Left Govt Ends, Congress Returns

23 मिनट पहलेलेखक: ऐश्वर्य राज कॉपी लिंक केरलम विधानसभा चुनाव में पिनराई विजयन की अगुवाई वाले लेफ्ट एलायंस LDF को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस की अगुवाई वाली UDF ने 140 में से 90 से ज्यादा सीटें जीतकर 10 साल बाद सत्ता में वापसी कर ली है। केरलम में इस हार के बाद 49 साल में यह पहली होने जा रहा है जब देश के किसी भी राज्य में लेफ्ट की सरकार नहीं है। जानते हैं देश में वामपंथ के विस्तार, जीत और हार से जुड़ी प्रमुख बातें… इससे पहले जानिए लेफ्ट यानी कम्युनिस्ट विचारधारा के बारे में। 1947 में मिली आजादी को मानने से इंकार किया भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने 1947 में भारत को मिली आजादी को असली आजादी मानने से इंकार कर दिया था। उस वक्त पार्टी का कहना था कि यह आजादी अधूरी और समझौतों का परिणाम है, जिसे उन्होंने ‘झूठी आजादी’ का नाम दिया। इस हकीकत को पूरी तरह स्वीकार करने में पार्टी को 5 साल से ज्यादा का समय लग गया। मार्च 1948 में पार्टी के भीतर एक बड़ा बदलाव हुआ। पीसी. जोशी की जगह बीटी. रणदिवे (BTR) नए जनरल सेक्रेटरी बने। उनके आते ही पार्टी में ‘रणदिवे लाइन’ लागू हुई, जो बेहद कट्टर और आक्रामक थी। इसी सोच के तहत जनवरी 1950 में संविधान लागू होने से पहले ही CPI ने इसका विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस के नेता भारतीय जनता पर ‘गुलामी का संविधान’ थोप रहे हैं। लेफ्ट पार्टी ने नेहरू सरकार को हिंसक तरीके से उखाड़ फेंकने का आह्वान किया। 1948 और 1949 के दौरान यह नीति पूरी तरह विफल रही। इसके बाद मई-जून 1950 में बीटी. रणदिवे को पद से हटा दिया गया। पार्टी की सेंट्रल कमेटी ने यह स्वीकार किया कि बिना सोचे-समझे 9 मार्च 1949 को देशव्यापी हड़ताल और विद्रोह का जो आह्वान किया गया था, वह बड़ी भूल थी। करीब 6 साल के बाद CPI अपनी कट्टर विचारधारा छोड़कर देश की आजादी की सच्चाई स्वीकार करने के लिए मजबूर हुई। दुनिया की पहली चुनी हुई लोकतांत्रिक लेफ्ट सरकार 5 अप्रैल 1957, केरल के पहले सीएम के रूप में शपथ लेते हुए ईएमएस नंबूदरीपाद। 1956 में त्रावणकोर, कोचीन और मालाबार को मिलाकर एक नया राज्य केरलम बना। मार्च 1957 में यहां पहली बार विधानसभा चुनाव हुए। 126 सीटों वालीं विधानसभा में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया यानी CPI को 60 सीट मिलीं। 5 निर्दलीय को मिलाकर उसने सरकार बना ली। ये दुनिया में लेफ्ट की पहली चुनी हुई सरकार थी। ईएमएस नंबूदरीपाद ने मुख्यमंत्री बनने के एक हफ्ते बाद ही दो बड़े कानून लागू किए। पहला- भूमि सुधार कानून और दूसरा- शिक्षा में सुधार को लेकर। भूमि सुधार कानून के बाद बटाईदार किसानों को जमीन खरीदने की छूट मिल गई। लैंडहोल्डिंग की लिमिट तय हो गई। वहीं, एजुकेशन बिल के जरिए प्राइवेट संस्थानों को रेगुलेट करने के लिए सख्त नियम बना दिए। 2 फरवरी 1959 को इंदिरा गांधी कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं। इसके बाद वो केरलम गईं। वहां से लौटने के बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री नेहरू को सौंप दी। 31 जुलाई 1959 को केरलम सरकार बर्खास्त कर दी गई। गांधी की तस्वीरें हटाईं, माओ–स्टालिन की लगाईं इसी बीच केरलम के स्कूल-कॉलेजों से गांधी की तस्वीर हटाकर माओ और स्टालिन की तस्वीर लगाई जाने लगीं। कहा जाने लगा कि नंबूदरीपाद की सरकार बनाने के लिए कम्युनिस्ट देशों ने फंड भेजे हैं। इसके विरोध में केरलम के गांधी कहे जाने वाले मन्नथ पिल्लई की अगुआई में लाखों लोग सड़कों पर उतर गए। हजारों लोग जेल में डाल दिए गए। आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसमें मछुआरे कम्युनिटी की एक प्रेग्नेंट महिला की जान चली गई। आंदोलन और भड़क उठा। जगह-जगह हिंसा होने लगीं। चीन युद्ध पर सरकार से अलग रुख के कारण दूसरा बड़ा विभाजन 1962 के भारत–चीन युद्ध ने CPI के भीतर वैचारिक दरार बढ़ा दिया। पार्टी का एक धड़ा नेहरू सरकार के समर्थन में था। दूसरा धड़ा चीन को आक्रमणकारी मानने को तैयार नहीं था। ‘राष्ट्रवाद बनाम अंतरराष्ट्रीय साम्यवाद’ की इस बहस के बीच, चीन समर्थक माने जाने वाले नेताओं को जेल में डाल दिया गया। इसी तनाव ने पार्टी के आधार को हिला दिया और कम्युनिस्ट आंदोलन दो फाड़ हो गया। युद्ध के दो साल बाद, 1964 में मतभेद इतने बढ़ गए कि कम्युनिस्ट पार्टी आधिकारिक रूप से विभाजित हो गई। सोवियत संघ की नरम नीति के समर्थक CPI में रहे, जबकि क्रांतिकारी रुख अपनाने वाले नेताओं ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) का गठन किया। साल 1964, CPI (M) की स्थापना के दौरान बाएं से दूसरे नंबर पर ज्योति बसु (पश्चिम बंगाल के पूर्व सीएम) और दूसरी पंक्ति में बाएं से तीसरे नंबर पर केरल के पहले सीएम ईएमएस नंबूदिरीपाद। बंगाल में 1967 में लेफ्ट पश्चिम बंगाल में पहली बार लेफ्ट ने 1967 में ‘यूनाइटेड फ्रंट’ गठबंधन के जरिए सरकार में आई। उस समय अजय मुखर्जी मुख्यमंत्री बने थे और ज्योति बसु डिप्टी सीएम थे। हालांकि, सरकार बहुत अस्थिर रही। 