ऑनलाइन गेमिंग लिंक से 2.62 लाख ठगी का पर्दाफाश:शिवपुरी पुलिस ने दो आरोपियों को झारखंड से गिरफ्तार किया

शिवपुरी पुलिस ने गुरुवार को ऑनलाइन ठगी के एक बड़े मामले का खुलासा कर झारखंड से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। करैरा निवासी श्याम कुमार गुप्ता ने 12 जनवरी 2026 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि अज्ञात आरोपियों ने उनके खाते से 2 लाख 62 हजार रुपए निकाल लिए थे। करैरा थाना प्रभारी विनोद छावई ने बताया कि इस संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। एक टीम गठित कर मामले की जांच की गई। जांच के दौरान, पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों का उपयोग करते हुए आरोपियों का पता लगाया और झारखंड से बेदांत गुप्ता (20) और गौरव मेहता (20) को गिरफ्तार किया। पूछताछ में, आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर ठगी की इस वारदात को अंजाम दिया था और ठगी गई रकम को विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया था। बैंक खातों को होल्ड करवा दिया पुलिस ने साइबर सेल की सहायता से उन बैंक खातों को होल्ड करवा दिया है, जिनमें ठगी की रकम स्थानांतरित की गई थी। जांच से यह भी पता चला है कि इस गिरोह के अन्य सदस्य महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में सक्रिय हैं। पुलिस के अनुसार, ठगी की यह वारदात ऑनलाइन गेमिंग लिंक के माध्यम से की गई थी। फरियादी द्वारा लिंक पर क्लिक करते ही, आरोपियों को उनके बैंक खाते तक पहुंच मिल गई और उन्होंने पूरी रकम निकाल ली। गिरफ्तार किए गए आरोपी कमीशन एजेंट के तौर पर काम करते थे। वे ठगी की रकम में से अपना कमीशन काटकर शेष राशि महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में बैठे गिरोह के सरगना को भेज देते थे। फिलहाल, पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है और जल्द ही अन्य राज्यों में दबिश देकर गिरोह के मुख्य सरगनाओं को गिरफ्तार करने की तैयारी में है।
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Last Updated:April 09, 2026, 19:15 IST गर्मियों में गर्भवती महिलाओं के लिए डिहाइड्रेशन गंभीर खतरा बन सकता है. तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण शरीर में पानी की कमी से चक्कर, कमजोरी और प्री-मैच्योर डिलीवरी का जोखिम बढ़ जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि नियमित रूप से पानी, नारियल पानी, छाछ और पानी से भरपूर फलों का सेवन मां और शिशु दोनों की सेहत के लिए जरूरी है. कन्नौज. गर्मियों का मौसम गर्भवती महिलाओं के लिए कई चुनौतियां लेकर आता है, जिनमें सबसे आम समस्या है शरीर में पानी की कमी, यानी डिहाइड्रेशन. तेज धूप, पसीना और बढ़ता तापमान शरीर से पानी तेजी से कम कर देता है, ऐसे में गर्भवती महिलाओं के लिए यह स्थिति और भी संवेदनशील हो जाती है, क्योंकि इसका सीधा असर मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की सेहत पर पड़ सकता है. गर्भावस्था के दौरान शरीर को सामान्य से अधिक पानी की जरूरत होती है. पर्याप्त पानी पीने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है, पोषक तत्वों का सही संचार होता है और शिशु के विकास में भी मदद मिलती है. अगर शरीर में पानी की कमी हो जाए, तो चक्कर आना, थकान, सिरदर्द और यहां तक कि प्री-मैच्योर डिलीवरी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. इन चीजों का करें नियमित सेवनगर्मी के मौसम में सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि कुछ प्राकृतिक पेय और फल भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं. नारियल पानी, नींबू पानी और छाछ जैसे पेय पदार्थ शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ जरूरी मिनरल्स भी प्रदान करते हैं. इसके