गर्मी में गन्ने का रस या नींबू पानी, क्या पीना है सेहत के लिये ज्यादा फायदेमंद?

गर्मी का मौसम आते ही शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखना सबसे बड़ी जरूरत बन जाता है. ऐसे में सबसे ज्यादा लोग गन्ने का रस और नींबू पानी का सहारा लेते हैं. दोनों ही पेय गर्मी में बेहद लोकप्रिय हैं, लेकिन सवाल यह है कि सेहत के लिहाज से इनमें से क्या ज्यादा बेहतर है? आइए दोनों की तुलना विस्तार से समझते हैं. गन्ने का रस: फायदे और नुकसानगन्ने का रस प्राकृतिक मिठास और ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत माना जाता है. फायदे:यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक शुगर होती है.लू लगने से बचाता है और शरीर को ठंडक देता है.आयरन, पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स से भरपूर होता है.लीवर के लिए फायदेमंद माना जाता है और पीलिया में भी सहायक हो सकता है.थकान और कमजोरी जल्दी दूर करता है. नुकसान:बाजार में मिलने वाला गन्ने का रस कई बार अस्वच्छ पानी या गंदे बर्तनों में बनाया जाता है, जिससे संक्रमण का खतरा रहता है.एक गिलास गन्ने के रस में शुगर की मात्रा ज्यादा होती है, जो डायबिटीज वालों के लिए नुकसानदायक हो सकती है.अधिक मात्रा में पीने से वजन बढ़ने की संभावना रहती है. नींबू पानी: फायदे और सीमाएंनींबू पानी गर्मी में सबसे ज्यादा भरोसेमंद और हल्का पेय माना जाता है. फायदे:शरीर में पानी की कमी पूरी करता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है.विटामिन C से भरपूर होने के कारण इम्युनिटी बढ़ाता है.पाचन तंत्र को सुधारता है और पेट को हल्का रखता है.कम कैलोरी वाला पेय है, वजन नियंत्रित रखने में सहायक.घर पर आसानी से स्वच्छ तरीके से बनाया जा सकता है. सीमाएं:इससे उतनी तुरंत ऊर्जा नहीं मिलती जितनी गन्ने के रस से.ज्यादा खट्टा या ज्यादा नमक‑चीनी डालने से पेट में जलन हो सकती है. कौन‑सा पीना है बेहतर?अगर आप तुरंत ऊर्जा चाहते हैं, बहुत ज्यादा थकान महसूस कर रहे हैं या बाहर ज्यादा काम करते हैं, तो सीमित मात्रा में गन्ने का रस फायदेमंद हो सकता है.लेकिन अगर आप डेली हाइड्रेशन, हल्का पाचन और सुरक्षित विकल्प चाहते हैं, खासकर वजन या शुगर का ध्यान रखते हैं, तो आपके लिये नींबू पानी बेहतर विकल्प है. गर्मी में दोनों पेय अपने‑अपने फायदे रखते हैं. सही विकल्प आपकी सेहत, जरूरत और मात्रा पर निर्भर करता है. सबसे अच्छा तरीका यह है कि नींबू पानी रोजमर्रा में पिएं और गन्ने के रस का सेवन कभी‑कभार, साफ‑सफाई का ध्यान रखते हुए करें, संतुलन ही गर्मी में स्वस्थ रहने की कुंजी है.
आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए ठोस नीति की मांग:आगर मालवा में भारतीय मजदूर संघ ने वेतन, सुरक्षा और श्रम अधिकारों को लेकर रखी 17 सूत्रीय मांग

आगर मालवा में भारतीय मजदूर संघ की जिला इकाई ने मंगलवार को आउटसोर्स और ठेका कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम 17 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। संघ के पदाधिकारियों ने कंपनी गार्डन से रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर एसएलआर प्रीति चौहान को ज्ञापन दिया। सामाजिक सुरक्षा और वेतन को लेकर उठाए सवाल ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारी विभिन्न विभागों, उद्योगों और संस्थानों में कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें सामाजिक सुरक्षा, उचित वेतन और श्रम कानूनों का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। संघ ने ‘आउटसोर्स सर्विस सिक्योरिटी