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approval of 12 crore for modernization of samastipur divisional railway hospital health news

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Last Updated:April 13, 2026, 16:03 IST Samastipur Rail Hospital: समस्तीपुर मंडल रेल अस्पताल की सूरत बदलने वाली है. 12 करोड़ की भारी-भरकम राशि मंजूर होने के बाद अब अस्पताल में क्या-क्या नया होने जा रहा है? 30 नए ICU बेड और अत्याधुनिक मशीनों के आने से कैसे बदलेगा इलाज का अंदाज, जानिए इस बड़े बदलाव की पूरी कहानी. ख़बरें फटाफट समस्तीपुर: समस्तीपुर जिला वासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है. भारत सरकार की ओर से समस्तीपुर मंडल रेल अस्पताल के आधुनिकीकरण के लिए 12 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त और आधुनिक बनाना है. जिससे मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मिल सके. नए भवन के निर्माण के साथ अस्पताल की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. खासकर रेलकर्मियों और उनके परिवारों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा. यह कदम न केवल समस्तीपुर बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लिए भी स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा.ओपीडी और भर्ती मरीजों के आंकड़े वर्ष 2025-26 के दौरान समस्तीपुर मंडल रेल अस्पताल की ओपीडी में कुल 1,23,712 मरीजों का इलाज किया गया. जो अस्पताल की बढ़ती उपयोगिता और भरोसे को दर्शाता है. इसी अवधि में 2,145 गंभीर मरीजों को भर्ती कर उनका सफल उपचार किया गया. इसके अलावा शल्य चिकित्सा सेवाओं के तहत 644 लघु ऑपरेशन और 20 बड़े ऑपरेशन भी सफलतापूर्वक संपन्न किए गए. चिकित्सकों की कुशल टीम द्वारा समय पर उपचार और बेहतर देखभाल के कारण मरीजों को सकारात्मक परिणाम मिले हैं. बताते चले की 12 करोड़ की लागत से जब भवन का निर्माण होगा तो लोगों को पहले से और भी ज्यादा सुविधा मिलने की उम्मीद है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Samastipur,Bihar First Published : April 13, 2026, 16:03 IST

