‘महिला नटखट के विरोध का सवाल ही नहीं’, पीएम मोदी की पहली टिप्पणी ममता बनर्जी ने कहा- ये बहुत सारे बंधन हैं…

महिला नॉटी से पर्यटक बिल संसद में गिरावट पर हो रही बढ़त रोज मोदी ने कांग्रेस, इंदौर सहित कई आश्रमों में लोकतंत्र को बढ़ावा दिया। इस पर वास्तु शास्त्र ने भी पलटवार किया है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने रविवार को एक्स पर पोस्ट करबी बिजनेस पर फेस्टिव इंफ्रास्ट्रक्चर का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि ये बेहद समानता है कि प्रधानमंत्री ने सत्यता से इस मुद्दे को टुकड़े के बजाय देशों को अनादर करना चुना। आख़िर में कितनी महिला नेता? ममता बनर्जी ने कहा कि मैं ये स्पष्ट करना चाहती हूं कि वैष्णव कांग्रेस हमेशा से महिलाओं के लिए उच्च राजनीतिक प्रतिनिधित्व का समर्थन कर रही है। संसद और राज्य विधानसभा दोनों में ही हमारी रिहायशी महिला कलाकारों की संख्या सबसे अधिक है। मुस्लिमों में हमारी 37.9% सदस्य अनाधिकृत महिलाएँ हैं। अवलोकन में हमने 46% महिला सदस्यों को मनोनीत किया है। महिला नटखट का विरोध करने का सवाल ही नहीं है और न ही कभी उठाया जाता है। परिसीमन प्रक्रिया को लेकर सैद्धांतिक आधारभूत उन्होंने आगे कहा कि हम जिस बात का शुद्धिकरण विरोध कर रहे हैं, वह परिसीमन प्रक्रिया है. मोदी सरकार अपने निहित स्वार्थों को पूरा करने के लिए महिलाओं को आगे बढ़ाने की रणनीति बना रही थी। हम बाबा साहब के संविधान में बदलाव, देश का विभाजन और राजनीतिक मुद्दों में हिस्सेदारी करके बीजेपी राज्यों को अन्य राज्यों की कीमत पर अधिक प्रतिनिधित्व हिस्सेदारी सत्य हाथियाने का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। यह संघीय लोकतंत्र पर हमला है और हम इसे बेकार नहीं देखते हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री ने देश को ईमानदारी से संबोधित करने के बजाय गुमराह करने का विकल्प चुना। मुझे इसे रिकॉर्ड पर रखने दीजिए. तृणमूल कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं के लिए उच्च राजनीतिक प्रतिनिधित्व की वकालत की है। हमारे यहां निर्वाचित महिलाओं का अनुपात सबसे अधिक है… – ममता बनर्जी (@MamataOfficial) 19 अप्रैल 2026 3 साल तक इंतजार क्यों किया?- ममता बनर्जी मोदी सरकार पर मुहर लगाते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि अगर यह सरकार असल में इस नेक उद्देश्य को लेकर गंभीर थी, तो 28 सितंबर 2023 को महिला नामांकित होने के करीब 3 साल बाद तक वह इंतजार क्यों कर रही हैं? कई राज्यों में चुनाव चल रहे हैं, ऐसे में इसे इतनी जल्दी क्यों जारी किया गया? और परिसीमन के साथ यह क्यों जोड़ा गया? पुराने कांग्रेस दशकों से महिलाओं के लिए खड़ी रही है। हम रुके रहेंगे, लेकिन हम उस विषय पर उपदेश नहीं सुनेंगे, जिसका कोई विशेष दल नहीं है, तो खो गया है और उसका कोई सम्मान नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री जी, अगली बार जब आप देश को बताएं तो संसद के पटल से ऐसा करने का साहस। जहां आप जांच, चुनौती और लेवल के बारे में जानकारी रखते हैं। तुमने कल जो किया वह कायरतापूर्ण, पाखंडी और टॉयल चाल थी। आपको महसूस हो सकता है कि सत्य आपके हाथों से फ्री बनी हुई है। ये भी पढ़ें बंगाल की रैली में ग़ैरे सीएम योगी ने किया जोरदार हमला, बोले- ‘ममता दीदी सिंहासन खाली करो’
Annie Sloan, 6 day workshop in Udaipur, guests are learning art and painting

Hindi News Happylife Annie Sloan, 6 Day Workshop In Udaipur, Guests Are Learning Art And Painting उदयपुर1 घंटे पहले कॉपी लिंक अब छुटि्टयों में लोग दिग्गज कलाकारों से रचनात्मकता, रंगों का मेल और घर सजाने की बारीकियां सीख रहे हैं। अब छुट्टियों का मतलब सिर्फ पहाड़ों पर या समुद्र किनारे मौज-मस्ती करना नहीं रह गया है। अनुभव आधारित यात्राओं के दौर में सौंदर्य प्रेमी लोग डिजाइन यात्राओं पर निकल रहे हैं। इन ट्रिप्स में आरामदायक सुइट्स में ठहरने के साथ दिग्गज कलाकारों से रचनात्मकता, रंगों का मेल और घर सजाने की बारीकियां सीखने को मिलती हैं। राजस्थान के उदयपुर में रंग विशेषज्ञ एनी स्लोअन 6 दिन की वर्कशॉप कराती हैं। इसमें मेहमानों को स्थानीय स्तर पर बनी छोटी कैबिनेट को पेंट करने की बेसिक ट्रेनिंग दी जाती है। इस रिट्रीट में 450 साल पुराने सिटी पैलेस का दौरा और स्थानीय कलाकारों के स्टूडियो की विजिट भी शामिल हैं। एनी के मुताबिक भारत के ‘पपरीका रेड’ (मिर्च जैसा लाल) और ‘फ्रीडा ब्लू’ (चटक नीला) जैसे रंग घरों की खूबसूरती बढ़ा सकते हैं। राजस्थान के उदयपुर में रंग विशेषज्ञ एनी स्लोअन 6 दिन की वर्कशॉप कराती हैं। इटली के शाही महलों में सीखें डिजाइनिंग के गुण इटली के पीडमोंट में डिजाइनर केट वॉटसन-स्मिथ 4.5 लाख रु. में 3 दिन का डिजाइन कोर्स करा रही हैं। यहां 16वीं सदी के 22 ऐतिहासिक