एक्ट’ या निगम मंडल के गठन की मांग की है। ओवरटाइम, समय पर वेतन और सीधा भुगतान की मांग संघ ने मांग रखी कि 8 घंटे से अधिक कार्य पर ओवरटाइम दिया जाए और हर माह की 7 तारीख तक वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही वेतन पर्ची उपलब्ध कराने और बिचौलिया प्रथा समाप्त कर सीधे विभाग से भुगतान की व्यवस्था करने की बात कही गई। ज्ञापन में अनुभव के आधार पर वेतन वृद्धि, संविदा या नियमित भर्ती में प्राथमिकता, बिना जांच के सेवा समाप्ति पर रोक और शिकायतों की उच्च स्तरीय जांच की मांग भी शामिल है। ईएसआई, ईपीएफ और बीमा कवर की मांग संघ ने ईएसआई, ईपीएफ, 20 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा, समान कार्य के लिए समान वेतन और साप्ताहिक अवकाश सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही सेवा समाप्ति के खिलाफ अपील के लिए एक समिति गठित करने का अनुरोध किया गया। संघ ने नियमित कार्यों में लगे कर्मचारियों को 62 वर्ष तक सेवा का अवसर देने और रिक्त पदों पर समायोजन के लिए नीति बनाने की भी मांग की। भारतीय मजदूर संघ ने अपनी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।
वे तेलंगाना राज्य ‘बंगाल-तमिलनाडु’ में प्रचार के शोर में चले गए, अब 23 अप्रैल को डेमोक्रेटिक पार्टी के भाग्य पर निर्णय

विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में पहले चरण के मतदान से 48 घंटे पहले अब मंगलवार को चुनाव का प्रचार किया गया है। तमिल में सभी 234 पर 23 अप्रैल को मतदान होना है। वहीं बंगाल में पहले चरण की 152 सीट पर वोटिंग होगी। चुनावी प्रचार के बाद किसी भी तरह की सार्वजनिक रैली और राजनीतिक प्रचार अब उम्मीदवार नहीं कर सकता। तमिल की सभी सामग्री पर मतदान होगा तमिल की बात करें, तो इस बार एक साथ सभी 234 रिज्यूमे पर वोटिंग होगी। इस बार राज्य में कुल 4,023 अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इस बार सभी के सहयोगी राज्य के अभिनेता से नेता बने विजय पार्टी टीवीके पर भी हैं। राज्य की कई सिफारिशों पर टीवीके को काफी समर्थन मिल रहा है। इस चुनाव में कुल 5.73 करोड़ वोट का खर्चा आया। बंगाल में 152 नामांकन पर पहले चरण का मतदान होगाबंगाल की 152 सीटों पर पहले चरण का मतदान होना है। 4 मई को सभी पश्चिमी राज्यों की गिनती की जाएगी। इस बार पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण में मतदान होना है। पहले चरण में कुल 1,478 प्रतियोगिता मैदान हैं। करीब तीन करोड़ 60 लाख 77 हजार 171 कलाकार अपने मत का उपयोग करेंगे। इन कॉलेजों में एक करोड़ 75 लाख 77 हजार 210 महिलाएं हैं। इस बार प्रचार में महिलाओं से लेकर सबसे प्रमुख मुसलमानों तक ने सभी विश्वविद्यालयों को शामिल किया है। इन चतुर्थांश पर बंगाल में होगी वोटिंग चुनाव आयोग की जानकारी के मुताबिक, बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण के लिए 23 अप्रैल से 16 अप्रैल तक 152वें चरण में मतदान होगा। इनमें उत्तर बंगाल के आठ, दक्षिण बंगाल के तीन और जंगलमहल क्षेत्र के पांच जिले शामिल हैं। मुर्शिदाबाद की 22, कुशबिहार की नौ, जलपाईगुड़ी की सात, अलीपुरद्वार की पांच, क्लिंपोंग की एक, दार्जिलिंग की पांच, उत्तर दिनाजपुर की नौ, दक्षिण दिनाजपुर की छह, मालदा की 12, बीरभूम की 11, पश्चिम बुद्धमान की नौ, पूर्व मेदिनीपुर की 16, पश्चिम मेदिनीपुर की 15, ओझाग्राम की चार, पुरुलिया की नौ और बांकुड़ा की 12 देवता शामिल हैं. यह भी पढ़ें: बंगाल-तमिलनाडु चुनाव में गड़बड़ी रोकने के लिए EC का मेगा प्लान! एक सेकंड के लिए भी बंद हुआ कैमरा तो फिल्मी वोट!
