राजस्थानी केरी अचार रेसिपी: घर पर बनाएं राजस्थान की खास केरी अचार, 1 साल से भी ज्यादा कीमत; नोट करें रेसिपी

राजस्थानी केरी अचार रेसिपी: राजस्थान में लोग अक्सर चटपटा और तीखा खाना पसंद करते हैं। इतना ही नहीं, राजस्थानी थाली का स्वाद तब तक अधूरा है, जब तक केरी का अचार न हो। राजस्थान में इस अचार को बनाने का तरीका थोड़ा सा अलग और खट्टा है। खास बात यह है कि आप इस आचार्य को पिछले साल तक बता सकते हैं। यह बुरा नहीं है. आइये आपको राजस्थान की केरी अचार बनाने के तरीके के बारे में बताते हैं। राजस्थानी केरी अचार बनाने की सामग्री के लिए कच्ची आम केरीहल्दी का तेलसौंफमेथी दानाकलौंजीहल्दी पाउडरलाल मिर्च पाउडरहींगनमक सबसे पहले केरी को अच्छी तरह धोकर सुखा लें। अब ऐसे ही छोटे नमूने में कट लें। एक बड़ी पोथी में कटी हुई केरी, हल्की हल्दी और नमक लगभग 5-6 घंटे के लिए छोड़ दें। इससे केरी अपना पानी छोड़ो देवी। इसके बाद पानी अच्छा लें और केरी के मिश्रण को पंजाब के नीचे या हल्की धूप में 2-3 घंटे के लिए सुखाएं। ध्यान रहे, बिल्कुल नहीं रहना चाहिए।एक मिठाई में मेथी दाना और सौंफ को पेंटिंग सा भून लें। अब एक बड़े पोयस्टोर में दरदरी सौंफ, मेथी, कलौंजी, हल्दी, लाल मिर्च, हींग और नमक को एक साथ मिला लें।सरसों के तेल को एक कड़ाही में तब तक गर्म करें जब तक इसमें से धुआं ना निकले। इसके बाद गैस बंद हो गई और तेल में खराबी आ गई। बिल्कुल गर्म तेल में मोनोजल हो सकता है।जब तेल गुनगुना हो जाए, तो इसमें तैयार किए गए मूल उत्पाद शामिल हैं। अब इस मिश्रण में सुखी हुई केरी के टुकड़े शामिल हैं और अच्छी तरह से बनाए गए हैं ताकि हर टुकड़े पर ठोस की कोटिंग हो जाए। 1 साल से ज्यादा की कीमत ‘सीक्रेट टिप्स’ अचार को कांच या चीनी मिट्टी के जार में भरें। जार में अचार को दबा-दबा कर भरा और ऊपर से इतना उपयोग तेल डाला कि अचार पूरी तरह डूब जाए। तेल आचार्य के लिए ‘सुरक्षा कवच’ का काम करता है।आचार रखने के लिए प्लास्टिक का उपयोग न करें। जार को गर्म पानी से धोकर धूप में सुखाना चाहिए ताकि कोई खरीदारी न हो।आचार विचार समय हमेशा आकर्षक का उपयोग करें। सिद्धांत ही है आचार्य के सबसे बड़े दुश्मन।अचार के विज्ञापन के बाद जार के मुंह पर सूती फैब्रिक के टुकड़े उसे 4-5 दिन से लेकर रोज 2-3 घंटे की धूप तक सुनाते हैं। इसी प्रकार अच्छे प्रकार के पाक मिलते हैं।
2026 की दुनियाभर की टॉप-10 फिल्मों में शामिल हुई धुरंधर-2:क्रिस हेम्सवर्थ और जेंडया की फिल्मों को पीछे छोड़ा, ₹1656 करोड़ हुआ वर्ल्डवाइड कलेक्शन

आदित्य धर की स्पाई ड्रामा फिल्म धुरंधर: द रिवेंज इस साल दुनिया की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली टॉप 10 फिल्मों की लिस्ट में शामिल हो गई है। बॉक्स ऑफिस मोजो की लिस्ट के अनुसार रणवीर सिंह स्टारर इस फिल्म ने क्रिस हेम्सवर्थ और जेंडया जैसे हॉलीवुड के कई बड़े सेलेब्स की फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है। इस लिस्ट में ‘प्रोजेक्ट हेल मैरी’, ‘द सुपर मारियो गैलेक्सी मूवी’ और ‘वुदरिंग हाइट्स’ जैसी बड़ी फिल्में शामिल हैं। फिल्म ने चीनी एनिमेटेड मूवी ‘बूनी बीयर्स: द हिडन प्रोटेक्टर’ (139 मिलियन डॉलर) को पीछे छोड़कर इस एलीट लिस्ट में अपनी जगह बनाई है। सिनेमाघरों में अपने तीसरे हफ्ते के अंत तक ‘धुरंधर 2’ ने भारत में 1000 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन (1246 करोड़ ग्रॉस) कर लिया है। