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भयंकर ठंडी बीयर पीते हैं आप, ऐसा करना फायदेमंद या नुकसानदायक, गंगाराम के डॉक्टर से जान लीजिए

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Last Updated:April 08, 2026, 14:54 IST Very Cold Beer Health Risks: बीयर में अल्कोहल होता है और डॉक्टर्स इसे सेहत के लिए नुकसानदायक मानते हैं. हालांकि तमाम लोग गर्मी में बहुत ज्यादा ठंडी बीयर पीना पसंद करते हैं, जो गले, पाचन और शरीर के तापमान पर नेगेटिव असर डाल सकती है. खाली पेट या ज्यादा मात्रा में बीयर पीने से कई परेशानियों का खतरा बढ़ जाता है. डॉक्टर की मानें तो लोगों को बहुत ज्यादा ठंडी बीयर पीने से बचना चाहिए. Ice Cold Beer Good or Bad: गर्मियों के मौसम में अधिकतर लोग ठंडी चीजें खाना-पीना पसंद करते हैं. कई लोग गर्मी में ठंडी बीयर पीना पसंद करते हैं. कई लोग शराब में भी आइस क्यूब डालकर पीते हैं, ताकि ठंडा महसूस हो. माना जाता है कि बर्फ जैसी ठंडी बीयर पीने से शरीर को तुरंत ठंडक मिलती है और राहत महसूस होती है. खासकर दोस्तों के साथ पार्टियों में ऐसे नजारे देखने को मिलते हैं. हालांकि कई लोग ठंडी बीयर को सेहत के लिए नुकसानदायक मानते हैं. अब सवाल है कि क्या सच में बहुत ज्यादा ठंडी बीयर पीना सेहत के लिए खतरनाक है? इस बारे में डॉक्टर से हकीकत जानने की कोशिश करते हैं. नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के गैस्ट्रो एंड लिवर डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. अनिल अरोड़ा ने News18 को बताया कि बीयर एक अल्कोहॉलिक ड्रिंक है और इसका सेवन करना सेहत के लिए नुकसानदायक होता है. कभी-कभार आप बीयर पीते हैं, तो ठीक है, लेकिन रोज इसका सेवन करने से सेहत बिगड़ सकती है. कई लोग मानते हैं कि बीयर पीना सेहत के लिए सुरक्षित है, लेकिन यह सिर्फ गलतफहमी है. अल्कोहल वाली कोई भी ड्रिंक शरीर के लिए फायदेमंद नहीं होती है. अल्कोहल का सेवन करने से लिवर को गंभीर नुकसान होता है और कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. बहुत ठंडी बीयर पीनी चाहिए या नहीं? डॉक्टर अरोड़ा ने बताया कि जब आप बहुत ठंडी बीयर पीते हैं, तो इसका सीधा असर हमारे गले और पाचन तंत्र पर पड़ता है. अत्यधिक ठंडी ड्रिंक गले की नसों को अचानक सिकोड़ देती है, जिससे गले में खराश, सर्दी या संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा बहुत ठंडी चीजें पाचन क्रिया को भी धीमा कर देती हैं, जिससे गैस, अपच या पेट में भारीपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. बहुत ठंडी बीयर शरीर के तापमान को अचानक कम कर सकती है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन पर असर पड़ता है. शरीर को अपने तापमान को संतुलित करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है, जिससे थकान या असहजता महसूस हो सकती है. खासकर जब बाहर का तापमान बहुत ज्यादा हो, तब बहुत ठंडी बीयर शरीर के लिए शॉक जैसा असर डाल सकती है. खाली पेट बीयर पीना नुकसानदायक एक्सपर्ट ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति खाली पेट बहुत ठंडी बीयर पीता है, तो यह ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है. इससे अल्कोहल जल्दी खून में घुल जाता है और नशा तेजी से चढ़ता है. यह लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालता है. ज्यादा मात्रा में ठंडी बीयर पीने से डिहाइड्रेशन, सिरदर्द और उल्टी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. जिन लोगों को पहले से ही गले की समस्या, पाचन से जुड़ी परेशानी, लिवर रोग या हार्ट से संबंधित दिक्कतें हैं, उन्हें बहुत ठंडी बीयर से बचना चाहिए. जो लोग बार-बार सर्दी-जुकाम से परेशान रहते हैं, उनके लिए भी यह नुकसानदायक हो सकती है. ऐसे लोगों को सामान्य तापमान या हल्की ठंडी बीयर ही पीनी चाहिए. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 08, 2026, 14:54 IST

पाली में 380 बेड का हाईटेक अस्पताल तैयार, हादसों में अब ‘गोल्डन ऑवर’ में इलाज, बचेगी हर कीमती जान

