दूध-दही के घटक भी बन सकते हैं खतरनाक, गलत खाद्य पदार्थ संयोजन से बढ़ सकते हैं विकार, जानें क्या नहीं

9 अप्रैल 2026 को 11:10 IST पर अपडेट किया गया दूध और दही के साइड इफेक्ट्स: दूध और दही को शामिल करना हानिकारक माना जाता है, लेकिन अगर इसे गलत तरीके से खाने के साथ खाया जाए तो जहर भी बन सकता है और बीमारियां भी हो सकती हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)गलत भोजन संयोजन(टी)दूध और दही के दुष्प्रभाव(टी)आयुर्वेदिक आहार युक्तियाँ(टी)फलों के साथ दूध के दुष्प्रभाव(टी)अस्वास्थ्यकर भोजन संयोजन(टी)पाचन समस्याएं भोजन(टी)गर्म चावल के साथ दही(टी)स्वास्थ्य युक्तियाँ आयुर्वेद(टी)खराब भोजन संयोजन(टी)पोषण संबंधी गलतियाँ
हत्या के बाद सिर काटकर सड़क के बीच में रखा:अररिया में भीड़ ने आरोपी को पीटा; गुस्साए लोगों ने आगजनी-तोड़फोड़ की

अररिया में एक शख्स ने दूसरे शख्स का गला काटकर उसका सिर बीच सड़क पर रख दिया। मृतक की पहचान मो. नवी हुसैन के रूप में हुई है। जिसने वारदात को अंजाम दिया उसका नाम राहुल चौहान बताया जा रहा है। घटना के बाद से इलाके में बवाल मचा हुआ है। गुस्साए लोगों ने आरोपी को भी पीट-पीटकर अधमरा कर दिया। उसे अस्पताल लाया गया है। भीड़ ने सड़क पर आगजनी की है। इलाके के सभी दुकानों को बंद कर दिया गया है। घटना फारबिसगंज थाना क्षेत्र के मार्केटिंग यार्ड गेट नंबर 2 के पास हुई। वारदात से जुड़ी कुछ तस्वीरें देखिए अब सिलसिलेवार ढंग से पढ़िए पूरी वारदात बताया जाता है कि आज सुबह मो. नवी हुसैन राहुल कुमार के पास पहुंचा। राहुल सत्तू बेचता है। नवी ने राहुल से कहा कि, सत्तू वाली कैसी है। इतने पर राहुल भड़क गया। पहले दोनों में बहस हुई। इसी बीच राहुल ने चाकू निकाल कर नवी के पेट में मार दिया। फिर उसके सिर को धड़ से अलग कर बीच सड़क रख दिया। ऑटो चालक की हत्या के बाद मौके पर मौजूद लोग आक्रोशित हो गए। भीड़ ने सत्तू विक्रेता को पकड़ लिया और उसे बेरहमी से पीटा। गंभीर चोटों के कारण सत्तू विक्रेता की भी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। आक्रोशित भीड़ ने सड़क जाम कर की आगजनी इस दोहरे हत्याकांड के बाद इलाके में अफरा-तफरी और तनाव का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जमा हो गए। आक्रोशित भीड़ ने सुभाष चौक के पास सड़क जाम कर आगजनी भी की, जिससे यातायात बाधित हो गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मुकेश कुमार साहा ने बताया कि, एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है, जबकि दूसरे युवक की तलाश जारी है। पूरे इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। पुलिस बल कैंप कर स्थिति पर नजर रखे हुए है। क्रोशित लोगों को समझाया जा रहा है। खबर अपडेट हो रही है
हाथ में गिटार, कंधों पर लड़का: विजय के तिरुनेलवेली रोड शो की झलकियाँ