India Ramps Up Russian Crude Oil Imports Amid Hormuz Strait Crisis 2026

India Ramps Up Russian Crude Oil Imports Amid Hormuz Strait Crisis 2026

नई दिल्ली3 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत रूसी तेल का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज रूट में सप्लाई प्रभावित होने के बाद भारत ने एक बार फिर रूस की ओर रुख किया है। अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 90% आयात करने वाले भारत ने पिछले दो महीनों में रूसी क्रूड की खरीदारी में भारी बढ़ोतरी की है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग के कारण ग्लोबल मार्केट में तेल की किल्लत बढ़ गई है, जिसके चलते भारतीय रिफाइनर्स अब रूस से ज्यादा से ज्यादा तेल जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। मार्च में रूस से आयात 18.48 करोड़ बैरल प्रति दिन पहुंचा इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के डेटा के मुताबिक, मार्च के महीने में रूस से कच्चे तेल का आयात औसत 1.98 मिलियन यानी 18.48 करोड़ बैरल प्रति दिन (bpd) रहा। यह जून 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि, अप्रैल में यह आंकड़ा गिरकर 1.57 मिलियन यानी 14.65 करोड़ बैरल प्रति दिन रह गया है, लेकिन जानकारों का कहना है कि यह गिरावट मांग की कमी की वजह से नहीं, बल्कि नयारा एनर्जी की रिफाइनरी में मेंटेनेंस के लिए किए गए शटडाउन के कारण आई है। अगले महीने से इसमें फिर से उछाल आने की उम्मीद है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है। भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। भारत रूसी तेल पर अपनी निर्भरता बनाए रखेगा सिंगापुर स्थित कंसल्टेंसी ‘वांडा इनसाइट्स’ की फाउंडर वंदना हरि का कहना है कि भारत वह सारा रूसी तेल खरीदने की कोशिश कर रहा है जो उसे मिल सकता है। उन्होंने बताया कि जब तक फारस की खाड़ी से होने वाली सप्लाई में दिक्कत बनी रहेगी, भारत रूसी तेल पर अपनी निर्भरता बनाए रखेगा। दरअसल, अमेरिका और इजरायल की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और होर्मुज रूट के बंद होने से दुनिया भर में सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद रिफाइनर्स को छूट की उम्मीद भारत ने पहले रूसी कंपनी रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से खरीदारी कम कर दी थी। पिछले साल डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन के दबाव के कारण भारत को कुछ पाबंदियां झेलनी पड़ी थीं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में समीकरण बदल गए हैं। भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों के अधिकारियों का मानना है कि रूस से तेल आयात के लिए मिली अमेरिकी छूट को आगे बढ़ाया जा सकता है। अगर छूट नहीं भी बढ़ती है, तो भी सप्लाई के अन्य विकल्प सीमित होने के कारण भारत खरीदारी जारी रख सकता है। भारत का तर्क: ‘घरेलू मांग पूरी करना हमारी प्राथमिकता’ तेल मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने नई दिल्ली में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, ‘हमारी प्राथमिकता घरेलू मांग को पूरा करने के लिए जरूरी ऊर्जा जुटाना है।’ जब उनसे अमेरिकी छूट की अनिवार्यता के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि रूसी तेल खरीदने का फैसला पूरी तरह से कॉमर्शियल और टेक्निकल फिजिबिलिटी पर आधारित है। यानी अगर भारतीय रिफाइनर्स को रूस से तेल लेना किफायती लग रहा है, तो वे इसे जारी रखेंगे। समुद्र में खड़े टैंकरों की संख्या घटी वोर्टेक्सा के डेटा के अनुसार, पिछले साल के अंत में जब भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से कदम पीछे खींचे थे, तब समुद्र में रूसी कच्चे तेल का स्टॉक काफी बढ़ गया था। जनवरी की शुरुआत तक करीब 155 मिलियन यानी 1,447 करोड़ बैरल तेल समुद्र में खड़े टैंकरों में जमा था, जो अब घटकर 100 मिलियन यानी 933 करोड़ बैरल के करीब आ गया है। इसका मतलब है कि भारतीय रिफाइनर्स ने पुराने अटके हुए शिपमेंट्स को भी अब प्रोसेस करना शुरू कर दिया है। क्या है होर्मुज रूट, भारत के लिए क्यों है अहम? होर्मुज रूट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। यह ओमान और ईरान के बीच स्थित है। दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल यहीं से होकर गुजरता है। ईरान-अमेरिका के बीच तनाव के चलते अक्सर इस रास्ते को बंद करने की धमकी दी जाती है, जिससे ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें बढ़ने लगती हैं। भारत के लिए यह रूट इसलिए अहम है क्योंकि सऊदी अरब, इराक और यूएई से आने वाला तेल इसी रास्ते से आता है। ये खबर भी पढ़ें… सरकार बोली- देश में गैस की कोई कमी नहीं: पैनिक बाइंग से बचने को कहा, 95% ग्राहक अब डिजिटल माध्यम से कर रहे बुकिंग देश में LPG सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह स्थिर और पर्याप्त है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने नागरिकों को भरोसा दिलाया है कि उन्हें घबराने या पैनिक बाइंग करने की जरूरत नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क मजबूत है और देशभर में बिना रुकावट गैस पहुंच रही है। सरकार इसकी लगातार निगरानी कर रही है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Holiday homes are no longer just a hobby, but also a source of income.

Holiday homes are no longer just a hobby, but also a source of income.