अलावा तरबूज, खीरा और मौसमी जैसे फल शरीर में पानी की कमी को दूर करने में बेहद मददगार साबित होते हैं. ये चीजें शरीर को तरोताजा बनाए रखने के साथ ऊर्जा भी देती हैं. दिनभर पानी पीने की बनाएं आदतडॉ. शक्ति बसु बताते हैं गर्भवती महिलाओं को दिनभर में थोड़ा-थोड़ा करके पानी पीते रहना चाहिए. एक साथ ज्यादा पानी पीने के बजाय नियमित अंतराल पर पानी लेना ज्यादा फायदेमंद होता है. हमेशा अपने साथ पानी की बोतल रखें और बाहर जाते समय भी पानी पीना न भूलें. यह आदत शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में काफी मदद करती है. क्या बोले डॉक्टर जिला अस्पताल सीएमएस डॉक्टर शक्ति बसु बताते हैं कि डिहाइड्रेशन के कुछ सामान्य लक्षण होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जैसे मुंह सूखना, पेशाब का गहरा रंग, कमजोरी महसूस होना, चक्कर आना और दिल की धड़कन तेज होना, अगर ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत पानी या तरल पदार्थ का सेवन बढ़ा दें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें. हर गर्भवती महिला की स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी भी डाइट या हाइड्रेशन प्लान को अपनाने से पहले अपने नज़दीकी डॉक्टर की सलाह जरूर लें. सही मार्गदर्शन और संतुलित खानपान के जरिए गर्मियों में भी खुद को और अपने बच्चे को स्वस्थ रखा जा सकता है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Kannauj,Uttar Pradesh First Published : April 09, 2026, 19:15 IST
Manipur Bomb Attack | Children Death Truth Hidden In Hospital

इंफाल30 मिनट पहलेलेखक: एम मुबासिर राजी कॉपी लिंक मृत बच्चों की दादी और उनकी बहन। घटना के बाद से पूरा परिवार सदमे में है। मणिपुर के बिष्णुपुर जिले के मोइरांग ट्रोंगलाओबी में 6 अप्रैल की आधी रात एक घर पर बम से हमला हुआ। इसमें 5 साल के बेटे और 6 महीने की बच्ची की मौत हो गई, जबकि उनकी मां बिनाता ओइनाम गंभीर रूप से घायल हो गईं। अस्पताल में भर्ती बिनाता तीन दिन तक अपने बच्चों के बारे में पूछती रहीं। परिवार के लोग उनकी हालत को देखते हुए सच्चाई छिपाते रहे। उन्होंने बताया कि बच्चों का इलाज चल रहा है। गुरुवार सुबह बिनाता को एक अखबार पढ़कर पता चला कि उनके दोनों बच्चे अब नहीं रहे। खबर पढ़ते ही बिनाता ओइनाम को गहरा सदमा लगा। वह रोने लगीं और बार-बार बेहोश होने लगीं। डॉक्टरों ने दवाएं देकर उन्हें शांत किया। उनकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। वहीं, परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है। 6 अप्रैल की आधी रात बम हमले में दोनों बच्चों की मौत हुई थी। दादी बोलीं- हमें पैसे नहीं, न्याय चाहिए मृत बच्चों की दादी ओइनाम लोइदम ने कहा- मेरे दोनों पोतों की क्या गलती थी? इन बच्चों को क्यों सजा मिली? हमें पैसे नहीं, न्याय चाहिए। हमे पांच दिन के भीतर न्याय दिया जाए। उन्होंने कहा कि मैं अपनी बहू का चेहरा भी नहीं देख पा रही हूं। जब भी बच्चों के बारे में सोचती हूं, तो लगता है जैसे यह सब कोई सपना है। उसे आज सुबह ही इस घटना के बारे में पता चला, जब उसके हाथ अस्पताल में एक अखबार लग गया। मुझे लगता है कि सच छिपाने के लिए वह मुझसे नाराज होगी। मेरे दुख को कोई क्यों नहीं देखता? मैं सबसे बदकिस्मत इंसान हूं। इसी कमरे में बिनाता अपने दोनों बच्चों के साथ सो रही थी। पांच से दस दिन में सच्चाई सामने लाने की मांग अस्पताल में मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता सुजाता देवी ने कहा कि परिवार के लोग खुद इस सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं। हम सरकार की प्रतिक्रिया से संतुष्ट नहीं हैं। पिछले कुछ दिनों में जो कहा गया है, वह हमारे लिए स्वीकार्य नहीं है। जांच की एक तय प्रक्रिया होनी चाहिए। अगर किसी को पकड़ा जाता है, तो