Friday, 05 Jun 2026 | 10:42 AM

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गुजरात में फूड पॅाइजनिंग से 200 लोग बीमार:59 को अस्पताल में भर्ती, शादी में आम का जूस पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ी

गुजरात में फूड पॅाइजनिंग से 200 लोग बीमार:59 को अस्पताल में भर्ती, शादी में आम का जूस पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ी

गुजरात के दाहोद जिले में शादी के दौरान फूड पॅाइजनिंग से 200 से ज्यादा लोग बीमार हो गए। इनमें से 59 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना सोमवार रात की है। शादी में 400 से ज्यादा लोग पहुंचे थे। रात 8 बजे के आसपास डिनर शुरू हुआ। कुछ लोगों के मुताबिक, आम का जूस पीने के बाद तबीयत बिगड़ने लगी। बीमार लोगों को तुरंत नजदीकी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती कराया गया। बाद में यह संख्या 200 से ज्यादा हो गई। देखें तस्वीरें… लोगों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द दाहोद कलेक्टर योगेश निर्गुडे ने बताया कि अभलोड गांव में शादी के दौरान खाना खाने के बाद 230 लोगों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत हुई। डॉक्टर डॉ. राजीव डामोर ने बताया कि अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों की हालत ठीक है।

बैतूल में कचरे से भड़की आग पेड़ों तक पहुंची:कॉलेज चौक पर पेड़ जले, धनोरा में डीपी क्षतिग्रस्त; फायर ब्रिगेड ने पाया काबू

बैतूल में कचरे से भड़की आग पेड़ों तक पहुंची:कॉलेज चौक पर पेड़ जले, धनोरा में डीपी क्षतिग्रस्त; फायर ब्रिगेड ने पाया काबू

मंगलवार को बैतूल के कॉलेज चौक के पास कचरे में लगी आग तेजी से फैलकर पास खड़े पेड़ों तक पहुंच गई। लपटें और धुआं उठते देख इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और काफी प्रयास के बाद आग पर काबू पाया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। दूसरी घटना धनोरा क्षेत्र में हुई, जहां आग की चपेट में आने से बिजली विभाग की डीपी जल गई। इस दौरान धमाकों की आवाजें सुनाई दीं, जिससे आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। गनीमत रही कि ट्रांसफार्मर सुरक्षित रहा और आग पर समय रहते काबू पा लिया गया, जिससे बड़ा नुकसान होने से बच गया। प्रारंभिक जांच में अत्यधिक गर्मी और सूखे कचरे को आग लगने की वजह माना जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से खुले में कचरा न जलाने और सावधानी बरतने की अपील की है। 4 तस्वीरों में देखिए आग…

केरलम में पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट, 13 की मौत:10 शव बरामद, 3 लोगों के शरीर के हिस्से बिखरे मिले; 40 मजदूर काम कर रहे थे

केरलम में पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट, 13 की मौत:10 शव बरामद, 3 लोगों के शरीर के हिस्से बिखरे मिले; 40 मजदूर काम कर रहे थे

केरलम के त्रिशूर जिले में मंगलवार दोपहर 3.30 बजे पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट हुआ। हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई। फैक्ट्री में कई लोग झुलस गए। घायलों को आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, मौके से 10 शव मिले, जबकि 3 लोगों के शरीर के हिस्से बरामद हुए। हादसे के समय शेड में करीब 40 लोग मौजूद थे। फायर ब्रिगेड, पुलिस और रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंचीं, लेकिन रुक-रुक कर विस्फोट होने से रेस्क्यू में दिक्कत आई। हादसे के बाद की 3 तस्वीरें… मृतकों के परिवार को 2-2 लाख का मुआवजा पीएम मोदी ने हादसे में मरने वाले लोगों के लिए संवेदना जताई और मृतकों के परिवार को 2-2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार के मुआवजे का ऐलान किया है। पीएम ने कहा- जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं। रविवार को तमिलनाडु की पटाखा फैक्ट्री में धमाका हुआ था, 25 जानें गईं तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले में रविवार को एक पटाखा फैक्ट्री में धमाका हुआ था। हादसे में 25 लोगों की मौत हुई थी। हादसे के समय फैक्ट्री में 30 मजदूर काम कर रहे थे। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, रेस्क्यू के दौरान एक और विस्फोट हुआ। इसमें पुलिस, फायर और रेस्क्यू टीम के 13 लोग घायल हो गए। सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पूरी खबर पढ़ें… ———— ये खबर भी पढ़ें… तमिलनाडु फैक्ट्री ब्लास्ट- मरने वालों की संख्या 25 हुई:इनमें 20 एक ही गांव के; शेड में 4 की जगह 40 मजदूर काम कर रहे थे तमिलनाडु के विरुधुनगर में रविवार को पटाखा फैक्ट्री में हुए ब्लास्ट में मरने वालों की संख्या 25 हो गई है। हादसे में मृत लोगों के परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया और विरुधुनगर में सड़क जाम कर विरोध शुरू कर दिया। वे हर पीड़ित परिवार को 20 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: कोलकाता में मछली-भात के शौकीन अनुराग ठाकुर, ऐसा क्या बोले कि बंगाल की राजनीति में हंगामा!