नई दिल्ली21 मिनट पहले कॉपी लिंक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का सेकंड होम और रिटायरमेंट होम मार्केट सालाना 23.63 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। गोवा, अलीबाग, कसौली और कुमाऊं की पहाड़ियों जैसे पर्यटन स्थलों पर अब लोग सिर्फ छुट्टियां बिताने के लिए घर नहीं खरीद रहे हैं। एक नया ट्रेंड उभरा है। यह है ‘रेंटल इनकम’ का। यानी जो कभी लाइफस्टाइल के लिए लिया गया फैसला था, वह अब एक निवेश रणनीति बन चुका है। हिल स्टेशनों और तटीय इलाकों में घरों को किराये पर देना नया नहीं है, लेकिन अब इसका पैमाना, ढांचा और इरादा पूरी तरह बदल गया है। होमलैंड ग्रुप के एमडी अभय जिंदल के अनुसार, लाइफस्टाइल और निवेश के बीच का अंतर खत्म हो रहा है। जिंदल कहते हैं, ‘खरीदार अब लाइफस्टाइल और निवेश में से किसी एक को नहीं चुनते, उन्हें दोनों चाहिए। वे ऐसा घर चाहते हैं जिसका वीकेंड पर मजा ले सकें और बाकी दिन उससे कमाई हो।’ प्रॉपर्टी से मिलने वाली नियमित आय इसे केवल लग्जरी खरीद के बजाय एक सोची-समझी वित्तीय योजना बना देती है। यह बदलाव आंकड़ों में भी दिखता है। 2021 तक भारत में हॉलिडे होम मार्केट 1.394 अरब डॉलर (12,976 करोड़ रुपए) था। 2019 के प्री-कोविड दौर के मुकाबले 88.63 फीसदी की उछाल आई। 360 रियल्टर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का सेकंड होम और रिटायरमेंट होम मार्केट सालाना 23.63 फीसदी की दर से बढ़ रहा है और 2026 तक यह 4 अरब डॉलर (37,236 करोड़ रुपए) तक पहुंचने का अनुमान है। स्टेमास्टर के आंकड़े बताते हैं कि उनके पोर्टफोलियो में शामिल विला साल के 365 दिनों में से करीब 270 दिन बुक रहते हैं। यानी घर खाली कम, कमाई ज्यादा। इससे 10 से 12% ग्रॉस रेंटल यील्ड हो रही है। हॉलिडे होम की कमाई सिर्फ लोकेशन पर निर्भर करती है। गोवा में है तो चलेगा, कसौली में है तो किराया मिलेगा। लेकिन अब यह सोच पुरानी पड़ चुकी है। स्टेमास्टर के को-फाउंडर ऋषि मोदी बताते हैं कि युवा ट्रैवलर अब प्राइवेट पूल, बड़े कॉमन स्पेस और फंक्शनल किचन को एड-ऑन नहीं, बल्कि बुनियादी उम्मीद मानते हैं। जिस घर में ये सुविधाएं हों, उसकी बुकिंग ज्यादा होती है। प्राइवेट शेफ और हाउसकीपिंग जैसी सेवाएं रेवेन्यू में 15 से 20% की बढ़ोतरी कर सकती हैं। द ब्लू काइट’ की सीईओ कैरोलिन मुलिज का मानना है कि रेंटल परफॉर्मेंस के लिए प्रोफेशनल मैनेजमेंट जरूरी है। हाउसकीपिंग, सुरक्षा और रखरखाव में सालाना रेंटल इनकम का 25-30% खर्च हो सकता है। अकेले नहीं होती कमाई, एक पूरी टीम चाहिए द काइट ब्लू की सीईओ कैरोलीन मुलीज कहती हैं कि डायनेमिक प्राइसिंग, मार्केटिंग, गेस्ट सर्विसिंग और कम्प्लायंस- यह सब हर घर का मालिक अकेले नहीं कर सकता। समय और स्थितियों के हिसाब से किराया तय करना पड़ता है। मेहमान की शिकायत रात को आए तो तुरंत जवाब देना है। यह सब एक सिस्टम मांगता है, एक इंसान नहीं। इसीलिए द काइट ब्लू और स्टेमास्टर जैसे प्लेटफॉर्म सामने आए हैं जो बुकिंग से लेकर मेहमान के चेकआउट तक सब संभालते हैं। घर मालिक को बस एक काम करना है, जब मन करे, खुद जाकर रह आएं। सैफ्रन-स्टेज जैसे प्लेटफॉर्म बुकिंग से लेकर चेकआउट संभाल रहे एयरबीएनबी जैसे प्लेटफॉर्म्स ने बाजार को पारदर्शी बना दिया है, जिससे डिमांड को ट्रैक करना आसान हो गया है। प्राइवेसी, शानदार व्यू और कम मेंटेनेंस वाले लेआउट अब अनिवार्य हो गए हैं। ‘सैफ्रन-स्टेज’ के देवेन्द्र पारुलेकर का कहना है कि लग्जरी विला में रिटर्न ज्यादा मिलता है क्योंकि वहां प्राइवेसी और ग्रुप स्टे की डिमांड अधिक रहती है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

लिवर में जमी गंदगी बिना दवा के हो जाएगी साफ, डॉक्टर शुभम वत्स्य ने बताए 7 आसान तरीके, देखें वीडियो

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  Natural Liver Detox Tips: लिवर हमारे शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो शरीर से टॉक्सिक एलीमेंट्स को बाहर निकालने, पाचन में मदद करने और मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करने का काम करता है. खराब खानपान, ज्यादा तला-भुना भोजन, शराब का सेवन और अनहेल्दी लाइफस्टाइल के कारण लिवर में धीरे-धीरे गंदगी और फैट जमा होने लगता है, जिससे फैटी लिवर जैसी समस्याएं हो सकती हैं. गैस्ट्रो के मशहूर डॉक्टर शुभम वत्स्य ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो में बताया है कि कुछ फूड्स लिवर डिटॉक्स करने में चमत्कारी होते हैं. इन मैजिक फूड्स का सेवन करने से नेचुरल तरीके से लिवर डिटॉक्स होता है.

