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घर में आग लगी, बुजुर्ग महिला को बचाया:सिंगरौली में पुलिस ने लोगों के साथ मिलकर पाया काबू

घर में आग लगी, बुजुर्ग महिला को बचाया:सिंगरौली में पुलिस ने लोगों के साथ मिलकर पाया काबू

सिंगरौली के सरई नगर परिषद के नौडिया गांव (वार्ड नंबर 12) में भैया लाल जायसवाल के घर में अचानक आग लग गई। आग इतनी तेज थी कि देखते ही देखते पूरे इलाके में खलबली मच गई। गांव वालों ने अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन लपटें काबू में नहीं आ रही थीं। उसी वक्त सरई थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह भदौरिया वहां से गुजर रहे थे। आग देख वह तुरंत अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बिना वक्त गंवाए ग्रामीणों के साथ मिलकर खुद मोर्चा संभाला और आग बुझाना शुरू किया। बुजुर्ग महिला को सुरक्षित निकाला सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि घर के अंदर एक बुजुर्ग महिला फंसी हुई थी। थाना प्रभारी ने सूझबूझ दिखाते हुए महिला को सुरक्षित बाहर निकाला, जिससे उनकी जान बच गई। उनकी इस तत्परता की वजह से एक बड़ा हादसा होने से टल गया। अब हालात काबू में थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह भदौरिया ने बताया कि पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से अब आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है। फिलहाल इस बात की जांच की जा रही है कि आखिर आग लगी कैसे। प्रशासन अब नुकसान का जायजा लेने में जुटा है।

सांसद अमृतपाल को पंजाब लाने से बिगड़ेंगे हालात:राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को लिखा पत्र, 23 अप्रैल को खत्म हो रही NSA अवधि

सांसद अमृतपाल को पंजाब लाने से बिगड़ेंगे हालात:राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को लिखा पत्र, 23 अप्रैल को खत्म हो रही NSA अवधि

पंजाब सरकार ने खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर मांग की है कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत उनकी हिरासत अवधि खत्म होने के बाद भी उन्हें असम की डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में ही रखा जाए। पंजाब में अमृतपाल को लाने से हालत बिगड़ सकते हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने का हवाला दिया सरकार ने अपने पत्र में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का हवाला दिया है। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह सचिव से अनुरोध किया है कि असम सरकार की सहमति लेकर ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स एक्ट, 1952 तथा पंजाब संशोधन अधिनियम 2025 के प्रावधानों के तहत अमृतपाल को डिब्रूगढ़ जेल में रखने की अनुमति दी जाए। इस मामले में शीघ्र निर्णय लेने की भी अपील की गई है। पंजाब पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने रिहाई से कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई सूत्रों के मुताबिक, पंजाब पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई है कि उनकी रिहाई से राज्य में कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) और अमृतसर (देहात) के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) की रिपोर्ट पर गृह विभाग ने यह सिफारिश की है। 24 फरवरी 2023 को किया था अमृतपाल को गिरफ्तार गौरतलब है कि अमृतपाल सिंह के खिलाफ 24 फरवरी 2023 को अमृतसर के अजनाला थाने में मामला दर्ज किया गया था, जब उन्होंने अपने समर्थकों के साथ पुलिस स्टेशन पर धावा बोलकर एक सहयोगी को छुड़ा लिया था। इसके बाद वे करीब एक महीने तक फरार रहे और 23 अप्रैल 2023 को गिरफ्तार किए गए। गिरफ्तारी के बाद से ही अमृतपाल को एनएसए के तहत डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में रखा गया है। उनकी हिरासत अवधि को अप्रैल 2024 और अप्रैल 2025 में बढ़ाया जा चुका है। वर्तमान में यह अवधि 22 अप्रैल 2026 को समाप्त होने वाली है। सुरक्षा के मद्देनजर अमृतपाल बाहर रखना उपयुक्त रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एनएसए की अवधि समाप्त होने के बाद 23 अप्रैल को अमृतपाल को दोबारा गिरफ्तार किया जा सकता है, हालांकि राज्य की सुरक्षा के मद्देनजर उन्हें पंजाब से बाहर ही रखना अधिक उपयुक्त माना गया है। उल्लेखनीय है कि डिब्रूगढ़ जेल में बंद अमृतपाल के नौ सहयोगियों को एनएसए की अवधि समाप्त होने के बाद पंजाब वापस लाया जा चुका है, लेकिन उनके मामले को अलग मानते हुए सरकार ने विशेष व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत जताई है। अब इस मामले में अंतिम निर्णय केंद्र सरकार और असम सरकार की सहमति के बाद लिया जाएगा। 1.97 लाख वोटों से जीता था अमृतपाल अमृतपाल सिंह अजनाला थाने पर हमला करने समेत 12 एफआईआर में भी आरोपी हैं। जेल में रहते हुए अमृतपाल सिंह ने पंजाब के खडूर साहिब संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर 2024 का लोकसभा चुनाव जीता है। अमृतपाल सिंह ने कांग्रेस के कुलबीर सिंह जीरा को करीब 1.97 लाख वोटों के अंतर से हराया था। खडूर साहिब से जीत के बाद अमृतपाल को शपथ ग्रहण के लिए पैरोल मिली थी।