बुधवार, 8 अप्रैल को तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) नेता विजय के चुनाव अभियान ने राजनीतिक हलकों में महत्वपूर्ण ध्यान आकर्षित किया है, जिसमें कई स्थानों पर बड़ी भीड़ उमड़ी है। अभियान, विशेष रूप से केटीसी नगर के आसपास उत्सव जैसा माहौल रहा, क्योंकि हजारों समर्थक अभिनेता से नेता बने अभिनेता की एक झलक पाने के लिए एकत्र हुए थे। (स्थानीय18) एक खुले वाहन में यात्रा करते हुए, विजय ने थलाईयुथु, वन्नारापेट्टई, पलायमकोट्टई मार्केट और समाधानपुरम जैसे प्रमुख क्षेत्रों को कवर करते हुए एक व्यापक रोड शो आयोजित किया। हर पड़ाव पर समर्थक सड़कों पर कतार में खड़े थे और उनके वहां से गुजरने पर हाथ हिला रहे थे और फूल बरसा रहे थे। जनता के साथ उनकी बातचीत अभियान का एक प्रमुख आकर्षण बन गई। एक उदाहरण में, जैसे ही लोगों ने उनके वाहन पर फूल बरसाए, विजय ने उन्हें उठाया और भीड़ में वापस फेंक दिया, जिससे जोर से जयकार हुई। (स्थानीय18) विजय को समर्थकों के साथ गर्मजोशी से मिलते हुए भी देखा गया, जिसमें वह क्षण भी शामिल था जब उन्होंने एक युवा लड़के को अपने कंधों पर उठाया था। (स्थानीय18) विजय ने भी भीड़ के इशारों का मजाकिया अंदाज में जवाब दिया। जब एक समर्थक ने उन्हें एक गिटार दिया, तो उन्होंने उसे बजाते हुए नकल की और वहां मौजूद लोगों का मनोरंजन किया। दूसरे क्षण में, उन्होंने अपनी ओर उछाली गई एक शीतल पेय की बोतल को आसानी से पकड़ लिया, और अपने सुरक्षाकर्मियों से मजाक करते हुए कहा, “मैंने इसे बिल्कुल सही पकड़ा!”, जिससे समर्थकों के बीच हंसी और तालियां गूंज उठीं। अभियान में प्रतीकात्मक संकेत भी शामिल थे, जैसे कि जब स्थानीय किसानों ने उन्हें धान की पेशकश की। (स्थानीय18) तिरुनेलवेली अभियान ने टीवीके प्रमुख की स्टार शक्ति को प्रतिबिंबित किया। भीड़ के साथ उनका सीधा जुड़ाव एक प्रमुख आकर्षण के रूप में उभरा, जिससे जमीन पर समर्थकों के बीच उनकी अपील मजबूत हुई। (स्थानीय18) (टैग्सटूट्रांसलेट)अभिनेता विजय(टी)विधानसभा चुनाव(टी)चुनाव अभियान(टी)सार्वजनिक रैली(टी)रोड शो(टी)तमिलनाडु(टी)तमिलनाडु समाचार(टी)तमिल नाडु समाचार आज(टी)तिरुनेलवेली(टी)टीवीके
समय रैना के एंग्जायटी अटैक, लक्षण, कारण और बचाव के तरीके samay raina anxiety attack symptoms and prevention

Samay Raina Anxiety Attack: इंडियाज गॉट लेटेंट कंट्रोवर्सी में फंसे मशहूर यूट्यूबर और कॉमेडियन समय रैना ने हाल ही में खुलासा किया कि विवाद के बाद उन्हें न केवल फाइनेंशियली नुकसान हुआ बल्कि हेल्थ भी खराब हो गई थी. 8 करोड़ रुपये के नुकसान, कानूनी पचड़े, ऑनलाइन मिलने वाली नफरत और ट्रोलिंग के चलते उन्हें एंग्जाइटी अटैक आने शुरू हो गए थे. इस दौरान समय रैना सोने और दिमाग को शांत रखने के लिए नींद की गोलियां तक खाते थे. एंग्जाइटी अटैक आखिर होता क्या है और इसके लक्षण क्या होते हैं कि इससे उबरने में समय को काफी समय लगा, आइए जानते हैं.. क्या होते हैं एंग्जाइटी अटैक आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में एंग्जायटी अटैक यानि चिंता का दौरा आम समस्या बन गई है. कई लोग इसे हार्ट अटैक समझकर घबरा जाते हैं, लेकिन यह एक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी स्थिति है. एंग्जायटी अटैक अक्सर पैनिक अटैक से मिलता-जुलता होता है. इसमें व्यक्ति को अचानक तीव्र भय या खतरे की भावना होती है, भले ही कोई वास्तविक खतरा न हो. यह कुछ मिनटों में पीक पर पहुंचता है और 5 से 30 मिनट तक रह सकता है. पैनिक अटैक अचानक आता है, जबकि सामान्य एंग्जायटी धीरे-धीरे बढ़ती है और लंबे समय तक बनी रह सकती है. इसके लक्षण क्या होते हैं?