1975 में जब इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगाई, तो CPI ने शुरुआत में इंदिरा गांधी और इमरजेंसी का समर्थन किया था, जबकि CPI(M) ने इसका विरोध किया था और उनके कई नेता जेल भी गए थे। 1977 के विधानसभा चुनावों में लेफ्ट को बंगाल में भारी बहुमत मिला और यहीं से राज्य में कम्युनिस्टों के लंबे शासन की असली शुरुआत हुई। ज्योति बसु मुख्यमंत्री बने और लगातार 2000 तक राज्य के सीएम रहे। उनके बाद बुद्धदेव भट्टाचार्य मुख्यमंत्री बने, जिन्होंने राज्य में उद्योगों को लाने की कोशिश की। लेकिन सिंगूर और नंदीग्राम जैसे भूमि अधिग्रहण विवादों के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने 2011 में कम्युनिस्टों के 34 साल पुराने शासन को खत्म कर दिया। उस वक्त के सीएम बुद्धदेव भट्टाचार्य खुद अपना चुनाव हार गए। 90 के दशक में ज्योति बसु को 3 बार PM बनाने का मौका CBI के पूर्व डायरेक्टर अरुण प्रसाद मुखर्जी ने अपनी किताब ‘राजीव गांधी, ज्योति बसु, इंद्रजीत गुप्त के अनछुए पहलू’ में बताया है कि 1990 और 1991 के उथल-पुथल भरे दौर में राजीव गांधी चाहते थे कि ज्योति बसु देश के प्रधानमंत्री बनें। पहली बार अक्टूबर 1990 में राजीव गांधी ने ज्योति बसु से
आप भी मच्छरों को भगाने के लिए जला रहे कॉइल? अंबाला में मौसम बदलते ही आई आफत

Last Updated:May 04, 2026, 16:30 IST Ambala News : अगर आपको भी रात में सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है, छाती में कसाव और गले से सीटी जैसी आवाज आने जैसी समस्या है, तो इस मौसम में सतर्क होने की जरूरत है. बढ़ते प्रदूषण और बदलती जीवनशैली के बीच एलर्जी और दमा तेजी से फैल रहा है. गर्मियों में तापमान बढ़ने के साथ परेशानी बढ़ जाती है. अंबाला की आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. मीनाक्षी शर्मा लोकल 18 से बताती हैं कि , मच्छरों से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली कॉइल और अगरबत्ती समस्या बढ़ सकते हैं. इनसे निकलने वाला धुआं सांस की नलियों को प्रभावित करता है. अंबाला. बढ़ते प्रदूषण और बदलती जीवनशैली के बीच एलर्जी और दमा जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं. गर्मियां आते ही जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, दमा (अस्थमा) मरीजों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि थोड़ी सी सावधानी और सही दिनचर्या अपनाकर इन समस्याओं से बचा जा सकता है. अगर आपको भी रात में सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है, छाती में कसाव (जकड़न) व गले से सीटी जैसी आवाज आने जैसी समस्या है, तो इस मौसम में सतर्क होने की जरूरत है. अंबाला शहर नागरिक अस्पताल की आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. मीनाक्षी शर्मा लोकल 18 से बताती हैं कि मौसम परिवर्तन के कारण ही कई लोगों को श्वास से जुड़ी समस्या होने लगती हैं. ऐसे में एलर्जी और दमा के मरीजों को अपने आसपास के वातावरण और खान-पान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. डॉ. मीनाक्षी बताती हैं कि आयुर्वेद में कहा गया है कि अगर आपको किसी भी चीज से समस्या है तो सबसे पहले आप उससे दूरी बनाएं, फिर जो टिप्स हैं उसे अपनाएं. एलर्जी का मुख्य कारण धूल, धुआं, परागकण और पालतू जानवरों के बाल होते हैं. मरीजों को इनसे दूरी बनाकर रखनी चाहिए. घर की नियमित सफाई बेहद जरूरी है ताकि धूल जमा न हो. घर में पालतू जानवर रखने से भी बचना चाहिए. उनके बाल और त्वचा के कण एलर्जी बढ़ा सकते हैं. डॉ. मीनाक्षी के मुताबिक, मच्छरों से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली कॉइल और अगरबत्ती भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है. इनसे निकलने वाला धुआं सांस की नलियों को प्रभावित करता है, जिससे दमा के मरीजों की स्थिति बिगड़ सकती है. इसके बजाय प्राकृतिक उपाय अपनाना अधिक सुरक्षित है. एलर्जी और दमा के मरीजों को ठंडे पेय पदार्थ, फास्ट फूड और प्रिजर्वेटिव खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए. चॉकलेट, टॉफी, आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक जैसे पदार्थ शरीर में एलर्जिक