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Four Thousand Weeks Book Review; Time Management

Four Thousand Weeks Book Review; Time Management

21 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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किताब का नाम- ‘फोर थाउजेंड वीक्स’

(‘फोर थाउजेंड वीक्स’ का हिंदी अनुवाद)

लेखक- ऑलिवर बर्कमैन

अनुवाद- मनोज पाराशर

प्रकाशक- मंजुल प्रकाशन

मूल्य- 399 रुपए

इंसान की औसत उम्र लगभग 80 वर्ष होती है। अगर हम इसे हफ्तों में गिनें तो हमारे पास केवल 4,000 हफ्ते होते हैं। सुनने में यह संख्या बहुत बड़ी लग सकती है, लेकिन ये हफ्ते कब बीत जाते हैं, पता ही नहीं चलता है।

ऑलिवर बर्कमैन की यह किताब पारंपरिक ‘टाइम मैनेजमेंट’ गाइड नहीं है। यह टाइम मैनेज करने की बजाय इस सच्चाई को स्वीकारना सिखाती है कि हमारे पास समय कम है।

बर्कमैन कई वर्षों तक ‘प्रोडक्टिविटी गीक’ रहे हैं। वह बताते हैं कि समय को जितना कंट्रोल करने की कोशिश करें, यह उतना ही हाथ से फिसलता है। अगर आप हमेशा ‘क्लियरिंग द डेक’ (काम निपटाने) की होड़ में रहते हैं और फिर भी थका महसूस करते हैं, तो यह किताब सोच बदल देगी।

किताब क्या कहती है?

यह किताब एक कड़वी, लेकिन सुकून देने वाली सच्चाई पर आधारित है-

हमारी सीमाएं हैं

लेखक का तर्क है कि वर्तमान टाइम मैनेजमेंट हमें एक मशीन बनाने की कोशिश कर रहा है। हम सोचते हैं कि अगर थोड़े और एफिशिएंट हो जाएं, तो अपनी टू-डू लिस्ट की हर चीज पूरी कर लेंगे और फिर अंत में ‘सुकून’ से जिएंगे।

बर्कमैन कहते हैं कि यह भ्रम है। इसे वे ‘एफिशिएंसी ट्रैप’ कहते हैं। आप जितना तेज काम करेंगे, लोग उतना ही ज्यादा काम देंगे। आप जितने जल्दी ईमेल का जवाब देंगे, उतने ही ज्यादा ईमेल आएंगे। असली समाधान ज्यादा काम करना नहीं, बल्कि यह चुनना है कि क्या ‘नहीं’ करना है।

क्या सिखाती है ये किताब?

यह किताब ‘हसल कल्चर’ (हर वक्त भागने की संस्कृति) के खिलाफ एक मैनिफेस्टो है। यह उनके लिए है, जो हर समय ‘बिजी’ रहते हैं और फिर भी उन्हें लगता है कि वे जीवन में कुछ सार्थक नहीं कर रहे हैं। नीचे दिए ग्राफिक से किताब के मुख्य सबक समझिए-

विचार और समय के बीच का संघर्ष

लेखक ने किताब में समय के इतिहास और मनोविज्ञान को गहराई से समझाया है। किताब के कुछ प्रमुख पहलू इस प्रकार हैं-

1. एफिशिएंसी का जाल

हम सोचते हैं कि तकनीक हमारा समय बचाएगी। माइक्रोवेव ने घंटों का काम मिनटों में कर दिया, लेकिन क्या हम पहले से ज्यादा फुर्सत में हैं? नहीं। हमने उस बचे हुए समय को और ज्यादा काम से भर दिया है।

बर्कमैन कहते हैं कि तकनीक ने हमें और अधिक बेचैन बना दिया है। अब हमें 10 सेकेंड तक वेबसाइट लोड होने का इंतजार करना भी पहाड़ जैसा लगता है।

