ग्लोबल बॉक्स ऑफिस:‘द सुपर मारियो गैलेक्सी’ बनी 2026 की सबसे बड़ी फिल्म; दुनियाभर में कमाए ₹5,200 करोड़

हॉलीवुड में 2026 की बॉक्स ऑफिस रेस में ‘द सुपर मारियो गैलेक्सी’ ने बाजी मार ली है। मारियो फ्रेंचाइज की इस नई फिल्म ने दुनियाभर में 629 मिलियन डॉलर (लगभग 5,200 करोड़ रुपए) की कमाई के साथ साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म का खिताब अपने नाम कर लिया है और अब यह 1 बिलियन डॉलर क्लब की ओर तेजी से बढ़ रही है। फिल्म ने रिलीज के दूसरे वीकेंड में ही जबरदस्त रफ्तार पकड़ी। अमेरिका और कनाडा के 4,284 थिएटर्स से इसे 69 मिलियन डॉलर करीब 570 करोड़ रुपए) की कमाई मिली, जिससे इसका घरेलू कलेक्शन 308.1 मिलियन डॉलर (लगभग 2,550 करोड़ रुपए) तक पहुंच गया। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में भी फिल्म ने 81 देशों से 83.5 मिलियन डॉलर (करीब 690 करोड़ रुपए) जुटाकर अपनी ग्लोबल पकड़ मजबूत कर ली है। हालांकि, फ्रेंचाइज की पिछली फिल्म ‘द सुपर मारियो ब्रॉस’ ने दूसरे वीकेंड तक 2,930 करोड़ रुपए लगभग की घरेलू कमाई की थी। आखिर में 10,800 करोड़ का आंकड़ा पार किया था।
शाजापुर में जर्जर पीएम रूम में हो रहा पोस्टमार्टम:डॉक्टरों को हादसे का खतरा, कुंडी टूटने से गेट पर हथकड़ी का ताला

शाजापुर जिले के मोहन बड़ोदिया में बना पोस्टमार्टम रूम खराब हालत में है। यहां की बिल्डिंग इतनी जर्जर हो चुकी है कि डॉक्टरों को डर के साये में काम करना पड़ता है। सुरक्षा का आलम यह है कि पीएम रूम के गेट पर ताला लगाने के लिए पुलिस को हथकड़ी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। पीएम रूम की दीवारें इतनी कमजोर हो गई हैं कि वे कभी भी गिर सकती हैं। इसके आसपास सफाई का नामोनिशान नहीं है और भारी बदबू फैली रहती है। खुले में ग्लव्स, खराब कपड़े और खून से सना मेडिकल कचरा पड़ा रहता है, जिससे बीमारी फैलने का डर है। बड़ी बात यह है कि इसी के पास पीने के पानी की टंकी भी बनी हुई है। नई बिल्डिंग की मांग अब तक अधूरी स्थानीय निवासी दीपक जैन ने बताया कि पीएम रूम की हालत सुधारने या नया बनवाने के लिए कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। बीजेपी मंडल अध्यक्ष जगदीश पाल का कहना है कि यह बहुत पुराना अस्पताल है और फिलहाल कोई और जगह न होने की वजह से इसी जर्जर कमरे में काम चलाना पड़ रहा है। उन्होंने जल्द ही नए पीएम रूम के लिए बड़े अधिकारियों से बात करने का भरोसा दिया है। अधिकारियों का क्या कहना है? बीएमओ डॉ. आर.सी. चक्रवर्ती ने बताया कि उनसे पहले के अधिकारियों ने भी इस समस्या के बारे में ऊपर जानकारी दी थी। उन्होंने कहा कि वे एक बार फिर बड़े अफसरों को इस स्थिति के बारे में बताएंगे ताकि जल्द ही नई व्यवस्था हो सके।
बंगाल में सांसद भूचाल: टीएमसी का हमला- ईडी बनी ‘बेहद हताश’, बीजेपी-वामपंथी बोले- गठबंधन का नेटवर्क शामिल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक 10 दिन पहले I-PAC के संस्थापक विनेश चंदेल की गर्लफ्रेंड ने राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के खिलाफ इस कार्रवाई को लेकर एक तरफ जहां लोकतंत्र पर हमला बोल रही है, वहीं बीजेपी और वाम दल इसे मजबूत करने के सख्त कदम दे रहे हैं। ऐसे में इस मामले में अब सिर्फ कानूनी जांच नहीं, बल्कि निर्वाची जंग का बड़ा भुगतान हो चुका है। एडी ने 13 अप्रैल को विनेश चंदेल को कथित कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। 