लादेश जैसे देशों को परमाणु सहयोग प्रदान करता है। ———————————————— जम्मू-कश्मीर में 16 साल से फरार पाकिस्तानी आतंकी गिरफ्तार:लश्कर का मेंबर था; एक साथी और तीन मददगार भी पकड़े गए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा टेरर मॉड्यूल से जुड़े कुल 5 लोगों को अरेस्ट किया है। इनमें से दो पाकिस्तानी आतंकी हैं, बाकी उनके मददगार हैं। एक आतंकी की पहचान अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरेरा के रूप में हुई है। अब्दुल्ला 16 साल से फरार था। वहीं, दूसरा पाकिस्तानी आतंकी उस्मान उर्फ खुबैब है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Poplar Leaves Benefits: मुंहासे से लेकर जोड़ों के दर्द तक…. पॉपुलर के पत्तों के चौंकाने वाले फायदे, ऐसे करें इस्तेमाल

Last Updated:April 07, 2026, 16:36 IST पॉपुलर के पत्ते न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इनके औषधीय गुण भी अद्भुत हैं. इसमें पाए जाने वाले एंटी-बैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण मुंहासे, खुजली, घाव और दाग-धब्बों को कम करने में मदद करते हैं, जिससे यह एक प्राकृतिक और रामबाण घरेलू उपचार बन जाता है. पॉपुलर के पत्ते मुख्य रूप से अपनी लकड़ी (प्लाईवुड, माचिस) के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन इसके औषधीय गुण भी कम नहीं हैं. पत्तों और छाल में सूजनरोधी और एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं, जिन्हें पारंपरिक रूप से त्वचा रोगों या दर्द निवारक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. यह पेड़ मुख्य रूप से व्यावसायिक उद्देश्य से उगाया जाता है और 5-7 साल में उपयोग के लिए तैयार हो जाता है. डॉक्टर विनीत शर्मा के अनुसार पॉपुलर (चिनार) के पत्ते और विशेषकर उसकी चिपचिपी कलियां औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं. ये श्वसन संबंधी समस्याओं जैसे खांसी और ब्रोंकाइटिस, दर्द निवारण, सूजन कम करने और त्वचा के घाव ठीक करने में सहायक हैं. इनमें सैलिसिन जैसे यौगिक पाए जाते हैं, जो जोड़ों के दर्द और गठिया में राहत देते हैं. इसके अर्क का उपयोग त्वचा की जलन और बवासीर के उपचार में भी किया जाता है. पॉपुलर के पत्ते और कलियाँ त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं. ये मुख्य रूप से सूजन, खुजली, मुंहासे और घावों को ठीक करने में मदद करती हैं. इनमें सैलिसिन, फ्लेवोनोइड्स और फिनोलिक एसिड जैसे सूजन-रोधी और एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा की बीमारियों और सनबर्न में राहत प्रदान करते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google पॉपुलर के पत्ते और पेड़ मुख्य रूप से कृषि-वानिकी के लिए फायदेमंद हैं, न कि सीधे तौर पर घरेलू उपचार के लिए. यह एक तेजी से बढ़ने वाला पेड़ है, जो 5-7 साल में अच्छी कमाई देता है. हालांकि, इसके पत्तों का उपयोग मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने (खाद के रूप में) और अन्य कृषि संबंधी लाभों के लिए किया जा सकता है. पॉपुलर के पेड़ के पत्ते और छाल का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में खांसी, जुकाम और श्वसन नली की समस्याओं को कम करने के लिए किया जाता है. यह पेट में सूजन, घाव और कुछ मामलों में जोड़ों के दर्द में भी राहत देने में सहायक माना जाता है. इसके अर्क में सूजन-रोधी गुण होते हैं, जो सांस लेने में आसानी प्रदान करते हैं. पॉपुलर के पेड़ के पत्ते, छाल और कलियों में दर्द और सूजन कम करने वाले गुण पाए जाते