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Bathing tips: क्या आप बिना कपड़ों के स्नान करते हैं? नहाने से जुड़ी इन बातों को जान लेंगे तो फिर कभी नहीं करेंगे ये काम

Bathing tips: क्या आप बिना कपड़ों के स्नान करते हैं? नहाने से जुड़ी इन बातों को जान लेंगे तो फिर कभी नहीं करेंगे ये काम

Last Updated:May 01, 2026, 14:24 IST हर दिन हम सभी स्नान करते हैं. गर्मियों में स्नान किए बिना तो रहा भी नहीं जा सकता है. स्नान करने का सबका अपना-अपना तरीका होता है. कोई सुबह तो कोई दोपहर तो कोई शाम में नहाना पसंद करता है. कुछ लोग कपड़े पहने ही नहाते हैं तो अधिकतर लोग बिना कपड़ों के स्नान करते हैं. हर चीज को करने का एक सही तरीका, नियम, समय होता है. स्नान करने का सही तरीका, समय क्या है, कैसे किसी को नहाना चाहिए, कपड़े में या बिना कपड़ों में? यहां जानिए नहाने से संबंधित कुछ मजेदार बातें… हम सभी हर दिन खाते हैं, घूमते-फिरते हैं, ऑफिस जाते हैं, ठीक उसी तरह से खुद की हाइजीन का ख्याल रखते हुए नहाते भी हैं. दिन भर की दिनचर्या में नहाना भी एक सबसे महत्वपूर्ण काम है. हालांकि, कम समय होने के कारण कुछ लोग तो जल्दी-जल्दी नहा कर निकल जाते हैं. आमतौर पर लोग कपड़े उतार कर नहाते हैं. खासकर, जब आप अपने बाथरूम में होते हैं, लेकिन नदी-तालाब में नहाते वक्त काफी लोग शर्म, झिझक के कारण कपड़े पहने ही स्नान कर लेते हैं. हमारे पूर्वजों और वैदिक ग्रंथों में स्नान के बारे में काफी कुछ कहा गया है. यहां से आप स्नान से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं. जब ऑफिस सुबह ही जाना होता है, तो काफी लोग सुबह उठते ही सबसे पहले ब्रश करने के बाद फटाफट स्नान कर लेते हैं. कुछ लोग तो ऐसे भी होते हैं, जो बिना स्नान किए किचन में नहीं जाते हैं. नहाने का मतलब है साफ-सफाई. ऐसा कहा जाता है कि नहाने से शरीर हल्का होता है. Add News18 as Preferred Source on Google आमतौर पर 100 में से 95 लोग कपड़े उतार कर ही स्नान करते हैं. इससे सही तरीके से आप शरीर पर साबुन लगा सकते हैं. बिना कपड़ों के नहाने से शरीर को अच्छी तरह से साफ करने में आसानी होती है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, न्यूड यानी कपड़े पूरी तरह से स्नान करने से कुछ समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. कुछ लोगों का मानना ​​है कि लंबे समय तक बिना कपड़ों के स्नान करने से घर में बुरी आत्माएं आ सकती हैं. कुछ बुजुर्गों के अनुसार, बिना कपड़ों के नहाने से व्यक्ति के मन और घर पर बुरा प्रभाव पड़ता है. इसके अलावा, ऐसा भी कहा जाता है कि बिना कपड़ों के स्नान करना देवी लक्ष्मी के लिए शुभ नहीं होता. इससे आर्थिक स्थिति पर भी बुरा असर पड़ता है, इसलिए शरीर पर किसी प्रकार का कपड़ा बांधकर स्नान करने की सलाह दी जाती है. इस तरह स्नान करने के पीछे एक और कहानी है. कृष्ण द्वारा गोपियों को चिढ़ाने के लिए कपड़े चुराने की कहानी तो आपने भी सुनी होगी. कहा जाता है कि इसका अर्थ यह है कि नग्न होकर स्नान नहीं करना चाहिए. एक और बात ये है कि पुराने समय में शौचालय नहीं होते थे, इसलिए बाहर आप बिना कपड़ों के नहीं ना सकते. एक और दिलचस्प जानकारी ये सामने आती है कि पहले के जमाने में बड़े-बड़े बाथरूम नहीं हुआ करते थे, लोग छोटे से कमरे में नहाते थे. सुविधा ना होने, ग्राउंड पर घर बने होने से शौचालय, बाथरूम में सांप, कीड़ों के घुसने का खतरा रहता था, इसलिए उन्हें कम कपड़े पहनकर नहाने की सलाह दी जाती थी. अब, चूंकि घरों में बाथरूम होते हैं, इसलिए इस प्रथा का पालन लोग नहीं करते और कपड़ों के बिना नहाते हैं. बिना कपड़ों के स्नान करने से अचानक कोई आपातकालीन स्थिति आ जाए तो तुरंत बाहर निकलना संभव नहीं होता. खासकर, जब आप कहीं बाहर, किसी रिश्तेदार, होटल, रिसॉर्ट्स आदि में हों. ऐसे में कुछ ना कुछ छोटा सा कपड़ा, टॉवल आदि में ही नहाना चाहिए. पहले से कपड़े पहनकर स्नान करना बेहतर है. धार्मिक या पारंपरिक मान्यताओं में शरीर को ढक कर स्नान करने की सलाह दी जाती है. इसका कारण लज्जा, संस्कार या निजता की भावना हो सकता है, न कि कोई वैज्ञानिक या सेहत संबंधित कोई खतरा. पहले के समय में लोग खुले स्थानों जैसे नदियों, तालाबों में नहाते थे, इसलिए कपड़े पहनना सामाजिक रूप से जरूरी माना जाता था. आप घर के बाथरूम में नहाते हैं तो बिना कपड़ों के स्नान करना बिल्कुल सामान्य, सुरक्षित और अधिक स्वच्छ तरीका है. कपड़े पहनकर नहाना परंपरा या व्यक्तिगत सोच का मामला है. यह कोई जरूरी नियम नहीं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

