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Rahul Gandhi Claims PM Told Ex-Army Chief Do What You Deem Fit

Rahul Gandhi Claims PM Told Ex-Army Chief Do What You Deem Fit

8 मिनट पहले कॉपी लिंक पूर्व आर्मी चीफ चीफ जनरल एमएम नरवणे ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा कि 2020 में चीन के साथ हुए गतिरोध में सरकार ने अकेला नहीं छोड़ा था। सरकार पूरी तरह से सपोर्ट में थी और पूरा अधिकार दिया था कि हालात बिगड़ने पर चीनी सैनिकों पर गोलियां चला सकें। 4 फरवरी को राहुल किताब की कॉपी लेकर संसद पहुंचे। उन्होंने कहा कि अगर आज पीएम आए तो उन्हें यह किताब दूंगा। राहुल ने किताब का वह पेज खोलकर दिखाया, जिसमें लिखा है कि प्रधानमंत्री ने आर्मी चीफ से कहा था- ‘जो उचित समझो वह करो।’ राहुल ने यह भी कहा था, ‘सरकार और रक्षा मंत्री कह रहे है कि किताब का अस्तित्व नहीं है। देखिए यह रही किताब।’ नरवणे की इस अनपब्लिश बुक में चीन के साथ भारतीय सेना की 2020 की झड़पों के साथ-साथ अग्निवीर योजना का रीव्यू किया गया है। अब पूर्व सेना प्रमुख कि नई किताब ‘द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड: अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज’ आने वाली है। 9 फरवरी को पेंगुइन ने कहा- नरवणे की किताब पब्लिश नहीं हुई पूर्व आर्मी चीफ की अनपब्लिश्ड किताब पर 9 फरवरी को पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने कहा था कि किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई। इसका कोई हिस्सा सार्वजनिक नहीं किया गया। कंपनी ने कहा कि पब्लिशिंग के सभी राइट्स हमारे पास हैं। अब तक किताब की न तो कोई छपी हुई कॉपी आई है और न ही डिजिटल कॉपी सामने आई है। 3 फरवरी राहुल बोले- कंपनी या आर्मी चीफ झूठ बोल रहे राहुल गांधी ने मंगलवार 3 फरवरी को लोकसभा के बाहर कहा था कि- एमएम नरवणे ने X पर पोस्ट किया है, ‘हेलो दोस्तों, मेरी किताब अब अवेलेबल है। लिंक फॉलो करें। हैप्पी रीडिंग’। या तो एमएम नरवणे झूठ बोल रहे हैं, या पेंगुइन झूठ बोल रहा है। मैंने आर्मी चीफ पर विश्वास करना चुना। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 4 फरवरी को संसद परिसर में पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे की अनपब्लिश किताब को लेकर पहुंचे थे। संसद से सामने आए मुद्दे पर दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की। डिजिटल और दूसरे फॉर्मेट में मैन्युस्क्रिप्ट के गैर-कानूनी सर्कुलेशन की जांच शुरू कर दी। नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब में ऐसा क्या, जिस पर विवाद हुआ जनरल एमएम नरवणे 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे। उनकी आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ में उनके सैन्य करियर के साथ-साथ 2020 के भारत-चीन लद्दाख सीमा विवाद, गलवान घाटी की घटनाएं, अग्निपथ योजना और रणनीतिक निर्णयों का जिक्र बताया गया है। रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि 31 अगस्त 2020 को पैंगोंग त्सो के दक्षिणी किनारे पर कैलाश रेंज में हुए डेवलपमेंट के बारे में उनका ब्यौरा, और भारतीय सेना को चीनी उकसावे का जवाब कैसे देना चाहिए, सरकार ने इस पर तुरंत कोई पॉलिटिकल निर्देश नहीं दिया था। यही विवाद की वजह है। किताब जनवरी 2024 में पब्लिश होनी थी। न्यूज एजेंसी PTI ने दिसंबर 2023 में इसका एक हिस्सा छापा। अग्निवीर स्कीम पर PTI के हिस्से ने विवाद खड़ा कर दिया और डिफेंस मिनिस्ट्री ने नरवणे और पब्लिशर को लिखा कि किताब को पब्लिश करने से पहले आर्मी को क्लियरेंस के लिए सबमिट करें। आर्मी ने किताब को डिटेल में पढ़ा, उसमें शामिल सब्जेक्ट्स पर अपने ऑब्जर्वेशन रिकॉर्ड किए। आखिरी फैसला लेने के लिए इसे डिफेंस मिनिस्ट्री को भेज दिया। डिफेंस मिनिस्ट्री ने अब तक पूर्व चीफ की किताब को अपनी क्लियरेंस नहीं दी है। उसी समय, नरवणे ने यह भी ट्वीट (अब X) किया कि उनकी किताब अब उपलब्ध है। उन्होंने अमेजन से एक प्री-ऑर्डर लिंक भी शेयर किया था। 2020 से 2024 के बीच रक्षा मंत्रालय ने 35 पुस्तकों को मंजूरी दी। नरवणे की पुस्तक फिलहाल लंबित मामलों में शामिल बताई जा रही है। ——————————————————– ये खबर भी पढ़ें… नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब के सर्कुलेशन पर FIR:राहुल इसकी कॉपी लेकर संसद पहुंचे थे, दावा किया- चीन ने लद्दाख में घुसपैठ की थी पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी (Four Stars of Destiny)’ के सर्कुलेशन को लेकर दिल्ली पुलिस ने सोमवार को FIR दर्ज की है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