13 अप्रैल की शाम को ही दिल्ली की अदालत ने उन्हें 10 दिन की एचडी कस्टडी में भेज दिया। एजेंसी का आरोप है कि I-PAC के माध्यम से करोड़ों रुपये की देनदारी लेन-देन, दिवालियापन चैनल और अनएकाउंटेड कैश का इस्तेमाल किया गया। जांच के अनुसार, चंदेल ने कथित तौर पर फंडों को दो मानदंडों में विभाजित किया – बैंकिंग और कैश – में बैंकर सिस्टम में निवेश और निवेश खर्च और सार्वजनिक प्रसार को प्रभावित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया। एचडी का दावा है कि एनसिकॉर्ड लोन से फर्जी तरीके से करीब 3.5 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की कोशिश की गई। ब्रह्मांड का हमला- यह विचारधारा हैइस कार्रवाई पर अनैच्छिक ने केंद्र सरकार और एचडीएफसी पर सीधा हमला बोला है। पार्टी नेता डेरेक ओब्रायन ने कहा, ‘हम विनेश चंदेल की रिहाई और बिना शर्त रिलीज की मांग कर रहे हैं।’ हम मांग करते हैं कि चुनाव से पहले बंगाल से केंद्रीय आरक्षण को हटाया जाए.’ उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘जिस ऑर्गनाइजेशन को पहले डॉक्टर ने कहा था, उसने कल रात अपना नया नाम रख लिया है- बेहद हताश। मतदान से 10 दिन पहले यह कानून का पालन नहीं, बल्कि बेरोजगारी है।’ डेरेक ओ’ब्रायन ने एचडी की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘हम पहले भी कह चुके हैं और फिर मूर्ति-पीएमएलए के तहत सिर्फ 0.1 प्रतिशत मामलों में सजा होती है। 25 में 23 से 23 सुपरस्टार्स लीडर पर केस हैं, लेकिन जैसे ही बीजेपी में शामिल होते हैं, उन्हें ‘निरमा’ मिल जाता है और सब साफ हो जाते हैं। यह एक राजनीतिक उपकरण है, जिसे सभी जानते हैं।’ अभिषेक बनर्जी का युद्ध- डर का मोहरा बना हुआ हैलोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया गया लोकतंत्र के राष्ट्रीय महासचिव महासभा ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने कहा, ‘बंगाल चुनाव से 10 दिन पहले I-PAC के सह-संस्थापक विनेश चंदेल की गर्लफ्रेंड सिर्फ पार्टिसिपेट नहीं है, यह अध्येता के मैदान की पूरी अवधारणा को हिला देती है।’ उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘अगर आप कलाकारों के साथ काम करते हैं, तो आप अगला उत्पाद बन सकते हैं। यह लोकतंत्र नहीं, यह लोकतंत्र की राजनीति है।’अभिषेक बैंच ने गांगुली पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘जिन लोगों पर गंभीर गरीबों के आरोप हैं, वे जैसे ही पाला बंगले हैं, उन्हें संरक्षण मिल जाता है, जबकि बाकी लोगों को राजनीतिक सुविधा के दायरे से बाहर कर दिया जाता है।’ जनता अब सब देख रही है।’ बीजेपी और वाम का पलटवार- समर्थकों का नेटवर्क संपर्कजहां कश्मीर इसे साजिश के खिलाफ बता रही है, वहीं भाजपा और वाम आश्रम ने इस अपराधी को बंधक बनाने की बड़ी कार्रवाई बताई है। बिहार के मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा, ‘आपने देखा होगा कि मुख्यमंत्री ममता दीदी कैसे I-PAC के पास पहुंच गईं, संवैधानिक संविधान को भंग कर दिया गया, जांच के दौरान अधिकारियों से दस्तावेज़ ले लिया गया। अब उनका असली रंग सामने आ गया है. यह सारा सामान मित्रता के संरक्षण में हो रहा था। ‘बंगाल की जनता को लूटा जा रहा था।’ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया, ‘I-PAC के राजनीतिक सलाहकार के नाम पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का नाम शामिल हो गया है। यह कंसल्टेंसी सिर्फ एक दिखावा है। ये लोग अलौकिक के काले धन को छिपाते और बचाते हैं। आज कोल ऑर्केस्ट्रा से सीधा संबंध सामने आया है। जांच आगे बढ़ें और कई लोग गिरफ़्तार होंगे।’ सीपीआई (एम) नेता बिकाश रंजन भट्टाचार्य ने कहा, ‘आई-पीएसी क्लासिक के लिए एक शेल कंपनी है, जिसके जरिए अलग-अलग तरह के सेलेब्रिटी पैसे को इधर-उधर कर दिया जाता है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री ने डीडी को रोकने की कोशिश के दौरान जांच की। अभिषेक बनर्जी और उनके सहयोगी ममता बनर्जी के समर्थक हैं और वे किसी भी पद पर निर्वाचित से मठाधीश हैं।’ एचडी की कार्रवाई क्यों? I-PAC के सह-संस्थापक विनेश चंदेल को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग और कथित आरोपी लेन-डेन मामले में गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद दिल्ली की अदालत ने उन्हें 10 दिन की मोहलत में भेज दिया। चंदेल, जो एनएलआईयू भोपाल से लॉ के ग्रेजुएट हैं और कंपनी में 33 प्रतिशत शेयरधारक हैं, शाम 7.45 बजे पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया और देर रात कोर्ट में पेश किया गया। यह कार्रवाई 28 मार्च को पीएमएलए केस के तहत दर्ज की गई, जो दिल्ली पुलिस की एफआईआर पर आधारित है। आरोप है कि I-PAC ने फर्जी अकाउंटिंग और अनएकाउंटेड फंडों के माध्यम से फाइनेंस कंपनियों को छुपाया। डी.एच.डी. के अनुसार, चंदेल के नेतृत्व वाली कंपनी ने फंडों को कैश चैनलों में बांटकर उनकी असली प्रकृति छिपाई और करीब 3.5 करोड़ रुपए के फर्जी लोन के रूप में सिस्टम में डाला। एजेंसी का दावा है कि इसमें मनी लॉन्ड्रिंग खर्च और जनमत को प्रभावित करने का इस्तेमाल किया गया, जबकि कुल 50 करोड़ रुपये तक मनी लॉन्ड्रिंग का खतरा है। प्रोटोटाइप के दौरान सार्वभौम पुरातत्व की कोशिश के आरोप भी लगे हैं. वहीं बचाव पक्ष ने इसे चुनाव से पहले राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई बताया है। जांच या राजनीतिक रणनीति?इस पूरी घटना पर कई बड़े सवाल नीचे दिए गए हैं। क्या यह कार्रवाई कानून के तहत आवश्यक जांच है, या फिर चुनाव से पहले नामांकन की रणनीति को पूरा करना है? एक तरफ के गंभीर आरोप हैं-हवाला, फर्जी फंडिंग और करोड़ों के लेन-देन। दूसरे पक्ष का आरोप है कि विचारधारा का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। यह भी पढ़ें:-एक्सक्लूसिव: ‘ईसीआई के खिलाफ दायर जनहित याचिका’, चुनाव आयोग ने क्यों भड़के असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी(टी)टीएमसी(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव
हॉलीवुड एक्टर जॉन सीना ने आशा भोसले को श्रद्धांजलि दी:मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम बोले- संगीत जगत का बड़ा नुकसान हुआ

हॉलीवुड एक्टर और पूर्व रेसलर जॉन सीना ने सिंगर आशा भोसले को श्रद्धांजलि दी है। सीना ने सोमवार को अपने इंस्टाग्राम पर आशा भोसले की एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वह स्टेज पर परफॉर्म करती नजर आ रही हैं। जॉन सीना की फिल्म हेड्स ऑफ स्टेट की को-स्टार प्रियंका चोपड़ा ने पोस्ट पर कमेंट करते हुए आशा भोसले को ‘क्वीन’ बताया। मलेशिया के प्रधानमंत्री ने भी दुख जताया वहीं, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने महान सिंगर आशा भोसले के निधन पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने इसे संगीत और संस्कृति की दुनिया के लिए बहुत बड़ा नुकसान बताया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि आशा भोसले की आवाज ने कई पीढ़ियों को जोड़ा। उन्होंने हजारों गानों के जरिए भावनाएं, परंपराएं और कहानियां दुनिया तक पहुंचाईं। उनकी आवाज में खास जादू था, जिसने दुनियाभर के लोगों के दिलों को छुआ। उन्होंने यह भी कहा कि लता मंगेशकर की छोटी बहन होने के बावजूद आशा भोसले ने अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने हमेशा कुछ नया करने की कोशिश की और अपनी खास स्टाइल से लोगों के बीच बनी रहीं। अनवर इब्राहिम ने यह भी कहा कि मलेशिया की ओर से उनके परिवार और चाहने वालों के प्रति गहरी संवेदनाएं हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आशा भोसले की विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
Muzarabani Banned From PSL For IPL Move; KKR Sign Player