2. ‘पे योरसेल्फ फर्स्ट’ का सिद्धांत

निवेश की दुनिया में कहा जाता है कि पहले बचत करें और खर्च बाद में करें। वैसे ही समय के मामले में लेखक कहते हैं कि जो आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण है (जैसे परिवार, शौक, सेहत), उसे दिन के सबसे पहले हिस्से में रखें। अगर आप सोचेंगे कि ‘सारा काम खत्म करके’ मैं अपने शौक पूरे करूंगा, तो वह समय कभी नहीं आएगा।

3. ‘FOMO’ का अंत

हम डरते हैं कि अगर एक रास्ता चुना, तो बाकी विकल्प छूट जाएंगे। बर्कमैन इसे एक सकारात्मक नजरिए से देखते हैं। वे कहते हैं कि ‘मिसिंग आउट’ की गारंटी है। आप एक साथ 10 देशों में नहीं घूम सकते, 5 करियर नहीं बना सकते। जब आप यह स्वीकार कर लेते हैं कि चुनना ही जीवन है, तो आप उस एक चुनाव का ज्यादा आनंद ले पाते हैं।

4. ‘सेटल’ होने की कला

समाज कहता है- ‘कभी समझौता मत करो’। बर्कमैन कहते हैं कि यह बकवास है। आपको एक पार्टनर, एक शहर और एक करियर पर सेटल होना ही पड़ेगा, ताकि आप उसमें गहराई तक जा सकें। जो लोग कभी सेटल नहीं होते, वे असल में जीवन की सतह पर ही तैरते रह जाते हैं।

खाली समय अपराध नहीं, लग्जरी है

आज के दौर में अगर हम खाली बैठें, तो हमें अपराधबोध होता है। हम छुट्टी पर भी जाते हैं तो ‘नेटवर्किंग’ या ‘सेल्फ-इम्प्रूवमेंट’ की किताबें साथ ले जाते हैं। लेखक कहते हैं कि आराम को ‘अगले दिन काम करने की तैयारी’ के रूप में नहीं देखना चाहिए। आराम अपने आप में एक लक्ष्य होना चाहिए। एक ‘हॉबी’ ऐसी होनी चाहिए, जिसका कोई आर्थिक लाभ न हो, बस आनंद हो।

समस्याओं के साथ जीना सीखें

लेखक का एक क्रांतिकारी विचार यह है कि ‘बिना समस्याओं वाला जीवन’ केवल मृत्यु के बाद ही संभव है। जब तक आप जीवित हैं, समस्याएं रहेंगी। इसलिए समस्याओं को सुलझाने के बाद खुश होने का इंतजार न करें, बल्कि समस्याओं के बीच ही खुशी ढूंढना सीखें। कुछ कामों को टालना भी सीखें।

प्रोकैस्टिनेशन का सही तरीका

1. प्राथमिकता तय करें- 5 चीजों को चुनें, जो सबसे जरूरी हैं।

2. बाकी को भूल जाएं- लेखक ने वॉरेन बफेट के एक कोट का जिक्र किया है , जो चीजें ‘कम जरूरी’ हैं, वे सबसे खतरनाक हैं क्योंकि वे आपका ध्यान भटकाती हैं।

3. कठिन से शुरुआत- जिस काम से सबसे ज्यादा डर लगता है, उसे पहले करें।

4. वर्तमान में रहें- भविष्य की प्लानिंग में इतना न खोएं कि आज का हफ्ता हाथ से निकल जाए।

ये किताब किसे पढ़नी चाहिए?

यह किताब हर उस इंसान के लिए है, जो जीवन में सुकून चाहता है। ग्राफिक में देखें-

किताब के बारे में मेरी राय

‘फोर थाउजेंड वीक्स’ कोई साधारण मोटिवेशनल किताब नहीं है। यह आपको आईना दिखाती है। बर्कमैन की भाषा सरल है, लेकिन उनके विचार गहरे हैं। वे आपको यह कहकर डराते नहीं कि ‘समय कम है, भागो’, बल्कि वे आपको शांत करते हैं कि ‘समय कम है, इसलिए ठहर जाओ और जो जरूरी है उसे चुनो’।

किताब की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह आपको ‘अजेय’ महसूस कराने के बजाय ‘इंसानी सीमाओं’ को स्वीकार करना सिखाती है। यह आपको उस भारी बोझ से आजाद कर देती है कि आपको ‘सबकुछ’ करना है। ……………