LSG IPL 2026 Struggles | Pant Pooran Super Flop

LSG IPL 2026 Struggles | Pant Pooran Super Flop

11 मिनट पहले कॉपी लिंक लखनऊ सुपर जायंट्स को 7 मैचों में सिर्फ 2 जीत मिली हैं और टीम 4 अंक लेकर नौवें पर है। इसकी सबसे बड़ी वजह दो सबसे महंगे खिलाड़ियों-कप्तान ऋषभ पंत और उपकप्तान निकोलस पूरन की खराब फॉर्म रही है। टीम ने दोनों पर कुल 120 करोड़ रुपए के पर्स का 40% यानी 48 करोड़ खर्च किए हैं। लेकिन सीजन में दोनों जायंट खिलाड़ियों का बल्ला खामोश है। ऋषभ पंत: उलझन में फंसे लग रहे, सीजन में महज 132 का स्ट्राइक रेट, राजस्थान के खिलाफ डक हुए 27 करोड़ के पंत दोहरी मानसिकता और तकनीकी उलझनों का शिकार हो रहे हैं। 7 पारियों में 132.43 की साधारण स्ट्राइक रेट से केवल 147 रन बनाना उनके जैसे आक्रामक बल्लेबाज को शोभा नहीं देता। राजस्थान के खिलाफ उनका 3 गेंदों पर शून्य पर आउट होना यह स्पष्ट करता है कि वे मानसिक रूप से भारी दबाव में हैं। सबा करीम के अनुसार, पंत अभी तक टी20 में अपना सही टेम्पलेट नहीं खोज पाए हैं। उन्होंने हैदराबाद के खिलाफ छोटे लक्ष्य का पीछा करते हुए 50 गेंदों पर 68* रन की धीमी पारी खेली। इसके चलते जो मैच लखनऊ को दो-तीन ओवर पहले जीत जाना चाहिए था, उसे टीम ने सिर्फ एक गेंद शेष रहते जीता। पंत ने जब आक्रामक रुख अपनाने की कोशिश की, तो वे पिछले 5 मैचों में से 4 बार 20 रन तक भी नहीं पहुंच सके। दिग्गज पेसर डेल स्टेन ने कहा कि पंत खराब प्रदर्शन के दबाव में अपनी स्वाभाविक लय खो चुके हैं। निकोलस पूरन: टीम पर बोझ बन चुके, 7 मैचों में सिर्फ 73 रन; टीम को गैरजरूरी प्रयोग करने पड़ रहे पिछले सीजन मैच-विनर रहे 21 करोड़ के पूरन सीजन के 7 मैचों में 82.02 की खराब स्ट्राइक रेट से मात्र 73 रन बना पाए हैं। पिछले सीजन 196.25 की स्ट्राइक रेट से 524 रन बनाने वाले पूरन का यह प्रदर्शन बड़ी परेशानी बन रहा है। स्टेन का मानना है कि टीम की बैटिंग में उथल-पुथल की वजह पूरन ही हैं। मैनेजमेंट पूरन की पुरानी क्षमता पर इतना अंधविश्वास कर रहा है कि वह उन्हें ड्रॉप करने से डर रहा है। पूरन के खराब प्रदर्शन का असर टीम पर न पड़े, इसके लिए लखनऊ पुख्ता ओपनर मार्करम को मिडिल ऑर्डर में खिला रहा है। इससे टीम पिछले सीजन बतौर ओपनर 445 रन बनाने वाले मार्करम की क्षमता का उपयोग ही नहीं कर पा रही है। मैनेजमेंट को पावरप्ले में मिचेल मार्श के साथ बदोनी जैसे नए संयोजनों को आजमाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस अति-प्रयोग के कारण टीम शुरुआती विकेट गंवाकर और दबाव में आ रही है। ———————————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… मुंबई की IPL में सबसे बड़ी हार:चेन्नई ने 103 रन से हराया; संजू सैमसन की इस सीजन दूसरी सेंचुरी; अकील हुसैन को 4 विकेट पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस को IPL में सबसे बड़ी हार झेलनी पड़ी है। चेन्नई सुपर किंग्स ने गुरुवार को मुंबई के होमग्राउंड पर उसे 103 रन से हराया। इससे पहले मुंबई की सबसे बड़ी हार 87 रन की थी, जो उसे 2013 में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मिली थी। पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