प्रतिक्रिया को बढ़ा सकते हैं. इसके स्थान पर ताजे फल, हरी सब्जियां और हल्का भोजन लेना अधिक लाभकारी है. पानी पीने का तरीका बदलें पानी को उबालकर पिएं और गर्मी के मौसम में उबले हुए पानी को ठंडा होने के लिए रख सकते हैं, लेकिन नल का सीधा पानी नहीं पीना चाहिए. आयुर्वेद में कपूर की स्ट्रीम को काफी फायदेमंद बताया गया है. दाल चीनी और मेथी दाने का भी प्रयोग किया जा सकता है. लेमन ग्रास और तुलसी आयुर्वेद में अस्थमा से ग्रस्त मरीजों के लिए फायदेमंद है. घरों के आसपास पेड़-पौधे जरूर लगाएं. उससे भी शुद्ध हवा मिलती है. About the Author Priyanshu Gupta प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
akansha ranjan kapoor egg free| Best age to freeze eggs| एग फ्रीजिंग कैसे किया जाता है? 32 साल की इस एक्ट्रेस ने शेयर किया दर्दनाक एक्सपीरियंस

बालीवुड एक्ट्रेस 32 साल की आकांक्षा रंजन कपूर ने हाल ही में अपने एग फ्रीजिंग एक्सपीरियंस को शेयर किया है. एक्ट्रेस ने सोहा अली खान के पोडकास्ट ‘ऑल अबाउट हर’ में बताया कि उन्हें लगा कि ये एक स्मार्ट तरीका है, क्योंकि अभी उन्हें बच्चा नहीं चाहिए लेकिन बायलॉजिकल क्लॉक तेजी से बढ़ रहा है. लेकिन जब एग फ्रीजिंग प्रोसेस शुरू हुआ तो सब कुछ बहुत मुश्किल था. सोहा अली खान से बातचीत में उन्होंने बताया कि उन्हें लगातार भारीपन और दर्द महसूस होता था, यहां तक कि चलने या खड़े होने में भी कठिनाई होती थी. पिछले कुछ सालों में एग फ्रीजिंग का कल्चर काफी बढ़ा है. लेकिन ये बिल्कुल भी आसान नहीं होता है. यदि आप एग फ्रीजिंग के बारे में सोच रहे हैं, तो इस लेख में आप पूरे प्रोसेस का ओवर व्यू ले सकते हैं. डॉ. मन्नान गुप्ता, अध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष – प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग, एलेंटिस हेल्थकेयर, नई दिल्ली बताते हैं कि एग फ्रीजिंग, जिसे ऊसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन भी कहा जाता है, एक मेडिकल तरीका है जिसमें महिलाएं अपने हेल्दी एग्स को बाद में कंसीव करने के लिए यूज कर सकती हैं. ये मेडिकल प्रोसेस महिलाओं को फैमिली प्लानिंग की चिंता किए बिना अपने करियर और गोल्स पर फोकस करने का समय देता है. लेकिन इस प्रोसेस की एक सच्चाई यह भी है कि एग फ्रीजिंग का प्रोसेस जितना बताया जाता है , उससे कहीं ज्यादा काम्प्लेक्स होता है. एग फ्रीजिंग का प्रोसेस पहला स्टेज एक्सपर्ट बताते हैं कि एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया की शुरुआत महिला की अपने डॉक्टर के साथ पहली मुलाकात से होती है. इस मुलाकात के दौरान, डॉक्टर महिला हिस्ट्री को रिव्यू करके उसकी हेल्थ , मेंस्ट्रुअल साइकिल और ओवेरियन रिजर्व का आकलन करते हैं, ओवेरियन रिजर्व से पता चलता है कि उसके पास इस समय कितने और किस तरह के हेल्दी एग्स मौजूद हैं. हम आमतौर पर ओवरी के कामकाज का इवैल्यूएशन करने के लिए लैब टेस्ट और अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह देते हैं. इस मेडिकल जानकारी की मदद से डॉक्टर महिला की जरूरतों के आधार पर एक विशेष उपचार योजना तैयार कर पाते हैं. दूसरा स्टेजएक नार्मल नेचुरल साइकिल में, ओव्यूलेशन के लिए केवल एक ही एग बनता है. एग फ्रीजिंग साइकिल का टारगेट एक ही साइकिल में ज्यादा से ज्यादा एग प्राप्त करना होता है. इसके लिए, ओवरी को सामान्य से ज्यादा या बड़े अंडे बनाने के लिए लगभग दस से बारह दिनों तक रोजाना हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते हैं. एग फ्रीजिंग प्रक्रिया के इस चरण के दौरान, मरीजों को बार-बार ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड करवाने की जरूरत पड़ती है, ताकि यह पता चल सके कि फॉलिकल्स, ओवरी में मौजूद छोटी-छोटी थैलियां, जिनमें अंडे सुरक्षित रहते हैं, कितनी तेजी से बढ़ रहे हैं. तीसरा स्टेजइस स्टेज में एग्स को निकालना और इन्हें लैब में जांच के लिए भेजना शामिल होता है. फ्रीजिंग या क्रायोप्रिजर्वेशन के लिए केवल पूरी तरह से विकसित और हेल्दी एग्स को ही चुना जाता है. एग्स को विट्रीफिकेशन नामक एक प्रोसेस से गुजारा जाता है. यह एक तेजी से फ्रीज करने वाला प्रोसेस है जो कोशिका के अंदर बर्फ के क्रिस्टल बनने से रोकती है, जिससे एग की क्वालिटी बनी रहती है. फ्रीज किए गए एग को खास तौर पर बनाए गए कंटेनरों में बहुत कम तापमान पर तब तक रखा जाता है, जब तक कि महिला यह तय नहीं कर लेती कि वह उनका इस्तेमाल कब करना चाहती है. चौथा स्टेज इस स्टेज में एग्स को फर्टिलाइज करके यूट्रस में डाला जाता है, जब कोई महिला प्रेग्नेंट होने के लिए तैयार होती है. इसके लिए फ्रीज किए गए