भोपाल-इंदौर जैसे शहरों ने नहीं दिखाई स्वगणना में रुचि:रायसेन, मंदसौर एमपी के टॉपर जिले जहां एक लाख से अधिक लोगों ने खुद भरी मकान गणना रिपोर्ट

भोपाल-इंदौर जैसे शहरों ने नहीं दिखाई स्वगणना में रुचि:रायसेन, मंदसौर एमपी के टॉपर जिले जहां एक लाख से अधिक लोगों ने खुद भरी मकान गणना रिपोर्ट

मध्य प्रदेश में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन जैसे बड़े शहरों के लोगों के मुकाबले छोटे शहरों के लोगों ने जनगणना के अंतर्गत मकान गणना की जानकारी खुद भरने में अधिक रुचि दिखाई है। स्वगणना के लिए जनगणना आयुक्त दिल्ली के निर्देश पर 16 से 30 अप्रैल के बीच चलाए अभियान में रायसेन जिला पूरे एमपी में अव्वल रहा है। दूसरे स्थान पर मंदसौर जिले के लोगों ने स्वगणना में मकान से संबंधित 33 सवालों की जानकारी भरी है। प्रदेश में मकानों की स्वगणना आज से बंद हो चुकी है और अब प्रगणक घर-घर जाकर लोगों से जानकारी लेना शुरू कर चुके हैं। 30 अप्रैल तक स्वगणना के सामने आए आंकड़ों के अनुसार पूरे प्रदेश में सात लाख 46 हजार 157 लोगों ने मोबाइल एप के जरिये स्वगणना की रिपोर्ट भरी है। 29 अप्रैल की आधी रात तक यह आंकड़ा 5 लाख 81 हजार 152 था। बताया जाता है कि इस जानकारी को नहीं भरने के पीछे मुख्य वजह प्रगणकों द्वारा घर आकर भरी गई जानकारी का वेरिफिकेशन किया जाना है। चूंकि प्रगणक घर आकर दोबारा वही सभी जानकारी पूछेंगे, इसलिए लोगों ने डिजिटल फार्मेट में कराई जा रही जनगणना में खुद जानकारी भरने में अपेक्षित रुचि नहीं दिखाई है। इंदौर में 13778, ग्वालियर में 9976 ने भरे स्वगणना फार्म जनगणना निदेशालय द्वारा कराई गई स्वगणना में इंदौर में 13778, ग्वालियर में 9976, जबलपुर में 16813 लोगों ने खुद मकानों की गणना संबंधित सवालों की जानकारी दी। स्वगणना रिपोर्ट भरने में जो जिले टॉप टेन और बॉटम टेन कैटेगरी से बाहर रहे हैं उसमें सागर, विदिशा, जबलपुर, बैतूल, खंडवा, धार, इंदौर, डिंडौरी, नरसिंहपुर, रतलाम, बालाघाट, ग्वालियर, अनूपपुर, गुना, शिवपुरी, झाबुआ, छतरपुर, खरगोन, मंडला, उमरिया, रीवा, नर्मदापुरम, हरदा, सिंगरौली, दमोह, कटनी, अलीराजपुर, बुरहानपुर, सतना, देवास, शहडोल, पन्ना, मैहर, सीहोर, पांढुर्णा शामिल हैं। स्वगणना रिपोर्ट भरने में ये रहे टॉप 10 जिले स्वगणना रिपोर्ट भरने में ये रहे बॉटम 10 जिले