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन करीब 1656 करोड़ रुपए हो गया है। भारत में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म धुरंधर 2 भारत में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म है। इसके अलावा गल्फ देशों में रिलीज न होने के बावजूद, फिल्म ने नॉर्थ अमेरिका में 26 मिलियन डॉलर और अन्य क्षेत्रों में 15 मिलियन डॉलर से अधिक की कमाई की है। हॉलीवुड की बड़ी फिल्मों को दी मात रणवीर सिंह की इस फिल्म ने कमाई के मामले में कई हॉलीवुड एक्टर्स की फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है। क्रिस हेम्सवर्थ की फिल्म ‘क्राइम 101’ ने फरवरी में रिलीज होने के बाद 72 मिलियन डॉलर कमाए थे, जो ‘धुरंधर 2’ के मुकाबले काफी कम है। इसी तरह फिल्म ने राचेल मैकएडम्स की ‘सेंड हेल्प’ (94 मिलियन डॉलर) और रिज अहमद की ‘हैमलेट’ (78 मिलियन डॉलर) को भी मात दी है। जेंडया और रॉबर्ट पैटिनसन की फिल्म ‘द ड्रामा’ ने अब तक सिर्फ 26 मिलियन डॉलर कमाए हैं, जबकि ‘धुरंधर 2’ ने अपने ओपनिंग वीकेंड में ही 80 मिलियन डॉलर बटोर लिए थे। पार्ट 1 के लाइफटाइम रिकॉर्ड को 10 दिन में तोड़ा इस फिल्म की कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसने ‘धुरंधर’ के पहले पार्ट के ओवरसीज लाइफटाइम कलेक्शन को महज 10 दिनों में ही पीछे छोड़ दिया था। यह सबसे तेजी से 1000 करोड़ रुपए (वर्ल्डवाइड) कमाने वाली फिल्म बन गई है। फिल्म ने भारत में 100 करोड़ से लेकर 1000 करोड़ तक के सभी माइलस्टोन सबसे कम समय में हासिल किए हैं। साथ ही, यह अब तक की सबसे बड़ी हिंदी ओपनर और सबसे बड़ा ओपनिंग वीकेंड देने वाली फिल्म भी बन चुकी है।
Three Language Rule Implemented This Session

26 मिनट पहले कॉपी लिंक CBSE ने क्लास 6 में तीसरी भाषा लागू करने को लेकर बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड ने 9 अप्रैल को जारी सर्कुलर में सभी स्कूलों को 7 दिन के अंदर इसे लागू करने का निर्देश दिया है। बोर्ड ने इसे urgent & mandatory बताते हुए तुरंत पढ़ाई शुरू करने को कहा है। नोटिस के अनुसार, यह नियम 2026-27 सेशन यानी इसी साल से लागू होगा, लेकिन स्कूलों को अभी से तैयारी और पढ़ाई शुरू करनी होगी। खास बात ये है कि थर्ड लैंग्वेज को बतौर सब्जेक्ट पढ़ाने के लिए अभी किताबें उपलब्ध नहीं हैं। बोर्ड ने कहा- किताबें जल्द जारी होंगी CBSE ने नोटिस में कहा कि स्कूल तीसरी भाषा की पढ़ाई के लिए फिलहाल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध किताबों और सामग्री का इस्तेमाल करें। बोर्ड ने यह भी बताया कि आधिकारिक टेक्स्ट बुक्स जल्द उपलब्ध कराई जाएंगी। लेकिन तब तक स्कूलों को इंतजार नहीं करना है और तुरंत क्लास में पढ़ाई शुरू करनी होगी। स्कूलों को देनी होगी जानकारी स्कूल अपनी चुनी गई तीसरी भाषा की जानकारी CBSE को देंगे। इसके साथ ही इसे OASIS पोर्टल पर अपडेट करना भी जरूरी होगा। बोर्ड ने कहा है कि इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी उसके रीजनल ऑफिस करेंगे, ताकि सभी स्कूल समय पर नियम लागू करें। CBSE का ऑफिशियल नोटिस यहां देख सकते हैं महाराष्ट्र थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने वाला पहला राज्य पिछले साल महाराष्ट्र थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना था। राज्य में 1 से 5वीं क्लास तक के बच्चों के लिए हिंदी पढ़ना जरूरी कर दिया गया है। राज्य के सभी मराठी और अंग्रेजी मीडियम स्कूलों में नियम लागू है। NEP 2020 के तहत थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 की सिफारिश के मुताबिक सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने 2 अप्रैल को अपना नया करिकुलम फ्रेमवर्क रिलीज किया। इसके तहत स्कूल्स में थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला लागू किया जाएगा। हर स्टूडेंट को दसवीं क्लास तक तीन भाषाएं सीखनी होगी। 