राजेंद्रग्राम से 3 हाथी 20 किमी चलकर जैतहरी पहुंचे:एक हाथी लापता, फसलों को नुकसान; कच्चे घर को तोड़ा

राजेंद्रग्राम से 3 हाथी 20 किमी चलकर जैतहरी पहुंचे:एक हाथी लापता, फसलों को नुकसान; कच्चे घर को तोड़ा

अनूपपुर जिले में हाथियों की धमक से दहशत का माहौल है। चार हाथियों ने अलग-अलग गुटों में बंटकर रिहाइशी इलाकों और खेतों में जमकर उत्पात मचाया है। कहीं कच्चे मकान ढहाए जा रहे हैं, तो कहीं लहलहाती फसलें रौंदी जा रही हैं। वन विभाग की टीम लगातार हाथियों की निगरानी कर रही है, लेकिन एक हाथी के लापता होने से महकमे की चिंता बढ़ गई है। राजेंद्रग्राम इलाके में पिछले 10 दिनों से डेरा जमाए तीन हाथियों का दल अब जैतहरी पहुंच गया है। शनिवार और रविवार की रात इन हाथियों ने बेनीबारी बीट से निकलकर कोहका, बम्हनी और धर्मदास जैसे गांवों से होते हुए लंबा सफर तय किया। इस दौरान आमाटोला और डोकराटोला में किसानों की फसलों को हाथियों ने जमकर नुकसान पहुंचाया। सोमवार सुबह यह दल जैतहरी के गोबरी जंगल पहुंचा है, जहां फिलहाल हाथी आराम कर रहे हैं। अकेले हाथी का हमला: बाल-बाल बचा परिवार एक अन्य मामला जिला मुख्यालय के पास पोंड़ी और भोलगढ़ बीट का है। यहां एक अकेले हाथी ने जमकर तबाही मचाई। शनिवार की रात इस हाथी ने चटुआ गांव में समयलाल पाव के कच्चे घर को निशाना बनाया। हाथी ने घर की दीवारें तोड़ दीं और अंदर रखा अनाज चट कर गया। गनीमत रही कि समयलाल और उसका परिवार वक्त रहते घर से बाहर निकल गया, जिससे बड़ी अनहोनी टल गई। इससे पहले भी यह हाथी बघमंडा और बरबसपुर में नुकसान पहुंचा चुका है। एक हाथी लापता, वन विभाग ने जारी किया हाई अलर्ट हैरानी की बात यह है कि रविवार सुबह से इस अकेले हाथी की लोकेशन नहीं मिल पा रही है। वन विभाग की टीम पोंड़ी और भोलगढ़ के जंगलों में उसकी तलाश कर रही है। जैतहरी और अमरकंटक के रेंजर अपनी टीमों के साथ रात भर गश्त कर रहे हैं। विभाग ने ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी है कि वे जंगल की ओर न जाएं और हाथियों को देखने के लिए भीड़ न लगाएं। ग्रामीणों से रात के समय विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।