लाहौर2 मिनट पहले कॉपी लिंक जिम्बाब्वे के तेज गेंदबाज ब्लेसिंग मुजरबानी पर पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) ने 2 साल का बैन लगाया। उन्होंने PSL फ्रेंचाइजी से करार होने के बावजूद इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में खेलने का फैसला किया था। मुजरबानी को PSL टीम इस्लामाबाद यूनाइटेड ने रिप्लेसमेंट प्लेयर के तौर पर साइन किया था। बाद में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) से ऑफर मिलने पर उन्होंने PSL से नाम वापस ले लिया। PSL ने कहा कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट में पारदर्शिता और प्रोफेशनलिज्म जरूरी है। पहले से किए गए करार के रहते दूसरी लीग से जुड़ना नियमों के खिलाफ है। लीग के अनुसार, ऐसे मामलों को नजरअंदाज करने से फ्रेंचाइजी और हितधारकों का भरोसा कमजोर होता है। इसलिए 2 साल का बैन लगाया गया। मुजरबानी ने IPL में 2 मैच खेले हैं। उन्होंने ईडन गार्डन्स में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 4 विकेट लिए हैं। इससे पहले वह टी20 वर्ल्ड कप में अपने प्रदर्शन से प्रभावित कर चुके हैं। कॉर्बिन बॉश पर एक साल का प्रतिबंध लगाया गया था मुजरबानी पहले खिलाड़ी नहीं हैं, जिनके खिलाफ एग्रीमेंट तोड़ने पर लीगल एक्शन हुआ है। पिछले साल साउथ अफ्रीका के कॉर्बिन बॉश ने पाकिस्तानी लीग में पेशावर जालमी के साथ समझौता किया था। फिर बॉश एक चोटिल खिलाड़ी की जगह मुंबई इंडियंस से जुड़े थे। उन्हें एक सीजन के लिए PSL से प्रतिबंधित किया गया था। बॉश ने पाकिस्तानी बोर्ड से माफी मांगी थी और बोर्ड ने उनसे हर्जाने की मांग की थी। रहमान की जगह KKR से जुड़े थे मुजरबानी को कोलकाता नाइट राइडर्स ने बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान के रिप्लेसमेंट के रूप में अपने साथ जोड़ा था। रहमान को BCCI के निर्देश के बाद फ्रेंचाइजी ने रिलीज कर दिया था। टी-20 इंटरनेशनल में मुजरबानी का प्रदर्शन मेंडिस और ओवन ने भी PSL छोड़ा था इसी तरह श्रीलंका के कुसल मेंडिस और ऑस्ट्रेलिया के मिचेल ओवन ने पेशावर जालमी के लिए कुछ मैच खेले थे। पिछले साल मई में भारत-पाकिस्तान तनाव के कारण लीग कुछ दिनों के लिए स्थगित हुई। इसके बाद दोनों खिलाड़ी IPL से जुड़ गए थे। ————————————————– मुजरबानी से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… जिम्बाब्वे के ब्लेसिंग मुजरबानी KKR की टीम में शामिल, फ्रेंचाइजी ने IPL 2026 से पहले साइन किया कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने IPL-2026 से पहले जिम्बाब्वे के तेज गेंदबाज ब्लेसिंग मुजरबानी को अपनी टीम में शामिल किया है। फ्रेंचाइजी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। 29 साल के इस तेज गेंदबाज ने टी-20 वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे की ओर से 13 विकेट झटके थे। वे अपनी टीम के टॉप विकेट टेकर्स रहे हैं। जिम्बाब्वे की टीम सुपर-8 स्टेज तक पहुंची थी। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
रणवीर सिंह ने क्या ध्रुव राठी को किया रोस्ट:धुरंधर की आलोचना पर पोस्टर के जरिए दिया जवाब; ससुर के साथ पहली बार एड में दिखे

रणवीर सिंह इन दिनों अपनी फिल्मों ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ की सफलता के बाद सुर्खियों में हैं। अब एक्टर पहली बार अपने ससुर और पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण के साथ एक विज्ञापन में नजर आए हैं। लेकिन इसकी चर्चा की वजह सिर्फ ससुर-दामाद की जोड़ी नहीं है। वीडियो के बैकग्राउंड में एक फिल्म का पोस्टर लगा है। पोस्टर पर रणवीर सिंह की फोटो है और फिल्म का नाम ‘बवंडर: द टॉरनेडो’ (Bavandar: The Tornado) लिखा है। फैंस का दावा है कि इस विज्ञापन के जरिए रणवीर ने यूट्यूबर ध्रुव राठी पर निशाना साधा है। दरअसल, ध्रुव राठी ने रणवीर की फिल्म ‘धुरंधर’ की आलोचना करते हुए