महलों के जरिए बरोक शैली और विंटेज सजावट सिखाई जाती है। मेहमान पुरानी फैक्ट्री में बने होटल में ठहरते हैं और विला की मरम्मत से बारीकियां समझते हैं। मराकेश के कारीगरों से सीखें रंगों का जादू ‘क्वीन ऑफ कलर’ सोफी रॉबिन्सन मोरक्को में करीब 3.8 लाख रुपए में डिजाइन रिट्रीट करा रही हैं। यहां मेहमानों को कालीन बुनने वालों, टाइल्स और चमड़े के कारीगरों से मिलवाया जाता है। वे मशहूर हस्तियों के निजी घरों का दौरा कर सजावट की बारीकियां समझते हैं। न्यूयॉर्क की आर्ट गैलरी में सीखें घर सजाने के प्रोफेशनल टिप्स अमेरिका के न्यूयॉर्क में विलो केम्प ‘आर्ट वॉक’ के जरिए लोगों को घर सजाने की कला सिखा रही हैं। वे बताती हैं कि पेंटिंग फ्रेम करने का सही तरीका क्या है और उसे दीवार पर कितनी ऊंचाई पर लगाना चाहिए। घर पुराना हो या आधुनिक, आर्ट को सही जगह लगाकर माहौल बदला जा सकता है। इस यात्रा में मोर्गन लाइब्रेरी जैसी जगहों पर न्यूयॉर्क की प्रयोगात्मक कला को करीब से देखने का मौका मिलता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
दावा- I-PAC ने बंगाल में 20 दिनों तक काम रोका:यह कंपनी ममता बनर्जी का चुनाव मैनेजमेंट देखती है; TMC बोली- ये झूठ

पश्चिम बंगाल में TMC का चुनावी मैनेजमेंट संभालने वाली संस्था (I-PAC) ने अचानक राज्य में अपने सभी कामकाज अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया है। सूत्रों के अनुसार, संस्था ने ई-मेल के जरिए पश्चिम बंगाल में काम कर रहे अपने कर्मचारियों को अगले 20 दिनों की छुट्टी पर भेज दिया है। मेल में लिखा गया है कि 11 मई को हालात की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। संस्था की ओर से भेजे गए मैसेज में ‘कानूनी वजहों’ का हवाला दिया गया है। हालांकि टीएमसी ने कहा- यह दावा पूरी तरह से बेबुनियाद है और ऐसा लगता है कि यह जमीनी स्तर पर भ्रम पैदा करने की एक जान-बूझकर की गई कोशिश है। I-PAC और उसके डायरेक्टर पर करोड़ों रुपए के कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। इस मामले में CBI ने 27 नवंबर 2020 को FIR दर्ज की थी। पूरा मामला करीब 2,742 करोड़ रुपए से जुड़ा है। पिछले चार महीनों में दो बार में देश भर के चार से ज्यादा आफिसों में रेड पड़ चुकी है। TMC बोली- यह भ्रम पैदा करने की जान-बूझकर कोशिश की गई टीएमसी ने एक बयान जारी करते हुए कहा- हमें एक मीडिया रिपोर्ट मिली है जिसमें दावा किया गया है कि IPAC ने अगले 20 दिनों के लिए पश्चिम बंगाल में अपना काम रोक दिया है। यह दावा पूरी तरह से बेबुनियाद है और ऐसा लगता है कि यह जमीनी स्तर पर भ्रम पैदा करने की एक जान-बूझकर की गई कोशिश है। IPAC टीम TMC के साथ पूरी तरह से जुड़ी हुई है और पूरे राज्य में चुनाव प्रचार का काम योजना के अनुसार जारी है। बंगाल के लोग इन कोशिशों को समझने में पूरी तरह से सक्षम हैं और वे लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देंगे। पश्चिम बंगाल गलत जानकारी या डराने-धमकाने से प्रभावित नहीं होगा। वे 23 और 29 तारीख को निर्णायक रूप से जवाब देंगे और 4 मई को आने वाले नतीजे उनके फैसले को दिखाएंगे। I-PAC ठिकानों पर पिछली दो रेड… 2 अप्रैल को दिल्ली-बेंगलुरु, हैदराबाद के ठिकानों पर रेड प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2 अप्रैल को पॉलिटिकल कंसल्टेंट कंपनी I-PAC के तीन ठिकानों पर छापेमारी की। टीम ने दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद में कंपनी के दफ्तरों पर कार्रवाई की। अधिकारियों के मुताबिक, छापेमारी कोयला चोरी और घोटाले से जुड़े मामले में हुई। 8 जनवरी को पहली बार रेड के बीच पहुंची थीं ममता 8 जनवरी को ED की टीम ने प्रतीक जैन के कोलकाता के गुलाउडन स्ट्रीट स्थित घर और दूसरी टीम सॉल्टलेक स्थित दफ्तर पर छापा मारा था। प्रतीक जैन ही ममता बनर्जी के लिए पॉलिटिकल स्ट्रैटजी तैयार करते हैं। कार्रवाई सुबह 6 बजे से शुरू हुई थी, लेकिन करीब 11:30 बजे के बाद मामला बढ़ा। सबसे पहले कोलकाता पुलिस कमिश्नर, प्रतीक के आवास पर पहुंचे। कुछ समय बाद सीएम ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट स्थित उनके घर पहुंच गईं। ममता वहां कुछ देर रुकीं। जब बाहर निकलीं, तो उनके हाथ में एक हरी फाइल दिखाई दी। इसके बाद वे I-PAC के ऑफिस भी गईं। नॉलेज पॉइंट: जानिए I-PAC के बारे में ममता अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी और I-PAC के को-फाउंडर और डायरेक्टर प्रतीक जैन (दाएं) के साथ। यह फोटो प्रतीक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर 4 जून 2024 को पोस्ट की थी। I-PAC (Indian Political Action Committee) एक पॉलिटिकल कंसलटेंट फर्म है। इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन हैं। यह राजनीतिक दलों को चुनावी रणनीति, डेटा-आधारित कैंपेन, मीडिया प्लानिंग और वोटर आउटरीच