34 साल बाद नई शिक्षा नीति 2020 को लाया गया नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) को भारत सरकार ने 29 जुलाई, 2020 को मंजूरी दी थी। यह 34 साल बाद भारत की शिक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव है। इससे पिछली नीति 1986 में बनाई गई थी (जिसे 1992 में अपडेट किया गया था)। इसका उद्देश्य भारत की शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुसार ढालना है, ताकि छात्र न केवल परीक्षा पास करें, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान और कौशल से लैस हों। इस बार नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए केन्द्र ने साल 2030 तक का लक्ष्य रखा गया है। चूंकि शिक्षा संविधान में समवर्ती सूची का विषय है, जिसमें राज्य और केंद्र सरकार दोनों का अधिकार होता है। इसलिए राज्य सरकारें इसे पूरी तरह अप्लाई करें, यह जरूरी नहीं है। जब कहीं टकराव वाली स्थिति होती है, दोनों पक्षों को आम सहमति से इसे सुलझाने का सुझाव दिया गया है। ————————- ये खबरें भी पढ़ें… केंद्र सरकार ने NCERT को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया: खुद एंट्रेस लेने, कोर्स और सिलेबस डिजाइन करने, डिग्री देने की छूट मिली केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने नेशनल काउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) को ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा दिया। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) की सलाह पर शिक्षा मंत्रालय ने 30 जनवरी को नोटिफिकेशन जारी कर इसकी घोषणा की। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Punjab Chandigarh big news Update; Kotkapura Violence case | heritage street project cancel

. पंजाब की आज की सबसे बड़ी खबर कोटकपूरा गोलीकांड से जुड़ी रही। हाईकोर्ट ने केस अब चंडीगढ़ ट्रांसफर कर दिया है। इस केस में पूर्व CM समेत कई पुलिस अफसर आरोपी हैं। दिनभर की 10 चुनिंदा बड़ी खबरों को VIDEO में देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन 10 बड़ी खबरों को विस्तार से यहां पढ़ भी सकते हैं। तो आइए जानते हैं, पंजाब-चंडीगढ़ में दिनभर में क्या कुछ खास रहा… 1. कोटकपूरा गोलीकांड की सुनवाई अब चंडीगढ़ कोर्ट में होगी कोटकपूरा गोलीकांड केस की सुनवाई अब चंडीगढ़ कोर्ट में होगी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर यह मामला फरीदकोट कोर्ट से चंडीगढ़ ट्रांसफर किया है। आरोपी चरणजीत सिंह की याचिका पर यह फैसला लिया गया। इससे पहले बहबल कलां गोलीकांड का मामला भी चंडीगढ़ ट्रांसफर किया जा चुका है। चरणजीत शर्मा के वकील तनहीर सिंह ने बताया कि उन्होंने सुरक्षा का मुद्दा उठाया। जब भी उनके क्लाइंट पेशी पर जाते हैं, तो वे खुद को असहज महसूस करते हैं। 12 अक्टूबर 2015 को बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटना हुई। जिसके बाद प्रदर्शन के दौरान 14 अक्टूबर को पुलिस फायरिंग में 2 सिख युवकों की मौत हो गई थी। इस मामले में SIT ने पूर्व CM प्रकाश सिंह बादल, अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल, तत्कालीन DGP सुमेध सिंह सैनी, तत्कालीन IG परमराज उमरानंगल, SSP मोगा चरणजीत शर्मा, SSP फरीदकोट सुखमंदर मान, DIG फिरोजपुर अमरसिंह चाहल और तत्कालीन SHO सिटी कोटकपूरा गुरदीप सिंह को आरोपी बनाया था। (पढ़ें पूरी खबर) 2. स्कूलों में बच्चों की गैरहाजिरी पर पेरेंट्स को आएगा मैसेज पंजाब सरकार की तरफ से आज से राज्य के 18 हजार सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन अटेंडेंस ट्रैकर सिस्टम लागू किया गया है। जिससे अब बच्चों के स्कूल से गैरहाजिर रहने पर उनके पेरेंट्स के पास मैसेज जाएगा। अगर बच्चा तीन दिन से ज्यादा गैरहाजिर रहता है, तो स्कूल की तरफ से पेरेंट्स को कॉल की जाएगी। यदि यह सिलसिला बढ़ता है तो 15 दिन के बाद जिला व फिर मुख्यालय के अधिकारी बात करेंगे। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि आज यह सिस्टम लॉन्च कर दिया गया है। इससे बच्चों की सिक्योरिटी भी मजबूत होगी। इसमें सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले सारे स्टूडेंट्स कवर होंगे। सरकारी स्कूलों में 30 लाख स्टूडेंट्स पढ़ते हैं। शिक्षा मंत्री ने बताया कि 2022 में जब वह मंत्री बने थे, तो उन्हें पता चला था कि सितंबर-अक्टूबर तक किताबें स्कूलों में नहीं पहुंचती थीं और फोटोस्टेट से बच्चों को पढ़ाया जाता था। लेकिन आप सरकार के आते ही सिस्टम में सुधार किया गया। इसके लिए स्ट्रेटजी बनाकर काम किया गया है। इस बार फरवरी में किताबें स्कूलों तक पहुंचाई गईं। (पढ़ें पूरी खबर) 3. तलाक लेकर नाची पत्नी, मेजर पति डिप्रेशन में उत्तर प्रदेश के मेरठ में तलाक के बाद ढोल पर नाचने वाली महिला प्रणिता शर्मा के पति गौरव अग्निहोत्री आर्मी में मेजर हैं और जालंधर में पोस्टेड है। माता-पिता ने बताया कि तलाक के बाद से बेटा गौरव डिप्रेशन में है। पिता ने कहा कि बहू अपने एडवोकेट भाइयों और जज पिता के दम पर झूठ बोल रही है। पहले भी 2019 में केस करवा चुकी है। उन्होंने कहा कि बहू प्रणिता झूठ बोल रही है। बहू हमारे बेटे से उसका बच्चा और हमसे हमारा पोता छीन लिया। रुंधे गले से मेजर के पिता ने कहा- बहू ने मुझसे दादा का अधिकार छीन लिया। बहू का जब ऑपरेशन हुआ और टांग टूटी तो सास ने मालिश कर सेवा की, जिसका यह सिला मिला। कोर्ट एग्रीमेंट तोड़कर हमें पूरे देश में बदनाम किया जा रहा है। मेजर के माता-पिता ने कहा कि बेटा आर्मी में है, जिसका एक डिसिप्लिन होता है। यहां महिला को प्रताड़ित नहीं किया जा सकता। एक मिनट में शिकायत पर फौज अपने जवान के खिलाफ कार्रवाई करती है। प्रणिता ने ससुराल पर प्रताड़ना के आरोप लगाकर तलाक मांगा और 4 अप्रैल 2026 को कोर्ट ने तलाक मंजूर कर लिया। तलाक मिलते ही प्रणिता ढोल की थाप पर नाची। इसका वीडियो भी सामने आया। (पढ़ें पूरी खबर) 4. AAP विधायक बोलीं- अधिकारी फोन नहीं उठाते, ट्रांसफर करने मंत्री को पत्र बठिंडा की विधायक बलजिंदर कौर ने जिले के मुख्य कृषि अधिकारी (CAO) हरबंस सिंह के तबादले की मांग की है। उन्होंने कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडियां को एक पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि अधिकारी न तो लोगों के काम में सहयोग करते हैं और न ही कभी फोन उठाना जरूरी समझते हैं। विधायक बलजिंदर कौर ने अपने पत्र में कहा कि हरबंस सिंह के खिलाफ कई शिकायतें मिली हैं। हरबंस सिंह का बठिंडा से तबादला किया जाए और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। उधर, मुख्य कृषि अधिकारी हरबंस सिंह ने बताया कि वे एक वीडियो कॉन्फ्रेंस (VC) में व्यस्त थे, जिस कारण फोन नहीं उठा पाए। हरबंस सिंह ने कहा कि बाद में जब उन्होंने विधायक को फोन किया, तो उनके पीए ने फोन उठाया। उन्होंने कहा कि वे आज व्यस्त हैं और बाद में संपर्क करें। बाकी सभी बातें विधायक को पता हैं। (पढ़ें पूरी खबर) 5. AAP विधायक पठानमाजरा पटियाला से बठिंडा जेल में शिफ्ट, रेप केस में आरोपी आम आदमी पार्टी के सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा को पटियाला सेंट्रल जेल से बठिंडा सेंट्रल जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। पठानमाजरा रेप केस में ज्यूडिशियल रिमांड पर पटियाला सेंट्रल जेल में थे। सुरक्षा कारणों से पठानमाजरा को बठिंडा जेल भेजा गया है। बठिंडा सेंट्रल जेल को सुरक्षित माना जाता है। वहां पर सुरक्षा के अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं। हालांकि बठिंडा जेल में कई बड़े हार्डकोर क्रिमिनल भी बंद हैं। पठानमाजरा को कोर्ट ने तीन दिन पहले ही ज्यूडिशल रिमांड पर पटियाला सेंट्रल जेल में भेजा था। हरमीत सिंह पठानमाजरा को पुलिस ने 25 मार्च तड़के ग्वालियर के शिवपुरी से गिरफ्तार किया था। इसके बाद पटियाला पुलिस उन्हें लेकर पंजाब आई। पुलिस ने पठानमाजरा को कोर्ट में पेश किया और पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया। (पढ़ें पूरी खबर) 6. अविमुक्तेश्वरानंद बोले- चड्ढा को हटाने से AAP को नुकसान, लोगों को उनसे बड़ी उम्मीदें राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के विवाद में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की भी एंट्री हो गई है। उन्होंने
आम खाने के कितनी देर बाद पिएं पानी? डॉक्टर ने बताया पाचन से जुड़ा वो सच जिसे 90% लोग नहीं जानते होंगे!

