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मर्दो में भी होता है ब्रेस्ट कैंसर, मर्दानगी के चक्कर में न करें नजरअंदाज, 5 संकेत दिखें तो तुरंत कराएं इलाज

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Male Breast Cancer: अधिकांश लोगों को लगता है मर्दों में ब्रेस्ट कैंसर नहीं होता है. अगर आपकी भी सोच ऐसी है तो तुरंत इसे दुरुस्त कीजिए. जिस तरह से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होता है, उसी तरह से पुरुषों में भी स्तन कैंसर हो सकता है. यह बात सही है कि पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के मामले कम हैं लेकिन मर्द इससे अछूता नहीं हो सकता. इसलिए मर्दानगी के चक्कर में कभी यह न सोचें कि पुरुषों को ब्रेस्ट कैंसर नहीं होता. अगर शरीर में कुछ लक्षण दिखें तो तुरंत सचेत हो जाना चाहिए.

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पुरुष में ब्रेस्ट कैंसर.

Male Breast Cancer: जन्म के समय हर व्यक्ति में ब्रेस्ट टिश्यू यानी स्तन के टिशू होते हैं. ब्रेस्ट टिश्यू में हजारों मिल्क डक्ट, निप्प और फैट होता है. इसी में दूध बनता है. जब प्यूबर्टी की शुरुआत होती है तो लड़कियों में इसका विकास हो जाता है जबकि लड़के का जब यौवन आरंभ होता है तो ब्रेस्ट टिश्यू डेवलप नहीं करता. लेकिन चूंकि जन्म के समय ब्रेस्ट टिश्यू महिला और पुरुष दोनों लिंग में होते हैं, इसलिए ब्रेस्ट कैंसर दोनों को हो सकता है. इसमें भी कोई संदेह नहीं है कि ब्रेस्ट कैंसर पुरुषों में रेयर ही होता है. अमेरिका जैसे देशों में हर साल करीब 2800 मामले ब्रेस्ट कैंसर के आ जाते हैं. ऐसे में पहले यह जानिए कि ब्रेस्ट कैंसर होता क्यों है.

ब्रेस्ट कैंसर के कारण
मायो क्लिनिक के मुताबिक अब तक सटीक रूप से यह नहीं पता कि इसका कारण क्या है लेकिन जब कोशिकाओं की संरचना में डीएनए लेवल पर बदलाव होता है तो यही कोशिकाएं कैंसर कोशिका में बदल जाता है. पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर तब शुरू होता है जब ब्रेस्ट टिश्यू की कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव आ जाते हैं. कोशिका का डीएनए यह तय करता है कि उसे क्या करना है. सामान्य कोशिकाओं में डीएनए उन्हें एक निश्चित गति से बढ़ने और विभाजित होने के निर्देश देता है और एक तय समय पर मरने के लिए भी कहता है. लेकिन कैंसर कोशिकाओं में डीएनए के ये निर्देश बदल जाते हैं. ये बदलाव कोशिकाओं को बहुत तेजी से अधिक संख्या में बनने के लिए प्रेरित करते हैं. साथ ही ये कोशिकाएं तब भी जीवित रहती हैं जब सामान्य कोशिकाएं मर जाती हैं. इससे शरीर में असामान्य रूप से अधिक कोशिकाएं जमा हो जाती हैं. ये कैंसर कोशिकाएं मिलकर एक गांठ यानी ट्यूमर बना सकती हैं. यह ट्यूमर बढ़कर आसपास के हेल्दी टिशू को नुकसान पहुंचा सकता है. समय के साथ, कैंसर कोशिकाएं टूटकर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकती हैं. जब कैंसर फैलता है, तो उसे मेटास्टेटिक कैंसर कहा जाता है.

ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण

  • निप्पल के पास दर्द-अगर निप्पल के पास दर्द हो और लगातार होने लगे, उसके आसपास की त्वचा में खिंचाव जैसे महसूस हो तो इसे गंभीरता से लें. खासकर अगर दवा से भी आराम न मिले तो तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचना चाहिए.
  • निप्पल के पास गांठ-किसी भी जगह गांठ होना खतरे की घंटी है. अगर निप्पल के पास बहुत ज्यादा हार्डनेस हो गया है, बहुत स्किन तन गया है, स्किन की परत मोटी हो गई है, वहां मस्सा जैसा निकल गया है तो यह ब्रेस्ट कैंसर के संकेत हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर के पास जाएं.
  • ब्रेस्ट के पास स्किन में बदलाव-अगर ब्रेस्ट के पास स्किन में बदलाव हो गया है, अगर वहां गड्ढे पड़ने लगे,डिंपलिंग हो, सिकुड़न या पकरिंग हो, पपड़ी की तरह बनने लगे तो ये सब भी स्तन कैंसर के लक्षण हो सकते हैं. इसे तुरंत दिखाएं.
  • ब्रेस्ट के पास स्किन के रंग में बदलाव-अगर ब्रेस्ट के पास स्किन के रंग में किसी तरह का बदलाव हो, यानी पहले जो स्किन का रंग था उसमें मटमैला हो गया या लाल हो गया या काला हो गया या किसी भी अन्य रंग में बदल गया तो यह ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण हो सकता है. अगर ऐसा दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
  • निप्पल से डिस्चार्ज होना-अगर पुरुषों के निप्पल से डिस्चार्ज होने लगे या खून निकलने लगे, चिपचिपा पदार्थ निकलने लगे तो देर नहीं करना चाहिए. ये सारे संकेत ब्रेस्ट कैंसर के संकेत होते हैं. ऐसे मामलों में डॉक्टरों से तुरंत दिखाएं.

पुरुषों में किन लोगों को ब्रेस्ट कैंसर का खतरा
पुरुषों में उम्र के साथ ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ता है. यह बीमारी ज्यादातर 60 साल के आसपास के पुरुषों में होने की आशंका होती है. वहीं जो पुरुष प्रोस्टेट कैंसर के लिए हार्मोन थेरेपी या एस्ट्रोजन वाली दवाएं ले रहे हैं उन्हें भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. अगर किसी के परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास है, तो ऐसे लोगों को भी ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम हो सकता है. कुछ लोगों में यह जेनेटिक होता है. ये जीन माता-पिता से बच्चों में जाते हैं और इससे ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है. जिन लोगों को लिवर सिरोसिस बीमारी होती है, उनमें हार्मोन संतुलन बदल जाता है, जिससे जोखिम बढ़ जाता है. मोटापे से शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ जाता है, जो ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ाता है.

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Lakshmi Narayan

18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें

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Male Breast Cancer: अधिकांश लोगों को लगता है मर्दों में ब्रेस्ट कैंसर नहीं होता है. अगर आपकी भी सोच ऐसी है तो तुरंत इसे दुरुस्त कीजिए. जिस तरह से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होता है, उसी तरह से पुरुषों में भी स्तन कैंसर हो सकता है. यह बात सही है कि पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के मामले कम हैं लेकिन मर्द इससे अछूता नहीं हो सकता. इसलिए मर्दानगी के चक्कर में कभी यह न सोचें कि पुरुषों को ब्रेस्ट कैंसर नहीं होता. अगर शरीर में कुछ लक्षण दिखें तो तुरंत सचेत हो जाना चाहिए.

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पुरुष में ब्रेस्ट कैंसर.

Male Breast Cancer: जन्म के समय हर व्यक्ति में ब्रेस्ट टिश्यू यानी स्तन के टिशू होते हैं. ब्रेस्ट टिश्यू में हजारों मिल्क डक्ट, निप्प और फैट होता है. इसी में दूध बनता है. जब प्यूबर्टी की शुरुआत होती है तो लड़कियों में इसका विकास हो जाता है जबकि लड़के का जब यौवन आरंभ होता है तो ब्रेस्ट टिश्यू डेवलप नहीं करता. लेकिन चूंकि जन्म के समय ब्रेस्ट टिश्यू महिला और पुरुष दोनों लिंग में होते हैं, इसलिए ब्रेस्ट कैंसर दोनों को हो सकता है. इसमें भी कोई संदेह नहीं है कि ब्रेस्ट कैंसर पुरुषों में रेयर ही होता है. अमेरिका जैसे देशों में हर साल करीब 2800 मामले ब्रेस्ट कैंसर के आ जाते हैं. ऐसे में पहले यह जानिए कि ब्रेस्ट कैंसर होता क्यों है.