में मदद करती है। I-PAC पहले Citizens for Accountable Governance (CAG) थी। इसकी शुरुआत 2013 में प्रशांत किशोर ने प्रतीक के साथ की थी। बाद में इसका नाम I-PAC रखा गया। प्रशांत किशोर के हटने के बाद I-PAC की कमान प्रतीक के पास आ गई। प्रशांत ने बाद में बिहार में ‘जन सुराज’ पार्टी बनाई। I-PAC तृणमूल कांग्रेस (TMC) के साथ 2021 से जुड़ी है। ————– ये खबर भी पढ़ें… I-Pac रेड विवाद-ममता पर पावर के गलत इस्तेमाल का आरोप:ED सुप्रीम कोर्ट में बोली-CM के फायदे के लिए पुलिस ने काम में रुकावट डाली केंद्रीय जांच एजेंसी एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पावर का गलत इस्तेमाल किया है। एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि CM और राज्य की मशीनरी कथित कोयला चोरी स्कैम के सिलसिले में I-PAC ऑफिस और उसके डायरेक्टर के ठिकानों पर रेड के दौरान गैर-कानूनी तरीके से घुसे। पूरी खबर पढ़ें…
खाने से पहले आम को पानी में क्यों भिगोना चाहिए? यहां जानें इसके पीछे का कारण

Last Updated:April 19, 2026, 12:41 IST गर्मियों में आम खाना हर किसी को पसंद होता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसे खाने से पहले पानी में भिगोना क्यों जरूरी माना जाता है? दरअसल, इसके पीछे कई वैज्ञानिक और पारंपरिक कारण छिपे हुए हैं, जो आपकी सेहत से जुड़े हैं. Mango जैसे ही गर्मियों का मौसम आता है, ‘फलों का राजा’ आम बाज़ारों में हर जगह नज़र आने लगता है. छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक, हर कोई आम के स्वाद का दीवाना हो जाता है. हालांकि, डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि सिर्फ़ स्वाद की चाह में बिना सोचे-समझे आम खाने से सेहत से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं. ऐसे में आम खाने के फ़ायदों और उससे जुड़ी ज़रूरी सावधानियों के बारे में कुछ अहम बातें बताई हैं. आम तौर पर, गर्मियों के मौसम में जो फल प्राकृतिक रूप से उगते हैं, वे हमारे शरीर के लिए बहुत फ़ायदेमंद होते हैं. आम में पानी की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है; ये न सिर्फ़ गर्मी से लड़ने में मदद करते हैं, बल्कि शरीर को ज़रूरी हाइड्रेशन भी देते हैं। इससे यह पक्का होता है कि शरीर में पानी की कमी न हो. आम में मौजूद विटामिन और पोषक तत्व शरीर को तुरंत ऊर्जा देते हैं. यह आम तौर पर माना जाता है कि आम शरीर के लिए बहुत ही बढ़िया होते हैं. कोई भी चीज़ सेहत के लिए तभी फ़ायदेमंद होती है, जब उसे सीमित मात्रा में खाया जाए। आम खाने से सेहत को कई फ़ायदे होते हैं, लेकिन, अगर इन्हें ज़्यादा मात्रा में खाया जाए, तो ये शरीर की गर्मी बढ़ा सकते हैं. खास तौर पर, ज़्यादा आम खाने से शरीर का अंदरूनी तापमान बढ़ जाता है, जिससे चेहरे और शरीर पर मुहासे या रैशेज़ निकल सकते हैं. इसके अलावा, तय सीमा से ज़्यादा आम खाने से पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ सकता है, जिससे दस्त या पेट से जुड़ी दूसरी परेशानियां हो सकती हैं. छोटे बच्चों को आम बहुत पसंद होता है. वे जितने भी आम मिलें, सब खा लेते हैं. लेकिन माता-पिता को उनके मामले में सावधान रहना चाहिए. कई बच्चे आम को छिलके समेत ही खा लेते हैं. यह बिल्कुल भी अच्छा नहीं है. आम के छिलके में कुछ केमिकल्स या स्राव होते हैं, जो त्वचा पर लगने से खुजली हो सकती है. इसलिए आम को अच्छे से धोकर, छिलका निकालकर और टुकड़ों में काटकर देना सबसे अच्छा है. बच्चों का शरीर बहुत संवेदनशील होता है. इसलिए उन्हें एक से ज्यादा आम न दें. अगर आमों का सेवन सही तरीके से और सीमित मात्रा में किया जाए, तो वे शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं. हालांकि, अगर स्वाद के चक्कर में इनका अत्यधिक सेवन कर लिया जाए, तो यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी हो सकता है. About the Author Rajvant Prajapati With more than 4 years above of experience in Digital Media. Currently I am working with News 18. Here, I am covering Hyperlocal News, Agriculture, Lifestyle, Health & Wellness, Beauty, Fashion, Religion an…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 19, 2026, 12:39 IST
दुनिया के टॉप 10 अस्पताल कौन से हैं? इसमें भारत का कौन सा हॉस्पिटल, यहां चेक कर लीजिए लिस्ट