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Last Updated:April 08, 2026, 14:51 IST Health story : पाली-जोधपुर हाईवे पर होने वाले हादसों में अब घायलों को समय पर इलाज मिल सकेगा. रामासिया में बन रहा 380 बेड का छह मंजिला अस्पताल इमरजेंसी हब बनेगा. यहां क्रिटिकल केयर और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं मिलेंगी. शहर से दूर होने के कारण एम्बुलेंस सीधे पहुंच सकेगी, जिससे गोल्डन ऑवर में मरीजों की जान बचाना आसान होगा. पाली-जोधपुर नेशनल हाईवे और आसपास के व्यस्त मार्गो पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में अब कीमती जान बचाना और आसान होगा. रामासिया स्थित मेडिकल कॉलेज के पास बन रहा 380 बेड का छह मंजिला अस्पताल न केवल पाली जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देगा, बल्कि यह हाईवे पर होने वाले हादसों के लिए एक ‘इमरजेंसी हब’ के रूप में उभरेगा. शहर के बाहर होने के कारण एम्बुलेंस को ट्रैफिक में फंसे बिना सीधे अस्पताल पहुंचने में सुविधा होगी, जिससे घायल को ‘गोल्डन ऑवर’ में इलाज मिल सकेगा. शुरुआत में यह अस्पताल चार मंजिला प्रस्तावित था, लेकिन सरकार ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसमें क्रिटिकल केयर यूनिट के लिए दो और मंजिलें जोड़ने की मंजूरी दी है. इसके लिए कुल 195 करोड़ रुपये (179 करोड़ + 16 करोड़ अतिरिक्त) का भारी-भरकम बजट खर्च किया जा रहा है. अस्पताल की पांचवीं और छठी मंजिल विशेष रूप से गंभीर मरीजों और आईसीयू सेवाओं के लिए समर्पित होगी, जिससे पाली के लोगों को अब बड़े ऑपरेशन या क्रिटिकल केयर के लिए दूसरे शहरों की ओर नहीं दौड़ना पड़ेगा. आमजन की सुविधा का ध्यान रखते हुए प्रशासन ने एक व्यावहारिक निर्णय लिया है. मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग को रामासिया शिफ्ट करने के बजाय शहर के बीचों-बीच स्थित बांगड़ अस्पताल में ही रखा गया है. इससे गर्भवती महिलाओं और बच्चों को इलाज के लिए शहर से बाहर नहीं जाना पड़ेगा, जबकि गंभीर बीमारियों और सर्जरी के बड़े केस रामासिया के नए कैंपस में हैंडल किए जाएंगे. Add News18 as Preferred Source on Google भवन में सुपर स्पेशिएलिटी में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, यूरोलॉजी और गेस्ट्रोलॉजी की सुविधा अलग से शुरू होगी. पाली मेडिकल कॉलेज का यह अस्पताल राजमेस के 17 मेडिकल कॉलेजों के अस्पतालों का रोल मॉडल होगा. राजमेस ने निर्माण के लिए आरएसआरडीसी को जिम्मेदारी सौंपी है. शहर से 6 किमी दूर मेडिकल कॉलेज के पास 380 बेड का नया अस्पताल बनने के बाद बांगड़ अस्पताल में गायनिक और पीडियाट्रिक विभाग यथावत रहेंगे. इसके अलावा शहर के मरीजों के लिए जनरल सर्जरी, जनरल मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक, ईएनटी, दंत रोग विभाग की एक- एक यूनिट यहां यथावत रहेगी. मरीजों के बैठने के लिए 1 हजार की क्षमता का सभागार तैयार करवाया जाएगा. हर बेड को अत्याधुनिक क्लीनिकल इक्यूपमेंट से लैस किया जाएगा. पुराना प्लान : बांगड़ में शुरू होने वाली थी सुपर स्पेशियलिटी पाली मेडिकल कॉलेज को करीब पांच साल पहले सुपर स्पेशियलिटी की मंजूरी मिली थी. क्लीनिकल यूनिट नहीं होने के कारण अभी तक यह सुविधा बांगड़ अस्पताल में शुरू नहीं हो पाई थी. First Published : April 08, 2026, 14:51 IST