LSG IPL 2026 Struggles | Pant Pooran Super Flop

LSG IPL 2026 Struggles | Pant Pooran Super Flop

54 मिनट पहले कॉपी लिंक लखनऊ सुपर जायंट्स को 7 मैचों में सिर्फ 2 जीत मिली हैं और टीम 4 अंक लेकर नौवें पर है। इसकी सबसे बड़ी वजह दो सबसे महंगे खिलाड़ियों-कप्तान ऋषभ पंत और उपकप्तान निकोलस पूरन की खराब फॉर्म रही है। टीम ने दोनों पर कुल 120 करोड़ रुपए के पर्स का 40% यानी 48 करोड़ खर्च किए हैं। लेकिन सीजन में दोनों जायंट खिलाड़ियों का बल्ला खामोश है। ऋषभ पंत: उलझन में फंसे लग रहे, सीजन में महज 132 का स्ट्राइक रेट, राजस्थान के खिलाफ डक हुए 27 करोड़ के पंत दोहरी मानसिकता और तकनीकी उलझनों का शिकार हो रहे हैं। 7 पारियों में 132.43 की साधारण स्ट्राइक रेट से केवल 147 रन बनाना उनके जैसे आक्रामक बल्लेबाज को शोभा नहीं देता। राजस्थान के खिलाफ उनका 3 गेंदों पर शून्य पर आउट होना यह स्पष्ट करता है कि वे मानसिक रूप से भारी दबाव में हैं। सबा करीम के अनुसार, पंत अभी तक टी20 में अपना सही टेम्पलेट नहीं खोज पाए हैं। उन्होंने हैदराबाद के खिलाफ छोटे लक्ष्य का पीछा करते हुए 50 गेंदों पर 68* रन की धीमी पारी खेली। इसके चलते जो मैच लखनऊ को दो-तीन ओवर पहले जीत जाना चाहिए था, उसे टीम ने सिर्फ एक गेंद शेष रहते जीता। पंत ने जब आक्रामक रुख अपनाने की कोशिश की, तो वे पिछले 5 मैचों में से 4 बार 20 रन तक भी नहीं पहुंच सके। दिग्गज पेसर डेल स्टेन ने कहा कि पंत खराब प्रदर्शन के दबाव में अपनी स्वाभाविक लय खो चुके हैं। निकोलस पूरन: टीम पर बोझ बन चुके, 7 मैचों में सिर्फ 73 रन; टीम को गैरजरूरी प्रयोग करने पड़ रहे पिछले सीजन मैच-विनर रहे 21 करोड़ के पूरन सीजन के 7 मैचों में 82.02 की खराब स्ट्राइक रेट से मात्र 73 रन बना पाए हैं। पिछले सीजन 196.25 की स्ट्राइक रेट से 524 रन बनाने वाले पूरन का यह प्रदर्शन बड़ी परेशानी बन रहा है। स्टेन का मानना है कि टीम की बैटिंग में उथल-पुथल की वजह पूरन ही हैं। मैनेजमेंट पूरन की पुरानी क्षमता पर इतना अंधविश्वास कर रहा है कि वह उन्हें ड्रॉप करने से डर रहा है। पूरन के खराब प्रदर्शन का असर टीम पर न पड़े, इसके लिए लखनऊ पुख्ता ओपनर मार्करम को मिडिल ऑर्डर में खिला रहा है। इससे टीम पिछले सीजन बतौर ओपनर 445 रन बनाने वाले मार्करम की क्षमता का उपयोग ही नहीं कर पा रही है। मैनेजमेंट को पावरप्ले में मिचेल मार्श के साथ बदोनी जैसे नए संयोजनों को आजमाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस अति-प्रयोग के कारण टीम शुरुआती विकेट गंवाकर और दबाव में आ रही है। ———————————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… मुंबई की IPL में सबसे बड़ी हार:चेन्नई ने 103 रन से हराया; संजू सैमसन की इस सीजन दूसरी सेंचुरी; अकील हुसैन को 4 विकेट पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस को IPL में सबसे बड़ी हार झेलनी पड़ी है। चेन्नई सुपर किंग्स ने गुरुवार को मुंबई के होमग्राउंड पर उसे 103 रन से हराया। इससे पहले मुंबई की सबसे बड़ी हार 87 रन की थी, जो उसे 2013 में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मिली थी। पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

चाकू दिखाकर इंजीनियर से लूट की कोशिश, CCTV:बदमाशों ने आवाज देकर रोका, चाकू देख एक्टिवा छोड़ भागा इंजीनियर, घर के बाहर ही वारदात

चाकू दिखाकर इंजीनियर से लूट की कोशिश, CCTV:बदमाशों ने आवाज देकर रोका, चाकू देख एक्टिवा छोड़ भागा इंजीनियर, घर के बाहर ही वारदात