Top 10 Hospitals in World: जब भी कोई बीमार होता है, तब वह अच्छे अस्पताल की ओर भागता है. अच्छे अस्पताल में एडवांस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है और मरीजों की अच्छी तरह देखभाल की जाती है. अच्छे अस्पतालों की बात हो, तब देश में अक्सर दिल्ली एम्स का जिक्र होता है. भारत में लगातार एक से एक बेहतरीन अस्पताल बन रहे हैं और मेडिकल सुविधाएं बेहतर हो रही हैं. तमाम अस्पताल वर्ल्ड क्लास फैसिलिटी का दावा भी करते हैं, लेकिन जब भी ग्लोबल रैंकिंग की बात होती है, तब वे पिछड़ जाते हैं. क्या आप जानते हैं कि दुनिया के टॉप 10 अस्पताल कौन से हैं और इनमें भारत के कौन से हॉस्पिटल शुमार हैं? दुनिया के सबसे बेहतरीन अस्पतालों की सूची हर साल अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा तैयार की जाती है. इनमें मरीजों की देखभाल, मेडिकल रिसर्च, तकनीक, डॉक्टर्स की विशेषज्ञता और इलाज की सफलता दर को आधार बनाया जाता है. हाल के 2026 ग्लोबल हॉस्पिटल रैंकिंग्स के अनुसार कुछ अस्पताल लगातार टॉप पर बने हुए हैं और इनमें अमेरिकी अस्पतालों की दबदबा है. ब्रांड फाइनेंस की 2026 की रिपोर्ट में दुनियाभर के टॉप 250 अस्पतालों की लिस्ट जारी की गई है और इनमें भारत का भी एक अस्पताल टॉप 10 में शुमार किया गया है. यह अस्पताल दिल्ली एम्स है, जो अपने बेहतरीन इलाज के लिए जाना जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. दुनिया के टॉप 10 हॉस्पिटल्स की लिस्ट ब्रांड फाइनेंस की रैकिंग के अनुसार अमेरिका का जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन दुनिया का नंबर 1 अस्पताल है. यह अस्पताल मेडिकल रिसर्च, एडवांस ट्रीटमेंट और शिक्षा के क्षेत्र में दुनिया का अग्रणी केंद्र माना जाता है. यहां जटिल बीमारियों के इलाज के साथ-साथ नई चिकित्सा तकनीकों पर लगातार काम किया जाता है, जिससे यह अस्पताल ग्लोबल स्तर पर नंबर 1 बन पाया है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स NHS फाउंडेशन ट्रस्ट दूसरे नंबर पर आता है, जो यूनाइटेड किंगडम में स्थित है. यह संस्थान अपने उच्च गुणवत्ता वाले हेल्थकेयर सिस्टम और रिसर्च क्षमताओं के लिए जाना जाता है. यहां मरीजों को अत्याधुनिक इलाज के साथ-साथ बेहतरीन मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. तीसरे स्थान पर स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर आता है, जो अमेरिका में स्थित है. यह अस्पताल कैंसर ट्रीटमेंट, न्यूरोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी के क्षेत्र में विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है. यहां आधुनिक तकनीक और रिसर्च का बेहतरीन तालमेल देखने को मिलता है. दुनियाभर से लोग यूएस के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में इलाज कराने जाते हैं. चौथे स्थान पर मास जनरल ब्रिघम है, जो अमेरिका में स्थित एक प्रमुख मेडिकल नेटवर्क है. यह संस्थान हार्वर्ड मेडिकल स्कूल से जुड़ा हुआ है और रिसर्च व क्लिनिकल ट्रीटमेंट के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाता है. यहां गंभीर और दुर्लभ बीमारियों का इलाज अत्याधुनिक तकनीक से किया जाता है. पांचवें स्थान पर मायो क्लीनिक हेल्थ सिस्टम आता है, जो अमेरिका में स्थित है. यह अस्पताल अपनी पेशेंट फर्स्ट नीति और बेहतरीन डायग्नोसिस के लिए जाना जाता है. यहां मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम मिलकर मरीजों का इलाज करती है, जिससे सफलता दर काफी अधिक होती है. छठे स्थान पर भारत का नई दिल्ली स्थित एम्स है. यह भारत का सबसे प्रतिष्ठित सरकारी अस्पताल है और यहां हर साल लाखों मरीजों का इलाज किया जाता है. इस रैंकिंग में इसका शामिल होना भारत की बढ़ती मेडिकल क्षमता और वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है. दिल्ली एम्स इकलौता अस्पताल है, जो दुनिया के टॉप 10 में शामिल किया गया है. सातवें स्थान पर अमेरिका का क्लीवलैंड क्लीनिक आता है, जो खासतौर पर हार्ट केयर के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. यह ओहायो में स्थित है और कार्डियोलॉजी व कार्डियक सर्जरी में इसकी सफलता दर बहुत उच्च मानी जाती है. यह अस्पताल लगातार मेडिकल रिसर्च और नई तकनीकों के विकास में अग्रणी भूमिका निभाता है. आठवें स्थान पर मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल है, जो बोस्टन में स्थित है और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल से जुड़ा हुआ है. यह अस्पताल कैंसर, न्यूरोसाइंस और जीनोमिक रिसर्च के लिए विश्व स्तर पर जाना जाता है. यहां हजारों क्लीनिकल रिसर्च प्रोजेक्ट्स चलते रहते हैं. इस लिस्ट में नौवें स्थान पर जर्मनी का चारिते हॉस्पिटल आता है, जो बर्लिन में स्थित है. यह यूरोप के सबसे बड़े यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स में से एक है और मेडिकल एजुकेशन, रिसर्च व एडवांस ट्रीटमेंट के लिए प्रसिद्ध है. यहां कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के रिसर्च प्रोजेक्ट्स चलाए जाते हैं. दसवें स्थान पर टोरंटो जनरल हॉस्पिटल है, जो टोरंटो में स्थित है. यह अस्पताल खासतौर पर ऑर्गन ट्रांसप्लांट जैसे हार्ट और लंग ट्रांसप्लांट के लिए दुनिया भर में जाना जाता है. यहां की मेडिकल टीम जटिल सर्जरी में बेहद अनुभवी मानी जाती है.