उसे पहले राज्य पुलिस को सौंपा जाना चाहिए। सीधे NIA को सौंपना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि हम बार-बार यह सुनकर थक चुके हैं कि कार्रवाई होगी। पांच से दस दिन के भीतर सच्चाई सामने आनी चाहिए। जिम्मेदार अधिकारी को सस्पेंड किया जाना चाहिए। प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। केंद्रीय बलों को हटाया जाए और राज्य पुलिस को स्थिति संभालनी चाहिए। अब समझें 6-7 अप्रैल को क्या हुआ… प्रदर्शनकारियों का CRPF कैंप पर हमला, जवाबी फायरिंग में 2 की जान गई यह विजुअल मोइरांग इलाके के हैं। प्रदर्शनकारियों ने सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों में आग लगा दी। बिष्णुपुर जिले में मोइरांग ट्रोंगलाओबी इलाके में सोमवार देर रात उग्रवादियों ने एक घर में बम फेंक दिया। जिसमें दो बच्चों की मौत हो गई। पुलिस ऑफिसर ने बताया कि जब घर में बम फटा, तब बच्चे अपनी मां के साथ बेडरूम में सो रहे थे। स्थानीय लोगों ने घटना के विरोध में मंगलवार सुबह प्रोटेस्ट किया। इलाके में एक पेट्रोल पंप के पास दो ऑयल टैंकर और एक ट्रक में आग लगा दी। उन्होंने मोइरांग पुलिस स्टेशन के सामने टायर जलाए और एक पुलिस चौकी को तोड़ दिया। इसके बाद भीड़ ने घटनास्थल से 100 मीटर दूर CRPF कैंप पर भी हमला कर दिया। जवाबी फायरिंग में 2 की मौत हो गई, पांच घायल हो गए। चुराचांदपुर के पहाड़ी इलाकों के पास बसा है मोइरांग इलाका मणिपुर का मोइरांग ट्रोंगलाओबी इलाका चुराचांदपुर के पहाड़ी इलाकों के पास है। 2023 और 2024 में मैतेई और कुकी-जो ग्रुप्स के बीच जातीय संघर्ष के दौरान यहां लगातार गोलीबारी हुई थी। एक और सीनियर अधिकारी ने बताया कि मंगलवार को ट्रोंगलाओबी के पास के इलाके से एक एक्सप्लोसिव डिवाइस भी बरामद किया गया। स्थानीय NPP विधायक शांति सिंह ने भी हमले की निंदा की। उन्होंने कहा, यह घिनौना काम आतंकवाद से कम नहीं है। ऐसे अमानवीय कामों की हमारे समाज में कोई जगह नहीं है और इसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए। ———– ये खबर भी पढ़े मणिपुर- 3 साल पहले गैंगरेप की शिकार युवती की मौत: सदमे में थी; 2023 हिंसा में किडनैपिंग, फिर दरिंदगी मणिपुर में 3 मई 2023 में जातीय हिंसा शुरू होने के तुरंत बाद गैंगरेप का शिकार हुई 20 साल की युवती की मौत हो गई है। गैंगरेप के समय वह सिर्फ 18 साल की थी। NDTV के अनुसार, महिला लगभग तीन साल पहले किडनैपिंग और गैंगरेप के सदमे से अब तक उबर नहीं पाई थी। गंभीर चोटों के कारण पीड़ित को सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
5 साल के बच्चे का वजन सिर्फ 5.5 किलो:SAM रोग से जूझ रहा था; भोपाल एम्स में लाइफ-सेविंग ट्रीटमेंट से मिली नई जिंदगी

भोपाल में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने कुपोषण की गंभीरता को फिर उजागर कर दिया। 5 साल का बच्चा, जिसका वजन महज 5.5 किलो था, गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) से जूझ रहा था। हालत इतनी खराब थी कि बच्चा खाना तक नहीं खा पा रहा था और शरीर में पानी की भी कमी हो गई थी। उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कर 10 दिन तक लाइफ सेविंग ट्रीटमेंट दिया गया। डॉक्टरों की टीम की निगरानी और विशेष पोषण आहार की मदद से बच्चे की हालत में सुधार हुआ और उसे नई जिंदगी मिल सकी। भोपाल एम्स में 58 माह के इस बच्चे को अत्यधिक कमजोरी, उल्टी, खाना न खाने और पेशाब कम होने की शिकायत के साथ लाया गया था। जांच में सामने आया कि बच्चा गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) का शिकार है। उसका वजन केवल 5.5 किलोग्राम था, जबकि इस उम्र में सामान्य वजन करीब 18 किलोग्राम होना चाहिए। इसके साथ ही बच्चे को एनीमिया, शरीर में पानी की कमी और विटामिन D की कमी जैसी समस्याएं भी थीं। PICU में शुरू हुआ लाइफ सेविंग ट्रीटमेंट बच्चे की हालत को देखते हुए उसे तुरंत पीआईसीयू (बाल गहन चिकित्सा इकाई) में भर्ती किया गया। यहां डॉक्टरों ने लगातार निगरानी में इलाज शुरू किया। SAM प्रोटोकॉल के तहत उसे विशेष पोषण आहार F-75 और F-100 दिया गया, जिससे धीरे-धीरे उसकी स्थिति स्थिर हुई। इसके बाद ऐसा डाइट प्लान तैयार किया गया, जिसे घर पर भी जारी रखा जा सके। 