Monday, 08 Jun 2026 | 10:58 AM

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Khabar Hatke- Fan Jacket for Traffic Police; Pakistan Refugee Denied Entry; Parrot Rescue

Khabar Hatke- Fan Jacket for Traffic Police; Pakistan Refugee Denied Entry; Parrot Rescue

छत्तीसगढ़ में तोते को बचाने के लिए फायर ब्रिगेड का सहारा लेना पड़ा। वहीं, गुजरात में ट्रैफिक पुलिस की जैकेट में पंखा लगाया गया है, इसे कूलिंग जैकेट नाम दिया गया है। उधर, कनाडा में एक महिला को शरणार्थी का दर्जा दे दिया गया, लेकिन उसके पति और बेटे को द . उत्तर प्रदेश में एक नाबालिग को जेल भेज दिया गया, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई और ₹5 लाख मुआवजा देने का एलान किया। वहीं, जापान की एक महिला को गोलगप्पे इतने पसंद आए कि वह अब टोक्यो में इसकी दुकान खोलेंगी। आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

Four Thousand Weeks Book Review; Time Management

Four Thousand Weeks Book Review; Time Management

21 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक किताब का नाम- ‘फोर थाउजेंड वीक्स’ (‘फोर थाउजेंड वीक्स’ का हिंदी अनुवाद) लेखक- ऑलिवर बर्कमैन अनुवाद- मनोज पाराशर प्रकाशक- मंजुल प्रकाशन मूल्य- 399 रुपए इंसान की औसत उम्र लगभग 80 वर्ष होती है। अगर हम इसे हफ्तों में गिनें तो हमारे पास केवल 4,000 हफ्ते होते हैं। सुनने में यह संख्या बहुत बड़ी लग सकती है, लेकिन ये हफ्ते कब बीत जाते हैं, पता ही नहीं चलता है। ऑलिवर बर्कमैन की यह किताब पारंपरिक ‘टाइम मैनेजमेंट’ गाइड नहीं है। यह टाइम मैनेज करने की बजाय इस सच्चाई को स्वीकारना सिखाती है कि हमारे पास समय कम है। बर्कमैन कई वर्षों तक ‘प्रोडक्टिविटी गीक’ रहे हैं। वह बताते हैं कि समय को जितना कंट्रोल करने की कोशिश करें, यह उतना ही हाथ से फिसलता है। अगर आप हमेशा ‘क्लियरिंग द डेक’ (काम निपटाने) की होड़ में रहते हैं और फिर भी थका महसूस करते हैं, तो यह किताब सोच बदल देगी। किताब क्या कहती है? यह किताब एक कड़वी, लेकिन सुकून देने वाली सच्चाई पर आधारित है- हमारी सीमाएं हैं लेखक का तर्क है कि वर्तमान टाइम मैनेजमेंट हमें एक मशीन बनाने की कोशिश कर रहा है। हम सोचते हैं कि अगर थोड़े और एफिशिएंट हो जाएं, तो अपनी टू-डू लिस्ट की हर चीज पूरी कर लेंगे और फिर अंत में ‘सुकून’ से जिएंगे। बर्कमैन कहते हैं कि यह भ्रम है। इसे वे ‘एफिशिएंसी ट्रैप’ कहते हैं। आप जितना तेज काम करेंगे, लोग उतना ही ज्यादा काम देंगे। आप जितने जल्दी ईमेल का जवाब देंगे, उतने ही ज्यादा ईमेल आएंगे। असली समाधान ज्यादा काम करना नहीं, बल्कि यह चुनना है कि क्या ‘नहीं’ करना है। क्या सिखाती है ये किताब? यह किताब ‘हसल कल्चर’ (हर वक्त भागने की संस्कृति) के खिलाफ एक मैनिफेस्टो है। यह उनके लिए है, जो हर समय ‘बिजी’ रहते हैं और फिर भी उन्हें लगता है कि वे जीवन में कुछ सार्थक नहीं कर रहे हैं। नीचे दिए ग्राफिक से किताब के मुख्य सबक समझिए- विचार और समय के बीच का संघर्ष लेखक ने किताब में समय के इतिहास और मनोविज्ञान को गहराई से समझाया है। किताब के कुछ प्रमुख पहलू इस प्रकार हैं- 1. एफिशिएंसी का जाल हम सोचते हैं कि तकनीक हमारा समय बचाएगी। माइक्रोवेव ने घंटों का काम मिनटों में कर दिया, लेकिन क्या हम पहले से ज्यादा फुर्सत में हैं? नहीं। हमने उस बचे हुए समय को और ज्यादा काम से भर दिया है। बर्कमैन कहते हैं कि तकनीक ने हमें और अधिक बेचैन बना दिया है। अब हमें 10 सेकेंड तक वेबसाइट लोड होने का इंतजार करना भी पहाड़ जैसा लगता है। 