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: कोलकाता में मछली-भात के शौकीन अनुराग ठाकुर, ऐसा क्या बोले कि बंगाल की राजनीति में हंगामा!

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित मैसाचुसेट्स डेमोक्रेट श्रृंगला ने मत्स्य उद्योग के विकास पर चिंता जताई। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच कई दलों को लेकर गुटबाजी मची हुई है। इस घमासान में एक प्रमुख पशुधन पशुपालक को भी लेकर आया है। बंगाल में 2018 में स्थापित प्लास्टिक कैथोलिक कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी अगर सत्ता में है तो मांस, मछली खाने पर रोक लगा देगी। इस बीच आयोजित भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने मंगलवार (21 अप्रैल, 2026) को कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पारंपरिक मछली-भात में एक राजनीतिक संदेश भी दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ऑर्थोडॉक्स कांग्रेस राज्य में खाने-पीने को लेकर भ्रम और डर फैलाने की कोशिश कर रही है। ममता बनर्जी सरकार पर अनुराग ठाकुर का हमला अनुराग ठाकुर ने कहा, ‘हम मांस, मछली और चावल खा रहे हैं। ‘भाजपा के 16 राज्यों में और 20 राज्यों में सरकार है, लेकिन कहीं भी किसी के खान-पान, पूजा या अभिव्यक्ति पर कोई रोक नहीं है।’ उनका आरोप था कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 15 साल के शासनकाल में कोई ठोस उपलब्धि नहीं है, इसलिए वह डॉक्टर, ब्रह्मा और अफवाहों की राजनीति कर रहे हैं। #घड़ी | कोलकाता, पश्चिम बंगाल: बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर कहते हैं, ”हम मांस, मछली और चावल खा रहे हैं. बीजेपी की 16 राज्यों में सरकार है, एनडीए की 20 राज्यों में सरकार है, और कहीं भी किसी के भाषण, भोजन या पूजा पर कोई प्रतिबंध नहीं है… लेकिन ममता बनर्जी को कोई… pic.twitter.com/osZNgKOZyN – एएनआई (@ANI) 21 अप्रैल 2026 उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था और आर्थिक स्थिति पर भी सवाल उठाए। ठाकुर ने कहा, ‘यहां अपराध और आराम का माहौल है। इसी वजह से निवेश नहीं आ रहा और युवाओं का ब्रेन बिजनेस हो रहा है। लोग राज्य से बाहर जा रहे हैं।’ उन्होंने आगामी राजनीतिक बदलावों का संकेत देते हुए कहा कि 4 मई को आएंगे, लैंडस्केप जाएंगे। यह भी पढ़ें: ‘बंगाल-तमिलनाडु’ में ‘प्रमोशन का शोर’, अब 23 अप्रैल को अचानक आया फैसला बंगाल में मत्स्य उद्योग का प्लॉट विकास नहीं हुआः आरआरबी वहीं, इस मुद्दे पर डेमोक्रेट डेमोक्रेट श्रंगला ने भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा, ‘मुझे हर तरह की मछलियां पसंद हैं, काइगर शिंगड़ी, मागुर, पाबड़ा, रोहू या कटला हो, लेकिन दुख की बात है कि बंगाल, जहां समुद्र, नदियां और तालाब हैं, वहां मत्स्य उद्योग स्तर पर मत्स्य उद्योग स्तर विकसित नहीं हुआ है।’ कोलकाता, पश्चिम बंगाल: राज्यसभा सांसद हर्ष वर्धन श्रृंगला कहते हैं, “मैं अपने बारे में बात करना शुरू करता हूं। मेरा पसंदीदा भोजन मछली है। और मुझे हर तरह की मछली पसंद है, चाहे वह चिंगरी हो, चाहे वह मगुर माच हो, चाहे वह पाबदा हो, चाहे वह रूही हो, चाहे वह कतला हो। तो मैं… pic.twitter.com/IqlAaecKfx – आईएएनएस (@ians_india) 21 अप्रैल 2026 श्रृंगला ने दावा किया कि सिलीगुड़ी में जो मछलियां हैं, वह आंध्र प्रदेश, ओडिशा और गुजरात से आती हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं पूछता हूं कि बंगाल में मछली कहां है? तो जवाब मिला यहां की मछली तो है ही नहीं. ‘क्योंकि उद्यम ने मत्स्य पालन में निवेश नहीं किया और किसानों की अनदेखी की।’ कोलकाता में मछली-भात की यह तस्वीर सिर्फ एक सांस्कृतिक संकेत नहीं रह रही है, बल्कि मौलाना बयानबाजी का हिस्सा बन गई है, जहां भोजन की थाली से लेकर विकास के मुद्दे तक, सभी कुछ राजनीतिक चर्चा का केंद्रबिंदु दिख रहे हैं। यह भी पढ़ें: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026: पीएम मोदी पर बड़ा बयान, फिर दी सफाई, भड़की बीजेपी बोली- मांगो मार्जिन

