Wednesday, 29 Apr 2026 | 02:52 AM

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चिकन के शरीर के ये 10 हिस्से कभी गलती से भी न खाएं! होते हैं नुकसानदायक, जानें कारण सिंघम बनाम पुष्पा: बंगाल चुनाव चरण 2 से पहले ‘सख्त’ यूपी पुलिसकर्मी और ‘उद्देश्यी’ टीएमसी नेता के बीच मौखिक द्वंद्व | चुनाव समाचार ग्वालियर में हिट एंड रन में किसान की मौत:तेज रफ्तार वाहन की टक्कर से स्कूटी के परखच्चे उड़े, शादी से लौट रहे किसान की मौत गर्मी की छुट्टियां पड़ी भारी, खदान में डूबे दो मासूम:भाई को बचाने गई बहन, दोनों की डूबने से मौत, परवलिया की घटना भोपाल की फीनिक्स गैस एजेंसी का लाइसेंस निलंबित:उपभोक्ताओं को राहत, उसी नंबर से होगी गैस बुकिंग; सप्लाई जारी रहेगी MP का बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज मान्यता फर्जीवाड़ा:हाईकोर्ट ने CBI से पूछा-कॉलेज अपात्र मिलने पर क्यों नहीं की कानूनी कार्रवाई
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चिकन के शरीर के ये 10 हिस्से कभी गलती से भी न खाएं! होते हैं नुकसानदायक, जानें कारण