एंग्जाइटी अटैक में अचानक तीव्र घबराहट, डर और शारीरिक लक्षण महसूस होते हैं. इसके प्रमुख लक्षण ये होते हैं.. दिल की धड़कन तेज होना या अनियमित महसूस होना सांस फूलना या तेज सांस लेना (हाइपरवेंटिलेशन) पसीना आना, कांपना या ठंड लगना सीने में दर्द या भारीपन, चक्कर आना, जी मिचलाना मुंह सूखना, हाथ-पैर सुन्न होना या झनझनाहट मौत का डर, नियंत्रण खोने का डर या ‘कुछ बहुत बुरा होने वाला है’ जैसी भावना बेचैनी, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी डॉक्टरों की मानें तो ये लक्षण इतने तीव्र हो सकते हैं कि व्यक्ति को लगता है जैसे हार्ट अटैक आ रहा है. क्यों होती है ये परेशानी?अक्सर एंग्जाइटी अटैक बहुत ज्यादा तनाव, काम का बोझ, पारिवारिक मुद्दे, आर्थिक चिंता, पिछली कोई घटना या ट्रॉमा, कैफीन या कुछ दवाएं लेने की वजह से ट्रिगर हो सकते हैं. जेनेटिक्स, मस्तिष्क रसायनों में असंतुलन और जीवनशैली भी इनको बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं. एंग्जाइटी अटैक से कैसे बचें और तुरंत क्या करें?साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर निशा खन्ना कहती हैं कि एंग्जाइटी को कम करने के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव और ब्रीदिंग संबंधी व्यायाम करने से फायदा होता है. यानि वे सभी चीजें जो मानसिक दवाब और तनाव कम करती हैं. इनके लिए योग और मनपसंद गतिविधियां करना सबसे सही उपाय है. ब्रीदिंग एक्सरसाइज: इसके लिए 4-7-8 तकनीक अपनाएं. 4 सेकंड सांस अंदर, 7 सेकंड रोकें, 8 सेकंड तक सांस बाहर रखें. इससे इससे नर्वस सिस्टम शांत होता है. लाइफस्टाइल बदलाव: नियमित व्यायाम करें, संतुलित आहार लें, कैफीन कम करें, अच्छी नींद लें और ध्यान-योग करें. ट्रिगर्स से बचें: अपने आसपास की तनावपूर्ण स्थितियों को पहचानें और उनसे दूर रहने की कोशिश करें, साथ ही निपटने की रणनीति भी बनाएं. मनोचिकित्सकों की मानें तो अगर अटैक बार-बार आ रहे हैं और दैनिक जीवन प्रभावित हो या डर बना रहे तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें. इसके लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) सबसे प्रभावी है. जरूरत पड़ने पर दवाएं भी दी जाती हैं. स्वयं दवा न लें. परिवार का सहयोग बहुत जरूरी है.एंग्जायटी अटैक खतरनाक नहीं है, लेकिन अनदेखा करने से समस्या बढ़ सकती है. जागरूकता और सही कदम से आप सामान्य जीवन जी सकते हैं. अगर लक्षण महसूस हों तो डॉक्टर से बात करें. मानसिक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है जितना शारीरिक.
तरबूज खाएं या खरबूजा? गर्मियों में कौन है असली ‘हेल्थ टॉनिक’, जानें कैंसर से बचाव और वजन घटाने के लिए क्या है बेस्ट!