एबीपी ग्राउंड रिपोर्ट: दक्षिण दिनाजपुर में बंद पड़ी लाइब्रेरी बनी बेरोजगारी, शिक्षा संकट पर किससे आम जनता का साथ?

एबीपी ग्राउंड रिपोर्ट: दक्षिण दिनाजपुर में बंद पड़ी लाइब्रेरी बनी बेरोजगारी, शिक्षा संकट पर किससे आम जनता का साथ?

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित शिक्षा, रोजगार की कमी से लोग नाराज, दिशाहीन। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: पहले चरण का नामांकन शोर शांत हो चुका है और अब 23 तारीख को पहले चरण का मतदान होना है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की हलचल के बीच, बिजला जिला दक्षिण दिनाजपुर एक अलग तरह की हलचल से गुजर रहा है। यहां ऑक्सफोर्ड शोर के पीछे एक मानवीय संकट गहराता दिख रहा है, पुरानी और पारंपरिक लाइब्रेरी का बंद होना। शिक्षा का यह ढाँचागत ढाँचा धीरे-धीरे ख़त्म होता जा रहा है और स्थानीय लोग इसे सिर्फ तीन साल के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के साथ-साथ पढ़ते हुए मान रहे हैं। बालुराघाट से लेकर हिली तक का रास्ता इस संकट की गवाही देता है। सड़क किनारे लगे कई सरकारी पुस्तकालय अब बंद शटर और जंग किनारे के पीछे स्थित हैं। कभी जहां छात्र-छात्रा स्कायर में डूबे रहते थे, वहीं अब छात्रा पसरा है। एक स्थानीय यात्री छात्र हैं, ‘यह लाइब्रेरी सालभर बंद रहती है। पहले हम ‘नोटबुक’ लेकर अध्ययन करते थे।’ वहीं एक युवा छात्र ने कहा, ‘मुझे तो पता ही नहीं था कि यह लाइब्रेरी है।’ यह सिर्फ एक या दो जगह की कहानी नहीं है. जिले भर में 57 पुस्तकालयों में से अधिकांश या तो बंद हैं या बेहद खराब स्थिति में चल रहे हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सूरज दास कर्मचारी हैं, ‘पिछले 10-15 वर्षों से पुस्तकालय बंद होने का डर था। अब हालात ये हैं कि लाइब्रेरी में करीब 90 प्रतिशत स्टाफ की भारी कमी है। कई जगह प्रोटोटाइप कर्मचारी ही काम कर रहे हैं।’ शिक्षा से गहरा संकट स्थानीय शिक्षण वर्ग का मानना ​​है कि यह केवल वास्तुशिल्प का विनाश नहीं है, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक पतन की शुरुआत है। यह लाइब्रेरी कभी सिर्फ कथावाचक का केंद्र नहीं रही, यह संवाद, विचार और समाज के निर्माण की जगह थी। अब उनका समापन एक पूरी पीढ़ी के उत्कृष्ट विकास पर प्रभाव डाल सकता है। दक्षिण दिनाजपुर जैसे पुरातात्विक जिले में, जहां पहले से ही पुस्तकालय की कमी है, वहां पुस्तकालय का महत्व और विकास हो रहा है, लेकिन स्थिर असमानताओं में यह पुरातात्विक संरचना ही दम तोड़ती नजर आ रही है। यह भी पढ़ें: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026: पीएम मोदी पर बड़ा बयान, फिर दी सफाई, भड़की बीजेपी बोली- मांगो मार्जिन झील क्षेत्र: प्रतिस्पर्धी प्रतिस्पर्धा, कई परतें राजनीतिक रूप से यह जिला इस बार बेहद दिलचस्प ग्राहकों का गवाह है। मुख्य लड़ाई कैथोलिक कांग्रेस और भाजपा के बीच मनी जा रही है, लेकिन कांग्रेस और वाम दल भी अपना खोया आधार वापस पाने की कोशिश में हैं। 