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Last Updated:April 29, 2026, 01:14 IST Chicken Side Effects: चिकन खाने वाले इसे सप्ताह में दो से तीन बार तो बना ही लेते हैं. कुछ को चिकन का लेग पीस खाना पसंद होता है तो किसी को चिकन ब्रेस्ट पसंद होता है. प्रोटीन से भरपूर चिकन सेहत के लिए हेल्दी है, लेकिन इसके कुछ हिस्सों को खाने से बचना चाहिए. मुर्गे का कौन सा हिस्सा खाना सेहत को पहुंचा सकता है नुकसान और क्यों, यहां जानिए. चिकन में मौजूद पोषक तत्व- नॉनवेज खाने वालों के लिए चिकन बेहद फेवरेट होता है. चिकन सेहत के लिए हेल्दी भी है, क्योंकि ये कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होता है. इसमें सबसे ज्यादा प्रोटीन होता है, जो मसल्स के निर्माण और मरम्मत के लिए जरूरी होता है. इसके साथ ही इसमें विटामिन बी6, बी12, नियासिन, आयरन, जिंक, सेलेनियम, फॉस्फोरस,अमीनो एसिड भी मौजूद होते हैं. लेकिन चिकन तो आप खूब खाते हैं, लेकिन इसके कुछ हिस्से को खाना नुकसानदायक होता है. जानते हैं यहां चिकन का कौन सा हिस्सा खाना अनहेल्दी हो सकता है. डॉक्टर्स के अनुसार, चिकन के कुछ अंग शरीर से कचरा फिल्टर करने का काम करते हैं, इसलिए उनमें जहरीले केमिकल और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं. यदि आप इन्हें ठीक से पका कर नहीं खाते हैं या अधिक मात्रा में सेवन कर लेते हैं तो सेहत से संबंधित कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं. चिकन अपने आप में प्रोटीन का अच्छा स्रोत है, लेकिन उसका हर हिस्सा एक जैसा हेल्दी नहीं होता. कुछ हिस्से ऐसे हैं, जिन्हें ज्यादा या गलत तरीके से खाने पर सेहत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. इसमें चिकन की स्किन मुख्य रूप से शामिल है. इसमें फैट जैसे सैचुरेटेड फैट अधिक होता है. चिकन स्किन अधिक खाने से आपका कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ सकता है. दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ता है. बेहतर है कि आप बिना स्किन वाला चिकन ही खाएं. Add News18 as Preferred Source on Google क्या आप जानते हैं कि चिकन के फेफड़ों में कई तरह के बैक्टीरिया मौजूद रहते हैं? इसे आप कितने भी अधिक तापमान पर क्यों न पकाएं, कुछ गर्मी को बर्दाश्त करने वाले बैक्टीरिया (heat resistant) मरते नहीं हैं. ऐसे में इनके शरीर में जाते ही संक्रमण फैलने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. काफी लोग मुर्गे की टांग लेग पीस या जांघ खाना पसंद करते हैं, क्योंकि इनमें फ्लेश अधिक होता है और ये स्वादिष्ट भी होते हैं, लेकिन इसमें फैट और कैलोरी ज्यादा मौजूद होती है. यदि आपका वजन और कोलेस्ट्रॉल लेवल हाई है तो आप इन हिस्सों को न खाएं या फिर बेहद सीमित मात्रा में खाएं. चिकन की आंतें हमेशा गंदगी और कीटाणुओं से भरी रहती हैं. आप कितना भी इसे साफ कर लें, इन हिस्सों में संक्रमण का खतरा बना ही रहता है. लिवर और किडनी शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को साफ करते हैं. चिकन को दिए जाने वाले एंटीबायोटिक्स के तत्व इन अंगों में ज्यादा जमा हो जाते हैं, इसलिए इन हिस्सों को भी अधिक नहीं खाना चाहिए. चिकन का लिवर पोषक तत्वों से भरपूर होता है, लेकिन इसमें कोलेस्ट्रॉल अधिक होता है. ऐसे में पहले से हाई कोलेस्ट्रॉल है तो यह और भी अधिक बढ़ सकता है. पूंछ वाले हिस्से में बहुत ज्यादा फैट और ग्रंथियां होती हैं. इसी तरह गर्दन के हिस्से में भी ग्रंथियां होती हैं. इन दोनों जगहों पर वायरस और बैक्टीरिया बहुत जल्दी जमा हो जाते हैं. ये इंसान के शरीर पर गंभीर असर डाल सकते हैं. चिकन को अच्छी तरह से धोकर ही पकाएं. इसमें जमे खून के थक्के, ब्लड वेसल्स बिल्कुल साफ हो जाएं. यदि आप अधपका, सही तरीके से धोकर नहीं पकाते हैं चिकन तो उसमें मौजूद खून के जरिए हानिकारक बैक्टीरिया आपके शरीर में जा सकते हैं. इससे फूड पॉइजनिंग होने का खतरा रहता है. बहुत अधिक प्रोसेस्ड चिकन जैसे सॉसेज, नगेट्स न खाएं, क्योंकि इनमें नमक, प्रिजर्वेटिव्स और अनहेल्दी फैट ज्यादा होते हैं. फ्राइड चिकन जैसे डीप फ्राई में ट्रांस फैट बनता है, जो मोटापा, हार्ट डिजीज, टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ा सकते हैं. चिकन ब्रेस्ट (बिना स्किन) सबसे हेल्दी माना जाता है. चिकन फ्रेश ही खरीदें. फ्रोजन खाने से बचें. अच्छी तरह से धोकर और पकाकर ही मुर्गे का सेवन करें. First Published : April 29, 2026, 01:14 IST

सिंघम बनाम पुष्पा: बंगाल चुनाव चरण 2 से पहले ‘सख्त’ यूपी पुलिसकर्मी और ‘उद्देश्यी’ टीएमसी नेता के बीच मौखिक द्वंद्व | चुनाव समाचार

Rajasthan Royals' Donovan Ferreira hits a six during the Indian Premier League cricket match between Rajasthan Royals and Punjab Kings in New Chandigarh, India, Tuesday, April 28, 2026.(AP Photo)