10 दिन में दिखा असर, बढ़ा वजन करीब 10 दिनों के इलाज के बाद बच्चे की हालत में सुधार दिखने लगा। उसका वजन बढ़कर 6.06 किलोग्राम हो गया और वह सामान्य रूप से खाना लेने लगा। डिस्चार्ज के समय डॉक्टरों ने परिजनों को नियमित फॉलो-अप, संतुलित आहार और बच्चे की ग्रोथ पर नजर रखने की सलाह दी। एक महीने में और सुधार इलाज के एक महीने बाद जब बच्चे की दोबारा जांच की गई, तो उसका वजन बढ़कर 7.8 किलोग्राम हो गया था। डॉक्टरों के मुताबिक, यह सुधार इस बात का संकेत है कि सही समय पर इलाज और पोषण मिलने से गंभीर कुपोषण को भी नियंत्रित किया जा सकता है। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने बच्चे के माता-पिता को भी प्रशिक्षित किया। उन्हें बताया गया कि घर पर किस तरह से उच्च कैलोरी और संतुलित आहार तैयार करें और बच्चे को सही तरीके से खिलाएं। इससे बच्चे के लंबे समय तक स्वस्थ रहने की संभावना बढ़ जाती है। कुपोषण को हल्के में न लें विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बच्चे का वजन उम्र के अनुसार नहीं बढ़ रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुपोषण केवल शरीर को कमजोर नहीं करता, बल्कि मानसिक और बौद्धिक विकास पर भी असर डालता है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि अभिभावक नियमित रूप से बच्चों का वजन जांचते रहें और जरूरत पड़ने पर आंगनवाड़ी या स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
प्रभसिमरन सिंह बोले- 'इम्पैक्ट प्लेयर' नियम से युवाओं को फायदा:टीम इंडिया में एंट्री के लिए ज्यादा मेहनत करनी होगी

IPL में पंजाब किंग्स (PBKS) के ओपनिंग बैटर प्रभसिमरन सिंह ने ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नियम का समर्थन किया है। जहां कई सीनियर प्लेयर्स इस नियम को खराब बता चुके हैं, वहीं 25 साल के प्रभसिमरन इसे युवाओं के लिए एक बड़े मौके के रूप में देखते हैं। उनका मानना है कि इस नियम की वजह से अब टीमें 250 से ज्यादा का स्कोर आसानी से बना रही हैं। 4 साल बाहर बैठा, अब मौके ज्यादा प्रभसिमरन ने कहा, “एक युवा खिलाड़ी के तौर पर मैं इसे मौका मानता हूं। मुझे IPL में आए 8 साल हो गए हैं, लेकिन शुरुआती 4 साल मुझे मौके नहीं मिले। मैं बाहर बैठकर सोचता था कि टीम में कैसे जगह बनाऊं। ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ की वजह से अब मौके बढ़ गए हैं। हालांकि कुछ लोग इसे पसंद नहीं करते, क्योंकि इससे जोखिम भरा क्रिकेट बढ़ गया है, लेकिन इससे बैटिंग में गहराई आती है।” श्रेयस अय्यर को बताया ‘बेस्ट कैप्टन’ पंजाब किंग्स के कप्तान श्रेयस अय्यर की तारीफ करते हुए प्रभसिमरन ने कहा कि अय्यर ने उन्हें ‘सीनियर प्लेयर’ जैसा सम्मान दिया है। वे खिलाड़ियों को फ्रीडम देते हैं। अगर आप फ्लॉप भी हों, तो वे पास आकर तनाव दूर करते हैं। कोच और कप्तान की ओर से साफ मैसेज है कि पावरप्ले में अटैकिंग खेलना है। अब 170-180 का जमाना गया, अब नजरें 250+ स्कोर पर रहती हैं। अभिषेक शर्मा से ‘हेल्दी कॉम्पिटिशन’ टीम इंडिया में जगह बनाने को लेकर उन्होंने कहा, “कॉम्पिटशन बहुत ज्यादा है। सिर्फ अच्छा करना काफी नहीं है, आपको कुछ ‘एक्स्ट्रा’ करना होगा। मेरे पंजाब के साथी अभिषेक शर्मा भारतीय टीम में खेल रहे हैं, यह मेरे लिए मोटिवेशन है। जब भी मेरा चयन नहीं होता, मैं समझ जाता हूं कि मेरी मेहनत अभी कम है और मुझे और बेहतर करना है।” विकेटकीपर के तौर पर निभा रहे हैं लीडरशिप प्रभसिमरन ने बताया कि वे खुद को टीम के लीडरशिप ग्रुप का हिस्सा मानते हैं। उन्होंने कहा, “विकेट के पीछे से मैच का सबसे अच्छा व्यू मिलता है। जब कप्तान बाउंड्री पर होता है और शोर ज्यादा होता है, तब मैं फील्डिंग एंगल और गेंदबाजों से बातचीत की जिम्मेदारी संभालता हूं। घरेलू क्रिकेट में कप्तानी करने का अनुभव यहां काम आ रहा है।” 