27 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
एक्टर से राजनेता बने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय की आखिरी फिल्म जन नायकन कल यानी 23 जुलाई को दुनियाभर में रिलीज हुई है। इस मौके पर उनकी रूमर्ड गर्लफ्रेंड तृषा कृष्णन फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखने पहुंची थीं। थिएटर के बाहर स्पॉट हुईं तृषा ने इस पर बात करने से इनकार कर दिया, जबकि उनकी मां ने भावुक होकर कहा कि वो विजय को बड़े पर्दे पर देखना मिस करेंगी।
तृषा कृष्णन की मां उमा कृष्णन भी फिल्म देखने पहुंचीं। विजय की आखिरी फिल्म पर उन्होंने एएनआई से बातचीत में कहा, मुझे बहुत बुरा लग रहा है, हम उन्हें बहुत मिस करेंगे।

तृषा कृष्णन की मां उमा कृष्णन।
फिल्म देखने पहुंचीं तृषा भीड़ में फंसी
तृषा कृष्णन अपनी दोस्तों के साथ जन नायकन देखने पहुंची थीं। फिल्म देखकर निकलते हुए तृषा को भीड़ ने घेर लिया, जिसके बाद एक्ट्रेस कार तक पहुंचने में मशक्कत करती नजर आई हैं।



फैंस की भीड़ के बीच पुलिस को भी एक्ट्रेस और उनकी दोस्तों को बचाने में जद्दोजहद करनी पड़ी।


फिल्म देखने के कुछ देर बाद तृषा ने दोस्तों के साथ एक फोटो शेयर की है, जिसके कैप्शन में लिखा था, ‘हम जिंदा निकल कर आ गए’। वहीं फिल्म पर लिखा गया, ‘एक आखिरी बार, एक आखिरी डांस, जन नायकन का पागलपन।’

फिल्म ने पहले दिन किया 40 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन
इंडस्ट्री ट्रैकर वेबसाइट सैकनिल्क की रिपोर्ट के अनुसार, विजय की फिल्म जन नायकन ने पहले दिन देशभर में 42.70 करोड़ का नेट कलेक्शन कर लिया है।

सेंसरशिप के चलते टलती रही विजय की आखिरी फिल्म जन नायकन
बता दें कि विजय ने बीते साल जन नायकन के बाद फिल्म से रिटायरमेंट का ऐलान किया था। ये फिल्म पहले जनवरी 2026 में रिलीज की जाने वाली थी। हालांकि सेंसरशिप के चलते फिल्म टलते हुए अब रिलीज हुई है।

फिल्म रिलीज से पहले थलापति विजय के फैंस में काफी उत्साह देखने मिला। उनके कई फैंस विदेश से फिल्म देखने भारत आए हैं। साउथ के कई सिनेमाघरों के बाहर विजय के बड़े-बड़े कटआउट लगाए गए, जहां फैंस घंटों तक डांस करते रहे।



………………………………………
जन नायकन मूवी रिव्यू:विजय की आखिरी फिल्म पर राजनीति हावी, तीन घंटे का सफर बन गया थका देने वाला तमाशा

विजय की आखिरी फिल्म होने के कारण ‘जन नायकन’ सिर्फ एक रिलीज नहीं, बल्कि करोड़ों प्रशंसकों के लिए भावनात्मक मौका थी। उम्मीद थी कि यह फिल्म उनके लंबे सिनेमाई सफर को यादगार विदाई देगी। लेकिन निर्देशक एच. विनोथ इसे कहानी से ज्यादा राजनीतिक संदेश और स्टार की छवि चमकाने का माध्यम बना देते हैं।
नतीजा यह कि फिल्म कई बार मनोरंजन छोड़कर चुनावी भाषण जैसी लगने लगती है। विजय की मौजूदगी तालियां जरूर बटोरती है, लेकिन कमजोर पटकथा और जरूरत से ज्यादा लंबाई फिल्म का असर कम कर देती है। फिल्म की लंबाई 3 घंटे 3 मिनट है। दैनिक भास्कर ने फिल्म को 5 में से 2 स्टार दिए हैं। पूरा रिव्यू पढ़ें…













