इंदौर के हीरानगर इलाके मे बदमाशो ने एक इंजीनियर को लूटने की कोशिश की। बदमाशो ने चाकू निकाला इस दौरान इंजीनियर गाडी छोडकर भाग गया। बदमाशो ने तब अपनी बाइक भगा दी। इसके बाद बदमाश वापस आए तब इंजीनियर दौडते हुए अपने घर की तरफ भाग गया। सीसीटीवी मे घटना कैद हुई है। हीरानगर इलाके के कारसदेव नगर मे गुरूवार सुबह 6 बजे की यह घटना बताई जा रही है। इलाके मे रहने वाले शिवम चतुर्वेदी दवा कंपनी मे इंजीनियर के पद पर काम करते है। वह अपनी एक्टिवा से पोलोग्रांउड के लिए जा रहे थे। लूट के इरादे से खडे बदमाशो ने उसे आवाज दी। जब वह रूका तो पीछे बैठे बदमाश ने चाकू खोला। इस दौरान शिवम ने एक्टिवा छोड दी ओर सड़क पर दौड लगा दी। बदमाश इस दौरान बाइक लेकर भाग गए। इसके बाद बदमाश बाइक पलटाकर वापस लाए। जिसमे शिवम घर की तरफ गली मे भाग गए। बाद मे उन्होने परिवार के लोगो को उठाया। शिवम के परिवार के लोगो ने बताया कि उसकी किसी से दुश्मनी नही है। वही शिवम के पास मोबाइल ओर गले मे सोने की चेन थी। संभवत बदमाश वह लूटकर ले जाते। सीसीटीवी फुटेज मे दिखी घटना शिवम के घर पर ओर आसपास केमरे लगे है। जिसमे पूरी वारदात कैद हुई है। मामले मे गुरूवार रात शिवम ने पुलिस को जानकारी दी है।

ट्रम्प ने लेबनान-इजराइल में 3 हफ्ते का सीजफायर कराया:कहा- ईरान के साथ कोई जल्दबाजी नहीं है, परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से इनकार

ट्रम्प ने लेबनान-इजराइल में 3 हफ्ते का सीजफायर कराया:कहा- ईरान के साथ कोई जल्दबाजी नहीं है, परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से इनकार

डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में इजराइल और लेबनान के राजदूत स्तर की दूसरी बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच सीजफायर को तीन हफ्तों के लिए बढ़ाने का ऐलान किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि वह जल्द ही इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन को व्हाइट हाउस बुलाने की योजना बना रहे हैं। ईरान के साथ समझौते को लेकर ट्रम्प ने कहा कि कोई भी डील तभी होगी जब वह अमेरिका के हित में होगी। उन्होंने साफ किया कि इस मामले में कोई तय समय सीमा नहीं है और वह जल्दबाजी में फैसला नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। उनके मुताबिक पारंपरिक (नॉन-न्यूक्लियर) हमलों से ही ईरान को पहले ही भारी नुकसान पहुंचाया जा चुका है, इसलिए परमाणु हथियारों की जरूरत नहीं है। पिछले 24 घंटे के 3 बड़े अपडेट्स 1. भारत की एडवाइजरी: भारत सरकार ने अपने नागरिकों को ईरान की यात्रा न करने की सलाह दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मौजूदा हालात को देखते हुए लोगों को हवाई और जमीनी दोनों रास्तों से ईरान जाने से बचना चाहिए। 2. भारतीय जहाज अभी भी फंसे: भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत के 10 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं, जबकि 14 जहाज अब भी फारस की खाड़ी में मौजूद हैं। 3. निर्वासित क्राउन प्रिंस का विरोध: ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी पर बर्लिन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से निकलते वक्त लाल रंग फेंका गया।

सावधान! नए कपड़ों को बिना धोए पहनने से हो सकती हैं ये खतरनाक बीमारियां, दिल्ली के डॉ. अनिल का बड़ा खुलासा, जानें वजह

