दही प्याज की सब्जी रेसिपी: गर्मी में किचन से क्या चाहिए छुट्टी? बिना झंझट 5 मिनट में तैयार करें दही-प्याज की सब्जी, खाते ही चाटते रह जाएंगी उगलियां

सामग्री: 2 बड़े प्याज, 1 कप दही, 1 हरी मिर्च, 1/2 काली मिर्च, 1 चुटकी हींग, 1/2 हल्दी पाउडर, 1/2 बड़ी लाल मिर्च पाउडर, स्वादानुसार नमक, 1 बड़ी काली मिर्च तेल या घी, थोड़ा सा हरा धनिया छवि: फ्रीपिक बनाने की आसान विधि: सबसे पहले दही को अच्छे से फेंट लें ताकि गुठलियां न रहें। अब गैस पर पैन के बर्तन और उसमें शामिल तेल या घी गर्म करें। तेल गरम होने पर जीरा और हींग डालो। छवि: फ्रीपिक फिर कटे हुए प्याज और हरी मिर्च की संरचना 2 मिनट तक प्रभाव भून लें। प्याज को ज्यादा ब्राउन नहीं किया जा सकता। अब इसमें हल्दी, लाल मिर्च और नमक डालें। छवि: फ्रीपिक गैस के शेयर कर डेम और फेंटा हुआ दही डेस्टिनेशन स्माल्ट बने रहें ताकि दही फटे नहीं। गैस बंद करने के बाद 2-3 मिनट के लिए खाना बंद करें। ऊपर से हरा धनियां डालें और गर्मागर्म रोटी, पराठा या चावल के साथ परोसें. छवि: एआई जब ज्यादा मेहनत करने का मन न हो, तब ये सब्जी सिर्फ 5 मिनट में बन जाती है। यह सब्जी पेट पर भारी नहीं लगती और खाने में भी बेहद स्वादिष्ट होती है। छवि: एआई दही की तासीर अनमोल होती है, जो गर्मी में शरीर को राहत दिलाने में मदद करती है। घर में मौजूद सामान्य नाखून से ही यह टेस्टी रेसिपी तैयार हो जाती है। छवि: फ्रीपिक फ़्लोरिडा तो इसमें थोड़ा सा भी जीरा पाउडर ऊपर से डाला जा सकता है। ज्यादा गाढ़ी ग्रेवी पसंद हो तो थोड़ा बेसन बना सकते हैं। इसे सामान्य वृद्धि वाली दही के बजाय सामान्य वृद्धि वाली दही से सुनिश्चित करें। छवि: फ्रीपिक अगर आप गर्मी में आसान और स्वाद से भरपूर रेसिपी ढूंढ रहे हैं, तो दही-प्याज की सब्जी जरूर खरीदें। कम मेहनत में बनने वाली ये डिश पूरे परिवार को खूब पसंद आएगी। छवि: फ्रीपिक
‘आप मेरे से ही जूडो’: पीएम मोदी, रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद में साझा किए हल्के पल | भारत समाचार

आखरी अपडेट:10 मई, 2026, 18:39 IST पीएम मोदी ने कहा कि रेवंत रेड्डी का उनके साथ आना बेहतर है क्योंकि अगर केंद्र राज्य के विकास में उनका साथ देता है तो तेलंगाना को अपना आधा हिस्सा गंवाना पड़ेगा। पीएम मोदी और तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद में एक हल्का पल साझा किया। (एएनआई) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के साथ हल्के लहजे में बात की और उनसे राज्य के विकास के लिए केंद्र सरकार के साथ समन्वय करने का आग्रह किया, जिस पर दर्शकों ने खूब हंसी और उत्साह बढ़ाया। पीएम मोदी हैदराबाद इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एचआईसीसी) में लगभग 9,400 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जिसमें रेवंत रेड्डी, तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला, केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी और अन्य उपस्थित थे। पीएम मोदी ने कहा, “रेवंत जी ने कहा कि वह राजनीतिक मामलों पर चर्चा नहीं करेंगे, इसलिए मैं भी ऐसा नहीं करूंगा। मैं गैर-राजनीतिक मामलों पर बोलूंगा। मैं रेवंत रेड्डी को बताना चाहता हूं कि भारत सरकार ने 10 साल के शासन में गुजरात को जो भी दिया है, मैं आपको देने के लिए तैयार हूं।” “हालांकि, मेरी जानकारी के आधार पर, जैसे ही मैं ऐसा करता हूं, आपको वर्तमान