Last Updated:April 09, 2026, 17:20 IST लोगों को गर्मी का मौसम बहुत पसंद होता है और इसकी एक अच्छी वजह भी है क्योंकि यह अपने साथ आमों का स्वादिष्ट स्वाद लेकर आता है. हालांकि, आम खाने को लेकर कई तरह की मान्यताएं और धारणाएं प्रचलित हैं. बड़े-बुज़ुर्ग अक्सर आम खाने के तुरंत बाद पानी न पीने की सलाह देते हैं, और चेतावनी देते हैं कि ऐसा करने से पेट में दर्द हो सकता है. How appropriate is it to drink water immediately after eating mango in summer : गर्मी का मौसम आते ही सबसे पहले हमें आम याद आते हैं. बाजार में आम देखकर ही कई लोगों के मुंह में पानी आ जाता है. आम सिर्फ स्वादिष्ट नहीं होते, बल्कि शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल्स और फाइबर भी देते हैं. लेकिन बचपन से ही हम सुनते आए हैं कि आम खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए. ये सिर्फ एक पुरानी मान्यता नहीं है, इसके पीछे सेहत से जुड़ी वजहें भी हैं. ऋषिकेश के आयुष डॉक्टर राज कुमार के अनुसार आम शरीर में गर्मी बढ़ाने वाला फल है. आम खाने के बाद हमारी पाचन प्रणाली इसे पचाने के लिए काम करना शुरू करती है. इस समय अगर तुरंत ठंडा पानी पी लिया जाए तो पेट की गर्मी अचानक कम हो जाती है. इससे पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है. इससे आम ठीक से पच नहीं पाता और गैस, फुलावट, एसिडिटी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. कुछ लोगों को पेट भारी लगना या असहज महसूस होना भी हो सकता है. इसलिए एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि आम खाने के बाद तुरंत पानी न पीएं, कम से कम 20 से 30 मिनट का गैप रखें. Add News18 as Preferred Source on Google इस समय शरीर खाना पचाना शुरू करता है. उसके बाद पानी पीने से कोई समस्या नहीं होती. साथ ही बहुत ठंडा पानी नहीं बल्कि कमरे के तापमान वाला या गुनगुना पानी पीना अच्छा होता है. इससे पाचन आसान रहता है. एक और जरूरी बात यह है कि आम खाने से पहले थोड़ी देर पानी में भिगोना चाहिए. हमारे बड़े लोग इस तरीके को अपनाने के पीछे वजह है. आम को पानी में भिगोने से उसमें मौजूद बाहरी गर्मी कम हो जाती है. साथ ही फल में मौजूद कुछ प्राकृतिक रसायन भी कम हो जाते हैं. ये कुछ लोगों को एलर्जी या शरीर में गर्मी बढ़ने का कारण बन सकते हैं. भिगोए हुए आम खाने से वे आसानी से पच जाते हैं. आम फल सेहत के लिए बहुत अच्छे हैं. लेकिन इन्हें सही तरीके से खाना भी उतना ही जरूरी है. अगर थोड़ी सावधानी बरती जाए तो बिना किसी परेशानी के इस स्वादिष्ट फल का मजा लिया जा सकता है. First Published : April 09, 2026, 17:01 IST
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: मोदी के मास्टरस्ट्रोक से पहले पार्टी संकल्प पत्र की घोषणा, बंगाल में 6 सीटों का ऐलान

भाजपा शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के लिए संकल्प पत्र की घोषणा कर रही है। संकल्प पत्र की घोषणा सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की जनता के लिए छह महत्वपूर्ण गारंटी की घोषणा की। पिछले कई चुनावों की बात करें तो बीजेपी ने मोदी की साख पर एक बड़ा सवाल उठाया है। बीजेपी का दावा है कि मोदी की जनता पर पूरी तरह से विश्वास है और उनका फायदा चुनाव में है। मोदी ने इन गारंटियों के साथ आकांक्षा संकल्प दिया प्रधानमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी के माध्यम से राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने, प्रशासन में मजबूती लाने, महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सशक्त कार्रवाई करने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री द्वारा दी गई गारंटी में कहा गया है कि राज्य में भाजपा सरकार डर गई और सुरक्षा का माहौल खत्म हो गया और कानून के शासन में लोगों का विश्वास बहाल हो गया। साथ ही लोकतांत्रिक तंत्र को पूरी तरह से जनता के प्रति उत्तर बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि हर समर्थक, भ्रष्टाचारी के मामले, महिलाओं के खिलाफ अपराध और बलात्कार के मामलों की सामूहिकता खुलेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पीएम मोदी ने टीएमसी के शासन में शामिल किए गए को लेकर सारसाहित्य तैयार किया बैसाखी में प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को शामिल करने के लिए वह मंत्री हो या किसी अन्य को भी शामिल नहीं किया जाएगा और सभी को कानून के सिद्धांतों में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, मठ को संविधान प्रदत्त के खिलाफ सभी अधिकारों और मांगों का वादा किया गया है, जबकि अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि बीजेपी सरकार बनने के बाद पश्चिम बंगाल में 7वें वेतन आयोग को लागू किया जाएगा, जिससे राज्य के सरकारी कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा. यह गारंटी देता है कि पश्चिम बंगाल में सुशासन, सुरक्षा और विकास को लेकर भाजपा की एकजुटता को खत्म किया जाए। यह भी पढ़ें: पीएम मोदी के गढ़ में ओवैसी की एंट्री, यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी का सवाल? (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)नरेंद्र मोदी(टी)बीजेपी का घोषणापत्र शुक्रवार को जारी(टी)नरेंद्र मोदी 6 गारंटी(टी)चुनाव समाचार(टी)ताजा समाचार अपडेट(टी)समाचार हिंदी(टी)पश्चिम बंगाल में नरेंद्र मोदी का भाषण(टी)पश्चिम बंगाल मोदी का भाषण(टी)ताजा समाचार अपडेट(टी)ट्रेंडिंग समाचार(टी)अपडेट समाचार(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)नरेंद्र मोदी(टी)शुक्रवार को बीजेपी का घोषणापत्र जारी(टी)नरेंद्र मोदी की 6 गारंटी(टी)चुनाव समाचार(टी)ताजा समाचार अपडेट(टी)हिंदी समाचार
फरमान से शादी करने वाली मोना लिसा की उम्र की होगी जांच, पर कैसे होता है यह टेस्ट, विज्ञान के हिसाब से जानिए

Last Updated:April 09, 2026, 17:03 IST Mona Lisa Age Test: सोशल मीडिया सेंसेशन मोना लिसा ने जब से केरल के एक्टर फरमान से शादी की है तब से वह विवादों में है. कहा जा रहा है मोना लिसा नाबालिग है. इसलिए फरमान के साथ यह शादी अवैध है. ऐसे में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है और केरल और मध्य प्रदेश पुलिस को 7 दिनों के अंदर जांच करने के आदेश दिए हैं. इस बीच पुलिस ने मोना लिसा की उम्र का पता लगाने के लिए ऑसिफिकेशन टेस्ट करने का फैसला किया है. अब सवाल यह है कि किसी व्यक्ति की उम्र का पता कैसे लगाया जाता है. इसका वैज्ञानिक तरीका क्या है. आइए जानते हैं. mona_lisa_0007 इंस्टाग्राम पेज से ली गई मोना लिसा और फरमान खान की फोटो. कुंभ मेले से सोशल मीडिया में रातों-रात सनसनी बनीं मोना लिसा की उम्र की वैज्ञानिक जांच की जाएगी. दरअसल, उनकी उम्र को लेकर विवाद गहरा गया है. केरल के फरमान से शादी के बाद हिन्दू पक्षों ने कई जगहें शिकायतें पहुंचाई हैं. शिकायत में कहा गया है कि कुंभ के दौरान एक वीडियो में मोना लिसा ने अपनी उम्र 16 साल बताई थी. इस हिसाब से अभी उसकी उम्र 17 साल ही होगी लेकिन उम्र से संबंधित दस्तावेजों में हेरफेर कर गलत जानकारी दी गई है. ऐसे में मोना लिसा नाबालिग है और इस हिसाब से फरमान ने नाबालिग से शादी की है. इस तरह फरमान पर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाए. इसी शिकायत को संज्ञान में लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पुलिस को जांच करने का आदेश दिया है. अब सवाल है कि उम्र का पता कैसे लगाया जाता है. इसका वैज्ञानिक तरीका क्या है. क्या विज्ञान इस गुत्थी को सुलझा पाएगा कि मोना लिसा शादी के वक्त नाबालिग थी या बालिग? विज्ञान के हिसाब से उम्र का पता विज्ञान में उम्र का पता लगाने के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं. यह केवल एक सामान्य चेकअप नहीं बल्कि फॉरेंसिक विज्ञान की एक जटिल प्रक्रिया है जिसे ऑसिफिकेशन टेस्ट कहा जाता है. इसमें हड्डियों के जुड़ाव की स्थिति को देखा जाता है. इसके बाद डेंटल एजिंग टेस्ट है. इसमें दांतों और उसकी जड़ों की बनावट को आंका जाता है. वहीं उम्र का पता लगाने के लिए हार्मोनल और सेकेंडरी सेक्सुअल कैरेक्टर को भी आधार बनाया जाता है. फोरेंसिक साइंस में बोन डेंसिटी टेस्ट भी प्रमुख है. इसके बाद टेलोमीयर टेस्टिंग से भी इसका पता लगाया जाता है. ओसिफिकेशन टेस्ट या बोन डेंसिटी टेस्ट-विज्ञान में उम्र का अंदाजा लगाने के लिए बोन डेंसिटी टेस्ट प्रमुख है. कोई व्यक्ति नाबालिग है या बालिग, इसका पता लगाने के लिए इस टेस्ट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. इसमें एक्स-रे के जरिए हाथ की कलाई की हड्डियों के जुड़ाव की जांच की जाती है. उम्र बढ़ने के साथ हड्डियां आपस में जुड़ती हैं. विज्ञान के हिसाब से, जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमारे शरीर की हड्डियां आपस में जुड़ती हैं और उनके सिरे फ्यूज होने लगते हैं. एक्स-रे और डेंटल स्कैन के जरिए डॉक्टर इन्हीं हड्डियों के घनत्व और दांतों की बनावट का विश्लेषण करते हैं. इस विश्लेषण के आधार पर यह देखा जाता है कि व्यक्ति बालिग है या नाबालिग. हालांकि इसकी सटीकता 80% से 90% तक होती है. पोषण और बीमारियों के कारण इसमें 2-3 साल का अंतर आ सकता है. दांतों का विश्लेषण-जीवित व्यक्तियों और हाल के शवों की उम्र पता करने के लिए यह सबसे सटीक तरीका है. इसमें बच्चों में दांतों के निकलने के क्रम