रिलायंस का मुनाफा 13% गिरकर ₹16,971 करोड़ रहा:चौथी तिमाही में रेवेन्यू 13% बढ़कर ₹2.98 लाख करोड़ पहुंचा; शेयर होल्डर को ₹6 लाभांश मिलेगा

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 13% घटकर 16,971 करोड़ रुपए रहा। एक साल पहले की समान तिमाही में प्रॉफिट ₹19,407 करोड़ था। हालांकि, इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू 13% बढ़कर 2.98 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया है। एक साल पहले की समान तिमाही यानी जनवरी-मार्च 2025 में 2.64 लाख करोड़ रुपए रहा था। रिलायंस के बोर्ड ने ₹6 प्रति शेयर डिविडेंड यानी लाभांश की सिफारिश भी की है। अंबानी बोले- ग्लोबल चुनौतियों के बीच रिलायंस का प्रदर्शन स्थिर रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने नतीजों पर कहा कि पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान हमें भू-राजनीतिक बाधाओं, ऊर्जा की अस्थिर कीमतों और बदलते ग्लोबल ट्रेड पैटर्न का सामना करना पड़ा। इन चुनौतियों का असर दुनिया भर के बिजनेस पर पड़ा है। हालांकि, हमारे मजबूत पोर्टफोलियो और घरेलू बाजार पर पकड़ की वजह से हम अस्थिरता से निपटने में सफल रहे। अंबनी बोले- जियो प्लेटफॉर्म के IPO की दिशा में तेजी से बढ़ रहे मुकेश अंबानी ने जियो के आईपीओ को लेकर कहा कि “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हम जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग (IPO) की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं।” अंबानी ने आगे कहा कि जैसे-जैसे कंपनी अपना विस्तार करेगी, यह लिस्टिंग एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। ऑयल एंड गैस बिजनेस पर दबाव से घटा रिलायंस का मुनाफा चौथी तिमाही में रिलायंस के मुनाफे में 13% की गिरावट की वजह कंपनी के ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) और ऑयल एंड गैस बिजनेस पर पड़ा दबाव है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, माल ढुलाई और इंश्योरेंस खर्चों में बढ़ोतरी ने मार्जिन कम कर दिया। विंडफॉल टैक्स का भी असर पड़ा। कंपनी के पांच मेन सेगमेंट हैं- रिलायंस जियो (जियो प्लेटफॉर्म), रिटेल, डिजिटल, ऑयल टू केमिकल्स (O2C) और ऑयल एंड गैस। यहां हम एक-एक कर सभी का तीसरी तिमाही का परफॉर्मेंस बता रहे हैं… 1. जियो के नतीजे चौथी तिमाही में जियो का मुनाफा 13% बढ़कर ₹7,935 करोड़ हो गया। कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 13% बढ़कर 44,928 करोड़ रुपए रहा। कंपनी का प्रति यूजर औसत रेवेन्यू (ARPU) बढ़कर ₹214 पर पहुंच गया है। एक साल पहले की तिमाही में यह ₹206 था। 2. रिलायंस रिटेल ईशा अंबानी की लीडरशिप वाली रिलायंस रिटेल ने चौथी तिमाही में स्थिर प्रदर्शन करते हुए ₹3,563 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। ये पिछले साल के मुकाबले 0.5% ज्यादा है। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू 11.1% बढ़कर ₹87,344 करोड़ पर पहुंच गया। इसका रजिस्टर्ड कस्टमर बेस 10.9% की ग्रोथ के साथ 38.7 करोड़ हो गया है। इस तिमाही में 333 नए स्टोर्स खुलने के साथ ही कुल स्टोर्स की संख्या अब 20,160 हो गई है। 3. डिजिटल (जियोस्टार) जियोस्टार ने 9,784 करोड़ रुपए का रेवेन्यू दर्ज किया है। टेलीविजन मार्केट में इसकी हिस्सेदारी 34.2% रही और यह 81 करोड़ दर्शकों तक पहुंचा। डिजिटल प्लेटफॉर्म जियोहॉटस्टार के मंथली एक्टिव यूजर्स 50 करोड़ रहे। टी20 मेन्स क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल के दौरान 7.25 करोड़ यूजर्स ने एक साथ स्ट्रीमिंग देखी, जो एक वैश्विक रिकॉर्ड है। 4. ऑयल टू केमिकल्स ऑयल-टू-केमिकल (O2C) सेगमेंट का रेवेन्यू 12% बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपए रहा। हालांकि, इसका EBITDA 4% गिरकर 14,520 करोड़ रुपए रह गया। मुनाफे पर दबाव की मुख्य वजह कच्चे तेल के प्रीमियम में बढ़ोतरी, माल ढुलाई और इंश्योरेंस की ऊंची लागत रही। साथ ही, डीजल और ATF के एक्सपोर्ट पर विंडफाल टैक्स दोबारा लगने से भी कमाई पर असर पड़ा है। मुकेश अंबानी ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद कंपनी ने घरेलू बाजार में फ्यूल की सप्लाई को प्रभावित नहीं होने दिया। 5. ऑयल एंड गैस सेगमेंट यह सेगमेंट थोड़ा कमजोर दिखा। इसका रेवेन्यू 9% गिरकर ₹5,867 करोड़ रहा। केजी-डी6 (KG-D6) बेसिन से गैस प्रोडक्शन में थोड़ी कमी और गैस की कीमतों में आई गिरावट (जो $10.09 से घटकर $9.63 रह गई) की वजह से मुनाफे में 18% की कमी आई। इस साल अब तक 15% गिरा रिलायंस का शेयर शुक्रवार, 24 अप्रैल को FY26 की चौथी तिमाही के नतीजों से पहले रिलायंस का शेयर 0.92% गिरकर 1,331 के स्तर पर बंद हुआ। बीते 5 दिन में कंपनी का शेयर 2.43% गिरा है। इस साल यानी 1 जनवरी से अब तक शेयर 15% गिरा है। वहीं एक साल में ये फ्लैट ही रहा। रिलायंस का मार्केट कैप 18.01 लाख करोड़ रुपए हैं। भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट सेक्टर कंपनी है रिलायंस रिलायंस भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट सेक्टर कंपनी है। ये अभी हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन, पेट्रोलियम रिफाइनिंग और मार्केटिंग, पेट्रोकेमिकल्स, एडवांस मटेरियल और कंपोजिट, रिन्यूएबल एनर्जी, डिजिटल सर्विस और रिटेल सेक्टर में काम करती है।