घर में पड़ी सूखी तुलसी से बनाएं हेल्दी काढ़ा, जानिए आसान तरीका

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Last Updated:April 08, 2026, 14:49 IST तुलसी का पौधा लगभग हर घर में होता है, लेकिन उसकी सूखी टहनियों को अक्सर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है. जबकि विशेषज्ञों के अनुसार, इन्हीं टहनियों से आसानी से काढ़ा-मसाला तैयार किया जा सकता है, जो चाय का स्वाद बढ़ाने के साथ गले की खराश और कफ में भी राहत दे सकता है. पारंपरिक घरेलू नुस्खों में शामिल यह तरीका न सिर्फ सरल है, बल्कि रोजमर्रा की छोटी स्वास्थ्य समस्याओं में भी काफी उपयोगी साबित हो सकता है. रिपोर्ट- अभिनव कुमार घर-आंगन में तुलसी का पौधा लगभग हर घर में देखा जाता है. इसकी पत्तियां पूजा-पाठ से लेकर चाय तक में उपयोग की जाती हैं, लेकिन सूख जाने के बाद इसकी टहनियों को अक्सर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है. जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि तुलसी की सूखी टहनियां भी बेहद उपयोगी होती हैं और इन्हें घरेलू काढ़ा-मसाला बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है. तुलसी की सूखी टहनियों से काढ़ा-मसाला तैयार करने का तरीका काफी आसान है. इसके लिए सूखी टहनियों के साथ लौंग, इलायची और तेजपत्ता को हल्का दरदरा पीस लें और इसे किसी साफ-सुथरे डिब्बे में सुरक्षित रख लें. जब भी चाय बनाएं, इसमें एक चम्मच यह मिश्रण मिलाने से चाय का स्वाद बेहतर हो जाता है और यह शरीर को सुकून भी देता है. गले में खराश या कफ की समस्या होने पर इसी मिश्रण को एक चम्मच मात्रा में गर्म पानी में उबालकर छानकर पीने से राहत मिल सकती है. पारंपरिक रूप से तुलसी को श्वसन तंत्र के लिए लाभकारी माना जाता है, वहीं मसालों की गर्म तासीर गले को आराम पहुंचाने में मदद करती है. Add News18 as Preferred Source on Google हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह एक घरेलू उपाय है, कोई चिकित्सीय इलाज नहीं. यदि किसी को एलर्जी है, गर्भावस्था है, छोटे बच्चों को देना हो या किसी दवा के साथ इसका सेवन करना हो, तो पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें. साथ ही टहनियों को इस्तेमाल से पहले अच्छी तरह साफ और पूरी तरह सूखा कर ही रखें. किसी भी चीज का अत्यधिक उपयोग नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी है. तुलसी की महत्ता नई नहीं है. यह उपाय इस बात का उदाहरण है कि रसोई और आंगन में मौजूद सामान्य चीजों का भी सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो वे बेहद काम की साबित हो सकती हैं. सूखी टहनियों को फेंकने के बजाय संभालकर रख लें, क्योंकि सर्दी-खांसी के समय यह छोटा सा घरेलू नुस्खा काफी फायदेमंद हो सकता है. दरअसल, बचपन में दादी-नानी द्वारा तुलसी का काढ़ा पिलाने की परंपरा लगभग हर घर में रही है. तुलसी में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं और यही कारण है कि यह आज भी घरेलू उपचार का अहम हिस्सा बनी हुई है. First Published : April 08, 2026, 14:49 IST

मतदान दिवस लिटमस टेस्ट: मालदा से स्तब्ध, क्या चुनाव आयोग हिंसा-मुक्त मतदान सुनिश्चित कर सकता है? | चुनाव समाचार

CBSE Board Results 2026 soon on cbseresults.nic.in. (AI Generated Image)

