Thursday, 28 May 2026 | 03:36 PM

Trending :

सतना में पुस्तक-गणवेश मेला शुरू, तीन दिन चलेगा:स्टूडेंट्स को सस्ती सामग्री उपलब्ध; एचपीवी टीकाकरण वाली छात्राओं को मिल रही विशेष छूट

सतना में पुस्तक-गणवेश मेला शुरू, तीन दिन चलेगा:स्टूडेंट्स को सस्ती सामग्री उपलब्ध; एचपीवी टीकाकरण वाली छात्राओं को मिल रही विशेष छूट

शिक्षा को अधिक सुलभ और किफायती बनाने के उद्देश्य से सतना जिला प्रशासन के निर्देश पर सोमवार से जिला स्तरीय तीन दिवसीय पुस्तक एवं गणवेश मेले का शुभारंभ किया गया। यह मेला शासकीय व्यंकट क्रमांक-2 परिसर में आयोजित किया जा रहा है, जो 15 अप्रैल तक चलेगा। मेले का औपचारिक उद्घाटन सोहावल की विकासखंड शिक्षा अधिकारी आयुषी अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी मेले का आयोजन अभिभावकों और विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए किया गया है। इसका उद्देश्य उन्हें एक ही स्थान पर कॉपियां, किताबें, स्कूल यूनिफॉर्म, बैग एवं अन्य आवश्यक शिक्षण सामग्री उचित दामों पर उपलब्ध कराना है। मेले में जिले के कई प्रतिष्ठित दुकानदारों द्वारा स्टॉल लगाए गए हैं, जिससे प्रतिस्पर्धी दरों पर सामग्री उपलब्ध हो रही है। बाजार की तुलना में अधिक छूट मेले की खास बात यह है कि यहां बाजार की तुलना में अधिक छूट दी जा रही है। जहां सामान्य बाजार में किताबों पर लगभग 10 प्रतिशत तक छूट मिलती है, वहीं मेले में 15 से 20 प्रतिशत तक की छूट उपलब्ध है। इसके अलावा, कॉपियों पर भी आकर्षक डिस्काउंट दिए जा रहे हैं, जिससे अभिभावकों को काफी राहत मिल रही है। एक विशेष पहल के तहत, एचपीवी टीकाकरण कराने वाली बालिकाओं के लिए अतिरिक्त ऑफर भी रखा गया है। इस कदम से स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। मेले में बड़ी संख्या में अभिभावक और विद्यार्थी पहुंचकर खरीदारी कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने अधिक से अधिक लोगों से मेले का लाभ उठाने की अपील की है, ताकि शिक्षा संबंधी आवश्यक सामग्री किफायती दरों पर प्राप्त की जा सके।

WhatsApp Chat Reveals Plan to Burn Companies with Petrol Bombs

WhatsApp Chat Reveals Plan to Burn Companies with Petrol Bombs

गुरुग्राम15 मिनट पहले कॉपी लिंक 9 अप्रैल को कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था। तब इन्हें खदेड़ने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। गुरुग्राम में मानेसर IMT स्थित कंपनियों में 9 अप्रैल को सैलरी बढ़ाने को लेकर हुए प्रदर्शन में एक बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान पता चला है कि कंपनियों को पेट्रोल बम से जलाने की साजिश थी। बाहरी लोगों ने कर्मचारियों को तोड़फोड़ और आगजनी के लिए उकसाया था। वॉट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट भी सामने आए हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रोहतक के भरान निवासी आकाश, जींद के लखमीरवाला निवासी अजीत सिंह, उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल निवासी हरीश चंद, बिहार के मधुबनी निवासी पिंटू कुमार यादव, उत्तराखंड के उद्यम सिंह नगर निवासी राजू सिंह और उत्तर प्रदेश के बदायूं निवासी श्यामबीर के रूप में हुई है। वॉट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट… 9 अप्रैल को कर्मचारियों ने प्रदर्शन शुरू किया कुछ दिन पहले मानेसर IMT स्थित होंडा कंपनी में सैलरी बढ़ाने को लेकर स्ट्राइक हुई थी। इसके बाद 9 अप्रैल कोत्यम, मुंजाल शोवा, रिको और अन्य कंपनियों के कर्मचारियों ने भी प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। हालांकि होंडा कंपनी के समझौते के बाद काम पर लौट गए। दूसरी कंपनियों के कर्मचारी लौटने को तैयारी नहीं हुए। पुलिस के लाठीचार्ज में 20 कर्मचारी घायल कर्मचारी सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने लगे। पुलिस के समझाने के बाद भी कर्मचारी नहीं माने। इन्हें खदेड़ने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान 20 से ज्यादा कर्मचारियों को चोटें आईं। भड़के कर्मचारियों ने पुलिस की एक बाइक फूंक दी और गाड़ी पर पथराव किया। मानेसर थाने में तोड़फोड़ करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान करने पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। पुलिस के लाठीचार्ज में 20 कर्मचारी घायल हुए थे। जानिए आरोपियों के बारे में पुलिस ने क्या बताया…. कर्मचारियों को आगजनी के लिए उकसाया गुरुग्राम पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार ने बताया कि बाहरी लोगों द्वारा साजिश के तहत श्रमिकों को तोड़फोड़ व आगजनी के लिए उकसाया गया था। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी हड़ताल के दौरान कंपनियों और वाहनों में तोड़फोड़ करने, आगजनी करने, पुलिस पर पथराव करने, कंपनी कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करने जैसी वारदातों को अंजाम देने की साजिश रचने वालों में मुख्य थे। आरोपियों का किसी कंपनी से संबंध नहीं पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार छह आरोपियों में से ज्यादातर का गुरुग्राम की किसी भी कंपनी से कोई संबंध नहीं है। पुलिस सभी श्रमिकों से अपील करती है कि वे किसी बाहरी व्यक्ति (गैर-श्रमिक) के बहकावे में न आएं। यदि कोई बाहरी व्यक्ति (गैर-श्रमिक) माहौल खराब करने की कोशिश करता है या उकसाने की कोशिश करता है, तो उसकी सूचना गुरुग्राम पुलिस को अवश्य दें। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