‘अपनी पगड़ी को विजय सिन्हा से सुरक्षित रखें’: तेजस्वी यादव ने बिहार के सीएम सम्राट चौधरी पर कटाक्ष किया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:24 अप्रैल, 2026, 21:28 IST तेजस्वी की यह टिप्पणी बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा 243 सदस्यीय विधानसभा में विश्वास मत जीतने के बाद आई है। राजद नेता तेजस्वी यादव की फाइल फोटो (पीटीआई फोटो) राजद नेता तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को बिहार के राजनीतिक घटनाक्रम पर कटाक्ष करते हुए दावा किया कि राज्य में बहुत कम समय में सरकार में लगातार बदलाव हुए हैं। बिहार विधानसभा को संबोधित करते हुए, यादव ने कहा, “बिहार वास्तव में एक अजीब राज्य है जहां पांच साल में पांचवीं सरकार बनी है। चयनित सीएम ने निर्वाचित सीएम को हटा दिया है। मैं सम्राट चौधरी को सलाह दूंगा कि वे अपनी ‘पगड़ी’ को विजय सिन्हा से सुरक्षित रखें।” विश्वास मत से नेतृत्व परिवर्तन को मंजूरी मिलती है यह बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा 243 सदस्यीय विधान सभा में विश्वास मत जीतने के बाद आया है, जिससे राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार मजबूती से स्थापित हो गई है। यह वोट मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद नेतृत्व परिवर्तन के औपचारिक समापन को चिह्नित करता है। विधानसभा में एनडीए ने दिखाई ताकत विश्वास प्रस्ताव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), जनता दल (यूनाइटेड) और अन्य एनडीए सहयोगियों के समर्थन से आराम से पारित हो गया, जो सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर एकता को दर्शाता है। तेजस्वी यादव का हमला जारी प्रस्ताव पेश होने के तुरंत बाद, यादव ने फिर से घटनाक्रम की आलोचना की। सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “एक सरकार को विकास कार्यों के लिए स्थिरता की आवश्यकता होती है। लेकिन बिहार एक अनोखा राज्य है, जहां पांच साल में यह पांचवीं सरकार बनी है… हम एक ‘निर्वाचित मुख्यमंत्री’ से ‘चयनित मुख्यमंत्री’ में परिवर्तन के लिए सम्राट चौधरी को धन्यवाद देना चाहते हैं। हमें खुशी है कि वह लालू प्रसाद यादव की ‘पाठशाला’ से स्नातक हैं। उनके मुख्यमंत्री बनने से बेहतर हमारे लिए क्या हो सकता है?” वीडियो | बिहार विधानसभा में बोलते हुए राजद नेता तेजस्वी यादव (@yadavtejashwi) कहते हैं, “बिहार वास्तव में एक अजीब राज्य है जहां पांच साल में पांचवीं सरकार बनी है। चयनित सीएम ने निर्वाचित सीएम को हटा दिया है। मैं सम्राट चौधरी को सलाह दूंगा कि वे अपनी ‘पगड़ी’ को सुरक्षित रखें…” pic.twitter.com/w3QoXUz0iW– प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (@PTI_News) 24 अप्रैल 2026 सीएम ने आलोचना का जवाब दिया टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए, सम्राट चौधरी ने कहा कि नेतृत्व विरासत में नहीं मिलता है, बल्कि जनता के समर्थन से अर्जित किया जाता है। उन्होंने कहा, “सत्ता किसी की बपौती नहीं है. सीएम का पद 14 करोड़ बिहारियों का आशीर्वाद है. मुझे नीतीश कुमार, पीएम मोदी, नितिन नबीन, चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा, जीतन राम मांझी का आशीर्वाद है.” उन्होंने आगे कहा, “अगर नीतीश कुमार नहीं होते तो क्या लालू यादव मुख्यमंत्री होते? नीतीश कुमार ने भी लालू यादव को मुख्यमंत्री बनाया… अगर लालू यादव ने मेरे राजनीतिक करियर पर अत्याचार नहीं किया होता तो मैं बिहार का मुख्यमंत्री नहीं बन पाता।” बिहार में बीजेपी के पहले सीएम सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने वाले पहले भाजपा नेता हैं। वह राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते हैं, उनके पिता शकुनी चौधरी तारापुर से छह बार विधायक रह चुके हैं। उनकी मां पार्वती देवी ने भी 1998 में इसी सीट से जीत हासिल की थी. राजनीतिक यात्रा चौधरी को 2023 में भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया और बाद में 2024 में उपमुख्यमंत्री बने। नीतीश कुमार के पद छोड़ने और संसद सदस्य के रूप में राज्यसभा में चले जाने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : बिहार, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 24 अप्रैल, 2026, 21:27 IST न्यूज़ इंडिया ‘विजय सिन्हा से अपनी पगड़ी सुरक्षित रखें’: तेजस्वी यादव ने बिहार के सीएम सम्राट चौधरी पर कटाक्ष किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)बिहार की राजनीति(टी)तेजस्वी यादव(टी)सम्राट चौधरी(टी)बिहार सरकार परिवर्तन(टी)एनडीए सरकार बिहार(टी)नीतीश कुमार का इस्तीफा(टी)बिहार विश्वास मत(टी)बीजेपी मुख्यमंत्री बिहार