1 शतक लगा चुके हैं प्रभसिमरन प्रभसिमरन ने 2019 में पंजाब के लिए IPL डेब्यू किया था। 2022 तक वे 6 मैच ही खेल सके। 2023 में पूरा सीजन खेला और एक शतक लगाकर 358 रन बना दिए। अगले सीजन 334 और पिछले सीजन 549 रन बनाए। तीनों सीजन स्ट्राइक रेट 150 से ज्यादा का रहा। इस सीजन 3 मैचों में 80 रन बना चुके हैं।
तमिलनाडु चुनाव: जब 30 साल पहले इस निर्वाचन क्षेत्र में 1,033 उम्मीदवारों ने जबरन किताबी शैली में मतदान कराया था | भारत समाचार

आखरी अपडेट:09 अप्रैल, 2026, 18:29 IST अधिकारियों द्वारा उपेक्षित महसूस करते हुए, किसानों ने स्वयं चुनावी मैदान में उतरकर, अभूतपूर्व तरीके से अपना विरोध बढ़ाने का फैसला किया जटिलताओं के बावजूद, मतदान प्रतिशत मजबूत रहा, जो लोकतांत्रिक भागीदारी के प्रति मतदाताओं की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। (प्रतीकात्मक छवि) तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में सबसे असाधारण और परेशान करने वाली घटनाओं में से एक 1996 में इरोड जिले के मोदाकुरिची निर्वाचन क्षेत्र में सामने आई, जिसने न केवल पूरे भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया। उथल-पुथल के केंद्र में किसानों के बीच गहरा गुस्सा था, जिनकी लंबे समय से लंबित मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। अपर्याप्त सिंचाई सुविधाओं, खराब जल आपूर्ति और सार्थक कृषि सहायता योजनाओं की अनुपस्थिति जैसे मुद्दों ने व्यापक निराशा को बढ़ावा दिया है। अधिकारियों द्वारा उपेक्षित महसूस करते हुए, किसानों ने स्वयं चुनावी मैदान में उतरकर, अभूतपूर्व तरीके से अपना विरोध बढ़ाने का फैसला किया। इसके बाद जो हुआ वह देश के चुनावी इतिहास में किसी अन्य से अलग क्षण था। एक ही निर्वाचन क्षेत्र से आश्चर्यजनक रूप से 1,033 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा, जिनमें से अधिकांश किसान और आम नागरिक थे। चुनाव एक पारंपरिक राजनीतिक प्रतियोगिता नहीं रह गया और इसके बजाय सामूहिक असंतोष की एक शक्तिशाली अभिव्यक्ति बन गया। भागीदारी के व्यापक पैमाने ने चुनाव आयोग के लिए महत्वपूर्ण तार्किक चुनौतियाँ खड़ी कर दीं। मानक मतपत्र अपर्याप्त साबित हुए, जिससे सभी उम्मीदवारों के नाम और प्रतीकों को सूचीबद्ध करने वाली बुकलेट शैली के मतपत्रों की शुरुआत हुई। मतदान एक समय लेने वाली प्रक्रिया बन गई, क्योंकि मतदाता असामान्य रूप से लंबी सूची के माध्यम से आगे बढ़े। स्थिति ने चुनाव के पुनर्निर्धारण को भी मजबूर कर दिया, जबकि सुरक्षा व्यवस्था, मतदान केंद्र प्रबंधन और मतदान प्रक्रियाओं को बड़े पैमाने पर फिर से काम करना पड़ा। यह अभ्यास चुनाव निकाय के लिए एक प्रमुख प्रशासनिक परीक्षा के रूप में उभरा। जटिलताओं के बावजूद, मतदान प्रतिशत मजबूत रहा, जो लोकतांत्रिक भागीदारी के प्रति मतदाताओं की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अंत में, DMK उम्मीदवार सुब्बुलक्ष्मी जगदीसन विजयी हुईं और विधान सभा के लिए चुनी गईं। चुनाव के बाद स्थायी परिवर्तन आये। गैर-गंभीर प्रतियोगियों को हतोत्साहित करने और इस तरह के भारी मतदान की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए उम्मीदवारों के लिए सुरक्षा जमा राशि बढ़ाने जैसे उपाय पेश किए गए थे। दशकों बाद, मोदाकुरिची चुनाव को इस बात का एक ज्वलंत उदाहरण के रूप में उद्धृत किया जाता है कि कैसे सामूहिक सार्वजनिक कार्रवाई राजनीतिक