और वयस्कों में दांतों के घिसने या एस्पार्टिक एसिड रेसमीकरण की जांच की जाती है. बच्चों और किशोरों में यह 95% तक सटीक होता है लेकिन वयस्कों में इसमें 5-10 साल का अंतर आ सकता है. टेलोमेयर विश्लेषण-टेलोमेयर टेस्ट जेनेटिक टेस्ट है. यह उम्र पता करने की एक आधुनिक जेनेटिक विधि है. वास्तव में हमारे डीएनए के सिरों पर टेलोमेयर्स होते हैं. हर बार जब कोशिका विभाजित होती है, टेलोमेयर्स छोटे हो जाते हैं. इनकी लंबाई मापकर बायोलॉजिकल एज का पता लगाया जाता है. यह बायोलॉजिकल उम्र बताने में तो सटीक है लेकिन क्रोनोलॉजिकल उम्र (जन्म तिथि के हिसाब से) बताने में इसमें 5-8 साल का अंतर हो सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp,आपके सवालों का हम देंगे जवाब. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 09, 2026, 17:03 IST
डायबिटीज के मरीजों के लिए बड़ी राहत! इन दूध के सेवन से कम हो सकता है शुगर

Last Updated:April 09, 2026, 16:47 IST डायबिटीज़ के मरीज अक्सर इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि उन्हें किस तरह के दूध का इस्तेमाल करना चाहिए. अगर आप अपने ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखना चाहते हैं, तो आपको इस बात पर खास ध्यान देना चाहिए कि आप किस तरह का दूध पी रहे हैं चाहे वह डेयरी-बेस्ड हो या प्लांट-बेस्ड. डायबिटीज़ से जूझ रहे लोगों को अक्सर अपने खाने-पीने को लेकर कई सवाल होते हैं. चाय या कॉफी पीने वालों को समझ नहीं आता कि कौन सा दूध इस्तेमाल करें. अगर आप अपने खून में शुगर लेवल कंट्रोल करना चाहते हैं, तो आपको जो दूध पीते हैं उस पर ध्यान देना चाहिए. चाहे वो डेयरी दूध हो या प्लांट बेस्ड दूध, हर तरह का दूध आपके ग्लूकोज लेवल पर अलग असर डालता है. MSN वेबसाइट और एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अच्छा दूध चुनते समय तीन बातें ध्यान में रखनी चाहिए. कम कार्बोहाइड्रेट, बिना शक्कर और अच्छा प्रोटीन वाला दूध पीना चाहिए. इससे डायबिटीज़ स्पाइक कम होते हैं और एनर्जी भी बनी रहती है. दूध चुनना क्यों जरूरी है?: दूध में मौजूद कार्बोहाइड्रेट्स शरीर में शुगर में बदल जाते हैं और सीधा ब्लड ग्लूकोज लेवल पर असर डालते हैं. अगर एक साथ ज्यादा कार्बोहाइड्रेट्स ले लिए जाएं, खासकर टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज़ वालों के लिए, तो ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है. इसलिए सही दूध चुनना ही नहीं, बल्कि आप कितना पीते हैं ये भी जरूरी है. पूरे दिन कार्बोहाइड्रेट्स को बराबर मात्रा में लेना भी जरूरी है. Add News18 as Preferred Source on Google सोया दूध: सोया दूध को खून में शुगर कंट्रोल करने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. इसमें कम कार्बोहाइड्रेट और ज्यादा प्रोटीन का बैलेंस होता है. एक कप दूध में करीब 8–9 ग्राम प्रोटीन होता है, जो शुगर के अवशोषण को धीमा करता है. इससे ग्लूकोज धीरे-धीरे खून में जाता है और शुगर स्पाइक नहीं होता. इसमें फाइबर भी होता है, जो शुगर कंट्रोल करने में मदद करता है. लेकिन हमेशा बिना मीठा वाला सोया दूध ही चुनें. बकरी का दूध: बकरी के दूध में अच्छे पोषक तत्व होते हैं. इसमें मीडियम मात्रा में प्रोटीन भी है. लेकिन इसमें कार्बोहाइड्रेट और नेचुरल शुगर ज्यादा होती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है. इसलिए इसे पूरी तरह से छोड़ने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए. बादाम दूध: बादाम दूध में कार्बोहाइड्रेट कम होते हैं, बिना मीठा वर्जन में तो शक्कर भी नहीं होती. इसलिए ये ग्लूकोज लेवल पर कम असर डालता है. लेकिन इसमें प्रोटीन भी कम होता है, जिससे पेट ज्यादा देर तक भरा नहीं रहता. इसलिए ड्राई फ्रूट्स या अंडे जैसे प्रोटीन वाले खाने के साथ लेना बेहतर है. गाय का दूध: खून में शुगर कंट्रोल करने के लिए गाय का दूध आखिरी विकल्प है. एक कप में करीब 12 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है. इसमें लैक्टोज नाम की नेचुरल शुगर भी होती है. इससे ग्लूकोज लेवल जल्दी बढ़ सकता है. प्रोटीन के अलावा, ज्यादा कार्बोहाइड्रेट की वजह से ये इस्तेमाल के लिए ज्यादा सही नहीं है. कार्बोहाइड्रेट, फैट और प्रोटीन का क्या रोल है?.. दूध में सिर्फ कार्बोहाइड्रेट ही नहीं, बल्कि फैट और प्रोटीन भी शुगर पर असर डालते हैं. ज्यादा कैलोरी वाला खाना पचने में टाइम लेता है, जिससे कार्बोहाइड्रेट का असर बदल जाता है. इसलिए डॉक्टर अक्सर कोलेस्ट्रॉल या कैलोरी फ्री दूध पीने की सलाह देते हैं. इससे कैल्शियम और दूसरे पोषक तत्व भी मिलते हैं. असल खतरा तो मिलाई गई चीनी है. बिना चीनी वाले कई पैक्ड दूध, सिरप और फ्लेवर मिलते हैं. लेकिन ये आपके खून में शुगर लेवल जल्दी बढ़ा सकते हैं. इसलिए लेबल पढ़ना बहुत जरूरी है. First Published : April 09, 2026, 16:47 IST
