Wednesday, 29 Apr 2026 | 12:34 AM

Trending :

सिंघम बनाम पुष्पा: बंगाल चुनाव चरण 2 से पहले ‘सख्त’ यूपी पुलिसकर्मी और ‘उद्देश्यी’ टीएमसी नेता के बीच मौखिक द्वंद्व | चुनाव समाचार ग्वालियर में हिट एंड रन में किसान की मौत:तेज रफ्तार वाहन की टक्कर से स्कूटी के परखच्चे उड़े, शादी से लौट रहे किसान की मौत भोपाल की फीनिक्स गैस एजेंसी का लाइसेंस निलंबित:उपभोक्ताओं को राहत, उसी नंबर से होगी गैस बुकिंग; सप्लाई जारी रहेगी Shillong Murder Accused Sonam Granted Bail हेल्थ टिप्स: गर्मी में हीट स्ट्रोक हो सकता है पतला! इन आसान तरीकों से जानें शरीर को कैसे रखें ठंडा, जानें क्या? भास्कर के शादाब समी की वालिदा का इंतकाल:पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थीं, कल सुल्तानपुर में किया जाएगा सुपुर्द-ए-खाक
EXCLUSIVE

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: 15 साल का राज, अब अग्नि परीक्षा…बंगाल में फिर से क्या दिखा ‘ब्रांड ममता’?

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: 15 साल का राज, अब अग्नि परीक्षा...बंगाल में फिर से क्या दिखा 'ब्रांड ममता'?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की सत्ता में लगातार 15 साल तक बनी रहीं और एक बार फिर इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ी हो गईं। समाजवादी कांग्रेस की सुप्रीमो के तौर पर उन्होंने लंबे समय तक राज्य की राजनीति पर अपना प्रभाव बनाए रखा है।

ऐसे समय में जब भारतीय जनता पार्टी केंद्रीय नेतृत्व के दम पर पूरे जोर-शोर से चुनाव लड़ रही है, तब एक मजबूत क्षेत्रीय नेता के रूप में ममता बनर्जी अब भी नजर आ रही हैं। उनके शासनकाल में जहां ऑर्केस्ट्रा ऑर्केस्ट्रा का प्रभाव लगभग समाप्त हो गया, वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भी काफी कमजोर हो गई। हालाँकि, बीजेपी ने हाल के वर्षों में राज्य में अपनी पकड़ मजबूत बनाते हुए खुद को मुख्य चुनौती के रूप में स्थापित किया है।

ब्रांड ‘दीदी’ की अग्नि परीक्षा

इस चुनाव में ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी है। समर्थकों के आरोप और सत्य-विरोधी इतिहासकारों की चर्चाओं के बीच यह अहम सवाल है कि क्या सिद्धांत अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वियों को फिर से माता दे मापदंड। ममता की प्राथमिकता सिर्फ उनके शासन तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनकी सादगी और “मां, माटी, मानुष” की राजनीति ने उन्हें जनता से गहराई से जोड़ दिया है।

राजनीतिक यात्रा और मनोरंजन

1970-80 के दशक में छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाली ममता बनर्जी ने कांग्रेस (आई) से अपने इतिहास की शुरुआत की। वे 1984 में पहली बार पश्चिम बंगाल में वामपंथ के विरुद्ध सबसे मुखर चेहरा बने।

1997 में वे क्लासिक कांग्रेस की स्थापना के खिलाफ और सीपीएम के मजबूत विकल्प के रूप में उभरे। 2006 में सिंगुर आंदोलन के खिलाफ उनकी राजनीति टर्निंग पॉइंट साबित हुई, जहां उन्होंने किसानों के पक्ष में आंदोलन चलाया।

2011: सत्ता परिवर्तन का वर्ष

2011 विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने 34 साल से सत्ता में रही वाम सरकार को 294 में 184 से 184 में प्रवेश करके ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इसके साथ ही वे राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। इसके बाद 2016 और 2021 में भी उन्होंने दो बार जीत हासिल की। 2021 में नंदीग्राम से हार के बाद वे भवानीपुर सोलन में मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए।

कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त एक अहम बदलाव है, जहां एक तरफ बीजेपी सत्ता में आने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी अपनी पकड़ और “ब्रांड दोस्तों” की छवि के साथ फिर से जीत का दावा कर रही हैं।

ये भी पढ़ें: ‘जनता पर किसान की मार’, आखिरी चरण की वोटिंग से पहले राहुल गांधी का पेट्रोल-डीजल की कीमत पर बड़ा बयान

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
चलती पिकअप से धक्का देकर युवक की हत्या:उधारी के पैसे लेनदेन में विवाद, 3 आरोपी गिरफ्तार; पुलिस ने 48 घंटे में किया खुलासा

March 27, 2026/
8:42 am

सिंगरौली जिले के जयंत क्षेत्र में युवक की हत्या का पुलिस ने 48 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है।...

गन्ने बनाम बेल का रस: गन्ना या फिर बेल का रस... गर्मी में ऊर्जावान पेय कौन सा है? जानिए फायदे

April 1, 2026/
7:54 pm

गन्ना बनाम बेल का रस: गर्मी का पारा चढ़ना ही शरीर को वर्गीकृत और ऊर्जावान बनाए रखना एक बड़ी चुनौती...