प्रक्रिया को बाधित और नया आकार दे सकती है। जगह : तमिलनाडु, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 09 अप्रैल, 2026, 18:29 IST न्यूज़ इंडिया तमिलनाडु चुनाव: जब 30 साल पहले इस निर्वाचन क्षेत्र में 1,033 उम्मीदवारों ने जबरन किताबी शैली में मतदान कराया था अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)मोदाकुरिची चुनाव 1996(टी)तमिलनाडु राजनीतिक इतिहास(टी)उम्मीदवारों की रिकॉर्ड संख्या(टी)किसानों का विरोध भारत(टी)इरोड जिला निर्वाचन क्षेत्र(टी)भारतीय चुनाव रसद(टी)डीएमके सुब्बुलक्ष्मी जगदीसन(टी)सुरक्षा जमा उम्मीदवार
प्रोटीन के लिए अंडे पर निर्भर हैं? ये 5 वेज फूड्स उससे कई कदम आगे हैं, जानकर रह जाएंगे हैरान

5 High Protein Vegetarian Foods: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग फिट रहना चाहते हैं, लेकिन सवाल वही रहता है प्रोटीन कहां से लें? आमतौर पर अंडा इस चर्चा का सबसे आसान जवाब माना जाता है. सुबह का नाश्ता हो या जिम के बाद की डाइट, अंडे को ही सबसे भरोसेमंद विकल्प समझा जाता है. लेकिन क्या सच में प्रोटीन की दुनिया यहीं खत्म हो जाती है? खासकर उन लोगों के लिए जो अंडा नहीं खाते या शाकाहारी हैं, यह सवाल और भी अहम हो जाता है. दिलचस्प बात यह है कि हमारे किचन में ही कई ऐसे फूड मौजूद हैं जो अंडे से ज्यादा प्रोटीन देते हैं. और ये सिर्फ पोषण ही नहीं, स्वाद और सेहत दोनों में आगे हैं. अंडे से ज्यादा प्रोटीन वाले फूड्स की सच्चाईअंडा लगभग 6 से 7 ग्राम प्रोटीन देता है, जो एक संतुलित मात्रा है. लेकिन अगर आप थोड़ी गहराई से देखें, तो कई वेज फूड्स इससे कहीं ज्यादा प्रोटीन देते हैं. किनोआ: छोटा दाना, बड़ा कमालकिनोआ को यूं ही सुपरफूड नहीं कहा जाता. 100 ग्राम किनोआ में करीब 14 ग्राम प्रोटीन होता है. यानी लगभग दोगुना. इसमें सभी जरूरी अमीनो एसिड्स पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए बेहद जरूरी होते हैं. जो लोग ग्लूटेन से परेशान रहते हैं, उनके लिए यह बढ़िया विकल्प है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. चना: सस्ता और असरदारअगर आप रोजमर्रा की जिंदगी में कोई आसान और सस्ता प्रोटीन सोर्स ढूंढ रहे हैं, तो चना सबसे आगे है. 100 ग्राम चने में 15 से 19 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है. कई लोग सुबह भीगे हुए चने खाते हैं, जो लंबे समय तक पेट भरा रखते हैं और एनर्जी बनाए रखते हैं. पनीर: स्वाद और सेहत का संतुलनजिम जाने वाले लोगों की डाइट में पनीर अक्सर शामिल होता है. वजह साफ है 100 ग्राम पनीर में 18 से 20 ग्राम प्रोटीन मिलता है. साथ ही इसमें कैल्शियम भी भरपूर होता है. हालांकि, जिन लोगों को कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, उन्हें इसकी मात्रा सीमित रखनी चाहिए. दाल: हर घर का हेल्दी हिस्साभारतीय खाने में दाल सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि पोषण का आधार है. 100 ग्राम दाल में 9 से 12 ग्राम प्रोटीन होता है. यह पाचन को बेहतर बनाती है और शरीर को लगातार ऊर्जा देती है. सोया चंक्स: प्रोटीन का पावरहाउसअगर बात सबसे ज्यादा प्रोटीन की करें, तो सोया चंक्स बाजी मार लेते हैं. 100 ग्राम में 50 से 52 ग्राम प्रोटीन यह आंकड़ा किसी भी नॉन-वेज विकल्प को टक्कर देता है. यही कारण है कि वेजिटेरियन लोग इसे अपनी डाइट में तेजी से शामिल कर रहे हैं. बदलती डाइट, बदलती सोचआजकल लोग सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि सही पोषण के लिए खा रहे हैं. सोशल मीडिया और फिटनेस ट्रेंड्स ने लोगों को जागरूक किया है. अब लोग समझ रहे हैं कि सिर्फ अंडा ही नहीं, बल्कि कई शाकाहारी विकल्प भी शरीर को उतनी ही मजबूती दे सकते हैं. कई परिवारों में अब नाश्ते में अंकुरित चना, लंच में दाल और डिनर में पनीर जैसे विकल्प शामिल हो रहे हैं. यह बदलाव धीरे-धीरे ही सही, लेकिन सेहत के लिए बड़ा कदम है. प्रोटीन के लिए अंडे पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है. चना, पनीर, किनोआ, दाल और सोया जैसे फूड्स न सिर्फ सुलभ हैं, बल्कि ज्यादा असरदार भी साबित हो सकते हैं. जरूरत है तो बस सही जानकारी और संतुलित डाइट अपनाने की. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