आखरी अपडेट:29 अप्रैल, 2026, 00:09 IST जहां टीएमसी ने अजय पाल शर्मा की पेशेवर तटस्थता पर सवाल उठाया है, वहीं भाजपा ने अधिकारी के कार्यों का बचाव किया है खान (आर) ने आईपीएस अधिकारी पर ‘भाजपा एजेंट’ के रूप में कार्य करने के लिए एक तटस्थ पर्यवेक्षक के रूप में अपने संवैधानिक जनादेश को खत्म करने का आरोप लगाया। छवि/एक्स पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के हाई-स्टेक थिएटर में, दूसरे दौर के मतदान से एक दिन पहले राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी और चुनाव आयोग की प्रवर्तन शाखा के बीच एक सिनेमाई टकराव सामने आया। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार जहांगीर खान ने उत्तर प्रदेश-कैडर के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा के साथ टकराव के बाद एक वायरल विवाद को जन्म देते हुए कहा, “यह बंगाल है; अगर वह ‘सिंघम’ हैं, तो मैं ‘पुष्पा’ हूं।” फाल्टा निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं को कथित रूप से डराने-धमकाने के खिलाफ दक्षिण 24 परगना के लिए नियुक्त पुलिस पर्यवेक्षक शर्मा द्वारा जारी की गई कड़ी चेतावनी के बाद यह मौखिक हमला हुआ। फाल्टा में ‘सिंघम’ की चेतावनी यह विवाद मंगलवार को तब भड़क गया, जब एक वीडियो सामने आया, जिसमें आईपीएस अजय पाल शर्मा – जिन्हें अपराध के मामले में सख्त छवि के लिए अक्सर यूपी का “सिंघम” कहा जाता है – जहांगीर खान के आवास और चुनाव कार्यालय का दौरा करते हुए दिखाया गया है। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की एक विशाल टुकड़ी के साथ, शर्मा को उम्मीदवार के परिवार और कर्मचारियों को एक स्पष्ट संदेश देते देखा गया। रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयोग ने विशिष्ट शिकायतों पर कार्रवाई की, जिसमें आरोप लगाया गया कि खान के सहयोगी जबरन मतदाता पहचान पत्र एकत्र कर रहे थे और स्थानीय मतदाताओं को धमकी दे रहे थे। वायरल फ़ुटेज में, शर्मा ने चेतावनी दी कि प्रशासन उपद्रवियों के साथ “उचित तरीके से निपटेगा”, और एक भयावह चेतावनी भी दी: “तब रोना या पछताना मत।” बख्तरबंद वाहनों और पहचाने गए “उपद्रवियों” की सूची के साथ आयोजित यह दौरा स्पष्ट रूप से स्वतंत्र और निष्पक्ष चरण 2 के मतदान को सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कार्रवाई का हिस्सा था। ‘पुष्पा’ की अवज्ञा: ‘झुकेगा नहीं’ जिसे उन्होंने “अवैध धमकी” कहा था, उसका जवाब देते हुए जहांगीर खान ने तेलुगु ब्लॉकबस्टर पुष्पा की उद्दंड भावना का आह्वान किया। खान ने आईपीएस अधिकारी पर एक तटस्थ पर्यवेक्षक के रूप में अपने संवैधानिक जनादेश का उल्लंघन कर “भाजपा एजेंट” के रूप में कार्य करने का आरोप लगाया। उन्होंने तर्क दिया कि ईसीआई दिशानिर्देशों में किसी पर्यवेक्षक को धमकी देने के लिए उम्मीदवार के निजी आवास में प्रवेश करने की अनुमति देने का कोई प्रावधान नहीं है। खान ने अपने प्रतिरोध को दोगुना करते हुए संवाददाताओं से कहा, ”अगर वह सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं। झुकेगा नहीं (मैं नहीं झुकूंगा)।” उन्होंने आगे क्लासिक शोले का हवाला देते हुए कहा कि उनके शब्दकोष में, “डर” मौजूद नहीं है। टीएमसी ने औपचारिक रूप से शर्मा के आचरण पर आपत्ति जताई है, चंद्रिमा भट्टाचार्य जैसे वरिष्ठ राज्य मंत्रियों ने सवाल किया है कि क्या एक पुलिस पर्यवेक्षक गलत काम के ठोस सबूत पेश किए बिना देर रात छापेमारी करने और मौखिक चेतावनी जारी करने के लिए अधिकृत है। बढ़ता राजनीतिक नतीजा “सिंघम बनाम पुष्पा” का आमना-सामना तेजी से एक व्यापक राजनीतिक लड़ाई में बदल गया है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा सोशल मीडिया पर इस लड़ाई में शामिल हो गईं, उन्होंने अधिकारी के संग्रहीत वीडियो साझा किए और उनकी पेशेवर तटस्थता पर सवाल उठाए। इसके विपरीत, भाजपा ने यह कहते हुए अधिकारी के कार्यों का बचाव किया है कि अगर जनता को मतदान करने से रोका गया तो वे विरोध करेंगे और पर्यवेक्षक के तरीकों की वैधता पर चुनाव आयोग अंतिम प्राधिकारी है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 29 अप्रैल, 2026, 00:06 IST समाचार चुनाव सिंघम बनाम पुष्पा: बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से पहले ‘सख्त’ यूपी पुलिस और ‘उद्देश्यी’ टीएमसी नेता के बीच मौखिक द्वंद्व अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)टीएमसी(टी)अजय पाल शर्मा(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)बीजेपी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)पुष्पा(टी)जहांगीर खान(टी)सिंघम

ग्वालियर में हिट एंड रन में किसान की मौत:तेज रफ्तार वाहन की टक्कर से स्कूटी के परखच्चे उड़े, शादी से लौट रहे किसान की मौत

ग्वालियर में हिट एंड रन में किसान की मौत:तेज रफ्तार वाहन की टक्कर से स्कूटी के परखच्चे उड़े, शादी से लौट रहे किसान की मौत

ग्वालियर में रिश्तेदार की शादी से लौटकर घर जा रहा किसान हिट एंड रन का शिकार हो गया। घटना मोहना थाना क्षेत्र के क्वॉलिटी ढाबा के पास दौरार रोड की है। टक्कर इतनी तेज थी कि किसान की स्कूटी के परखच्चे उड़ गए। घटना का पता चलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच के बाद घायल किसान को उपचार के लिए पहुंचाया। जहां पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने किसान का शव पीएम हाउस पहुंचा कर आरोपी चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। मोहना थाना क्षेत्र के कैमारी निवासी 55 वर्षीय गंधर्व सिंह रावत पुत्र भाग सिंह रावत किसान है। मंगलवार को वह अपने रिश्तेदार के यहां शादी समारोह में शामिल होने के लिए आया था। शादी में शामिल होने के बाद करीब 3.30 बजे वह वापस घर जाने के लिए निकला था। अभी वह क्वॉलिटी ढाबा के पास पहुंचा ही था कि तभी तेज रफ्तार आ रहे अज्ञात वाहन चालक ने लापरवाही से अपना वाहन चलाते हुए उसकी स्कूटी में टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही वह हवा में उछला और सड़क पर गिरा। हादसे के बाद आरोपी चालक वहां से भाग निकला। मामले का पता चलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। चल रही थी सांस, पहुुंचाया अस्पताल मौके पर पहुंची पुलिस ने जब किसान की नब्ज टटोली तो पता चला कि उसकी सांसे चल रही है। इसका पता चलते ही तुरंत ही उपचार के लिए रवाना किया, जिससे उसकी जान बच सके। अस्पताल पहुंचने से पहले उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने उसका शव पीएम हाउस पहुंचाकर आरोपी चालक की तलाश शुरू कर दी है। मोहना थाना प्रभारी राशिद खान ने बताया कि शादी से लौटकर घर जा रहे किसान को अज्ञात वाहन चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए टक्कर मारी है। हादसे में किसान की मौत हो गई है। आरोपी चालक की तलाश की जा रही है। जल्द ही उसे पकड़ लिया जाएगा।

भोपाल की फीनिक्स गैस एजेंसी का लाइसेंस निलंबित:उपभोक्ताओं को राहत, उसी नंबर से होगी गैस बुकिंग; सप्लाई जारी रहेगी

भोपाल की फीनिक्स गैस एजेंसी का लाइसेंस निलंबित:उपभोक्ताओं को राहत, उसी नंबर से होगी गैस बुकिंग; सप्लाई जारी रहेगी

भोपाल के जेके रोड स्थित फीनिक्स एचपीसीएल गैस एजेंसी का लाइसेंस अनियमितताओं के चलते सस्पेंड कर दिया गया है। इस एजेंसी से जुड़े करीब 18 हजार उपभोक्ताओं को अब आसपास की अन्य गैस एजेंसियों के माध्यम से सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। वे पहले की तरह उसी नंबर पर गैस बुकिंग कर सकेंगे और उन्हें दूसरी एजेंसी के जरिए घर तक सिलेंडर की डिलीवरी मिलती रहेगी। जिला प्रशासन की जांच में एजेंसी में कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। जांच के दौरान लगभग 2000 छोटे (5 किलो वाले) सिलेंडरों का रिकॉर्ड नहीं मिला, वहीं 40 भरे सिलेंडर स्टॉक में कम पाए गए। इसके अलावा स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक सिलेंडरों की संख्या में भी बड़ा अंतर मिला। यह भी सामने आया कि एजेंसी उपभोक्ताओं तक सिलेंडर की होम डिलीवरी सही तरीके से नहीं कर रही थी और उनसे अतिरिक्त 35 रुपए वसूले जा रहे थे। इन अनियमितताओं के आधार पर प्रशासन ने एजेंसी को नोटिस जारी किया, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने पर एचपीसीएल को लाइसेंस निलंबित करने की सिफारिश की गई। इसके बाद कंपनी ने कार्रवाई करते हुए एजेंसी का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया और जांच पूरी होने तक गैस सप्लाई भी रोक दी है। एचपीसीएल के सीनियर एरिया सेल्स मैनेजर पुष्पेंद्र सोडा के अनुसार, जांच पूरी होने तक एजेंसी की सप्लाई बंद रहेगी, लेकिन उपभोक्ताओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई है ताकि उन्हें समय पर गैस मिलती रहे। खाद्य नियंत्रक चंद्रभान सिंह जादौन ने बताया कि जांच में कई अनियमितताएं मिली हैं। एजेंसी को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है कि उसका लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द क्यों न किया जाए। इसकी जानकारी एचपीसीएल को भी दे दी गई है।

गर्मी की छुट्टियां पड़ी भारी, खदान में डूबे दो मासूम:भाई को बचाने गई बहन, दोनों की डूबने से मौत, परवलिया की घटना

गर्मी की छुट्टियां पड़ी भारी, खदान में डूबे दो मासूम:भाई को बचाने गई बहन, दोनों की डूबने से मौत, परवलिया की घटना

परवलिया थाना क्षेत्र के दौलतपुर गांव के पास मंगलवार दोपहर दर्दनाक हादसे में 17 वर्षीय युवराज और 15 वर्षीय मालती की खदान में डूबने से मौत हो गई। दोनों रिश्ते में भाई-बहन (कजिन) थे। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। पुलिस के अनुसार, मूलतः विदिशा जिले के कुआंखेड़ा गांव निवासी युवराज गर्मी की छुट्टियों में एक दिन पहले ही अपनी बुआ के घर दौलतपुर आया था। मंगलवार को वह अपनी बुआ की बेटी मालती के साथ घर से कुछ दूरी पर स्थित एक गहरी खदाननुमा तालाब के पास खेल रहा था। इसी दौरान कीचड़ में पैर फिसलने से युवराज सीधे गहरे पानी में जा गिरा और डूबने लगा। बचाने कूदी बहन और वह भी डूबी भाई को डूबता देख पास खड़ी मालती बिना देर किए उसे बचाने के लिए पानी में कूद गई। हालांकि उसे तैरना नहीं आता था और खदान में पानी काफी गहरा था, जिससे वह खुद भी संतुलन नहीं बना सकी और डूब गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस खदान में हादसा हुआ, वह असमतल और जगह-जगह गहरी है, जहां पानी का स्तर अचानक बढ़ जाता है। युवराज को तैरना नहीं आता था, जिससे वह गहराई का अंदाजा नहीं लगा सका। युवक ने मचाया शोर घटना को पास में बकरियां चरा रहे बच्चों ने देखा और शोर मचाया। आवाज सुनकर खेत में काम कर रहे परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से दोनों को खदान से बाहर निकाला गया। उस समय तक युवराज की मौके पर ही मौत हो चुकी थी, जबकि मालती की सांसें चल रही थीं। परिजन तत्काल दोनों को हमीदिया अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही मालती ने भी दम तोड़ दिया था। परिवार के सदस्यों के मुताबिक, युवराज 11वीं कक्षा का छात्र था और छुट्टियां बिताने बुआ के घर आया था। इस हादसे ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है। गांव में हर कोई इस घटना से स्तब्ध है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

Shillong Murder Accused Sonam Granted Bail

Shillong Murder Accused Sonam Granted Bail

सोनम को मंगलवार देर शाम जेल से जमानत पर रिहा कर दिया गया। इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड में बड़ा मोड़ आया है। मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में हनीमून के दौरान पति राजा के मर्डर की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को गिरफ्तारी के करीब 320 दिन बाद जमानत मिल गई है। हालांकि, अदालत ने शर्त रखी है कि ट् . शिलॉन्ग कोर्ट ने सोमवार को उसकी जमानत मंजूर कर ली। मंगलवार को सोनम के पिता देवी सिंह खुद शिलॉन्ग पहुंचे और जमानत भर दी। इसके बाद मंगलवार शाम को सोनम जेल से रिहा हो गई। रिहाई के बाद मीडियाकर्मियों ने सवाल किए तो पिता और बेटी बिना कुछ कहे ही वहां से निकल गए। बता दें कि कोर्ट ने चौथी सुनवाई के बाद सोनम को राहत दी है। कोर्ट ने गिरफ्तारी प्रक्रिया पर सवाल उठाए सोनम की जमानत की मुख्य वजह गिरफ्तारी प्रक्रिया में खामियां रहीं। उसके वकील ने दलील दी कि 7 जून 2025 को गाजीपुर में गिरफ्तारी के समय कारण स्पष्ट नहीं बताया गया था। अदालत ने जांच में दस्तावेजों में गंभीर त्रुटियां पाईं। कोर्ट ने अनुच्छेद 22(1) का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति को तुरंत कारण बताना अनिवार्य है। ऐसा न करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। पुलिस की 4 गलतियां, जो सोनम के पक्ष में गईं अधूरा अरेस्ट फॉर्म: गिरफ्तारी के समय फॉर्म में चेक बॉक्स खाली थे। यह स्पष्ट नहीं था कि सोनम को किन धाराओं में हिरासत में लिया गया? धाराओं का घालमेल: केस डायरी और गिरफ्तारी के कागजों में अंतर मिला। मामला धारा 103(1) का था, लेकिन कई दस्तावेजों में 403(1) दर्ज था। वकील की अनुपस्थिति: रिकॉर्ड में प्रमाण नहीं मिला कि गाजीपुर में पहली पेशी के दौरान उसके पास कानूनी सलाह के लिए वकील था। बचाव के अधिकार का हनन: कोर्ट ने कहा कि अगर आरोपी को सही आरोप पता नहीं होंगे, तो वह शुरुआती चरण में प्रभावी बचाव कैसे कर पाएगी? 10 जून 2025 को सोनम समेत पांचों आरोपियों को लेकर मेघालय पुलिस शिलॉन्ग पहुंची थीं। लंबी न्यायिक हिरासत भी अहम वजह बनी सोनम के वकील ने दलील दी कि वह 9 जून 2025 से जेल में बंद है और 10 महीने से ज्यादा न्यायिक हिरासत में बिता चुकी है। इस दौरान केस की प्रगति धीमी रही है। उन्होंने बताया कि 5 सितंबर 2025 को केस की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल हुई थी। 28 अक्टूबर 2025 को आरोप तय हुए। लेकिन अब तक 90 गवाहों में से केवल 4 की ही गवाही हो सकी है। आखिरी गवाह 3 फरवरी 2026 को पेश हुआ था। बचाव पक्ष की तरफ से कोर्ट में दी गई दलील। प्रोफाइल और परिस्थितियों का भी लाभ मिला मेघालय पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए आशंका जताई कि आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित कर सकती है। वहीं, बचाव पक्ष ने कहा कि ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे दोष साबित हो। चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल हैं और सबूत कोर्ट की निगरानी में हैं, इसलिए छेड़छाड़ की आशंका निराधार है। वकील ने तर्क दिया कि सोनम इंदौर की स्थायी निवासी है और बड़े कारोबारी परिवार से आती है, जिसका व्यापार कई राज्यों में फैला है। उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, इसलिए फरार होने की संभावना नहीं है। 25 वर्षीय महिला होने के कारण जमानत में नरमी के सिद्धांत का भी हवाला दिया गया। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… हनीमून पर मर्डर की आरोपी सोनम को जमानत इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी मर्डर केस में आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को जमानत मिल गई है। शिलॉन्ग की कोर्ट ने चौथी सुनवाई के बाद सोनम को राहत दी है। दैनिक भास्कर से बातचीत में शिलॉन्ग एसपी विवेक स्येम ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने अपने अधिकार का उपयोग किया है। पढ़ें पूरी खबर…