माएं-बुआएं सही या गलत…. पीरियड्स में खट्टा खाना सच में नुकसान करता है? डॉक्टर ने बताया पूरा सच

ask search icon

Last Updated:April 13, 2026, 15:00 IST Diet During Periods: पीरियड्स हर महिला के लिए अलग-अलग अनुभव लेकर आते हैं. किसी के लिए यह केवल सामान्य थकान होती है, तो किसी के लिए पेट में असहनीय मरोड़ यानी क्रैम्प्स (Cramps), कमर दर्द और मूड स्विंग्स (Mood Swings) जैसी बड़ी परेशानी. अक्सर इन दिनों सिर्फ मीठा या जंक फूड खाने का मन करता है. अक्सर महिलाएं पूछती हैं कि पीरियड्स में क्या खाना चाहिए ताकि दर्द कम हो और शरीर में कमजोरी न आए. पीरियड्स को लेकर हमारे यहां अब भी कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं. खासकर खान-पान को लेकर अक्सर माएं-बुआएं सलाह देती हैं कि इन दिनों खट्टा या ठंडा नहीं खाना चाहिए. कई लड़कियां बिना किसी ठोस कारण को जाने अपनी पसंदीदा चीजें छोड़ देती हैं. असल में क्या पीरियड्स में खट्टा खाने से कोई नुकसान होता है या ये सिर्फ सुनी-सुनाई बातें हैं? सही जानकारी ज्यादा जरूरी है, वरना लोग बेवजह परेशान रहते हैं. आइए डॉक्टर से जानते हैं पूरी सच्चाई. लोकल18 को सर्वोदय अस्पताल फरीदाबाद की गाइनॉकॉलोजिस्ट डॉ. रैना चावला ने बताया कि पीरियड्स एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो हर महिला के जीवन का हिस्सा होती है और आमतौर पर 12 से 50 साल की उम्र तक रहती है. इसके बावजूद समाज में इसे लेकर कई गलतफहमियां फैली हुई हैं. खासकर खट्टा या ठंडा खाने से जुड़ी बातें इनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. न इससे पीरियड्स का फ्लो बदलता है और न ही दर्द पर कोई असर पड़ता है. यानी ये सिर्फ एक बाद झूठ हैं, जिन पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है. Add News18 as Preferred Source on Google डॉ. रैना बताती हैं कि पीरियड्स के दौरान सबसे जरूरी है पोषक और संतुलित आहार लेना. इस समय शरीर में खून की कमी होना आम बात है, खासकर जब ब्लीडिंग ज्यादा हो रही हो. ऐसे में आयरन और प्रोटीन से भरपूर चीजें खाना फायदेमंद होता है, जैसे पालक, मेथी, गुड़, चना, दाल, सेब और केला। ये शरीर को जरूरी ताकत देते हैं. साथ ही, पानी और जूस का भरपूर सेवन करना चाहिए, ताकि शरीर डिहाइड्रेट न हो. वह आगे बताती हैं कि इन दिनों कमजोरी और दर्द लगभग हर लड़की और महिला को होता है. दर्द कम करने में काजू, बादाम, पिस्ता जैसे ड्राई फ्रूट्स, जिनमें मैग्नीशियम होता है, मददगार हो सकते हैं. हालांकि ऐसा कोई एक फूड नहीं है, जिससे दर्द पूरी तरह खत्म हो जाए, लेकिन सही खान-पान से काफी फर्क पड़ता है. जिन महिलाओं को ज्यादा दर्द या ब्लीडिंग होती है, उन्हें अपनी डाइट पर खास ध्यान देना चाहिए. वह बताती हैं कि पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार और बाहर का खाना कम ही खाना चाहिए. इस समय घर का हल्का-फुल्का और हेल्दी भोजन सबसे बेहतर होता है. साथ ही, थोड़ा-बहुत योग या हल्की एक्सरसाइज भी फायदेमंद रहती है. शरीर थोड़ा एक्टिव रहता है तो आराम भी मिलता है. असल में पीरियड्स के दौरान खट्टा खाने से कुछ भी नुकसान नहीं होता. बस सही जानकारी रखें और अपनी डाइट व व्यवहार को संतुलित रखें, यही सबसे बेहतर है. यानी पीरियड्स में खट्टा खाया जा सकता है, इसमें कोई दिक्कत नहीं है.  First Published : April 13, 2026, 15:00 IST