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Last Updated:April 24, 2026, 07:02 IST New Clothes Washing Health Risks: दिल्ली के डॉ अनिल गोंबर ने नया कपड़ा लेकर तुरंत पहनने वालों को सावधान किया है. उन्होंने कहा कि नए कपड़े बिना धोए पहनने से केमिकल, बैक्टीरिया और फंगस के कारण एलर्जी, इंफेक्शन और गंभीर त्वचा रोग हो सकते हैं. इसलिए नया कपड़ा लेने के बाद उसे धोकर ही पहनें. ख़बरें फटाफट नई दिल्ली: मार्केट से कपड़े लाकर ज्यादातर लोग तुरंत पहन लेते हैं, उन्हें एक बार भी धोते नहीं है. लोगों को ऐसा लगता है कि इसे तो अभी नया-नया खरीदा है, एक बार पहन कर ही धोएंगे. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो सावधान और सतर्क हो जाइए. क्योंकि इस पर दिल्ली के डॉक्टर ने चौकाने वाला खुलासा किया है, जिसे सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे. डॉक्टर का मानना है कि लोग ऐसी गलती हमेशा से करते आ रहे हैं, जिस वजह से उन्हें त्वचा से जुड़े हुए गंभीर रोगों का सामना करना पड़ता है. उस समय लोग समझ नहीं पाते हैं कि उन्हें त्वचा संबंधित बीमारियां क्यों हो रही हैं. इसके पीछे नए कपड़ों को बिना धोए पहन लेना भी एक प्रमुख कारण है. डॉक्टर का नाम अनिल गोंबर है, जो कि देश की राजधानी दिल्ली के मशहूर मॉडल टाउन स्थित यथार्थ हॉस्पिटल के सीनियर डायरेक्टर और कंसलटेंट इंटरनल मेडिसिन है. क्या सच में कपड़े धो कर पहनना है जरूरी डॉ. अनिल ने बताया कि अधिकतर मार्केट से लोग नए कपड़े लाते हैं और तुरंत उसे पहन लेते हैं. क्योंकि ऐसे में उन्हें कपड़ों को प्रेस करने की जरूरत नहीं पड़ती और वह सोचते हैं मार्केट में नया कपड़ा आता है तो इसे धोना क्यों, लेकिन असल में यहीं पर लोग गलती कर जाते हैं. उन्होंने बताया कि कपड़े दो तरह के होते हैं एक अंडरगारमेंट्स और दूसरे जो अंडरगारमेंट्स के ऊपर पहने जाते हैं. डॉक्टर ने बताया कि कपड़ा कैसा भी हो, वो तमाम हाथों से होकर गुजरता है. उस पर तमाम तरह के रंग और केमिकल चढ़ाए जाते हैं, जिस वजह से जैसे ही आप उसे बिना धोए पहनते हैं तो आपकी त्वचा पर चिपक जाता है और आपको गंभीर त्वचा संबंधित बीमारियां दे सकते हैं. कपड़े हमारी स्किन को प्रभावित करते हैं और हमारी स्किन से एकदम चिपक कर रहते हैं. ऐसे में कपड़ों को बिना धोए ना पहने. कोई भी नया कपड़ा हो तो उसे मार्केट से एक बार लाकर धो लें फिर उसके बाद ही उसे पहने. इस तरह की हो सकती है बीमारियां डॉ. अनिल ने बताया कि कुछ कपड़ों में कीटाणु-रोधी या सिलवट-रोधी फिनिश के लिए केमिकल्स होते हैं. लंबे समय तक संपर्क से त्वचा पर रिएक्शन का खतरा बढ़ता है. इसके अलावा रंग और फिनिशिंग एजेंट्स पसीने के साथ घुलकर आंखों और त्वचा में जलन कर सकते हैं. नए कपड़ों से निकलने वाला केमिकल गंध कुछ लोगों में छींक, नाक बहना, सिरदर्द या अस्थमा जैसी एलर्जी ट्रिगर कर सकती है. स्टोरेज और हैंडलिंग में बैक्टीरिया लग सकते हैं, ये त्वचा पर फोड़े-फुंसी, इंफेक्शन या जलन बढ़ा सकते हैं. यही नहीं, ट्रायल के दौरान कई लोग कपड़े पहनते हैं, पसीना और नमी से फंगस के स्पोर्स कपड़े में रह सकते हैं, जो पहनने पर दाद और खाज जैसे संक्रमण दे सकते हैं. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 24, 2026, 07:02 IST

विधानसभा चुनाव 2026: तमिलनाडु में कहां हुई सबसे बड़ी वोटिंग, कहां हुई सबसे कम? ये रही पूरी लिस्ट

विधानसभा चुनाव 2026: तमिलनाडु में कहां हुई सबसे बड़ी वोटिंग, कहां हुई सबसे कम? ये रही पूरी लिस्ट