2021 विधानसभा चुनाव में कुल 6 मंजिलों में से 3 मंजिलें और 3 मंजिलें भाजपा में शामिल हुईं। कश्मीरी ने कुशमंडी, कुमारगंज और हरिरामपुर पर कब्जा कर लिया, जबकि बीजेपी ने बालुरघाट, तपन और गंगारामपुर पर कब्जा कर लिया। 2024 के चुनाव में दोनों दल अपने-अपने गढ़ से बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन इस बार अलग-अलग दिख रहे हैं। बीजेपी का हमला: ‘पूरी तरह विफल सरकार’ जिले के भाजपा अध्यक्ष सुरजीत चौधरी का सरकार पर आरोप है कि स्वास्थ्य सेवाओं की हालत खराब है, राजमार्ग परियोजना भूमि अधिग्रहण के कारण रुकी हुई है और शिक्षा व्यवस्था खराब हो रही है। दक्षिण दिनाजपुर में वर्जिन पूरी तरह से विफल रही है। लाइब्रेरी की समस्या खुद बताएं कि सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं। बीजेपी का दावा है कि वह 2021 और 2024 के गठबंधन में इस बार बेहतर प्रदर्शन करेगी और जिलों में अपनी पकड़ मजबूत बनाएगी। यह भी पढ़ें: ‘बंगाल-तमिलनाडु’ में ‘प्रमोशन का शोर’, अब 23 अप्रैल को अचानक आया फैसला वैज्ञानिक का उत्तर: ‘राजनीतिक सिद्धांत’ वैश्विक इस मुद्दे को स्वीकार तो किया जाता है, लेकिन इसे चुनावी हथियार के रूप में पेश किये जाने का विरोध किया जाता है। बालुराघाट से प्रत्याशित अल्पास्था घोषा को सभी लोगों द्वारा नामांकित किया जाता है, लेकिन इसे दूर करने के लिए भविष्य में कदम रखा जाएगा। उन्होंने कहा, ‘भाजपा जब से बंगाल में दूसरे स्थान पर है, वह यहां की मजबूती की कोशिश कर रही है। ये खतरनाक है. बालुराघाट की अपनी एक पहचान थी, जो अब बदल रही है।’ निर्भय घोष का दावा है कि जातीय विभाजन और बाहरी हस्तक्षेप जैसे सामाजिक आंदोलन को लेकर जनता में असंतोष है, जो भाजपा के खिलाफ हो सकता है। जमीनी हकीकत: नामांकित है, लेकिन दिशा अज्ञात है जमीनी स्तर पर बात करने पर साफ होता है कि लोगों में पेपर-पिलिटरी शिक्षा, रोजगार और फुटपाथ-बिस्तरों को लेकर आती है, लेकिन यह पेपर किस राजनीतिक दिशा में जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। एक कॉलेज के छात्र कहते हैं, ‘हमें लाइब्रेरी चाहिए, नौकरी चाहिए। नेता आते हैं, वादे करते हैं, लेकिन कुछ नहीं बदलते।’ एक स्थानीय व्यापारी का कहना है, ‘यहां निवेश नहीं हो रहा है।’ युवा बाहर जा रहे हैं. चुनाव में हम उसी को वोट देंगे जो कुछ ठोस होगा.’ दक्षिण दिनाजपुर का बड़ा सवाल दक्षिण दिनाजपुर में इस बार का चुनाव सिर्फ नामांकन की लड़ाई नहीं है। यह विकास मॉडल, शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक वर्गीकरण की दिशा तय करने वाला चुनाव बनाया जा रहा है। पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले में कुल छह विधानसभा क्षेत्र आते हैं और ये सभी बालुरघाट भी आंध्र प्रदेश में आते हैं। इनमें कुशमंडी (एससी), कुमारगंज, बालूरघाट, तपन (एसटी), गंगारामपुर (एससी) और हरिरामपुर शामिल हैं। ये सभी क्षेत्रीय क्षेत्र आगामी 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए अहम माने जा रहे हैं। (रिपोर्टः दीपक घोष) यह भी पढ़ें: एक्सक्लूसिव: ‘भ्रष्ट है टीएमसी, सुरक्षित नहीं है बंगाल’, ममता के नारे पर शिक्षा मंत्री, प्रधान मंत्री ने बताया बीजेपी के लिए क्या है मुद्दा