दिखने में आम, असर में जबरदस्त! पहाड़ों में उगने वाला ये पौधा देता है पथरी से राहत, जानें इस्तेमाल का तरीका

ask search icon

Last Updated:April 13, 2026, 14:45 IST Pattharchatta for Kidney Stone: पहाड़ों की पथरीली जमीन पर उगने वाला पत्थरचट्टा आयुर्वेद का वह अनमोल तोहफा है, जो अपने नाम के अनुरूप ही शरीर की पथरी को काटकर बाहर निकालने की ताकत रखता है. किडनी स्टोन से लेकर पेट की गैस और यूरिन इन्फेक्शन तक, यह छोटा सा पौधा बड़े-बड़े रोगों में रामबाण की तरह काम करता है. खास बात यह है कि इसके मोटे और रसीले पत्तों का सही इस्तेमाल आपको बिना किसी महंगी दवा के स्वस्थ रख सकता है. डॉक्टर से जानिए इस पौधे के फायदे, इस्तेमाल का सही तरीका और वो सावधानियां जो आपके लिए जानना बेहद जरूरी हैं. उत्तराखंड में पाया जाने वाला पत्थरचट्टा एक औषधीय पौधा है, जिसे आयुर्वेद में बेहद खास माना गया है. पहाड़ी क्षेत्रों में यह आसानी से पाया जाता है, लोग इसे घरेलू इलाज के रूप में लंबे समय से इस्तेमाल करते आ रहे हैं. इसके मोटे और रसीले पत्तों में कई प्रकार के औषधीय गुण मौजूद होते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद करते हैं. खास बात यह है कि यह पौधा बिना ज्यादा देखभाल के भी उग जाता है. इसका नियमित और सही तरीके से उपयोग कई छोटी-बड़ी बीमारियों में राहत दिला सकता है. यही वजह है कि आज भी ग्रामीण इलाकों में लोग इसे प्राकृतिक दवा के रूप में भरोसे के साथ अपनाते हैं. डॉ. ऐजल पटेल ने लोकल 18 को बताया कि पत्थरचट्टा को किडनी स्टोन यानी पथरी की समस्या में खास तौर पर फायदेमंद माना जाता है. इसके पत्तों में ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर में बनने वाले कैल्शियम ऑक्सलेट क्रिस्टल को तोड़ने में मदद करते हैं. इससे पथरी धीरे-धीरे छोटे टुकड़ों में बदलकर पेशाब के रास्ते बाहर निकल सकती है. नियमित सेवन से नई पथरी बनने की संभावना भी कम हो सकती है. हालांकि यह असर व्यक्ति की स्थिति और पथरी के आकार पर निर्भर करता है. इसलिए अगर पथरी बड़ी हो या तेज दर्द हो रहा हो तो घरेलू उपाय के साथ डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी होता है, ताकि किसी भी तरह की जटिलता से बचा जा सके. पत्थरचट्टा सिर्फ किडनी स्टोन ही नहीं, बल्कि पेट से जुड़ी कई समस्याओं में भी लाभकारी माना जाता है. इसके सेवन से कब्ज, गैस, अपच और पेट दर्द जैसी परेशानियों में राहत मिल सकती है. यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है, आंतों की सफाई में मदद करता है. जिन लोगों को बार-बार पेट में जलन या अल्सर की समस्या होती है, उनके लिए भी यह पौधा उपयोगी हो सकता है. इसका नियमित सेवन शरीर को हल्का और स्वस्थ महसूस कराता है. हालांकि, किसी भी पुरानी या गंभीर पेट की बीमारी में इसे अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है, ताकि सही मात्रा और तरीका तय किया जा सके. Add News18 as Preferred Source on Google पत्थरचट्टा में सूजन-रोधी और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो इसे बाहरी उपयोग के लिए भी उपयोगी बनाते हैं. अगर शरीर में कहीं सूजन, चोट या घाव हो जाए, तो इसके पत्तों का लेप लगाने से राहत मिल सकती है. यह घाव को जल्दी भरने