क्या है औषधीय गुणों वाला ‘वासा’ का पौधा? गले से लेकर सांस जैसी समस्या से दिलाता निजात, जानिए आयुर्वेदिक फायदे

Last Updated:April 09, 2026, 18:06 IST Health News: अक्सर लोग सिरदर्द, आंखों की समस्या से परेशान रहते हैं. इसके लिए आयुर्वेद में कई इलाज बताए गए हैं. आज आपको ऐसे ही एक पौधे के बारे में बताने वाले हैं, जिसे सेहत का खजाना माना जाता है. आइए इसके आयुर्वेदिक फायदे आपको बताते हैं. लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में कई ऐसे पौधे पाए जाते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं. लेकिन कई बार लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती है. जानकारी के अभाव के कारण पौधों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन प्राकृतिक जड़ी-बूटियां में हर मर्ज की दवा छिपी होती है. ऐसा ही एक औषधि पौधा है वासा, जिसे कुछ लोग अडूसा के नाम से भी जानते हैं. वासा कई बीमारियों के लिए रामबाण होता है. हम बात कर रहे हैं वासा पौधे की, जिसे वैज्ञानिक नाम जस्टिसिया अधाटोडा है. इंग्लिश में इसे मालाबार नट के नाम से जाना जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में इस पौधे को लोग रूस भी कहते हैं. इसकी पत्तियां जड़, फूल और फल कई बीमारियों के लिए रामबाण होते हैं. वासा में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. इन समस्याओं से मिलता निजातलोकल 18 से बातचीत करते हुए राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की डॉक्टर ऋचा श्रीवास्तव ने बताया कि वासा का इस्तेमाल खांसी-जुकाम के इलाज के लिए किया जाता है. कई बार गले में खराश के कारण गले में दर्द होने लगता है, जिसके साथ-साथ सिर दर्द, आंखों की बीमारियों, पाइल्स और कई बीमारियों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी वासा का प्रयोग करते हैं. दांतों के दर्द की समस्या से भी छुटकारा मिल सकता है. अगर आपके दांतों में दर्द होता है, तो वासा की लकड़ी का दातुन करने के साथ ही पत्तों का काढ़े से कुल्ला करने से दांतों के दर्द से राहत मिल सकती है. सूजन जैसी समस्या से छुटकाराश्वास संबंधी बीमारियों में भी वासा बहुत उपयोगी है. इसके पत्तों का रस शहद के साथ लेने से सूखी खांसी और सांस फूलने की समस्या दूर होती है. वासा के सूखे फूलों का चूर्ण गुड़ के साथ खाने से सिर दर्द गायब हो जाता है. इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण जोड़ों के दर्द को कम करने में सहायक हैं. अगर आपके शरीर में सूजन की समस्या आ गई है और सूजन की समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो वासा की पत्तियों का सुबह खाली पेट काढ़ा बनाकर पीने से धीरे-धीरे सूजन जैसी समस्या से भी आपको छुटकारा मिल जाएगा. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Lakhimpur,Kheri,Uttar Pradesh First Published : April 09, 2026, 18:06 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