TCS को चौथी तिमाही में ₹13,718 करोड़ का मुनाफा:सालाना आधार पर प्रॉफिट 12% बढ़ा, टोटल इनकम 9% बढ़कर ₹71,455 करोड़ पर पहुंची

देश की सबसे बड़ी आईटी (IT) कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने गुरुवार को अपने चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 12% बढ़कर 13,718 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल इसी तिमाही में यह मुनाफा 12,247 करोड़ रुपए था। रेवेन्यू में 10% की बढ़त, 70 हजार करोड़ के पार मुनाफे के साथ-साथ कंपनी के रेवेन्यू में भी बढ़त देखी गई है। इस तिमाही में कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 10% बढ़कर 70,698 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। कंपनी की इस मजबूत ग्रोथ के पीछे 12 अरब डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपए) की तीन मेगा डील्स रही। FY26 की चौथी तिमाही में TCS को ₹13,718 करोड़ का मुनाफा सालाना आधार पर तिमाही आधार पर नोट: आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। 31 रुपए प्रति शेयर लाभांश देगी TCS कंपनी ने अपने शेयरधारकों को प्रति शेयर पर 31 रुपए का लाभांश यानी डिविडेंड देने का ऐलान किया है। कंपनियां अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा शेयर होल्डर्स को भी देती हैं, इसे ही लाभांश कहा जाता है। CEO बोले- हर सेक्टर में दिखा मजबूत प्रदर्शन TCS के CEO और MD के. कृतिवासन ने नतीजों पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह लगातार तीसरी तिमाही है जब कंपनी ने ग्रोथ दर्ज की है। उन्होंने कहा कि हमारी ‘फाइव पिलर स्ट्रेटेजी’ और AI पर फोकस काम कर रहा है। राहत की बात यह है कि यह ग्रोथ किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के बड़े बाजारों और लगभग सभी इंडस्ट्रीज में देखने को मिली है। 1 साल में 20% गिरा TCS का शेयर TCS का शेयर आज यानी 9 अप्रैल को 1.20% यानी 30.80 रुपए चढ़कर 2,590 रुपए पर बंद हुआ। बीते एक महीने में कंपनी का शेयर 2.48% चढ़ा है। एक साल में करीब 20% गिरा है। कंपनी की मार्केट वैल्यू 11.71 लाख करोड़ रुपए है। 1968 में हुई थी TCS की स्थापना टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) भारत की मल्टीनेशनल इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) कंपनी है। यह टाटा ग्रुप की एक सहायक कंपनी है। TCS की स्थापना 1968 में ‘टाटा कंप्यूटर सिस्टम्स’ के रूप में हुई थी। 25 अगस्त 2004 को TCS पब्लिक लिस्टेड कंपनी बनी। 2005 में इन्फॉरमेटिक्स मार्केट में जाने वाली यह भारत की पहली कंपनी बनी। अप्रैल 2018 में 100 अरब डॉलर मार्केट कैपिटलाइजेशन वाली देश की पहली IT कंपनी बनी। यह 46 देशों में 149 लोकेशन पर काम करती है।
मंडला में सड़क के बीच से हटेगा बिजली पोल:नेहरू स्मारक-बिंझिया रोड निर्माण में लापरवाही के बाद बिजली विभाग ने की कार्रवाई

मंडला में नेहरू स्मारक से बिंझिया तिराहा तक निर्माणाधीन सड़क के बीच में खड़े बिजली के पोल शिफ्ट करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। 94 लाख रुपए की लागत वाली इस सड़क के डामरीकरण में बाधा बन रहे खंभों को हटाए बिना ही काम किए जाने पर विभाग ने संज्ञान लिया है। डामरीकरण से पहले पोल नहीं हटाया नगर की 800 मीटर लंबी इस सड़क का निर्माण बिना बिजली के पोल और पेड़ों को हटाए शुरू कर दिया गया था। सड़क के बीचों-बीच खड़े इन खंभों के कारण भविष्य में गंभीर सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई थी, जिसे देखते हुए अब पोल हटाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। स्थानीय निवासी आनंद प्रकाश तिवारी सहित अन्य नागरिकों ने पोल शिफ्टिंग कार्य शुरू होने पर संतोष व्यक्त किया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि निर्माण के दौरान की गई इस अनदेखी से आमजन की सुरक्षा खतरे में थी, जो अब पोल हटने से सुधरेगी। बिजली कंपनी ने संभाला मोर्चा लापरवाही उजागर होने के बाद बिजली विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर तकनीकी कार्य शुरू किया। हालांकि, इस संबंध में बिजली विभाग के एसई अयूब खान से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। मानकों की अनदेखी पर उठे सवाल बिना बाधाओं को हटाए सड़क निर्माण कार्य शुरू किए जाने से लोगों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। अब शेष डामरीकरण का कार्य खंभे हटने के बाद निर्धारित मानकों और सुरक्षा नियमों के अनुसार पूरा किया जाएगा।









