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आप भी मच्छरों को भगाने के लिए जला रहे कॉइल? अंबाला में मौसम बदलते ही आई आफत

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Ambala News : अगर आपको भी रात में सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है, छाती में कसाव और गले से सीटी जैसी आवाज आने जैसी समस्या है, तो इस मौसम में सतर्क होने की जरूरत है. बढ़ते प्रदूषण और बदलती जीवनशैली के बीच एलर्जी और दमा तेजी से फैल रहा है. गर्मियों में तापमान बढ़ने के साथ परेशानी बढ़ जाती है. अंबाला की आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. मीनाक्षी शर्मा लोकल 18 से बताती हैं कि , मच्छरों से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली कॉइल और अगरबत्ती समस्या बढ़ सकते हैं. इनसे निकलने वाला धुआं सांस की नलियों को प्रभावित करता है.

अंबाला. बढ़ते प्रदूषण और बदलती जीवनशैली के बीच एलर्जी और दमा जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं. गर्मियां आते ही जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, दमा (अस्थमा) मरीजों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि थोड़ी सी सावधानी और सही दिनचर्या अपनाकर इन समस्याओं से बचा जा सकता है. अगर आपको भी रात में सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है, छाती में कसाव (जकड़न) व गले से सीटी जैसी आवाज आने जैसी समस्या है, तो इस मौसम में सतर्क होने की जरूरत है. अंबाला शहर नागरिक अस्पताल की आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. मीनाक्षी शर्मा लोकल 18 से बताती हैं कि मौसम परिवर्तन के कारण ही कई लोगों को श्वास से जुड़ी समस्या होने लगती हैं. ऐसे में एलर्जी और दमा के मरीजों को अपने आसपास के वातावरण और खान-पान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.

डॉ. मीनाक्षी बताती हैं कि आयुर्वेद में कहा गया है कि अगर आपको किसी भी चीज से समस्या है तो सबसे पहले आप उससे दूरी बनाएं, फिर जो टिप्स हैं उसे अपनाएं. एलर्जी का मुख्य कारण धूल, धुआं, परागकण और पालतू जानवरों के बाल होते हैं. मरीजों को इनसे दूरी बनाकर रखनी चाहिए. घर की नियमित सफाई बेहद जरूरी है ताकि धूल जमा न हो. घर में पालतू जानवर रखने से भी बचना चाहिए. उनके बाल और त्वचा के कण एलर्जी बढ़ा सकते हैं.

डॉ. मीनाक्षी के मुताबिक, मच्छरों से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली कॉइल और अगरबत्ती भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है. इनसे निकलने वाला धुआं सांस की नलियों को प्रभावित करता है, जिससे दमा के मरीजों की स्थिति बिगड़ सकती है. इसके बजाय प्राकृतिक उपाय अपनाना अधिक सुरक्षित है. एलर्जी और दमा के मरीजों को ठंडे पेय पदार्थ, फास्ट फूड और प्रिजर्वेटिव खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए. चॉकलेट, टॉफी, आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक जैसे पदार्थ शरीर में एलर्जिक प्रतिक्रिया को बढ़ा सकते हैं. इसके स्थान पर ताजे फल, हरी सब्जियां और हल्का भोजन लेना अधिक लाभकारी है.

पानी पीने का तरीका बदलें

पानी को उबालकर पिएं और गर्मी के मौसम में उबले हुए पानी को ठंडा होने के लिए रख सकते हैं, लेकिन नल का सीधा पानी नहीं पीना चाहिए. आयुर्वेद में कपूर की स्ट्रीम को काफी फायदेमंद बताया गया है. दाल चीनी और मेथी दाने का भी प्रयोग किया जा सकता है. लेमन ग्रास और तुलसी आयुर्वेद में अस्थमा से ग्रस्त मरीजों के लिए फायदेमंद है. घरों के आसपास पेड़-पौधे जरूर लगाएं. उससे भी शुद्ध हवा मिलती है.

About the Author

Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें

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अंबाला. बढ़ते प्रदूषण और बदलती जीवनशैली के बीच एलर्जी और दमा जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं. गर्मियां आते ही जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, दमा (अस्थमा) मरीजों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि थोड़ी सी सावधानी और सही दिनचर्या अपनाकर इन समस्याओं से बचा जा सकता है. अगर आपको भी रात में सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है, छाती में कसाव (जकड़न) व गले से सीटी जैसी आवाज आने जैसी समस्या है, तो इस मौसम में सतर्क होने की जरूरत है. अंबाला शहर नागरिक अस्पताल की आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. मीनाक्षी शर्मा लोकल 18 से बताती हैं कि मौसम परिवर्तन के कारण ही कई लोगों को श्वास से जुड़ी समस्या होने लगती हैं. ऐसे में एलर्जी और दमा के मरीजों को अपने आसपास के वातावरण और खान-पान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.

डॉ. मीनाक्षी बताती हैं कि आयुर्वेद में कहा गया है कि अगर आपको किसी भी चीज से समस्या है तो सबसे पहले आप उससे दूरी बनाएं, फिर जो टिप्स हैं उसे अपनाएं. एलर्जी का मुख्य कारण धूल, धुआं, परागकण और पालतू जानवरों के बाल होते हैं. मरीजों को इनसे दूरी बनाकर रखनी चाहिए. घर की नियमित सफाई बेहद जरूरी है ताकि धूल जमा न हो. घर में पालतू जानवर रखने से भी बचना चाहिए. उनके बाल और त्वचा के कण एलर्जी बढ़ा सकते हैं.

डॉ. मीनाक्षी के मुताबिक, मच्छरों से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली कॉइल और अगरबत्ती भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है. इनसे निकलने वाला धुआं सांस की नलियों को प्रभावित करता है, जिससे दमा के मरीजों की स्थिति बिगड़ सकती है. इसके बजाय प्राकृतिक उपाय अपनाना अधिक सुरक्षित है. एलर्जी और दमा के मरीजों को ठंडे पेय पदार्थ, फास्ट फूड और प्रिजर्वेटिव खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए. चॉकलेट, टॉफी, आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक जैसे पदार्थ शरीर में एलर्जिक प्रतिक्रिया को बढ़ा सकते हैं. इसके स्थान पर ताजे फल, हरी सब्जियां और हल्का भोजन लेना अधिक लाभकारी है.

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