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित भाजपा प्रत्याशी तमिलसाई सुंदरराजन ने चुनाव आयोग के प्रमुख की भूमिका निभाई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026: तमिलनाडु में गुरुवार (23 अप्रैल, 2026) को 234 पिज्जा वाली विधानसभा के लिए सुबह 7 बजे से जारी मतदान पूरा हो चुका है। तमिलनाडु में फेस्टिवल का रंग हरे रंग के चेहरे पर नजर आया, फिर बिछुआ वह पुरुष हो, महिला हो, बुजुर्ग हो, अवशेष हो या पहली बार अपने फ्रैंचाइज़ का इस्तेमाल करने वाले युवा हो। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में पहले चरण के चुनाव आयुक्त के बाद इसे ऐतिहासिक चुनाव कहा है। उन्होंने कहा, ‘आजादी के बाद पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में अब तक का सबसे ज्यादा प्रतिशत इस बार के चुनाव में दिखा है। चुनाव आयोग बंगाल और तमिल के हर मतदाता को सलाम करता है।’ चुनाव आयोग ने जारी किये टेम्प्लेट चुनाव आंकड़े उन्होंने कहा कि इस बार तमिलनाडु में 84.69 प्रतिशत प्रतिशत ने वोट डाले हैं, जिसमें पुरुषों की संख्या 83.57 प्रतिशत, महिलाओं की संख्या 85.76 प्रतिशत और जेंडर की संख्या 60.49 प्रतिशत शामिल हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, तमिलनाडु में कुल 5.73 करोड़ से 2.80 करोड़ पुरुष अभिनेता, 2.93 करोड़ महिला कलाकार और 7,728 करोड़ जेंडर के मतदाता शामिल हैं। कुल मतदान विलंब से शुरू हुई थी वोट न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के कुछ मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में तकनीकी गतिविधियां देखने को मिलीं, जिसके कारण मतदान शुरू होने में देर हो गई। बूथों पर वोटों की गिनती की सूचना पर चुनाव अधिकारियों ने तत्काल प्रभावकारी कदम उठाए, बिना किसी वोटिंग के वोटिंग की प्रक्रिया जारी रखी। इस दौरान बड़ी संख्या में वोटर्स पोलिंग बूथों के बाहर कतारें लगी रहीं। तमिल में कितने बजे मतदान का पात्र क्या रहा? हालांकि, चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, कुछ आंकड़ों में आई चुनौतियों के बावजूद, सुबह 9 बजे से 17.69 प्रतिशत वोट मिले थे। वहीं, सुबह 11 बजे तक यह आंकड़ा 37.56 प्रतिशत हो गया था। दोपहर 3 बजे से 70 प्रतिशत और शाम 5 बजे तक तमिल के 82.24% लोग अपना वोट डाल चुके थे। यह भी पढ़ें: ‘मुसलमान टीएमसी की निजी संपत्ति नहीं’, आसनसोल में कार पर हमले के बाद उग्र बीजेपी उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल भाजपा उम्मीदवार तमिलसाई सुंदरराजन ने चुनाव आयोग की सराहना की तमिल में जारी मतदानराज के दौरान मल्लापुर निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की उम्मीदवार तमिलसाई सुंदरन ने अपना वोट डाला। इसके बाद न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में भाजपा उम्मीदवार ने चुनाव आयोग के सलाहकार की बात कही। उन्होंने कहा, ‘चुनाव आयोग ने राज्य में चुनाव के लिए बहुत अच्छे आंकड़े दिए हैं।’ उन्होंने यह सुनिश्चित किया है. सर की वजह से सभी फर्जी वोट हटा दिए गए हैं।’ सर ने इस दौरान बताया कौन सा नाम, कुल कलाकार कितने? तमिलनाडु में मुख्य पहलवान द्रविड़ मुनेत्र गमकड यानी डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कडगम यानी एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के बीच है। राज्य में एक ही चरण की वोटिंग हुई, जिसमें 5.73 करोड़ से अधिक 4,000 से अधिक जनसंख्या के भाग्य का निर्णय होगा। चुनाव आयोग के मुताबिक, तमिलनाडु में एस लहर प्रक्रिया से पहले कुछ 6.41 करोड़ थे। सर के दौरान राज्य के मतदाता सूची से 1.02 करोड़ यानि 15.85 प्रतिशत जिले का नाम हटा दिया गया और जिले का आंकड़ा 5.67 करोड़ रह गया। हालाँकि, SIR में कुल मतदाताओं की संख्या 5.73 करोड़ से अधिक हो गई। यह भी पढ़ें: बंगाल में सीएम योगी आदित्यनाथ का बड़ा हमला! बोले- अब खेला ख़त्म, विकास करने का वक्त शुरू

बड़वानी में श्री सांवलियाजी पाटोत्सव का समापन:शोभायात्रा और महाप्रसादी में उमड़ी भीड़; गौमाता को राष्ट्र माता घोषित करने के अभियान

बड़वानी में श्री सांवलियाजी पाटोत्सव का समापन:शोभायात्रा और महाप्रसादी में उमड़ी भीड़; गौमाता को राष्ट्र माता घोषित करने के अभियान

बड़वानी के रानीपुरा स्थित श्री सांवलियाजी मंदिर परिसर में श्री सांवलियाजी पाटोत्सव और महाप्रसादी का आयोजन हुआ। खरगोन के साद परिवार की ओर से पूर्वजों की स्मृति में आयोजित इस धार्मिक उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। आयोजन की शुरुआत गुरुवार देर शाम विधि-विधान से पूजन और भजन संध्या के साथ हुई। गुरुवार को भगवान श्री सांवलियाजी का अभिषेक, पूजन-अर्चन और स्थापना की गई। इसके बाद एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। शाम को संध्या आरती हुई, जिसके बाद रात में महाप्रसादी का वितरण किया गया। गौमाता को राष्ट्र माता घोषित करने के लिए हस्ताक्षर अभियान यह महाप्रसादी वितरण देर रात तक चलता रहा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस आयोजन के दौरान महाप्रसादी स्थल पर गाय को राष्ट्र माता घोषित करने के समर्थन में एक हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया। इसमें उपस्थित भक्तों से हस्ताक्षर करवाए गए। पूरे आयोजन को सफल बनाने में भगवान श्री सांवलियाजी मंदिर निर्माण और संचालन समिति, साद परिवार तथा विभिन्न समाजों के पदाधिकारियों और युवाओं का विशेष योगदान रहा। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

सुवेंदु को जहां दौड़-दौड़कर पीटा, बंगाल चुनाव में वहां हुई बंपर वोट, ये रही पूरी लिस्ट

सुवेंदु को जहां दौड़-दौड़कर पीटा, बंगाल चुनाव में वहां हुई बंपर वोट, ये रही पूरी लिस्ट