अपने वीडियो में एक काल्पनिक फिल्म ‘ऑपरेशन बवंडर’ का नाम लिया था। पोस्टर के जरिए ध्रुव राठी पर तंज RuPay के इस कमर्शियल में रणवीर सिंह और प्रकाश पादुकोण पेमेंट के फायदों पर बात कर रहे हैं। एक सीन में दोनों थिएटर में बैठे हैं, जहां बैकग्राउंड में एक फिल्म का पोस्टर लगा है। पोस्टर पर रणवीर सिंह की फोटो है और फिल्म का नाम ‘बवंडर: द टॉरनेडो’ (Bavandar: The Tornado) लिखा है। फैंस ने तुरंत इसे ध्रुव राठी से जोड़ दिया। फैंस ने पकड़ी ‘पीक डिटेलिंग’ सोशल मीडिया यूजर्स विज्ञापन की बारीकियों की तारीफ कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “रणवीर ने ध्रुव राठी के बवंडर वाले जोक को उन्हीं पर पलट दिया है, यह कमाल की डिटेलिंग है।” विज्ञापन में रणवीर अपने ससुर को ‘पप्पा’ कहते दिखते हैं। बता दें कि दीपिका पादुकोण भी अपने पिता को इसी नाम से बुलाती हैं। एक अन्य सीन में रणवीर हाथ में यूनिकॉर्न पकड़े हैं, जिसे फैंस उनके ‘गर्ल डैड’ (बेटी के पिता) होने से जोड़कर देख रहे हैं। ध्रुव राठी ने बताया था ‘चुनावी विज्ञापन’ यूट्यूबर ध्रुव राठी ने अपने पिछले वीडियो में फिल्म ‘धुरंधर’ और इसके सीक्वल को सत्ताधारी पार्टी का प्रोपेगैंडा बताया था। ध्रुव ने कहा था कि ‘धुरंधर 2’ मनोरंजन के लिए नहीं बनी है, बल्कि यह बीजेपी का सबसे महंगा चुनावी विज्ञापन है, जिसे देखने के लिए दर्शक 500 रुपए दे रहे हैं। उन्होंने फिल्म में नोटबंदी को सही दिखाने के दावों पर भी सवाल उठाए थे।
रणवीर सिंह ने क्या ध्रुव राठी को किया रोस्ट:धुरंधर की आलोचना पर पोस्टर के जरिए दिया जवाब; ससुर के साथ पहली बार एड में दिखे

रणवीर सिंह इन दिनों अपनी फिल्मों ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ की सफलता के बाद सुर्खियों में हैं। अब एक्टर पहली बार अपने ससुर और पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण के साथ एक विज्ञापन में नजर आए हैं। लेकिन इसकी चर्चा की वजह सिर्फ ससुर-दामाद की जोड़ी नहीं है। वीडियो के बैकग्राउंड में एक फिल्म का पोस्टर लगा है। पोस्टर पर रणवीर सिंह की फोटो है और फिल्म का नाम ‘बवंडर: द टॉरनेडो’ (Bavandar: The Tornado) लिखा है। फैंस का दावा है कि इस विज्ञापन के जरिए रणवीर ने यूट्यूबर ध्रुव राठी पर निशाना साधा है। दरअसल, ध्रुव राठी ने रणवीर की फिल्म ‘धुरंधर’ की आलोचना करते हुए अपने वीडियो में एक काल्पनिक फिल्म ‘ऑपरेशन बवंडर’ का नाम लिया था। पोस्टर के जरिए ध्रुव राठी पर तंज RuPay के इस कमर्शियल में रणवीर सिंह और प्रकाश पादुकोण पेमेंट के फायदों पर बात कर रहे हैं। एक सीन में दोनों थिएटर में बैठे हैं, जहां बैकग्राउंड में एक फिल्म का पोस्टर लगा है। पोस्टर पर रणवीर सिंह की फोटो है और फिल्म का नाम ‘बवंडर: द टॉरनेडो’ (Bavandar: The Tornado) लिखा है। फैंस ने तुरंत इसे ध्रुव राठी से जोड़ दिया। फैंस ने पकड़ी ‘पीक डिटेलिंग’ सोशल मीडिया यूजर्स विज्ञापन की बारीकियों की तारीफ कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “रणवीर ने ध्रुव राठी के बवंडर वाले जोक को उन्हीं पर पलट दिया है, यह कमाल की डिटेलिंग है।” विज्ञापन में रणवीर अपने ससुर को ‘पप्पा’ कहते दिखते हैं। बता दें कि दीपिका पादुकोण भी अपने पिता को इसी नाम से बुलाती हैं। एक अन्य सीन में रणवीर हाथ में यूनिकॉर्न पकड़े हैं, जिसे फैंस उनके ‘गर्ल डैड’ (बेटी के पिता) होने से जोड़कर देख रहे हैं। ध्रुव राठी ने बताया था ‘चुनावी विज्ञापन’ यूट्यूबर ध्रुव राठी ने अपने पिछले वीडियो में फिल्म ‘धुरंधर’ और इसके सीक्वल को सत्ताधारी पार्टी का प्रोपेगैंडा बताया था। ध्रुव ने कहा था कि ‘धुरंधर 2’ मनोरंजन के लिए नहीं बनी है, बल्कि यह बीजेपी का सबसे महंगा चुनावी विज्ञापन है, जिसे देखने के लिए दर्शक 500 रुपए दे रहे हैं। उन्होंने फिल्म में नोटबंदी को सही दिखाने के दावों पर भी सवाल उठाए थे।
