Wednesday, 09 Sep 2026 | 01:52 AM

Trending :

EXCLUSIVE

The journey of human evolution is understood from 15,836 ancient remains.

The journey of human evolution is understood from 15,836 ancient remains.

द न्यू यॉर्क टाइम्स. नंदिता गरुड़3 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

वैज्ञानिकों ने 15,836 प्राचीन मानव अवशेषों के डीएनए की जांच कर यह साबित कर दिया है कि इंसानी वजूद का ‘सॉफ्टवेयर’ आज भी अपडेट हो रहा है। – प्रतीकात्मक फोटो

विज्ञान की दुनिया में अब तक यह माना जाता था कि पिछले 10 हजार वर्षों में इंसानी शरीर लगभग स्थिर हो गया है। तर्क यह था कि हमारी ‘सांस्कृतिक प्रगति’… यानी खेती, तकनीक और चिकित्सा ने हमारी ‘जैविक प्रगति’ की रफ्तार को धीमा कर दिया है। पर जर्नल नेचर में प्रकाशित हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के एक ताजा और विशाल अध्ययन ने इस धारणा को पूरी तरह पलट दिया है। वैज्ञानिकों ने 15,836 प्राचीन मानव अवशेषों के डीएनए की जांच कर यह साबित कर दिया है कि इंसानी वजूद का ‘सॉफ्टवेयर’ आज भी अपडेट हो रहा है।

इस शोध का सबसे रोचक पहलू यह है कि कई आनुवंशिक बदलाव हाल ही में हुए हैं। उदाहरण के लिए, सीलिएक रोग से जुड़ा म्यूटेशन सिर्फ 4 हजार साल पहले उभरा, यानी मिस्र के महान पिरामिडों से भी नया है। आश्चर्यजनक रूप से ‘नेचुरल सिलेक्शन’ ने इस बीमारी को बढ़ावा दिया। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्राचीन काल में यह म्यूटेशन किसी महामारी या आंतों के संक्रमण से बचाव में मददगार रहा होगा। पर आज यह ऑटोइम्यून समस्या बन गया है। स्टडी में पता चला कि मानव जीन में कम से कम 479 वैरिएंट हैं जिन्हें पिछले 10 हजार वर्षों में प्रकृति ने बढ़ावा दिया।

यूरोप में ‘टाइप बी’ ब्लड ग्रुप 6 हजार साल पहले दुर्लभ था, लेकिन अचानक फैलकर आज 10% आबादी में मौजूद है। जब इंसानों ने पशुपालन शुरू किया, तो एक खास म्यूटेशन फैला जिसने वयस्कों को दूध पचाने की क्षमता दी। कांस्य युग के अकाल में यह बदलाव जीवनरक्षक साबित हुआ। ये उदाहरण दिखाते हैं कि हालिया आनुवंशिक बदलाव इंसान की अनुकूलन की शक्ति को उजागर करते हैं।

नंदिता गरुड़, यूसीएलए में भारतीय मूल की आनुवांशिकी वैज्ञानिक

नंदिता गरुड़, यूसीएलए में भारतीय मूल की आनुवांशिकी वैज्ञानिक

कुछ नतीजे वैज्ञानिकों को भी हैरान कर रहे हैं। स्टडी के अनुसार यूरोप में 10 हजार वर्ष से ऐसे जीन वेरिएंट लगातार घट रहे हैं जो धूम्रपान की आदत को बढ़ावा देते हैं, जबकि तंबाकू वहां 460 साल पहले आई। यह रहस्य अनसुलझा है। इसी तरह,‘नेचुरल सिलेक्शन’ ने उन जीन वैरिएंट्स को बढ़ावा दिया है जो लंबे समय तक पढ़ाई करने की क्षमता या रुचि से जुड़े हैं। चूंकि स्कूल व औपचारिक शिक्षा हाल की चीजें हैं, इसलिए अतीत में ये जीन बेहतर याददाश्त व तेज सीखने की क्षमता से जुड़े रहे होंगे।