2. ‘पे योरसेल्फ फर्स्ट’ का सिद्धांत निवेश की दुनिया में कहा जाता है कि पहले बचत करें और खर्च बाद में करें। वैसे ही समय के मामले में लेखक कहते हैं कि जो आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण है (जैसे परिवार, शौक, सेहत), उसे दिन के सबसे पहले हिस्से में रखें। अगर आप सोचेंगे कि ‘सारा काम खत्म करके’ मैं अपने शौक पूरे करूंगा, तो वह समय कभी नहीं आएगा। 3. ‘FOMO’ का अंत हम डरते हैं कि अगर एक रास्ता चुना, तो बाकी विकल्प छूट जाएंगे। बर्कमैन इसे एक सकारात्मक नजरिए से देखते हैं। वे कहते हैं कि ‘मिसिंग आउट’ की गारंटी है। आप एक साथ 10 देशों में नहीं घूम सकते, 5 करियर नहीं बना सकते। जब आप यह स्वीकार कर लेते हैं कि चुनना ही जीवन है, तो आप उस एक चुनाव का ज्यादा आनंद ले पाते हैं। 4. ‘सेटल’ होने की कला समाज कहता है- ‘कभी समझौता मत करो’। बर्कमैन कहते हैं कि यह बकवास है। आपको एक पार्टनर, एक शहर और एक करियर पर सेटल होना ही पड़ेगा, ताकि आप उसमें गहराई तक जा सकें। जो लोग कभी सेटल नहीं होते, वे असल में जीवन की सतह पर ही तैरते रह जाते हैं। खाली समय अपराध नहीं, लग्जरी है आज के दौर में अगर हम खाली बैठें, तो हमें अपराधबोध होता है। हम छुट्टी पर भी जाते हैं तो ‘नेटवर्किंग’ या ‘सेल्फ-इम्प्रूवमेंट’ की किताबें साथ ले जाते हैं। लेखक कहते हैं कि आराम को ‘अगले दिन काम करने की तैयारी’ के रूप में नहीं देखना चाहिए। आराम अपने आप में एक लक्ष्य होना चाहिए। एक ‘हॉबी’ ऐसी होनी चाहिए, जिसका कोई आर्थिक लाभ न हो, बस आनंद हो। समस्याओं के साथ जीना सीखें लेखक का एक क्रांतिकारी विचार यह है कि ‘बिना समस्याओं वाला जीवन’ केवल मृत्यु के बाद ही संभव है। जब तक आप जीवित हैं, समस्याएं रहेंगी। इसलिए समस्याओं को सुलझाने के बाद खुश होने का इंतजार न करें, बल्कि समस्याओं के बीच ही खुशी ढूंढना सीखें। कुछ कामों को टालना भी सीखें। प्रोकैस्टिनेशन का सही तरीका 1. प्राथमिकता तय करें- 5 चीजों को चुनें, जो सबसे जरूरी हैं। 2. बाकी को भूल जाएं- लेखक ने वॉरेन बफेट के एक कोट का जिक्र किया है , जो चीजें ‘कम जरूरी’ हैं, वे सबसे खतरनाक हैं क्योंकि वे आपका ध्यान भटकाती हैं। 3. कठिन से शुरुआत- जिस काम से सबसे ज्यादा डर लगता है, उसे पहले करें। 4. वर्तमान में रहें- भविष्य की प्लानिंग में इतना न खोएं कि आज का हफ्ता हाथ से निकल जाए। ये किताब किसे पढ़नी चाहिए? यह किताब हर उस इंसान के लिए है, जो जीवन में सुकून चाहता है। ग्राफिक में देखें- किताब के बारे में मेरी राय ‘फोर थाउजेंड वीक्स’ कोई साधारण मोटिवेशनल किताब नहीं है। यह आपको आईना दिखाती है। बर्कमैन की भाषा सरल है, लेकिन उनके विचार गहरे हैं। वे आपको यह कहकर डराते नहीं कि ‘समय कम है, भागो’, बल्कि वे आपको शांत करते हैं कि ‘समय कम है, इसलिए ठहर जाओ और जो जरूरी है उसे चुनो’। किताब की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह आपको ‘अजेय’ महसूस कराने के बजाय ‘इंसानी सीमाओं’ को स्वीकार करना सिखाती है। यह आपको उस भारी बोझ से आजाद कर देती है कि आपको ‘सबकुछ’ करना है। …………… ये बुक रिव्यू भी पढ़िए बुक-रिव्यू- एक दिन की सफलता के पीछे बरसों की मेहनत: रातोंरात कुछ नहीं होता, कैसे चलें कि थकें नहीं, हारें नहीं, निराशा न घेरे हर कोई बेहतर जीवन चाहता है, जहां रिश्तों में मधुरता, काम में