में जो मिल रहा है वह आधा हो जाएगा। आप जहां पहुंचना चाहते हैं, वहां नहीं पहुंच पाएंगे। और इसलिए अच्छा है मेरे से ही जूडो। (आप जहां जाना चाहते हैं वहां नहीं पहुंच पाएंगे। इसलिए बेहतर होगा कि आप मेरे साथ जुड़ें,” उन्होंने हंसते हुए कहा। #घड़ी | हैदराबाद, तेलंगाना: प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं, “… मैं रेवंत रेड्डी को बताना चाहूंगा कि भारत सरकार ने 10 वर्षों के शासन में गुजरात को जो कुछ भी दिया है, मैं आपको देने के लिए तैयार हूं, लेकिन मेरे ज्ञान के आधार पर कि जैसे ही मैं ऐसा करूंगा, आप क्या हैं… https://t.co/t8yEOK08wx pic.twitter.com/hFkOVtyxjM– एएनआई (@ANI) 10 मई 2026 कार्यक्रम में रेड्डी और अन्य अतिथि भी दर्शकों की जोरदार तालियों के बीच पीएम मोदी की टिप्पणी पर हंसने लगे। इस बीच, पीएम मोदी ने वादा किया कि केंद्र तेलंगाना के त्वरित विकास के लिए अपना समर्थन देना जारी रखेगा, जिसे उन्होंने विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण बताया। यह भी पढ़ें: ‘संयम के साथ ईंधन का उपयोग करना समय की मांग है’: पीएम मोदी ने कहा कि भारत ऊर्जा सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है दूसरी ओर, रेवंत रेड्डी ने याद किया कि कैसे मुख्यमंत्री के रूप में मोदी के 10 साल के शासन के दौरान गुजरात विकास में देश के लिए एक रोल मॉडल बन गया और वह चाहते थे कि वही मदद तेलंगाना में भी दोहराई जाए। उन्होंने कहा, ”जब वह पीएम हैं, तो तेलंगाना के लोगों को मुझसे भी यही उम्मीद है कि आने वाले 10 वर्षों में, 2034 तक 1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था तक पहुंचने के लिए एक तेलंगाना मॉडल होगा।” मोदी ने हैदराबाद-पणजी आर्थिक गलियारे पर गुडेबेल्लूर से महबूबनगर तक चार लेन वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-167 और संगारेड्डी जिले के जहीराबाद औद्योगिक क्षेत्र सहित कई परियोजनाओं की आधारशिला रखी। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘आप मेरे से ही जूडो’: पीएम मोदी, रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद में साझा किए हल्के पल अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पीएम मोदी(टी)पीएम मोदी हल्के-फुल्के पल(टी)पीएम मोदी चुटकुले(टी)पीएम मोदी हैदराबाद भाषण(टी)रेवंत रेड्डी हंसे(टी)पीएम मोदी रेवंत रेड्डी मोमेंट(टी)हैदराबाद बुनियादी ढांचा परियोजनाएं
PM Modi Inaugurates Meditation Temple in Bengaluru

Hindi News National Art Of Living Turns 45: PM Modi Inaugurates Meditation Temple In Bengaluru बेंगलुरु2 घंटे पहले कॉपी लिंक बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए ध्यान मंदिर का उद्घाटन किया। ये कार्यक्रम आर्ट ऑफ लिविंग के 45 साल पूरे होने और संस्थापक श्री श्री रविशंकर के 70वें जन्मदिन के मौके पर आयोजित किया गया। इस दौरान शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण, जनजातीय कल्याण, स्वास्थ्य और डिजिटल साक्षरता से जुड़ी 9 नई सेवा परियोजनाओं की शुरुआत की गई। PM मोदी बोले- ध्यान मंदिर शांति का केंद्र बनेगा प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नया ध्यान मंदिर आने वाली पीढ़ियों के लिए शांति और सुकून का बड़ा केंद्र बनेगा। उन्होंने आर्ट ऑफ लिविंग के 45 साल के काम की सराहना करते हुए कहा कि सेवा भाव से किया गया हर प्रयास