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21 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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(‘फोर थाउजेंड वीक्स’ का हिंदी अनुवाद)

लेखक- ऑलिवर बर्कमैन

अनुवाद- मनोज पाराशर

प्रकाशक- मंजुल प्रकाशन

मूल्य- 399 रुपए

इंसान की औसत उम्र लगभग 80 वर्ष होती है। अगर हम इसे हफ्तों में गिनें तो हमारे पास केवल 4,000 हफ्ते होते हैं। सुनने में यह संख्या बहुत बड़ी लग सकती है, लेकिन ये हफ्ते कब बीत जाते हैं, पता ही नहीं चलता है।

ऑलिवर बर्कमैन की यह किताब पारंपरिक ‘टाइम मैनेजमेंट’ गाइड नहीं है। यह टाइम मैनेज करने की बजाय इस सच्चाई को स्वीकारना सिखाती है कि हमारे पास समय कम है।

बर्कमैन कई वर्षों तक ‘प्रोडक्टिविटी गीक’ रहे हैं। वह बताते हैं कि समय को जितना कंट्रोल करने की कोशिश करें, यह उतना ही हाथ से फिसलता है। अगर आप हमेशा ‘क्लियरिंग द डेक’ (काम निपटाने) की होड़ में रहते हैं और फिर भी थका महसूस करते हैं, तो यह किताब सोच बदल देगी।

किताब क्या कहती है?

यह किताब एक कड़वी, लेकिन सुकून देने वाली सच्चाई पर आधारित है-

हमारी सीमाएं हैं

लेखक का तर्क है कि वर्तमान टाइम मैनेजमेंट हमें एक मशीन बनाने की कोशिश कर रहा है। हम सोचते हैं कि अगर थोड़े और एफिशिएंट हो जाएं, तो अपनी टू-डू लिस्ट की हर चीज पूरी कर लेंगे और फिर अंत में ‘सुकून’ से जिएंगे।

बर्कमैन कहते हैं कि यह भ्रम है। इसे वे ‘एफिशिएंसी ट्रैप’ कहते हैं। आप जितना तेज काम करेंगे, लोग उतना ही ज्यादा काम देंगे। आप जितने जल्दी ईमेल का जवाब देंगे, उतने ही ज्यादा ईमेल आएंगे। असली समाधान ज्यादा काम करना नहीं, बल्कि यह चुनना है कि क्या ‘नहीं’ करना है।

क्या सिखाती है ये किताब?

यह किताब ‘हसल कल्चर’ (हर वक्त भागने की संस्कृति) के खिलाफ एक मैनिफेस्टो है। यह उनके लिए है, जो हर समय ‘बिजी’ रहते हैं और फिर भी उन्हें लगता है कि वे जीवन में कुछ सार्थक नहीं कर रहे हैं। नीचे दिए ग्राफिक से किताब के मुख्य सबक समझिए-

विचार और समय के बीच का संघर्ष

लेखक ने किताब में समय के इतिहास और मनोविज्ञान को गहराई से समझाया है। किताब के कुछ प्रमुख पहलू इस प्रकार हैं-

1. एफिशिएंसी का जाल

हम सोचते हैं कि तकनीक हमारा समय बचाएगी। माइक्रोवेव ने घंटों का काम मिनटों में कर दिया, लेकिन क्या हम पहले से ज्यादा फुर्सत में हैं? नहीं। हमने उस बचे हुए समय को और ज्यादा काम से भर दिया है।

बर्कमैन कहते हैं कि तकनीक ने हमें और अधिक बेचैन बना दिया है। अब हमें 10 सेकेंड तक वेबसाइट लोड होने का इंतजार करना भी पहाड़ जैसा लगता है।

2. ‘पे योरसेल्फ फर्स्ट’ का सिद्धांत

निवेश की दुनिया में कहा जाता है कि पहले बचत करें और खर्च बाद में करें। वैसे ही समय के मामले में लेखक कहते हैं कि जो आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण है (जैसे परिवार, शौक, सेहत), उसे दिन के सबसे पहले हिस्से में रखें। अगर आप सोचेंगे कि ‘सारा काम खत्म करके’ मैं अपने शौक पूरे करूंगा, तो वह समय कभी नहीं आएगा।