और संक्रमण से बचाने में मदद करता है. ग्रामीण इलाकों में लोग छोटे-मोटे घावों पर इसका उपयोग पारंपरिक उपचार के रूप में करते हैं. इसके अलावा कीड़े के काटने या हल्की जलन में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि गहरे या गंभीर घाव में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी होता है, क्योंकि हर स्थिति में घरेलू इलाज पर्याप्त नहीं होता है. पत्थरचट्टा को ब्लड शुगर कंट्रोल करने में भी सहायक माना जाता है. इसके नियमित सेवन से शरीर में शुगर का स्तर संतुलित रखने में मदद मिल सकती है. यह यूरिन इन्फेक्शन यानी पेशाब से जुड़ी समस्याओं में भी राहत देता है. इसके प्राकृतिक गुण बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करते हैं, जिससे जलन और संक्रमण कम हो सकता है. हालांकि, डायबिटीज या गंभीर यूरिन इन्फेक्शन के मरीजों को इसे दवा का विकल्प नहीं समझना चाहिए. इसे केवल सहायक उपाय के रूप में ही अपनाना बेहतर होता है, डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं को जारी रखना जरूरी है. पत्थरचट्टा का सेवन करना बेहद आसान है, लेकिन सही मात्रा और तरीका जानना जरूरी है. आमतौर पर इसके 1-2 ताजे पत्ते सुबह खाली पेट चबाना सबसे सरल और प्रभावी तरीका माना जाता है. इसके पत्तों का काढ़ा बनाकर भी पिया जा सकता है. कुछ लोग इसका जूस बनाकर भी सेवन करते हैं. बाहरी उपयोग के लिए पत्तों को पीसकर लेप बनाया जा सकता है. ध्यान रखें कि अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है. इसलिए हमेशा सीमित मात्रा में और जरूरत के अनुसार ही इसका उपयोग करना चाहिए, ताकि इसके लाभ सुरक्षित तरीके से मिल सकें. जहां पत्थरचट्टा के कई फायदे हैं, वहीं इसका अधिक सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है. जरूरत से ज्यादा पत्ते खाने पर गले में सूखापन, थकान या कमजोरी महसूस हो सकती है. कुछ लोगों को इससे एलर्जी या पेट में हल्की परेशानी भी हो सकती है. गर्भवती महिलाओं, बच्चों और गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. साथ ही, अगर किसी को पहले से कोई दवा चल रही है, तो उसके साथ इसका सेवन करने से पहले विशेषज्ञ से पूछना जरूरी होता है. सही जानकारी और सावधानी के साथ ही इसका उपयोग सुरक्षित और लाभकारी साबित हो सकता है. पत्थरचट्टा एक असरदार घरेलू औषधि है, लेकिन हर स्थिति में यह पूरी तरह इलाज नहीं हो सकता. खासतौर पर किडनी स्टोन अगर बड़ा हो या तेज दर्द, उल्टी या पेशाब में खून जैसी समस्या हो रही हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. इसी तरह, लंबे समय तक पेट दर्द, ब्लड शुगर या यूरिन इन्फेक्शन की समस्या बनी रहने पर भी मेडिकल जांच जरूरी होती है. घरेलू उपाय केवल शुरुआती या हल्की समस्याओं में ही कारगर होते हैं. सही समय पर डॉक्टर की सलाह लेने से गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है और सही इलाज मिल पाता है. First Published : April 13, 2026, 14:45 IST

बड़ा तालाब किनारे कब्जे पर चली JCB:भोपाल के सेवनिया, गौरागांव में कार्रवाई; बाउंड्रीवॉल समेत पक्के निर्माण तोड़े

बड़ा तालाब किनारे कब्जे पर चली JCB:भोपाल के सेवनिया, गौरागांव में कार्रवाई; बाउंड्रीवॉल समेत पक्के निर्माण तोड़े