Oscar Speech on Deathbed, Refused Nehru Docu; First Film Loan

Oscar Speech on Deathbed, Refused Nehru Docu; First Film Loan

मुंबई27 मिनट पहलेलेखक: अभय पांडेय कॉपी लिंक सत्यजीत रे को 1992 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। एक फिल्ममेकर ने एक फिल्म बनाने की सोची, चूंकि उसमें न एक्शन था, न रोमांस, न गाने, इसलिए कोई भी प्रोड्यूसर पैसा लगाने के लिए राजी नहीं हुआ। तब उन्होंने फिल्म के लिए अपनी सेविंग, LIC पॉलिसी और यहां तक कि बीवी के जेवर भी गिरवी रख दिए और किसी तरह शूटिंग शुरू की। लेकिन बीच में ही पैसे खत्म होने के चलते शूटिंग रुक गई, तब सरकार ने लोन समझकर फिल्म बनाने के लिए पैसा दिया। जिसके चलते फिल्म किसी तरह पूरी हुई। जब फिल्म रिलीज हुई, तो पहले दो हफ्तों में रिस्पॉन्स ठंडा रहा, लेकिन तीसरे हफ्ते से हर रोज फिल्म हाउसफुल होने लगी और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी इस फिल्म से बेहद प्रभावित हुए। फिल्म ने नेशनल अवॉर्ड समेत इंटरनेशनल लेवल पर भी कई अवॉर्ड जीते और इंडियन सिनेमा को नई पहचान दी। यह फिल्म थी पाथेर पांचाली और फिल्ममेकर थे सत्यजीत रे। सत्यजीत रे की आज 34वीं डेथ एनिवर्सरी है। आइए, उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ किस्से जानते हैं। किस्सा-1 इटैलियन फिल्म देखकर फिल्ममेकिंग का फैसला किया सत्यजीत रे का जन्म 2 मई 1921 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में हुआ। उनका परिवार साहित्य और कला से जुड़ा था। पिता सुकुमार रे फेमस लेखक और चित्रकार थे। रे जब वे बहुत छोटे थे, उनके पिता का निधन हो गया। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। पिता के निधन के बाद घर की सारी जिम्मेदारी मां पर आ गई। मां ने पूरे घर को संभाला, खर्च चलाया और साथ ही नौकरी भी की। रे ने कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद शांतिनिकेतन में कला का अध्ययन किया था। सत्यजीत रे के पिता और माता की तस्वीर। सत्यजीत रे ने अपने करियर की शुरुआत एडवरटाइजिंग एजेंसी डी.जे. कीमर में ग्राफिक डिजाइनर के तौर पर की थी। उन्होंने बुक कवर डिजाइनर के तौर पर भी काम किया। उन्होंने नेहरू की डिस्कवरी ऑफ इंडिया समेत कई किताबों के कवर बनाए थे। डी.जे. कीमर के लिए सत्यजीत रे द्वारा डिजाइन किया गया एक एड। (सोर्स: सत्यराज रे की किताब ‘माई इयर्स विद अपू’) इसी दौरान उन्हें फिल्मों में दिलचस्पी बढ़ने लगी। 1947 में उन्होंने साथियों के साथ मिलकर एक फिल्म सोसाइटी बनाई, जहां विदेशी फिल्में दिखाई जाती थीं। 1949 में उनकी मुलाकात फ्रेंच डायरेक्टर ज्यां रेनॉए से हुई, जिन्होंने उन्हें फिल्में बनाने के लिए प्रेरित किया। 1950 में वे एक काम के लिए लंदन गए। वहां उन्होंने कई फिल्में देखीं, लेकिन इटैलियन फिल्म बाइसिकल थीव्स का उन पर सबसे गहरा असर हुआ। इस फिल्म को देखने के बाद उन्होंने तय किया कि वे फिल्म डायरेक्टर बनेंगे। ‘पाथेर पांचाली’ में बंगाल के एक गरीब ग्रामीण परिवार की कहानी थी, जिसे मुख्य रूप से दो बच्चों अपू और उसकी बड़ी बहन दुर्गा की नजरों से दिखाया गया है। किस्सा-2 पहली फिल्म के लिए पत्नी के गहने गिरवी रखे सत्यजीत रे के फिल्मी करियर की पहली फिल्म पाथेर पांचाली (1955) थी। यह फिल्म बंगाली लेखक विभूतिभूषण बंद्योपाध्याय के उपन्यास पर आधारित थी। रे इस उपन्यास से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इस पर अपनी पहली फिल्म बनाने का फैसला किया। हालांकि, फिल्म बनाना आसान नहीं था। रे ने फिल्म के लिए नई और अनुभवहीन टीम बनाई। फिल्म में बड़े स्टार, गाने और एक्शन नहीं था, इसलिए कोई प्रोड्यूसर पैसा लगाने को तैयार नहीं था। उन्होंने पैसे जुटाने के लिए नौकरी जारी रखी, बीमा पॉलिसी गिरवी रखी। यहां तक अपनी पत्नी ने भी गहने गिरवी रखे। इस तरह लगभग 17,000 रुपए जुटाकर उन्होंने 1952 में फिल्म की शूटिंग शुरू की। शूटिंग के दौरान उन्हें कई तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने शुरुआत में 16mm कैमरे से शूट कर उसे 35mm में बदलने का प्रयोग किया, ताकि खर्च कम हो, लेकिन प्रयोग असफल रहा। फुटेज सही नहीं आया और उन्हें फिर से शुरुआत करनी पड़ी। एक और बड़ी लोकेशन समस्या थी। एक बार तो उन्होंने एक गांव चुना था, जहां फूलों के बीच ट्रेन का सीन शूट करना था, लेकिन दोबारा पहुंचने पर गाय-भैंसों ने सारे फूल खा लिए थे। पूरा सीन खराब हो गया। फिर शूटिंग के बीच में पैसे खत्म हो गए और शूटिंग लगभग एक साल के लिए रुक गई। सत्यजीत रे की फिल्म ‘पाथेर पांचाली’ का शाब्दिक अर्थ ‘छोटे रास्ते का गीत’ होता है। किस्सा-3 घर में बैठ गया उल्लू; सरकार से लोन मिल गया सत्यजीत रे के पाथेर पंचाली बनाने के संघर्ष के दौरान एक बहुत ही दिलचस्प और रहस्यमयी घटना हुई, जिसका जिक्र उनकी किताब ‘माई इयर्स विद अपू’ में है। जैसा आपको बताया पैसे खत्म हो चुके थे और फिल्म की शूटिंग रुक चुकी थी। एक दिन सुबह जब रे जागे, तो उन्होंने अपने कमरे की खिड़की के बाहर एक सफेद-भूरा उल्लू बैठा था और लगातार उनकी तरफ देख रहा था। यह कोई सामान्य बात नहीं थी क्योंकि शहर में इस तरह का सीन बहुत कम देखने को मिलता है। धीरे-धीरे यह खबर आसपास के लोगों तक पहुंच गई। पड़ोसी अपने-अपने घरों से झांककर उस उल्लू को देखने लगे। कुछ लोग उसे भगाने की कोशिश कर रहे थे, कुछ उसे बुलाने के लिए आवाजें निकाल रहे थे, लेकिन सबसे आश्चर्यजनक बात यह थी कि उल्लू बिल्कुल भी नहीं हिला, वह लगातार वहीं बैठा रहा और उसकी नजरें रे पर टिकी रहीं। भारतीय मान्यता के अनुसार, उल्लू को देवी लक्ष्मी का वाहन माना जाता है। इसलिए लोग मानते हैं कि यदि उल्लू घर के पास दिखाई दे, तो यह धन और सौभाग्य का संकेत होता है। यही कारण था कि पड़ोसियों में उत्सुकता और थोड़ी ईर्ष्या भी थी। रे ने इस घटना को बड़े ध्यान से देखा। सबसे हैरानी की बात यह थी कि वह उल्लू लगातार दो हफ्तों तक वहीं बैठा रहा। हर सुबह जब रे उठते, तो वह उसी जगह, उसी तरह बैठा मिलता जैसे वह खास तौर पर उनके लिए ही आया हो। फिर एक दिन अचानक वह उल्लू गायब हो गया। कोई नहीं जानता कि वह कब और कैसे चला गया, लेकिन उसके जाने के कुछ समय बाद ही रे को एक बहुत