हैं, जो मुख्य रूप से सैलिसिन के कारण होते हैं. यह प्राकृतिक दर्द निवारक के रूप में काम करता है और गठिया, मांसपेशियों के दर्द और जोड़ों की सूजन में राहत प्रदान करने के लिए उपयोग किया जा सकता है. पॉपुलर के पत्तों में एंटी-बैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो मुंहासे, खुजली और घाव जैसी त्वचा समस्याओं में बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इनके पत्तों का पेस्ट या रस दाग-धब्बे कम करने, त्वचा को गहराई से साफ करने और प्राकृतिक निखार लाने में मदद करता है. यह त्वचा के रोगों में एक रामबाण घरेलू उपचार माना जाता है. First Published : April 07, 2026, 15:13 IST
रजनीकांत की 'जेलर 2' में नहीं दिखेंगे शाहरुख:कैमियो ऑफर ठुकराया; बेटी सुहाना की 'किंग' पर फोकस, नहीं चाहते फिल्म से पहले बड़े पर्दे पर दिखें

बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान ने रजनीकांत की फिल्म ‘जेलर 2’ में कैमियो करने से मना कर दिया है। पिंकविला की रिपोर्ट के मुताबिक, शाहरुख फिलहाल अपनी आने वाली फिल्म ‘किंग’ पर पूरा ध्यान देना चाहते हैं। वे नहीं चाहते कि ‘किंग’ की रिलीज से पहले वे किसी भी फिल्म में बड़े पर्दे पर नजर आएं। शाहरुख ने रजनीकांत और फिल्म के मेकर्स से बात कर इस ऑफर को विनम्रता के साथ ठुकरा दिया है। बेटी सुहाना के डेब्यू की वजह से लिया फैसला शाहरुख खान के लिए फिल्म ‘किंग’ कई मायनों में खास है। इसी फिल्म के जरिए उनकी बेटी सुहाना खान बड़े पर्दे पर अपना डेब्यू करने जा रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘जेलर 2’ के मेकर्स चाहते थे कि शाहरुख 5 दिनों का कैमियो शूट करें। शाहरुख को यह आइडिया पसंद भी आया था, लेकिन वे ‘किंग’ की एक्सक्लूसिविटी बनाए रखना चाहते हैं। ‘किंग’ में शाहरुख का एक खास लुक है और वे नहीं चाहते कि उस फिल्म से पहले उनका वही लुक किसी और मूवी में दिखे। अगस्त में रिलीज होनी है ‘जेलर 2’ फिल्म ‘जेलर 2’ के मेकर्स इसे अगस्त 2026 में रिलीज करने का प्लान बना रहे हैं, जबकि शाहरुख की फिल्म ‘किंग’ दिसंबर 2026 के लिए शेड्यूल है। दोनों फिल्मों की टाइमलाइन अलग होने की वजह से शाहरुख और मेकर्स ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला किया। शाहरुख ने खुद रजनीकांत से फोन पर बात की और उनके प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया। शाहरुख ने आश्वासन दिया कि वे भविष्य में उनके साथ काम करने के लिए हमेशा तैयार रहेंगे। रजनीकांत की फिल्म का काम लगभग पूरा नेल्सन दिलीपकुमार के निर्देशन में बन रही ‘जेलर 2’ का काम काफी तेजी से चल रहा है। खुद रजनीकांत ने अप्रैल 2026 में कन्फर्म किया था कि फिल्म की शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी है और अब यह पोस्ट-प्रोडक्शन के आखिरी फेज में है। शाहरुख के मना करने के बाद अब मेकर्स इस खास कैमियो के लिए किसी दूसरे बड़े एक्टर के नाम पर विचार कर रहे हैं। ‘किंग’ में नजर आएगी बड़ी स्टारकास्ट सिद्धार्थ आनंद द्वारा निर्देशित फिल्म ‘किंग’ में शाहरुख और सुहाना के अलावा अभिषेक बच्चन, दीपिका पादुकोण, अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ और अरशद वारसी जैसे कलाकार नजर आएंगे। शाहरुख इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी सीरियस हैं और अपनी बेटी के लॉन्च में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते। यही वजह है कि उन्होंने पिछले कुछ समय से किसी भी दूसरी फिल्म का हिस्सा बनने से दूरी बनाई हुई है।