Gift Nifty Up 250 Points

Hindi News Business Gift Nifty Up 250 Points | Iran US Tension & 5 Factors Guide Market Move मुंबई26 मिनट पहले कॉपी लिंक शेयर बाजार में 20 अप्रैल से शुरू होने वाले हफ्ते की शुरुआत तेजी के साथ हो सकती है। ईरान के साथ अमेरिका की जंग के जल्द खत्म होने की उम्मीद और गिरते क्रूड ऑयल के दाम बाजार को सहारा दे रहे हैं। इसके अलावा चौथी तिमाही के नतीजे, विदेशी निवेशकों की एक्टिविटी और ग्लोबल मार्केट की चाल भी बाजार की दिशा तय करने वाले मुख्य कारण होंगे। चलिए समझते हैं इस हफ्ते बाजार में क्या हो सकता है… सपोर्ट और रेजिस्टेंस सपोर्ट जोन: 23,940 | 23,850 | 23,462 | 23,330 | 22,857 सपोर्ट यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को नीचे गिरने से सहारा मिलता है। यहां खरीदारी बढ़ने से कीमत आसानी से नीचे नहीं जाती। यहां खरीदारी का मौका हो सकता है। रेजिस्टेंस जोन: 24,387 | 24,450 | 24,538 | 24,650 | 25,002 रेजिस्टेंस यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को ऊपर जाने में रुकावट आती है। ऐसा बिकवाली बढ़ने से होता है। रजिस्टेंस जोन पार करने पर तेजी की उम्मीद रहती है। नोट: सपोर्ट और रेजिस्टेंस के लेवल्स वेल्थ व्यू एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार है। अब 5 फैक्टर्स जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं… 1. ईरान-यूएस युद्ध खत्म होने की उम्मीद ईरान-अमेरिका के बीच तनाव को कम करने के लिए अगले दौर की बातचीत सोमवार से पाकिस्तान में शुरू हो सकती है। तनाव कम होने की खबरों से शेयर बाजार के सेंटिमेंट सुधरने की उम्मीद हैं। शुक्रवार को तेल सप्लाई के अहम समुद्री मार्ग हॉर्मूज स्ट्रेट के खुलने की खबरों से ब्रेंट क्रूड करीब 10% सस्ता होकर 90 डॉल प्रति बैरल पर आ गया है। शेयर बाजार पर भी इसका असर दिखा। गिफ्ट निफ्टी 250 अंक चढ़कर बंद हुआ। अमेरिकी बाजार में भी करीब 1.50% की तेजी रही। 2. विदेशी निवेशकों की खरीदी-बिक्री विदेशी निवेशकों ने 15-17 अप्रैल के बीच भारतीय शेयरों में ₹1,500 करोड़ से ज्यादा की खरीदारी की। अकेले शुक्रवार को ₹683 करोड़ के शेयर खरीदे। अगर आगे भी विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार के लिए रुख इसी तरह का रहता है तो बाजार में तेजी की उम्मीद की जा सकती है। 3. कंपनियों के नतीजे तय करेंगे दिशा बाजार की नजर इस हफ्ते आने वाले चौथी तिमाही (Q4) के नतीजों पर भी रहेगी। एक्सिस बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, M&M, अडाणी ग्रीन एनर्जी, इंडसइंड बैंक, इंफोसिस, अडाणी एनर्जी सॉल्यूशन्स, HCL टेक्नोलॉजीज और टाटा एलेक्सजी जैसी कंपनियां नतीजे घोषित करेंगी। तीन बड़े प्राइवेट बैंकों ने शनिवार को Q4 FY26 के नतीजे जारी किए: HDFC बैंक का मुनाफा 9% बढ़कर ₹19,221 करोड़ रहा। ICICI बैंक का मुनाफा 8.5% बढ़कर ₹13,702 करोड़ पहुंचा। यस बैंक का मुनाफा 44.8% उछलकर ₹1,068 करोड़ हो गया। 4. रुपए की चाल पर निवेशकों की नजर डॉलर के मुकाबले रुपया 0.3% बढ़कर 92.92 पर बंद हुआ। 30 मार्च को रुपया 95.21 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर था। तब से अब तक इसमें अच्छी रिकवरी आई है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक रुपए के लिए 92.28 पर तत्काल सपोर्ट और 93.50-93.68 पर रेजिस्टेंस है। रुपया मजबूत होने से आयातसस्ता होता है, जिससे महंगाई घटती है और शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बनता है। इसके विपरीत, रुपए की कमजोरी से विदेशी निवेशकों (FIIs) का मुनाफा कम हो जाता है, जिससे वे बाजार से पैसा निकालने लगते हैं। 5. निफ्टी का टेक्निकल चार्ट एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर. के मुताबिक अगर निफ्टी 24,400 के ऊपर टिकता है तो 24,800-25,000 तक जा सकता है। नीचे की तरफ 24,000 पर सपोर्ट है और 23,800 एक मजबूत बेस है। RSI भी 57 के करीब है, जो बाजार में सुधार के संकेत दे रहा है। रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च एसवीपी अजीत मिश्रा का मानना है कि निवेशकों को अभी बैलेंस बनाकर चलना चाहिए और चुनिंदा शेयरों पर ही दांव लगाना चाहिए। निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में ज्यादा हिस्सा उन मजबूत लार्ज-कैप शेयरों का रखना चाहिए जिनके फंडामेंटल्स अच्छे हैं। शुक्रवार को सेंसेक्स 505 अंक चढ़ा था 17 अप्रैल को सेंसेक्स 505 अंक (0.65%) की तेजी के साथ 78,494 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 157 अंकों (0.65%) की तेजी रही, ये 24,354 पर पहुंच गया। नॉलेज पार्ट: गिफ्ट निफ्टी: गिफ्ट निफ्टी में मुख्य रूप से विदेशी निवेशक और बड़े संस्थान ट्रेड करते हैं। यह गुजरात के गिफ्ट सिटी में ट्रेड होता है। भारतीय बाजार खुलने से पहले इसके उतार-चढ़ाव से घरेलू बाजार की ओपनिंग का