भविष्य की चुनौतियों के लिए आज भी खुद को तराश रहे हैं जीन

यूसीएलए में भारतीय मूल की आनुवांशिकी वैज्ञानिक नंदिता गरुड़ कहती हैं,‘यह शोध साबित करता है कि खेती और बदलती जीवनशैली के साथ हमारा शरीर लगातार खुद को ढाल रहा है। हम कोई ऐसी मूर्ति नहीं हैं जो बनकर तैयार हो गई हो, बल्कि हम अनवरत चलने वाली प्रक्रिया हैं। हमारी ‘सांस्कृतिक प्रगति’ ने ‘जैविक प्रगति’ को रोका नहीं है, बल्कि उसे नए रास्ते दे दिए हैं। खान-पान से लेकर बीमारियों से लड़ने की क्षमता तक, हमारे जीन आज भी भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को तराश रहे हैं।’

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Top 10 Companies Market Cap Fall

April 27, 2026/
5:00 am

नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर टॉप-10-कंपनियों से जुड़ी रही। मार्केट कैप के लिहाज से देश...

Pakistan vs Australia Live Cricket Score, 2nd ODI: Stay updated with PAK vs AUS Ball by Ball Match Updates and Live Scorecard from Gaddafi Stadium in Lahore. (Picture Credit: X/@cricketcomau)

June 2, 2026/
6:38 pm

आखरी अपडेट:02 जून, 2026, 18:38 IST बनर्जी ने स्पष्ट किया कि उन्हें अलग विधायी संगठन बनाने की किसी संगठित योजना...

पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव से भारत नाराज:कहा- इससे अवैध कब्जा वैध नहीं होगा; वहां 7 जून को 24 सीटों पर वोटिंग

June 5, 2026/
8:25 pm

भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में 7 जून को होने वाले विधानसभा चुनावों का कड़ा विरोध किया है।...

भारत से प्रशिक्षित हैं कजाकिस्तान की अख्माराल काइनाजारोवा:सेंट्रल एशिया के 5 देशों के 5 हजार से ज्यादा लोगों को भरतनाट्यम सिखाया, कई ने अमेरिका-जापान जैसे देशों में करियर बनाया

March 2, 2026/
12:32 pm

ओकसाना ब्रिटेन में भरतनाट्यम कलाकार हैं… उल्मेनाई जापान में… तात्याना, कासिएट और दामिर अमेरिका में भरतनाट्यम के स्टेज शो करते...

West Bengal CS SC Slams Judicial Officers Attack

April 6, 2026/
7:14 pm

नई दिल्ली20 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल के मालदा में 1 अप्रैल को प्रदर्शनकारियों ने बीडीओ ऑफिस घेरा। वहीं...

फैक्ट्री रीसेट से नहीं मिटता डेटा, सर्वे में हुआ खुलासा:69 फीसदी भारतीय फोन बेचने से कतरा रहे; डेटा के गलत इस्तेमाल का डर

June 19, 2026/
12:37 pm

भारत में स्मार्टफोन रीसेल मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन डेटा सुरक्षा की चिंता अब भी सबसे बड़ी रुकावट...

अशोकनगर में विधानसभा अध्यक्ष के काफिले की गाड़ियां टकराईं:निर्माणाधीन सड़क पर गिट्टी से हुआ हादसा, नरेंद्र सिंह तोमर सुरक्षित

March 10, 2026/
7:29 pm

अशोकनगर-देहरदा मार्ग पर जंघार गांव के पास मंगलवार शाम को विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के काफिले की दो गाड़ियां...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

The journey of human evolution is understood from 15,836 ancient remains.

The journey of human evolution is understood from 15,836 ancient remains.