15 महीने में 635 मोबाइल बरामद:बैतूल पुलिस ने साइबर ट्रैकिंग से कई राज्यों से की तलाश

बैतूल पुलिस ने पिछले एक साल में गुम हुए 635 मोबाइल फोन बरामद कर उनके मालिकों को लौटाए हैं। मंगलवार को एक कार्यक्रम में इन मोबाइलों को उनके असली मालिकों को सौंपा गया। पुलिस के अनुसार, यह सफलता साइबर ट्रैकिंग और विभिन्न थानों की संयुक्त टीम के प्रयासों से मिली है। गुम हुए इन मोबाइलों को अलग-अलग राज्यों और जिलों से ट्रेस कर बैतूल लाया गया। बरामद किए गए फोनों में सैमसंग, वीवो, ओप्पो, रेडमी और रियलमी जैसी विभिन्न कंपनियों के स्मार्टफोन शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से मार्च 2024 के बीच 100 मोबाइल बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 9 लाख रुपए है। पिछले एक साल में बरामद किए गए कुल 635 मोबाइलों की कीमत लगभग 80 लाख रुपए आंकी गई है। इनमें से 535 से अधिक मोबाइल पहले ही उनके मालिकों को लौटाए जा चुके थे। मोबाइल प्राप्त करने वालों में छात्र, मजदूर, किसान और गृहणियां शामिल हैं। पुलिस की इस कार्रवाई से लोगों में अपने खोए हुए सामान की वापसी को लेकर विश्वास बढ़ा है। पुलिस ने बताया कि CEIR पोर्टल मोबाइल ट्रैकिंग में काफी सहायक सिद्ध हो रहा है। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में जितनी जल्दी शिकायत दर्ज कराई जाती है, मोबाइल मिलने की संभावना उतनी ही अधिक होती है। इस पूरे अभियान में साइबर सेल और विभिन्न थानों के पुलिसकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी लगातार ट्रैकिंग और फॉलोअप के प्रयासों से यह सफलता संभव हो पाई। पुलिस ने जनता से अपील की कि मोबाइल गुम होने पर घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत नजदीकी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराएं और CEIR पोर्टल पर शिकायत करें। इससे समय रहते मोबाइल को ट्रैक करने में मदद मिलेगी।
गर्मी में ये शरबत बनेगा रामबाण, लू से बचाव के साथ पाचन रखेगा दुरुस्त, जानें फायदे

Last Updated:April 07, 2026, 16:14 IST आयुर्वेद के जानकर पुरुषार्थी पवन आर्य ने बताया कि गर्मी के दिनों में शरीर में पानी की कमी होना आम बात है. वहीं नियमित रूप से सौंफ का शरबत पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है. दो चम्मच सौंफ को पानी में भिगोकर मिश्री के साथ तैयार किया गया शरबत शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है. जो कि थकान दूर करता है और दिनभर तरोताजा महसूस कराता है गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक और ताजगी देने वाले पेय पदार्थों की मांग बढ़ जाती है. आमतौर पर लोग नींबू पानी, शर्बत या ग्लूकोज जैसे पेय का सेवन करते हैं, लेकिन सौंफ का शरबत भी एक बेहतरीन और सेहतमंद विकल्प है. यह न केवल शरीर को ठंडक देता है, बल्कि कई स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है. इसकी खुशबूदार महक शरीर को तरोताजा रखती है और गर्मी के दिनों में लू से बचाव में भी मदद करती है. शरीर में बनाए रखता है पानी का संतुलनआयुर्वेद के जानकर पुरुषार्थी पवन आर्य ने बताया कि गर्मी के दिनों में शरीर में पानी की कमी होना आम बात है. वहीं नियमित रूप से सौंफ का शरबत पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है. दो चम्मच सौंफ को पानी में भिगोकर मिश्री के साथ तैयार किया गया शरबत शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है. जो कि थकान दूर करता है और दिनभर तरोताजा महसूस कराता है. इसके सेवन से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और लू लगने