आखरी अपडेट:अप्रैल 08, 2026, 14:44 IST पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल ने एक खतरनाक पैटर्न को सामान्य बना दिया है जहां चुनावों को लोकतंत्र में अभ्यास के बजाय हिंसा का फ्लैशप्वाइंट बना दिया जाता है ईसीआई की विश्वसनीयता का परीक्षण उसकी तैनाती के पैमाने से नहीं, बल्कि मतदान के दिन उसके कार्यान्वयन की प्रभावशीलता से किया जाएगा। (पीटीआई) सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शब्दों में कोई कमी नहीं की। स्पष्ट पीड़ा व्यक्त करते हुए, अदालत ने पश्चिम बंगाल में एक चौंकाने वाली घटना को गंभीरता से लिया, यह देखते हुए कि कैसे राज्य के मुख्य सचिव कथित तौर पर संपर्क से बाहर रहे, जबकि कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने पिछले हफ्ते मालदा में न्यायिक अधिकारियों का घेराव होने पर उन्मत्त फोन किए। वह अवलोकन केवल प्रक्रियात्मक नहीं था, बल्कि गहन था। यह घटना एक बुनियादी सवाल उठाती है: यदि भारत का चुनाव आयोग (ईसीआई), केंद्रीय बलों की लगभग 2,400 कंपनियों और सुप्रीम कोर्ट और कलकत्ता उच्च न्यायालय सहित उच्च न्यायपालिका के साथ, न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सका या उन्हें नौ घंटे के आघात से नहीं बचा सका, तो इसका सिस्टम की मजबूती के बारे में क्या मतलब है? तो फिर, वही चुनाव आयोग, अपरिवर्तित प्रशासनिक और नौकरशाही तंत्र पर निर्भर होकर, 23 और 29 अप्रैल को हिंसा-मुक्त मतदान की गारंटी कैसे देगा? जब राज्य जवाब नहीं देता 1 अप्रैल को मालदा में जो कुछ हुआ वह चुनावी मौसम में हिंसा का एक और उदाहरण नहीं है। यह एक ऐसा क्षण है जो संस्थागत प्रतिक्रिया की नाजुकता को उजागर करता है जब इसका सबसे अधिक परीक्षण किया जाता है। न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया गया, बाइक सवारों के एक समूह ने उन पर पथराव किया, उनके पायलट वाहनों पर हमला किया और लगभग नौ घंटे तक उनकी आवाजाही अवरुद्ध कर दी। पहुंच रोकने के लिए लकड़ी के तख्त बिछाए गए थे। यह स्वतःस्फूर्त अराजकता नहीं थी; इसमें आयोजन और आत्मविश्वास की छाप थी। विश्वास कि परिणाम तत्काल नहीं होंगे। और यहीं पर सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप महत्वपूर्ण हो जाता है। चिंता केवल यह नहीं है कि हिंसा हुई, बल्कि यह है कि वास्तविक समय में आदेश की श्रृंखला लड़खड़ाती हुई दिखाई दी। कागज पर सुरक्षा, जमीन पर वैक्यूम यह सब पहले से ही मौजूद एक अभूतपूर्व सुरक्षा वास्तुकला के बावजूद आता है। केंद्रीय बलों की 2,000 से अधिक कंपनियां तैनात की गई हैं। ईसीआई ने व्यापक प्रशासनिक फेरबदल किया है। यहां तक ​​कि पिछले पदाधिकारियों के हटने के बाद शीर्ष अधिकारियों, मुख्य सचिव और डीजीपी को भी इसकी देखरेख में नियुक्त किया गया था। कागज़ पर यह एक सुदृढ़ राज्य है। ज़मीन पर यह छिद्रयुक्त दिखाई देता है। पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल ने एक खतरनाक पैटर्न को सामान्य कर दिया है। लोकतंत्र में चुनावों को अभ्यास के बजाय हिंसा का केंद्र बना दिया जाता है। कोलकाता में नगर निगम चुनावों से लेकर भीतरी इलाकों में पंचायत चुनावों तक, पटकथा चिंताजनक रूप से सुसंगत बनी हुई है। राज्य धमकी, झड़प और चुनाव के बाद प्रतिशोध का गवाह है। पैमाना अलग-अलग होता है. प्रकृति नहीं करती. 2021 की यादें अभी भी ताजा हैं। नतीजों के बाद के दिनों में पार्टी लाइन से हटकर राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई। करीब 72 घंटों तक राज्य की मशीनरी पंगु नजर आई। एफआईआर में “अज्ञात व्यक्तियों” का नाम दिया गया है। जवाबदेही गुमनामी में विलीन हो गई। दस्तावेज़ीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी न्यायिक हस्तक्षेप और केंद्रीय जांच की आवश्यकता पड़ी। हालाँकि, राज्य को सीबीआई जाँच से भी कोई महत्वपूर्ण परिणाम नहीं मिला, भले ही 50 से अधिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं की बिना सोचे-समझे हत्या कर दी गई या दिनदहाड़े सार्वजनिक रूप से पीट-पीट कर मार डाला गया। और अब, जब बंगाल लगभग दो दशकों के बाद दो चरणों में चुनाव की ओर बढ़ रहा है, मालदा एक गंभीर पूर्वावलोकन प्रस्तुत करता है। यदि उच्च न्यायपालिका की सीधी निगरानी में न्यायिक अधिकारियों को नौ घंटे तक बंधक बनाया जा सकता है, तो सामान्य मतदान अधिकारियों के लिए क्या गारंटी है? सुदूर बूथों के मतदाताओं के लिए? राजनीतिक रूप से संवेदनशील इलाकों में विपक्षी कार्यकर्ताओं के लिए? गहरी चिंता सिर्फ हिंसा नहीं है, बल्कि दंडमुक्ति भी है। हिंसा वहाँ पनपती है जहाँ परिणाम अनिश्चित होते हैं। या इससे भी बदतर, अनुपस्थित. ईसीआई की विश्वसनीयता का परीक्षण उसकी तैनाती के पैमाने से नहीं, बल्कि मतदान के दिन उसके कार्यान्वयन की प्रभावशीलता से किया जाएगा। भाजपा की बहादुरी और लचीलेपन को उनके समर्थन आधार के लिए मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए सुरक्षित मार्ग बनाने और उनके मतदान एजेंटों के लिए मतदान केंद्र में रहने और बूथ छोड़ने से बचने के लिए सुरक्षित महसूस करने की स्थिति बनाने की उनकी क्षमता के संदर्भ में भी देखा जाएगा। पहले प्रकाशित: अप्रैल 08, 2026, 14:37 IST समाचार चुनाव मतदान दिवस लिटमस टेस्ट: मालदा से स्तब्ध, क्या चुनाव आयोग हिंसा-मुक्त मतदान सुनिश्चित कर सकता है? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल चुनाव हिंसा(टी)सुप्रीम कोर्ट भारत(टी)मालदा न्यायिक अधिकारी(टी)भारत का चुनाव आयोग(टी)केंद्रीय बलों की तैनाती(टी)कलकत्ता उच्च न्यायालय संकट(टी)पश्चिम बंगाल राजनीतिक हिंसा(टी)मतदान दिवस सुरक्षा