सम्राट चौधरी चुने गए बीजेपी विधायक दल के नेता, कल लेंगे बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:14 अप्रैल, 2026, 16:10 IST बीजेपी नेता सम्राट चौधरी का नामांकन कुछ ही देर में लोकभवन में पेश किया जाएगा डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी बिहार के पहले बीजेपी सीएम होंगे. (छवि: पीटीआई/फ़ाइल) मंगलवार को जदयू प्रमुख नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार हैं। चौधरी को भाजपा विधायक दल के नेता के रूप में चुना गया, और उनका नामांकन शीघ्र ही लोक भवन में प्रस्तुत किया जाएगा। बीजेपी के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, चौधरी बुधवार 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे सीएम पद की शपथ लेंगे. चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 14 अप्रैल, 2026, 16:10 IST समाचार राजनीति सम्राट चौधरी भाजपा विधायक दल के नेता चुने गये, कल बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री(टी)बिहार के उपमुख्यमंत्री(टी)बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री(टी)नीतीश कुमार का इस्तीफा(टी)बीजेपी विधायक दल के नेता(टी)लोकभवन शपथ समारोह(टी)बिहार की राजनीति(टी)जेडी(यू) और बीजेपी गठबंधन
गठबंधन से बाहर निकलने की कलाबाज़ी: क्या आख़िरकार नीतीश कुमार का यू-टर्न ख़त्म हो गया है? | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:14 अप्रैल, 2026, 16:04 IST 14 अप्रैल को बिहार के सीएम पद से नीतीश कुमार का इस्तीफा उस व्यक्ति के लिए एक युग का अंत है, जिसने प्रसिद्ध रूप से राजनीतिक ‘यू-टर्न’ को अस्तित्व की रणनीति में बदल दिया। नीतीश कुमार की विरासत वैचारिक स्थिरता पर अस्तित्व की विजय में एक मास्टरक्लास है। (फ़ाइल तस्वीर/पीटीआई) जनता दल (यूनाइटेड) के अनुभवी नेता और बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नीतीश कुमार आखिरकार अपनी अप्रत्याशितता से परिभाषित करियर में एक निश्चित चौराहे पर पहुंच गए हैं। 14 अप्रैल को सीएम पद से उनका इस्तीफा उस व्यक्ति के लिए एक युग के अंत का प्रतीक है, जिसने प्रसिद्ध रूप से राजनीतिक “यू-टर्न” को अस्तित्व की रणनीति में बदल दिया। दो दशकों में, कुमार ने समय-समय पर गठबंधनों को बदलते हुए भारतीय गठबंधन राजनीति के विश्वासघाती पानी को पार किया, जिससे उन्हें “पलटू राम” उपनाम मिला। हालाँकि, यह अंतिम प्रस्थान बताता है कि बिहार की राजनीति का “काज” अंततः अपने यांत्रिक धीरज की सीमा तक पहुँच गया है। नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा क्यों दिया है? नीतीश कुमार के इस्तीफे का उत्प्रेरक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर अस्थिर घर्षण और बिहार में तेजी से मुखर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का बढ़ता दबाव प्रतीत होता है। 2024 के आम चुनावों और 2025-26 के राज्य विधानसभा चक्र की अगुवाई के बाद, कुमार ने खुद को अपनी ही पार्टी की घटती संख्या और राज्य का नेतृत्व करने के लिए अपने ही रैंक के एक नेता की भाजपा की इच्छा के बीच फंसा हुआ पाया। सूत्रों का कहना है कि अंतिम विवाद सीट-बंटवारे के फार्मूले पर असहमति थी और भाजपा द्वारा बिहार के लिए “विशेष श्रेणी का दर्जा” की उनकी मांग का समर्थन करने से इनकार करना, जो उनकी क्षेत्रीय पहचान का एक स्तंभ था। राज्यसभा में जाने वाले कुमार के लिए, पद छोड़ने का निर्णय एक सामरिक स्वीकारोक्ति है कि “अनिवार्य कनिष्ठ भागीदार” के रूप में शर्तों को निर्धारित करने की उनकी क्षमता लुप्त हो गई है। उनके पिछले इस्तीफों के विपरीत, जो अक्सर गठबंधन में नाटकीय बदलाव के अग्रदूत होते थे, यह कदम बदलते राजनीतिक अंकगणित के लिए एक रियायत की तरह लगता है। हज़ारों मोड़ों की यात्रा ने उन्हें एक ऐसे बिंदु पर ला दिया है जहाँ उनका समाजवादी-व्यावहारिकतावाद अब भाजपा की राष्ट्रीय “अधिकतम दबाव” रणनीति के वजन का सामना नहीं कर सकता है। ‘पलटू राम’ परिघटना ने बिहार के राजनीतिक ताने-बाने को कैसे पुनर्परिभाषित किया? नीतीश कुमार की विरासत वैचारिक स्थिरता पर अस्तित्व की विजय में एक मास्टरक्लास है। 