बाजार में असली या केमिकल वाला आम? ऐसे करें सेकंड्स में पहचान वरना सेहत हो सकती है खराब

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Mango Safety Tips: गर्मियों का मौसम आते ही एक फल सबसे ज्यादा चर्चा में आ जाता है-आम. बच्चे हों या बड़े, हर कोई इसका बेसब्री से इंतजार करता है. बाजार में ढेरों किस्म के आम दिखते हैं और हर कोई चाहता है कि सबसे मीठा और अच्छा आम ही घर जाए, लेकिन आजकल एक बड़ी दिक्कत ये है कि हर आम असली तरीके से पका हुआ नहीं होता. कई जगह आम को जल्दी पकाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे वो दिखने में तो आकर्षक लगता है, लेकिन अंदर से उतना अच्छा नहीं होता. ऐसे आम खाने से शरीर पर गलत असर पड़ सकता है. सिर दर्द, उल्टी, पेट में गड़बड़ी जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं. इसलिए जरूरी है कि आप आम खरीदते समय थोड़ा समझदारी दिखाएं. बिना देखे-समझे आम खरीदना अब सही फैसला नहीं है. अच्छी बात ये है कि कुछ आसान तरीकों से आप खुद पहचान सकते हैं कि आम सही तरीके से पका है या केमिकल से. इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे ही आसान और काम के टिप्स बता रहे हैं, जिनसे आप खुद सही आम चुन पाएंगे. कैसे पहचानें केमिकल से पका आम?1. खुशबू से करें पहचानअसली पके आम की खुशबू बहुत हल्की और मीठी होती है, अगर आम में कोई तेज या अजीब गंध आ रही है, तो समझ लें कि कुछ गड़बड़ है. केमिकल से पके आम में अक्सर नेचुरल खुशबू नहीं होती. 2. रंग पर ध्यान देंनेचुरल तरीके से पका आम एक जैसा पीला या हल्का हरा-पीला दिखता है, लेकिन केमिकल से पके आम ज्यादा चमकीले और एकदम साफ रंग के नजर आते हैं. बहुत ज्यादा चमकदार रंग वाले आम से थोड़ा सावधान रहें. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. 3. दाग और निशान देखेंअगर आम पर बहुत ज्यादा धब्बे, कट के निशान या काले स्पॉट दिख रहे हैं, तो यह केमिकल या इंजेक्शन से पकाया गया हो सकता है. ऐसे आम लेने से बचना बेहतर है. 4. दबाकर चेक करेंजब आप आम को हल्का सा दबाते हैं, तो नेचुरल पका आम थोड़ा सॉफ्ट लगता है, लेकिन ज्यादा गूदेदार नहीं होता. केमिकल से पके आम बहुत ज्यादा नरम या दबते ही अंदर धंसने लगते हैं. 5. बेकिंग सोडा टेस्टघर लाने के बाद आप एक आसान टेस्ट कर सकते हैं. आम को बेकिंग सोडा मिले पानी से धोएं, अगर धोने के बाद उसका रंग अजीब तरीके से बदलता है, तो समझ जाएं कि आम केमिकल से पका है. केमिकल से पके आम खाने के नुकसानकेमिकल से पकाए गए आम सिर्फ स्वाद में ही नहीं, सेहत के लिए भी ठीक नहीं होते. इससे सिर दर्द, चक्कर, उल्टी, पेट दर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. लंबे समय तक ऐसे फल खाने से शरीर पर और भी बुरा असर पड़ सकता है. इसलिए हमेशा कोशिश करें कि भरोसेमंद जगह से ही आम खरीदें. आम खरीदते समय ध्यान रखने वाली बातें-हमेशा ऐसे दुकानदार से आम लें जिस पर भरोसा हो-बहुत सस्ते आम देखकर तुरंत न खरीदें-मौसम की शुरुआत में ज्यादा सावधानी रखें-घर लाकर आम को अच्छे से धोना न भूलें

माराडोना की मौत मामले में फिर जांच शुरू हो रही:मेडिकल टीम पर इलाज में लापरवाही के आरोप; पहला ट्रायल रद्द हुआ था

माराडोना की मौत मामले में फिर जांच शुरू हो रही:मेडिकल टीम पर इलाज में लापरवाही के आरोप; पहला ट्रायल रद्द हुआ था