अंडों को सबसे पहले थॉइंग (बर्फ पिघलाने) के प्रोसेस से गुजारा जाता है. इसके बाद, लैब में इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन, तकनीक का इस्तेमाल करके पुरुष के स्पर्म के साथ उनका फर्टिलाइजेशन कराया जाता है. आखिर में, इससे बने फीटस को महिला के यूट्रस में डाल दिया जाता है. कितना दर्दनाक होता है पूरा प्रोसेसकई महिलाएं हार्मोनल स्टिम्युलेशन के कारण शारीरिक रूप से अनकंफर्टेबल महसूस होने की शिकायत करती हैं. हार्मोनल बदलावों के कारण पेट फूलना, मूड स्विंग्स, सिरदर्द और पेट के निचले हिस्से में भारीपन महसूस होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस हिस्से में मौजूद ओवरी का आकार सामान्य से कहीं ज्यादा बढ़ जाता है. ओवरी का आकार बढ़ने के कारण कुछ महिलाओं को अनकंफर्टेबल या चलने-फिरने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है. फिजिकल डिस्कम्फर्ट के अलावा, शरीर में तेजी से होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण मरीजों को इमोशनल स्ट्रेस का अनुभव होना भी आम बात है. ज्यादातर महिलाओं को थोड़ा -बहुत डिस्कम्फर्ट भी होता है, हालांकि डिस्कम्फर्ट का यह लेवल हर महिला के लिए अलग-अलग हो सकता है. फ्रीज एग से प्रेग्नेंसी हमेशा सक्सेसफुल रहती है?एक्सपर्ट बताते हैं कि अंडे के क्रायोप्रिजर्वेशन या एग फ्रीजिंग से भविष्य में प्रेग्नेंट होने की कोई गारंटी नहीं मिलती है. अंडे फ्रीज कराते समय महिला की उम्र, फ्रीज किए गए अंडों की क्वालिटी , और उसकी फर्टिलिटी से जुड़ी अन्य सामान्य स्वास्थ्य स्थितियां, ये सभी कारक फ्रीज किए गए अंडों से गर्भवती होने की सफलता में अहम भूमिका निभाते हैं. यह कोई पूरी तरह से सुरक्षित या परफेक्ट ऑप्शन नहीं है. आमतौर पर, जो महिलाए कम उम्र में अपने एग फ्रीज करवाती हैं, उन्हें ज्यादा उम्र में अंडे फ्रीज करवाने वाली महिलाओं की तुलना में बेहतर नतीजे मिलते हैं, खासकर फर्टिलाइजेशन और स्वस्थ बच्चे के जन्म की दर के मामले में. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
क्या तमिलनाडु में विजय लहर के पीछे प्रशांत किशोर हैं? जन सुराज नेता का पुराना वीडियो हुआ वायरल | भारत समाचार

आखरी अपडेट:04 मई, 2026, 16:09 IST प्रशांत किशोर ने कहा था कि वह तमिलनाडु में धोनी से ज्यादा लोकप्रिय होना चाहते हैं. चुनाव रणनीतिकार ने कहा था कि वह टीवीके को जीत दिलाएंगे। (तस्वीरें: पीटीआई फ़ाइल) 2026 के तमिलनाडु चुनाव में विजय की तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) के सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बाद जन सुराज पार्टी (जेएसपी) प्रमुख प्रशांत किशोर का एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में किशोर को थलपति विजय के साथ मंच साझा करते हुए दिखाया गया है, जो पिछले साल आयोजित टीवीके बैठक की तरह लग रहा था। यह भी पढ़ें | तमिलनाडु ने अपने ‘जन नायकन’ का ताज पहनाया: कैसे विजय सरकार बना सके | 3 परिदृश्यों की व्याख्या किशोर, जिन्होंने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक चुनावी रणनीतिकार के रूप में काम किया था और 2019 में आंध्र प्रदेश में जगन रेड्डी की जबरदस्त वृद्धि के पीछे थे, को यह कहते हुए सुना गया था कि वह तमिलनाडु में चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) के पूर्व कप्तान एमएस धोनी की तुलना में “अधिक लोकप्रिय” होना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “मुझे तमिलनाडु में सबसे लोकप्रिय बिहारी बनना है। धोनी तमिलनाडु में प्रशांत किशोर से ज्यादा लोकप्रिय हैं। कोई गलती न करें, अगले साल जब मैं योगदान दूंगा और आपको जीत दिलाने में मदद करूंगा, तब मैं लोकप्रियता में धोनी से आगे हो जाऊंगा।” चुनाव रणनीतिकार ने कहा था कि वह टीवीके को जीत दिलाएंगे। “अगर मैं अगले साल टीवीके को जीतने में मदद करता हूं, तो तमिलनाडु में कौन अधिक लोकप्रिय होगा? मेरे साथी बिहारी, एमएस धोनी, जो सीएसके को हर बार जीत दिलाते हैं या प्रशांत किशोर। तो आप देखिए, जीतने के लिए मेरी अपनी लड़ाई है। मुझे तमिलनाडु में सबसे लोकप्रिय बिहारी बनना है। इसलिए, मुझे धोनी के साथ प्रतिस्पर्धा करनी है, जो चेन्नई सुपर किंग्स को जीत दिलाते हैं। मैं आपके नेतृत्व में टीवीके को जीत दिलाऊंगा; इसलिए मैं यहां हूं, “उन्होंने कहा। यह भी पढ़ें | तमिलनाडु में विजय की ‘व्हिसल पोडु’ की एंट्री एमजीआर, एनटीआर के समानांतर है: दक्षिण में ‘स्टार पावर’ को डिकोड करना के साथ एक साक्षात्कार में थान्थी टीवी पिछले साल किशोर ने कहा था कि अगर एआईएडीएमके बीजेपी के साथ जाती है और डीएमके गठबंधन अपनी पकड़ बनाए रखता है तो विजय के पास तमिलनाडु जीतने का अच्छा मौका है। “अगर वह अकेले जाते हैं, तो उनके पास बहुत अच्छा मौका है। उनके पास तमिलनाडु को जीतने का अच्छा मौका है। इस वीडियो को रखें और नतीजे आने पर इसे चलाएं। उसके पास एक अच्छा मौका है, बशर्ते वह प्रयास और घंटों का प्रयास करे और अपने आसपास एक राजनीतिक बुनियादी ढांचा तैयार कर सके। अगर अन्नाद्रमुक भाजपा के साथ जाती है, तो द्रमुक गठबंधन वैसे ही बना रहेगा, और टीवीके अकेले लड़ेगी,” उन्होंने कहा था। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया क्या तमिलनाडु में विजय लहर के पीछे प्रशांत किशोर हैं? जन सुराज नेता का पुराना वीडियो वायरल अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)प्रशांत किशोर टीवीके वीडियो(टी)प्रशांत किशोर तमिलनाडु(टी)थलपति विजय पार्टी(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)टीवीके चुनाव 2026(टी)एमएस धोनी की लोकप्रियता(टी)चेन्नई सुपर किंग्स सीएसके(टी)वायरल राजनीतिक वीडियो
बीजेपी रणनीति कक्ष के अंदर: साइलेंट स्ट्राइक फोर्स जिसने बंगाल शो चुरा लिया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:04 मई, 2026, 16:05 IST पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम 2026: टीएमसी पर भाजपा की जीत के केंद्र में तीन सदस्यीय नेतृत्व है जिसमें सुनील बंसल, भूपेन्द्र यादव और अमित मालवीय शामिल हैं। 2021 विधानसभा चुनाव हार ने भाजपा की बंगाल इकाई के भीतर गहरे संरचनात्मक मुद्दों को उजागर कर दिया था। 2021 के बाद के चरण में रीसेट की मांग की गई। (पीटीआई) एक ऐसी पार्टी के लिए जिसे 2021 की हार के झटकों का सामना करना पड़ा, पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी का नए सिरे से जोर शोर या तमाशे से नहीं उभरा। इसे व्यवस्थित ढंग से, चुपचाप और समन्वय के उस स्तर के साथ इंजीनियर किया गया था जो अतीत में अक्सर संभव नहीं था। इस परिवर्तन के केंद्र में तीन सदस्यीय नेतृत्व का एक मजबूत केंद्र है: सुनील बंसल, भूपेन्द्र यादव और अमित मालवीय। साथ में, उन्होंने वह चीज़ तैयार की जिसे अंदरूनी सूत्र भाजपा का अब तक का सबसे अनुशासित बंगाल ऑपरेशन बताते हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में हार ने भाजपा की बंगाल इकाई के भीतर गहरे संरचनात्मक मुद्दों को उजागर कर दिया था – गुटबाजी, बूथ स्तर की गहराई की कमी और केंद्रीय करिश्मे पर अत्यधिक निर्भरता। कैलाश विजयवर्गीय के नेतृत्व में, पार्टी का तेजी से विस्तार हुआ लेकिन उस विकास को संस्थागत बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। 2021 के बाद के चरण में रीसेट की मांग की गई। वह रीसेट सुनील बंसल के रूप में सामने आया। सुनील बंसल: सिस्टम मैन भाजपा के भीतर अपनी संगठनात्मक सटीकता के लिए जाने जाने वाले बंसल बंगाल की राजनीतिक मशीनरी में कॉर्पोरेट जैसी व्यावसायिकता लेकर आए। उनका ध्यान सुर्खियां बटोरने वाले अभियानों पर नहीं बल्कि पार्टी को जमीनी स्तर से फिर से खड़ा करने पर था। बूथ कमेटियों का ऑडिट किया गया. डेटा सिस्टम को सुव्यवस्थित किया गया। जिला इकाइयों और केंद्रीय नेतृत्व के बीच फीडबैक लूप को कड़ा कर दिया गया। जोर छिटपुट लामबंदी से हटकर निरंतर संगठनात्मक उपस्थिति पर केंद्रित हो गया। परिणाम: एक पार्टी संरचना जो चुनाव-समय की लहर की तरह कम और एक स्थायी राजनीतिक तंत्र की तरह अधिक दिखती थी। भूपेन्द्र यादव: ग्राउंड जनरल यदि बंसल ने सिस्टम बनाया, तो भूपेन्द्र यादव ने यह सुनिश्चित किया कि वह जमीन पर टिके रहे। 2024 के अंत से लंबे समय तक बंगाल में डेरा डाले हुए, यादव ने दिल्ली के रणनीतिक इरादे और बंगाल की जमीनी हकीकत के बीच सेतु का काम किया। उनकी शैली कम-प्रोफ़ाइल लेकिन गहराई से हस्तक्षेप करने वाली रही है – समीक्षा बैठकें, निर्वाचन क्षेत्र-स्तरीय आकलन, और जाति और समुदाय की पहुंच का निरंतर अंशांकन। इस रिपोर्टर ने दिल्ली में सिर्फ 30 मिनट के नोटिस पर रात 9 बजे यादव द्वारा बुलाई गई बैठक के लिए एक शीर्ष भाजपा नेता की भीड़ देखी। उक्त नेता ने अपने रात्रिभोज की योजना को स्थगित कर दिया और भाग गए क्योंकि “यादव को देर से आने वालों से नफरत है”। यह क्रूर लग सकता है, लेकिन यादव खुद पर भी इसी तरह के मानदंड लागू करते हैं जिससे उनके सहकर्मी उनकी अनुशासन की भावना का सम्मान करते हैं। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि जब भाजपा तीव्र सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही थी, तब उन्हें मध्य प्रदेश में भाजपा को जीत दिलाने का काम सौंपा गया था। अमित मालवीय: तंत्रिका केंद्र कोई भी आधुनिक अभियान कथा नियंत्रण के बिना पूरा नहीं होता है, और यह जिम्मेदारी अमित मालवीय पर है। पारंपरिक संचार भूमिका के विपरीत, बंगाल में मालवीय की भागीदारी संदेश भेजने से कहीं आगे निकल गई है। उन्हें हर स्तर पर निर्णय लेने में शामिल किया गया है – उम्मीदवार की स्थिति, मुद्दे का विस्तार और त्वरित प्रतिक्रिया रणनीति। डिजिटल विमर्श को आकार देने से लेकर इसे जमीनी अभियानों के साथ जोड़ने तक, मालवीय प्रभावी रूप से ऑपरेशन का मुख्य केंद्र बन गए, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि पार्टी का संदेश तेज, सुसंगत और राजनीतिक रूप से संतुलित बना रहे। पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय बंगाली रैपर-कंटेंट निर्माता मांचू दादा (निहार बागची) और उनके ‘बंगाल में महिलाओं पर हमले’ विषयों को लें। जबकि उनके अन्य रैप को हजारों की संख्या में देखा जाता है, इस रैप को एक दिन में लाखों लोगों ने देखा, जो तुरंत लोगों को पसंद आया। भाजपा के बंगाल सह-प्रभारी के रूप में, मुख्यधारा के मीडिया द्वारा इस पर ध्यान दिए जाने से पहले ही मालवीय को समझ आ गया और उन्होंने सत्तारूढ़ टीएमसी पर सवाल उठाते हुए इस गैर-प्रसिद्ध रैपर के वीडियो को अपनी टाइमलाइन पर साझा किया। इन शीर्ष तीन के अलावा, भाजपा की जीत का श्रेय उन लोगों को दिया जा सकता है जो छह क्षेत्रों के प्रभारी थे। योजना के अनुसार, सबसे पहले News18 ने पिछले साल रिपोर्ट की थी, बंगाल को छह राजनीतिक क्षेत्रों में विभाजित किया गया था, प्रत्येक की देखरेख ऐसे नेताओं द्वारा की जाती थी जिनके पास या तो कठिन चुनावों में एक सिद्ध रिकॉर्ड है या जिन्होंने अन्य राज्यों में प्रमुख संगठनात्मक भूमिकाएँ संभाली हैं। रार बंगा बेल्ट: भाजपा के विस्तार की प्रयोगशाला पुरुलिया, बांकुरा और बर्धमान से युक्त यह क्षेत्र 2019 की बढ़त के बाद भाजपा का सबसे आशाजनक क्षेत्र था। बढ़त को मजबूत करने के लिए पार्टी ने छत्तीसगढ़ के संगठन महासचिव पवन साय को प्रभारी बनाया। उन्हें उत्तराखंड के मंत्री धन सिंह रावत द्वारा सहायता प्रदान की गई, जो दोहरे फोकस का संकेत था: संगठनात्मक अनुशासन और कल्याण-योजना प्रवेश। 2019 के आम चुनावों से पहले ही, बंगाल में भाजपा की पैठ पुरुलिया के माध्यम से हुई, जो भगवा पार्टी के लिए इस बेल्ट की क्षमता का संकेत देती है। लेकिन 2024 में, बीजेपी ने प्रमुख रार लक्ष्य – बांकुरा और बर्धमान – खो दिए। हावड़ा-हुगली-मेदिनीपुर त्रिभुज दिल्ली के संगठन महासचिव पवन राणा ने राजनीतिक रूप से अस्थिर इस बेल्ट का समग्र नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। इसके विशाल विस्तार के कारण, यह क्षेत्र भाजपा नेताओं के पास चला गया है। हावड़ा-हुगली की जिम्मेदारी हरियाणा के वरिष्ठ नेता संजय भाटिया को दी गई. सूत्रों ने कहा कि मेदिनीपुर का प्रभार उत्तर प्रदेश के मंत्री जेपीएस राठौड़ को दिया गया है, उन्होंने कहा कि दलबदलुओं और प्रतिष्ठा की राजनीति के युद्धक्षेत्र को प्राथमिकता वाले युद्ध क्षेत्र के रूप में
स्टालिन का पतन, ईपीएस का दबदबा – तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार कैसा प्रदर्शन कर रहे हैं

कोलाथुर – एमके स्टालिन/डीएमके: मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के 15 साल पुराने किले कोलाथुर ने एक आश्चर्यजनक फैसला सुनाया है। 86.12% मतदान के साथ, टीवीके के वीएस बाबू ने तीन बार के विधायक और मौजूदा सीएम को 7,700 से अधिक वोटों से हरा दिया है – जिससे ऐतिहासिक उलटफेर के साथ सीट पर डीएमके की पकड़ खत्म हो गई है। एडप्पादी – एडप्पादी के पलानीस्वामी / एआईएडीएमके: एआईएडीएमके महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के पलानीस्वामी अपने एडप्पादी निर्वाचन क्षेत्र में आराम से आगे हैं, जहां प्रमुख सीएम उम्मीदवारों की सीटों में सबसे अधिक 92.08% मतदान दर्ज किया गया। 12 राउंड की गिनती के बाद, ईपीएस 50,000 से अधिक वोटों से आगे है – दिन का प्रमुख प्रदर्शन। कराईकुडी – सीमन / एनटीके: शिवगंगा जिले में कराईकुडी, जहां एनटीके के मुख्य समन्वयक सीमान चुनाव लड़ रहे हैं, वहां 74.20% मतदान दर्ज किया गया – जो प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में सबसे कम है। सीमन लगभग 6,800 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर चल रहे हैं, वह टीवीके के टीके प्रभु से काफी पीछे हैं, जो आगे चल रहे हैं और मौजूदा कांग्रेस विधायक एस. मंगुड़ी से काफी पीछे हैं। पेरम्बूर – विजय / टीवीके: पेरम्बूर निर्वाचन क्षेत्र, उन दो सीटों में से एक जहां टीवीके नेता विजय चुनाव लड़ रहे हैं, वहां 89.74% मतदान हुआ। 