Allu Arjuns Raaka First Look Out; Deepika Padukone Co-Star

Allu Arjuns Raaka First Look Out; Deepika Padukone Co-Star

1 घंटे पहले कॉपी लिंक अल्लू अर्जुन ने अपने 44वें जन्मदिन पर अपनी अगली फिल्म ‘राका’ (Raaka) का फर्स्ट लुक पोस्टर रिलीज कर दिया है। एटली के डायरेक्शन में बन रही इस फिल्म का नाम पहले ‘AA22xA6’ रखा गया था। फिल्म में दीपिका पादुकोण भी एक अहम भूमिका में नजर आएंगी। पोस्टर में अल्लू अर्जुन एक डरावने और खतरनाक अवतार में नजर आ रहे हैं। यह एक बड़े बजट की साइंस-फिक्शन एक्शन ड्रामा फिल्म होगी, जिसे हिंदी और अंग्रेजी समेत 9 अलग-अलग भाषाओं में रिलीज करने की तैयारी है। पोस्टर में दिखा एक्टर का डरावना अवतार पोस्टर की बात करें तो अल्लू अर्जुन इसमें बिल्कुल बदले हुए दिख रहे हैं। प्रोस्थेटिक मेकअप की मदद से उन्हें काफी उम्रदराज दिखाया गया है। उनकी आंखों में गहरा काजल है और ऊनी कपड़ों से एक बड़ा पंजा बाहर निकलता दिख रहा है। पोस्टर के साथ कैप्शन में लिखा है, “खुद को एक ऐसी सोच के लिए तैयार करें जो सीमाओं से परे है।” इस लुक को देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि फिल्म में एक्टर का किरदार काफी डार्क और रहस्यमयी होने वाला है। डायरेक्टर एटली, दीपिका पादुकोण और एक्टर अल्लू अर्जुन। 800 करोड़ का बजट और 4 अलग किरदार रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘राका’ का कुल बजट करीब 800 करोड़ रुपए है। इसमें से 200 करोड़ रुपए प्रोडक्शन और 250 करोड़ रुपए सिर्फ VFX पर खर्च किए जा रहे हैं। चर्चा है कि फिल्म में अल्लू अर्जुन एक-दो नहीं बल्कि 4 अलग-अलग किरदार निभाएंगे। इसमें वे दादा, पिता और दो बेटों के रोल में दिख सकते हैं। फिल्म की कहानी पैरेलल यूनिवर्स (दो अलग दुनियाओं) के इर्द-गिर्द घूम सकती है, हालांकि मेकर्स ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फीस के मामले में भी बनाया रिकॉर्ड अल्लू अर्जुन ने इस फिल्म के लिए भारी-भरकम फीस ली है। पिंकविला की रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें ‘राका’ के लिए करीब 175 करोड़ रुपए दिए जा रहे हैं। इसके अलावा, फिल्म के मुनाफे में उनकी 15% की हिस्सेदारी भी होगी। वहीं, डायरेक्टर एटली इस फिल्म के लिए 100 करोड़ रुपए चार्ज कर रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

आलू मंचूरियन रेसिपी: घर पर बनाना है कुछ खास? मसाला करें चटपटा आलू मंचूरियन, शाम की भूख के लिए है परफेक्ट रेसिपी

आलू मंचूरियन रेसिपी: घर पर बनाना है कुछ खास? मसाला करें चटपटा आलू मंचूरियन, शाम की भूख के लिए है परफेक्ट रेसिपी

8 अप्रैल 2026 को 14:39 IST पर अद्यतन किया गया इंस्टेंट मंचूरियन रेसिपी: यह सबसे आसान और स्वादिष्ट आलू मंचूरियन रेसिपी, आपके शाम के मसाले को बनाएं देवी और भी खायें। खासकर बच्चों को इस तरह की चीजें काफी आनंददायक होती हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)चटपटा आलू मंचूरियन रेसिपी(टी)आलू मंचूरियन रेसिपी(टी)चटपटा आलू मंचूरियन(टी)मंचूरियन बॉल्स कैसे बनाएं(टी)चाइनीज रेसिपी(टी)शाम का नाश्ता(टी)आलू मंचूरियन रेसिपी(टी)इंस्टेंट स्नैक रेसिपी

सलमान खान का सपोर्ट मिलने से खुश हैं राजपाल यादव:कहा- भाईजान का आशीर्वाद साथ है; अवॉर्ड शो में मजाक बनाने पर एक्टर ने दी थी प्रतिक्रिया

सलमान खान का सपोर्ट मिलने से खुश हैं राजपाल यादव:कहा- भाईजान का आशीर्वाद साथ है; अवॉर्ड शो में मजाक बनाने पर एक्टर ने दी थी प्रतिक्रिया