Last Updated:April 09, 2026, 10:48 IST Watermelon Muskmelon Benefits: गर्मियों ने दस्तक दे दी है. इस मौसम में शरीर को हाइड्रेटेड रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है. जब भी हम बाजार जाते हैं, तो दो फल हमें सबसे ज्यादा नजर आते हैं- लाल रसीला तरबूज (Watermelon) और खुशबूदार खरबूजा (Muskmelon). लेकिन अक्सर हमारे मन में यह सवाल उठता है कि इन दोनों में से सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद कौन सा है? क्या ये सिर्फ प्यास बुझाते हैं या इनके पीछे कोई गहरा औषधीय गुण भी छिपा है? आइए, जानते हैं कि आपकी सेहत के लिए असली ‘हेल्थ टॉनिक’ कौन सा है. Tarbuj-Kharbuja ke fayde : गर्मियों के इन दोनों सुपरफूड्स की सबसे बड़ी खूबी इनका वॉटर कंटेंट है. USDA के अनुसार, तरबूज में लगभग 92% पानी होता है, जो इसे डिहाइड्रेशन से लड़ने का सबसे शक्तिशाली हथियार बनाता है. दूसरी ओर, खरबूजे में करीब 90% पानी के साथ-साथ फाइबर की मात्रा थोड़ी अधिक होती है. अगर आप चिलचिलाती धूप से लौटकर आए हैं, तो तरबूज शरीर के तापमान को तुरंत कम करने में मदद करता है, जबकि खरबूजा आपके पाचन तंत्र को ठंडक पहुँचाने का काम करता है. इम्यूनिटी बढ़ाने की बात करें, तो खरबूजा यहाँ बाजी मारता नजर आता है. खरबूजे में विटामिन C और विटामिन A प्रचुर मात्रा में होते हैं. विटामिन C न केवल संक्रमण से लड़ने वाली सफेद रक्त कोशिकाओं को बढ़ाता है, बल्कि आपकी त्वचा में कोलेजन के स्तर को भी बनाए रखता है. वहीं, तरबूज में मौजूद लाइकोपीन (Lycopene) एक ऐसा एंटीऑक्सीडेंट है, जो कोशिकाओं को डैमेज होने से बचाता है और शरीर की आंतरिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है. आजकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए लोग प्राकृतिक रास्तों की तलाश कर रहे हैं. तरबूज का गहरा लाल रंग उसमें मौजूद लाइकोपीन की वजह से होता है. कई शोध बताते हैं कि लाइकोपीन प्रोस्टेट कैंसर और फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को कम करने में मददगार हो सकता है. खरबूजा भी पीछे नहीं है; इसमें मौजूद बीटा-कैरोटीन शरीर में जाकर विटामिन A में बदल जाता है, जो फ्री-रेडिकल्स से लड़ने में शरीर की मदद करता है और कैंसर जैसी स्थितियों के विरुद्ध सुरक्षा कवच तैयार करता है. Add News18 as Preferred Source on Google अगर आपका लक्ष्य वजन घटाना (Weight Loss) है, तो ये दोनों ही फल आपके बेस्ट फ्रेंड बन सकते हैं. तरबूज में कैलोरी बहुत कम होती है (प्रति 100 ग्राम केवल 30 कैलोरी), और इसे खाने से पेट जल्दी भर जाता है. वहीं खरबूजा अपने उच्च फाइबर कंटेंट की वजह से आपको लंबे समय तक भूख का अहसास नहीं होने देता. अगर आपको मीठा खाने की क्रेविंग होती है, तो खरबूजा एक बेहतरीन विकल्प है क्योंकि यह तरबूज की तुलना में थोड़ा ज्यादा ‘फिलिंग’ महसूस होता है. दिल की सेहत (Heart Health) के लिए तरबूज में मौजूद सिट्रुलिन (Citrulline) नाम का अमीनो एसिड रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक होता है. यह धमनियों में रक्त के प्रवाह को सुचारू बनाता है. दूसरी तरफ, खरबूजे में पोटेशियम की मात्रा काफी अच्छी होती है, जो सोडियम के प्रभाव को कम कर ब्लड प्रेशर को स्थिर रखता है. यानी, अगर आप हाई बीपी के मरीज हैं, तो ये दोनों फल आपके लिए किसी टॉनिक से कम नहीं हैं. आंखों की रोशनी और त्वचा की चमक के मामले में खरबूजा काफी प्रभावी माना जाता है. इसमें मौजूद विटामिन A आंखों की मासपेशियों को ताकत देता है. तरबूज आपकी स्किन को हाइड्रेटेड रखकर ‘नेचुरल ग्लो’ देता है और धूप से होने वाले सनबर्न के असर को कम करता है. एथलीट्स और जिम जाने वालों के लिए तरबूज का रस मांसपेशियों के दर्द (Muscle Soreness) को कम करने के लिए एक जादुई ड्रिंक की तरह काम करता है. अंत में, सवाल वही है—किसे चुनें? असलियत यह है कि तरबूज और खरबूजा दोनों के अपने अलग फायदे हैं. अगर आपको ज्यादा प्यास लगती है और आप वर्कआउट करते हैं, तो तरबूज आपके लिए बेस्ट है. लेकिन अगर आप पाचन सुधारना चाहते हैं और अपनी इम्यूनिटी पर ध्यान देना चाहते हैं, तो खरबूजा एक बेहतरीन चुनाव है. सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप अपनी डाइट में दोनों को शामिल करें, लेकिन ध्यान रहे कि इन्हें खाने के तुरंत बाद पानी न पिएं और रात के समय इनके सेवन से बचें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) First Published : April 09, 2026, 10:48 IST
‘परिवर्तन’ के नए बैच की सेवा: दार्जिलिंग के बेकरी कारोबारी ने बंगाल चुनाव मैदान में प्रवेश किया | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:09 अप्रैल, 2026, 10:45 IST प्रतिष्ठित ग्लेनरीज़ बेकरी के मालिक अजॉय एडवर्ड, हिप-हॉप तत्वों और लाइव प्रदर्शन को शामिल करते हुए राजनीति को एक उच्च-ऊर्जा, युवा-उन्मुख दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हैं। प्रतिष्ठित ग्लेनरी बेकरी के मालिक अजॉय एडवर्ड ने भारतीय गोरखा जनशक्ति पार्टी लॉन्च की है। (न्यूज़18) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भले ही पूरे पश्चिम बंगाल में अपने अभियान के केंद्रीय विषय के रूप में “परिवर्तन” (परिवर्तन) को पेश कर रही है, लेकिन दार्जिलिंग की पहाड़ियों में एक नए राजनीतिक प्रवेशकर्ता के नेतृत्व में परिवर्तन के लिए एक समानांतर आह्वान उभर रहा है। पहाड़ियों के राजनीतिक परिदृश्य पर वर्तमान में भाजपा सांसद राजू बिस्ता और अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस-सहयोगी भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) का वर्चस्व है, जो गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) चलाता है। हालाँकि, एक नए खिलाड़ी- प्रतिष्ठित ग्लेनरीज़ बेकरी एंड रेस्तरां के मालिक अजय एडवर्ड ने भारतीय गोरखा जनशक्ति पार्टी लॉन्च की है, जो इसे बीजेपी और टीएमसी समर्थित गठबंधन दोनों के विकल्प के रूप में पेश करती है। पार्टी ने उत्तर बंगाल में पांच उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें खुद दार्जिलिंग से एडवर्ड भी शामिल हैं। एक अंतर के साथ एक अभियान एडवर्ड की अभियान शैली सबसे अलग है। उन्हें अक्सर “परिवर्तन” की थीम पर केंद्रित रैप संगीत के साथ एक वाहन की छत से भीड़ को संबोधित करते देखा जाता है। उनका आउटरीच राजनीति को उच्च-ऊर्जा, युवा-उन्मुख दृष्टिकोण के साथ जोड़ता है, जिसमें हिप-हॉप तत्व और लाइव प्रदर्शन शामिल हैं। जेन ज़ेड समर्थकों की स्पष्ट उपस्थिति के साथ, यह अभियान विशेष रूप से युवा मतदाताओं के साथ प्रतिध्वनित होता प्रतीत होता है। पर्यवेक्षकों ने नेपाल में देखी जाने वाली अभियान शैलियों के साथ समानताएं देखीं, विशेष रूप से संगीत-संचालित लामबंदी के संदर्भ में। मुख्य मुद्दे और संदेश News18 से बात करते हुए, एडवर्ड ने कहा, “मुख्यधारा की दोनों राजनीतिक पार्टियों ने हमारे लिए काम नहीं किया है। गोरखालैंड हमारा दृष्टिकोण है। अपनी पहचान और संस्कृति की रक्षा के साथ-साथ, हमें विकास की भी जरूरत है, खासकर बुनियादी ढांचे में। हमने नेपाल से प्रेरणा ली है और उसी के अनुसार अपना अभियान तैयार किया है।” एडवर्ड ने पिछले नगरपालिका चुनावों में भी अच्छा प्रदर्शन किया था और राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि वह इस चुनाव चक्र में एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में उभर सकते हैं। प्रतिद्वंद्वियों की प्रतिक्रियाएँ हालाँकि, मुख्यधारा के राजनीतिक खिलाड़ियों ने उनके प्रभाव को कम कर दिया है। News18 से बात करते हुए, बिस्टा ने कहा: “वोटों को विभाजित करने का प्रयास करके वह प्रभावी रूप से टीएमसी के पक्ष में खेल रहे हैं। लोग इसे समझते हैं।” अनित थापा, जिनकी पार्टी टीएमसी के साथ गठबंधन में है, ने कहा, “लोग विकास के लिए वोट करेंगे। एडवर्ड ने पहले भी चुनाव लड़ा है, लेकिन हमने पंचायत चुनाव और अन्य स्थानीय निकाय जीते हैं।” पहाड़ी राजनीति को नया आयाम पारंपरिक पार्टियों द्वारा अपना गढ़ बनाए रखने और एक नए प्रवेशी द्वारा यथास्थिति को बाधित करने के प्रयास के साथ, दार्जिलिंग पहाड़ियों में चुनावी मुकाबले पर कड़ी नजर रहने की उम्मीद है। युवा-संचालित, अपरंपरागत अभियान के उद्भव ने राजनीतिक कथा में एक नया आयाम जोड़ा है, जिससे पहाड़ियों की लड़ाई इस चुनाव में सबसे दिलचस्प प्रतियोगिताओं में से एक बन गई है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : दार्जिलिंग, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 09 अप्रैल, 2026, 10:45 IST समाचार चुनाव ‘परिवर्तन’ के नए बैच की सेवा: दार्जिलिंग के बेकरी कारोबारी ने बंगाल चुनाव मैदान में प्रवेश किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)दार्जिलिंग पहाड़ी राजनीति(टी)दार्जिलिंग चुनाव(टी)भारतीय गोरखा जनशक्ति पार्टी(टी)अजॉय एडवर्ड अभियान(टी)युवा संचालित राजनीति(टी)गोरखालैंड की मांग(टी)दार्जिलिंग में भाजपा(टी)टीएमसी गठबंधन पश्चिम बंगाल
इंदौर में सगाई में रिश्तेदारों के बीच खूनी संघर्ष:खाने-पीने की बात पर विवाद, डंडे-पेचकस से हमला, युवक की मौत

इंदौर के तेजाजी नगर थाना क्षेत्र में दो परिवारों के बीच हुए विवाद ने एक युवक की जान ले ली। मामला सगाई समारोह में शुरू हुए झगड़े से जुड़ा है, जो बाद में सड़क पर हिंसक हमले में बदल गया। तेजाजी नगर टीआई देवेंद्र मरकाम के मुताबिक, मृतक की पहचान शुभम पुत्र संगतनाथ निवासी महादेव नगर (नार्थ मोहल्ला) के रूप में हुई है। बुधवार रात वह अपने परिवार के साथ उमरीखेड़ा में एक सगाई कार्यक्रम में शामिल होने गया था। पुलिस के अनुसार, झगड़े की शुरुआत खाने-पीने की बात को लेकर हुई थी, जो बाद में हिंसक रूप ले बैठा। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस ने मामले में शुभम के दोस्त रितिक, करण और एक अन्य युवक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि विवाद करने वाले लोग आपस में रिश्तेदार हैं। सगाई में शुरू हुआ विवाद, बायपास पर घेरकर हमला बताया जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान किसी बात को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो गया, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गया। इसके बाद शुभम अपने साथियों के साथ वहां से निकल गया। आरोप है कि दूसरे पक्ष के लोगों ने उसे बायपास पर घेर लिया और डंडों व पेचकस से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल शुभम को परिजन चोइथराम अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर शुभम दुकानों पर नींबू-मिर्ची बांधने का काम करता था। उसके परिवार में एक बड़ा भाई है, जिसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं बताई जा रही है। पिता बारदान (गोदाम) में काम करते हैं, जबकि मां मजदूरी करती है।