8 राउंड की गिनती के बाद विजय लगभग 19,000 वोटों से आगे चल रहे हैं, डीएमके के आरडी शंकर पीछे चल रहे हैं। यह विजय की आज की सबसे आरामदायक लड़ाइयों में से एक बन रही है। तिरुचिरापल्ली पूर्व – विजय / टीवीके: तिरुचिरापल्ली पूर्व में – विजय का दूसरा निर्वाचन क्षेत्र – 81.77% मतदाताओं ने मतदान किया। विजय यहां भी डीएमके के इनिगो इरुदयाराज से 6,000 से अधिक वोटों से आगे चल रहे हैं, जो नवोदित पार्टी प्रमुख के लिए दोहरे निर्वाचन क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन की ओर इशारा करता है। सभी सीएम उम्मीदवारों के निर्वाचन क्षेत्रों में से, एडप्पादी पलानीस्वामी की सीट पर सबसे अधिक 92.08% मतदान हुआ और जीत का अंतर सबसे अधिक रहा। इस बीच, एमके स्टालिन के कोलाथुर ने दिन का सबसे बड़ा झटका दिया है – 86.12% मतदान के बावजूद मौजूदा मुख्यमंत्री को टीवीके के नवागंतुक वीएस बाबू ने हरा दिया है, जो तमिलनाडु के 2026 के चुनाव फैसले के निर्णायक क्षण को चिह्नित करता है।
राहुल गांधी का पीए बताकर उत्तराखंड की महिला से ठगी:टिकट दिलाने का आश्वासन देकर भरोसे में लिया, प्रदेश के बड़े नेताओं की सुनाई आवाज

देहरादून में ठग ने राहुल गांधी का पीए बताकर महिला से 25 लाख रुपए की धोखाधड़ी कर ली। आरोपियों ने विधानसभा चुनाव में टिकट दिलाने का भरोसा देकर महिला को झांसे में लिया। इस दौरान आरोपी ने महिला को प्रदेश के बड़े नेताओं की आवाज भी सुनाई। भरोसा जीतने के बाद अलग-अलग बहानों से उससे बड़ी रकम वसूली गई, जिसके बाद आरोपी लगातार टालमटोल करता रहा। पीड़िता के अनुसार, जब वादा पूरा नहीं हुआ तो महिला को ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है। 4 प्वाइंट्स में पढ़िए पूरा मामला… प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं की सुनाई आवाज पीड़िता भावना पांडे ने बताया कि 13 अप्रैल 2026 को आरोपी ने राहुल गांधी का पीए बताकर उनसे संपर्क किया। विश्वास दिलाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, यशपाल आर्य, हरक सिंह रावत और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की आवाज भी सुनाई। जिससे महिला आरोपी के झांसे में आ गई। आरोपियों ने पांच सितारा होटल में विधायकों के ठहरने और विधानसभा से जुड़े खर्च का हवाला देकर उनसे पैसे मांगे। झांसे में आकर दिए रुपए झांसे में आकर भावना पांडे ने अलग-अलग माध्यमों से कुल लगभग 25 लाख रुपये आरोपियों को दे दिए। इसमें बैंक ट्रांसफर, HDFC के जरिए भुगतान और नकद रकम शामिल है। जिसके बाद दीपक सेन नाम का व्यक्ति पीड़िता के ऑफिस पहुंचा और खुद को महाराष्ट्र विधायक का पीए बताकर नकद रकम भी ले गया। पैसे देने के बाद भी आरोपियों ने काम नहीं कराया और लगातार टालमटोल करते रहे। आरोपियों ने पैसे नहीं किए वापस रकम लेने के बाद आरोपी लगातार बहाने बनाते रहे और पैसा वापस नहीं किया। पीड़िता का आरोप है कि यह एक संगठित गिरोह है, जिसमें सोनिया नंदा, सुनीता कश्यप, मदन लाल और यशपाल बिष्ट जैसे नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने फोन के जरिए उसे विश्वास में लिया। आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पीड़िता ने पुलिस से भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी और ठगी गई रकम की बरामदगी की मांग की है। पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है और जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
तमिलनाडु चुनाव में थलापति विजय की जीत:बॉलीवुड और साउथ एक्टर्स ने दी बधाई; टाइगर श्रॉफ बोले- आप पर लोगों का यह भरोसा देखना अद्भुत

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों और रुझानों में तमिल एक्टर थलापति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) अपने पहले ही चुनाव में 110 सीटों पर बढ़त बनाकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इस जीत पर बॉलीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री के एक्टर्स ने विजय को बधाई देना शुरू कर दिया है। बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ ने लिखा, “विजय सर को बहुत बधाई। लोगों का आप पर यह भरोसा देखना अद्भुत है। आपके इस नए चैप्टर के लिए आपको और शक्ति मिले।” वहीं, तेलुगु स्टार नानी ने एक्स (X) पर लिखा, “पहले लोगों ने शक किया और अब ताज पहना दिया। अंडरडॉग का जीतना हमेशा एक ‘एब्सोल्यूट सिनेमा’ जैसा होता है। उम्मीद है तमिलनाडु के लोगों के लिए अब अच्छा समय आएगा।” फिल्मी सितारों ने बताया ‘ऐतिहासिक उपलब्धि’ एक्टर निखिल सिद्धार्थ ने विजय के साथ फोटो शेयर करते हुए लिखा कि सिनेमा इंडस्ट्री से निकलकर राजनीति में इतनी बड़ी छाप