2005 में पहली बार पदभार संभालने के बाद से, कुमार ने कम से कम पांच बार भाजपा और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बीच पाला बदला। प्रत्येक कदम को “अंतरात्मा की आवाज” या “बिहार के सर्वोत्तम हित” में एक कदम के रूप में तैयार किया गया था, लेकिन संचयी प्रभाव “सुशासन बाबू” (मिस्टर गुड गवर्नेंस) के रूप में उनकी छवि का क्षरण था। हालाँकि उन्होंने शुरू में “जंगल राज” को खत्म कर दिया और राज्य के बुनियादी ढांचे और बिजली में सुधार किया, लेकिन उनके बाद के वर्षों में प्रशासनिक ठहराव का सामना करना पड़ा क्योंकि राज्य की मशीनरी को गठबंधन में हर बदलाव के साथ पुन: व्यवस्थित होने के लिए मजबूर होना पड़ा। राजनीतिक जिम्नास्टिक के बावजूद, कुमार की प्रशासनिक यात्रा ने सामाजिक ताने-बाने पर एक अमिट छाप छोड़ी। साइकिल योजना और 2023 जाति सर्वेक्षण के माध्यम से महिला सशक्तिकरण पर उनका ध्यान – एक साहसिक कदम जिसने उन्हें संक्षेप में “मंडल” राजनीति के पुनरुद्धार के राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित किया – ने सामाजिक परिवर्तन लाने की उनकी क्षमता को प्रदर्शित किया। हालाँकि, लगातार राजनीतिक दृष्टिकोण पर मुख्यमंत्री की कुर्सी को प्राथमिकता देकर, उन्होंने अनजाने में एक शक्ति शून्य पैदा कर दिया, जिसे भरने के लिए अब क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दल दौड़ रहे हैं। राष्ट्रीय परिदृश्य में नीतीश कुमार का भविष्य क्या है? उनके इस्तीफे के बाद, नीतीश कुमार की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाएं अपने न्यूनतम स्तर पर दिख रही हैं। एक बार उन्हें भारतीय गुट के संभावित प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में देखा गया, 2024 की शुरुआत में एनडीए में उनकी वापसी ने नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय विकल्प के रूप में उनकी स्थिति को प्रभावी ढंग से बेअसर कर दिया। वर्तमान में, उनकी भूमिका एक सक्रिय सत्ता खिलाड़ी से “पुराने संरक्षक” के एक प्रतीकात्मक व्यक्ति के रूप में परिवर्तित हो गई है, भले ही वह राज्यसभा में चले गए हों। जैसा कि बिहार नीतीश युग के बाद की तैयारी कर रहा है, उनका इस्तीफा भाजपा और राजद के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच सीधे द्विध्रुवीय मुकाबले की ओर बदलाव का संकेत देता है। कुमार के लिए, यह यात्रा उन्हें एक धुंधलके के दौर में ले आई है जहां उन्हें अब अपनी पार्टी के अस्तित्व और इतिहास में अपने व्यक्तिगत स्थान पर ध्यान केंद्रित करना होगा। वह आधुनिक भारतीय राजनीति में एक अद्वितीय व्यक्ति बने हुए हैं – एक ऐसा व्यक्ति जिसने साबित कर दिया कि हिंदी बेल्ट के दिल में, सबसे स्थिर चीज अक्सर वह व्यक्ति हो सकती है जो कभी आगे बढ़ना बंद नहीं करता है। चाहे यह उनका अंतिम निकास हो या फाइनल से पहले सिर्फ एक और ठहराव, अप्रत्याशित मोड़ पटना में गहन अटकलों का विषय बना हुआ है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 14 अप्रैल, 2026, 16:04 IST समाचार राजनीति गठबंधन से बाहर निकलने की कलाबाज़ी: क्या आख़िरकार नीतीश कुमार का यू-टर्न ख़त्म हो गया है? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
क्या डिलीवरी के बाद सिर और कान ढंकना जरूरी? कहीं परंपरा के नाम पर तो नहीं होता ऐसा, एक्सपर्ट से जानिए सबकुछ!