फुटबॉल दिग्गज डिएगो माराडोना की मौत के मामले की जांच दोबारा मंगलवार से शुरू हो रहा है। उनकी मेडिकल टीम पर सही इलाज न देने और लापरवाही बरतने के आरोप हैं। मई 2025 में शुरू हुआ पहला ट्रायल उस समय रद्द कर दिया गया था, जब एक जज पर कोर्ट में बिना अनुमति डॉक्यूमेंट्री शूट कराने का आरोप लगा। अब नए जजों के सामने सुनवाई शुरू होगी। माराडोना को फुटबॉल इतिहास के महान खिलाड़ियों में गिना जाता है। उन्होंने 1986 वर्ल्ड कप में अर्जेंटीना को जीत दिलाई थी और ‘हैंड ऑफ गॉड’ गोल के लिए भी जाने जाते हैं। माराडोना की 25 नवंबर 2020 को 60 साल की उम्र में मौत हुई थी। वे ब्रेन ब्लड क्लॉट की सर्जरी के बाद घर पर रिकवर कर रहे थे। पोस्टमॉर्टम में दिल का दौरा और फेफड़ों में पानी भरने को मौत की वजह बताया गया। मेडिकल टीम पर कुलपेबल होमिसाइड का केस दर्ज इस मामले में मेडिकल टीम के 7 सदस्य ट्रायल का सामना कर रहे हैं। इन पर ‘कुलपेबल होमिसाइड’ का केस दर्ज है। दोषी पाए जाने पर उन्हें 8 से 25 साल तक की सजा हो सकती है। एक्सपर्ट्स माराडोना के इलाज को अपर्याप्त बताया जांच में सामने आया कि टीम को माराडोना की गंभीर हालत की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने जरूरी कदम नहीं उठाए। मेडिकल एक्सपर्ट्स ने उनके इलाज को ‘लापरवाह और अपर्याप्त’ बताया। ट्रायल में करीब 100 गवाहों के बयान होंगे, जिनमें उनकी बेटियां भी शामिल हैं। यह सुनवाई जुलाई तक चल सकती है। माराडोना ने करियर में 312 गोल दागे मैराडोना ने फुटबॉल करियर में 312 गोल किए। उन्होंने इंटरनेशनल करियर में 91 मैच खेले, जिसमें 34 गोल किए। मैराडोना बार्सिलोना, नेपोली, सेविला, नेवेल्स ओल्ड ब्यूऑयज और बोका जूनियर्स जैसे क्लब से खेल चुके हैं। बार्सिलोना से खेलते हुए उन्होंने 36 मैच में 22 और नेपोली के लिए 188 मैच में 81 गोल किए। करियर में 11 टूर्नामेंट जीते मैराडोना ने करियर में 11 टूर्नामेंट्स जीते हैं। इसमें 1 वर्ल्ड कप खिताब, एक UEFA कप खिताब, एक नेशंस लीग, एक FIFA वर्ल्ड यूथ चैम्पियनशिप और 5 नेशनल कप जीते हैं। मैराडोना को फीफा प्लेयर ऑफ द सेंचुरी से भी नवाजा जा चुका है। उन्होंने एक बार वर्ल्ड कप गोल्डन बॉल, एक बार बेलोन डी’ओर, 2 बार साउथ अमेरिकन फुटबॉलर ऑफ द ईयर, 6 बार नेशनल लीग टॉप स्कोरर अवॉर्ड जीता है।

