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Oil Reserve 36-Year Low; Trump Claims 4 Weeks Supply Gone

Oil Reserve 36-Year Low; Trump Claims 4 Weeks Supply Gone

वॉशिंगटन डीसी5 मिनट पहले

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ईरान-अमेरिका समझौते के बाद इस हफ्ते होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल गया है। हालांकि दुनिया अभी भी तेल संकट से पूरी तरह बाहर नहीं निकली है।

एनालिटिक्स फर्म केपलर की रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के करीब चार महीनों में वैश्विक बाजार से 115 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई गायब हो चुकी है। इसका असर आने वाले महीनों तक बना रह सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के दौरान मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई लगभग बंद रही। इस वजह से दुनिया के स्ट्रेटजिक और कॉमर्शियल ऑयल रिजर्व तेजी से घटे हैं। पिछले कुछ महीनों में 19 करोड़ बैरल तेल स्टॉक से निकल चुका है।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के स्ट्रेटजिक रिजर्व 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं, जबकि अमेरिका का इमरजेंसी रिजर्व 43 साल के निचले स्तर पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को वर्साय में G7 बैठक के दौरान कहा कि अगर जंग खत्म नहीं करते तो हमारे रिजर्व करीब चार हफ्तों में खत्म हो जाते।

ट्रम्प ने 18 जून को ईरान से समझौते पर साइन किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर होर्मुज नहीं खुलता तो दुनिया आर्थिक तबाही का सामना कर सकती थी।

ट्रम्प ने 18 जून को ईरान से समझौते पर साइन किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर होर्मुज नहीं खुलता तो दुनिया आर्थिक तबाही का सामना कर सकती थी।

सीजफायर के बाद तेल सस्ता हुआ

अमेरिका-ईरान समझौते की खबर से तेल बाजार ने राहत की सांस ली। युद्ध के दौरान 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा ब्रेंट क्रूड अब 80 डॉलर से नीचे आ गया है। लेकिन कीमतों में यह गिरावट पूरी कहानी नहीं बताती।

रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी तेल की सप्लाई तुरंत सामान्य नहीं होगी। पहले समुद्री रास्तों से बारूदी सुरंगें हटानी होंगी।

इसके बाद खाली टैंकरों की वापसी, तेल उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई चेन को पटरी पर लाने में वक्त लगेगा। तेल उद्योग से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि पूरी व्यवस्था को सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं। तब तक दुनिया को मौजूदा तेल भंडार के सहारे ही काम चलाना होगा।

RBC कैपिटल मार्केट्स की हेलिमा क्रॉफ्ट ने कहा कि बाजार जरूरत से ज्यादा उत्साहित है। उनके मुताबिक, संकट खत्म मान लेना जल्दबाजी होगी, क्योंकि तेल की सप्लाई को सामान्य स्तर पर लाने में अभी बड़ी चुनौतियां बाकी हैं।

कई एक्सपर्ट्स को अभी भी राहत की उम्मीद

इंफ्रास्ट्रक्चर केपिटल एडवाइजर्स के CEO जे हैटफील्ड का मानना है कि नकदी संकट से जूझ रहे OPEC सदस्य देश उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। इससे बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आएगी और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।

मैक्वेरी ग्रुप के ग्लोबल ऑयल एंड गैस स्ट्रैटेजिस्ट विकास द्विवेदी ने कहा कि जंग शुरू होने से पहले दुनिया के पास तेल का अच्छा-खासा स्टॉक था। इसी वजह से इतनी बड़ी सप्लाई रुकने के बावजूद बाजार पूरी तरह नहीं हिला।

उन्होंने कहा कि अमेरिका में डीजल और पेट्रोल का भंडार जरूर कम हुआ है, लेकिन हालात अभी काबू में हैं। संकट के दौरान रिफाइनरियों को तेल खरीदने के लिए कई जगह फोन करने पड़ रहे थे, लेकिन आने वाले हफ्तों में तस्वीर बदल सकती है। तब तेल बेचने वाले खुद खरीदारों के पास पहुंचेंगे।

हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि युद्ध के दौरान गायब हुए 115 करोड़ बैरल तेल की भरपाई आसान नहीं होगी। अगर दुनिया रोजाना मांग से 50 लाख बैरल ज्यादा तेल भी पैदा करे, तब भी इस कमी को पूरा करने में करीब एक साल लग जाएगा।

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एनालिटिक्स फर्म केपलर की रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के करीब चार महीनों में वैश्विक बाजार से 115 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई गायब हो चुकी है। इसका असर आने वाले महीनों तक बना रह सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के दौरान मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई लगभग बंद रही। इस वजह से दुनिया के स्ट्रेटजिक और कॉमर्शियल ऑयल रिजर्व तेजी से घटे हैं। पिछले कुछ महीनों में 19 करोड़ बैरल तेल स्टॉक से निकल चुका है।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के स्ट्रेटजिक रिजर्व 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं, जबकि अमेरिका का इमरजेंसी रिजर्व 43 साल के निचले स्तर पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को वर्साय में G7 बैठक के दौरान कहा कि अगर जंग खत्म नहीं करते तो हमारे रिजर्व करीब चार हफ्तों में खत्म हो जाते।

ट्रम्प ने 18 जून को ईरान से समझौते पर साइन किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर होर्मुज नहीं खुलता तो दुनिया आर्थिक तबाही का सामना कर सकती थी।

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सीजफायर के बाद तेल सस्ता हुआ

अमेरिका-ईरान समझौते की खबर से तेल बाजार ने राहत की सांस ली। युद्ध के दौरान 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा ब्रेंट क्रूड अब 80 डॉलर से नीचे आ गया है। लेकिन कीमतों में यह गिरावट पूरी कहानी नहीं बताती।

रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी तेल की सप्लाई तुरंत सामान्य नहीं होगी। पहले समुद्री रास्तों से बारूदी सुरंगें हटानी होंगी।

इसके बाद खाली टैंकरों की वापसी, तेल उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई चेन को पटरी पर लाने में वक्त लगेगा। तेल उद्योग से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि पूरी व्यवस्था को सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं। तब तक दुनिया को मौजूदा तेल भंडार के सहारे ही काम चलाना होगा।

RBC कैपिटल मार्केट्स की हेलिमा क्रॉफ्ट ने कहा कि बाजार जरूरत से ज्यादा उत्साहित है। उनके मुताबिक, संकट खत्म मान लेना जल्दबाजी होगी, क्योंकि तेल की सप्लाई को सामान्य स्तर पर लाने में अभी बड़ी चुनौतियां बाकी हैं।

कई एक्सपर्ट्स को अभी भी राहत की उम्मीद

इंफ्रास्ट्रक्चर केपिटल एडवाइजर्स के CEO जे हैटफील्ड का मानना है कि नकदी संकट से जूझ रहे OPEC सदस्य देश उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। इससे बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आएगी और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।

मैक्वेरी ग्रुप के ग्लोबल ऑयल एंड गैस स्ट्रैटेजिस्ट विकास द्विवेदी ने कहा कि जंग शुरू होने से पहले दुनिया के पास तेल का अच्छा-खासा स्टॉक था। इसी वजह से इतनी बड़ी सप्लाई रुकने के बावजूद बाजार पूरी तरह नहीं हिला।

उन्होंने कहा कि अमेरिका में डीजल और पेट्रोल का भंडार जरूर कम हुआ है, लेकिन हालात अभी काबू में हैं। संकट के दौरान रिफाइनरियों को तेल खरीदने के लिए कई जगह फोन करने पड़ रहे थे, लेकिन आने वाले हफ्तों में तस्वीर बदल सकती है। तब तेल बेचने वाले खुद खरीदारों के पास पहुंचेंगे।

हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि युद्ध के दौरान गायब हुए 115 करोड़ बैरल तेल की भरपाई आसान नहीं होगी। अगर दुनिया रोजाना मांग से 50 लाख बैरल ज्यादा तेल भी पैदा करे, तब भी इस कमी को पूरा करने में करीब एक साल लग जाएगा।

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