का खतरा भी कम हो जाता है. पाचन तंत्र को करता है मजबूतआगे कहा कि सौंफ का शरबत पेट के लिए काफी लाभकारी माना जाता है. जिन लोगों को गैस, अपच या पेट फूलने की समस्या रहती है, उनके लिए यह शरबत काफी फायदेमंद है. इसके नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है और भूख भी बढ़ती है. यह आलसपन दूर कर शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है. ठंडक का देता है प्राकृतिक एहसाससौंफ में कैल्शियम, फाइबर और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को ठंडक पहुंचाने का काम करते हैं. रोजाना एक गिलास सौंफ का शरबत पीने से शरीर में ठंडक बनी रहती है. यह हृदय और मस्तिष्क के लिए भी लाभकारी माना जाता है और गर्मी से होने वाली परेशानियों को कम करता है. सौंफ का शरबत बनाने की विधि सौंफ का शरबत बनाना बेहद आसान है. सबसे पहले सौंफ को धोकर लगभग 30 मिनट तक पानी में भिगो दें. इसके बाद एक बर्तन में पानी उबालें और उसमें भीगी हुई सौंफ, इलायची और केसर डालें. इस मिश्रण को 5 से 10 मिनट तक उबालें और फिर गैस बंद कर ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद इसे छान लें. अब इसमें स्वादानुसार चीनी और थोड़ा नींबू का रस मिलाएं. तैयार शरबत को गिलास में ठंडा-ठंडा परोसें. गर्मी के मौसम में यह पेय स्वाद के साथ सेहत भी देगा. Location : Palamu,Jharkhand First Published : April 07, 2026, 16:14 IST
तेल संकट का चीन पर असर क्यों नहीं पड़ा:20 साल पहले इमरजेंसी भंडार बनाए, नए तरीकों से बिजली; केमिकल के लिए भी निर्भर नहीं

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच जहां कई देश ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं, वहीं चीन पर इसका असर बाकी दुनिया के मुकाबले कम दिखाई दे रहा है। इसकी वजह यह है कि चीन खुद को कई सालों से ऐसे हालात के लिए तैयारी कर रहा था। चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल खरीदने वाला देश है, इसलिए अगर तेल की सप्लाई में रुकावट आती है तो उसे सबसे ज्यादा नुकसान होना चाहिए था। लेकिन चीन ने पहले से ही बड़ी मात्रा में तेल जमा करके रखा हुआ है। इसके अलावा चीन बिजली से चलने वाले सिस्टम पर शिफ्ट कर चुका है और कोयले से भी जरूरी चीजें बना रहा है। चीन ने धीरे-धीरे अपनी ऊर्जा पॉलिसी को इस तरह बदला कि वह वैश्विक सप्लाई शॉक का सामना कर सके। सरकार ने अहम सेक्टर्स में निवेश बढ़ाया और इंडस्ट्रियल स्ट्रेंथ को राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बनाया। इसके साथ-साथ उसने बिजली बनाने के दूसरे तरीकों पर भी तेजी से काम किया है, जैसे सौर ऊर्जा, हवा से बनने वाली ऊर्जा और पानी से बनने वाली बिजली। इसी कारण अब चीन में पेट्रोल और डीजल की मांग धीरे-धीरे कम होती जा रही है। चीन ने फैक्ट्रियों और प्रोडक्शन को मजबूत बनाया चीन की सरकार लंबे समय से यह मानती है कि मजबूत इंडस्ट्री ही देश की असली ताकत होती है। इसी सोच के तहत उसने अपनी फैक्ट्रियों और उत्पादन क्षमता को इतना मजबूत बना लिया है कि उसे बाहर के देशों पर कम निर्भर रहना पड़े। खास तौर पर उसने उन सेक्टर पर ज्यादा ध्यान दिया, जो उसके लिए रणनीतिक रूप से जरूरी हैं। सरकार सीधे तौर पर दिशा देती रही कि किन क्षेत्रों को मजबूत करना है, ताकि चीन किसी भी पश्चिमी देश के दबाव में न आए। ऊर्जा इस पूरी रणनीति का सबसे अहम हिस्सा रही है। कुछ साल पहले तक चीन पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों का सबसे बड़ा बाजार था, लेकिन अब वह इलेक्ट्रिक गाड़ियों का सबसे बड़ा बाजार बन