Suryakumar Yadav ICC Player of Month March

Suryakumar Yadav ICC Player of Month March

Hindi News Sports Suryakumar Yadav ICC Player Of Month March | T20 World Cup Record स्पोर्ट्स डेस्क1 घंटे पहले कॉपी लिंक टी-20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी के साथ संजू सैमसन और कुलदीप यादव। भारत के ओपनर संजू सैमसन को मार्च के लिए ICC प्लेयर ऑफ द मंथ चुना गया है। दुबई में ICC ने मंगलवार को इसका ऐलान किया। सैमसन ने टी-20 वर्ल्ड कप में भारत के लिए सबसे ज्यादा 321 रन बनाए थे। सुपर-8 में मौका मिला शुरुआती मैचों में प्लेइंग XI में नहीं रहने के बाद भी संजू ने सुपर-8 में खुद को साबित किया। उन्होंने कहा कि यह अवॉर्ड उनके क्रिकेट करियर के खास दौर में मिला है। भारत की टी-20 वर्ल्ड कप जीत में योगदान देना सपना पूरा होने जैसा था और इस पल की अहमियत समझने में समय लगा। उन्होंने आगे कहा- भारतीय क्रिकेट में काफी प्रतिभा है और टीम व कोचिंग स्टाफ का भरोसा उनके प्रदर्शन में मददगार रहा। वेस्टइंडीज के खिलाफ नाबाद 97 रन बनाए सैमसन ने जिम्बाब्वे के खिलाफ 24 रन से शुरुआत की और फिर लगातार अच्छा प्रदर्शन किया। वेस्टइंडीज के खिलाफ वह शतक से तीन रन से चूके, लेकिन 97* रन बनाकर भारत को सेमीफाइनल में पहुंचाया। इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ वानखेड़े में 89 रन बनाकर टीम को 253/7 तक पहुंचाया। इंग्लैंड यह लक्ष्य हासिल नहीं कर सका और सात रन से हार गया। अहमदाबाद में फाइनल में भी उन्होंने 89 रन बनाए और भारत को 96 रन से जीत दिलाने में योगदान दिया। मार्च में खेले तीन T20 मैचों में सैमसन ने 275 रन बनाए। उनका औसत 137.50 और स्ट्राइक रेट 199.27 रहा। पहली बार अवॉर्ड मिला यह पहली बार है जब सैमसन ने प्लेयर ऑफ द मंथ अवॉर्ड जीता है। इससे पहले पांच महीनों में अलग-अलग देशों के खिलाड़ी यह सम्मान जीत चुके हैं। वहीं, महिलाओं में न्यूजीलैंड की कप्तान मेली केर को यह अवॉर्ड तीसरी बार मिला। उन्होंने जिम्बाब्वे और साउथ अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में शानदार प्रदर्शन किया। केर ने जिम्बाब्वे के खिलाफ ODI सीरीज के तीन मैचों में 16 विकेट लिए, जिसमें 7/34 उनका करियर बेस्ट रहा। साथ ही बैटिंग में 140 रन बनाकर टीम के लिए अहम भूमिका निभाई। ———————————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… IPL में आज चेन्नई vs कोलकाता:धोनी का इस मैच में भी खेलना मुश्किल, KKR को पहली जीत की तलाश IPL के इस सीजन के 22वें मैच में आज चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) का सामना कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) से होगा। मैच चेन्नई के MA चिदंबरम स्टेडियम (चेपॉक) में शाम 7:30 बजे से शुरू होगा, जबकि टॉस 7:00 बजे होगा। पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

मर्दो में भी होता है ब्रेस्ट कैंसर, मर्दानगी के चक्कर में न करें नजरअंदाज, 5 संकेत दिखें तो तुरंत कराएं इलाज