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित शेष 142 पर 29 अप्रैल को मतदान होगा। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल में गुरुवार (23 अप्रैल, 2026) को विधानसभा चुनाव के पहले चरण का ऐतिहासिक वोटर टर्न आउट के साथ पूरा हो चुका है। चुनाव आयोग के मुख्य इलेक्ट्रोनिक कमिश्नर (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने कहा कि तमिल और पश्चिम बंगाल (फेज-1) में आजादी के बाद से अब तक का सबसे बड़ा बैलेट पार्टिसिपेशन रिकॉर्ड किया गया है। चुनाव आयोग के अनुसार, लोगों ने बिना डरे मतदान किया और आयोग पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के हर निवासियों को सलाम करता है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद पहली बार 92.68% वोटिंग दर्ज की गई है। राज्य के 16 अचर्चों की संख्या 3 करोड़ 60 लाख से अधिक है, चुनाव के पहले चरण में अपने फ्रैंचाइज़ का उपयोग किया गया है, जिसमें पुरुषों की संख्या 1.84 करोड़ से अधिक है, महिलाओं की संख्या 1.76 करोड़ से अधिक है और प्रमुख जेंडर के अचर्चों की संख्या 465 है। बंगाल के 16 राज्यों में सबसे ज्यादा वोट टर्न आउट कुटजबिहार जिले में 95.53 प्रतिशत दर्ज किया गया है। यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल चुनाव: बंगाल में बदलाव या प्रेमिका की वापसी? आज़ादी के बाद रिकॉर्ड वोटिंग, ममता और शाह ने किया ये दावा 16 आदर्श में क्या रहा वोटर टर्न आउट का पात्र चुनाव आयोग के वोटर टर्न आउट ऐप में रात 10 बजे तक जारी आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में कुल वोटर टर्न आउट 92.68 प्रतिशत दर्ज किया गया। वहीं, अगर प्लास्टिक के खाते से बात करें तो, अलीपुरद्वार – 92.03%, बैंकुड़ा – 91.94%, भूबीरम – 94.42%, कुशबिहार – 95.53%, दक्षिण दिनाजपुर – 95.37%, दार्जिलिंग – 88.68%, जलपाईगुड़ी – 94.38%, झारग्राम – 92.11%, कालिमपोंग – 83.01%, मालदा – 93.81%, मुर्शिदाबाद – 93.48%, पश्चिम बर्धमान – 90.26%, पश्चिम मेदिनीपुर – 92.10%, पूर्व मेदिनीपुर – 90.85%, पुरुलिया – 90.61% और उत्तर प्रदेश में 93.89% वोट आउट हुए। दक्षिणी दिनाजपुर में सुवेंदु सरकार के साथ वोट के दौरान मुजफ्फरपुर भी की गई थी। लोगों ने बिना डरे वोटिंग की सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि बंगाल विधानसभा चुनाव का पहला चरण आज पूरा हो गया है। 152 विधानसभा में 45 हज़ार वोटिंग में वोटिंग हुई। जोसेफ को सील किया जा रहा है और क्विन स्ट्रांग रूम में भेजा गया है। उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों ने इस बार बिना किसी डॉक्टर को वोट दिए। रिपोर्ट मुझे मिली है कि राज्य के चारो आयोग की ओर से रखे गए मित्र से काफी खुश थे। अब पश्चिम बंगाल के शेष 142 विधानसभा क्षेत्र में अगले चरण का मतदान अगले सप्ताह शनिवार (29 अप्रैल, 2026) को एडवेंचर क्लास को किया जाएगा और इसके बाद 4 मई, 2026 को लीडरशिप की गिनती और उग्रवाद की घोषणा की जाएगी। यह भी पढ़ें: आजाद भारत में पहली बार बंगाल-तमिलनाडु में रिकॉर्ड वोट, जानें क्या बोले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार

Benefits of Tendu Leaves | टिमरू के पत्तों के औषधीय लाभ | Ayurvedic Benefits of Tendu Leaves for Skin and Sugar