सफल होता है। पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत के लिए मानसिक रूप से शांत और सामाजिक रूप से जिम्मेदार युवाओं की जरूरत है। योग, ध्यान और मानसिक स्वास्थ्य की राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका है। कार्यक्रम में PM मोदी ने गुरुदेव श्री श्री रविशंकर से कहा कि मैं आपका ही हूं और जहां हूं, वहां भी आपकी वजह से हूं। इस पर मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों से हजारों स्वयंसेवक शामिल हुए। इनमें युवा, डॉक्टर, शिक्षक, कारोबारी और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। गुरुदेव बोले- भारत में नया आत्मविश्वास दिख रहा आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने कहा कि पिछले कुछ साल में देश में आत्मविश्वास बढ़ा है। भारत वैश्विक स्तर पर मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान के बाद देश ज्यादा साफ और व्यवस्थित दिखाई देता है। संस्था ने 90 लाख पौधे लगाए, 550 जेलों में कार्यक्रम चलाएंगे आर्ट ऑफ लिविंग ने बताया कि मिशन ग्रीन अर्थ के तहत पिछले एक साल में 19 राज्यों में 90 लाख से ज्यादा पौधे लगाए गए हैं। संगठन अब 45 लाख मोरिंगा पौधे और 87,500 पवित्र पेड़ लगाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। संगठन ने यह भी बताया कि जेल सुधार कार्यक्रम के तहत 550 जेलों में 1,000 कार्यक्रम चलाए जाएंगे। वहीं, महिला और युवा नेतृत्व कार्यक्रमों के जरिए हजारों लोगों को ट्रेनिंग दी जाएगी। ———– दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
PM Modi Inaugurates Meditation Temple in Bengaluru

Hindi News National Art Of Living Turns 45: PM Modi Inaugurates Meditation Temple In Bengaluru बेंगलुरु35 मिनट पहले कॉपी लिंक बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए ध्यान मंदिर का उद्घाटन किया। ये कार्यक्रम आर्ट ऑफ लिविंग के 45 साल पूरे होने और संस्थापक श्री श्री रविशंकर के 70वें जन्मदिन के मौके पर आयोजित किया गया। इस दौरान शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण, जनजातीय कल्याण, स्वास्थ्य और डिजिटल साक्षरता से जुड़ी 9 नई सेवा परियोजनाओं की शुरुआत की गई। PM मोदी बोले- ध्यान मंदिर शांति का केंद्र बनेगा प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नया ध्यान मंदिर आने वाली पीढ़ियों के लिए शांति और सुकून का बड़ा केंद्र बनेगा। उन्होंने आर्ट ऑफ लिविंग के 45 साल के काम की सराहना करते हुए कहा कि सेवा भाव से किया गया हर प्रयास सफल होता है। पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत के लिए मानसिक रूप से शांत और सामाजिक रूप से जिम्मेदार युवाओं की जरूरत है। योग, ध्यान और मानसिक स्वास्थ्य की राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका है। कार्यक्रम में PM मोदी ने गुरुदेव श्री श्री रविशंकर से कहा कि मैं आपका ही हूं और जहां हूं, वहां भी आपकी वजह से हूं। इस पर मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों से हजारों स्वयंसेवक शामिल हुए। इनमें युवा, डॉक्टर, शिक्षक, कारोबारी और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। गुरुदेव बोले- भारत में नया आत्मविश्वास दिख रहा आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने कहा कि पिछले कुछ साल में देश में आत्मविश्वास बढ़ा है। भारत वैश्विक