भोपाल के बड़ा तालाब को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए जिला प्रशासन ने सोमवार को फिर से कार्रवाई की। टीटी नगर एसडीएम वृत्त की टीम सेवनिया और गौरा गांव पहुंची। यहां पर बड़ा तालाब के दायरे में ही बाउंड्रीवॉल समेत कई पक्के निर्माण थे। जिन्हें जेसीबी की मदद से हटा दिया गया। एसडीएम अर्चना शर्मा, तहसीलदार कुणाल रावत के निर्देशन में टीमों ने यह कार्रवाई की। इस दौरान पुलिस बल भी मौजूद रहा। ताकि, हंगामा होने पर निपटा जा सके। दोपहर तक कार्रवाई चली। इस दौरान आधा दर्जन से ज्यादा अतिक्रमण हटा दिए गए। बता दें कि प्रशासन ने तालाब के चारों ओर कुल 347 अतिक्रमण चिन्हित किए हैं, जिन्हें अगले 15 दिन में हटाया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भोज वेटलैंड रूल्स लागू होने (16 मार्च 2022) के बाद बने सभी निर्माण हटाए जाएंगे। बड़ा तालाब के FTL (फुल टैंक लेवल) से 50 मीटर तक के अतिक्रमण पर कार्रवाई की जा रही है। इसके चलते सोमवार को यह कार्रवाई की गई। कार्रवाई की देखिए तस्वीरें… दो महीने में लिस्टेड किए कब्जे पिछले दो महीने से जिला प्रशासन अतिक्रमण को चिह्निंत कर रहा था। टीटी नगर एसडीएम वृत्त के गौरा गांव, बिसनखेड़ी में सबसे ज्यादा कब्जे सामने आए थे। वहीं, बैरागढ़, बहेटा में भी लोगों ने तालाब की सीमा पर निर्माण कर लिए हैं। किस दिन, कहां होगी कार्रवाई? गांवों में सबसे ज्यादा कब्जे टीटी नगर एसडीएम सर्कल के गौरा गांव और बिसनखेड़ी में सबसे ज्यादा अतिक्रमण सामने आए हैं। इसके अलावा बैरागढ़ और बहेटा क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर निर्माण किए गए हैं। वन विहार नेशनल पार्क क्षेत्र में भी सीमांकन के दौरान करीब 2.5 किमी में 100 से ज्यादा पिलर लगाए जाने की बात सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्माण वेटलैंड नियमों के खिलाफ हो सकता है। बैरागढ़ सर्कल में भी बड़ी संख्या में अतिक्रमण सामने आया है। मामला NGT तक पहुंचने की तैयारी पर्यावरणविद् राशिद नूर के मुताबिक, मामला गंभीर है और इसे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में उठाया जाएगा।

बंगाल चुनाव 2026: ‘बर्दाश्त नहीं होंगे अगर मुसलमान…’, बंगाल चुनाव को लेकर ये क्या बोले बोल ओसामी, पढ़ें पूरा बयान

बंगाल चुनाव 2026: 'बर्दाश्त नहीं होंगे अगर मुसलमान...', बंगाल चुनाव को लेकर ये क्या बोले बोल ओसामी, पढ़ें पूरा बयान

बंगाल चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव के प्रचार के लिए इमाम प्रमुख असदुद्दीन ओसामी ने सोमवार को रानीगंज में मीरा गोशे बंगले पर पहुंच कर करिश्मा चौधरी से मुलाकात की। इसके बाद मीडिया से बातचीत करते हुए नटखट बिल को लेकर सवाल और मीडिया के कई सवालों के जवाब दिए गए। महिला नटखट बिल ने मोदी को सबसे समर्थन मांग और इसे लोकतंत्र को मजबूत करने वाला कदम बताया। इस पर जब इमाम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी से पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘विधायक क्या है? इसके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं दी गई है। ‘कम से कम कम्यूनिकेशन की एक प्रति तो भेजी जानी चाहिए।’ हमारा लक्ष्य बंगाल में आदिवासियों के लिए राजनीतिक अस्थिरता सुनिश्चित करना है हुमायूँ कबीर ने स्टेडियम और एआईएमआईएम पर समझौता करने का आरोप लगाया है। इस पर इमाम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘कभी-कभी तो कभी हुमायूं हमें बीजेपी की ‘बी टीम’ कहते हैं, लेकिन हम सिर्फ जनता की आवाज हैं और बंगाल में प्रतिष्ठा की गरिमा पर सवाल उठाने वाले किसी को भी नहीं देखेंगे। ओवैसी ने इस बार विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी और बिग बॉस के शानदार प्रदर्शन की उम्मीद जताई। बंगाल में बचपन की घटना इतनी ख़राब क्यों-सोसी इससे पहले रविवार को दुर्गापुर में ओसामी ने कहा था कि ममता बनर्जी को सबसे पहले यह बताना चाहिए कि बंगाल में उनकी स्थिति इतनी खराब क्यों है और उन्हें राजनीतिक नेतृत्व क्यों नहीं दिया गया। पिछले 50-60 वर्षों से बंगाल में सेक सरकारी सत्ता में रह रहे हैं, लेकिन मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय की शिक्षा, सामाजिक और आर्थिक स्थिति अभी भी बहुत खराब है। अल्पसंख्यकों को स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व करना चाहिए। (टैग्सटूट्रांसलेट)असदुद्दीन ओवेसी(टी)बंगाल(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल(टी)बंगाल चुनाव 2026(टी)विधानसभा चुनाव 2026(टी)टीएमसी(टी)विधानसभा चुनाव 2026(टी)बंगाल चुनाव 2026(टी)असदुद्दीन सिद्दीकी(टी)बंगाल(टी)ममता(टी)पश्चिम बंगाल(टी)बंगाल चुनाव 2026(टी)विधानसभा चुनाव 2026(टी)टीएमसी