अंदाजा मिलता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: दुनिया के कुल तेल व्यापार का करीब 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, यूएई और कुवैत जैसे देशों का तेल इसी रास्ते से होते हुए भारत, चीन और जापान जैसे देशों तक पहुंचता है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स: यह एक मीटर की तरह है जो बताता है कि कोई शेयर या इंडेक्स कितनी तेजी से खरीदा या बेचा जा रहा है। इसकी वैल्यू 0 से 100 के बीच होती है। आमतौर पर 70 से ऊपर का मतलब ‘ओवरबॉट’ और 30 से नीचे ‘ओवरसोल्ड’ माना जाता है। डिस्क्लेमर: ये लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। ऊपर दी गई राय और सलाह व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों की हैं, न कि दैनिक भास्कर की। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि कोई भी निवेश फैसला लेने से पहले सर्टिफाइड विशेषज्ञों से सलाह जरूर लें। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
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Hindi News Business Gift Nifty Up 250 Points | Iran US Tension & 5 Factors Guide Market Move मुंबई1 घंटे पहले कॉपी लिंक शेयर बाजार में 20 अप्रैल से शुरू होने वाले हफ्ते की शुरुआत तेजी के साथ हो सकती है। ईरान के साथ अमेरिका की जंग के जल्द खत्म होने की उम्मीद और गिरते क्रूड ऑयल के दाम बाजार को सहारा दे रहे हैं। इसके अलावा चौथी तिमाही के नतीजे, विदेशी निवेशकों की एक्टिविटी और ग्लोबल मार्केट की चाल भी बाजार की दिशा तय करने वाले मुख्य कारण होंगे। चलिए समझते हैं इस हफ्ते बाजार में क्या हो सकता है… सपोर्ट और रेजिस्टेंस सपोर्ट जोन: 23,940 | 23,850 | 23,462 | 23,330 | 22,857 सपोर्ट यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को नीचे गिरने से सहारा मिलता है। यहां खरीदारी बढ़ने से कीमत आसानी से नीचे नहीं जाती। यहां खरीदारी का मौका हो सकता है। रेजिस्टेंस जोन: 24,387 | 24,450 | 24,538 | 24,650 | 25,002 रेजिस्टेंस यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को ऊपर जाने में रुकावट आती है। ऐसा बिकवाली बढ़ने से होता है। रजिस्टेंस जोन पार करने पर तेजी की उम्मीद रहती है। नोट: सपोर्ट और रेजिस्टेंस के लेवल्स वेल्थ व्यू एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार है। अब 5 फैक्टर्स जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं… 1. ईरान-यूएस युद्ध खत्म होने की उम्मीद ईरान-अमेरिका के बीच तनाव को कम करने के लिए अगले दौर की बातचीत सोमवार से पाकिस्तान में शुरू हो सकती है। तनाव कम होने की खबरों से शेयर बाजार के सेंटिमेंट सुधरने की उम्मीद हैं। शुक्रवार को तेल सप्लाई के अहम समुद्री मार्ग हॉर्मूज स्ट्रेट के खुलने की खबरों से ब्रेंट क्रूड करीब 10% सस्ता होकर 90 डॉल प्रति बैरल पर आ गया है। शेयर बाजार पर भी इसका असर दिखा। गिफ्ट निफ्टी 250 अंक चढ़कर बंद हुआ। अमेरिकी बाजार में भी करीब 1.50% की तेजी रही। 2. विदेशी निवेशकों की खरीदी-बिक्री विदेशी निवेशकों ने 15-17 अप्रैल के बीच भारतीय शेयरों में ₹1,500 करोड़ से ज्यादा की खरीदारी की। अकेले शुक्रवार को ₹683 करोड़ के शेयर खरीदे। अगर आगे भी विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार के लिए रुख इसी तरह का रहता है तो बाजार में तेजी की उम्मीद की जा सकती है। 3. कंपनियों के नतीजे तय करेंगे दिशा बाजार की नजर इस हफ्ते आने वाले चौथी तिमाही (Q4) के नतीजों पर भी रहेगी। एक्सिस बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, M&M, अडाणी ग्रीन एनर्जी, इंडसइंड बैंक, इंफोसिस, अडाणी एनर्जी सॉल्यूशन्स, HCL टेक्नोलॉजीज और टाटा एलेक्सजी जैसी कंपनियां नतीजे घोषित करेंगी। तीन बड़े प्राइवेट बैंकों ने शनिवार को Q4 FY26 के नतीजे जारी किए: HDFC बैंक का मुनाफा 9% बढ़कर ₹19,221 करोड़ रहा। ICICI बैंक का मुनाफा 8.5% बढ़कर ₹13,702 करोड़ पहुंचा। यस बैंक का मुनाफा 44.8% उछलकर ₹1,068 करोड़ हो गया। 4. रुपए की चाल पर निवेशकों की नजर डॉलर के मुकाबले रुपया 0.3% बढ़कर 92.92 पर बंद हुआ। 30 मार्च को रुपया 95.21 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर था। तब से अब तक इसमें अच्छी रिकवरी आई है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक रुपए के लिए 92.28 पर तत्काल सपोर्ट और 93.50-93.68 पर रेजिस्टेंस है। रुपया मजबूत होने से आयातसस्ता होता है, जिससे महंगाई घटती है और शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बनता है। इसके विपरीत, रुपए की कमजोरी से विदेशी निवेशकों (FIIs) का मुनाफा कम हो जाता है, जिससे वे बाजार से पैसा निकालने लगते हैं। 