छिंदवाड़ा में बीच शहर जली नरवाई:कॉलोनियों के पास तक आग फैली, दहशत मे निवासी

छिंदवाड़ा: शहर के वार्ड नंबर 38 पाठाधाना क्षेत्र में नरवाई जलाने का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक पाँचघर के पीछे स्थित कृषि भूमि, जो उमाकांत, जगदीश चौबितकर और मृणाल चौबितकर परिवार की बताई जा रही है, में आग लगाई गई। यह जमीन हाईहोप स्कूल के पीछे और घनी आबादी वाली कॉलोनियों से सटी हुई है, जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार खेत में अचानक आग भड़क उठी, जिससे आसपास के मकानों और खड़ी फसलों पर खतरा मंडराने लगा। खेत के पास बड़ी संख्या में वाहन भी खड़े रहते हैं, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रही। स्थानीय लोगों ने बताया कि लापरवाही के चलते नरवाई जलाई गई, जबकि इस पर प्रशासन द्वारा पहले से ही सख्ती बरती जा रही है। जिले में अब तक नरवाई जलाने के 60 से अधिक मामलों में किसानों पर कार्रवाई की जा चुकी है, इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। शहर के बीचों-बीच इस तरह आग लगाने की घटना ने प्रशासन की निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है और लोगों ने जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
Tips To treat scorpion poisoning: तुरंत उतर जाएगा बिच्छू का जहर, करें ये 5 रामबाण उपाय

Last Updated:April 24, 2026, 21:05 IST Bichhu Ka Jahar Kaise Utare: बिच्छू का जहर सांप से कम खतरनाक होता है, लेकिन यदि तुरंत इसके लिए उपाय न किया जाए तो ये पूरे शरीर को पैरालाइज कर सकता है. ऐसे में बिच्छू के काटने पर आसपास डॉक्टर न हो तो ये 5 घरेलू उपाय आपकी जान बचा सकते हैं. ख़बरें फटाफट Bichhoo Ka Jahar Kaise Utare: गर्मी और बारिश का मौसम मिट्टी में बिल बनाकर रहने वाले जीव-जंतु बाहर निकलकर घूमने लगते हैं. ऐसे में कई बार ये घूमते-फिरते इंसानों के रास्ते में और घरों तक भी पहुंच जाते हैं. बिच्छू ऐसा ही एक छोटा पर जहरीला जीव है. हालांकि इंसान इनके शिकार नहीं होते हैं, लेकिन कई बार खतरा महसूस होने पर खुद के बचाव में ये डंक मार देते हैं. बिच्छू का जहर इसकी नुकीली पूंछ में होता है. जो कि अंदर की तरफ हल्का मुड़ा हुआ होता है. लेकिन अटैक के वक्त ये पूंछ तीर सा सीधा होकर अपने दूश्मन और शिकार के शरीर में जहर भर देता है. गांव और जंगलों के नजदीक बसे लोग आए दिन बिच्छू के डंक शिकार होते हैं. हालांकि बिच्छू का जहर सांप के जहर से कम खतरनाक होता है. लेकिन यदि ये पूरे शरीर में फैल जाए तो व्यक्ति को लकवा भी मार सकता है. ऐसे में बिच्छू के काटने पर आसपास डॉक्टर न हो तो ये 5 घरेलू उपाय आपकी जान बचा सकते हैं. बिच्छू के डंक मारने पर दिखने वाले लक्षणतेज दर्द और जलनउल्टीचक्कर आनाधुंधला नजर आना बिच्छू काटने पर तुरंत क्या करना चाहिए- 5 घरेलू उपाय पहला उपाय- अपमर्ग के पौधे की जड़ बिच्छू का जहर उतारने में बहुत कारगर साबित होती है. ये पौधा बहुत ही आसानी से आसपास मिल जाता है, कुछ लोग इसे घर के गार्डन में भी लगाते हैं. जब भी आपको बिच्छू काटे इसकी जड़ को पीसकर इसे प्रभावित जगह पर लगा दें और इसे कपड़े से बांध दें. आंधे घंटे में सारा जगह निकल जाएगा. दूसरा उपाय- तुलसी की पत्तियां भी बिच्छू का जहर खत्म करने में रामबाण असर दिखाती है. इस उपाय को करने के लिए तुलसी की 21 पत्तियां लें और इसे अच्छी तरह से पीसकर इसे प्रभावित जगह पर लगाकर कपड़े से लपेट लें. इसके साथ ही 5 पत्तों को साफ करके खा लें. इससे तुरंत जहर का असर कम होने लगता है. तीसरा उपाय- बिच्छू का जहर उतारने का सबसे बड़ा रामबाण उपाय है- लौंग का तेल और खाने वाला चूना. इसके लिए दोनों को मिलाकर पेस्ट बना लें, और इसे प्रभावित जगह पर लगा लें. 20 मिनट में इससे बिच्छू का जहर खत्म होने लगता है. चौथा उपाय- सर्पगंधा के जड़ का इस्तेमाल भी बिच्छू के डंक मारने पर बहुत मददगार साबित होता है. इसके लिए इस पौधे की जड़ को पीसकर प्रभावित जगह पर लगा लें. पांचवा उपाय- बिच्छू का जहर उतारने के लिए आप किचन में रखे लहसुन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए बिना पानी मिलाएं लहसुन की कलियों को पीस लें और इस पेस्ट को प्रभावित जगह पर लगाकर ऊपर से कपड़ा बांध लें. इन बातों का रखें ध्यानबिच्छू के काटने पर सबसे पहले काटे हुए जगह से चार इंच ऊपर कपड़े से टाइट बांध लें. इससे जहर पूरे शरीर में नहीं फैलेगा. इसके अलावा माना जाता है कि बिच्छू जैसे-जैसे घूमता है वैसे-वैसे उसका जहर शरीर में चढ़ने लगता है, इसलिए गांव घरों में बिच्छू को खोजकर इसे मारा जाता है. लेकिन ऐसा करना गलत है, आप बिच्छू को एक डिब्बे में बंद करके रख सकत हैं, और जहर उतरते ही इसे दूर जगह पर छोड़ दें. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 24, 2026, 21:05 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज:गुवाहाटी हाईकोर्ट बोला- ये फर्जी दस्तावेज का केस, कस्टोडियल पूछताछ जरूरी; CM सरमा की पत्नी पर आरोप लगाए थे