Jadejas 17th POTM & Archers Record

Jadejas 17th POTM & Archers Record

लखनऊ4 मिनट पहले कॉपी लिंक राजस्थान रॉयल्स ने IPL 2026 के 32वें मैच में लखनऊ सुपर जायंट्स को 40 रन से हरा दिया। इकाना स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी ने सबसे तेज 500 IPL रन पूरे करने का कारनामा किया। रवींद्र जडेजा ने 17वीं बार प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड जीत लिया। वहीं गेंदबाजी में जोफ्रा आर्चर राजस्थान के लिए IPL में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए। RR Vs LSG मैच के टॉप रिकॉर्ड्स-मोमेंट्स… 1. वैभव के 227 बॉल पर 500 IPL रन वैभव सूर्यवंशी ने अपने IPL करियर में 500 रन पूरे कर लिए हैं। वे लीग में सबसे कम गेंदों में यह मुकाम हासिल करने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने लखनऊ के खिलाफ मैच में पहली ही गेंद पर चौका लगाकर यह उपलब्धि हासिल की। वैभव ने सिर्फ 227 गेंदों पर 500 रन बनाए हैं। उन्होंने ग्लेन मैक्सवेल का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 260 गेंदों में अपने पहले 500 रन पूरे किए थे। हालांकि, इस मैच में वैभव 11 गेंदों पर सिर्फ 8 रन ही बना सके। 2. जडेजा ने 17वीं बार जीता प्लेयर ऑफ द मैच रवींद्र जडेजा ने IPL में 17वीं बार प्लेयर ऑफ द मैच (POTM) अवॉर्ड अपने नाम किया। खास बात यह है कि 75 मैचों के बाद पहली बार उन्होंने CSK के अलावा किसी दूसरी टीम के लिए यह अवॉर्ड जीता। इससे पहले उनके 16 POTM अवॉर्ड चेन्नई के लिए आए थे। भारतीय खिलाड़ियों में उनसे आगे सिर्फ रोहित शर्मा (21), विराट कोहली (19) और एमएस धोनी (18) हैं। 3. घर में लखनऊ की लगातार 7वीं हार लखनऊ सुपर जायंट्स को अपने होम ग्राउंड पर लगातार 7वीं हार का सामना करना पड़ा। यह IPL इतिहास में घर पर सबसे ज्यादा लगातार हार के रिकॉर्ड्स में शामिल हो गया है, जहां दिल्ली (9 हार) और डेक्कन चार्जर्स (8 हार) जैसे टीम्स इससे ऊपर हैं। 4. आर्चर बने RR के सबसे सफल गेंदबाज जोफ्रा आर्चर अब राजस्थान रॉयल्स के लिए IPL में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए हैं। उनके नाम 68 विकेट हो गए हैं। उन्होंने युजवेंद्र चहल (66) और सिद्धार्थ त्रिवेदी (65) को पीछे छोड़ दिया। यहां से टॉप-9 मोमेंट्स… 1. ऋषभ पंत ने एक हाथ से लपका शानदार कैच मोहम्मद शमी के दूसरे ओवर में लगातार एक्शन देखने को मिला, लेकिन सबसे बड़ा मोमेंट रहा ऋषभ पंत का कमाल का कैच। तीसरे ओवर की पांचवीं गेंद पर शमी ने तेज बाउंसर डाली, जिस पर यशस्वी जायसवाल ने हुक शॉट खेलने की कोशिश की। गेंद ग्लव लगकर विकेट के पीछे ऊंची गई, जहां पंत ने हवा में उछलते हुए एक हाथ से शानदार कैच लपक लिया। उनकी टाइमिंग और फुर्ती ने सभी को हैरान कर दिया। इसके बाद अगली ही गेंद पर शमी ने ध्रुव जुरेल को भी आउट कर दिया। पंत ने छलांग लगाकर जायसवाल का कैच 22 रन पर पकड़ा। 2. मोहसिन ने वैभव को मेडन डाला, आउट भी किया मोहसिन खान ने अपने पहले ही ओवर में विकेट-मेडेन ओवर डाला। चौथे ओवर की आखिरी गेंद पर वैभव सूर्यवंशी बड़ा शॉट खेलने के चक्कर में अपना विकेट गंवा बैठे। ऑफ स्टंप पर लेंथ बॉल पर उन्होंने लेग साइड में बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन संतुलन खो बैठे और गेंद ठीक से टाइम नहीं कर पाए। कवर की दिशा में गई गेंद को दिग्वेश सिंह राठी ने पीछे दौड़ते हुए शानदार कैच में बदल दिया। मोहसिन खान ने वैभव सूर्यवंशी को 8 रन पर पवेलियन भेजा। 3. वैभव के आउट होने पर गोयनका ने भगवान की तस्वीर को माथे पर लगाई मोहसिन खान की गेंद पर वैभव सूर्यवंशी के आउट होते ही LSG के मालिक संजीव गोयनका ने भगवान की तस्वीर जेब से निकालकर माथे पर लगाई। संजीव गोयनका भगवान की तस्वीर माथे से लगाते हुए। 4. पंत रनआउट करने से चूके 15वें ओवर में मयंक यादव की धीमी गेंद पर जडेजा ने स्क्वेयर लेग की ओर खेलकर एक रन लिया। इसके बाद दूसरे रन के लिए बड़ी गलतफहमी देखने को मिली। जडेजा ने पहले रन के लिए कॉल किया, फिर अपने साथी डोनोवन फरेरा को वापस भेज दिया, जो आधे रास्ते तक पहुंच चुके थे। डीप से निकोलस पूरन का थ्रो काफी खराब रहा, जिसके बाद ऋषभ पंत ने गेंद पकड़कर बेल्स उड़ाईं, लेकिन वह भी संतुलन खो बैठे। इस बीच फरेरा ने डाइव लगाकर क्रीज में वापसी कर ली। पंत रनआउट करने का मौका गंवा दिया। 5. जडेजा ने इनिंग की आखिरी बॉल पर सिक्स लगाया रवींद्र जडेजा ने राजस्थान की पारी के अंतिम ओवर में 3 बाउंड्री लगाई। मयंक यादव के ओवर में जडेजा ने 4, 2, 4, 2, 2 और आखिरी गेंद पर छक्का लगाकर कुल 20 रन बटोर लिए। आखिरी गेंद पर जडेजा ने फाइन लेग के ऊपर पुल शॉट खेलकर छक्का जड़ा और टीम का स्कोर 159/6 तक पहुंचा दिया। रवींद्र जडेजा ने 29 बॉल पर नाबाद 43 रन बनाए। 6. आयुष शून्य पर रनआउट लखनऊ की पारी के पहले ओवर की आखिरी बॉल पर आयुष रनआउट हो गए। आर्चर की तेज गेंद पर आयुष बड़ा शॉट खेलने से चूक गए और गेंद पैड से लगकर स्क्वेयर लेग की ओर चली गई। यहां कोई रन नहीं था, लेकिन दोनों बल्लेबाज दौड़ पड़े। फील्डर रवि सिंह ने तेजी दिखाते हुए सटीक थ्रो किया और बडोनी को रनआउट कर दिया। बडोनी बिना खाता खोले ही पवेलियन लौट गए। 7. पूरन के आउट होने पर जडेजा ने जेब में हाथ डालकर सेलिब्रेट किया 10वें ओवर में रवींद्र जडेजा ने निकोलस पूरन को आउट करने के बाद दिलचस्प अंदाज में जश्न मनाया। विकेट लेने के बाद जडेजा मुस्कुराते नजर आए और इशारे से बताया कि पूरन उनकी जेब में हैं। उन्होंने हाथ को अपनी पैंट की जेब में डालकर यह सेलिब्रेशन किया। गेंद ऑफ स्टंप के बाहर थी, जिस पर पूरन ने बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन टाइमिंग सही नहीं रही और गेंद हवा में चली गई। लॉन्ग-ऑन पर डोनोवन फरेरा ने आसान कैच लपक लिया। पूरन 22 रन बनाकर आउट हुए। पूरन के आउट होने के बाद जडेजा ने कुछ ऐसे सेलिब्रेट किया। 8. हिम्मत का पहला IPL सिक्स, बिश्नोई का ‘नोटबुक’ सेलिब्रेशन 14वें ओवर