Last Updated:April 14, 2026, 16:03 IST रीवा संजय गांधी अस्पताल के वरिष्ठ डॉ राहुल मिश्रा के अनुसार हमारे समाज में बहुत दिनों से यह मिथ चलता आ रहा है कि डिलीवरी के बाद महिलाओं को सिर और कान ढककर रखना चाहिए. इससे सिर और कान में हवा भर जाती है. यह एक प्रकार से जानकारी के आभाव में चलती आ रही बात हो सकती है. डिलीवरी के बाद हर महिला को ढेरों सलाहें दी जाती हैं. सिर ढक लो, कान में हवा मत लगने दो, ठंडी चीज़ मत खाओ, लेकिन क्या वाकई इन सलाहों के पीछे कोई मेडिकल कारण है. क्या सच में सिर और कान ढकना जरूरी है या ये सिर्फ परंपरा है आइए जानते हैं डॉक्टर की राय. विंध्य क्षेत्र में डिलीवरी के बाद महिलाओं को किस तरह अपना ख्याल रखना चाहिए यह बताने के लिए हर घर में अनुभवी और बड़ी महिलाएं मौजूद होती हैं. डॉक्टर के सुझाव के अलावा हर घर में कुछ परम्पराएं चलती आ रही होती हैं जिन्हें आम बोलचाल में आप दादी/नानी माँ के नुस्खे कह सकते हैं. इसी में उनका एक सुझाव सिर और कान ढकने का भी होता है. महिलाओं को सिर और कान ढककर रखना चाहिएरीवा संजय गांधी अस्पताल के वरिष्ठ डॉ राहुल मिश्रा के अनुसार हमारे समाज में बहुत दिनों से यह मिथ चलता आ रहा है कि डिलीवरी के बाद महिलाओं को सिर और कान ढककर रखना चाहिए. इससे सिर और कान में हवा भर जाती है. यह एक प्रकार से जानकारी के आभाव में चलती आ रही बात हो सकती है. डिलीवरी के बाद जब किसी भी महिला को सबसे ज्यादा देखभाल की जरुरत होती है तब ऐसी बड़ी- बुजुर्ग महिलाएं सुझाव देती रहती हैं. पुराने समय में जब लोगों को डिलीवरी के बाद होने वाले हार्मोनल बदलावों के बारे में नहीं पता था. जिसकी वजह से कई बार महिलाओं को डिप्रेशन भी हो जाता है. ऐसे में लोगों को लगता था कि सिर में इसलिए दर्द होता है. हवा भर जाती है, जिसे स्कार्फ की मदद से कान और सिर ढककर ठीक किया जा सकता है. सिर और कान में ना जएं हवाआपको यह जानकार हैरानी हो सकती है कि प्रेगनेंसी के बाद महिलाओं के सिर में दर्द होना, एंग्जायटी होना, आदि सामान्य लक्षण हैं जो धीरे धीरे अपने आप ठीक भी हो जाता है. लेकिन पुराने लोग या कहें जानकारी के अभाव वाले लोग इसे ही सिर और कान में हवा भरने का लक्षण मान लेते थे. यह परंपरा असल में पुराने समय की सोच पर आधारित है. यह सब सिर और कान में हवा भरने की वजह से हो रहा है. इसलिए उनसे कहा जाता था कि वे स्कार्फ या दुपट्टे से सिर और कान ढककर रखें.डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर में बड़े पैमाने पर हार्मोनल बदलाव होते हैं. इसी कारण सिरदर्द, थकान, एंग्जायटी या मूड स्विंग जैसी परेशानियां हो सकती हैं. ये सामान्य लक्षण हैं. लेकिन जानकारी के अभाव में इन्हें गलत कारणों से जोड़ दिया गया. असलियत ये है कि सिर और कान ढकने से न तो हार्मोनल बदलाव रुकते हैं और न ही डिप्रेशन या सिरदर्द का इलाज होता है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Rewa,Madhya Pradesh First Published : April 14, 2026, 16:03 IST