चुका है। इसका मतलब यह है कि वहां अब बड़ी संख्या में गाड़ियां तेल की जगह बिजली से चल रही हैं, जिससे तेल पर निर्भरता कम हो रही है। कोयले की मदद से जरूरी केमिकल बनाना सीखा 1990 के दशक में जब चीन कई फैक्ट्रियां बना रहा था, तब उसे केमिकल बनाने के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता था। ये वही केमिकल होते हैं जिनसे प्लास्टिक, रबर, धातु के हिस्से और कई दूसरी चीजें बनती हैं। लेकिन अब चीन ने ऐसी तकनीक विकसित कर ली है, जिससे वह कोयले की मदद से ही कई जरूरी केमिकल बना सकता है, जैसे मेथेनॉल और सिंथेटिक अमोनिया। यह तकनीक नई नहीं है, बल्कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने भी इसका इस्तेमाल किया था। अब चीन इसी तरीके से तेल के बिना भी अपनी इंडस्ट्री चला सकता है। आज दुनिया का बड़ा हिस्सा केमिकल सप्लाई के लिए चीन पर निर्भर है। उदाहरण के तौर पर, दुनिया का करीब तीन-चौथाई पॉलिएस्टर और नायलॉन चीन में बनता है। वियनताम-फिलीपींस ने चीन से मदद मांगी हाल ही में वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों को जब ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा, तो उन्होंने चीन से मदद मांगी। चीन ने भी कहा कि वह दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ मिलकर ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर काम करने को तैयार है। चीन की यह सोच नई नहीं है। साल 2000 के आसपास उसे इस बात की चिंता होने लगी थी कि उसका तेल कुछ खास समुद्री रास्तों पर निर्भर है, जैसे मलक्का स्ट्रेट। अगर वहां कोई समस्या होती है, तो सप्लाई रुक सकती है। इसी वजह से 2004 में चीन ने इमरजेंसी तेल भंडार बनाना शुरू किया और अब वह लगातार इसे बढ़ा रहा है। फिर भी चीन पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। आज भी उसकी करीब 75% तेल जरूरतें आयात से पूरी होती हैं। लेकिन उसने इलेक्ट्रिक गाड़ियों और नवीकरणीय ऊर्जा में इतना निवेश किया है कि पेट्रोल और डीजल की मांग लगातार दो साल से घट रही है। कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि चीन में तेल की मांग अब अपने चरम पर पहुंच चुकी है और आगे कम हो सकती है। चीन ने कोयले का इस्तेमाल बढ़ाया इसके साथ ही चीन ने कोयले का इस्तेमाल फिर से बढ़ा दिया है, खासकर केमिकल बनाने के लिए। 2020 में जहां उसने 155 मिलियन टन कोयला इस काम में इस्तेमाल किया था, वहीं 2024 तक यह बढ़कर 276 मिलियन टन हो गया और 2025 में इसमें और बढ़ोतरी हुई। सरकार कहती है कि यह एक अस्थायी उपाय है, जब तक वह पूरी तरह साफ ऊर्जा पर नहीं पहुंच जाता। लेकिन फिलहाल इससे उसे फायदा मिल रहा है, क्योंकि तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। उदाहरण के तौर पर, खाद बनाने में इस्तेमाल होने वाला यूरिया देखें। इसकी वैश्विक कीमतें 40% से ज्यादा बढ़ गई हैं, लेकिन चीन में कोयले से बनने वाले यूरिया की कीमत वैश्विक दर से आधी से भी कम है। इससे चीन को बड़ा फायदा मिल रहा है। असल में, अमेरिका और चीन के बीच पिछले कुछ सालों से चल रहे तनाव ने भी चीन को आत्मनिर्भर बनने के लिए और तेज कर दिया। ट्रम्प के पहले कार्यकाल में शुरू हुए व्यापार युद्ध और तकनीकी टकराव ने चीन को यह एहसास कराया कि उसे अपने सप्लाई चेन और संसाधनों पर खुद का नियंत्रण मजबूत करना होगा। इसके बाद चीन ने अपनी इंडस्ट्री और तकनीक को तेजी से आगे बढ़ाया। ———————————————- ये खबर भी पढ़ें… ईरान-इजराइल तनाव से चीन को झटका:मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग; चीन के 