शाजापुर में महिला ने कार में की तोड़फोड़:राधे-राधे चौराहे पर देर रात की घटना, CCTV फुटेज में दिखी वारदात

शाजापुर में महिला ने कार में की तोड़फोड़:राधे-राधे चौराहे पर देर रात की घटना, CCTV फुटेज में दिखी वारदात

शाजापुर के ज्योतिनगर स्थित राधे-राधे चौराहे पर रविवार-सोमवार की रात एक महिला ने खड़ी कार में तोड़फोड़ की। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें महिला पत्थर से कार के शीशे तोड़ती दिख रही है। यह घटना रात करीब 1:57 बजे हुई। फुटेज के अनुसार, महिला ने पहले कार के सामने वाले हिस्से को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। सफल न होने पर उसने साइड के शीशे को तोड़ने का प्रयास किया। इसके बाद, महिला ने कार के पिछले शीशे पर पत्थर मारकर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया। बाइक चालक से हुआ था विवाद कार मालिक नीरज कुमार मालवीय, निवासी ज्योति नगर, ने लालघाटी थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि 12 अप्रैल की रात वे शादी से लौटकर कार पार्क कर रहे थे, तभी एक नशे में धुत व्यक्ति ने उनकी कार को नुकसान पहुंचाया और गाली-गलौज की। नीरज कुमार के अनुसार, उसी व्यक्ति की पत्नी ने रात में आकर उनकी कार में तोड़फोड़ की। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर जांच कर रही है।

अस्पताल में चूहे-बिल्ली आना मरीजों के लिए कितना खतरनाक? किन बीमारियों का बढ़ेगा रिस्क, डॉक्टर से समझें