MP का बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज मान्यता फर्जीवाड़ा:हाईकोर्ट ने CBI से पूछा-कॉलेज अपात्र मिलने पर क्यों नहीं की कानूनी कार्रवाई

MP का बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज मान्यता फर्जीवाड़ा:हाईकोर्ट ने CBI से पूछा-कॉलेज अपात्र मिलने पर क्यों नहीं की कानूनी कार्रवाई

मध्यप्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कालेज मान्यता फर्जीवाड़े मामले पर हाईकोर्ट में आज मंगलवार को एक बार फिर से सुनवाई हुई। कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिए हैं कि सभी 800 नर्सिंग कालेजों का रिकॉर्ड पेश करे। इसके साथ ही यह पूछा कि जांच के दौरान जो 600 कालेज अपात्र मिले थे, अभी तक उन पर क्यों कानूनी कार्रवाई नहीं की है?। सुनवाई करते समय अदालत ने नर्सिंग काउंसिल से भी जवाब मांगा है कि अपात्र कालेजों को मान्यता देने में आखिर किसकी मिली भगत है, उन अधिकारियों की सूची पेश करों। कोर्ट ने 12 मई तक रिपोर्ट मांगी है। लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई, इंडियन नर्सिंग काउंसिल और मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल को अगली सुनवाई से पूर्व विस्तृत हलफनामा और प्रगति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने सीबीआई को निर्देशित किया है कि वह अगली सुनवाई तक यह स्पष्ट करे कि अब तक की जांच में किन-किन व्यक्तियों या संस्थानों की संलिप्तता पाई गई है,साथ ही, सीबीआई को यह भी बताना होगा कि दोषियों के विरुद्ध अब तक क्या दंडात्मक कार्रवाई की गई है ?। इंडियन नर्सिंग काउंसिल और मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल को विशेष रूप से उन अधिकारियों के विरुद्ध उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा है, जो समय-समय पर अनुपयुक्त और मानक विहीन कॉलेजों को मान्यता देने के लिए जिम्मेदार थे। संबंधित प्रतिवादियों को एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करना होगा, जिसमें स्पष्ट रूप से उन प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाइयों का विवरण हो, जो इन कॉलेजों को अवैध रूप से फलने-फूलने देने वाले अधिकारियों पर की गई हैं । यह था मामला