8 लाख करोड़ दांव पर, डिसेलिनेशन से लेकर टेक प्रोजेक्ट्स तक सब खतरे में मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध चीन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। दरअसल चीन ने मिडिल ईस्ट में भारी निवेश किया हुआ है। साथ ही ये क्षेत्र उसके इस्पात, इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर पैनलों के लिए बड़ा बाजार है। ईरान के रूप में चीन को तेल का सस्ता स्रोत मिला था। पूरे क्षेत्र में उसे ऐसी सरकारें भी मिलीं,जो नवीकरणीय ऊर्जा और प्रौद्योगिकी में चीन से सीखने के लिए उत्सुक थीं। इन्हीं सब के बीच चीन तेल और गैस के लिए मध्य पूर्व की
दिशा वकानी के पिता एक्टर भीम वकानी का निधन:तारक मेहता शो के अलावा आमिर-शाहरुख के साथ की फिल्में, पैरालिसिस के बाद हुआ निमोनिया था

तारक मेहता का उल्टा चश्मा में दयाबेन का किरदार निभा चुकीं एक्ट्रेस दिशा वकानी के पिता एक्टर भीम वकानी का आज निधन हो गया। भीम वकानी, बीते कुछ समय से उम्र संबंधित समस्याओं से जूझ रहे थे। वो बेटी दिशा के शो तारक मेहता का उल्टा चश्मा में भी नजर आ चुके थे, इसके अलावा वो शाहरुख खान और आमिर खान के साथ फिल्में कर चुके थे। दिशा वकानी के भाई मयूर वकानी ने दैनिक भास्कर के गुजराती संस्करण दिव्य भास्कर से बातचीत में पिता के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, मेरे पिता को डेढ़ साल पहले लकवा (पैरालिसिस) हुआ था। कुछ समय पहले उन्हें निमोनिया भी हो गया था। वे अस्पताल में भर्ती थे और आज सुबह 8:30 बजे उनका निधन हो गया। आज ही उनका अंतिम संस्कार थलतेज श्मशान घाट में कर दिया गया। तारक मेहता का उल्टा चश्मा के प्रोड्यूसर असित मोदी ने दिव्य भास्कर से बातचीत में कहा कि वो सालों से भीम वकानी को जानते थे। उन्होंने अपने बच्चों दिशा और मयूर के लिए बहुत कुछ किया। उनका मुझ पर आशीर्वाद था। वहीं दिलीप जोशी ने बातचीत में कहा, भीम वकानी ने अपने बच्चों को एक्टिंग फील्ड में आने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने खुद दिशा को मुंबई भेजा था, जो एक बड़ा फैसला था। उन्होंने संजय गोराडिया समेत कई फिल्ममेकर्स के साथ काम किया। शाहरुख-आमिर के साथ काम कर चुके हैं भीम वकानी दिशा वकानी के पिता भीम वकानी सीनियर एक्टर हैं। उन्होंने आमिर खान की ऑस्कर में नॉमिनेट हुई फिल्म लगान में काजी का रोल निभाया था। इसके अलावा वो शाहरुख खान की फिल्म स्वेदश और माधुरी दीक्षित स्टारर फिल्म लज्जा में भी नजर आ चुके हैं। तारक मेहता शो में बेटी के साथ किया काम भीम वकानी, दिशा वकानी के साथ तारक मेहता का उल्टा चश्मा में भी कैमियो करते नजर आ चुके हैं। एपिसोड नंबर 1320 में उन्होंने जेठालाल के पिता चंपकलाल के दोस्त मावजी छेड़ा का किरदार निभाया था।
पहाड़ों में छिपा नेचुरल माउथ फ्रेशनर, बस चबाएं इसकी पत्तियां, मुंह की बदबू और पाचन समस्याओं का रामबाण

Last Updated:April 07, 2026, 16:01 IST अगर आप कभी पहाड़ों की यात्रा पर जाएं, तो आपको वहां एक खास पौधा मिलेगा जिसे लोग “पेपर मिंट वाला पौधा” कहते हैं. यह पूरी तरह प्राकृतिक और हेल्दी माउथ फ्रेशनर है, जिसकी पत्तियों को चबाने से मुंह तुरंत ताजा महसूस होता है और हल्की पाचन समस्याओं, सिरदर्द और थकान में भी आराम मिलता है. अगर आप कभी पहाड़ों की यात्रा पर जाए तो, वहां आपको ताजी हवा और प्राकृतिक खुशबू जरूर महसूस की होगी. इन्हीं पहाड़ी इलाकों में एक खास तरह का पौधा पाया जाता है, जिसे लोग आमतौर पर “पेपर मिंट वाला पौधा” कहते हैं. यह कोई पैकेट वाला माउथ फ्रेशनर नहीं, बल्कि पूरी