पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक 10 दिन पहले I-PAC के संस्थापक विनेश चंदेल की गर्लफ्रेंड ने राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के खिलाफ इस कार्रवाई को लेकर एक तरफ जहां लोकतंत्र पर हमला बोल रही है, वहीं बीजेपी और वाम दल इसे मजबूत करने के सख्त कदम दे रहे हैं। ऐसे में इस मामले में अब सिर्फ कानूनी जांच नहीं, बल्कि निर्वाची जंग का बड़ा भुगतान हो चुका है। एडी ने 13 अप्रैल को विनेश चंदेल को कथित कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था।
13 अप्रैल की शाम को ही दिल्ली की अदालत ने उन्हें 10 दिन की एचडी कस्टडी में भेज दिया। एजेंसी का आरोप है कि I-PAC के माध्यम से करोड़ों रुपये की देनदारी लेन-देन, दिवालियापन चैनल और अनएकाउंटेड कैश का इस्तेमाल किया गया। जांच के अनुसार, चंदेल ने कथित तौर पर फंडों को दो मानदंडों में विभाजित किया – बैंकिंग और कैश – में बैंकर सिस्टम में निवेश और निवेश खर्च और सार्वजनिक प्रसार को प्रभावित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया। एचडी का दावा है कि एनसिकॉर्ड लोन से फर्जी तरीके से करीब 3.5 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की कोशिश की गई।
ब्रह्मांड का हमला- यह विचारधारा है
इस कार्रवाई पर अनैच्छिक ने केंद्र सरकार और एचडीएफसी पर सीधा हमला बोला है। पार्टी नेता डेरेक ओब्रायन ने कहा, ‘हम विनेश चंदेल की रिहाई और बिना शर्त रिलीज की मांग कर रहे हैं।’ हम मांग करते हैं कि चुनाव से पहले बंगाल से केंद्रीय आरक्षण को हटाया जाए.’ उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘जिस ऑर्गनाइजेशन को पहले डॉक्टर ने कहा था, उसने कल रात अपना नया नाम रख लिया है- बेहद हताश। मतदान से 10 दिन पहले यह कानून का पालन नहीं, बल्कि बेरोजगारी है।’
डेरेक ओ’ब्रायन ने एचडी की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘हम पहले भी कह चुके हैं और फिर मूर्ति-पीएमएलए के तहत सिर्फ 0.1 प्रतिशत मामलों में सजा होती है। 25 में 23 से 23 सुपरस्टार्स लीडर पर केस हैं, लेकिन जैसे ही बीजेपी में शामिल होते हैं, उन्हें ‘निरमा’ मिल जाता है और सब साफ हो जाते हैं। यह एक राजनीतिक उपकरण है, जिसे सभी जानते हैं।’
अभिषेक बनर्जी का युद्ध- डर का मोहरा बना हुआ है
लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया गया लोकतंत्र के राष्ट्रीय महासचिव महासभा ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने कहा, ‘बंगाल चुनाव से 10 दिन पहले I-PAC के सह-संस्थापक विनेश चंदेल की गर्लफ्रेंड सिर्फ पार्टिसिपेट नहीं है, यह अध्येता के मैदान की पूरी अवधारणा को हिला देती है।’ उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘अगर आप कलाकारों के साथ काम करते हैं, तो आप अगला उत्पाद बन सकते हैं। यह लोकतंत्र नहीं, यह लोकतंत्र की राजनीति है।’
अभिषेक बैंच ने गांगुली पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘जिन लोगों पर गंभीर गरीबों के आरोप हैं, वे जैसे ही पाला बंगले हैं, उन्हें संरक्षण मिल जाता है, जबकि बाकी लोगों को राजनीतिक सुविधा के दायरे से बाहर कर दिया जाता है।’ जनता अब सब देख रही है।’
बीजेपी और वाम का पलटवार- समर्थकों का नेटवर्क संपर्क
जहां कश्मीर इसे साजिश के खिलाफ बता रही है, वहीं भाजपा और वाम आश्रम ने इस अपराधी को बंधक बनाने की बड़ी कार्रवाई बताई है। बिहार के मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा, ‘आपने देखा होगा कि मुख्यमंत्री ममता दीदी कैसे I-PAC के पास पहुंच गईं, संवैधानिक संविधान को भंग कर दिया गया, जांच के दौरान अधिकारियों से दस्तावेज़ ले लिया गया। अब उनका असली रंग सामने आ गया है. यह सारा सामान मित्रता के संरक्षण में हो रहा था। ‘बंगाल की जनता को लूटा जा रहा था।’
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया, ‘I-PAC के राजनीतिक सलाहकार के नाम पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का नाम शामिल हो गया है। यह कंसल्टेंसी सिर्फ एक दिखावा है। ये लोग अलौकिक के काले धन को छिपाते और बचाते हैं। आज कोल ऑर्केस्ट्रा से सीधा संबंध सामने आया है। जांच आगे बढ़ें और कई लोग गिरफ़्तार होंगे।’
सीपीआई (एम) नेता बिकाश रंजन भट्टाचार्य ने कहा, ‘आई-पीएसी क्लासिक के लिए एक शेल कंपनी है, जिसके जरिए अलग-अलग तरह के सेलेब्रिटी पैसे को इधर-उधर कर दिया जाता है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री ने डीडी को रोकने की कोशिश के दौरान जांच की। अभिषेक बनर्जी और उनके सहयोगी ममता बनर्जी के समर्थक हैं और वे किसी भी पद पर निर्वाचित से मठाधीश हैं।’
एचडी की कार्रवाई क्यों?
I-PAC के सह-संस्थापक विनेश चंदेल को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग और कथित आरोपी लेन-डेन मामले में गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद दिल्ली की अदालत ने उन्हें 10 दिन की मोहलत में भेज दिया। चंदेल, जो एनएलआईयू भोपाल से लॉ के ग्रेजुएट हैं और कंपनी में 33 प्रतिशत शेयरधारक हैं, शाम 7.45 बजे पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया और देर रात कोर्ट में पेश किया गया।
यह कार्रवाई 28 मार्च को पीएमएलए केस के तहत दर्ज की गई, जो दिल्ली पुलिस की एफआईआर पर आधारित है। आरोप है कि I-PAC ने फर्जी अकाउंटिंग और अनएकाउंटेड फंडों के माध्यम से फाइनेंस कंपनियों को छुपाया। डी.एच.डी. के अनुसार, चंदेल के नेतृत्व वाली कंपनी ने फंडों को कैश चैनलों में बांटकर उनकी असली प्रकृति छिपाई और करीब 3.5 करोड़ रुपए के फर्जी लोन के रूप में सिस्टम में डाला।
एजेंसी का दावा है कि इसमें मनी लॉन्ड्रिंग खर्च और जनमत को प्रभावित करने का इस्तेमाल किया गया, जबकि कुल 50 करोड़ रुपये तक मनी लॉन्ड्रिंग का खतरा है। प्रोटोटाइप के दौरान सार्वभौम पुरातत्व की कोशिश के आरोप भी लगे हैं. वहीं बचाव पक्ष ने इसे चुनाव से पहले राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई बताया है।
जांच या राजनीतिक रणनीति?
इस पूरी घटना पर कई बड़े सवाल नीचे दिए गए हैं। क्या यह कार्रवाई कानून के तहत आवश्यक जांच है, या फिर चुनाव से पहले नामांकन की रणनीति को पूरा करना है? एक तरफ के गंभीर आरोप हैं-हवाला, फर्जी फंडिंग और करोड़ों के लेन-देन। दूसरे पक्ष का आरोप है कि विचारधारा का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।
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