आंवला मुरब्बा के फायदे I lakhimpur kheri news

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Last Updated:April 13, 2026, 15:43 IST गर्मियों की शुरुआत के साथ आंवला मुरब्बा की मांग बढ़ जाती है, क्योंकि यह शरीर को ठंडक देने के साथ पाचन सुधारने में मदद करता है. विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आंवला मुरब्बा सुबह खाली पेट खाने से कब्ज, एसिडिटी और पेट की गर्मी से राहत मिलती है. यह इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ खांसी-जुकाम में भी फायदेमंद माना जाता है और त्वचा में निखार लाने में सहायक है. लखीमपुर खीरी. गर्मियों का मौसम शुरू होते ही लोग अपने खान-पान को लेकर ज्यादा सजग हो जाते हैं. इस समय ऐसी चीजों की तलाश रहती है जो शरीर को ठंडक पहुंचाए और साथ ही सेहत के लिए भी फायदेमंद हो. यही कारण है कि पारंपरिक देसी खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है, जिनमें मुरब्बा एक खास स्थान रखता है. गर्मियों के मौसम में मुरब्बा की डिमांड अधिक रहती है क्योंकि मुरब्बा हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद पाया जाता है. खीरी जिले के तराई इलाके में आंवला के पौधे अधिक पाए जाते हैं, ऐसे में सर्दियों के मौसम में आंवला आपको बाजारों में मिल जाएगा. वहीं गर्मियों के मौसम में आंवला का मुरब्बा किसी देसी औषधि से कम नहीं है. आंवला में विटामिन सी और एंटी आक्सीडेंट से भरपूर होता है ऐसे में पाचन से लेकर कई बीमारियों के लिए रामबाण माना जाता है. लोकल 18 से बातचीत करते हुए राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की डॉक्टर ऋचा श्रीवास्तव ने बताया कि गर्मियों के मौसम में सुबह खाली पेट मुरब्बा का सेवन करने से कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याओं से आपको राहत मिल जाएगी. पेट साफ ना हो पाने के कारण मुंह में छाले हो जाते हैं, ऐसे में मुरब्बा का सेवन करने से पेट की गर्मी शांत होती है. आंवला का मुरब्बा इम्यूनिटी बूस्टर होता है, जोकि हमारे शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है. बदलते मौसम के कारण खांसी, जुकाम जैसी समस्याओं से भी राहत दिलाता है, सुबह खाली पेट मुरब्बा खाने से त्वचा में निखार आता हैं. मुरब्बा बनाने की रेसिपीआप आसानी से घर पर मुरब्बा बना सकते हैं इसके लिए सबसे पहले आपको आंवला लेना होगा, उसके बाद आंवला को साफ़ पानी से धो लें. फिर आंवला में छेद कर गर्म पानी में उबाल लें. फिर 1 किलो चीनी की चाशनी तैयार कर ले, चाशनी की सफाई के लिए 1 चम्मच दूध डालें और ऊपर आने वाले जांघ को हटा दें. चिपचिपा होने तक उबालें, इसमें आप इलायची पाउडर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. फिर उसके बाद उबले हुए आंवला को चाशनी में डूबा दे. 4 से 5 दिन के लिए आप मुरब्बा को एक सुरक्षित स्थान पर रख दें, इसके बाद आप इसका सेवन कर सकते हैं. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Lakhimpur,Kheri,Uttar Pradesh First Published : April 13, 2026, 15:43 IST

रिटायर्ड डीएसपी पर दर्ज केस निरस्त करने की मांग:मंदसौर में सौंपा ज्ञापन; पन्ना में सीट बेल्ट विवाद को गंभीर अपराध बनाने का आरोप

रिटायर्ड डीएसपी पर दर्ज केस निरस्त करने की मांग:मंदसौर में सौंपा ज्ञापन; पन्ना में सीट बेल्ट विवाद को गंभीर अपराध बनाने का आरोप

मध्य प्रदेश पुलिस पेंशनर्स संघ के संस्थापक एवं प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह परिहार (सेवानिवृत्त टीआई) के नेतृत्व में मंदसौर में सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों ने पुलिस महानिदेशक, पुलिस मुख्यालय भोपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन मंदसौर कंट्रोल रूम में सीएसपी जितेंद्र कुमार भास्कर को दिया गया। ज्ञापन में जिला पन्ना के मडला थाना क्षेत्र में 80 वर्षीय सेवानिवृत्त उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) भारत सिंह चौहान और उनकी 76 वर्षीय पत्नी राजश्री चौहान के साथ कथित अभद्र व्यवहार और उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरण को निरस्त करने की मांग की गई है। यह है पूरा मामला संघ के अनुसार, 7 अप्रैल 2026 को भारत सिंह चौहान अपनी पत्नी के साथ कार से पन्ना-छतरपुर नेशनल हाईवे-39 से गुजर रहे थे। इसी दौरान मंडला थाने के सामने वाहन चेकिंग की जा रही थी। पेंशनर्स संघ का आरोप है कि आरक्षक को वाहन चेकिंग का वैधानिक अधिकार नहीं था, इसके बावजूद वाहन रोका गया और चौहान दंपती के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। संघ का दावा है कि इस घटना का वीडियो फुटेज भी मौजूद है, जिसमें दंपती द्वारा समझाइश दी जाती दिखाई दे रही है। आर्म्स एक्ट में केस दर्ज करने पर सवाल ज्ञापन में कहा गया है कि चौहान की पत्नी के पास मौजूद लाइसेंसी बंदूक को लेकर पुलिस ने गलत आरोप लगाते हुए यह दर्शाया कि आरक्षक पर बंदूक तानकर धमकी दी गई, जबकि वीडियो में ऐसा कोई तथ्य नहीं दिखता। इसके बावजूद थाना प्रभारी उप निरीक्षक रचना पटेल द्वारा एक आरक्षक की रिपोर्ट के आधार पर गंभीर प्रकरण बना दिया गया। संघ ने इसे “असत्य एवं मनगढ़ंत कहानी” बताते हुए कहा कि केवल सीट बेल्ट न पहनने जैसे सामान्य मोटर व्हीकल एक्ट के मामले को अनावश्यक रूप से गंभीर अपराध में बदल दिया गया। “80 साल के पेंशनर से बाधा संभव नहीं” ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि 35-40 वर्षों तक पुलिस सेवा देने वाले 80 वर्षीय अधिकारी और उनकी 76 वर्षीय पत्नी द्वारा 8-10 पुलिसकर्मियों के शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करना तर्कसंगत नहीं है। इससे स्पष्ट होता है कि मामला तथ्यों के विपरीत दर्ज किया गया है। पहले भी मिल चुकी हैं शिकायतें पुलिस पेंशनर्स संघ ने दावा किया कि प्रदेशभर में सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों के साथ थानों व अन्य संस्थानों में अभद्र व्यवहार की शिकायतें लगातार मिल रही हैं, जिससे पेंशनर्स में आक्रोश बढ़ रहा है। संघ ने ज्ञापन के माध्यम से निम्न मांगें रखीं भारत सिंह चौहान एवं उनकी पत्नी के खिलाफ दर्ज प्रकरण को खारिज किया जाए। संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। मप्र पुलिस मैन्युअल के नियम 64(11) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए। निष्पक्ष जांच के लिए मामले की जांच पन्ना जिले के बाहर के किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए। वीडियो फुटेज को जांच का आधार बनाया जाए।