वैशाख पूर्णिमा पर 50 हजार श्रद्धालुओं ने किए दर्शन:बूढ़े बाबा के रूप में होगा भगवान का श्रृंगार

वैशाख पूर्णिमा पर 50 हजार श्रद्धालुओं ने किए दर्शन:बूढ़े बाबा के रूप में होगा भगवान का श्रृंगार

दमोह जिले के प्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र जागेश्वर धाम बांदकपुर में वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर शुक्रवार को हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान जागेश्वरनाथ के दर्शन किए। दोपहर एक बजे तक लगभग 50 हजार भक्तों ने दर्शन लाभ लिया। इस विशेष दिन भगवान का ‘बूढ़े बाबा’ के रूप में आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा। यह विशेष श्रृंगार साल में केवल एक बार वैशाख पूर्णिमा की रात को किया जाता है। इस अनोखे श्रृंगार को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहेंगे। जागेश्वर नाथ धाम को 13वें ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है। यहां केवल प्रदेश से ही नहीं, बल्कि देशभर से श्रद्धालु साल भर भगवान के दर्शनों के लिए आते हैं। 50 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों से निगरानी शुक्रवार सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुलते ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने कतारबद्ध होकर भगवान के दर्शन किए। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। मंदिर परिसर में 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी की जा रही है। श्रद्धालुओं के लिए विशेष चौकी प्रभारी राजेंद्र मिश्रा और अन्य अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, छाया और दवाइयों की विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। बांदकपुर मंदिर के प्रबंधक पंडित रामकृपाल पाठक ने बताया कि वैशाख माह में प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु भगवान जागेश्वरनाथ के दर्शन करने आते हैं। वैशाख पूर्णिमा पर पूरे प्रदेश से भक्त यहां पहुंचे हैं।

मूवी रिव्यू: राजा शिवाजी:स्वराज्य की भावना को भव्यता से दिखाती फिल्म, रितेश देशमुख का सधा निर्देशन और स्टारकास्ट का असरदार अभिनय इसकी ताकत

मूवी रिव्यू: राजा शिवाजी:स्वराज्य की भावना को भव्यता से दिखाती फिल्म, रितेश देशमुख का सधा निर्देशन और स्टारकास्ट का असरदार अभिनय इसकी ताकत

महाराष्ट्र दिवस के मौके पर रिलीज हुई ‘राजा शिवाजी’ सिर्फ एक ऐतिहासिक फिल्म नहीं, बल्कि स्वराज्य और मराठा अस्मिता को महसूस कराने वाली कहानी है। रितेश देशमुख के निर्देशन में बनी यह फिल्म नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने की कोशिश करती है और कई जगह इसमें ईमानदारी साफ नजर आती है। फिल्म को ज्योति देशपांडे और जेनेलिया देशमुख ने मुंबई फिल्म कंपनी के बैनर तले प्रोड्यूस किया है, और इसे जियो स्टूडियोज ने प्रस्तुत किया है। इस फिल्म की लेंथ 3 घंटा 15 मिनट है। इस फिल्म को दैनिक भास्कर ने 5 में से 4 स्टार की रेटिंग दी है। फिल्म की कहानी क्या है? फिल्म की कहानी अलग-अलग अध्यायों में आगे बढ़ती है, जहां छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, संघर्ष और स्वराज्य के सपने को दिखाया गया है। इसमें सिर्फ बड़े युद्ध नहीं, बल्कि छोटे-छोटे पल, संस्कार, परंपरा और रिश्तों की अहमियत भी दिखाई गई है, जो इसे ज्यादा वास्तविक और भावनात्मक बनाते हैं। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है? रितेश देशमुख ने शिवाजी महाराज के किरदार को संतुलित और प्रभावशाली तरीके से निभाया है। संजय दत्त का अफजल खान शांत लेकिन खतरनाक लगता है। अभिषेक बच्चन ने संभाजी महाराज के रोल में भावनात्मक गहराई दिखाई है। फरदीन खान का शाहजहां शाही अंदाज में प्रभाव छोड़ता है। भाग्यश्री की जिजाऊ, सचिन खेड़ेकर,महेश मांजरेकर, जितेंद्र जोशी और अमोल गुप्ते सभी अपने-अपने किरदारों में मजबूती देते हैं। वहीं जेनेलिया देशमुख का भावनात्मक टच खासकर पारिवारिक दृश्यों में असर छोड़ता है। फिल्म में सलमान खान का कैमियो सरप्राइज फैक्टर जोड़ता है। फिल्म का डायरेक्शन और तकनीकी पहलू कैसा है? निर्देशन में रितेश देशमुख ने इस बड़े ऐतिहासिक विषय को भव्यता और संवेदनशीलता के साथ पेश किया है। फिल्म बड़े पैमाने का सिनेमाई अनुभव देती है, जिसमें मराठी और हिंदी दर्शकों को जोड़ने की साफ कोशिश दिखाई देती है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत बनती है। कुछ हिस्सों में फिल्म की लंबाई महसूस होती है, लेकिन भावनात्मक और युद्ध वाले दृश्य इसकी भरपाई कर देते हैं। फिल्म का म्यूजिक कैसा है? अजय-अतुल का संगीत फिल्म की जान है। बैकग्राउंड स्कोर कई दृश्यों को और ज्यादा असरदार और भावनात्मक बना देता है, जिससे फिल्म का प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है। फाइनल वर्डिक्ट, देखें या नहीं? ‘राजा शिवाजी’ एक भव्य, भावनात्मक और विजुअली शानदार फिल्म है, जो इतिहास को सम्मान देने के साथ दर्शकों को स्वराज्य की भावना से जोड़ती है। दमदार अभिनय, मजबूत निर्देशन और शानदार म्यूजिक इसे बड़े पर्दे पर देखने लायक अनुभव बनाते हैं।