द न्यू यॉर्क टाइम्स. नंदिता गरुड़3 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

वैज्ञानिकों ने 15,836 प्राचीन मानव अवशेषों के डीएनए की जांच कर यह साबित कर दिया है कि इंसानी वजूद का ‘सॉफ्टवेयर’ आज भी अपडेट हो रहा है। – प्रतीकात्मक फोटो

विज्ञान की दुनिया में अब तक यह माना जाता था कि पिछले 10 हजार वर्षों में इंसानी शरीर लगभग स्थिर हो गया है। तर्क यह था कि हमारी ‘सांस्कृतिक प्रगति’… यानी खेती, तकनीक और चिकित्सा ने हमारी ‘जैविक प्रगति’ की रफ्तार को धीमा कर दिया है। पर जर्नल नेचर में प्रकाशित हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के एक ताजा और विशाल अध्ययन ने इस धारणा को पूरी तरह पलट दिया है। वैज्ञानिकों ने 15,836 प्राचीन मानव अवशेषों के डीएनए की जांच कर यह साबित कर दिया है कि इंसानी वजूद का ‘सॉफ्टवेयर’ आज भी अपडेट हो रहा है।

इस शोध का सबसे रोचक पहलू यह है कि कई आनुवंशिक बदलाव हाल ही में हुए हैं। उदाहरण के लिए, सीलिएक रोग से जुड़ा म्यूटेशन सिर्फ 4 हजार साल पहले उभरा, यानी मिस्र के महान पिरामिडों से भी नया है। आश्चर्यजनक रूप से ‘नेचुरल सिलेक्शन’ ने इस बीमारी को बढ़ावा दिया। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्राचीन काल में यह म्यूटेशन किसी महामारी या आंतों के संक्रमण से बचाव में मददगार रहा होगा। पर आज यह ऑटोइम्यून समस्या बन गया है। स्टडी में पता चला कि मानव जीन में कम से कम 479 वैरिएंट हैं जिन्हें पिछले 10 हजार वर्षों में प्रकृति ने बढ़ावा दिया।

यूरोप में ‘टाइप बी’ ब्लड ग्रुप 6 हजार साल पहले दुर्लभ था, लेकिन अचानक फैलकर आज 10% आबादी में मौजूद है। जब इंसानों ने पशुपालन शुरू किया, तो एक खास म्यूटेशन फैला जिसने वयस्कों को दूध पचाने की क्षमता दी। कांस्य युग के अकाल में यह बदलाव जीवनरक्षक साबित हुआ। ये उदाहरण दिखाते हैं कि हालिया आनुवंशिक बदलाव इंसान की अनुकूलन की शक्ति को उजागर करते हैं।

नंदिता गरुड़, यूसीएलए में भारतीय मूल की आनुवांशिकी वैज्ञानिक

नंदिता गरुड़, यूसीएलए में भारतीय मूल की आनुवांशिकी वैज्ञानिक

कुछ नतीजे वैज्ञानिकों को भी हैरान कर रहे हैं। स्टडी के अनुसार यूरोप में 10 हजार वर्ष से ऐसे जीन वेरिएंट लगातार घट रहे हैं जो धूम्रपान की आदत को बढ़ावा देते हैं, जबकि तंबाकू वहां 460 साल पहले आई। यह रहस्य अनसुलझा है। इसी तरह,‘नेचुरल सिलेक्शन’ ने उन जीन वैरिएंट्स को बढ़ावा दिया है जो लंबे समय तक पढ़ाई करने की क्षमता या रुचि से जुड़े हैं। चूंकि स्कूल व औपचारिक शिक्षा हाल की चीजें हैं, इसलिए अतीत में ये जीन बेहतर याददाश्त व तेज सीखने की क्षमता से जुड़े रहे होंगे।

भविष्य की चुनौतियों के लिए आज भी खुद को तराश रहे हैं जीन

यूसीएलए में भारतीय मूल की आनुवांशिकी वैज्ञानिक नंदिता गरुड़ कहती हैं,‘यह शोध साबित करता है कि खेती और बदलती जीवनशैली के साथ हमारा शरीर लगातार खुद को ढाल रहा है। हम कोई ऐसी मूर्ति नहीं हैं जो बनकर तैयार हो गई हो, बल्कि हम अनवरत चलने वाली प्रक्रिया हैं। हमारी ‘सांस्कृतिक प्रगति’ ने ‘जैविक प्रगति’ को रोका नहीं है, बल्कि उसे नए रास्ते दे दिए हैं। खान-पान से लेकर बीमारियों से लड़ने की क्षमता तक, हमारे जीन आज भी भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को तराश रहे हैं।’

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.