समय रैना पर भड़के मुकेश खन्ना:बोले- शक्तिमान का अपमान किया, मुंह काला कर तुम्हें गधे पर घुमाना चाहिए

एक्टर मुकेश खन्ना कॉमेडियन समय रैना पर भड़क गए और बुधवार को उन्होंने एक एडिटेड तस्वीर शेयर की, जिसमें समय रैना को गधे पर बैठे दिखाया गया। जिसमें लिखा था कि समय रैना तू सिर्फ गधे पर बैठने के लायक है!! वो भी मुंह काला करके। तस्वीर के साथ मुकेश खन्ना ने इंस्टाग्राम पर यह लिखा, ‘कुत्ते की दुम टेढ़ी रहती है। उसे लाख शीशियों में रखो। बाहर निकालो, फिर टेढ़ी की टेढ़ी!! समय रैना की भी एक दुम है। कितना भी मारो, सीधा करो, वो वापस टेढ़ी हो जाती है क्योंकि वो सीधा-सादा प्राणी नहीं है। वो रोस्टेड प्राणी है।’ उन्होंने आगे लिखा, ‘गंदगी की आग में जलाया हुआ, पकाया हुआ। पूरे देश ने लताड़ा, मारा, फिर आ गया बेशर्मों की तरह और मार खाने। अब एक ही चीज बाकी है। उसका मुंह काला कर गधे पर बिठा कर देश भर के शहरों में, गलियों में उसकी परेड करनी चाहिए। जहां बच्चे उसको अंडे, टमाटर मारें क्योंकि उसने उनके सुपरहीरो शक्तिमान का अपमान किया है!!! जानिए क्या है पूरा मामला? दरअसल हाल ही में समय रैना ने अपने वीडिया ‘स्टिल आईलव’ में 2025 के ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद को लेकर आलोचना करने वालों पर टिप्पणी की थी। जिस पर उन्होंने मुकेश खन्ना और उनके शो शक्तिमान को लेकर कहा था, ‘शक्तिमान आ गया था यार। शक्तिमान से कैसे लड़ेंगे यार? शक्तिमान कह रहा था क्या असर पड़ेगा इनके कंटेंट का बच्चों पर, बच्चों का क्या होगा ये कंटेंट देख के। मुझें नहीं पता, तुम में से कितने लोग शक्तिमान एरा में टीवी देखते थे। हर अगले महीने न्यूज आती थी, कोई बच्चा शक्तिमान देख के बिल्डिंग से कूद गया। तूने बच्चे मारे हैं भाई, तू क्या मोरल हाई ग्राउंड लेकर बैठा है?’
समय रैना पर भड़के मुकेश खन्ना:बोले- शक्तिमान का अपमान किया, मुंह काला कर तुम्हें गधे पर घुमाना चाहिए

एक्टर मुकेश खन्ना कॉमेडियन समय रैना पर भड़क गए और बुधवार को उन्होंने एक एडिटेड तस्वीर शेयर की, जिसमें समय रैना को गधे पर बैठे दिखाया गया। जिसमें लिखा था कि समय रैना तू सिर्फ गधे पर बैठने के लायक है!! वो भी मुंह काला करके। तस्वीर के साथ मुकेश खन्ना ने इंस्टाग्राम पर यह लिखा, ‘कुत्ते की दुम टेढ़ी रहती है। उसे लाख शीशियों में रखो। बाहर निकालो, फिर टेढ़ी की टेढ़ी!! समय रैना की भी एक दुम है। कितना भी मारो, सीधा करो, वो वापस टेढ़ी हो जाती है क्योंकि वो सीधा-सादा प्राणी नहीं है। वो रोस्टेड प्राणी है।’ उन्होंने आगे लिखा, ‘गंदगी की आग में जलाया हुआ, पकाया हुआ। पूरे देश ने लताड़ा, मारा, फिर आ गया बेशर्मों की तरह और मार खाने। अब एक ही चीज बाकी है। उसका मुंह काला कर गधे पर बिठा कर देश भर के शहरों में, गलियों में उसकी परेड करनी चाहिए। जहां बच्चे उसको अंडे, टमाटर मारें क्योंकि उसने उनके सुपरहीरो शक्तिमान का अपमान किया है!!! जानिए क्या है पूरा मामला? दरअसल हाल ही में समय रैना ने अपने वीडिया ‘स्टिल आईलव’ में 2025 के ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद को लेकर आलोचना करने वालों पर टिप्पणी की थी। जिस पर उन्होंने मुकेश खन्ना और उनके शो शक्तिमान को लेकर कहा था, ‘शक्तिमान आ गया था यार। शक्तिमान से कैसे लड़ेंगे यार? शक्तिमान कह रहा था क्या असर पड़ेगा इनके कंटेंट का बच्चों पर, बच्चों का क्या होगा ये कंटेंट देख के। मुझें नहीं पता, तुम में से कितने लोग शक्तिमान एरा में टीवी देखते थे। हर अगले महीने न्यूज आती थी, कोई बच्चा शक्तिमान देख के बिल्डिंग से कूद गया। तूने बच्चे मारे हैं भाई, तू क्या मोरल हाई ग्राउंड लेकर बैठा है?’