अवॉर्ड शो में मजाक उड़ाए जाने के मामले में सलमान खान का सपोर्ट मिलने से राजपाल यादव बेहद खुश हैं। दरअसल, हाल ही में स्क्रीन अवॉर्ड में होस्ट जर्नलिस्ट सौरभ द्विवेदी ने राजपाल यादव के चेक बाउंस केस और उधार पर तंज कसते हुए एक कमेंट किया था, जिसके बाद कई फैंस ने इसे एक्टर का अपमान माना। वीडियो वायरल होने के बाद सलमान खान ने राजपाल के सपोर्ट में पोस्ट की थी। राजपाल यादव मंगलवार रात फिल्ममेकर रामगोपाल वर्मा के बर्थडे में शामिल हुए थे। इस दौरान पैपराजी से बात करते हुए उन्होंने सलमान खान का सपोर्ट मिलने पर खुशी जताते हुए कहा, आज खुश भी बहुत हूं, क्योंकि आज आशीर्वाद साथ में है। आगे राम गोपाल वर्मा का भी आभार व्यक्त करते हुए राजपाल यादव ने कहा, ‘आज यहां राम गोपाल वर्मा सर के बर्थडे में आने का सौभाग्य मिला है। ये हमारी जिंदगी के ऐसे डेयरिंग डायरेक्टर रहे हैं, जिन्होंने मुझे कॉमेडियन बनाया, जिन्होंने मुझे विलेन बनाया, जिन्होंने मुझे मैन लीड बनाया। एक नहीं 17-17 फिल्में आपके डायरेक्शन में करने का मौका मिला।’ सलमान खान ने मजाक बनाए जाने पर किया था सपोर्ट 5 अप्रैल को मुंबई में स्क्रीन अवॉर्ड आयोजित किया गया था।जर्नलिस्ट सौरभ द्विवेदी और कॉमेडियन जाकिर खान ने अवॉर्ड का एक हिस्सा होस्ट किया। इस दौरान राजपाल यादव से बात करते हुए सौरभ द्विवेदी ने उनके चेक बाउंस केस का मजाक उड़ाया। राजपाल यादव माइक पर डॉलर के रेट बढ़ने-घटने और यूथ पर एक बयान दे रहे थे। तभी सौरभ द्विवेदी ने तंज कंसने के अंदाज में कहा, ‘डॉलर का रेट चाहे बढ़े या घटे, आपको उतने ही पैसे लौटाने हैं जितने आपने उधार लिए थे।’ जल्द ही ये वीडियो वायरल हो गया और फैंस राजपाल यादव का मजाक बनाए जाने से नाराज हो गए। इसी बीच सलमान खान ने राजपाल यादव के इस वीडियो पर रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा, “राजपाल भाई, आप 30 साल से काम कर रहे हो और हम सबने आपको बार-बार रिपीट किया है क्योंकि आप अपना काम जानते हो और एक वैल्यू लाते हो। हकीकत यह है कि काम तो आपको बहुत मिलेगा और इसी डॉलर रेट पर मिलता रहेगा।” आगे सलमान ने लिखा “ये याद रखना कि कभी-कभी फ्लो में कुछ बातें निकल आती हैं। अगर कुछ देना ही है तो दिमाग में रखो और दिल से काम करो। डॉलर ऊपर हो या नीचे, क्या फर्क पड़ता है, पैसा तो इंडिया में ही देना है।” राजपाल यादव ने सलमान की पोस्ट पर रिप्लाई करते हुए लिखा “सलमान भाई मेरे तीस साल के सफर को सराहने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया। आप हमेशा बड़े भाई की तरह रास्ता दिखाते आए हैं, लव यू भाई।” इसके अलावा राजपाल यादव ने एक वीडियो जारी कर फैंस से अपील की कि उनका मजाक उड़ाने वाले सौरभ द्विवेदी की निंदा न की जाए, क्योंकि वो उनके लिए छोटे भाई की तरह हैं। उन्होंने ये भी कहा कि अवॉर्ड शो में सौरभ ने उनके लिए खड़े होकर तालियां बजवाई थीं।