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Last Updated:April 24, 2026, 06:17 IST Ayurvedic Benefits of Tendu Leaves for Skin and Sugar: गर्मियों के मौसम में अरावली क्षेत्र में पाया जाने वाला टिमरू का फल स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है, लेकिन इसके पत्ते भी औषधीय गुणों से भरपूर हैं. आयुर्वेद विशेषज्ञ वैद्य दामोदर प्रसाद चतुर्वेदी के अनुसार, तेंदू के पत्ते स्किन रोगों, घाव भरने, शुगर कंट्रोल और पेट की गर्मी शांत करने में सहायक होते हैं. इनमें एंटीऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी गुण पाए जाते हैं. लू के मौसम में यह शरीर के पित्त को संतुलित कर ठंडक प्रदान करते हैं. हालांकि, शुगर और गंभीर रोगियों को इसके उपयोग से पहले आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह अवश्य लेनी चाहिए. गर्मियों की आहट के साथ ही सिरोही, उदयपुर और अरावली की पहाड़ियों में ‘टिमरू’ (तेंदू) के फलों की बहार आ जाती है. यह फल न केवल अपने स्वाद, बल्कि अरावली क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत के रूप में भी पहचाना जाता है. स्थानीय आदिवासी परिवारों, विशेषकर महिलाओं के लिए यह फल आजीविका का एक बड़ा साधन है, जो इसे जंगलों से एकत्रित कर बाजारों में बेचकर अपनी आय अर्जित करती हैं. यह फल न केवल स्वाद और सेहत के लिए फायदेमंद है, बल्कि इसके पत्ते भी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. हालांकि, व्यावसायिक स्तर पर इन पत्तों का मुख्य उपयोग बीड़ी बनाने के लिए किया जाता है, जिसके लिए वन विभाग द्वारा हर साल बाकायदा टेंडर जारी किए जाते हैं. लेकिन बीड़ी उद्योग के इतर, पारंपरिक चिकित्सा और घरेलू नुस्खों में इन पत्तों का उपयोग कई शारीरिक समस्याओं और तकलीफों से निजात पाने के लिए भी किया जाता है. अरावली के आदिवासी क्षेत्रों में लोग आज भी इसके पत्तों के गुणों को स्वास्थ्य लाभ के लिए पहचानते हैं. आयुर्वेद के दृष्टिकोण से टिमरू या तेंदू के पत्तों का महत्व अत्यंत गहरा है. सिरोही के सेवानिवृत्त जिला आयुर्वेद अधिकारी और पिछले 40 वर्षों से आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में अनुभवी विशेषज्ञ, वैद्य दामोदर प्रसाद चतुर्वेदी के अनुसार, यह फल जितना पोषक तत्वों से भरपूर है, उतने ही इसके पत्ते भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी सिद्ध होते हैं. उनके लंबे अनुभव के आधार पर, अरावली की कंदराओं में पाए जाने वाले इन पत्तों में कई ऐसे तत्व मौजूद हैं जो प्राकृतिक चिकित्सा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google आयुर्वेद में टिमरू के पत्तों को स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी बताया गया है. सिरोही के सेवानिवृत्त जिला आयुर्वेद अधिकारी वैद्य दामोदर प्रसाद चतुर्वेदी, जो पिछले 40 वर्षों से आयुर्वेद चिकित्सा में सक्रिय हैं, उन्होंने इसके गुणों पर प्रकाश डाला है. उनके अनुसार, जितना टिमरू का फल फायदेमंद है, उतने ही गुणकारी इसके पत्ते भी होते हैं. इन पत्तों का उपयोग आयुर्वेद में मुख्य रूप से त्वचा (स्किन) से जुड़ी तकलीफों, घावों को जल्दी भरने, दस्त, शुगर और शरीर की गर्मी को कम करने के लिए औषधीय रूप से किया जाता है. इन पत्तों में विशेष रूप से रोगाणुरोधी, एंटीऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी गुण पाए जाते हैं. ये तत्व घावों को सुखाने, पेट दर्द में राहत देने और स्किन इन्फेक्शन को कम करने में काफी मददगार साबित होते हैं. पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में टिमरू के पत्तों का उपयोग सदियों से एक विश्वसनीय औषधि के रूप में किया जाता रहा है. विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में घाव और चोट लगने पर इन पत्तों को प्राथमिक उपचार की तरह इस्तेमाल किया जाता है. शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन या जलन होने पर टिमरू के पत्तों का लेप लगाने से तत्काल राहत मिलती है. इन पत्तों को पीसकर बनाए गए पेस्ट या इनके अर्क (लिक्विड) का लेप प्रभावित स्थान पर करने से दर्द और जलन में काफी कमी आती है. इसके प्राकृतिक हीलिंग गुण संक्रमण को रोकने और जख्म को जल्दी सुखाने में बेहद प्रभावी साबित होते हैं. तेंदू के पत्तों में मौजूद ‘कॉन्स्टिपेटिंग’ (Constipating) और ‘स्टिप्टिक’ (Styptic) गुणों के कारण इन्हें पेट से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान में बेहद कारगर माना जाता है. वर्तमान में गर्मी का प्रकोप बढ़ने के साथ ही लू लगने का खतरा भी काफी बढ़ गया है. ऐसे में तेंदू के पत्तों का औषधीय उपयोग शरीर की आंतरिक गर्मी को शांत करने में सहायक होता है. ये पत्ते शरीर में बढ़े हुए पित्त दोष को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करते हैं और शरीर को भीतर से ठंडक प्रदान करते हैं. तेंदू के पत्तों का औषधीय महत्व मधुमेह (शुगर) के प्रबंधन में भी काफी प्रभावी माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, इन पत्तों में मौजूद तत्व रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं. हालांकि, इसके उपयोग को लेकर सावधानी बरतना भी उतना ही अनिवार्य है. विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर शुगर रोगियों को बिना किसी प्रशिक्षित आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह के इसका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए. चूंकि शुगर लेवल का आवश्यकता से अधिक बढ़ना या घटना, दोनों ही स्थितियाँ स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं, इसलिए दवा की मात्रा और उपयोग का तरीका केवल एक विशेषज्ञ ही सही ढंग से तय कर सकता है. First Published : April 24, 2026, 06:17 IST