39वें नेशनल गेम्स की तैयारी:मंत्री रेखा आर्या का अल्टीमेटम- 24 घंटे में दें नेशनल गेम्स का एक्शन प्लान, इस बार हमें ज्यादा मेडल चाहिए

39वें नेशनल गेम्स की तैयारी:मंत्री रेखा आर्या का अल्टीमेटम- 24 घंटे में दें नेशनल गेम्स का एक्शन प्लान, इस बार हमें ज्यादा मेडल चाहिए

नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में होने वाले आगामी 39वें नेशनल गेम्स में उत्तराखंड का पूरा फोकस पदकों की संख्या में भारी इजाफा करने पर है। खेल मंत्री रेखा आर्या ने मंगलवार को सचिवालय के एफआरडीसी सभागार में खेल विभाग की अहम समीक्षा बैठक ली। उन्होंने अधिकारियों को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि 24 घंटे के भीतर 39वें राष्ट्रीय खेलों की तैयारी का पूरा एक्शन प्लान उनके टेबल पर होना चाहिए। नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों को देंगे अपना इंफ्रास्ट्रक्चर खेल मंत्री ने अधिकारियों को एक अहम निर्देश देते हुए कहा कि अगर मेघालय या अन्य नॉर्थ-ईस्ट राज्यों के पास साइकिलिंग और शूटिंग जैसे खेलों के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, तो उन्हें उत्तराखंड में ये सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया जाए। इसके साथ ही, खिलाड़ियों के लिए सघन प्रशिक्षण शिविर लगाने, खेल संघों के साथ तालमेल बिठाने और नेशनल गेम्स से पहले उत्तराखंड में ज्यादा से ज्यादा नेशनल चैंपियनशिप आयोजित कराने के निर्देश दिए गए हैं। जुलाई से शुरू हो जाएगी हल्द्वानी स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी बैठक में हल्द्वानी के गौलापार में बन रही स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के काम की भी समीक्षा की गई। मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि जुलाई से यहां पहला शैक्षणिक सत्र शुरू करने का लक्ष्य है। इसके लिए जरूरी ‘करिकुलम कमेटी’ और ‘परिनियमावली कमेटी’ का गठन कर दिया गया है। साथ ही, पदों के सृजन की प्रक्रिया में भी तेजी लाने को कहा गया है। स्पोर्ट्स कोटे से नौकरी के लिए विभाग में ही बनेंगे पद उत्तराखंड के होनहार खिलाड़ियों को ‘आउट ऑफ टर्न’ सरकारी नौकरी देने के मामले में विभाग ने नई रणनीति बनाई है। खेल विभाग चाहता है कि इसके लिए किसी अन्य विभाग पर निर्भर रहने के बजाय खेल विभाग में ही अधिसंख्य पद बनाए जाएं। अधिकारियों को इस पर तेजी से कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। इन नीतियों में भी होगा बड़ा बदलाव: मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना, मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना और संविदा प्रशिक्षक नीति के शासनादेश में जरूरी संशोधन किए जाएंगे, ताकि इन योजनाओं का सीधा फायदा खिलाड़ियों तक पहुंच सके। केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार राज्य में “एक जनपद एक खेल” नीति का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। इसे जल्द ही धरातल पर उतारा जाएगा। बैठक में विशेष प्रमुख सचिव (खेल) अमित सिन्हा, अपर निदेशक अजय अग्रवाल, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज के प्राचार्य राजेश मंमगाई और उपनिदेशक शक्ति सिंह समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।