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Last Updated:April 14, 2026, 18:20 IST Male Breast Cancer: अधिकांश लोगों को लगता है मर्दों में ब्रेस्ट कैंसर नहीं होता है. अगर आपकी भी सोच ऐसी है तो तुरंत इसे दुरुस्त कीजिए. जिस तरह से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होता है, उसी तरह से पुरुषों में भी स्तन कैंसर हो सकता है. यह बात सही है कि पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के मामले कम हैं लेकिन मर्द इससे अछूता नहीं हो सकता. इसलिए मर्दानगी के चक्कर में कभी यह न सोचें कि पुरुषों को ब्रेस्ट कैंसर नहीं होता. अगर शरीर में कुछ लक्षण दिखें तो तुरंत सचेत हो जाना चाहिए. पुरुष में ब्रेस्ट कैंसर. Male Breast Cancer: जन्म के समय हर व्यक्ति में ब्रेस्ट टिश्यू यानी स्तन के टिशू होते हैं. ब्रेस्ट टिश्यू में हजारों मिल्क डक्ट, निप्प और फैट होता है. इसी में दूध बनता है. जब प्यूबर्टी की शुरुआत होती है तो लड़कियों में इसका विकास हो जाता है जबकि लड़के का जब यौवन आरंभ होता है तो ब्रेस्ट टिश्यू डेवलप नहीं करता. लेकिन चूंकि जन्म के समय ब्रेस्ट टिश्यू महिला और पुरुष दोनों लिंग में होते हैं, इसलिए ब्रेस्ट कैंसर दोनों को हो सकता है. इसमें भी कोई संदेह नहीं है कि ब्रेस्ट कैंसर पुरुषों में रेयर ही होता है. अमेरिका जैसे देशों में हर साल करीब 2800 मामले ब्रेस्ट कैंसर के आ जाते हैं. ऐसे में पहले यह जानिए कि ब्रेस्ट कैंसर होता क्यों है. ब्रेस्ट कैंसर के कारणमायो क्लिनिक के मुताबिक अब तक सटीक रूप से यह नहीं पता कि इसका कारण क्या है लेकिन जब कोशिकाओं की संरचना में डीएनए लेवल पर बदलाव होता है तो यही कोशिकाएं कैंसर कोशिका में बदल जाता है. पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर तब शुरू होता है जब ब्रेस्ट टिश्यू की कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव आ जाते हैं. कोशिका का डीएनए यह तय करता है कि उसे क्या करना है. सामान्य कोशिकाओं में डीएनए उन्हें एक निश्चित गति से बढ़ने और विभाजित होने के निर्देश देता है और एक तय समय पर मरने के लिए भी कहता है. लेकिन कैंसर कोशिकाओं में डीएनए के ये निर्देश बदल जाते हैं. ये बदलाव कोशिकाओं को बहुत तेजी से अधिक संख्या में बनने के लिए प्रेरित करते हैं. साथ ही ये कोशिकाएं तब भी जीवित रहती हैं जब सामान्य कोशिकाएं मर जाती हैं. इससे शरीर में असामान्य रूप से अधिक कोशिकाएं जमा हो जाती हैं. ये कैंसर कोशिकाएं मिलकर एक गांठ यानी ट्यूमर बना सकती हैं. यह ट्यूमर बढ़कर आसपास के हेल्दी टिशू को नुकसान पहुंचा सकता है. समय के साथ, कैंसर कोशिकाएं टूटकर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकती हैं. जब कैंसर फैलता है, तो उसे मेटास्टेटिक कैंसर कहा जाता है. ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण निप्पल के पास दर्द-अगर निप्पल के पास दर्द हो और लगातार होने लगे, उसके आसपास की त्वचा में खिंचाव जैसे महसूस हो तो इसे गंभीरता से लें. खासकर अगर दवा से भी आराम न मिले तो तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचना चाहिए. निप्पल के पास गांठ-किसी भी जगह गांठ होना खतरे की घंटी है. अगर निप्पल के पास बहुत ज्यादा हार्डनेस हो गया है, बहुत स्किन तन गया है, स्किन की परत मोटी हो गई है, वहां मस्सा जैसा निकल गया है तो यह ब्रेस्ट कैंसर के संकेत हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर के पास जाएं. ब्रेस्ट के पास स्किन में बदलाव-अगर ब्रेस्ट के पास स्किन में बदलाव हो गया है, अगर वहां गड्ढे पड़ने लगे,डिंपलिंग हो, सिकुड़न या पकरिंग हो, पपड़ी की तरह बनने लगे तो ये सब भी स्तन कैंसर के लक्षण हो सकते हैं. इसे तुरंत दिखाएं. ब्रेस्ट के पास स्किन के रंग में बदलाव-अगर ब्रेस्ट के पास स्किन के रंग में किसी तरह का बदलाव हो, यानी पहले जो स्किन का रंग था उसमें मटमैला हो गया या लाल हो गया या काला हो गया या किसी भी अन्य रंग में बदल गया तो यह ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण हो सकता है. अगर ऐसा दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. निप्पल से डिस्चार्ज होना-अगर पुरुषों के निप्पल से डिस्चार्ज होने लगे या खून निकलने लगे, चिपचिपा पदार्थ निकलने लगे तो देर नहीं करना चाहिए. ये सारे संकेत ब्रेस्ट कैंसर के संकेत होते हैं. ऐसे मामलों में डॉक्टरों से तुरंत दिखाएं. पुरुषों में किन लोगों को ब्रेस्ट कैंसर का खतरापुरुषों में उम्र के साथ ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ता है. यह बीमारी ज्यादातर 60 साल के आसपास के पुरुषों में होने की आशंका होती है. वहीं जो पुरुष प्रोस्टेट कैंसर के लिए हार्मोन थेरेपी या एस्ट्रोजन वाली दवाएं ले रहे हैं उन्हें भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. अगर किसी के परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास है, तो ऐसे लोगों को भी ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम हो सकता है. कुछ लोगों में यह जेनेटिक होता है. ये जीन माता-पिता से बच्चों में जाते हैं और इससे ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है. जिन लोगों को लिवर सिरोसिस बीमारी होती है, उनमें हार्मोन संतुलन बदल जाता है, जिससे जोखिम बढ़ जाता है. मोटापे से शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ जाता है, जो ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ाता है. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 14, 2026, 18:20 IST

नीतीश कुमार ने विदाई नोट लिखकर बिहार में नई भाजपा सरकार का समर्थन किया | राजनीति समाचार

Chennai Super Kings vs Kolkata Knight Riders Live Score: IPL 2026 Match Today Updates From MA Chidambaram Stadium. (Picture Credit: PTI)

आखरी अपडेट:14 अप्रैल, 2026, 18:18 IST जद (यू) प्रमुख नीतीश कुमार ने कहा कि नई भाजपा सरकार बिहार की देखभाल के लिए तैयार है, जो समृद्ध होता रहेगा क्योंकि आने वाले दिनों में बहुत सारे अच्छे काम किए जाएंगे। इससे पहले नीतीश कुमार ने राज्य विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया था. (छवि: पीटीआई/फ़ाइल) बिहार में नई भाजपा सरकार को बागडोर सौंपते हुए, जदयू प्रमुख नीतीश कुमार ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के तुरंत बाद अपने सोशल मीडिया पर एक विदाई नोट लिखा। नीतीश कुमार ने कहा कि नई सरकार बिहार की देखभाल के लिए तैयार है, लेकिन उनका समर्थन और मार्गदर्शन रहेगा और राज्य समृद्ध होता रहेगा। नीतीश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “अब नई सरकार यहां का काम देखेगी। नई सरकार को मेरा पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा। आगे भी बहुत अच्छे काम होंगे और बिहार काफी आगे बढ़ेगा।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 14 अप्रैल, 2026, 15:38 IST समाचार राजनीति ‘नई सरकार को मेरा पूरा सहयोग, मार्गदर्शन मिलेगा’: नीतीश कुमार ने अपने विदाई पोस्ट में कहा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)नीतीश कुमार का इस्तीफा(टी)नीतीश कुमार बिहार(टी)बिहार की नई सरकार(टी)बीजेपी सरकार बिहार(टी)जेडी(यू) मुख्यमंत्री(टी)बिहार की राजनीति(टी)सत्ता परिवर्तन बिहार(टी)नीतीश विदाई नोट