छावनी विलय और ROB निर्माण की रक्षामंत्री से मांग:नरयावली विधायक ने कहा- विलय के बाद भूमि का मालिकाना हक राज्य सरकार या निकाय को हस्तांतरित किया जाए

April 4, 2026/
5:55 pm

सागर जिले की नरयावली विधानसभा के विधायक प्रदीप लारिया ने शनिवार को दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात...

बंगाल में चुनावी प्रचार थमा, बीजेपी ने किया धुआंधार प्रचार, 21 जिलों में पीएम मोदी ने जनता को साधे और गठबंधन को घेरा

April 27, 2026/
10:00 pm

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित धार्मिक स्थलों पर माथा टेकने के साथ ही...

दिग्गज गायिका आशा भोसले को हार्ट अटैक:ब्रिच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया

April 11, 2026/
8:48 pm

दिग्गज पार्श्व गायिका आशा भोसले की तबीयत अचानक बिगड़ने की खबर सामने आई है। शनिवार को उन्हें हार्ट अटैक आने...

PM Narendra Modi speaks in the Lok Sabha during the special session of Parliament, in New Delhi on April 16, 2026. (Image: Sansad TV/PTI)

April 18, 2026/
4:45 pm

आखरी अपडेट:18 अप्रैल, 2026, 16:45 IST प्रसारण एक भूकंपीय विधायी घटना का अनुसरण करता है: शुक्रवार को लोकसभा में संविधान...

कटनी में रसोई गैस के लिए लंबी-लंबी कतारें:उपभोक्ता सुबह 5 बजे से लग रहे लाइन में, बोले- कलेक्टर को क्या मालूम

March 18, 2026/
6:32 pm

कटनी शहर में रसोई गैस सिलेंडरों की किल्लत जारी है, जिससे उपभोक्ता परेशान हैं। जिला प्रशासन द्वारा निर्बाध आपूर्ति के...

जॉब - शिक्षा

हेल्थ & फिटनेस

राजनीति

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: 15 साल का राज, अब अग्नि परीक्षा…बंगाल में फिर से क्या दिखा ‘ब्रांड ममता’?

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: 15 साल का राज, अब अग्नि परीक्षा...बंगाल में फिर से क्या दिखा 'ब्रांड ममता'?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की सत्ता में लगातार 15 साल तक बनी रहीं और एक बार फिर इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ी हो गईं। समाजवादी कांग्रेस की सुप्रीमो के तौर पर उन्होंने लंबे समय तक राज्य की राजनीति पर अपना प्रभाव बनाए रखा है।

ऐसे समय में जब भारतीय जनता पार्टी केंद्रीय नेतृत्व के दम पर पूरे जोर-शोर से चुनाव लड़ रही है, तब एक मजबूत क्षेत्रीय नेता के रूप में ममता बनर्जी अब भी नजर आ रही हैं। उनके शासनकाल में जहां ऑर्केस्ट्रा ऑर्केस्ट्रा का प्रभाव लगभग समाप्त हो गया, वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भी काफी कमजोर हो गई। हालाँकि, बीजेपी ने हाल के वर्षों में राज्य में अपनी पकड़ मजबूत बनाते हुए खुद को मुख्य चुनौती के रूप में स्थापित किया है।

ब्रांड ‘दीदी’ की अग्नि परीक्षा

इस चुनाव में ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी है। समर्थकों के आरोप और सत्य-विरोधी इतिहासकारों की चर्चाओं के बीच यह अहम सवाल है कि क्या सिद्धांत अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वियों को फिर से माता दे मापदंड। ममता की प्राथमिकता सिर्फ उनके शासन तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनकी सादगी और “मां, माटी, मानुष” की राजनीति ने उन्हें जनता से गहराई से जोड़ दिया है।

राजनीतिक यात्रा और मनोरंजन

1970-80 के दशक में छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाली ममता बनर्जी ने कांग्रेस (आई) से अपने इतिहास की शुरुआत की। वे 1984 में पहली बार पश्चिम बंगाल में वामपंथ के विरुद्ध सबसे मुखर चेहरा बने।

1997 में वे क्लासिक कांग्रेस की स्थापना के खिलाफ और सीपीएम के मजबूत विकल्प के रूप में उभरे। 2006 में सिंगुर आंदोलन के खिलाफ उनकी राजनीति टर्निंग पॉइंट साबित हुई, जहां उन्होंने किसानों के पक्ष में आंदोलन चलाया।

2011: सत्ता परिवर्तन का वर्ष

2011 विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने 34 साल से सत्ता में रही वाम सरकार को 294 में 184 से 184 में प्रवेश करके ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इसके साथ ही वे राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। इसके बाद 2016 और 2021 में भी उन्होंने दो बार जीत हासिल की। 2021 में नंदीग्राम से हार के बाद वे भवानीपुर सोलन में मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए।

कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त एक अहम बदलाव है, जहां एक तरफ बीजेपी सत्ता में आने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी अपनी पकड़ और “ब्रांड दोस्तों” की छवि के साथ फिर से जीत का दावा कर रही हैं।

ये भी पढ़ें: ‘जनता पर किसान की मार’, आखिरी चरण की वोटिंग से पहले राहुल गांधी का पेट्रोल-डीजल की कीमत पर बड़ा बयान

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.