भास्कर अपडेट्स:नासिक TCS में यौन शोषण-धर्मांतरण केस में सॉफ्टवेयर इंजीनियर को राहत नहीं

भास्कर अपडेट्स:नासिक TCS में यौन शोषण-धर्मांतरण केस में सॉफ्टवेयर इंजीनियर को राहत नहीं

महाराष्ट्र के नासिक में टीसीएस से जुड़े जबरन धर्मांतरण मामले में आरोपी सॉफ्टवेयर इंजीनियर दानिश शेख को कोर्ट से अंतरिम राहत नहीं मिली। 31 वर्षीय शेख ने एक केस में गिरफ्तारी से बचाव के लिए अंतरिम जमानत मांगी थी। इस मामले में एक अन्य केस में वह पहले से पुलिस हिरासत में है। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए 27 अप्रैल तक जवाब मांगा है। आज की अन्य बड़ी खबरें… बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा जेल में आतंकी साजिश में 7 को 7 साल की सजा बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा जेल में आतंकी साजिश रचने के मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने 7 दोषियों को 7 साल की कठोर सजा सुनाई है। इनमें लश्कर-ए-तैयबा का मास्टरमाइंड टी. नसीर भी शामिल है। सभी पर 48-48 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। जांच में सामने आया कि 2023 में जेल के अंदर कैदियों को कट्टरपंथ की ओर भड़काया जा रहा था। कर्नाटक के बेंगलुरु में 410 करोड़ रुपए के GST घोटाले का खुलासा, मास्टरमाइंड समेत 1 गिरफ्तार कर्नाटक के बेंगलुरु में 410 करोड़ रुपए के GST घोटाले का खुलासा हुआ है। कमर्शियल टैक्स विभाग ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी ITC नेटवर्क चलाने में शामिल था। जीएसटी विभाग की एन्फोर्समेंट विंग (साउथ जोन) ने मोहम्मद तौकीर (42) को उस समय पकड़ा, जब वह फरार होने की कोशिश कर रहा था। जांच में सामने आया कि मोहम्मद तौकीर फर्जी कंपनियां बनाकर बड़े स्तर पर नकली इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लेनदेन कर रहा था। उसे आर्थिक अपराधों की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव के दौरान अब तक 1000 करोड़ की जब्ती चुनाव आयोग के मुताबिक पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव के दौरान नकदी, शराब, ड्रग्स और फ्रीबीज की जब्ती 1000 करोड़ रुपए के पार पहुंच गई है। 26 फरवरी से अब तक कुल 1072.13 करोड़ रुपए की जब्ती की गई है। जब्त सामग्री में 127.67 करोड़ रुपए नकद, करीब 41 हजार लीटर शराब (106.3 करोड़), लगभग 184 करोड़ के ड्रग्स और 215 करोड़ के सोना-चांदी शामिल हैं। इसके अलावा 418 करोड़ रुपए के फ्रीबीज भी बरामद किए गए हैं। यूपी के सुल्तानपुर में राहुल गांधी पर मान​हानि केस में फैसला 2 मई तक सुरक्षित यूपी के सुल्तानपुर में मानहानि केस में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर सुनवाई पूरी हो गई है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने फैसला 2 मई तक सुरक्षित रख लिया है। यह मामला 2018 दिए गए राहुल गांधी के एक कथित बयान से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार उन्होंने एक जनसभा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