वाराणसी में आतंकियों को फंडिंग में डॉक्टर के घर रेड:बेटे से पूछताछ में जुटी ATS, लैपटॉप-मोबाइल में मिला पाकिस्तान से कनेक्शन

वाराणसी में आतंकियों को फंडिंग में डॉक्टर के घर रेड:बेटे से पूछताछ में जुटी ATS, लैपटॉप-मोबाइल में मिला पाकिस्तान से कनेक्शन

वाराणसी में आतंकियों को फंडिंग करने वाले डॉक्टर के घर पर यूपी-मुंबई ATS और इंटेलिजेंस ब्यूरो की रेड चल रही है। टीम मंगलवार सुबह डॉक्टर के घर पहुंची और उसके मोबाइल-लैपटॉप को कब्जे में लिया। इसके बाद डॉक्टर के घरवालों से पूछताछ की। मोबाइल, लैपटॉप और बैंक अकाउंट की डिटेल में लाखों रुपए के टर्न ओवर की जानकारी मिली है। साथ ही डॉक्टर का पाकिस्तानी लोगों और कश्मीर के संगठनों से कनेक्शन भी मिला है। वह कई संदिग्धों के टच में है। उनके नंबर फोन में सेव मिले हैं। मौके पर आईबी के अधिकारी भी मौजूद हैं। डॉक्टर के घर के बाहर पुलिस फोर्स तैनात है। इस कार्रवाई के पीछे लखनऊ में पकड़े 4 आतंकियों से मिला इनपुट बताया जा रहा है। मामला आदमपुर थाना क्षेत्र का है। 2 तस्वीरें देखिए… अब पढ़िए पूरा मामला वाराणसी के पठानी टोला इलाके के आदमपुर में डॉ. डॉ. आरिफ अंसारी रहता है। डॉ. आरिफ अंसारी बाल रोग विशेषज्ञ हैं और हाजरा हॉस्पिटल चलाता है। उसके 3 भाई साड़ी का कारोबार करते हैं। इसके चलते उन लोगों का अक्सर बाहर आना-जाना लगा रहता है। डॉक्टर आरिफ अंसारी का 20 साल का बेटा अबु बकर NEET की तैयारी कर रहा है। ATS की टीम उससे पूछताछ में जुटी है। अबु बकर के भी मोबाइल और लैपटॉप की जांच की जा रही है। सूत्रों की मानें, तो अबु बकर पर एक कश्मीरी हैंडल से व्हाट्सएप चैट के जरिए बातचीत करने का आरोप है। वह पाकिस्तान के संदिग्ध लोगों के संपर्क में था। डॉक्टर के घर के बाहर पुलिस फोर्स तैनात डॉक्टर के घर पर रेड की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए। इसके बाद डॉक्टर के घर के बाहर और आसपास पुलिस की चौकसी बढ़ा दी गई है। जिस गली में टीम पहुंची है, उसमें स्थानीय लोगों का छोड़कर किसी को नहीं जाने दिया जा रहा है। पुलिस अफसरों ने भी हालात का जायजा लिया। हालांकि, इस मामले में एसीपी कोतवाली विजय प्रताप सिंह और आदमपुर इंस्पेक्टर विमल कुमार मिश्रा ने पुष्टि नहीं की है। रेड के बीच में ही ATS इंस्पेक्टर भारत भूषण डॉक्टर के घर से बाहर निकले। मीडिया के सवालों पर उन्होंने कहा कि हम नहीं कुछ भी बता नहीं सकते। अभी रेड चल रही है। लखनऊ से पकड़े गए संदिग्धों से जुड़ रहे तार 10 अप्रैल को लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन के पास से ATS ने 4 संदिग्ध पकड़े थे। जांच में इन चारों के संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समेत अन्य आतंकी संगठन से होने के संकेत मिले हैं। एजेंसियों को यह भी इनपुट मिला कि मुंबई, लखनऊ और वाराणसी में टेरर फंडिंग के जरिए नेटवर्क सक्रिय किया जा रहा था। इन्हीं इनपुट के आधार पर एटीएस ने वाराणसी में छापेमारी की है। फिलहाल एजेंसियां इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच, कॉल डिटेल, बैंक ट्रांजैक्शन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही हैं। —————————– यह खबर भी पढ़ें… आगरा में BJP नेता का डांसर के साथ VIDEO, होटल संचालक को वसूली के लिए धमकाया आगरा में खुद को भाजपा नेता बताने वाले महिपाल चौधरी का अब होटल में डांसर के साथ वीडियो सामने आया है। इसमें महिपाल कुर्सी पर बैठा दिख रहा। कमरे में दो लड़कियां डांस कर रही हैं। हालांकि, ये वीडियो कब का है। पुलिस इसकी जांच कर रही है। पढ़ें पूरी खबर…