बच्चा रो रहा है बार-बार? हो सकता है वजह डकार न आना, ये टिप्स फॉलो करते ही तुरंत लेगा डकार, नहीं दिखाएगा नखरे

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Last Updated:April 13, 2026, 15:35 IST नवजात शिशु की देखभाल में डकार दिलाना एक बेहद अहम हिस्सा है. सही तरीके से डकार दिलाने से बच्चे के पेट में फंसी हवा बाहर निकलती है, जिससे वह ज्यादा आरामदायक महसूस करता है और उसकी सेहत बेहतर रहती है. आइए जानते है कुछ जरूरी टिप्स… अक्सर नई मांओं के लिए यह समझना थोड़ा मुश्किल होता है कि बच्चे को सही तरीके से डकार कैसे दिलाई जाए. इसी वजह से कई बार वे बच्चे के व्यवहार और सेहत में होने वाले बदलावों को ठीक से समझ नहीं पातीं. दरअसल, बच्चे को डकार दिलाना उसकी देखभाल का एक जरूरी हिस्सा है. जब मां को बच्चे की डकार सुनाई देती है, तो उसे एक तरह की तसल्ली मिलती है कि बच्चे ने दूध अच्छे से पिया है और वह आराम में है. लोकल18 से बातचीत में सर्वोदय हॉस्पिटल, सेक्टर-8 के डायरेक्टर और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुशील सिंगला बताते हैं कि डकार दिलाना क्यों जरूरी है, यह समझना बेहद अहम है. जब बच्चा दूध पीता है, खासकर बोतल से, तो उसके साथ कुछ मात्रा में हवा भी उसके पेट में चली जाती है. यही हवा बाद में परेशानी की वजह बनती है. जब इस हवा को बाहर निकाला जाता है, तो उसे ही डकार कहा जाता है. अगर बच्चे के पेट में यह हवा फंसी रह जाए, तो उसका पेट फूला-फूला लगने लगता है. इससे बच्चे को पेट दर्द हो सकता है, वह बार-बार रोता है, चिड़चिड़ा हो जाता है और कई बार दूध पीने से भी कतराने लगता है. लेकिन यदि समय पर बच्चे को डकार दिला दी जाए, तो वह न सिर्फ आराम महसूस करता है, बल्कि अच्छे से दूध भी पीता है और उसे नींद भी बेहतर आती है.  Add News18 as Preferred Source on Google डॉ. सिंगला के अनुसार, कई बार आपने देखा होगा कि बच्चे को दूध पीने के बाद उल्टी हो जाती है. यह भी उसी हवा के बाहर निकलने का एक तरीका होता है, जिसमें दूध के साथ हवा भी बाहर आ जाती है. खासकर बोतल से दूध पीने वाले बच्चों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है, जबकि मां का दूध पीने वाले बच्चों में यह अपेक्षाकृत कम होती है.  बच्चे को डकार दिलाने के कुछ आसान और प्रभावी तरीके भी हैं. आप बच्चे को अपने कंधे से सटा कर उसकी पीठ को हल्के-हल्के थपथपा सकते हैं. इसके अलावा, बच्चे को गोद में सीधा बैठाकर उसकी पीठ पर हल्का दबाव देना भी मददगार होता है. एक और तरीका यह है कि बच्चे को अपनी गोद में पेट के बल लिटाकर उसकी पीठ को धीरे-धीरे सहलाया जाए. इन तरीकों से बच्चे के पेट में फंसी हवा आसानी से बाहर निकल जाती है.  डकार का मतलब यही है कि बच्चे के पेट की हवा सहजता से बाहर निकल गई. यह समस्या आमतौर पर 4 से 6 महीने तक के बच्चों में ज्यादा देखने को मिलती है. जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, यह समस्या अपने आप कम हो जाती है और 6 महीने के बाद अक्सर खत्म भी हो जाती है. ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं होती और सामान्य देखभाल से ही यह समस्या संभाली जा सकती है.  First Published : April 13, 2026, 15:35 IST