5. निफ्टी का टेक्निकल चार्ट एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर. के मुताबिक अगर निफ्टी 24,400 के ऊपर टिकता है तो 24,800-25,000 तक जा सकता है। नीचे की तरफ 24,000 पर सपोर्ट है और 23,800 एक मजबूत बेस है। RSI भी 57 के करीब है, जो बाजार में सुधार के संकेत दे रहा है। रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च एसवीपी अजीत मिश्रा का मानना है कि निवेशकों को अभी बैलेंस बनाकर चलना चाहिए और चुनिंदा शेयरों पर ही दांव लगाना चाहिए। निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में ज्यादा हिस्सा उन मजबूत लार्ज-कैप शेयरों का रखना चाहिए जिनके फंडामेंटल्स अच्छे हैं। शुक्रवार को सेंसेक्स 505 अंक चढ़ा था 17 अप्रैल को सेंसेक्स 505 अंक (0.65%) की तेजी के साथ 78,494 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 157 अंकों (0.65%) की तेजी रही, ये 24,354 पर पहुंच गया। नॉलेज पार्ट: गिफ्ट निफ्टी: गिफ्ट निफ्टी में मुख्य रूप से विदेशी निवेशक और बड़े संस्थान ट्रेड करते हैं। यह गुजरात के गिफ्ट सिटी में ट्रेड होता है। भारतीय बाजार खुलने से पहले इसके उतार-चढ़ाव से घरेलू बाजार की ओपनिंग का अंदाजा मिलता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: दुनिया के कुल तेल व्यापार का करीब 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, यूएई और कुवैत जैसे देशों का तेल इसी रास्ते से होते हुए भारत, चीन और जापान जैसे देशों तक पहुंचता है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स: यह एक मीटर की तरह है जो बताता है कि कोई शेयर या इंडेक्स कितनी तेजी से खरीदा या बेचा जा रहा है। इसकी वैल्यू 0 से 100 के बीच होती है। आमतौर पर 70 से ऊपर का मतलब ‘ओवरबॉट’ और 30 से नीचे ‘ओवरसोल्ड’ माना जाता है। डिस्क्लेमर: ये लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। ऊपर दी गई राय और सलाह व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों की हैं, न कि दैनिक भास्कर की। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि कोई भी निवेश फैसला लेने से पहले सर्टिफाइड विशेषज्ञों से सलाह जरूर लें। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
शादी से लौट रहे 3 युवक हादसे का शिकार:छिंदवाड़ा में बाइक का एक्सीडेंट; 1 की मौत, 2 गंभीर घायल

छिंदवाड़ा-अमरवाड़ा रोड पर रविवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। पिंडई डबीर पेट्रोल पंप के पास शादी समारोह से लौट रहे बाइक सवार तीन युवक दुर्घटना का शिकार हो गए। वर्तमान में इस हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई है, जबकि दो अन्य गंभीर घायलों का अमरवाड़ा अस्पताल में इलाज जारी है। सड़क किनारे पड़े मिले युवक, पुलिस ने अस्पताल पहुंचाया स्थानीय लोगों के मुताबिक, घटना के बाद सड़क किनारे बाइक गिरी हुई नजर आई। इसके साथ ही तीनों युवक आसपास बेसुध पड़े हुए थे। घटना की सूचना मिलते ही सिंगोड़ी पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने बिना देर किए दोनों घायलों को अमरवाड़ा अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल दोनों घायलों का इलाज जारी है और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। युवकों की शिनाख्त जारी, हादसे का कारण अज्ञात पुलिस के अनुसार, फिलहाल मृतक और घायल युवकों की पहचान की जा रही है। यह हादसा किन कारणों से और कैसे हुआ, इसका अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल सका है। सिंगोड़ी पुलिस ने पूरे मामले को जांच में लिया है और दुर्घटना के सही कारणों का पता लगाने में जुटी हुई है।
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39 मिनट पहले कॉपी लिंक उत्तर कोरिया ने रविवार सुबह एक बार फिर बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया। मिसाइलें पूर्वी तट के सिनपो शहर के पास से समुद्र की ओर दागी गईं और करीब 140 किमी तक गईं। यह इस महीने चौथा और साल का सातवां मिसाइल परीक्षण है। दक्षिण कोरिया के पूर्व सुरक्षा सलाहकार किम की-जुंग के मुताबिक, यह कदम अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ संभावित बातचीत से पहले ताकत दिखाने की रणनीति का हिस्सा है। दक्षिण कोरिया ने इस कार्रवाई को उकसावे वाला बताते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन कहा है और आपात बैठक बुलाई। जापान ने भी पुष्टि की कि ये उसके आर्थिक क्षेत्र में नहीं गिरीं। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने हाल ही में कहा कि उत्तर कोरिया अपनी परमाणु क्षमता तेजी से बढ़ा रहा है और नए यूरेनियम संवर्धन केंद्र पर काम कर सकता है। मार्च में किम जोंग उन ने कहा था कि उनका देश परमाणु शक्ति बना रहेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इस क्षमता का विस्तार जरूरी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
The journey of human evolution is understood from 15,836 ancient remains.