UK में भारतीय मूल की थेरेपिस्ट बर्खास्त:अंग्रेजी न समझ पाने पर नौकरी गई, फॉर्म में गलत जानकारी देने का आरोप

UK में भारतीय मूल की थेरेपिस्ट बर्खास्त:अंग्रेजी न समझ पाने पर नौकरी गई, फॉर्म में गलत जानकारी देने का आरोप

यूके में एक भारतीय मूल की स्पीच एंड लैंग्वेज थेरेपिस्ट साई कीर्तना श्रीपेरंबुदुरु को अंग्रेजी ठीक से न समझ पाने और आवेदन में गलत जानकारी देने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया। कारण यह रहा कि वह मरीजों और सहकर्मियों की बात ठीक से समझ नहीं पा रही थीं। यह मामला जून 2024 का हो, लेकिन इसकी जानकारी अब सामने आई है। र्कीतना ने अक्टूबर 2023 में यॉर्क एंड स्कारबरो टीचिंग हॉस्पिटल्स NHS ट्रस्ट जॉइन किया था। जॉइनिंग के कुछ ही समय बाद सहकर्मियों को पता चला कि वह मरीजों और स्टाफ की अंग्रेजी ठीक से समझ नहीं पा रही थीं। स्पीच थेरेपिस्ट होने के बावजूद उन्हें उच्चारण, व्याकरण और बातचीत समझने में समस्या थी। अंततः जून 2024 में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। अंग्रेजी फर्स्ट लैंग्वेज का दावा गलत निकला आवेदन में कीर्तना ने अंग्रेजी को अपनी पहली भाषा बताया था, लेकिन बाद में रिव्यू मीटिंग में स्वीकार किया कि उनकी मातृभाषा तेलुगु है। बाद में दिसंबर में उन्होंने बताया कि वह नौकरी के साथ-साथ अंग्रेजी सुधारने के लिए क्लास भी ले रही थीं। इस मामले में एक और अहम बात सामने आई कि नौकरी के आवेदन में उन्होंने अंग्रेजी को अपनी ‘फर्स्ट लैंग्वेज’ बताया था। जबकि फॉर्म के नियमों के अनुसार, ‘फर्स्ट लैंग्वेज’ वही मानी जाती है जो व्यक्ति रोजमर्रा की जिंदगी में सबसे ज्यादा इस्तेमाल करता हो। केवल अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करना इसे पहली भाषा नहीं बनाता। आमने-सामने की बातचीत से बचना चाहती थी कीर्तना कीर्तना के मैनेजर ने यह भी बताया कि इंटरव्यू के दौरान उसने चैट बॉक्स के जरिए सवाल पूछने का अनुरोध किया था, यानी आमने-सामने बातचीत से बचना चाहती थीं। इसे असामान्य माना गया, खासकर इसलिए क्योंकि वह उस समय यूके में ही रह रही थीं। अस्पताल ट्रस्ट के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि साई कीर्तना अक्टूबर 2023 से जून 2024 तक काम पर थीं और जून में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। कीर्तना ने इस फैसले को चुनौती दी और कहा कि उनकी पढ़ाई अंग्रेजी में हुई है, इसलिए इसे उनकी पहली भाषा माना जाना चाहिए। लेकिन पैनल ने इस तर्क को नहीं माना। पैनल का कहना था कि उन्होंने नौकरी पाने के लिए गलत जानकारी दी और यह धोखा देने की कोशिश थी। इसके बाद उन्हें रजिस्टर से हटा दिया गया। ट्रिब्यूनल ने क्या कहा आवेदन फॉर्म में साफ लिखा होता है कि “क्या अंग्रेजी आपकी पहली भाषा है?” इसका जवाब ‘हां’ तभी देना चाहिए, जब अंग्रेजी आपकी रोजमर्रा की मुख्य भाषा हो। सिर्फ अंग्रेजी में पढ़ाई करने से यह पहली भाषा नहीं मानी जाती। डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, साई कीर्तना का कहना था कि उन्हें सच में लगता था कि उनकी शिक्षा और पेशेवर काम के संदर्भ में अंग्रेजी को उनकी पहली भाषा माना जा सकता है। उन्होंने पैनल को लिखित में बताया कि उन्हें यह नहीं पता था कि यूके के नियमों के अनुसार “पहली भाषा” का मतलब रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली मुख्य भाषा होता है। सुनवाई के बाद पैनल ने कहा कि यह उनकी अंग्रेजी क्षमता की कमी छिपाने की कोशिश थी और इसे बेईमानी माना गया।