BJP chief Nitin Nabin slams Mallikarjun Kharge’s ‘snake’ remarks against BJP, RSS

Hindi News National BJP Chief Nitin Nabin Slams Mallikarjun Kharge’s “snake” Remarks Against BJP, RSS नई दिल्ली17 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के ‘सांप’ वाले बयान पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि खड़गे की टिप्पणी लोगों को सांप्रदायिक आधार पर भड़काने की कोशिश है और यह एक सस्ती मानसिकता को दिखाती है। यह बयान उस समय आया है जब खड़गे ने एक रैली में BJP और RSS की तुलना जहरीले सांप से की थी। नितिन नवीन ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि कांग्रेस की यह पुरानी परंपरा रही है कि वह ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करती है, जिनका समाज पर नकारात्मक असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि हर बार ऐसे बयानों के बाद जनता BJP को जीत का आशीर्वाद देती है। उन्होंने खड़गे के बयान के पीछे गांधी परिवार को जिम्मेदार ठहराया। कहा- राहुल गांधी और सोनिया गांधी रिमोट कंट्रोल से पार्टी चलाते हैं और खड़गे उसी के तहत बोलते हैं। खड़गे ने असम की एक रैली में कहा था कि अगर सामने जहरीला सांप आए, तो नमाज भी रोककर उसे मार देना चाहिए। इसी उदाहरण के जरिए उन्होंने BJP और RSS को “जहरीला सांप” बताया। इस बयान के बाद असम BJP नेताओं ने खड़गे के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और कांग्रेस पर मुस्लिम वोट के लिए तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है। इसी बीच, नितिन नवीन ने खड़गे के उस बयान की भी आलोचना की, जिसमें उन्होंने केरल और गुजरात के लोगों की तुलना की थी। खड़गे ने कहा था कि केरल के लोग पढ़े-लिखे और समझदार हैं, उन्हें गुमराह नहीं किया जा सकता, जबकि गुजरात जैसे राज्यों के लोगों को गुमराह किया जा सकता है। इस पर नितिन नवीन ने कहा कि गुजरात महात्मा गांधी और सरदार पटेल की भूमि है और आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हार के बाद कभी EVM को दोष देती है तो कभी जनता को, लेकिन खुद से कुछ नहीं सीखती। वहीं, BJP नेता रविशंकर प्रसाद ने भी खड़गे के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी राज्य के लोगों को अशिक्षित कहना एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष के लिए शर्मनाक है। उन्होंने खड़गे से देश से माफी मांगने की मांग की। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि गुजरात की साक्षरता दर 82 प्रतिशत है और यह प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में बेहतर हुई है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सिर्फ मोदी से नफरत के कारण खड़गे कुछ भी बोलेंगे। इसके अलावा, उन्होंने खड़गे पर सांप्रदायिक तनाव पैदा करने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, इस तरह के बयान धार्मिक भावनाओं को भड़काने का काम करते हैं और जनता ऐसे बयानों को पसंद नहीं करती। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…