Japan Lifts Arms Export Ban

33 मिनट पहले कॉपी लिंक जापान ने सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद अपनी शांतिवादी नीति में बड़ा बदलाव किया है। प्रधानमंत्री साने ताकाइची की कैबिनेट ने घातक हथियारों के निर्यात पर लगी दशकों पुरानी रोक हटा दी है। इसके तहत अब जापान फाइटर जेट, मिसाइल और वॉरशिप जैसे हथियार दूसरे देशों को बेच सकेगा। मंगलवार को X पर पोस्ट करते हुए ताकाइची ने कहा कि अब सभी रक्षा उपकरणों का ट्रांसफर संभव होगा। उन्होंने कहा कि हथियार सिर्फ उन देशों को दिए जाएंगे जो UN चार्टर (संविधान) के मुताबिक उनका इस्तेमाल करने का वादा करेंगे। जापान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि कई देश जापानी हथियार खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। हाल ही में जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच 7 अरब डॉलर का समझौता हुआ है। इसके तहत मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के लिए 11 में से पहले 3 वॉरशिप बनाएगी। इससे पहले 1976 में लागू प्रावधानों के तहत जापान सिर्फ गैर-घातक सैन्य उपकरण ही निर्यात कर सकता था। इनमें निगरानी और माइन स्वीपिंग जैसे उपकरण शामिल थे। ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस और जापान के रक्षा मंत्री कोइजुमी शिंजिरो ने मेलबर्न में मेमोरेंडम पर साइन किए। जापान की ‘शांतिवादी नीति’ क्या थी सेकेंड वर्ल्ड वॉर और हिरोशिमा-नागासाकी परमाणु हमले के बाद जापान ने तय किया कि वह युद्ध से दूर रहेगा। संविधान के आर्टिकल 9 में साफ लिखा गया कि जापान युद्ध नहीं करेगा और सेना सिर्फ आत्मरक्षा तक सीमित रहेगी। इसी वजह से जापान ने सेल्फ डिफेंस फोर्स (SDF) बनाई। 1976 में जापान ने घातक हथियारों के निर्यात पर लगभग पूरी तरह रोक लगा दी। हालांकि 2014 में थोड़ी ढील दी गई लेकिन सख्त सीमाएं बनी रहीं। अब नए फैसले में जापान ने अपनी शांति नीति में बड़ा बदलाव किया है। 17 देश जापान से हथियार खरीद सकते हैं अल जजीरा के मुताबिक, इस फैसले के तहत कम से कम 17 देश जापान से हथियार खरीद सकेंगे। इसमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं। अगर और देश जापान के साथ समझौते करते हैं तो यह सूची बढ़ सकती है। वहीं, जापानी अखबार असाही के मुताबिक जापान उन देशों को हथियार नहीं बेचेगा जहां फिलहाल युद्ध चल रहा है। हालांकि विशेष परिस्थितियों में जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला हो तो इसमें छूट दी जा सकती है। बदलते सुरक्षा माहौल का असर बदलते सुरक्षा हालात की वजह से यह बदलाव लाया गया हैं। खासतौर पर इंडो-पैसिफिक में चीन की बढ़ती ताकत, उत्तर कोरिया के मिसाइल टेस्ट और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे घटनाक्रम इसकी बड़ी वजह माने जा रहे हैं। अब जापान सिर्फ शांतिवादी देश नहीं रहना चाहता बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा में एक सक्रिय और जिम्मेदार साझेदार बनना चाहता है। अल जजीरा के मुताबिक, ताकाइची ने इस फैसले को बदलते वैश्विक हालात से जोड़ा। उनके अनुसार, मौजूदा समय में कोई भी देश अकेले अपनी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता इसलिए सहयोग और साझेदारी जरूरी हो गई है। जापान के डिफेंस इंडस्ट्री को क्या फायदा होगा जापान के इस फैसले को सिर्फ विदेश नीति का बदलाव नहीं, बल्कि उसके डिफेंस इंडस्ट्री के लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। दशकों तक हथियार निर्यात पर रोक होने की वजह से जापान की रक्षा कंपनियां घरेलू ऑर्डर तक सीमित थीं जिससे उनकी ग्रोथ धीमी रही। अब यह बाधा हटने से कंपनियों के लिए वैश्विक बाजार खुल गया है जिससे घरेलू डिफेंस इंडस्ट्री को स्केल (पैमाना) बढ़ाने का मौका मिलेगा। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जापानी कंपनियों को बड़े पैमाने पर नए ग्राहक मिलेंगे। अभी तक अमेरिका, रूस और यूरोपीय देशों का हथियार बाजार पर दबदबा था, लेकिन अब जापान भी इसमें एंट्री कर रहा है। रोजगार और इकोनॉमी पर भी इसका असर पड़ेगा। डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में नई नौकरियां बनेंगी, सप्लाई चेन मजबूत होगी और छोटे-छोटे सप्लायर भी इस इकोसिस्टम से जुड़ेंगे। इससे जापान की अर्थव्यवस्था को भी सपोर्ट मिलेगा। ———————- यह खबर भी पढ़ें… जापान में 7.7 तीव्रता का भूकंप, सुनामी की चेतावनी:बुलेट ट्रेन रोकनी पड़ी; सरकार बोली- आगे और बड़े भूकंप आ सकते हैं जापान में सोमवार दोपहर 1:23 बजे (भारतीय समयानुसार) 7.7 तीव्रता का जोरदार भूकंप आया। भूकंप का केंद्र तट से करीब 100 किमी दूर समुद्र में 20 किमी गहराई पर था। जापानी मौसम एजेंसी (JMA) ने तटीय इलाकों में 3 मीटर तक ऊंची सुनामी की चेतावनी जारी की है। साथ ही और भी बड़े भूकंप के लिए तैयार रहने को कहा है। भूकंप के बाद इवाते प्रांत में करीब 3 फीट, मियाको और हाचिनोहे में डेढ़ फीट तक लहरें दर्ज की गईं। इन इलाकों में पानी का स्तर बढ़ रहा है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
पेन किलर के साथ भूलकर भी न खाएं ये दवा, शरीर में बन जाएगी जहर, नई स्टडी में चेतावनी

Last Updated:April 21, 2026, 16:48 IST Painkiller turn Toxic : शरीर में दर्द होने पर पेनकिलर दवाइयां लोग लेते ही रहते हैं लेकिन इन पेनकिलर दवाइयों के साथ अगर आप कुछ खास तरह की दवाइयां साथ में लेते हैं तो लेने के देने पड़ सकते हैं. यहां तक कि अस्पताल जाने की नौबत भी आ सकती है. यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के एक नए अध्ययन पूरी दुनिया को चौंका दिया है. इस स्टडी में कहा गया गैबापेंटिनोइड्स के साथ कुछ दवाइयों के इतने ज्यादा साइड इफेक्ट हैं कि इससे भारी मुसबतों का सामना करना पड़ सकता है. इन दवाओं के कॉन्बिनेशन से ड्रग प्वाइजन का खतरा. यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन के शोधकर्ताओं ने अपने एक अध्ययन से दुनिया को चौंका दिया है. इस अध्ययन में कहा गया है कि गैबापेंटिनोइड्स जैसी पेनकिलर दवाइयों के साथ कुछ दवाओं को लेकर पर यह शरीर में जहर बनने लगती है. इसका दुष्प्रभाव इतना ज्यादा है कि इस कारण अस्पताल जाने की नौबत तक आ सकती है. अब सवाल है कि ये दवाइयां कौन-कौन सी है. डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक अगर पेनकिलर वाली gabapentinoids को ली जाए और इसके साथ डियाजीपाम या वैलियम जैसी दवा भी साथ में ली जाए तो यह ड्रग प्वाइजन बन सकती है. इन दवाओं को साथ में लेने पर अस्पताल पहुंचने की आशंका 30 प्रतिशत बढ़ जाती है. ऐसे में अपनी मर्जी से कभी भी इन दवाओं को साथ में नहीं लेनी चाहिए. अस्पताल पहुंचने का खतरा 30 फीसदी ज्यादा गैबापेंटिनोइड्स नसों के दर्द में इस्तेमाल होने वाली आम दवा है जो शरीर में दर्द, मिर्गी और एंग्जाइटी में भी खाई जाती है. ये दवाइयों उन न्यूरोट्रांसमीटर के रिलीज को कम करती है जिससे दर्द होती है. लेकिन इन दवाइयों का व्यापक पैमाने पर मिसयूज होने लगी है. शोध में यह भी सामने आया कि बेंजोडायजेपीन benzodiazepines जैसे Diazepam और Valium को गैबापेंटिनोइड्स के साथ लेने पर ड्रग पॉइजनिंग के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा दोगुना हो जाता है. वहीं ओपिओइड दवाएं जैसे Codeine, Tramadol और Morphine—को गैबापेंटिनोइड्स के साथ लेने पर अस्पताल में भर्ती होने का खतरा लगभग 30 प्रतिशत बढ़ा हुआ पाया गया.इन जोखिमों के बावजूद अध्ययन में शामिल करीब 90 प्रतिशत मरीजों को गैबापेंटिनोइड्स के साथ ओपिओइड्स भी दी गई थीं, जबकि आधे से अधिक मरीजों को बेंज़ोडायजेपीन दवाएं भी दी गई थीं.शोध में पाया गया कि जो लोग गैबापेंटिनोइड्स और बेंज़ोडायजेपीन दोनों लेते हैं, उनमें इलाज शुरू करने के पहले चार हफ्तों में ड्रग पॉइजनिंग के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा चार गुना तक बढ़ जाता है, तुलना में उन समयों के जब वे इनमें से कोई दवा नहीं ले रहे थे. इसी तरह, गैबापेंटिनोइड्स को ओपिओइड्स के साथ लेने पर भी खतरा दोगुना पाया गया. शोधकर्ताओं ने पाया कि 89 प्रतिशत प्रतिभागियों ने किसी न किसी समय ओपिओइड्स के साथ गैबापेंटिनोइड्स लिए, जबकि 55 प्रतिशत को कुछ समय के लिए बेंज़ोडायजेपीन भी दी गई थीं. 