UK में भारतीय मूल की स्पीच एंड लैंग्वेज थेरेपिस्ट बर्खास्त:अंग्रेजी न समझ पाने पर नौकरी गई, फॉर्म में गलत जानकारी देने का आरोप

UK में भारतीय मूल की स्पीच एंड लैंग्वेज थेरेपिस्ट बर्खास्त:अंग्रेजी न समझ पाने पर नौकरी गई, फॉर्म में गलत जानकारी देने का आरोप

यूके में एक भारतीय मूल की स्पीच एंड लैंग्वेज थेरेपिस्ट साई कीर्तना श्रीपेरंबुदुरु को अंग्रेजी ठीक से न समझ पाने और आवेदन में गलत जानकारी देने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया। कारण यह रहा कि वह मरीजों और सहकर्मियों की बात ठीक से समझ नहीं पा रही थीं। यह मामला जून 2024 का हो, लेकिन इसकी जानकारी अब सामने आई है। र्कीतना ने अक्टूबर 2023 में यॉर्क एंड स्कारबरो टीचिंग हॉस्पिटल्स NHS ट्रस्ट जॉइन किया था। जॉइनिंग के कुछ ही समय बाद सहकर्मियों को पता चला कि वह मरीजों और स्टाफ की अंग्रेजी ठीक से समझ नहीं पा रही थीं। स्पीच थेरेपिस्ट होने के बावजूद उन्हें उच्चारण, व्याकरण और बातचीत समझने में समस्या थी। अंततः जून 2024 में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। अंग्रेजी फर्स्ट लैंग्वेज का दावा गलत निकला आवेदन में कीर्तना ने अंग्रेजी को अपनी पहली भाषा बताया था, लेकिन बाद में रिव्यू मीटिंग में स्वीकार किया कि उनकी मातृभाषा तेलुगु है। बाद में दिसंबर में उन्होंने बताया कि वह नौकरी के साथ-साथ अंग्रेजी सुधारने के लिए क्लास भी ले रही थीं। इस मामले में एक और अहम बात सामने आई कि नौकरी के आवेदन में उन्होंने अंग्रेजी को अपनी ‘फर्स्ट लैंग्वेज’ बताया था। जबकि फॉर्म के नियमों के अनुसार, ‘फर्स्ट लैंग्वेज’ वही मानी जाती है जो व्यक्ति रोजमर्रा की जिंदगी में सबसे ज्यादा इस्तेमाल करता हो। केवल अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करना इसे पहली भाषा नहीं बनाता। आमने-सामने की बातचीत से बचना चाहती थी कीर्तना कीर्तना के मैनेजर ने यह भी बताया कि इंटरव्यू के दौरान उसने चैट बॉक्स के जरिए सवाल पूछने का अनुरोध किया था, यानी आमने-सामने बातचीत से बचना चाहती थीं। इसे असामान्य माना गया, खासकर इसलिए क्योंकि वह उस समय यूके में ही रह रही थीं। अस्पताल ट्रस्ट के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि साई कीर्तना अक्टूबर 2023 से जून 2024 तक काम पर थीं और जून में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। कीर्तना ने इस फैसले को चुनौती दी और कहा कि उनकी पढ़ाई अंग्रेजी में हुई है, इसलिए इसे उनकी पहली भाषा माना जाना चाहिए। लेकिन पैनल ने इस तर्क को नहीं माना। पैनल का कहना था कि उन्होंने नौकरी पाने के लिए गलत जानकारी दी और यह धोखा देने की कोशिश थी। इसके बाद उन्हें रजिस्टर से हटा दिया गया। ट्रिब्यूनल ने क्या कहा आवेदन फॉर्म में साफ लिखा होता है कि “क्या अंग्रेजी आपकी पहली भाषा है?” इसका जवाब ‘हां’ तभी देना चाहिए, जब अंग्रेजी आपकी रोजमर्रा की मुख्य भाषा हो। सिर्फ अंग्रेजी में पढ़ाई करने से यह पहली भाषा नहीं मानी जाती। डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, साई कीर्तना का कहना था कि उन्हें सच में लगता था कि उनकी शिक्षा और पेशेवर काम के संदर्भ में अंग्रेजी को उनकी पहली भाषा माना जा सकता है। उन्होंने पैनल को लिखित में बताया कि उन्हें यह नहीं पता था कि यूके के नियमों के अनुसार “पहली भाषा” का मतलब रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली मुख्य भाषा होता है। सुनवाई के बाद पैनल ने कहा कि यह उनकी अंग्रेजी क्षमता की कमी छिपाने की कोशिश थी और इसे बेईमानी माना गया।