शिवपुरी में किसानों के मुद्दों पर कांग्रेस का धरना प्रदर्शन:गेहूं खरीदी में देरी पर एसडीएम को ज्ञापा, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदेशव्यापी किसान आंदोलन के तहत गुरुवार को जिला मुख्यालय शिवपुरी में कांग्रेस ने जोरदार धरना प्रदर्शन किया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष मोहित अग्रवाल के नेतृत्व में दोपहर 1 बजे माधव चौक चौराहे पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी एकत्रित हुए। उन्होंने किसानों की समस्याओं को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ विरोध जताया। प्रदर्शन में जिले भर से कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता, किसान कांग्रेस, युवक कांग्रेस, महिला कांग्रेस और एनएसयूआई सहित विभिन्न प्रकोष्ठों के सदस्य शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश सरकार की नीतियों को किसान विरोधी बताते हुए उन पर तीखा हमला किया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि गेहूं उपार्जन की तिथियों को बार-बार आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे किसानों को भारी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी नीतियों के कारण किसान अपनी उपज 2000 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल के कम दाम पर बेचने को मजबूर हैं, जबकि अन्य राज्यों में खरीदी समय पर शुरू हो चुकी है। प्रदर्शन के बाद कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर के नाम एसडीएम आनंद राजावत को ज्ञापन सौंपा। प्रमुख मांगें, जिसके लिए ज्ञापन दिया दोपहर लगभग 3 बजे एसडीएम आनंद राजावत धरना स्थल पर पहुंचे। कांग्रेस नेताओं ने उन्हें ज्ञापन सौंपा, जिसके बाद धरना प्रदर्शन शांतिपूर्वक समाप्त हो गया। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भारतीय महिला टीम टॉप पर:4 गोल्ड, 2 सिल्वर समेत 10 मेडल जीते; जरीन-लवलीना के नाम ब्रॉन्ज

मंगोलिया में हुए एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026 में भारतीय महिला टीम ने टॉप किया। टीम ने 4 गोल्ड, 2 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज समेत कुल 10 मेडल जीते। टीम की हर खिलाड़ी मेडल जीतकर लौटी। कोच सैंटियागो निवा की अगुआई में मीनाक्षी (48kg), प्रीति (54kg), प्रिया (60kg) और अरुंधति (70kg) ने गोल्ड जीते। मीनाक्षी ने पहले गोल्ड दिलाया मीनाक्षी ने मंगोलिया की नोमुंदारी एन्ख-अमगालन को 5-0 से हराकर पहला गोल्ड दिलाया। इसके बाद प्रीति ने चीनी ताइपे की तीन बार की वर्ल्ड चैंपियन हुआंग शियाओ-वेन को 5-0 से हराया। प्रीति ने टोक्यो ओलिंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट हुआंग के खिलाफ दबदबा बनाए रखा। वहीं, प्रिया घनघास ने नॉर्थ कोरिया की वोन उन-ग्योंग को 3-0 से हराकर गोल्ड जीता। अरुंधति चौधरी ने कजाकिस्तान की बाकित सेइदीश को 4-1 से हराकर भारत के लिए चौथा गोल्ड जीता। चारों भारतीय खिलाड़ियों ने फाइनल जीतकर टॉप पोडियम हासिल किया। 57 KG के फाइनल में जैसमीन 57kg फाइनल में भारत को झटका लगा। जैसमीन लांबोरिया को थाईलैंड की पुनरावी रूएनरोस ने 5-0 से हराया। अल्फिया पठान (80+kg) ने सिल्वर मेडल जीता, लेकिन फाइनल में कजाकिस्तान की दीना इस्लामबेकोवा से 0-5 से हार गईं। वह जैसमीन के साथ दूसरी भारतीय रहीं जिन्हें सिल्वर मिला। जरीन-लवलीना के नाम ब्रॉन्ज इससे पहले हफ्ते में निकहत जरीन (54kg), अंकुशिता बोरों (65kg), लवलीना बोरगोहेन (75kg) और पूजा रानी (80kg) ने सेमीफाइनल में हार के बाद ब्रॉन्ज मेडल जीते थे। कुछ वेट कैटेगरी में कम खिलाड़ियों की वजह से लवलीना, पूजा और अल्फिया को केवल भाग लेने पर ही मेडल मिल गया। पुरुष वर्ग में विश्वनाथ सुरेश (48kg) और सचिन सिवाच (60kg) शुक्रवार को अपने-अपने फाइनल मुकाबले खेलेंगे। ———————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… कुलदीप आखिरी बॉल पर रनआउट:गुजरात की IPL में सबसे छोटी जीत गुजरात टाइटंस ने बुधवार को IPL 2026 में दिल्ली कैपिटल्स को रोमांचक मुकाबले में 1 रन से हरा दिया। अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए मैच में आखिरी गेंद पर कुलदीप यादव रनआउट हो गए। डेविड मिलर ने 106 मीटर लंबा सिक्स लगाया। पूरी खबर…