Sunil Pal Kidnapping Trauma | Meerut Court Identification

Sunil Pal Kidnapping Trauma | Meerut Court Identification

30 मिनट पहले कॉपी लिंक कॉमेडियन सुनील पाल सोमवार को मेरठ की एक अदालत पहुंचे। यहां उन्होंने 2024 के किडनैपिंग मामले में पकड़े गए दो आरोपियों की शिनाख्त (पहचान) की। इस दौरान 58 साल के सुनील पाल काफी भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि उस हादसे के 16 महीने बीत जाने के बाद भी वे गहरे सदमे में हैं और उनकी सामान्य जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। लूट के इरादे से हुआ था अपहरण यह पूरा मामला दिसंबर 2024 का है। सुनील पाल को हरिद्वार के एक इवेंट में परफॉर्म करने के लिए बुलाया गया था। जब वे नेशनल हाईवे से जा रहे थे, तब उन्हें कथित तौर पर किडनैप कर लिया गया। आरोपियों ने उन्हें करीब 24 घंटे तक बंधक बनाकर रखा था और बाद में छोड़ दिया था। सुनील ने बताया कि वह इवेंट असल में उन्हें फंसाने के लिए एक झांसा था। अब इसी मामले में वे अपने वकील और दोस्त के साथ मेरठ कोर्ट में गवाही देने पहुंचे थे। 16 महीने में 10 किलो वजन कम हुआ अदालत से बाहर आने के बाद सुनील पाल ने मीडिया से अपनी आपबीती साझा की। उन्होंने कहा, मैं पिछले 16 महीने से भारी तनाव में जी रहा हूं। इस डर और घबराहट की वजह से मेरा 10 किलो वजन कम हो गया है। अब हालत यह है कि मुंबई में भी अगर मेरे पास कोई अनजान व्यक्ति खड़ा होता है, तो मैं उसे शक की नजरों से देखता हूं। उस एक दिन की घटना ने मुझे मानसिक रूप से तोड़ दिया है। बिना जानकारी दिए घर से नहीं निकलते सुनील पाल ने बताया कि वे अब कहीं भी अकेले जाने से कतराते हैं। उन्होंने कहा, मुझे अभी भी असुरक्षित महसूस होता है। जब भी घर से बाहर निकलना होता है, तो पहले अपने दोस्त साहिबे आलम को फोन करता हूं। मैं उसे पूरी जानकारी देता हूं कि कहां जा रहा हूं और क्यों जा रहा हूं। जिस गाड़ी से सफर करता हूं, सुरक्षा के लिहाज से उसका नंबर और फोटो भी दोस्त को भेज देता हूं। एक डर हमेशा दिमाग में बना रहता है। केस का बैकग्राउंड दिसंबर 2024 में हुई इस वारदात के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया था। सुनील पाल ने मेरठ पुलिस की कार्यप्रणाली पर भरोसा जताया है। आरोपियों की पहचान होने के बाद अब इस केस में कानूनी कार्रवाई और तेज होने की उम्मीद है। सुनील का कहना है कि वे सिर्फ न्याय चाहते हैं ताकि भविष्य में किसी और कलाकार के साथ ऐसा न हो। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Sunil Pal Kidnapping Trauma | Meerut Court Identification