ब्रेस्ट कैंसर के कारण
मायो क्लिनिक के मुताबिक अब तक सटीक रूप से यह नहीं पता कि इसका कारण क्या है लेकिन जब कोशिकाओं की संरचना में डीएनए लेवल पर बदलाव होता है तो यही कोशिकाएं कैंसर कोशिका में बदल जाता है. पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर तब शुरू होता है जब ब्रेस्ट टिश्यू की कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव आ जाते हैं. कोशिका का डीएनए यह तय करता है कि उसे क्या करना है. सामान्य कोशिकाओं में डीएनए उन्हें एक निश्चित गति से बढ़ने और विभाजित होने के निर्देश देता है और एक तय समय पर मरने के लिए भी कहता है. लेकिन कैंसर कोशिकाओं में डीएनए के ये निर्देश बदल जाते हैं. ये बदलाव कोशिकाओं को बहुत तेजी से अधिक संख्या में बनने के लिए प्रेरित करते हैं. साथ ही ये कोशिकाएं तब भी जीवित रहती हैं जब सामान्य कोशिकाएं मर जाती हैं. इससे शरीर में असामान्य रूप से अधिक कोशिकाएं जमा हो जाती हैं. ये कैंसर कोशिकाएं मिलकर एक गांठ यानी ट्यूमर बना सकती हैं. यह ट्यूमर बढ़कर आसपास के हेल्दी टिशू को नुकसान पहुंचा सकता है. समय के साथ, कैंसर कोशिकाएं टूटकर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकती हैं. जब कैंसर फैलता है, तो उसे मेटास्टेटिक कैंसर कहा जाता है.

ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण

  • निप्पल के पास दर्द-अगर निप्पल के पास दर्द हो और लगातार होने लगे, उसके आसपास की त्वचा में खिंचाव जैसे महसूस हो तो इसे गंभीरता से लें. खासकर अगर दवा से भी आराम न मिले तो तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचना चाहिए.
  • निप्पल के पास गांठ-किसी भी जगह गांठ होना खतरे की घंटी है. अगर निप्पल के पास बहुत ज्यादा हार्डनेस हो गया है, बहुत स्किन तन गया है, स्किन की परत मोटी हो गई है, वहां मस्सा जैसा निकल गया है तो यह ब्रेस्ट कैंसर के संकेत हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर के पास जाएं.
  • ब्रेस्ट के पास स्किन में बदलाव-अगर ब्रेस्ट के पास स्किन में बदलाव हो गया है, अगर वहां गड्ढे पड़ने लगे,डिंपलिंग हो, सिकुड़न या पकरिंग हो, पपड़ी की तरह बनने लगे तो ये सब भी स्तन कैंसर के लक्षण हो सकते हैं. इसे तुरंत दिखाएं.
  • ब्रेस्ट के पास स्किन के रंग में बदलाव-अगर ब्रेस्ट के पास स्किन के रंग में किसी तरह का बदलाव हो, यानी पहले जो स्किन का रंग था उसमें मटमैला हो गया या लाल हो गया या काला हो गया या किसी भी अन्य रंग में बदल गया तो यह ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण हो सकता है. अगर ऐसा दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
  • निप्पल से डिस्चार्ज होना-अगर पुरुषों के निप्पल से डिस्चार्ज होने लगे या खून निकलने लगे, चिपचिपा पदार्थ निकलने लगे तो देर नहीं करना चाहिए. ये सारे संकेत ब्रेस्ट कैंसर के संकेत होते हैं. ऐसे मामलों में डॉक्टरों से तुरंत दिखाएं.

पुरुषों में किन लोगों को ब्रेस्ट कैंसर का खतरा
पुरुषों में उम्र के साथ ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ता है. यह बीमारी ज्यादातर 60 साल के आसपास के पुरुषों में होने की आशंका होती है. वहीं जो पुरुष प्रोस्टेट कैंसर के लिए हार्मोन थेरेपी या एस्ट्रोजन वाली दवाएं ले रहे हैं उन्हें भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. अगर किसी के परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास है, तो ऐसे लोगों को भी ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम हो सकता है. कुछ लोगों में यह जेनेटिक होता है. ये जीन माता-पिता से बच्चों में जाते हैं और इससे ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है. जिन लोगों को लिवर सिरोसिस बीमारी होती है, उनमें हार्मोन संतुलन बदल जाता है, जिससे जोखिम बढ़ जाता है. मोटापे से शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ जाता है, जो ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ाता है.

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18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें

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