मूवी रिव्यू: राजा शिवाजी:स्वराज्य की भावना को भव्यता से दिखाती फिल्म, रितेश देशमुख का सधा निर्देशन और स्टारकास्ट का असरदार अभिनय इसकी ताकत

मूवी रिव्यू: राजा शिवाजी:स्वराज्य की भावना को भव्यता से दिखाती फिल्म, रितेश देशमुख का सधा निर्देशन और स्टारकास्ट का असरदार अभिनय इसकी ताकत

महाराष्ट्र दिवस के मौके पर रिलीज हुई ‘राजा शिवाजी’ सिर्फ एक ऐतिहासिक फिल्म नहीं, बल्कि स्वराज्य और मराठा अस्मिता को महसूस कराने वाली कहानी है। रितेश देशमुख के निर्देशन में बनी यह फिल्म नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने की कोशिश करती है और कई जगह इसमें ईमानदारी साफ नजर आती है। फिल्म को ज्योति देशपांडे और जेनेलिया देशमुख ने मुंबई फिल्म कंपनी के बैनर तले प्रोड्यूस किया है, और इसे जियो स्टूडियोज ने प्रस्तुत किया है। इस फिल्म की लेंथ 3 घंटा 15 मिनट है। इस फिल्म को दैनिक भास्कर ने 5 में से 4 स्टार की रेटिंग दी है। फिल्म की कहानी क्या है? फिल्म की कहानी अलग-अलग अध्यायों में आगे बढ़ती है, जहां छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, संघर्ष और स्वराज्य के सपने को दिखाया गया है। इसमें सिर्फ बड़े युद्ध नहीं, बल्कि छोटे-छोटे पल, संस्कार, परंपरा और रिश्तों की अहमियत भी दिखाई गई है, जो इसे ज्यादा वास्तविक और भावनात्मक बनाते हैं। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है? रितेश देशमुख ने शिवाजी महाराज के किरदार को संतुलित और प्रभावशाली तरीके से निभाया है। संजय दत्त का अफजल खान शांत लेकिन खतरनाक लगता है। अभिषेक बच्चन ने संभाजी महाराज के रोल में भावनात्मक गहराई दिखाई है। फरदीन खान का शाहजहां शाही अंदाज में प्रभाव छोड़ता है। भाग्यश्री की जिजाऊ, सचिन खेड़ेकर,महेश मांजरेकर, जितेंद्र जोशी और अमोल गुप्ते सभी अपने-अपने किरदारों में मजबूती देते हैं। वहीं जेनेलिया देशमुख का भावनात्मक टच खासकर पारिवारिक दृश्यों में असर छोड़ता है। फिल्म में सलमान खान का कैमियो सरप्राइज फैक्टर जोड़ता है। फिल्म का डायरेक्शन और तकनीकी पहलू कैसा है? निर्देशन में रितेश देशमुख ने इस बड़े ऐतिहासिक विषय को भव्यता और संवेदनशीलता के साथ पेश किया है। फिल्म बड़े पैमाने का सिनेमाई अनुभव देती है, जिसमें मराठी और हिंदी दर्शकों को जोड़ने की साफ कोशिश दिखाई देती है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत बनती है। कुछ हिस्सों में फिल्म की लंबाई महसूस होती है, लेकिन भावनात्मक और युद्ध वाले दृश्य इसकी भरपाई कर देते हैं। फिल्म का म्यूजिक कैसा है? अजय-अतुल का संगीत फिल्म की जान है। बैकग्राउंड स्कोर कई दृश्यों को और ज्यादा असरदार और भावनात्मक बना देता है, जिससे फिल्म का प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है। फाइनल वर्डिक्ट, देखें या नहीं? ‘राजा शिवाजी’ एक भव्य, भावनात्मक और विजुअली शानदार फिल्म है, जो इतिहास को सम्मान देने के साथ दर्शकों को स्वराज्य की भावना से जोड़ती है। दमदार अभिनय, मजबूत निर्देशन और शानदार म्यूजिक इसे बड़े पर्दे पर देखने लायक अनुभव बनाते हैं।