धुरंधर 2 ने 25 दिनों में कमाए ₹1712 करोड़:विदेशों में ₹415 करोड़ बटोरे; पुष्पा 2 का वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड तोड़ने से ₹30 करोड़ दूर

धुरंधर 2 ने 25 दिनों में कमाए ₹1712 करोड़:विदेशों में ₹415 करोड़ बटोरे; पुष्पा 2 का वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड तोड़ने से ₹30 करोड़ दूर

रणवीर सिंह स्टारर फिल्म ‘धुरंधर द रिवेंज’ सिनेमाघरों में शानदार प्रदर्शन कर रही है। फिल्म को रिलीज हुए 26 दिन हो गए हैं और चौथे हफ्ते के बाद भी इसकी कमाई में मजबूती बनी हुई है। सैक्निल्क के मुताबिक, फिल्म अब अल्लू अर्जुन की ‘पुष्पा 2: द रूल’ के वर्ल्डवाइड कलेक्शन के रिकॉर्ड को तोड़ने के बेहद करीब पहुंच गई है। 25वें दिन तक धुरंधर 2 का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 1,712.98 करोड़ रुपए हो गया है। पुष्पा 2 का लाइफटाइम वर्ल्डवाइड कलेक्शन 1,742.10 करोड़ रुपए है। फिल्म को यह रिकॉर्ड तोड़ने के लिए अब 30 करोड़ रुपए से भी कम की जरूरत है। भारत में कमाई में अब भी 150 करोड़ पीछे टिकटों की बिक्री के मामले में ‘धुरंधर 2’ फिलहाल ‘पुष्पा 2’ से पीछे चल रही है। बुकमायशो के डेटा के मुताबिक, धुरंधर 2 के अब तक 1.71 करोड़ टिकट बिके हैं। वहीं पुष्पा 2 के 1.92 करोड़ टिकट बिके थे। भारत में कमाई की बात करें तो पुष्पा 2 ने 1,234.10 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया था। धुरंधर 2 अब तक 1,083.67 करोड़ रुपए ही कमा पाई है। यानी घरेलू बाजार में फिल्म अभी 150.43 करोड़ रुपए पीछे है। हिंदी बेल्ट में दबदबा, साउथ में सुस्त धुरंधर 2 की सबसे ज्यादा कमाई हिंदी बेल्ट से हो रही है। फिल्म के कुल कलेक्शन का 94% हिस्सा यानी 1,017.79 करोड़ रुपए सिर्फ हिंदी मार्केट से आया है। तुलना करें तो पुष्पा 2 को साउथ के साथ-साथ हिंदी बेल्ट (812.14 करोड़) से भी भारी सपोर्ट मिला था। हालांकि, धुरंधर 2 को तेलुगु मार्केट से सिर्फ 41.85 करोड़ रुपए ही मिले हैं। यही कारण है कि फिल्म इंडिया नेट कलेक्शन में पुष्पा 2 से पीछे है। विदेशों में धुरंधर की जबरदस्त कमाई धुरंधर 2 के वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड के करीब पहुंचने की सबसे बड़ी वजह इसका ओवरसीज कलेक्शन है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस फिल्म ने पुष्पा 2 को काफी पीछे छोड़ दिया है। धुरंधर 2 ने विदेशों में 415.50 करोड़ रुपए बटोरे हैं, जबकि पुष्पा 2 का विदेशी कलेक्शन 259.50 करोड़ रुपए था। विदेशों से हुई 156 करोड़ की ज्यादा कमाई ने भारत में हुए कलेक्शन के अंतर को कम कर दिया है।

1 लीटर वाली कोल्ड ड्रिंक की बोतल में कितनी चीनी होती है? गटकने से पहले जान लेंगे, तो हाथ लगाने से भी डरेंगे