द न्यू यॉर्क टाइम्स. नंदिता गरुड़3 घंटे पहले कॉपी लिंक वैज्ञानिकों ने 15,836 प्राचीन मानव अवशेषों के डीएनए की जांच कर यह साबित कर दिया है कि इंसानी वजूद का ‘सॉफ्टवेयर’ आज भी अपडेट हो रहा है। – प्रतीकात्मक फोटो विज्ञान की दुनिया में अब तक यह माना जाता था कि पिछले 10 हजार वर्षों में इंसानी शरीर लगभग स्थिर हो गया है। तर्क यह था कि हमारी ‘सांस्कृतिक प्रगति’… यानी खेती, तकनीक और चिकित्सा ने हमारी ‘जैविक प्रगति’ की रफ्तार को धीमा कर दिया है। पर जर्नल नेचर में प्रकाशित हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के एक ताजा और विशाल अध्ययन ने इस धारणा को पूरी तरह पलट दिया है। वैज्ञानिकों ने 15,836 प्राचीन मानव अवशेषों के डीएनए की जांच कर यह साबित कर दिया है कि इंसानी वजूद का ‘सॉफ्टवेयर’ आज भी अपडेट हो रहा है। इस शोध का सबसे रोचक पहलू यह है कि कई आनुवंशिक बदलाव हाल ही में हुए हैं। उदाहरण के लिए, सीलिएक रोग से जुड़ा म्यूटेशन सिर्फ 4 हजार साल पहले उभरा, यानी मिस्र के महान पिरामिडों से भी नया है। आश्चर्यजनक रूप से ‘नेचुरल सिलेक्शन’ ने इस बीमारी को बढ़ावा दिया। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्राचीन काल में यह म्यूटेशन किसी महामारी या आंतों के संक्रमण से बचाव में मददगार रहा होगा। पर आज यह ऑटोइम्यून समस्या बन गया है। स्टडी में पता चला कि मानव जीन में कम से कम 479 वैरिएंट हैं जिन्हें पिछले 10 हजार वर्षों में प्रकृति ने बढ़ावा दिया। यूरोप में ‘टाइप बी’ ब्लड ग्रुप 6 हजार साल पहले दुर्लभ था, लेकिन अचानक फैलकर आज 10% आबादी में मौजूद है। जब इंसानों ने पशुपालन शुरू किया, तो एक खास म्यूटेशन फैला जिसने वयस्कों को दूध पचाने की क्षमता दी। कांस्य युग के अकाल में यह बदलाव जीवनरक्षक साबित हुआ। ये उदाहरण दिखाते हैं कि हालिया आनुवंशिक बदलाव इंसान की अनुकूलन की शक्ति को उजागर करते हैं। नंदिता गरुड़, यूसीएलए में भारतीय मूल की आनुवांशिकी वैज्ञानिक कुछ नतीजे वैज्ञानिकों को भी हैरान कर रहे हैं। स्टडी के अनुसार यूरोप में 10 हजार वर्ष से ऐसे जीन वेरिएंट लगातार घट रहे हैं जो धूम्रपान की आदत को बढ़ावा देते हैं, जबकि तंबाकू वहां 460 साल पहले आई। यह रहस्य अनसुलझा है। इसी तरह,‘नेचुरल सिलेक्शन’ ने उन जीन वैरिएंट्स को बढ़ावा दिया है जो लंबे समय तक पढ़ाई करने की क्षमता या रुचि से जुड़े हैं। चूंकि स्कूल व औपचारिक शिक्षा हाल की चीजें हैं, इसलिए अतीत में ये जीन बेहतर याददाश्त व तेज सीखने की क्षमता से जुड़े रहे होंगे। भविष्य की चुनौतियों के लिए आज भी खुद को तराश रहे हैं जीन यूसीएलए में भारतीय मूल की आनुवांशिकी वैज्ञानिक नंदिता गरुड़ कहती हैं,‘यह शोध साबित करता है कि खेती और बदलती जीवनशैली के साथ हमारा शरीर लगातार खुद को ढाल रहा है। हम कोई ऐसी मूर्ति नहीं हैं जो बनकर तैयार हो गई हो, बल्कि हम अनवरत चलने वाली प्रक्रिया हैं। हमारी ‘सांस्कृतिक प्रगति’ ने ‘जैविक प्रगति’ को रोका नहीं है, बल्कि उसे नए रास्ते दे दिए हैं। खान-पान से लेकर बीमारियों से लड़ने की क्षमता तक, हमारे जीन आज भी भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को तराश रहे हैं।’ दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔