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने शुक्रवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी से जुड़े मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। जस्टिस पार्थिव ज्योति सैकिया ने कहा कि खेड़ा ने रिनिकी भुइयां शर्मा पर आरोप लगाने के लिए जिन दस्तावेजों को आधार बनाया है, पुलिस के मुताबिक वे पहले ही फर्जी साबित हो चुके हैं। कोर्ट ने कहा कि खेड़ा यह साबित नहीं कर पाए कि रिनिकी के पास कई देशों के पासपोर्ट हैं या उन्होंने अमेरिका में कंपनी बनाकर निवेश किया है। पहली नजर में ये फर्जी दस्तावेज रखने का केस बनता है। इसलिए पुलिस को जांच के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है। क्या है पूरा मामला खेड़ा ने 5 अप्रैल को आरोप लगाया था कि असम CM सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा के पास कई देशों के पासपोर्ट हैं और विदेश में अघोषित संपत्ति है। जिनका जिक्र चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया। इसके बाद रिनिकी भुइयां शर्मा ने गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में खेड़ा के खिलाफ केस दर्ज कराया था। कोर्ट बोला- निर्दोष महिला को राजनीति में घसीटा पहले क्या हुआ था 6 अप्रैल: हिमंता बोले- हमने प्रापर्टी के असली मालिक का पता लगाया हिमंता ने दुबई में फ्लैट होने के आरोपों का जवाब देते हुए एक वीडियो पोस्ट किया और लिखा था कि हमने दुबई के उन 2 अपार्टमेंट के असली मालिकों का पता लगा लिया है, जिनका जिक्र कांग्रेस ने किया है। ये फ्लैट मोहम्मद अहमद और फातिमा सुलेमान के हैं। 10 अप्रैल: तेलंगाना हाईकोर्ट से 7 दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत ली तेलंगाना हाईकोर्ट ने खेड़ा को एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, ताकि वे असम की अदालत में जा सकें। असम सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद 15 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। 17 अप्रैल: पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की मांग खारिज सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की मांग खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि वे अपनी याचिका असम की अदालत में दाखिल करें। ————————————- ये खबर भी पढ़ें… असम पुलिस की कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर छापेमारी, हिमंता बोले- पाताल से निकालेंगे सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर फर्जी पासपोर्ट का आरोप लगाने के दो दिन बाद असम पुलिस ने दिल्ली में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर छापा मारा। हिमंता की पत्नी की FIR के बाद यह कार्रवाई की गई है। हालांकि छापेमारी के वक्त पवन घर पर मौजूद नहीं थे। पूरी खबर पढ़ें…
पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज:गुवाहाटी हाईकोर्ट बोला- ये फर्जी दस्तावेज का केस, कस्टोडियल पूछताछ जरूरी; CM सरमा की पत्नी पर आरोप लगाए थे

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने शुक्रवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी से जुड़े मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। जस्टिस पार्थिव ज्योति सैकिया ने कहा कि खेड़ा ने रिनिकी भुइयां शर्मा पर आरोप लगाने के लिए जिन दस्तावेजों को आधार बनाया है, पुलिस के मुताबिक वे पहले ही फर्जी साबित हो चुके हैं। कोर्ट ने कहा कि खेड़ा यह साबित नहीं कर पाए कि रिनिकी के पास कई देशों के पासपोर्ट हैं या उन्होंने अमेरिका में कंपनी बनाकर निवेश किया है। पहली नजर में ये फर्जी दस्तावेज रखने का केस बनता है। इसलिए पुलिस को जांच के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है। क्या है पूरा मामला खेड़ा ने 5 अप्रैल को आरोप लगाया था कि असम CM सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा के पास कई देशों के पासपोर्ट हैं और विदेश में अघोषित संपत्ति है। जिनका जिक्र चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया। इसके बाद रिनिकी भुइयां शर्मा ने गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में खेड़ा के खिलाफ केस दर्ज कराया था। कोर्ट बोला- निर्दोष महिला को राजनीति में घसीटा पहले क्या हुआ था 6 अप्रैल: हिमंता बोले- हमने प्रापर्टी के असली मालिक का पता लगाया हिमंता ने दुबई में फ्लैट होने के आरोपों का जवाब देते हुए एक वीडियो पोस्ट किया और लिखा था कि हमने दुबई के उन 2 अपार्टमेंट के असली मालिकों का पता लगा लिया है, जिनका जिक्र कांग्रेस ने किया है। ये फ्लैट मोहम्मद अहमद और फातिमा सुलेमान के हैं। 