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Last Updated:April 13, 2026, 15:26 IST Cold Drinks and Sugar: कोल्ड ड्रिंक की एक लीटर वाली बोतल में करीब 100 से 110 ग्राम चीनी हो सकती है. यह करीब 20 से 25 चम्मच चीनी के बराबर है. WHO के अनुसार वयस्कों को एक दिन में 25 से 36 ग्राम से ज्यादा शुगर का सेवन नहीं करना चाहिए. यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट्स लोगों को कोल्ड ड्रिंक न पीने की सलाह देते हैं. इसका ज्यादा सेवन करने से कई बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. कोल्ड ड्रिंक की जगह नींबू पानी या नारियल पानी बेहतर विकल्प होते हैं. कोल्ड ड्रिंक्स में चीनी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. इससे परहेज करना चाहिए. (Image – AI) Sugar Content in Soft Drinks: गर्मियों में कोल्ड ड्रिंक पीना सभी को अच्छा लगता है. ठंडी-ठंडी कोल्ड ड्रिंक पीने से लोगों को गर्मी से निजात मिलती है और वे तरोताजा महसूस करते हैं. प्यास लगते ही कई लोग पानी की जगह सीधे फ्रिज से कोल्ड ड्रिंक की बोतल निकालकर गटक लेते हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि 1 लीटर की एक बोतल में कितनी चीनी होती है? अगर आप इसका सही आंकड़ा जान लेंगे, तो शायद अगली बार इसे पीने से पहले कई बार सोचेंगे. हेल्थ एक्सपर्ट्स लोगों को शुगरी ड्रिंक्स से दूरी बनाने की सलाह देते हैं, क्योंकि इनमें शुगर की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. अगर आप लंबे समय तक इसका लगातार सेवन करेंगे, तो इससे कई बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. कोका कोला की वेबसाइट पर भी इस बारे में जानकारी दी गई है. इसके मुताबिक करीब 100 मिलीलीटर कोका कोला में 10.6 ग्राम शुगर होती है. इसके हिसाब से देखें, तो 330 ml की एक केन में करीब 35 ग्राम चीनी होती है. 1 लीटर की बोतल में करीब 106 ग्राम चीनी होती है. अलग-अलग कंपनियों की कोल्ड ड्रिंक में शुगर की मात्रा में थोड़ा बहुत अंतर होता है. हालांकि बहुत बड़ा अंतर नहीं होता है. चीनी को चम्मच के हिसाब से देखें, तो एक चम्मच में करीब 5 ग्राम चीनी आती है. इस लिहाज से कोल्ड ड्रिंक की 330 ml की केन में 35 ग्राम यानी 7 चम्मच चीनी होती है. 1 लीटर की बात करें, तो इसमें करीब 20 से 21 चम्मच चीनी हो सकती है. इसके अलावा भी कोल्ड ड्रिंक्स में कई ऐसी चीजें होती हैं, जिनका ज्यादा सेवन करना नुकसानदेह है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार एक वयस्क को दिनभर में 25 से 36 ग्राम करीब 5 से 8 चम्मच से ज्यादा एडेड शुगर नहीं लेनी चाहिए. कोल्ड ड्रिंक की एक बोतल में सामान्य व्यक्ति की पूरे दिन की जरूरत से कई गुना ज्यादा चीनी होती है. इतनी ज्यादा मात्रा में चीनी का सेवन शरीर पर बुरा असर डालता है. सबसे पहले यह ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ाता है, जिससे इंसुलिन पर दबाव पड़ता है. बार-बार ऐसा होने पर टाइप-2 डायबिटीज का खतरा काफी बढ़ जाता है. इसके अलावा एडेड शुगर शरीर में फैट के रूप में जमा होती जाती है, जिससे मोटापा और पेट की चर्बी बढ़ने लगती है. कोल्ड ड्रिंक में मौजूद हाई शुगर कंटेंट दांतों के लिए भी खतरनाक होता है. इसमें मौजूद एसिड और चीनी मिलकर दांतों की ऊपरी परत एनेमल को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे कैविटी और दांतों की सड़न की समस्या बढ़ जाती है. बच्चों और किशोरों में इसका असर और भी तेजी से देखा जाता है. इसके अलावा शुगरी ड्रिंक्स आपकी भूख को भी प्रभावित करती हैं. कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद आपको जल्दी भूख लग सकती है, जिससे आप ज्यादा खाना खाते हैं. इससे वजन बढ़ने का खतरा और बढ़ जाता है. कई रिसर्च यह भी बताती हैं कि ज्यादा मीठी ड्रिंक्स का सेवन दिल की बीमारियों और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के खतरे को भी बढ़ा सकता है. ऐसे में कोल्ड ड्रिंक में छिपी चीनी आपके स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है. इसलिए बेहतर है कि आप इन ड्रिंक्स का सेवन सीमित करें और उनकी जगह पानी, नारियल पानी या ताजे फलों के जूस जैसे विकल्प अपनाएं. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 13, 2026, 15:26 IST