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Last Updated:April 08, 2026, 14:24 IST Summer Health Drink: महंगे सप्लीमेंट को टक्कर दे रहा है बिहार का यह देसी प्रोटीन पाउडर. गर्मी की दस्तक के साथ मधुबनी के बाजारों में सत्तू की डिमांड बढ़ी. जानिए डॉ. सुमन कुमार से कि कैसे महज एक गिलास सत्तू आपको लू से बचाने, वजन घटाने और दिन भर ऊर्जावान रखने में जादुई असर दिखाता है. मधुबनी: जैसे-जैसे सूरज के तेवर तल्ख हो रहे हैं और गर्मी ने दस्तक दी है. मधुबनी के बाजारों में एक खास चीज की डिमांड तेजी से बढ़ गई है वह है सत्तू. बिहार की संस्कृति और खान-पान का अभिन्न हिस्सा रहे सत्तू को न केवल स्वाद बल्कि सेहत के लिहाज से भी सुपरफूड माना जाता है. स्थानीय चिकित्सक डॉ.सुमन कुमार के अनुसार सत्तू वर्तमान समय में मांसपेशियों की रिकवरी और गर्मी से बचाव का सबसे सस्ता और प्रभावी विकल्प है. गरीबों का प्रोटीन पाउडर और इसके गुणसत्तू को अक्सर गरीबों का प्रोटीन पाउडर कहा जाता है. लेकिन इसके फायदे किसी भी महंगे सप्लीमेंट से कम नहीं हैं. डॉ.सुमन बताते हैं कि सत्तू फाइबर, आयरन और कैल्शियम का बेहतरीन स्रोत है. यह मांसपेशियों की रिकवरी में सहायक होता है. शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है. इसमें मौजूद हाई-फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है. वजन घटाने की चाहत रखने वालों के लिए यह एक वरदान है. गर्मी में क्यों है सबसे ज्यादा कारगर?डॉ.सुमन कुमार के मुताबिक गर्मी के मौसम में सत्तू का सेवन कई कारणों से विशेष है. इसकी तासीर ठंडी होती है. ये चिलचिलाती धूप में शरीर के तापमान को नियंत्रित रखती है. लू लगने के खतरे को कम करती है. अगर आप सुबह काम पर निकलते समय कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन जैसे चावल या रोटी खाते हैं, तो वह जल्दी पच जाता है. कुछ ही घंटों में फिर से भूख लगने लगती है. यदि आप एक-दो गिलास सत्तू पीकर निकलते हैं. तो यह 4 से 5 घंटे तक पेट को भरा रखता है. यह शरीर को हल्का महसूस कराता है. लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखता है. जब सत्तू के घोल में नींबू का रस मिलाया जाता है, तो शरीर को विटामिन-सी की भरपूर खुराक मिलती है. जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है. सर्दियों में परहेज क्यों?डॉक्टर का कहना है कि ठंड के मौसम में सत्तू के अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए. क्योंकि इसकी तासीर बहुत ठंडी होती है. जिससे सर्दी-जुकाम होने की संभावना बढ़ जाती है. हालांकि, मौजूदा समय में जब मधुबनी के हर चौक-चौराहे, स्टेशन और घरों में सत्तू की मांग बढ़ी है. तो यह सेहत बनाने का सबसे सही समय है. अन्य पौष्टिक विकल्पडॉ.सुमन कुमार सलाह देते हैं कि सत्तू के अलावा इस मौसम में काबुली चना, राजमा और विभिन्न प्रकार की दालों को भी भोजन में शामिल करना चाहिए, ताकि शरीर को पर्याप्त प्रोटीन मिल सके. सत्तू को चाहें आप लिट्टी के रूप में खाएं या नमक, प्याज और नींबू के साथ घोल बनाकर पिएं, यह हर रूप में सेहत की जान है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें Location : Madhubani,Bihar First Published : April 08, 2026, 14:24 IST

Mallikarjun Kharge Apologizes Over Gujarati Statement

Mallikarjun Kharge Apologizes Over Gujarati Statement

Hindi News National Mallikarjun Kharge Apologizes Over Gujarati Statement | BJP Demands Reply 2 मिनट पहले कॉपी लिंक केरल के इडुक्की में रविवार को मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनावी सभा की थी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को गुजरातियों से जुड़े विवादित बयान पर खेद जताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि मेरे बयान को जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया गया। मैं शब्दों पर खेद व्यक्त करता हूं। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, खड़गे ने रविवार को केरल के इडुक्की में कहा था कि राज्य के लोग ‘पढ़े-लिखे और समझदार’ हैं और उन्हें गुमराह नहीं किया जा सकता, जबकि गुजरात और कुछ अन्य जगहों के लोग ‘अनपढ़’ हैं। उधर, गुजराती समुदाय के लोगों ने खड़गे के बयान को लेकर आज दिल्ली में कांग्रेस कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। खड़गे के खिलाफ नारेबाजी की और मांफी मांगने की अपील की। दिल्ली में कांग्रेस कार्यालय के बाहर बुधवार को गुजराती समुदाय के लोगों ने प्रदर्शन किया। BJP बोली- राहुल, सोनिया जवाब दें BJP के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस नेतृत्व से इस पर जवाब मांगा। उन्होंने राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से पूछा कि क्या वे खड़गे के बयान से सहमत हैं। प्रसाद ने कहा, “क्या वे इस बयान से सहमत हैं? अगर राहुल गांधी में समझ है तो उन्हें इस टिप्पणी से दूरी बनानी चाहिए, इसकी निंदा करनी चाहिए और माफी की मांग करनी चाहिए।’ गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि खड़गे को माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने साढ़े छह करोड़ गुजरातियों का अपमान ही नहीं किया है, बल्कि महात्मा गांधी और सरदार पटेल की पवित्र भूमि के गौरव को भी ठेस पहुंचाई है। खड़गे के इन बयानों पर विवाद हो चुका है… 8 जुलाई, 2025- खड़गे का ने कहा बीजेपी ने मुर्मू और कोविंद को राष्ट्रपति तो बनाया, पर क्या इसलिए कि वह हमारी जमीन, जंगल और पानी छीन सकें? उन्होंने यह सब आदिवासियों की जमीन हड़पने के लिए किया है। BJP बोली बयान बेहद अपमानजनक और आदिवासी-दलित विरोधी है। खड़गे बिना शर्त माफी मांगे। 6 मई, 2025- खड़गे ने कहा पीएम मोदी को हमले से तीन दिन पहले ही इंटेलिजेंस रिपोर्ट मिल गई थी, इसीलिए उन्होंने अपना कश्मीर दौरा रद्द कर दिया। लेकिन आम जनता को कोई चेतावनी क्यों नहीं दी गई? BJP बोली बयान पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना है और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। खड़गे को माफी मांगनी चाहिए। 20 मई, 2025- खड़गे ने कहा ऑपरेशन सिंदूर कोई बड़ी बात नहीं। यह तो एक छुटपुट युद्ध है। BJP बोली ये भारतीय सेना के शौर्य और बलिदान का अपमान है। खड़गे को हमारे वीर जवानों से माफी मांगनी चाहिए। चुनाव के बीच बयान कांग्रेस के लिए मुसीबत बना पांच राज्यों के चुनाव के साथ जब गुजरात में स्थानीय निकाय के चुनाव होने हैं तब यह बयान कांग्रेस के लिए मुसीबत बनता हुआ दिख रहा है। दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन तक ने विरोध दर्ज किया है। गौरतलब है कि गुजरात में 15 महानगरपालिकाओं, 84 नगरपालिकाओं, 34 जिला पंचायतों और 260 तालुका पंचायतों में 26 अप्रैल को मतदान होगा। 28 अप्रैल को चुनाव परिणाम आएगा। चुनाव की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई है। राजनीतिक दलों का चुनाव प्रचार भी शुरू हो गया है। अब बीजेपी ने खरगे के बयान को चुनावी मुद्दा बना लिया है। —————————— ये खबर भी पढें… TMC का आरोप- चुनाव आयोग ने 5 मिनट में भगाया:SIR पर आपत्ति जताने गए थे पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और चुनाव आयोग आमने-सामने आ गए हैं। सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के नेतृत्व में TMC का प्रतिनिधि मंडल बुधवार सुबह दिल्ली में चुनाव आयोग से मिलने पहुंचा। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