10 अप्रैल: तेलंगाना हाईकोर्ट से 7 दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत ली तेलंगाना हाईकोर्ट ने खेड़ा को एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, ताकि वे असम की अदालत में जा सकें। असम सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद 15 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। 17 अप्रैल: पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की मांग खारिज सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की मांग खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि वे अपनी याचिका असम की अदालत में दाखिल करें। ————————————- ये खबर भी पढ़ें… असम पुलिस की कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर छापेमारी, हिमंता बोले- पाताल से निकालेंगे सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर फर्जी पासपोर्ट का आरोप लगाने के दो दिन बाद असम पुलिस ने दिल्ली में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर छापा मारा। हिमंता की पत्नी की FIR के बाद यह कार्रवाई की गई है। हालांकि छापेमारी के वक्त पवन घर पर मौजूद नहीं थे। पूरी खबर पढ़ें…
पेटीएम पेमेंट्स बैंक का कामकाज आज से बंद:RBI ने लाइसेंस रद्द किया, UPI एप चलता रहेगा

पेटीएम पेमेंट्स बैंक का कामकाज आज 24 अप्रैल से पूरी तरह बंद कर दिया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (PPBL) का बैंकिंग लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। RBI ने कहा कि बैंक का कामकाज कस्टमर्स के हितों के खिलाफ था। यह आदेश 24 अप्रैल 2026 को कारोबार की समाप्ति के साथ ही लागू हो गया है। लाइसेंस रद्द होने के साथ ही अब बैंक किसी भी तरह का बैंकिंग लेनदेन या ट्रांजेक्शन नहीं कर सकेगा। हालांकि, UPI एप पहले की तरह चलता रहेगा। केंद्रीय बैंक अब इस बैंक को पूरी तरह बंद करने के लिए हाई कोर्ट में आवेदन देगा। RBI ने लाइसेंस रद्द करने की 4 वजह बताईं लाइसेंस रद्द होने के बाद पेटीएम के शेयर में गिरावट शुक्रवार को शेयर बाजार में पेटीएम की मूल कंपनी ‘वन 97 कम्युनिकेशंस’ के शेयरों में गिरावट देखी गई। पेटीएम के शेयर 0.5% गिरकर 1,153 रुपए प्रति शेयर पर बंद हुए। बैंकिंग लाइसेंस रद्द होने की खबर का असर आने वाले दिनों में स्टॉक पर और अधिक देखने को मिल सकता है। 2022 से ही RBI के रडार पर था पेटीएम बैंक पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर रिजर्व बैंक की सख्ती काफी पुरानी है। इसकी शुरुआत मार्च 2022 में हुई थी, जब RBI ने बैंक को नए ग्राहक जोड़ने से रोक दिया था। इसके बाद जनवरी 2024 में नियमों के उल्लंघन और कस्टमर ड्यू डिलिजेंस (KYC) में खामियों के चलते बैंक को नए डिपॉजिट लेने से भी रोक दिया गया था। तभी से बैंक केवल पुराने डिपॉजिट निकालने और लोन रेफरल जैसी सीमित गतिविधियों तक ही सिमट गया था। 2015 में मिला था लाइसेंस, बड़े निवेशकों का था साथ पेटीएम पेमेंट्स बैंक को अगस्त 2015 में सीमित बैंकिंग लाइसेंस मिला था। इसके तहत बैंक छोटी जमा राशि स्वीकार कर सकता था, लेकिन उसे सीधे लोन देने की अनुमति नहीं थी। इस बैंक को वन 97 कम्युनिकेशंस का समर्थन प्राप्त था, जिसमें चीन के ‘आंट ग्रुप’ (Ant Group) और जापान के ‘सॉफ्टबैंक’ जैसे दिग्गज निवेशक शामिल रहे हैं। ——————— ये खबर भी पढ़ें… मिथॉस AI से बैंकिंग सिस्टम पर साइबर हमले का खतरा: वित्त मंत्री सीतारमण ने हाई-लेवल मीटिंग की; क्या है मिथॉस और यह क्यों खतरनाक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को बैंकों के प्रमुखों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग की। इस बैठक में एंथ्रोपिक के ‘क्लॉड मिथॉस’ AI मॉडल से बैंकिंग सेक्टर को होने वाले संभावित खतरों पर चर्चा की गई। यह एआई मॉडल इतना एडवांस है कि हैकर इसका इस्तेमाल दशकों पुरानी अज्ञात खामियों को खोजकर फाइनेंशियल सेक्टर पर साइबर हमले कर सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
RBI Cancels Paytm Payments Bank License

मुंबई28 मिनट पहले कॉपी लिंक पेटीएम पेमेंट्स बैंक का कामकाज आज 24 अप्रैल से पूरी तरह बंद कर दिया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (PPBL) का बैंकिंग लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। RBI ने कहा कि बैंक के कामकाज से ग्राहकों का पैसा सुरक्षित नहीं था। हालांकि, UPI एप पहले की तरह चलता रहेगा। RBI ने कहा है कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक के पास इतनी नकदी है कि बैंक बंद होने की प्रक्रिया के दौरान वह अपने सभी ग्राहकों की जमा राशि वापस कर सकता है। इसका मतलब यह है कि जमाकर्ताओं का पैसा डूबने की संभावना नहीं है। RBI ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक बंद करने का आदेश दिया। RBI ने लाइसेंस रद्द करने की 4 वजह बताईं ग्राहकों का नुकसान: बैंक जिस तरह से काम कर रहा था, उससे वहां पैसा जमा करने वाले लोगों का पैसा सुरक्षित नहीं था। मैनेजमेंट की लापरवाही: बैंक चलाने वाले अधिकारियों का रवैया और फैसले आम जनता और खाताधारकों के फायदे में नहीं थे। जारी रखने का कोई फायदा नहीं: रिजर्व बैंक को लगा कि इस बैंक को और ज्यादा चलाने से जनता को कोई लाभ नहीं होगा, बल्कि जोखिम ही बढ़ेगा। शर्तें तोड़ीं: बैंक ने लाइसेंस लेते समय जो वादे और नियम (जैसे KYC और फंड्स का सही इस्तेमाल) माने थे, उनका लगातार उल्लंघन किया गया। 4 सवाल में समझें यूजर पर क्या असर होगा 1. पेमेंट्स बैंक क्या होता हैं? जवाब: पेमेंट्स बैंक का कामकाज सामान्य बैंक (जैसे SBI या PNB) की तरह ही होता है, लेकिन इसकी कोई फिजिकल ब्रांच नहीं होती है। इसमें बैंकिंग के सभी काम- जैसे खाता खोलना, राशि जमा करना और ट्रांजैक्शन मोबाइल एप के जरिए होता है। हालांकि, पेमेंट्स बैंक के (वॉलेट) अकाउंट में अधिक्तम 2 लाख रुपए तक जमा किए जा सकते हैं। इस तरह के बैंक किसी भी तरह का लोन नहीं दे सकते, क्रेडिट कार्ड जारी नहीं कर सकते, प्रवासी भारतीय इनमें खाता नहीं खोल सकते और आपका पैसा निवेश नहीं कर सकते। इन्हें अपना अधिकांश पैसा सरकारी बॉन्ड्स में सुरक्षित रखना होता है। 2. मैं पेटीएम एप का इस्तेमाल करता हूं, क्या मेरा UPI अब बंद हो जाएगा? जवाब: अगर आपका पेटीएम एप SBI, HDFC या ICICI जैसे अन्य बैंक के अकाउंट से लिंक है, तो UPI पहले की तरह ही चलता रहेगा। पेटीएम अब गूगल पे और फोनपे की तरह एक ‘थर्ड पार्टी एप’ के रूप में काम कर रहा है। इसके लिए कंपनी ने एक्सिस, HDFC और SBI जैसे बैंकों के साथ पार्टनरशिप की है। यानी UPI ट्रांजेक्शन जारी रहेंगे, लेकिन अब उनका बैंक पार्टनर पेटीएम बैंक नहीं होगा। 3. अगर UPI सीधे ‘पेटीएम पेमेंट्स बैंक’ से लिंक है तो क्या होगा? जवाब: RBI ने @paytm वाले हैंडल (जो पेटीएम पेमेंट्स बैंक से जुड़े हैं) से नए पैसे जमा करना या ट्रांजेक्शन करना 2024 में ही बंद कर दिया था। लाइसेंस रद्द होने के बाद पेटीएम की इसे फिर से चालू करने की उम्मीद भी खत्म हो गई है। अगर किसी यूजर का पेटीएम वॉलेट में पैसा अब भी है तो वह अपने बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर सकता है। क्या करें- आपको पेटीएम एप में जाकर अपने किसी दूसरे बैंक अकाउंट को प्राइमरी अकाउंट के तौर पर लिंक करना होगा। इसके बाद आप फिर से UPI पेमेंट कर सकेंगे। 4. पेटीएम और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम पर क्या असर होगा? जवाब: RBI के फैसले से पेटीएम अब खुद बैंकिंग नहीं कर पाएगा, उसे दूसरे बैंकों पर निर्भर रहना होगा। इससे UPI मार्केट में फोनपे और गूगल पे का दबदबा बढ़ सकता है। अन्य फिनटेक कंपनियों के लिए यह कड़ा संदेश है कि नियमों की अनदेखी भारी पड़ेगी और अब रेगुलेटरी सख्ती बढ़ेगी। पेटीएम का शेयर 0.5% गिरा शुक्रवार को शेयर बाजार में पेटीएम की मूल कंपनी ‘वन 97 कम्युनिकेशंस’ के शेयरों में गिरावट देखी गई। पेटीएम के शेयर 0.5% गिरकर 1,153 रुपए प्रति शेयर पर बंद हुए। बैंकिंग लाइसेंस रद्द होने की खबर का असर आने वाले दिनों में स्टॉक पर और अधिक देखने को मिल सकता है। 2022 से ही RBI के रडार पर था पेटीएम बैंक पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर रिजर्व बैंक की सख्ती काफी पुरानी है। इसकी शुरुआत मार्च 2022 में हुई थी, जब RBI ने बैंक को नए ग्राहक जोड़ने से रोक दिया था। इसके बाद जनवरी 2024 में नियमों के उल्लंघन और कस्टमर ड्यू डिलिजेंस (KYC) में खामियों के चलते बैंक को नए डिपॉजिट लेने से भी रोक दिया गया था। तभी से बैंक केवल पुराने डिपॉजिट निकालने और लोन रेफरल जैसी सीमित गतिविधियों तक ही सिमट गया था। 2015 में मिला था लाइसेंस, बड़े निवेशकों का था साथ पेटीएम पेमेंट्स बैंक को अगस्त 2015 में सीमित बैंकिंग लाइसेंस मिला था। इसके तहत बैंक छोटी जमा राशि स्वीकार कर सकता था, लेकिन उसे सीधे लोन देने की अनुमति नहीं थी। इस बैंक को वन 97 कम्युनिकेशंस का समर्थन प्राप्त था, जिसमें चीन के ‘आंट ग्रुप’ (Ant Group) और जापान के ‘सॉफ्टबैंक’ जैसे दिग्गज निवेशक शामिल रहे हैं। ——————— ये खबर भी पढ़ें… मिथॉस AI से बैंकिंग सिस्टम पर साइबर हमले का खतरा: वित्त मंत्री सीतारमण ने हाई-लेवल मीटिंग की; क्या है मिथॉस और यह क्यों खतरनाक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को बैंकों के प्रमुखों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग की। इस बैठक में एंथ्रोपिक के ‘क्लॉड मिथॉस’ AI मॉडल से बैंकिंग सेक्टर को होने वाले संभावित खतरों पर चर्चा की गई। यह एआई मॉडल इतना एडवांस है कि हैकर इसका इस्तेमाल दशकों पुरानी अज्ञात खामियों को खोजकर फाइनेंशियल सेक्टर पर साइबर हमले कर सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
एमपी के 30 हजार से ज्यादा नर्सिंग छात्रों को झटका:हाईकोर्ट ने कहा-बिना अनुमति नहीं होंगी परीक्षाएं,28 अप्रैल से आयोजित की गईं थी;CBI ने 600 काॅलेज पाए थे अपात्र

नर्सिंग कॉलेज मान्यता फर्जीवाड़े मामले में एमपी हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल एवं जस्टिस अविनेंद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने शुक्रवार को सुनवाई की। अदालत ने कहा कि बिना हाईकोर्ट की अनुमति के परीक्षाएं नहीं होगी। आगामी परीक्षाओं के लिए नर्सिंग काउंसिल हाईकोर्ट को हाईकोर्ट की अनुमति लेनी होगी। साथ ही अपात्र काॅलेजों के छात्रों को पात्र कॉलेजों में ट्रांसफर किए जाए। बता दें, 28 अप्रैल से परीक्षाएं आयोजित की गई थी। इससे पहले हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जांच की तो पाया कि 800 में से 600 कॉलेज अपात्र थे। कोर्ट का यह फैसला प्रदेश के 30 हजार से ज्यादा नर्सिंग छात्रों के लिए झटका है। परीक्षाओं के लिए हाईकोर्ट की अनुमति जरूरी लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका में मध्य प्रदेश में 2020-21 में खुले सैकड़ों फर्जी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी जिसमें हाईकोर्ट की सख्ती के बाद हुई सीबीआई जांच में लगभग 800 नर्सिंग कॉलेजों में से करीब 600 कॉलेज अनुपयुक्त या कमियों से भरे पाए गए थे। इन संस्थानों में भवन, लैब, लाइब्रेरी, अनुभवी शिक्षक और 100 बिस्तरों वाले अस्पताल जैसी अनिवार्य सुविधाओं की भारी कमी पाई गई थी। कई कॉलेज केवल कागजों पर चल रहे थे और कई प्रिंसिपल और शिक्षक 15-15 कॉलेजों में एक साथ कार्यरत दर्शाए गए थे। अपात्र को सूटेबल कॉलेज में करना था ट्रांसफर मामले में याचिकाकर्ता एसोसिएशन ने आवेदन पेश कर आरोप लगाया था कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले कागजी /अमानक कालेजों में जीएनएम कोर्स संचालित करने वाले जो 117 नर्सिंग कॉलेज सीबीआई जांच में अपात्र पाए गए थे, एमपी नर्सिंग काउंसिल उनके छात्रों को सूटेबल कॉलेजों में ट्रांसफर करने के स्थान पर उन कॉलेजों की अंतिम वर्ष की परीक्षाएं ले रहा है, जो 28 अप्रैल से प्रस्तावित है। अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के बाद एमपीएनआरसी की अंडरटेकिंग रिकार्ड पर लेकर आदेश दिए हैं कि हाईकोर्ट की अनुमति के बगैर कोई भी परीक्षाओं का आयोजन नहीं होगा, मामले की सुनवाई पुनः 28 अप्रैल को चीफ जस्टिस की अगुआई वाली युगलपीठ में होगी, अब नर्सिंग कॉलेजों की प्रस्तावित परीक्षाओं के लिए एमपी नर्सिंग काउंसिल को आवेदन पेश कर हाईकोर्ट से अनुमति लेनी होगी, इसी आधार नर्सिंग कॉलेजों की परिक्षाओं पर निर्णय होगा।
सिर्फ राज्यसभा झटका नहीं: संदीप पाठक, राघव चड्ढा के बाहर जाने से AAP की मूल संरचना पर असर पड़ा | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:24 अप्रैल, 2026, 20:38 IST News18 से बात करते हुए, पार्टी के एक नेता ने इस घटनाक्रम को ऐसे समय में ‘पीठ पर छुरा घोंपना’ बताया जब AAP पहले से ही दबाव में है राघव चड्ढा ने कहा कि आप के 10 में से सात राज्यसभा सदस्य पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं। फ़ाइल छवि आप से सात राज्यसभा सांसदों के अचानक बाहर निकलने से न केवल संसद में एक शून्य पैदा हो गया है, बल्कि पार्टी का संगठनात्मक ढांचा भी कमजोर हो गया है, खासकर संदीप पाठक और राघव चड्ढा के साथ, जो पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राजनीतिक मामलों की समिति का हिस्सा थे। आम आदमी पार्टी द्वारा “ऑपरेशन लोटस” करार दिया गया, शुक्रवार को सात राज्यसभा सदस्यों के बाहर निकलने से आप के पास सदन में केवल तीन सदस्य बचे हैं – दो दिल्ली से और एक पंजाब से। पाठक और अशोक मित्तल की उपस्थिति में चड्ढा ने यह घोषणा की। चड्ढा ने कहा कि इस कदम के तहत हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल को नामित किया गया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि राज्यसभा में आप के दो-तिहाई से ज्यादा सांसद बीजेपी में विलय कर रहे हैं। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, “सात सांसदों ने दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे राज्यसभा के माननीय सभापति को सौंप दिया गया है। मैंने, दो अन्य सांसदों के साथ, व्यक्तिगत रूप से हस्ताक्षरित दस्तावेज़ सौंपे हैं।” आज, भारत के संविधान के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए, राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई से अधिक सांसदों का भाजपा में विलय हो गया है। सात सांसदों ने दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए हैं, जो राज्यसभा के माननीय सभापति को प्रस्तुत किया गया था। मैं, दो अन्य सांसदों के साथ… – राघव चड्ढा (@raghav_chadha) 24 अप्रैल 2026 बाद में, राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक पार्टी प्रमुख नितिन नबीन की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हुए। चड्ढा का विद्रोह चड्ढा न सिर्फ राज्यसभा में आप से सांसद थे, बल्कि वह राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी थे। आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वह AAP के राष्ट्रीय प्रवक्ता और मुकदमेबाजी मामलों के प्रभारी भी थे। हालाँकि AAP के साथ उनके संबंधों को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं, खासकर तब जब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को कथित उत्पाद शुल्क नीति मामले में जेल जाना पड़ा, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में संबंध खराब होने के बाद भी वह आधिकारिक तौर पर पदों पर बने रहे। पाठक का मौन निकास पाठक के मामले में वह राष्ट्रीय महासचिव संगठन और आप के छत्तीसगढ़ प्रभारी थे। आप का राष्ट्रीय महासचिव का पद उनके लिए ही बनाया गया था। उन्हें पार्टी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था, राजनीतिक मामलों की समिति में “स्थायी आमंत्रित सदस्य” भी बनाया गया था। वह 2020 के बाद से ही पार्टी के साथ पूर्णकालिक रूप से काम कर रहे हैं। पार्टी द्वारा उन्हें 2020 की दिल्ली जीत और 2022 पंजाब जीत का श्रेय दिए जाने के बाद वह एक महत्वपूर्ण नाम बन गए, क्योंकि कहा जाता था कि चुनावी रणनीतियों के पीछे उनका ही दिमाग था। मार्च 2022 में, जब उन्होंने राज्यसभा सीट के लिए अपना पर्चा दाखिल किया, तो AAP ने एक्स पर पोस्ट किया कि वह पृष्ठभूमि में काम कर रहे हैं और “दिल्ली और पंजाब में पार्टी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है”। आईआईटी प्रोफेसर संदीप पाठक ने पंजाब से आप के राज्यसभा सांसद के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया। वह पृष्ठभूमि में काम कर रहे हैं और दिल्ली और पंजाब में पार्टी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सभी AAP स्वयंसेवकों के लिए वास्तव में गर्व का क्षण! 😇 pic.twitter.com/rNUO89vTIR -आप (@AamAadmiParty) 21 मार्च 2022 मैं डॉ. संदीप पाठक को बधाई देता हूं और उनकी नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देता हूं। हमें देश के हर कोने में AAP संगठन बनाना है https://t.co/o2l3WJa7tr- अरविंद केजरीवाल (@ArvindKejriwal) 13 दिसंबर 2022 पाठक और चड्ढा दोनों आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के अंदरूनी घेरे का हिस्सा थे और पार्टी के प्रमुख नेताओं में से थे। राजनीतिक मामलों की समिति के सदस्यों के रूप में, वे पार्टी के प्रमुख राजनीतिक निर्णय लेने वाली टीम का हिस्सा थे। कम से कम ये दोनों सांसद न केवल सदन में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे बल्कि महत्वपूर्ण निर्णय लेने में भी शामिल थे। इस सूची में मालीवाल एक और महत्वपूर्ण नाम था, हालांकि वह कुछ महीने पहले पार्टी के खिलाफ मुखर हो गई थीं। अरविंद केजरीवाल के घर में कथित तौर पर मारपीट के बाद मालीवाल का अलगाव-शुक्रवार तक अनौपचारिक-अपेक्षाकृत अचानक था। मालीवाल उस समय पार्टी के खिलाफ मुखर हो गईं जब उन्होंने दावा किया कि केजरीवाल और आप आरोपियों को बचा रहे हैं। ‘बहुत ज्यादा भरोसा बहुत जल्दी’ मालीवाल के साथ, चड्ढा और पाठक को केजरीवाल की कोर टीम का हिस्सा माना जाता था – एक ऐसा घटनाक्रम जिसने पार्टी के भीतर कई बार भौंहें चढ़ा दी हैं। News18 से बात करते हुए, पार्टी के एक नेता ने इस घटनाक्रम को ऐसे समय में “पीठ पर छुरा घोंपना” बताया जब पार्टी पहले से ही दबाव में है। नेता ने कहा, “पार्टी ने हमेशा नए चेहरों को बढ़ावा दिया है। ये व्यक्ति AAP द्वारा प्रदान किए गए मंच के माध्यम से राजनीति में उभरे, और इनमें से अधिकांश के पास इसमें शामिल होने से पहले कोई राजनीतिक पहचान नहीं थी। आज, जब पार्टी का हर कार्यकर्ता केंद्रीय एजेंसियों के खिलाफ लड़ रहा है, तो यह कदम न केवल AAP के साथ बल्कि पंजाब के लोगों के साथ भी विश्वासघात है।” नेता ने कहा कि जो लोग किसी पार्टी के प्रति वफादार नहीं रह सकते वे जमीन के प्रति वफादार नहीं रह पाएंगे। “इतनी सारी ज़िम्मेदारियों के साथ उन पर भरोसा करना शायद एक गलती थी। अब नाम लेने का कोई मतलब नहीं है, लेकिन हर कोई जानता है कि चीजें कहां गलत हुईं…” नेता ने पीछे हटते हुए कहा। एक अन्य नेता ने कहा कि पार्टी ने विद्रोह के स्पष्ट संकेतों के बावजूद उन पर भरोसा करना जारी रखा, कम से कम मालीवाल और चड्ढा के मामले में। दूसरे नेता ने कहा, ”समय था और पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए इन नेताओं