65 देशों में दवा का इस्तेमाल बढ़ाअध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. केनेथ मैन ने कहा, हाल के वर्षों में गैबापेंटिनोइड्स के प्रिस्क्रिप्शन तेजी से बढ़े हैं. यानी डॉक्टर इस दवा को मरीजों को लेने की सलाह देते है क्योंकि ओपिओइड्स के मुकाबले यह सुरक्षित माना जाता है. इसमें कोई संदेह नहीं कि ये दवा दर्द से राहत देने में प्रभावी है लेकिन इनके साथ कुछ खतरा भी है जिनके प्रति डॉक्टरों और मरीजों दोनों को सतर्क रहना चाहिए. इस दवा को इंग्लैंड में हर साल 45 लाख से अधिक लोगों को दी जाती हैं. वहीं अमेरिका में भी सातवीं सबसे ज्यादा प्रिस्क्राइब की जाने वाली दवाओं में शामिल हैं. यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन के पहले के शोध में पाया गया कि 2008 से 2018 के बीच 65 देशों में इनका उपयोग चार गुना से ज्यादा बढ़ गया है. साइड इफेक्ट पर क्या आते हैं लक्षण रिपोर्ट के मुताबिक अगर गैबापेंटिनोइड्स और वेलियम दवाओं के कॉम्बिनेशन से ड्रग पॉइजनिंग होता है तो इसमें सबसे पहले कंफ्यूजन यानी हर चीज में भ्रम होने लगती है, दिशा का ज्ञान नहीं रहता. इसके लिए मतली और दौरे भी आ सकते हैं. अगर सांस लेने वाली नली में रुकावट आ जाए तो मरीज की मौत भी हो सकती है. गंभीर मामलों में तत्काल अस्पताल में भर्ती करना जरूरी होता है, जहां डॉक्टर एंटीडोट दवाओं से इसका इलाज करते हैं. ब्रिटेन में हर साल लगभग 10,000 लोगों को ड्रग पॉइजनिंग के कारण अस्पताल ले जाया जाता है. इस अध्ययन में गैबापेंटिनोइड्स से जुड़े कई जानबूझकर और अनजाने में हुए पॉइजनिंग के मामले सामने आए, जिनमें दवा का गलत इस्तेमाल या निर्धारित मात्रा से ज्यादा खुराक लेना भी शामिल था.डॉ. कैनेथ मान ने कहा कि गैबापेंटिनोइड्स दवा को लिखते समय सावधानी बरतनी चाहिए, खासकर जब मरीज अन्य दवाएं भी ले रहा हो. साथ ही मरीजों की करीबी निगरानी जरूरी है. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 21, 2026, 16:48 IST
अशोकनगर में 17 मांगों को लेकर आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रदर्शन:समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा और 62 वर्ष सेवा की मांग, कलेक्ट्रेट पहुंच सौंपा ज्ञापन

अशोकनगर में मंगलवार को भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने तहसील प्रांगण में धरना दिया और फिर रैली निकालकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार भारतेंदु यादव को ज्ञापन सौंपा। यह रैली जिला अध्यक्ष हरि सिंह रघुवंशी (हैरी) के नेतृत्व में निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए। ज्ञापन का वाचन जिला मंत्री शिशुपाल यादव ने किया। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि विभिन्न विभागों, उद्योगों और संस्थाओं में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान प्रदेश और कर्मचारियों दोनों के हित में है। वेतन का समय पर भुगतान करने की मांग कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में आउटसोर्स नीति बनाना, सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना और उचित वेतन प्रदान करना शामिल है। उन्होंने श्रम कानूनों का पालन करने, 8 घंटे से अधिक कार्य करने पर अतिरिक्त भुगतान देने, वेतन का समय पर भुगतान करने और बिचौलिया प्रथा को समाप्त करने की भी मांग की। अन्य मांगों में समान कार्य के लिए समान वेतन, बिना किसी ठोस कारण के नौकरी से न निकालना, ईएसआई-ईपीएफ जैसी सुविधाएं प्रदान करना, 62 वर्ष तक सेवा का प्रावधान, 20 लाख रुपए का दुर्घटना बीमा और नियमित पदों पर समायोजन की नीति बनाना शामिल है। कर्मचारियों ने साप्ताहिक अवकाश और कौशल विकास प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की। इस प्रदर्शन में वरिष्ठ नागरिक परिषद के प्रदेश सचिव रामवीर सिंह रघुवंशी, अजमेर सिंह रघुवंशी, प्रतिराज यादव, रामकुमार यादव, राहुल रघुवंशी, अभिषेक रघुवंशी, सुनील शर्मा, सतीश रघुवंशी, वीरभद्र यादव, देवेंद्र केवट और गौरव नामदेव सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी एवं पदाधिकारी मौजूद रहे।
एक्सक्लूसिव: ‘तृणमूल कांग्रेस है, बंगाल सुरक्षित नहीं’, शिक्षा मंत्री ने कहा, ‘टीएमसी का मतलब है बंगाल’