MP में 4 महीने की बच्ची की कुपोषण से मौत:रीवा में जुड़वां भाई की हालत गंभीर; सुपरवाइजर-आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को नोटिस; झोलाछाप का क्लिनिक सील

MP में 4 महीने की बच्ची की कुपोषण से मौत:रीवा में जुड़वां भाई की हालत गंभीर; सुपरवाइजर-आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को नोटिस; झोलाछाप का क्लिनिक सील

मध्य प्रदेश के सतना जिले में कुपोषण से 4 महीने की बच्ची की मौत हो गई, जबकि जुड़वां भाई की हालत गंभीर है। सतना जिला अस्पताल से रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है, जहां वह PICU में भर्ती है। दोनों बच्चे करीब 15 दिन से उल्टी दस्त, बुखार और डायरिया से पीड़ित थे। जानकारी के मुताबिक, मृत बच्ची सुप्रांशी, सुरांगी निवासी मां विमला और पिता नत्थू प्रजापति की बेटी थी। वहीं उसके जुड़वां भाई का नाम नैतिक है। सही पोषण और समय पर इलाज न मिलने से दोनों बच्चों की हालत लगातार बिगड़ती गई, लेकिन बच्चों को जुगुलपुर गांव में झोलाछाप के पास ही इलाज कराते रहे। सुपरवाइजर और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को नोटिस कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार के निर्देश पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी राजिव सिंह ने सेक्टर सुपरवाइजर करुणा पांडेय और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पूजा पांडेय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही मझगवां एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने बुधवार रात जुगुलपुर गांव में झोलाछाप डॉक्टर प्रेमलाल अनुरागी के दवाखाने पर छापा मारा। जांच के दौरान दवाखाने में अलग-अलग बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली करीब 100 तरह की दवाइयां मिलीं। PICU वार्ड में भर्ती कर इलाज परिजन के मुताबिक, बच्चों की हालत में सुधार नहीं हुआ तो वह झोलाछाप के पास से मंगलवार शाम 5 बजे दोनों बच्चों को मझगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। यहां से प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें सतना जिला अस्पताल भेजा गया। रात करीब 8 बजे सतना जिला अस्पताल पहुंचने पर दोनों बच्चों को तुरंत PICU वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। दोनों बच्चे गंभीर कुपोषण से ग्रसित पाए गए इस दौरान जांच में दोनों बच्चे गंभीर कुपोषण से ग्रसित पाए गए। उनका वजन सामान्य से काफी कम था। बुधवार शाम करीब 4 बजे इलाज के दौरान सुप्रांशी ने दम तोड़ दिया। इसके बाद दादी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के साथ शव को गांव सुरांगी भेजा गया, जबकि उसी समय गंभीर हालत में नैतिक को माता-पिता के साथ रीवा मेडिकल कॉलेज भेजा गया। आशा कार्यकर्ता ने रेगुलर संपर्क नहीं किया मृत बच्ची की मां विमला ने बताया कि टीकाकरण के अलावा उन्हें किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला। आशा कार्यकर्ता ने रेगुलर संपर्क नहीं किया, जिसके कारण समय पर सलाह और मदद नहीं मिल सकी। अब इसे मैदानी अमले की बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। मां का दूध नहीं मिला, गलत आहार से बिगड़ी हालत जांच में सामने आया कि मां की शारीरिक कमजोरी के कारण वह बच्चों को स्तनपान नहीं करा पा रही थी। ऐसे में उन्हें बकरी और गाय का दूध पिलाया जा रहा था, जो इस उम्र में खतरनाक होता है। जन्म से छह माह तक केवल मां का दूध ही बच्चे के लिए पर्याप्त पोषण का स्रोत होता है, लेकिन परिवार को सही मार्गदर्शन नहीं मिल पाया। जन्म के समय ही कम था वजन, डॉक्टरों की सलाह परियोजना अधिकारी अभय द्विवेदी के अनुसार, जुड़वां बच्चों का जन्म 21 दिसंबर 2025 को मझगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुआ था। जन्म के समय नैतिक का वजन 2.953 किलो और सुप्रांशी का 2.862 किलो था। छह माह तक केवल मां का दूध ही दिया जाना चाहिए वहीं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप द्विवेदी के अनुसार, 4 माह के बच्चे का सामान्य वजन 4 से 5 किलो होना चाहिए। जन्म से छह माह तक केवल मां का दूध ही दिया जाना चाहिए, ताकि इस तरह की स्थिति से बचा जा सके। बिना लाइसेंस चला रहा था दवाखाना बीएमओ डॉ. रूपेश सोनी ने बताया कि प्रेमलाल अनुरागी के पास इलाज करने का कोई वैध लाइसेंस नहीं था। वह पिछले 15 दिनों से गंभीर कुपोषण से जूझ रहे बच्चों सुप्रांशी और नैतिक का इलाज कर रहा था, लेकिन उसने दोनों को मझगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं भेजा। दवाखाना सीज, दवाइयां जब्त, केस दर्ज संयुक्त टीम ने मौके पर ही फर्जी दवाखाना सील कर दिया। सभी दवाइयां जब्त कर लीं। बीएमओ की रिपोर्ट के आधार पर आरोपी प्रेमलाल अनुरागी पिता गया प्रसाद, निवासी जुगुलपुर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और मध्य प्रदेश रूजोपचार अधिनियम की अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। कुपोषण का केंद्र बना मझगवां, पहले भी हो चुकी हैं मौतें सतना जिले का मझगवां क्षेत्र पहले से ही कुपोषण से प्रभावित माना जाता है। सितंबर 2022 में इसी गांव में सोमवती मवासी नाम की बच्ची की भी कुपोषण से मौत हो चुकी है। इसके बावजूद हालात में सुधार नहीं हुआ। ………………………………….. यह खबर भी पढ़ें सतना में मझगवां में 11 माह की बच्ची की मौत सतना जिले के आदिवासी बहुल मझगवां क्षेत्र में 11 माह की एक बच्ची की मौत के बाद महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। सोशल मीडिया पर बच्ची की मौत का कारण कुपोषण बताया जा रहा था, लेकिन प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में श्वास नली में दूध फंसने को मौत की वजह बताया गया है। पढ़ें पूरी खबर…