Sunil Pal Kidnapping Trauma | Meerut Court Identification

1 घंटे पहले कॉपी लिंक कॉमेडियन सुनील पाल सोमवार को मेरठ की एक अदालत पहुंचे। यहां उन्होंने 2024 के किडनैपिंग मामले में पकड़े गए दो आरोपियों की शिनाख्त (पहचान) की। इस दौरान 58 साल के सुनील पाल काफी भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि उस हादसे के 16 महीने बीत जाने के बाद भी वे गहरे सदमे में हैं और उनकी सामान्य जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। लूट के इरादे से हुआ था अपहरण यह पूरा मामला दिसंबर 2024 का है। सुनील पाल को हरिद्वार के एक इवेंट में परफॉर्म करने के लिए बुलाया गया था। जब वे नेशनल हाईवे से जा रहे थे, तब उन्हें कथित तौर पर किडनैप कर लिया गया। आरोपियों ने उन्हें करीब 24 घंटे तक बंधक बनाकर रखा था और बाद में छोड़ दिया था। सुनील ने बताया कि वह इवेंट असल में उन्हें फंसाने के लिए एक झांसा था। अब इसी मामले में वे अपने वकील और दोस्त के साथ मेरठ कोर्ट में गवाही देने पहुंचे थे। 16 महीने में 10 किलो वजन कम हुआ अदालत से बाहर आने के बाद सुनील पाल ने मीडिया से अपनी आपबीती साझा की। उन्होंने कहा, मैं पिछले 16 महीने से भारी तनाव में जी रहा हूं। इस डर और घबराहट की वजह से मेरा 10 किलो वजन कम हो गया है। अब हालत यह है कि मुंबई में भी अगर मेरे पास कोई अनजान व्यक्ति खड़ा होता है, तो मैं उसे शक की नजरों से देखता हूं। उस एक दिन की घटना ने मुझे मानसिक रूप से तोड़ दिया है। बिना जानकारी दिए घर से नहीं निकलते सुनील पाल ने बताया कि वे अब कहीं भी अकेले जाने से कतराते हैं। उन्होंने कहा, मुझे अभी भी असुरक्षित महसूस होता है। जब भी घर से बाहर निकलना होता है, तो पहले अपने दोस्त साहिबे आलम को फोन करता हूं। मैं उसे पूरी जानकारी देता हूं कि कहां जा रहा हूं और क्यों जा रहा हूं। जिस गाड़ी से सफर करता हूं, सुरक्षा के लिहाज से उसका नंबर और फोटो भी दोस्त को भेज देता हूं। एक डर हमेशा दिमाग में बना रहता है। केस का बैकग्राउंड दिसंबर 2024 में हुई इस वारदात के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया था। सुनील पाल ने मेरठ पुलिस की कार्यप्रणाली पर भरोसा जताया है। आरोपियों की पहचान होने के बाद अब इस केस में कानूनी कार्रवाई और तेज होने की उम्मीद है। सुनील का कहना है कि वे सिर्फ न्याय चाहते हैं ताकि भविष्य में किसी और कलाकार के साथ ऐसा न हो। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

झंडा दिवस निधि में हरदा प्रदेश में दूसरे स्थान पर:लक्ष्य से दोगुनी राशि संग्रह, 11 साल से टॉप तीन में, राज्यपाल के हाथों कलेक्टर सम्मानित

झंडा दिवस निधि में हरदा प्रदेश में दूसरे स्थान पर:लक्ष्य से दोगुनी राशि संग्रह, 11 साल से टॉप तीन में, राज्यपाल के हाथों कलेक्टर सम्मानित

भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में सशस्त्र सेना झंडा दिवस निधि संग्रहण में हरदा जिले को पूरे प्रदेश में दूसरा स्थान मिला है। इस उपलब्धि के लिए राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मंगलवार को कलेक्टर सिद्धार्थ जैन को सम्मानित किया। हरदा जिले ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए निर्धारित लक्ष्य 2,75,900 रुपए के मुकाबले 6,20,725 रुपए की राशि एकत्रित की। यह राशि निर्धारित लक्ष्य से काफी अधिक है, जिसके कारण जिले को यह सम्मान प्राप्त हुआ। यह सम्मान लोक भवन, भोपाल में आयोजित समामेलित विशेष निधि प्रबंधन समिति की 25वीं वार्षिक बैठक के दौरान प्रदान किया गया। बैठक की अध्यक्षता राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने की, जिन्होंने सिविल सेवा दिवस के अवसर पर कलेक्टर जैन को प्रशस्ति पत्र और ट्रॉफी भेंट की। कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने बताया कि हरदा जिला पिछले 11 वर्षों से लगातार “झंडा दिवस निधि” के लिए लक्ष्य से अधिक राशि संग्रहण के मामले में प्रदेश के शीर्ष तीन जिलों में शामिल रहा है।