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने तैयारी पूरी कर ली है। ममता बनर्जी की वैष्णवी कांग्रेस की अगली कड़ी प्रतियोगिता में शामिल होने का इरादा मैदान में है। देश के शिक्षा मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता डेमोक्रेट प्रधान ने बंगाल चुनाव से जुड़े कई अहम संगठनों से एबीपी न्यूज पर खास बातचीत की। उन पर संग्रहालय बनाने का आरोप लगाया गया। डेमोक्रेट प्रधान ने इसके साथ ही भाजपा के स्मारकों का भी ज़िक्र किया। धर्मप्रमुख का कहना है कि भाजपा सभी को चुनकर चुनती है और उनका लक्ष्य बंगाल की जनता को सुशासन और एक वैकल्पिक सरकार देना है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में, विशेष रूप से 2019 के बाद, बीजेपी बंगाल में ‘तीसरे नंबर की पार्टी’ से एक ‘प्रभावशाली ताकत’ उभरी है और लगभग 38-40 फीसदी वोट शेयर हासिल किया है। उनका मानना है कि इस बार बंगाल में भाजपा को सेवा करने का अवसर मिलेगा बीजेपी बंगाल में किन आंकड़ों पर लड़ेगी चुनाव डेमोक्रेट प्रधान ने कहा कि बंगाल चुनाव में बीजेपी के लिए कई मुद्दे अहम होंगे. उन्होंने कहा कि नौकरियाँ और नौकरियाँ अहम वस्तुएँ होंगी। इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा, घुसपैठिए (स्थानीय सरकार द्वारा घुसपैठियों को धोखा देने का आरोप), सोनार बंगला (बंगाल को शिक्षा, संस्कृति और कला के क्षेत्र में फिर से देश का नेतृत्व करने वाला प्रांत बनाना) भी मुद्दा है। ममता बनर्जी के वारंट पर पलटवार डेमोक्रेट प्रधान ने ममता बनर्जी के वेतन पर भी दिया जवाब. उन्होंने ममता बनर्जी द्वारा चुनाव में ‘युद्ध की सजा’ भेजे जाने के आरोप को बेबुनियाद बताया। उन्होंने 1971 के आर. के. लक्ष्मण के एक कार्टून का हवाला देते हुए कहा गया कि ममता जी के पास कोई वास्तविक संतुष्टि नहीं है। प्रवासी बलिया मामले पर क्या बोले डेमोक्रेट प्रधान उन्होंने ममता बनर्जी के उस आरोप को ‘बेबुनियाद’ बताया जिसमें कहा गया था कि बीजेपी प्रवासी बंगालियों के धार्मिक ग्रंथों पर अमल कर रही है। उन्होंने कहा, ‘चुनाव लोगों के लिए एक उत्सव है और वे अपनी इच्छा से वापस आ रहे हैं।’ डेमोक्रेट प्रधान ने बंगाल की चुनाव प्रक्रिया को देश के अंतिम आदर्शों से अलग बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 50 वर्षों में (पहले कम्युनिस्ट और अब के दशक में) ‘संत्रास’ विचारधाराओं को डराने-धमकाने का एक नया नाम बनाया गया है। उन्होंने नाव के ‘खेला’ को एक खतरनाक खतरा बना दिया। झालमुड़ी की राजनीति पर क्या बोले शिक्षा मंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झालमुडी टीम की ओर से ममता बनर्जी को ‘पूरी तरह से पीएलडी ड्रामा’ कहे जाने पर प्रधान ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसी निर्मल ममता न केवल प्रधानमंत्री का, बल्कि बंगाल में झालमुड़ी बेचने वाले आम आदमी का भी अपमान कर रही हैं। उनके अनुसार, जब कोई व्यक्तिगत अनिश्चितता होती है, तब वह इस तरह की आरक्षित बातें करता है। यह भी पढ़ें: पीस टॉक में बलि का बकरा कौन, जेडी वेंस या नेतन्याहू? असली खेलेंगे पुराना गेम या फिर रहस्य के पीछे है रहस्य
‘सांसदों पर आक्षेप लगाना’: कांग्रेस ने राष्ट्र के नाम संबोधन पर पीएम मोदी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस दिया | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:21 अप्रैल, 2026, 16:40 IST वेणुगोपाल ने आरोप लगाया, “देश के सर्वोच्च कार्यकारी पदाधिकारी द्वारा इस तरह के बयान विशेषाधिकार का गंभीर उल्लंघन और सदन की अवमानना हैं।” वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार के संसद में अपेक्षित बहुमत नहीं जुटा पाने के बाद विपक्षी दलों की आलोचना करने के लिए प्रधानमंत्री का राष्ट्र को संबोधित करना “अभूतपूर्व, अनैतिक और सत्ता का खुला दुरुपयोग” है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक विशेषाधिकार नोटिस दायर किया है, जिसमें उन पर पिछले सप्ताह राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान विपक्षी सांसदों पर आक्षेप लगाने का आरोप लगाया गया है। नोटिस लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को संबोधित किया गया है, जिससे 2029 में महिला आरक्षण लागू करने पर सदन द्वारा विधेयकों को खारिज किए जाने के बाद सरकार और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ गया है। स्पीकर को लिखे एक पत्र में, कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सदस्यों पर उनके मतदान व्यवहार के लिए “उद्देश्य थोपना” जानबूझकर विशेषाधिकार का उल्लंघन और सदन की अवमानना है, उन्होंने आरोप लगाया और बिड़ला से इस मामले को विस्तृत जांच के लिए लोकसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजने का आग्रह किया। लोकसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों के नियम 222 के तहत प्रस्तुत अपने नोटिस में, उन्होंने दावा किया कि 17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 की हार के बाद 18 अप्रैल को प्रधान मंत्री ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अपने 29 मिनट के भाषण में, प्रधान मंत्री ने विधेयक को रोकने के लिए विपक्षी दलों की कड़ी आलोचना की और विपक्षी सदस्यों के वोटिंग पैटर्न का सीधा संदर्भ दिया, उनके इरादों को जिम्मेदार ठहराया। वेणुगोपाल ने कहा, “इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि एक निर्वाचित प्रतिनिधि पर अपना कर्तव्य निभाने पर सवाल उठाना न केवल व्यक्तिगत हमला है, बल्कि संसद के अधिकार और भारत के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा अपमान है।” वेणुगोपाल ने कहा कि यह अच्छी तरह से स्थापित है कि संसद सदस्यों द्वारा संसद में दिए गए भाषणों के संबंध में उन पर विचार करना, आक्षेप लगाना और इरादों पर आरोप लगाना “विशेषाधिकार का घोर उल्लंघन और सदन की अवमानना” के समान है। वेणुगोपाल ने अपने नोटिस में कहा, “इसलिए मैं विशेषाधिकार हनन का यह नोटिस आपके माननीय अध्यक्ष को सौंपता हूं, ताकि इस गंभीर घटना को स्पष्ट रूप से और जानबूझकर विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना के रूप में संज्ञान लिया जा सके और मामले को विस्तृत जांच के लिए लोकसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजा जा सके ताकि प्रधान मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार कार्यवाही शुरू की जा सके।” कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि एक निर्वाचित प्रतिनिधि पर अपना कर्तव्य निभाने पर सवाल उठाना “केवल एक व्यक्तिगत हमला नहीं है, बल्कि संसद के अधिकार और भारत के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा अपमान है”। नोटिस में कहा गया है, “माननीय अध्यक्ष, मैं आपसे आग्रह करता हूं कि संसद की पवित्रता और इसके सदस्यों को दी गई संवैधानिक सुरक्षा को बनाए रखने के लिए तत्काल और निर्णायक कदम उठाएं, ताकि इस तरह के उल्लंघनों को न तो नजरअंदाज किया जाए और न ही दोहराया जाए।” इस बीच, पूर्व सिविल सेवकों, शिक्षाविदों, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों सहित 700 से अधिक नागरिकों ने भारत के चुनाव आयोग को पत्र लिखकर 18 अप्रैल को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी द्वारा आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है। 20 अप्रैल को मुख्य चुनाव आयुक्त को संबोधित एक पत्र में, कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि महिला आरक्षण विधेयक पर प्रधान मंत्री का संबोधन एमसीसी अवधि के दौरान “चुनावी प्रचार और पक्षपातपूर्ण प्रचार” था। पीएम मोदी के संबोधन में क्या था? 18 अप्रैल को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में, पीएम मोदी ने नारी शक्ति पहल को 21वीं सदी में महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक “महान यज्ञ” बताया। उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर परिसीमन प्रक्रिया के बारे में गलत जानकारी फैलाने का भी आरोप लगाया, उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के बीच भ्रम पैदा करने के लिए भ्रामक कथाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह संशोधन महिलाओं को उनके लंबे समय से लंबित अधिकारों को प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, जो दशकों से विलंबित था, जिसकी शुरुआत 2029 के लोकसभा चुनावों से हुई थी। यह संबोधन एक प्रमुख महिला आरक्षण विधेयक के संसद में पारित होने में विफल रहने के एक दिन बाद आया। लोकसभा में शुक्रवार को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पर तीखी बहस हुई, जिसमें कुल सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 21 अप्रैल, 2026, 16:38 IST समाचार राजनीति ‘सांसदों पर आक्षेप लगाना’: कांग्रेस ने राष्ट्र के नाम संबोधन पर पीएम मोदी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केसी वेणुगोपाल विशेषाधिकार नोटिस(टी)नरेंद्र मोदी संबोधन(टी)विशेषाधिकार का उल्लंघन(टी)लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला(टी)महिला आरक्षण विधेयक(टी)संविधान 131वां संशोधन(टी)आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन(टी)भारत का चुनाव आयोग