केन-बेतवा परियोजना का काम दूसरे दिन भी ठप:छतरपुर में आदिवासी-किसानों ने बांध स्थल पर किया प्रदर्शन

केन-बेतवा परियोजना का काम दूसरे दिन भी ठप:छतरपुर में आदिवासी-किसानों ने बांध स्थल पर किया प्रदर्शन

सूखे बुंदेलखंड की प्यास बुझाने के लिए शुरू की गई केन-बेतवा लिंक परियोजना अब बड़े जनविरोध का केंद्र बन गई है। अपनी मांगों को लेकर दिल्ली जा रहे आदिवासी, किसानों और ग्रामीणों को प्रशासन द्वारा रास्ते में रोके जाने के बाद आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया है। इसके चलते 44 हजार करोड़ रुपए की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का काम लगातार दूसरे दिन भी ठप रहा। बिजावर अनुविभाग में चल रहे निर्माण कार्य को रोकने के लिए हजारों की संख्या में आदिवासी किसान, महिलाएं और ग्रामीण ढोढन बांध स्थल पर धरने पर बैठ गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने काम कर रही मशीनों के सामने खड़े होकर निर्माण कार्य रुकवा दिया। आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं, जो हाथों में तख्तियां लेकर “जल, जंगल, जमीन” की लड़ाई का ऐलान कर रही हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे समाजसेवी अमित भटनागर ने बताया कि 5 अप्रैल से ही आदिवासी महिलाएं बांध स्थल पर डटी हुई हैं और तभी से निर्माण कार्य पूरी तरह बंद है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनकारियों को दिल्ली जाकर अपनी बात रखने से रोका गया, रास्ते में प्रताड़ित किया गया और उनके द्वारा इकट्ठा किया गया राशन भी छीन लिया गया। भटनागर के अनुसार, “यह अब सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई है। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक निर्माण कार्य नहीं होने देंगे।” उन्होंने प्रशासन पर झूठे आश्वासन देने और कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया। यह विरोध केन नदी पर प्रस्तावित 77 मीटर ऊंचे और 213 किलोमीटर लंबे ढोढन बांध के निर्माण को लेकर हो रहा है। परियोजना के तहत केन और बेतवा नदियों को जोड़ने के लिए 221 किलोमीटर लंबी नहर और 2 किलोमीटर की टनल भी बनाई जानी है। पन्ना नेशनल पार्क के कोर क्षेत्र के पास चल रहे इस निर्माण को लेकर पर्यावरण और विस्थापन के मुद्दे भी उठ रहे हैं। प्रशासन की समझाइश नाकाम, पुलिस बल तैनात.. स्थिति को संभालने के लिए सटई तहसील के तहसीलदार इंद्र कुमार गौतम मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर समझाइश देने की कोशिश की, लेकिन आंदोलनकारी नहीं माने। गौतम ने कहा कि प्रशासन लगातार संवाद कर रहा है और जल्द ही समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। फिलहाल बांध स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात है, लेकिन प्रदर्शनकारी अपने रुख पर अड़े हुए हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा। देखें मौके की तस्वीरें