सिवनी के घंसौर में युवक ने फांसी लगाई:छितापार गांव में की आत्महत्या, सुबह परिजनों ने दी पुलिस को सूचना

सिवनी के घंसौर में युवक ने फांसी लगाई:छितापार गांव में की आत्महत्या, सुबह परिजनों ने दी पुलिस को सूचना

सिवनी जिले के घंसौर थाना क्षेत्र के ग्राम छितापार में गुरुवार रात एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। 24 वर्षीय निलेश सैयाम ने अपने घर में यह कदम उठाया। आत्महत्या के कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है। परिजनों को घटना की जानकारी शुक्रवार सुबह हुई, जब उन्होंने निलेश को घर के अंदर फंदे पर लटका देखा। उन्होंने तत्काल घंसौर थाना पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को फंदे से उतारकर पंचनामा कार्रवाई की। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। मृतक की पहचान निलेश पिता देव सिंह सैयाम (24 वर्ष) निवासी ग्राम छितापार के रूप में हुई है। निलेश अपने परिवार के साथ रहता था। पुलिस आत्महत्या के कारणों का पता लगाने के लिए परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। घंसौर थाना प्रभारी लक्ष्मण झारिया ने बताया कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है। यदि कोई संदिग्ध स्थिति सामने आती है, तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

भवानीपुर को लेकर एग्जिट पोल में दिग्गजों वाला ताजा खबर, जानें ममता बनर्जी जीत रही हैं या हार, पढ़ें अनुमान

भवानीपुर को लेकर एग्जिट पोल में दिग्गजों वाला ताजा खबर, जानें ममता बनर्जी जीत रही हैं या हार, पढ़ें अनुमान

भवानीपुर एग्जिट पोल 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 दो चरणों में, 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को संपन्न होगा। इस बीच एग्जिट पोल के कई नतीजे भी सामने आ रहे हैं. धुंधला ही सही है लेकिन इसका अनुमान कहां लगाया जा रहा है इसका भुगतान किया गया है। कई एग्जिट पोल में अनुमान लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन सकती है। वहीं एकिट पोल में ममता बनर्जी की सीट भवानीपुर को लेकर बड़ा दावा किया गया है। भवानीपुर में बिजनेस सोसायटी की हार का अनुमान लगाया गया है। बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए आए एक्वेलिट पोल के आंकड़े बता रहे हैं कि बीजेपी की सरकार बन सकती है. POLIQ के एकल पोल में बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी जो ममता बनर्जी के खिलाफ भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, उनके हार का अनुमान लगाया गया है। आपको बता दें कि एलेक्ट्रेट पोल के नतीजे नहीं आते हैं। 4 मई को अंतिम नतीजे। सरकार बनाने के लिए राज्य के 294 क्वार्टर में 148 की जरूरत है। यह भी पढ़ें- बंगाल रिजल्ट 2026: बंगाल में चुनाव खत्म होने के बाद भी सीएपीएफ के 500 इंजीनियर, सीआरपीएफ के डीजी ने दी जानकारी टीएमसी की 200 मंजिल का अनुमान POLIQ के एकांकीत पोल के आंकड़ों के मुताबिक बंगाल में कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। POLIQ के अनुसार प्रोटोटाइप कांग्रेस को 200 से 220 शेयर मिल सकते हैं. वहीं भारतीय जनता पार्टी के 50- 82 पोर्टफोलियो में ही कंपनी कर रहेगी। लेफ्ट दल को 0 से 3 सीट, कांग्रेस को 1 से 2 सीट और अन्य को 0 से 3 सीट की बैठक का अनुमान है। भवानीपुर का गढ़ है भवानीपुर भवानीपुर को ममता बनर्जी का किला भी कहा जाता है। भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में कोलकाता नगर निगम के 8 वार्ड आते हैं। वहीं बीजेपी की पूरी नजर इसी क्षेत्र पर टिकी है. यह एक रणभूमि में पौराणिक हो चुका है। यह भी पढ़ें- एग्जिट पोल 2026: तमिलनाडु में टीवीके ने दिया झटका, असम में एनडीए का तूफान, एलडीएफ को मोही, लेकिन बंगाल में छाया सैस्पेंस