जंगल में उगने वाला ये ‘अनदेखा फूल’ निकला सेहत का खजाना, जानिए इसके गजब फायदे

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Last Updated:April 21, 2026, 18:03 IST Sleeping Hibiscus| Wax mallow: यह बहुत अजब गजब बात है कि हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला में कई जंगली फल और फूल ऐसे भी पाए जाते है जो दिखने में तो होते ही खूबसूरत हैं, लेकिन इसके साथ साथ स्वास्थ्य लाभों के लिए भी रामबाण साबित होते हैं. ऐसा ही एक फूल, जिसे स्लीपिंग हिबिस्कस कहते हैं. इसे खाया भी जा सकता है और इसकी हर्बल टी भी बनाई जा सकती है. हिमाचल में जंगली फूल सिर्फ सुंदरता ही नहीं, यहां पाए जाने वाले कई किस्म के फूल स्वाद और स्वास्थ्य का अद्भुत संगम भी होते हैं. ‘स्लीपिंग हिबिस्कस’ जिसे स्थानीय भाषा में लाल फूल भी कहते हैं… यह एक ऐसा गजब का फूल है, जिसे खाया जा सकता है. इन फूलों की प्रजाति हिमालयन क्षेत्रों में पाई जाती है और अक्सर यह जंगल में प्राकृतिक रूप से पनपते हैं. इसकी चमकदार लाल पंखुड़ियां कभी भी पूरी तरह से नहीं खुलती हैं, जैसे कि वे सो रहे हैं… इसलिए इसका नाम ( sleeping hibiscus) है. जंगल में पाए जाने और इसके गुणों के बारे में पता न होने की वजह से इसे इंसानों द्वारा नजरअंदाज किया जाता रहा है. जबकि यह बहुत अदभुद फूल है, जो सजावट के साथ साथ खाने में भी उपयोग किया जा सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google लोकल 18 से बातचीत में मंडी की मशहूर वाइल्ड फूड प्लांट्स स्पेशलिस्ट डॉ. तारा सेन ज्योति जी ने बताया है कि इस फूल में गजब के औषधीय गुण पाए जाते हैं जो सूजन कम करते हैं और साथ ही इसके सेवन से पाचन शक्ति भी अच्छी रहती है. डॉ. तारा सेन के मुताबिक यह फूल सिर्फ सजावट के लिए ही नहीं बल्कि इनका उपयोग खाने में भी किया जा सकता है. इसके मीठे गुलकंद बनाए जा सकते हैं. इसकी पत्तियों को सुखा कर हर्बल टी के तौर पर इसका सेवन किया जा सकता है, जो शरीर के लिए लाभकारी सिद्ध होता है. इसका मीठा गुलकंद बनाने के लिए पहले इसे इकट्ठा कर लें और फिर इसकी पत्तियों को अलग अलग कर सुखा लें. उसके बाद इसकी सूखी पत्तियों को चीनी के साथ मिला कर धूप में कुछ समय रखना होगा, जिसके बाद यह तैयार हो जाएगा. हालांकि गुलकंद गुलाब की पत्तियों से बनता है लेकिन यह स्लीपिंग हिबिस्कस की पत्तियों से भी बनाया जा सकता है. इस फुल (स्लीपिंग हिबिस्कस) का एक और उपयोग भी किया जा सकता है. इसकी पत्तियों को सुखा कर खौलते पानी में चाय पत्ती की जगह इसे डाल लें और शुगर ऐड कर आप इसकी हर्बल टी भी बना सकते हैं जो पीने में काफी टेस्टी और हेल्दी होती है. स्किन में ग्लो लाने के लिए भी इसे कंज्यूम किया जा सकता है. हिमालयी फूल ( स्लीपिंग हिबिस्कस) आस पास जंगल झाड़ियों में उगता है लेकिन गुणकारी होने के बावजूद लोग इसकी महत्वता को नहीं समझ पाते और यह आज भी अंडररेटेड फूल है.  First Published : April 21, 2026, 18:03 IST