आलिया भट्ट के नाम पर पाकिस्तान में फर्जीवाड़ा:एक्ट्रेस की AI एडिट फोटो से बेच रहे कपड़े; अलग-अलग इवेंट्स से उठाई तस्वीरें

पाकिस्तानी क्लोदिंग ब्रांड ‘वजायशा ऑफिशियल’ आलिया भट्ट की कुछ तस्वीरें पोस्ट कर विवादों में आ गया है। आलिया इन तस्वीरों में एथनिक कलेक्शन में नजर आ रही हैं। लेकिन यह कोई ऑफिशियल शूट नहीं है, बल्कि आलिया की पुरानी तस्वीरों को AI और डिजिटल एडिटिंग के जरिए ब्रांड के कपड़ों पर सुपरइम्पोज (चिपकाया) किया गया है। पाकिस्तानी ब्रांड आलिया की AI तस्वीरों के जारिए अपने सिल्क कलेक्शन का प्रमोशन कर रहा है। ऐसे पकड़ी गई ब्रांड की चोरी 16 अप्रैल को ब्रांड ने इंस्टाग्राम पर एक कैरोसेल पोस्ट किया। इसमें आलिया को गहरे लाल, टील और ब्लैक कलर के सिल्क सूट में दिखाया गया। ब्रांड ने कैप्शन में लिखा- “आलिया भट्ट को भी हमारा शीशा सिल्क कलेक्शन पसंद है।” लेकिन गौर से देखने पर पता चलता है कि ये तस्वीरें एक्ट्रेस के अलग-अलग इवेंट्स से उठाई गई हैं। इसमें आलिया का 2024 का लोरियल पेरिस रैंप वॉक वाला ‘वेट हेयर लुक’ और उनके सब्यसाची फोटोशूट के गहनों का इस्तेमाल किया गया है। यहां तक कि फरवरी 2026 के गुच्ची मिलान फैशन वीक के उनके लुक को भी एडिट किया गया है। ब्रांड बोला- ‘हमें वायरल कर दो’ इस पोस्ट पर फैंस का गुस्सा फूट पड़ा। कई लोगों ने पूछा कि क्या आलिया को इस बारे में पता भी है? इस पर ब्रांड ने बिना किसी डर के हंसने वाले इमोजी के साथ रिप्लाई किया- “इसे प्लीज वायरल कर दो, ताकि उन्हें भी पता चल जाए।” जब एक यूजर ने चेतावनी दी कि “वे तुम पर केस (Sue) कर देंगी”, तो ब्रांड ने जवाब दिया- “नहीं, वे ऐसा नहीं करेंगी।” यूजर्स ने आलिया को किया टैग सोशल मीडिया पर अब इस ब्रांड को काफी ट्रोल किया जा रहा है। कई यूजर्स ने इसे कॉपीराइट का उल्लंघन बताया है। एक यूजर ने लिखा, “यह पूरी तरह से AI का काम है, मैं यह आलिया को भेजूंगा।” फैंस लगातार आलिया भट्ट और उनकी टीम को टैग कर रहे हैं ताकि इस कमर्शियल धोखाधड़ी पर एक्शन लिया जा सके।
आलिया भट्ट के नाम पर पाकिस्तान में फर्जीवाड़ा:एक्ट्रेस की AI एडिट फोटो से बेच रहे कपड़े; अलग-अलग इवेंट्स से उठाई तस्वीरें

पाकिस्तानी क्लोदिंग ब्रांड ‘वजायशा ऑफिशियल’ आलिया भट्ट की कुछ तस्वीरें पोस्ट कर विवादों में आ गया है। आलिया इन तस्वीरों में एथनिक कलेक्शन में नजर आ रही हैं। लेकिन यह कोई ऑफिशियल शूट नहीं है, बल्कि आलिया की पुरानी तस्वीरों को AI और डिजिटल एडिटिंग के जरिए ब्रांड के कपड़ों पर सुपरइम्पोज (चिपकाया) किया गया है। पाकिस्तानी ब्रांड आलिया की AI तस्वीरों के जारिए अपने सिल्क कलेक्शन का प्रमोशन कर रहा है। ऐसे पकड़ी गई ब्रांड की चोरी 16 अप्रैल को ब्रांड ने इंस्टाग्राम पर एक कैरोसेल पोस्ट किया। इसमें आलिया को गहरे लाल, टील और ब्लैक कलर के सिल्क सूट में दिखाया गया। ब्रांड ने कैप्शन में लिखा- “आलिया भट्ट को भी हमारा शीशा सिल्क कलेक्शन पसंद है।” लेकिन गौर से देखने पर पता चलता है कि ये तस्वीरें एक्ट्रेस के अलग-अलग इवेंट्स से उठाई गई हैं। इसमें आलिया का 2024 का लोरियल पेरिस रैंप वॉक वाला ‘वेट हेयर लुक’ और उनके सब्यसाची फोटोशूट के गहनों का इस्तेमाल किया गया है। यहां तक कि फरवरी 2026 के गुच्ची मिलान फैशन वीक के उनके लुक को भी एडिट किया गया है। ब्रांड बोला- ‘हमें वायरल कर दो’ इस पोस्ट पर फैंस का गुस्सा फूट पड़ा। कई लोगों ने पूछा कि क्या आलिया को इस बारे में पता भी है? इस पर ब्रांड ने बिना किसी डर के हंसने वाले इमोजी के साथ रिप्लाई किया- “इसे प्लीज वायरल कर दो, ताकि उन्हें भी पता चल जाए।” जब एक यूजर ने चेतावनी दी कि “वे तुम पर केस (Sue) कर देंगी”, तो ब्रांड ने जवाब दिया- “नहीं, वे ऐसा नहीं करेंगी।” यूजर्स ने आलिया को किया टैग सोशल मीडिया पर अब इस ब्रांड को काफी ट्रोल किया जा रहा है। कई यूजर्स ने इसे कॉपीराइट का उल्लंघन बताया है। एक यूजर ने लिखा, “यह पूरी तरह से AI का काम है, मैं यह आलिया को भेजूंगा।” फैंस लगातार आलिया भट्ट और उनकी टीम को टैग कर रहे हैं ताकि इस कमर्शियल धोखाधड़ी पर एक्शन लिया जा सके।