authorimg

Diseases Linked to Rats and Cats: अस्पतालों को मरीजों के लिए सबसे सुरक्षित जगह माना जाता है. उम्मीद की जाती है कि अस्पताल में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाएगा, लेकिन देश के कई नामी अस्पताल इस पर खरे नहीं उतर रहे हैं. खासतौर से सरकारी अस्पतालों का हाल-बेहाल है. पिछले साल इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में चूहों के काटने से नवजात बच्ची की मौत का मामला सामने आया था, जिसने अस्पतालों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे. अब भोपाल एम्स से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्हें देखकर आप हैरान रह जाएंगे. भोपाल एम्स के NICU में चूहों का आतंक देखने को मिल रहा है. एम्स प्रशासन का कहना है कि पेस्ट कंट्रोल के बावजूद चूहे कंट्रोल नहीं हो रहे हैं. कई अस्पतालों में कुत्ते और बिल्ली घूमते हुए भी नजर आते हैं. अब सवाल है कि अस्पतालों में कुत्ते-बिल्ली और चूहे घूमना मरीजों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है और इससे कौन-कौन सी बीमारियां फैल सकती हैं. इस बारे में डॉक्टर से जरूरी बातें जान लेते हैं. गुरुग्राम के मारेंगो एशिया हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट की फिजीशियन डॉ. दीक्षा गोयल ने News18 को बताया कि अस्पताल में कुत्ता, बिल्ली और चूहे घूमने से कई गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है. प्रेग्नेंट महिलाओं, नवजात शिशुओं और कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीजों को सबसे ज्यादा जोखिम होता है. कुत्ते के काटने से रेबीज हो सकता है, बिल्ली के काटने से कैट स्क्रैच डिजीज और चूहे के काटने से लेप्टोस्पायरोसिस जैसी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं. चूहे और बिल्लियां कई खतरनाक बैक्टीरिया और वायरस लेकर घूमते हैं. इनके संपर्क में आने से भी जानलेवा कंडीशंस पैदा हो सकती हैं. ऐसे में अस्पतालों में इनकी मौजूदगी मरीजों के लिए गंभीर समस्या है. इससे अस्पताल के स्टाफ के लिए भी खतरा पैदा हो जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. कुत्ते बन सकते हैं रेबीज का कारण डॉक्टर दीक्षा के मुताबिक अस्पतालों में आवारा कुत्ते घूमना गंभीर समस्या है, क्योंकि अगर कुत्ता किसी को काट ले, तो इससे लोगों में रेबीज वायरस फैल सकता है. ऐसी कंडीशन में सही समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवानी पड़ेगी और अगर इसमें लापरवाही बरती गई, तो व्यक्ति की जान जा सकती है. अगर कुत्ता किसी खुले घाव को चाट ले, तब भी उसकी लार में मौजूद वायरस शरीर में पहुंच सकता है. कुत्ते की जरा सी खरोंच भी रेबीज की वजह बन सकती है. बच्चों को कुत्ते जल्दी टारगेट करते हैं और लोगों को इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए. कुत्ते से जितना दूर रहेंगे, उतना सुरक्षित रहेंगे. बिल्ली फैला सकती है कई बीमारियां एक्सपर्ट ने बताया कि अस्पताल में बिल्ली आने से कई बीमारियां फैल सकती हैं. बिल्ली के काटने से कैट स्क्रैच डिजीज हो सकती है, जिसकी वजह बिल्ली में पाया जाने वाला बार्टोनेला बैक्टीरिया होता है. इस डिजीज में प्रभावित हिस्से के पास लिम्फ नोड्स में सूजन और बुखार शामिल है. इसका रिस्क 20 साल से कम उम्र के लोगों को ज्यादा होता है. इसके अलावा बिल्लियों के मल के संपर्क में आने से टॉक्सोप्लाज्मोसिस इंफेक्शन हो सकता है. यह इंफेक्शन टॉक्सोप्लाज्मा गॉन्डियाइ नामक पैरासाइट के कारण होता है. यह बिल्ली के आसपास घूमने से हो सकता है. पालतू बिल्ली से बच्चों और लोगों में यह इंफेक्शन फैल सकता है. बच्चों में यह बेहद खतरनाक हो सकता है. इसमें बहुत ज्यादा तेज फीवर और मिर्गी होने लगती है. यह बिल्ली के मल से फैलता है और जो उसे क्लीन करता है, उसे भी इस इंफेक्शन का रिस्क सबसे ज्यादा होता है. अगर प्रेग्नेंट लेडी को टॉक्सोप्लाज्मोसिस इंफेक्शन हो जाए, तो यह सीरियस कंडीशन पैदा कर सकता है. कई बार बिल्लियां टाइफाइड बैक्टीरिया और क्रिप्टोस्पोरिडियम पैरासाइट को फैला देती हैं. ये इंफेक्शन आमतौर पर तब होते हैं, जब बिल्ली आपके खाने में मुंह मार दे या उसका लार खाने में गिर जाए. इस समस्या में पेट में ऐंठन और दस्त अचानक शुरू हो सकते हैं. कभी-कभी मतली, उल्टी, बुखार और कमजोरी जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं. कई मरीजों को एंटीपैरासाइट दवाई लेनी पड़ती है, ताकि इस परेशानी से छुटकारा मिल सके. इसके अलावा भी बिल्ली कई अन्य बीमारियां फैला सकती है. अस्पताल में चूहे घूमने से क्या खतरे हैं? डॉक्टर दीक्षा गोयल कहती हैं कि अस्पताल में चूहे घूमने से भी कई तरह के संक्रमण फैल सकते हैं. इसमें लेप्टोस्पायरोसिस सबसे ज्यादा कॉमन है. यह चूहे की यूरिन और फीकल मैटर से फैलता है. चूहे अगर खाने में मुंह मार दें, तब भी यह बीमारी फैल सकती है. इसके अलावा रैट बाइट फीवर बहुत खतरनाक होता है, जो चूहे के काटने से फैलता है. इसमें 7 से 10 दिन में व्यक्ति की मौत हो सकती है और रैट बाइट के 2 से 10 दिन के बाद इसके लक्षण शुरू हो सकते हैं. घर के अंदर भी अगर किसी को चूहा काट ले, तो यह समस्या हो सकती है. इससे बचने के लिए रैट बाइट के बाद उस जगह को साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ किया जाता है. इसके बाद टिटनेस का इंजेक्शन दिया जाता है और फिर एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं. इन समस्याओं से बचने के लिए अस्पतालों में पेस्ट कंट्रोल कराना जरूरी है. घरों में लोग DEET वाले रिपेलेंट यूज कर सकते हैं.