DAVV के 2025 बैच के प्लेसमेंट रिजल्ट घोषित:271 कंपनियां आई, 72 लाख रुपए सालाना का रहा सबसे ज्यादा पैकेज

DAVV के 2025 बैच के प्लेसमेंट रिजल्ट घोषित:271 कंपनियां आई, 72 लाख रुपए सालाना का रहा सबसे ज्यादा पैकेज

DAVV ने साल 2015 बैच के प्लेसमेंट रिजल्ट घोषित किए। कुलपति प्रोफेसर राकेश सिंघई ने बताया कि यूनिवर्सिटी के UTDS डिपार्टमेंट में शैक्षणिक सत्र 2024-25 के दौरान प्लेसमेंट एक्टिवियां हुई, जिनमें देश-विदेश की कई प्रतिष्ठित कंपनियों ने भाग लिया। उन्होंने बताया कि इस साल कुल 271 कंपनियों ने परिसर में भागीदारी की तथा स्टूडेंट्स को 1091 रोजगार प्रस्ताव मिले। औसत वार्षिक पैकेज 5.3 लाख रुपए रहा, जबकि अधिकतम पैकेज 72 लाख रुपए प्रति वर्ष दर्ज किया गया। प्लेसमेंट में लगभग 56% छात्र एवं 44% छात्राएं शामिल रहीं। इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आईईटी ने सर्वाधिक 421 ऑफर मिले, वहीं औसत वेतन 7.74 लाख रुपए रहा। प्रबंधन संकाय में आईएमएस ने 312 ऑफर के साथ उल्लेखनीय प्रदर्शन किया, जहां औसत वेतन 6.84 लाख रुपए रहा। विभिन्न क्षेत्रों में कोर, सर्विस, एनालिटिक्स एवं कंसल्टिंग तथा प्रोडक्ट आधारित कंपनियों का संतुलित प्रतिनिधित्व देखने को मिला। प्रमुख कंपनियों जैसे Deutsche Bank, Mastercard, Barclays, ZS Associates, BNY Mellon एवं Nomura ने स्टूडेंट्स को आकर्षक पैकेज पर नियुक्तियां दी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया गया कि Microsoft, Amazon, Google एवं X.com में चयनित स्टूडेंट्स ने ये उपलब्धियां ऑफ-कैंपस प्रक्रियाओं के माध्यम से प्राप्त की हैं। पिछले साल की तुलना में बढ़ी कंपनियां प्रो.सिंघई ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष प्लेसमेंट में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कंपनियों की संख्या 219 से बढ़कर 271 तथा ऑफर 1039 से बढ़कर 1091 हो गए हैं, जबकि औसत वेतन में भी वृद्धि हुई है। यूनिवर्सिटी ने प्लेसमेंट सुधार के लिए केंद्रीय डाटाबेस, कौशल विकास कार्यक्रम, कोडिंग प्रशिक्षण, अनिवार्य इंटर्नशिप तथा उद्योग-पूर्व छात्र सहयोग जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए, जिनका सकारात्मक प्रभाव इन परिणामों में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

गेहूं खरीद का कोटा बढ़ाने केंद्र से मांगी मदद:सीएम बोले- वैश्विक परिस्थितियों के कारण गेहूं एक्सपोर्ट नहीं हो पाया, जूट इम्पोर्ट में भी दिक्कत

गेहूं खरीद का कोटा बढ़ाने केंद्र से मांगी मदद:सीएम बोले- वैश्विक परिस्थितियों के कारण गेहूं एक्सपोर्ट नहीं हो पाया, जूट इम्पोर्ट में भी दिक्कत

मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण गेहूं के निर्यात में आई कमी और जूट के आयात में आ रही बाधाओं के बावजूद राज्य सरकार किसानों का एक-एक दाना खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में इस वर्ष ‘डबल’ हुई पैदावार को देखते हुए मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से गेहूं उपार्जन का निर्धारित कोटा बढ़ाने की अपील की है, ताकि बंपर उत्पादन का पूरा लाभ किसानों तक पहुंचाया जा सके। वैश्विक परिस्थितियों के कारण गेहूं एक्सपोर्ट नहीं हो पा रहा मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में वैश्विक परिदृश्य काफी जटिल है, जिसके कारण भारत से गेहूं का निर्यात लगभग न के बराबर हो रहा है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया के युद्ध जैसे हालातों के चलते विदेशों से आने वाले जूट की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। इन विषम परिस्थितियों के बावजूद प्रदेश सरकार ने किसानों का साथ नहीं छोड़ा है और वैकल्पिक तौर पर पॉली बैग्स (पीपी बैग) की व्यवस्था कर गेहूं की खरीदी सुचारू रूप से शुरू कर दी है। किसान संगठनों से चर्चा के बाद बनाई खरीद की रणनीति मुख्यमंत्री ने गेहूं खरीदी को लेकर बताया कि किसान संगठनों के साथ विचार-विमर्श कर यह तय किया गया है कि उपार्जन केंद्रों पर सबसे पहले छोटे किसानों का गेहूं खरीदा जाए। इसके बाद मध्यम श्रेणी के किसानों और फिर बड़े किसानों की फसल खरीदी जाएगी। सरकार ने इस साल गेहूं का समर्थन मूल्य ₹2585 प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, जिस पर ₹40 प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस देकर कुल ₹2625 की दर से भुगतान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अपने पिछले कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि जब एमएसपी ₹2250 थी, तब भी सरकार ने ₹150 का बोनस दिया था और पिछले साल ₹175 बोनस के साथ ₹2600 में खरीदी की गई थी। उन्होंने विपक्ष और किसानों को आश्वस्त किया कि संकल्प पत्र में किए गए ₹2700 प्रति क्विंटल के वादे को आगामी तीन वर्षों के भीतर हर हाल में पूरा किया जाएगा। सीएम बोले- पिछले साल का गेहूं भंडारों में भरा मुख्यमंत्री ने इस बात को भी स्वीकार किया कि प्रदेश के गोदामों में पिछले साल का गेहूं अभी भी बड़ी मात्रा में रखा हुआ है, जो कि भंडारण की दृष्टि से एक चुनौती है। इसके बावजूद सरकार खरीदी काम को प्रभावित नहीं होने देगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार भगवान की विशेष कृपा रही है और प्रदेश में गेहूं का उत्पादन पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुना हुआ है। केंद्र सरकार द्वारा वर्तमान में 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का जो लक्ष्य (कोटा) मध्य प्रदेश को दिया गया है, वह इस भारी पैदावार के सामने कम पड़ सकता है। इसी कारण राज्य सरकार केंद्र से निरंतर संपर्क में है और उपार्जन का कोटा बढ़ाने का अनुरोध कर रही है ताकि प्रदेश के प्रत्येक पंजीकृत किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

सीएम हाउस के पास चौराहों पर धरना-प्रदर्शन पर रोक:भोपाल पुलिस कमिश्नर ने जारी किया आदेश, पॉलिटेक्निक समेत प्रमुख चौराहों को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित

सीएम हाउस के पास चौराहों पर धरना-प्रदर्शन पर रोक:भोपाल पुलिस कमिश्नर ने जारी किया आदेश, पॉलिटेक्निक समेत प्रमुख चौराहों को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित

भोपाल में अब शहर के सबसे व्यस्त चौराहों पर धरना-प्रदर्शन और पुतला दहन जैसे कार्यक्रम नहीं हो सकेंगे। पुलिस आयुक्त द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी कर पॉलिटेक्निक चौराहा, आकाशवाणी चौराहा और किलोल पार्क चौराहा सहित आसपास के क्षेत्रों को प्रतिबंधित घोषित कर दिया गया है। ट्रैफिक और इमरजेंसी सेवाओं पर असर बना वजह आदेश में कहा गया है कि ये चौराहे शहर के मुख्य मार्गों पर स्थित हैं और यहां से एयरपोर्ट, हमीदिया अस्पताल सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों के लिए आवागमन होता है। इन जगहों पर धरना-प्रदर्शन या आंदोलन होने से यातायात बाधित होता है, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है। साथ ही एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित होती हैं। बिना वैकल्पिक व्यवस्था के नहीं मिलती अनुमति पुलिस के अनुसार, अक्सर इन स्थानों पर विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों द्वारा धरना-प्रदर्शन की अनुमति मांगी जाती है, लेकिन यहां कोई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं होने के कारण शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। 2 महीने तक लागू रहेगा आदेश पुलिस आयुक्त द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और आगामी दो माह तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान इन स्थानों पर किसी भी प्रकार के धरना, प्रदर्शन, हड़ताल या पुतला दहन कार्यक्रम आयोजित करने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। उल्लंघन पर होगी कार्रवाई आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शहर में कानून-व्यवस्था और सुचारू यातायात बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।

टशन में गोलियां चलाने वाला बदमाश पकड़ा:दुश्मन के घर पहुंचकर की थी फायरिंग, पुलिस ने किया सीन रीक्रिएशन

टशन में गोलियां चलाने वाला बदमाश पकड़ा:दुश्मन के घर पहुंचकर की थी फायरिंग, पुलिस ने किया सीन रीक्रिएशन

ग्वालियर में दुश्मनी के चलते घर पर पहुंचकर फायरिंग करने वाले एक बदमाश को पुलिस ने बुधवार शाम गिरफ्तार कर लिया। बहोड़ापुर थाना पुलिस ने आरोपी को पुरानी छावनी क्षेत्र से दबोचा है। पकड़े गए आरोपी को घटना की पुनर्रचना (सीन रीक्रिएशन) के लिए मौके पर भी ले जाया गया। थाना प्रभारी आलोक परिहार के मुताबिक, 3 अप्रैल को आनंद नगर निवासी लालू यादव के घर पर अजीत गुर्जर, रवि गुर्जर और नारायण छावई ने पहुंचकर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। अचानक हुई गोलीबारी से इलाके में दहशत फैल गई थी और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर छिप गए थे। घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी थी। बुधवार को सूचना मिली कि आरोपी अजीत गुर्जर पुरानी छावनी इलाके में देखा गया है। सूचना के आधार पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया है कि आरोपी और फरियादी के बीच लंबे समय से रंगदारी को लेकर विवाद चल रहा था। पैदल ले जाकर कराया सीन रीक्रिएशन पुलिस आरोपी को पैदल ही घटना स्थल पर लेकर पहुंची। जिस स्थान पर कुछ दिन पहले उसने फायरिंग कर दहशत फैलाई थी, वहां वह सिर झुकाकर चलता नजर आया। पुलिस ने उसे पूरे घटनास्थल पर घुमाकर यह समझा कि आरोपी कहां से आया और किस रास्ते से फरार हुआ था। दो आरोपी अभी फरार पुलिस के अनुसार इस मामले में शामिल अन्य दो आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। थाना प्रभारी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है और जल्द ही बाकी आरोपियों को भी पकड़ लिया जाएगा।