तरह नेचुरल और फ्रेश विकल्प है. इस पौधे की सबसे खास बात है इसकी खुशबू. जैसे ही आप इसकी पत्तियों को हल्का सा मसलते हैं या फिर तोड़ते हैं, तो इसमें से बिल्कुल पेपरमिंट जैसी तेज और ठंडी खुशबू आती है. यही वजह है कि इसे प्राकृतिक माउथ फ्रेशनर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. इसका स्वाद भी हल्का ठंडा और बहुत रिफ्रेशिंग होता है, जिससे मुंह तुरंत ताजा महसूस करने लगता है. पहाड़ों में रहने वाले लोग इस पौधे की पत्तियों को सीधे तोड़कर चबाते हैं. इसे चबाने से मुंह की बदबू दूर होती है और एक नैचुरल फ्रेशनेस मिलती है. इसकी खास बात ये है कि इसमें किसी भी प्रकार का कोई केमिकल या अन्य कोई भी चीजें न ही होतीं है और ना ही डाली जाती है, ये पूरी तरीके से प्राकृतिक है. इसलिए ये पूरी तरह सुरक्षित और हेल्दी विकल्प माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google जब आप पहाड़ों में घूम रहे होते हैं, तो हर समय माउथ फ्रेशनर या च्युइंग गम साथ रखना जरूरी नहीं होता, और जब आप पहाड़ो में आ रहे है तो ये जरूरी नहीं कि आपको हर जगह दुकानें और ये सभी सुविधाएं मिले. ऐसे में ये पौधा एकदम काम आता है. रास्ते में अगर ये दिख जाए, तो बस इसकी कुछ पत्तियां तोड़िए और चबा लीजिए, तुरंत फ्रेश महसूस करेंगे. यह खासकर लंबे ट्रेक या सफर के दौरान बहुत मददगार होता है. हालांकि यह पौधा प्राकृतिक है, फिर भी हर पौधा खाने योग्य नहीं होता. किसी व्यक्ति को अगर किसी चीज की एलर्जी हो तो वो व्यक्ति इस चीज का ध्यान रखे. इसलिए अगर आपको इस पौधे की सही पहचान नहीं है, तो किसी स्थानीय व्यक्ति से जरूर पूछ लें. बिना पहचान के किसी भी पौधे को खाना या फिर किसी भी चीज के लिए इस्तेमाल करना नुकसानदायक हो सकता है. पहाड़ के बुजुर्ग, 70 वर्षीय राम सिंह जो औषधीय पौधों की जानकारी के धनी है, वे लोकल 18 से बात करते हुए बताते है कि पहाड़ों में मिलने वाला यह पेपर मिंट जैसा पौधा सिर्फ एक साधारण जड़ी-बूटी नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जो आपको प्रकृति के और करीब ले जाता है, हम बचपन से ही इन पौधों को देखते और इस्तेमाल करते आ रहे है. अगली बार जब आप पहाड़ों की सैर पर जाएं, तो इस छोटे से नैचुरल माउथ फ्रेशनर को जरूर ट्राई करें, आपको इसकी ताजगी जरूर पसंद आएगी. इस पौधे में प्राकृतिक ठंडक होती है, जो मुंह को ठंडा रखने में मदद करती है. साथ ही, यह हल्की पाचन संबंधी समस्याओं में भी राहत दे सकता है. कई बार इसे सिरदर्द या थकान में भी सूंघने से आराम मिलता है, क्योंकि इसकी खुशबू काफी ताजगी देती है. First Published : April 07, 2026, 16:01 IST
लिवर फंक्शन टेस्ट में SGPT और SGOT बढ़ जाए, तो क्या करें? डॉक्टर ने बताया बेस्ट ट्रीटमेंट, देखें वीडियो

Liver Function Test Explained: लिवर फंक्शन टेस्ट में SGPT और SGOT का बढ़ना इस बात का संकेत है कि लिवर पर किसी कारण से दबाव या सूजन हो रही है, जो अक्सर फैटी लिवर, वायरल इंफेक्शन, शराब के सेवन, दवाइयों के साइड इफेक्ट, मोटापा या डायबिटीज जैसी समस्याओं से जुड़ा होता है. यह अपने आपमें बीमारी नहीं बल्कि एक चेतावनी संकेत है, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय रहते डॉक्टर से जांच कराकर सही कारण पता लगाना जरूरी है, क्योंकि लापरवाही से यह सिरोसिस या लिवर फेलियर जैसी गंभीर स्थिति में बदल सकता है. मशहूर लिवर डॉक्टर पीयूष रंजन ने अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड वीडियो में बताया है कि एसजीपीटी और एसजीओटी क्यों बढ़ता है और इसका क्या इलाज है.
पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026: 5 प्रमुख आंकड़े जो तय करेंगे कि पुदुचेरी में कौन जीतेगा | भारत समाचार

आखरी अपडेट:07 अप्रैल, 2026, 15:56 IST पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026: पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान होगा। यहां 5 प्रमुख संख्याएं हैं जो तय करेंगी कि कौन जीतेगा। पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026: 9.44 लाख मतदाता, 16 सीटों का बहुमत, 5 लाख महिला मतदाता, उच्च मतदान और 30 सीटें: प्रमुख संख्याएं जो पुडुचेरी विजेता का निर्धारण करेंगी। पुडुचेरी में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा जो इसकी 30 सदस्यीय विधानसभा के भाग्य का फैसला करेगा। इस सघन केंद्र शासित प्रदेश में जहां हर सीट मायने रखती है, पांच प्रमुख संख्याएं अंततः यह निर्धारित कर सकती हैं कि कौन सा गठबंधन या पार्टी अगली सरकार बनाएगी। यहां पांच संख्याएं हैं जो मतदान के दिन नतीजे तय करेंगी: 1) 9,44,211 – कुल पंजीकृत मतदाता यह अंतिम मतदाता सूची के अनुसार पुडुचेरी के मतदाताओं का सटीक आकार है। 30 सीटों वाले एक छोटे से मुकाबले में, मतदाता की प्राथमिकता या मतदान प्रतिशत में मामूली बदलाव भी कई सीटों को प्रभावित कर सकता है और सरकार को बदल सकता है। 2)16 – जादुई बहुमत चिह्न पुडुचेरी की 30 सीटों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए किसी पार्टी या गठबंधन को सिर्फ 16 सीटों की जरूरत है। यह कम सीमा चुनाव को अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बनाती है – केवल तीन या चार सीटों का उतार-चढ़ाव निर्णायक साबित हो सकता है। 3) 5,00,477- महिला मतदाताओं की संख्या 5,00,477 मतदाताओं के साथ महिलाएं सबसे बड़ा मतदान समूह हैं, जो पुरुषों से लगभग 57,000 अधिक हैं। कुल मतदाताओं का 53% से अधिक, कल्याण, स्वास्थ्य देखभाल और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों पर उनकी पसंद एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह भी पढ़ें: पुडुचेरी में 2026 में मतदान कैसे करें: बूथ लोकेटर, समय, मतदाता पहचान नियम: एक संपूर्ण गाइड 4) 83.42% – 2021 में मतदान प्रतिशत पुडुचेरी में उच्च मतदाता भागीदारी का इतिहास रहा है। 2021 विधानसभा चुनाव में 83.42% मतदान हुआ। इस बार इसी तरह का उच्च मतदान मजबूत जमीनी स्तर की लामबंदी वाले पक्ष को फायदा पहुंचा सकता है, जबकि ध्यान देने योग्य गिरावट से बेहतर संगठित पार्टियों को फायदा हो सकता है। यह भी पढ़ें: पुडुचेरी की फ्रांसीसी विरासत: मतदाता मतपेटी में इसकी परवाह क्यों करते हैं 5) 30 – खेल में कुल सीटें केवल 30 निर्वाचित सीटों के साथ, त्रुटि की संभावना बहुत कम है। ऐसे छोटे युद्धक्षेत्र में, प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र महत्वपूर्ण हो जाता है, और कुछ सीटों पर मामूली आश्चर्य भी यह तय कर सकता है कि बहुमत रेखा को कौन पार करेगा। ये पाँच संख्याएँ – 9.44 लाख मतदाता, 16-सीट बहुमत सीमा, 5 लाख से अधिक महिला मतदाता, ऐतिहासिक रूप से उच्च मतदान, और 30-सीटों वाला कॉम्पैक्ट क्षेत्र – यह तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे कि सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन सत्ता बरकरार रखेगा या विपक्ष सफलता हासिल करेगा। यह भी पढ़ें: राज्य का दर्जा या स्थिरता? पुडुचेरी के 9.44 लाख मतदाताओं के लिए नाजुक संतुलन अधिनियम मतदान 9 अप्रैल को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा और नतीजे 4 मई को आने की उम्मीद है। जगह : पुडुचेरी (पांडिचेरी), भारत, भारत पहले प्रकाशित: 07 अप्रैल, 2026, 15:56 IST न्यूज़ इंडिया पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026: 5 प्रमुख आंकड़े जो तय करेंगे कि पुदुचेरी में कौन जीतेगा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें