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Last Updated:May 01, 2026, 13:37 IST Hansraj College Wellness Centre: दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज में NBCC के CSR फंड से अत्याधुनिक वेलनेस सेंटर, ओपन जिम और फिजियोथेरेपी केंद्र की शुरुआत हुई है. अब कॉलेज के छात्र और स्टाफ कैंपस के भीतर ही मुफ्त फिटनेस ट्रेनिंग और आधुनिक इलाज की सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे. जिससे उनके स्वास्थ्य और जीवनशैली में बड़ा सुधार आएगा. दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज में छात्रों की सेहत और फिटनेस को ध्यान में रखते हुए एक बड़ी पहल की गई है. कॉलेज में अत्याधुनिक फिजियोथेरेपी सेंटर, वेलनेस सेंटर और ओपन जिम का शुभारंभ किया गया है. जिससे अब छात्र पढ़ाई के साथ-साथ अपनी सेहत का भी बेहतर ख्याल रख सकेंगे. कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. रमा ने बताया कि पहले भी फिजियोथेरेपी और जिम की सुविधाएं मौजूद थीं. लेकिन बढ़ती छात्र संख्या के कारण सभी तक उनकी पहुंच नहीं हो पा रही थी. इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार सुविधाओं को अपग्रेड किया गया और एक नया ओपन जिम भी स्थापित किया गया. जिससे ज्यादा से ज्यादा छात्र लाभ उठा सकें. CSR फंड से तैयार हुआ पूरा सेटअपइस पहल को लेकर सोशल मीडिया पर उठे सवालों का जवाब देते हुए प्रिंसिपल ने स्पष्ट किया कि इस प्रोजेक्ट में किसी भी तरह से स्टूडेंट फंड का इस्तेमाल नहीं किया गया है. यह पूरा सेटअप NBCC (India) Limited के CSR फंड के तहत तैयार किया गया है. NBCC ने खुद ही सभी मशीनें और उपकरण खरीदकर कॉलेज में इंस्टॉल किए हैं. हर किसी के लिए मुफ्त सुविधाइस वेलनेस सेंटर की खास बात यह है कि यह सिर्फ छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि कॉलेज के टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ के लिए भी पूरी तरह मुफ्त है. कॉलेज प्रशासन का उद्देश्य है कि हंसराज परिवार का हर सदस्य शारीरिक रूप से फिट और स्वस्थ रहे. खिलाड़ियों को मिलेगा बड़ा फायदाडॉक्टर गौरव ने बताया हंसराज कॉलेज अपने बेहतरीन स्पोर्ट्स कल्चर के लिए जाना जाता है. यहां कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पढ़ाई करते हैं. ऐसे में अक्सर खिलाड़ियों को चोट लगने की समस्या होती है. अब नए फिजियोथेरेपी सेंटर में उन्हें तुरंत इलाज और रिहैबिलिटेशन की सुविधा मिलेगी. जिससे उनका प्रदर्शन और बेहतर हो सकेगा. ओपन जिम से बढ़ेगी फिटनेस की आदतकॉलेज के फिजिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट के अनुसार वेलनेस सेंटर को दो हिस्सों में विकसित किया गया है एक हाई परफॉर्मेंस एथलीट्स के लिए और दूसरा सामान्य छात्रों के लिए. ओपन जिम के जरिए छात्रों को बिना किसी झिझक के कभी भी फ्री-हैंड एक्सरसाइज करने का मौका मिलेगा. आधुनिक मशीनों से लैस सेंटरफिजियोथेरेपी सेंटर में TENS मशीन, अल्ट्रासाउंड थेरेपी जैसी आधुनिक मशीनें मौजूद हैं. जबकि इंडोर जिम में स्ट्रेंथ और कार्डियो ट्रेनिंग के लिए सभी जरूरी उपकरण उपलब्ध हैं. ओपन जिम में पूरे शरीर के वर्कआउट के लिए अलग-अलग स्टेशन बनाए गए हैं. स्वस्थ शरीर, बेहतर भविष्यकॉलेज प्रशासन का मानना है कि Health is Wealth सिर्फ एक कहावत नहीं, बल्कि छात्रों के जीवन का अहम हिस्सा होना चाहिए. ऐसे में यह पहल न केवल उनकी फिटनेस को बढ़ावा देगी. बल्कि उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव भी लाएगी. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : East Delhi,Delhi

7 मई को कांग्रेस नेशनल हाईवे जाम करेगी:किसानों की समस्याओं पर सेंधवा, खलघाट समेत 7 स्थानों पर प्रदर्शन

7 मई को कांग्रेस नेशनल हाईवे जाम करेगी:किसानों की समस्याओं पर सेंधवा, खलघाट समेत 7 स्थानों पर प्रदर्शन

बड़वानी। किसानों की समस्याओं और चुनाव पूर्व किए गए वादों को लेकर कांग्रेस ने प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। इसके तहत, 7 मई को प्रदेश के 7 प्रमुख स्थानों पर नेशनल हाईवे जाम किया जाएगा। इस आंदोलन की शुरुआत बड़वानी जिले से होगी। जिला कांग्रेस अध्यक्ष नानेश चौधरी ने शुक्रवार को मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। रणनीति के अनुसार, मुरैना, ग्वालियर, शाजापुर, इंदौर, खलघाट और बड़वानी के सेंधवा सहित नेशनल हाईवे से जुड़े प्रमुख स्थानों पर चक्काजाम किया जाएगा। किसानों की लगातार मिल रही समस्याओं को देखते हुए कार्यक्रम संचालन के लिए वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। बैठक में पूर्व गृहमंत्री और राजपुर विधायक बाला बच्चन भी शामिल हुए थे, जिन्होंने आंदोलन की रूपरेखा पर विचार साझा किए। नेशनल हाईवे से सटे जिलों के विधायक, विधानसभा प्रत्याशी और लोकसभा प्रत्याशियों को इस आंदोलन को सफल बनाने की कमान सौंपी गई है। नानेश चौधरी ने बताया कि आंदोलन की तैयारियों के लिए विधानसभा और ब्लॉक स्तर पर बैठकें आयोजित की जाएंगी। जिला प्रभारी और एआईसीसी प्रभारी गांव-गांव जाकर व्यापक जनसंपर्क करेंगे। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को चुनाव पूर्व किए गए वादों की याद दिलाने के लिए जनता के साथ खड़ा रहना आवश्यक है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष नानेश चौधरी ने मध्य प्रदेश और केंद्र की भाजपा सरकारों पर किसानों के साथ नाइंसाफी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश से हैं, फिर भी राज्य के किसानों के साथ सबसे अधिक अन्याय हो रहा है। चौधरी ने चेतावनी दी कि यदि किसानों के साथ हो रही नाइंसाफी को तुरंत नहीं रोका गया, तो कांग्रेस 7 मई को आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे को जाम करने में किसानों के साथ मैदान में उतरेगी। सरकार ने नहीं निभाया वादा जिला अध्यक्ष ने कहा राज्य सरकार सिर्फ विज्ञापनों के जरिए किसान कल्याण वर्ष (2026) मना रही है, जबकि असलियत यह है कि किसान भारी कर्ज में डूबे हुए हैं और अपनी उपज का सही दाम पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ”मोहन यादव सरकार ने गेहूं के लिए 2,700 रुपए प्रति क्विंटल MSP का वादा किया था। लेकिन किसानों को 1,800 रुपए से 2,200 रुपए प्रति क्विंटल तक का रेट मिल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दावा करते हैं कि उन्होंने अपने लंबे शासन के दौरान मध्य प्रदेश में किसानों की इनकम आठ गुना बढ़ाई है, लेकिन उनके होम डिस्ट्रिक्ट सीहोर में किसानों की बुरी हालत ने इन दावों की पोल खोल दी है।”