Kejriwal Seeks Recusal of Justice Swaran Kanta Sharma

Kejriwal Seeks Recusal of Justice Swaran Kanta Sharma

Hindi News National Delhi Liquor Scam: Kejriwal Seeks Recusal Of Justice Swaran Kanta Sharma नई दिल्ली21 मिनट पहले कॉपी लिंक अरविंद केजरीवाल कोर्ट पहुंचे। दिल्ली शराब घोटाला मामले में सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। इस दौरान दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल इस केस की जज स्वर्ण कांता शर्मा से खुद को अलग (रिक्यूज) करने की मांग करेंगे। केजरीवाल खुद अपनी दलीलें रखेंगे। वे कोर्ट पहुंच गए हैं। इससे पहले इस मामले में 6 अप्रैल को सुनवाई हुई थी। तब कोर्ट ने CBI को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और कहा कि अगर कोई जज को मामले से हटाने की मांग वाली अर्जी देना चाहता है, तो दे सकता है। CBI ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उसने केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य 22 आरोपियों को शराब घोटाला केस में बरी कर दिया था। इसी मामले में बुधवार को CBI ने दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर अरविंद केजरीवाल की याचिकाओं का विरोध किया है। CBI ने कहा कि ‘अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद’ (ABAP) के सेमिनार में शामिल होना का मतलब ये नहीं है की जस्टिस शर्मा का झुकाव किसी खास संगठन की तरफ हैै। 27 फरवरी: ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल सहित 23 आरोपियों को बरी किया था 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट के बाहर बयान देते समय केजरीवाल रोने लगे। मनीष सिसोदिया ने उन्हें ढाढस बंधाया था। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपियों को राहत दी थी। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में CBI की जांच की कड़ी आलोचना भी की थी। ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ CBI की याचिका पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई की थी। उन्होंने 9 मार्च को कहा था प्राइमा फेसी (पहली नजर में) ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां गलत लगती हैं और उन पर विचार जरूरी है। साथ ही, जस्टिस शर्मा की कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की ओर से CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश पर भी रोक लगा दी थी। केजरीवाल 156 दिन, सिसोदिया 530 दिन तक जेल में रहे दिल्ली सरकार ने 2021 में राजस्व बढ़ाने और शराब व्यापार में सुधार के लिए आबकारी नीति बनाई थी, जिसे बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद वापस ले लिया गया। इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने CBI जांच के आदेश दिए थे। CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और इसमें भ्रष्टाचार हुआ। इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया था। उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। वहीं सिसोदिया इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… पश्चिम बंगाल में SIR- सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई:वोटर लिस्ट से 91 लाख नाम कटे थे; 23 अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट सोमवार को SIR पर सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच मामले की सुनवाई करेगी। चुनाव आयोग ने 9 अप्रैल को बंगाल के लिए SIR की सूची जारी की थी। इसके बाद 91 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे। पूरी खबर पढे़ं… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

महाराष्ट्र के ठाणे में सड़क हादसा, 11 की मौत:मृतकों में 3 महिलाएं, 2 की हालत गंभीर; वैन से टकराया सीमेंट मिक्सर ट्रक

महाराष्ट्र के ठाणे में सड़क हादसा, 11 की मौत:मृतकों में 3 महिलाएं, 2 की हालत गंभीर; वैन से टकराया सीमेंट मिक्सर ट्रक

महाराष्ट्र के ठाणे में सोमवार सुबह सड़क हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई। दो गंभीर घायल हुए। पुलिस के मुताबिक हादसा सुबह करीब 10:45 बजे मुर्बाड के गोविली गांव स्थित रैता ब्रिज पर हुआ। कल्याण से मुर्बाड जा रही वैन की सामने से आ रहे सीमेंट मिक्सर ट्रक से टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि वैन में सवार 11 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मुर्बाड के तहसीलदार अभिजीत देशमुख ने बताया कि घायलों को उल्हासनगर के सेंट्रल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मरने वालों में आठ पुरुष और तीन महिलाएं हैं। अब तक 6 मृतकों की पहचान हो चुकी है, बाकी की पहचान जारी है। हादसे के बाद कुछ घंटों तक कल्याण से अहिल्यानगर रोड पर लंबा जाम लगा था। 5 तस्वीरों में हादसा… कल्याण से मुरबाड के बीच चलती थी वैन वैन रोजाना की तरह आज सुबह भी पैसेंजर्स को लेकर कल्याण से मुरबाड जा रही थी। वैन में ड्राइवर समेत 12-13 लोग सवार थे। इसी दौरान रैता ब्रिज पर सामने से आ रहे सीमेंट मिक्सर से टक्कर हो गई। राहगीरों ने बताया कि दोनों गाड़ियां स्पीड में थीं। टक्कर इतनी भीषण थी कि वैन में सवार किसी को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। इनमें से 9 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। दो ने अस्पताल पहुंचने से पहले दम तोड़ दिया। अन्य दो घायलों की हालत भी है। —————————— हादसे से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… गुजरात में ट्रक ने श्रद्धालुओं को कुचला, 7 की मौत:राजकोट से सभी लोग पैदल बहुचराजी माता मंदिर जा रहे थे गुजरात के सुरेंद्रनगर में सोमवार सुबह लखतर-विरामगाम नेशनल हाईवे पर एक ट्रक ने पैदल चल रहे श्रद्धालुओं को कुचल दिया। हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि चार घायल हो गए। घायलों को सुरेंद्रनगर के अलग-अलग हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया है। पूरी खबर पढ़ें…