छोड़ना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। फिल्ममेकर वेंकट प्रभु ने विजय को ‘द ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम’ (GOAT) बताया है। वहीं मलयालम एक्टर अजू वर्गीस ने लिखा कि किस्मत भी बहादुर लोगों का साथ देती है। एक्टर सिबी सत्यराज ने भी सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर करते हुए लिखा, “ब्लास्टू! ब्लास्टू! अब सब अच्छा होगा।” पहले ही चुनाव में बहुमत के करीब विजय की पार्टी TVK ने अपने पहले ही चुनावी मुकाबले में 100 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया है। चुनाव आयोग के रुझानों के मुताबिक, पार्टी 110 सीटों पर आगे चल रही है। तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए 117 सीटों की जरूरत होती है और विजय की पार्टी इस जादुई आंकड़े के काफी करीब है। खास बात यह है कि TVK राज्य में सबसे ज्यादा वोट शेयर वाली पार्टी भी बन गई है। किसी नई पार्टी के लिए यह प्रदर्शन काफी बड़ा माना जा रहा है। एक्टिंग छोड़ राजनीति में रखा था कदम थलपति विजय ने साल 2024 की शुरुआत में अपनी पार्टी TVK के गठन का ऐलान किया था। उन्होंने साफ कर दिया था कि वे अब पूरी तरह से राजनीति में उतरेंगे और अपने एक्टिंग करियर को अलविदा कह देंगे। विजय की पार्टी ने राज्य में ‘बदलाव’ और ‘भ्रष्टाचार मुक्त शासन’ का नारा दिया था, जिसे जनता का भारी समर्थन मिला। तमिलनाडु की राजनीति में दशकों से द्रविड़ पार्टियों (DMK और AIADMK) का दबदबा रहा है, जिसे विजय ने कड़ी चुनौती दी है।
बिग बॉस फेस बसीर अली ने कैमरामैन को पीटा:दावा- पार्टी में शराब पीकर एक्ट्रेसेस से कर रहा था बदतमीजी, प्रिंस नरूला, शिव ठाकरे भी थे मौजूद

बिग बॉस 17 फेम बसीर अली का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो एक कैमरामैन को बुरी तरह पीटते हुए नजर आ रहे हैं। अफरा-तफरी के बीच बसीर अली काफी एग्रेसिव दिखे। इस दौरान वहां प्रिंस नरुला और शिव ठाकरे भी मौजूद रहे। सामने आए वीडियो में देखा जा रहा है कि बसीर अली ने कैमरामैन को थप्पड़ मारा और उसे घसीटा, जिसके बाद उस शख्स ने बसीर की तरफ बोतल फेंककर मारी। वहां मौजूद लोग भी दोनों को अलग करवाते नजर आए। कुछ देर बार पुलिस ने पहुंचकर मामला संभाला। दावा किया जा रहा है कि मारपीट का ये वायरल वीडियो प्रिंस नरुला के रेस्टोरेंट की ओपनिंग का है। बसीर के अलावा उस पार्टी में प्रिंस नरुला, शिव ठाकरे, स्प्लिट्सविला कंटेस्टेंट सौंदर्या शेट्टी और कियारा भी थे। जैसे ही सौंदर्या और कियारा पार्टी में पहुंचीं एक कैमरामैन ने उन्हें देखते ही उन पर आपत्तिजनक कमेंट्स किए। जब सौंदर्या ने ये बात बसीर को बताई, तो वो उनकी सिक्योरिटी के लिए हर बार उनके साथ बाहर जा रहे थे। एक दो बार फिर उस कैमरामैन ने बदतमीजी की। बसीर ने इस पर आपत्ति जताई थी। पार्टी खत्म होने के बाद जब बसीर कार की तरफ जाने लगे, तो वो कैमरामैन उन्हें देखकर गालियां देने लगा। ये देख बसीर ने उसे पीटना शुरू कर दिया। वीडियो में साथ देखा जा सकता है कि प्रिंस नरुला और शिव ठाकरे दूर खड़े झगड़ा देख रहे थे।
बिग बॉस फेस बसीर अली ने कैमरामैन को पीटा:दावा- पार्टी में शराब पीकर एक्ट्रेसेस से कर रहा था बदतमीजी, प्रिंस नरूला, शिव ठाकरे भी थे मौजूद

बिग बॉस 17 फेम बसीर अली का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो एक कैमरामैन को बुरी तरह पीटते हुए नजर आ रहे हैं। अफरा-तफरी के बीच बसीर अली काफी एग्रेसिव दिखे। इस दौरान वहां प्रिंस नरुला और शिव ठाकरे भी मौजूद रहे। सामने आए वीडियो में देखा जा रहा है कि बसीर अली ने कैमरामैन को थप्पड़ मारा और उसे घसीटा, जिसके बाद उस शख्स ने बसीर की तरफ बोतल फेंककर मारी। वहां मौजूद लोग भी दोनों को अलग करवाते नजर आए। कुछ देर बार पुलिस ने पहुंचकर मामला संभाला। दावा किया जा रहा है कि मारपीट का ये वायरल वीडियो प्रिंस नरुला के रेस्टोरेंट की ओपनिंग का है। बसीर के अलावा उस पार्टी में प्रिंस नरुला, शिव ठाकरे, स्प्लिट्सविला कंटेस्टेंट सौंदर्या शेट्टी और कियारा भी थे। जैसे ही सौंदर्या और कियारा पार्टी में पहुंचीं एक कैमरामैन ने उन्हें देखते ही उन पर आपत्तिजनक कमेंट्स किए। जब सौंदर्या ने ये बात बसीर को बताई, तो वो उनकी सिक्योरिटी के लिए हर बार उनके साथ बाहर जा रहे थे। एक दो बार फिर उस कैमरामैन ने बदतमीजी की। बसीर ने इस पर आपत्ति जताई थी। पार्टी खत्म होने के बाद जब बसीर कार की तरफ जाने लगे, तो वो कैमरामैन उन्हें देखकर गालियां देने लगा। ये देख बसीर ने उसे पीटना शुरू कर दिया। वीडियो में साथ देखा जा सकता है कि प्रिंस नरुला और शिव ठाकरे दूर खड़े झगड़ा देख रहे थे।