3. ‘FOMO’ का अंत

हम डरते हैं कि अगर एक रास्ता चुना, तो बाकी विकल्प छूट जाएंगे। बर्कमैन इसे एक सकारात्मक नजरिए से देखते हैं। वे कहते हैं कि ‘मिसिंग आउट’ की गारंटी है। आप एक साथ 10 देशों में नहीं घूम सकते, 5 करियर नहीं बना सकते। जब आप यह स्वीकार कर लेते हैं कि चुनना ही जीवन है, तो आप उस एक चुनाव का ज्यादा आनंद ले पाते हैं।

4. ‘सेटल’ होने की कला

समाज कहता है- ‘कभी समझौता मत करो’। बर्कमैन कहते हैं कि यह बकवास है। आपको एक पार्टनर, एक शहर और एक करियर पर सेटल होना ही पड़ेगा, ताकि आप उसमें गहराई तक जा सकें। जो लोग कभी सेटल नहीं होते, वे असल में जीवन की सतह पर ही तैरते रह जाते हैं।

खाली समय अपराध नहीं, लग्जरी है

आज के दौर में अगर हम खाली बैठें, तो हमें अपराधबोध होता है। हम छुट्टी पर भी जाते हैं तो ‘नेटवर्किंग’ या ‘सेल्फ-इम्प्रूवमेंट’ की किताबें साथ ले जाते हैं। लेखक कहते हैं कि आराम को ‘अगले दिन काम करने की तैयारी’ के रूप में नहीं देखना चाहिए। आराम अपने आप में एक लक्ष्य होना चाहिए। एक ‘हॉबी’ ऐसी होनी चाहिए, जिसका कोई आर्थिक लाभ न हो, बस आनंद हो।

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लेखक का एक क्रांतिकारी विचार यह है कि ‘बिना समस्याओं वाला जीवन’ केवल मृत्यु के बाद ही संभव है। जब तक आप जीवित हैं, समस्याएं रहेंगी। इसलिए समस्याओं को सुलझाने के बाद खुश होने का इंतजार न करें, बल्कि समस्याओं के बीच ही खुशी ढूंढना सीखें। कुछ कामों को टालना भी सीखें।

प्रोकैस्टिनेशन का सही तरीका

1. प्राथमिकता तय करें- 5 चीजों को चुनें, जो सबसे जरूरी हैं।

2. बाकी को भूल जाएं- लेखक ने वॉरेन बफेट के एक कोट का जिक्र किया है , जो चीजें ‘कम जरूरी’ हैं, वे सबसे खतरनाक हैं क्योंकि वे आपका ध्यान भटकाती हैं।

3. कठिन से शुरुआत- जिस काम से सबसे ज्यादा डर लगता है, उसे पहले करें।

4. वर्तमान में रहें- भविष्य की प्लानिंग में इतना न खोएं कि आज का हफ्ता हाथ से निकल जाए।

ये किताब किसे पढ़नी चाहिए?

यह किताब हर उस इंसान के लिए है, जो जीवन में सुकून चाहता है। ग्राफिक में देखें-

किताब के बारे में मेरी राय

‘फोर थाउजेंड वीक्स’ कोई साधारण मोटिवेशनल किताब नहीं है। यह आपको आईना दिखाती है। बर्कमैन की भाषा सरल है, लेकिन उनके विचार गहरे हैं। वे आपको यह कहकर डराते नहीं कि ‘समय कम है, भागो’, बल्कि वे आपको शांत करते हैं कि ‘समय कम है, इसलिए ठहर जाओ और जो जरूरी है उसे चुनो’।

किताब की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह आपको ‘अजेय’ महसूस कराने के बजाय ‘इंसानी सीमाओं’ को स्वीकार करना सिखाती है। यह आपको उस भारी बोझ से आजाद कर देती है कि आपको ‘सबकुछ’ करना है। ……………

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