GST collections rise to all-time high of Rs 2.43 lakh crore in April 2026

GST collections rise to all-time high of Rs 2.43 lakh crore in April 2026

Hindi News Business GST Collections Rise To All time High Of Rs 2.43 Lakh Crore In April 2026 नई दिल्ली8 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत के गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स यानी GST कलेक्शन ने अप्रैल 2026 में अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सरकार ने पहली बार अप्रैल में कुल ₹2.43 लाख करोड़ का अब तक का सबसे ज्यादा GST कलेक्शन किया है। पिछले महीने मार्च 2026 में GST कलेक्शन ₹2 लाख करोड़ रहा था। वहीं अप्रैल 2025 में कुल GST कलेक्शन ₹2.23 लाख करोड़ था। इस साल इसमें सालाना आधार पर 8.7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अगर नेट GST रेवेन्यू की बात करें, तो यह ₹2.11 लाख करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 7.3% ज्यादा है। अप्रैल का यह डेटा दरअसल मार्च महीने में हुए ट्रांजेक्शन से जुड़ा है। इस दौरान ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया था। 30 अप्रैल तक ब्रेंट क्रूड की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं, फिर भी भारत के टैक्स कलेक्शन की रफ्तार बनी रही। इम्पोर्ट रेवेन्यू में 25% से ज्यादा की ग्रोथ आंकड़ों के मुताबिक, इस रिकॉर्ड कलेक्शन में घरेलू रेवेन्यू के मुकाबले बाहरी व्यापार यानी इम्पोर्ट का बड़ा हाथ रहा है… घरेलू रेवेन्यू: साल-दर-साल आधार पर 4.3% बढ़कर ₹1.85 लाख करोड़ रहा। इम्पोर्ट GST रेवेन्यू: इसमें 25.8% का भारी उछाल आया और यह ₹57,580 करोड़ पर पहुंच गया। इससे संकेत मिलता है कि कुल कलेक्शन में बढ़ोतरी का मुख्य कारण घरेलू मांग के बजाय विदेशी व्यापार रहा है। अप्रैल 2026 में एक साल बाद GST कलेक्शन ऑल-टाइम-हाई पर पहुंचा महीना GST कलेक्शन अप्रैल 2025 ₹2.37 लाख मई 2025 ₹2.01 लाख जून 2025 ₹1.85 लाख जुलाई 2025 ₹1.96 लाख अगस्त 2025 ₹1.86 लाख सितंबर 2025 ₹1.89 लाख अक्टूबर 2025 ₹1.96 लाख नवंबर 2025 ₹1.70 लाख दिसंबर 2025 ₹1.74 लाख जनवरी 2025 ₹1.93 लाख फरवरी 2025 ₹1.83 लाख मार्च 2025 ₹2.00 लाख अप्रैल 2026 ₹2.43 लाख अप्रैल महीने में रिफंड में भी बढ़ोतरी हुई सरकार ने अप्रैल महीने में कुल ₹31,793 करोड़ का रिफंड जारी किया है, जो पिछले साल से 19.3% ज्यादा है। इसमें डोमेस्टिक रिफंड में 54.6% का बड़ा उछाल देखा गया, जबकि एक्सपोर्ट से जुड़े रिफंड में 14% की गिरावट दर्ज की गई। पूंजीगत लाभ और रिकॉर्ड कलेक्शन के बावजूद, विकास की रफ्तार में मामूली सुस्ती देखी गई है। मार्च में ग्रोथ रेट 8.8% था, जो अप्रैल में घटकर 8.7% रह गया। यह दर्शाता है कि खपत आधारित विकास की गति थोड़ी धीमी हो रही है। इकोनॉमी की सेहत दिखाता है GST कलेक्शन जीएसटी कलेक्शन यह बताता है कि देश की अर्थव्यवस्था कितनी तंदुरुस्त है। अगर कलेक्शन ज्यादा है, तो इसका मतलब है कि लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं, फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ रहा है और लोग ईमानदारी से टैक्स भर रहे हैं। GST रिफंड क्या है: जब कोई कंपनी अपनी देनदारी से ज्यादा टैक्स चुका देती है या एक्सपोर्ट करती है, तो सरकार उसे टैक्स वापस करती है, जिसे रिफंड कहते हैं। नेट vs ग्रॉस GST: ग्रॉस (Gross) कुल इकट्ठा किया गया पैसा होता है, जबकि रिफंड घटाने के बाद बची राशि नेट (Net) रेवेन्यू कहलाती है। 2017 में लागू हुआ था GST सरकार ने 1 जुलाई 2017 को देशभर में GST लागू किया था। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों के 17 करों और 13 उपकरों को हटा दिया गया था। GST को चार हिस्सों में डिवाइड किया गया है: CGST (केंद्रीय जीएसटी): केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किया जाता है। SGST (राज्य जीएसटी): राज्य सरकारों द्वारा एकत्र किया जाता है। IGST (एकीकृत जीएसटी): अंतरराज्यीय लेनदेन और आयात पर लागू, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विभाजित। उपकर (सेस): स्पेसिफिक पर्पज के लिए फंड जुटाने के लिए स्पेसिफिक गुड्स (जैसे, लग्जरी आइटम्स, तंबाकू) पर लगाया जाने वाला अतिरिक्त शुल्क। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…