स्तर पर मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान के बाद देश ज्यादा साफ और व्यवस्थित दिखाई देता है। संस्था ने 90 लाख पौधे लगाए, 550 जेलों में कार्यक्रम चलाएंगे आर्ट ऑफ लिविंग ने बताया कि मिशन ग्रीन अर्थ के तहत पिछले एक साल में 19 राज्यों में 90 लाख से ज्यादा पौधे लगाए गए हैं। संगठन अब 45 लाख मोरिंगा पौधे और 87,500 पवित्र पेड़ लगाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। संगठन ने यह भी बताया कि जेल सुधार कार्यक्रम के तहत 550 जेलों में 1,000 कार्यक्रम चलाए जाएंगे। वहीं, महिला और युवा नेतृत्व कार्यक्रमों के जरिए हजारों लोगों को ट्रेनिंग दी जाएगी। ———– दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
North Korea Nuclear Attack Threat | Kim Jong Un

प्योंगयांग45 मिनट पहले कॉपी लिंक उत्तर कोरिया ने अपने संविधान और परमाणु नीति में बड़ा बदलाव करते हुए नया प्रावधान जोड़ा है। अब अगर देश के सुप्रीम लीडर किम जोंग-उन की हत्या हो जाती है या किसी विदेशी हमले के दौरान वे लीडरशिप करने की हालात में नहीं रहते, तो उत्तर कोरिया तुरंत परमाणु हमला करेगा। ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बदलाव मार्च में तेहरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद किया गया। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई और कई सीनियर ईरानी अधिकारियों की मौत हो गई थी। दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी के मुताबिक, इन हमलों ने प्योंगयांग को सोचने पर मजबूर कर दिया और उत्तर कोरिया को डर सताने लगा कि भविष्य में ऐसा ‘डिकैपिटेशन स्ट्राइक’ यानी टॉप लीडरशिप को खत्म करने वाला हमला उसके खिलाफ भी हो सकता है। यह नया प्रावधान 22 मार्च को प्योंगयांग में शुरू हुए 15वीं सुप्रीम पीपुल्स असेंबली के पहले सत्र के दौरान अपनाया गया। बाद में दक्षिण कोरिया की नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस ने सीनियर सरकारी अधिकारियों को इस बदलाव की जानकारी दी। नॉर्थ कोरिया की 15वीं सुप्रीम पीपुल्स असेंबली (संसदीय सत्र) के दौरान देश के संविधान में बदलाव किया गया। क्यों बदली गई उत्तर कोरिया की परमाणु नीति? डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान पर हुए हमलों ने उत्तर कोरिया की लीडरशिप को झकझोर दिया। हमलों की तेजी और सटीकता देखकर प्योंगयांग को लगा कि विदेशी शक्तियां किम जोंग-उन और उत्तर कोरियाई मिलिट्री लीडरशिप के खिलाफ भी इसी तरह का ऑपरेशन कर सकती हैं। सियोल स्थित कूकमिन यूनिवर्सिटी में इतिहास और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर आंद्रेई लांकोव ने मीडिया से कहा कि ईरान पर हुआ ऑपरेशन उत्तर कोरिया के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत बन गया। लांकोव ने कहा कि ईरान एक वेक-अप कॉल था। उत्तर कोरिया ने देखा कि अमेरिका और इजराइल के डिकैपिटेशन हमले कितने प्रभावी थे, जिन्होंने तुरंत ईरानी लीडरशिप के बड़े हिस्से को खत्म कर दिया। अब उत्तर कोरिया बेहद डरा हुआ होगा। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है ऐसी नीति पहले अनौपचारिक रूप से मौजूद रही हो, लेकिन अब इसे संविधान का हिस्सा बना दिया गया है, इसलिए इसका महत्व बढ़ गया है। तेहरान में 28 फरवरी को ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के दफ्तर पर हमला किया गया था, जिसमें उनकी मौत हो गई थी। उत्तर कोरिया में हमला करना मुश्किल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ईरान के मुकाबले उत्तर कोरिया में ऐसा हमला करना कहीं ज्यादा मुश्किल होगा। उत्तर कोरिया दुनिया के सबसे बंद देशों में से एक है। वहां विदेशी डिप्लोमैट्स, सहायता कर्मियों और कारोबारियों पर कड़ी निगरानी रखी जाती है, जिससे खुफिया जानकारी जुटाना बेहद मुश्किल हो जाता है। लोकल ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइली खुफिया एजेंसियों ने ईरानी नेताओं पर नजर रखने के लिए हैक किए गए ट्रैफिक कैमरों और डिजिटल सर्विलांस सिस्टम का इस्तेमाल किया था। हालांकि प्योंगयांग में ऐसा करना बहुत कठिन होगा, क्योंकि उत्तर कोरिया में CCTV नेटवर्क सीमित है और वहां इंटरनेट सिस्टम पर सरकार का कड़ा कंट्रोल है। किम जोंग-उन अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर भी बेहद सख्त माने जाते हैं। वे आमतौर पर भारी हथियारों से लैस बॉडीगार्ड्स के बड़े ग्रुप के साथ यात्रा करते हैं और हवाई यात्रा से बचते हैं। इसके बजाय वे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दौरों के लिए बख्तरबंद ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं। फुटेज अप्रैल 2019 की है। उस समय भी किम जोंग ट्रेन से ही रूस दौरे पर गए थे। (क्रेडिट-ग्लोबल टाइम्स) उत्तर कोरिया को सैटेलाइट ट्रैकिंग तकनीक से डर प्रोफेसर लांकोव ने कहा कि उत्तर कोरिया अब पारंपरिक जासूसी से ज्यादा सैटेलाइट ट्रैकिंग तकनीक से डरता है। उन्होंने कहा- उनका (किम जोंग) सबसे बड़ा डर सैटेलाइट तकनीक से मिलने वाली जानकारी है। उनकी चिंता गलत भी नहीं है, क्योंकि किसी भी संघर्ष की शुरुआत में लीडरशिप को खत्म करना निर्णायक साबित हो सकता है। लांकोव के मुताबिक, अगर किम जोंग-उन पर हमला होता है तो उत्तर कोरिया की मिलिट्री लीडरशिप परमाणु जवाबी कार्रवाई के आदेश का पालन करेगी, क्योंकि वहां के अधिकारी किसी भी विदेशी हमले को देश के अस्तित्व के लिए खतरा मानते हैं। उन्होंने कहा- मुझे दक्षिण कोरिया की तरफ से ऐसे किसी हमले की संभावना नहीं दिखती, इसलिए किसी भी जवाबी कार्रवाई का निशाना अमेरिका होगा। उत्तर कोरिया और कौन से सैन्य कदम उठा रहा है? उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया पर दबाव बढ़ाते हुए बॉर्डर के पास लॉन्ग रेंज की आर्टिलरी सिस्टम तैनात करने की योजना भी घोषित की है। सरकारी समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) के मुताबिक, किम जोंग-उन ने हाल ही में एक हथियार फैक्ट्री का दौरा किया और वहां “नई प्रकार की 155 मिलीमीटर सेल्फ-प्रोपेल्ड गन-हाउइट्जर” के प्रोडक्शन का निरीक्षण किया। यह नया आर्टिलरी सिस्टम 60 किमी से ज्यादा दूरी तक हमला कर सकती है और इसे इसी साल दक्षिण कोरिया सीमा के पास तैनात किया जाएगा। इससे राजधानी सियोल सीधे हमले की जद में आ सकती है। KCNA ने किम जोंग-उन के हवाले से कहा कि नया हाउइट्जर सिस्टम हमारी सेना के जमीनी ऑपरेशन में महत्वपूर्ण बदलाव और बढ़त देगा। हाल के सालों में उत्तर और दक्षिण कोरिया के संबंध लगातार खराब हुए हैं, जबकि सियोल की तरफ से कई बार शांति प्रयास किए गए। अब उत्तर कोरिया खुलकर दक्षिण कोरिया को अपना मुख्य दुश्मन बताने लगा है और उसने अपने संविधान से कोरियाई एकीकरण से जुड़े संदर्भ भी हटा दिए हैं। उत्तर और दक्षिण कोरिया तकनीकी रूप से अब भी युद्ध की स्थिति में हैं, क्योंकि 1950-1953 का कोरियाई युद्ध केवल युद्धविराम समझौते के साथ खत्म हुआ था, किसी औपचारिक शांति संधि के साथ नहीं। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन हथियार बनाने वाली फैक्ट्री का दौरा करते हुए। यह तस्वीर 8 मई 2026 को उत्तर कोरियाई सरकार ने जारी की। नॉर्थ कोरिया के पास अमेरिका तक पहुंचने वाली मिसाइलें हैं फिलहाल नॉर्थ कोरिया के पास कुल कितनी मिसाइलें हैं, इसका सटीक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है। लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुमान के मुताबिक नॉर्थ कोरिया के पास सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जिनमें शॉर्ट रेंज, मीडियम रेंज और और लंबी दूरी (ICBM) की मिसाइलें शामिल हैं। ICBM यानी लंबी दूरी की मिसाइलें ऐसी हैं, जो अमेरिका तक पहुंचने
गर्मियों में परवल की चटनी रेसिपी: गर्मी में पेट को ठंडक दें परवल की चटनी, बच्चा भी मांगकर खाएंगे; नोट करें झटपट रेसिपी

सामग्री: 4-5 परवल, 1 छोटा प्याज, 3-4 लहसुन की कलियाँ, 2 हरी मिर्च, 1 छोटा मसाला अदरक का रस, 1 बड़ा मसाला हरा धनियां, स्वाद का मसाला नमक, 1/2 छोटा मसाला जीरा पाउडर, 1 मसाला मसाला का तेल छवि: फ्रीपिक मखमली बनाने की आसान विधि: सबसे पहले परवल को अच्छी तरह धो लें और छोटी-छोटी तस्वीरों में काट लें। अब एक पैन में थोड़ा सा सरसों का तेल गर्म करें और इसमें परवल कोला नर्म होने तक भून लें। छवि: एआई इसके बाद गैस बंद कर दी गई और परवल को ठंडा कर दिया गया। अब मसालों में परवल, प्याज, लहसुन, अदरक, हरी मिर्च और हरा धनियां शामिल हैं। इसमें नमक, सभी प्रकार के जीरा और नींबू का रस सभी अच्छे प्रकार के टुकड़े लें। छवि: एआई तैयार है आपका स्वादिष्ट परवल की रेसिपी। इसे ठंडा करके सर्व करें। फल तो छोटी दही में भी बनाये जा सकते हैं. सबसे ज्यादा तीखा पसंद हो तो लाल मिर्च दाल खा सकते हैं. छवि: एआई इसमें फ्रिज में ठंडा-ठंडा खाने का मजा ही अलग होता है। परवल की तासीर सार्वभौमिक मणि है, जिससे शरीर को गर्मी से राहत मिलती है। ब्रांडेड और आमिर-तीखे स्वाद की वजह से बच्चे भी इसे चाव से खाते हैं। छवि: मेटा एआई दानेदार अच्छी मात्रा में पाई जाती है, जो पेट को साफ रखने और कुत्ते को पकड़ने में मदद करती है। परवल कम कैलोरी वाली सब्जी है, इसलिए इसकी ताकत की कमी भी हो सकती है। छवि: सोशल मीडिया
Avika Gaur Back on TV for Khatron Ke Khiladi

13 मिनट पहले कॉपी लिंक ‘बालिका वधू’ बनकर घर-घर में अपनी पहचान बनाने वाली अविका गौर एक बार फिर छोटे पर्दे पर वापसी कर रही हैं। वह रोहित शेट्टी के स्टंट बेस्ड रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी’ में अपने डर का सामना करती नजर आएंगी। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अविका ने अपनी जिंदगी के सबसे बड़े खौफ, टीनेज के दौरान आए मानसिक बदलाव और खुद को संभालने की अपनी अनोखी तकनीक पर खुलकर बात की। अविका ने स्वीकार किया कि एक दौर ऐसा था जब वह खुद को नापसंद करने लगी थीं और आईना देखने से भी कतराती थीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी ‘रियल इमेज’ को लेकर भी दिलचस्प खुलासे किए। अविका गौर 7 साल की उम्र से काम करना शुरू कर दिया था। सवाल: आप एक बार फिर ‘खतरों के खिलाड़ी’ में नजर आने वाली हैं, क्या अब आप पूरी तरह ‘फियरलेस’ हो गई हैं? जवाब: सच कहूं तो मुझे इस ‘फियरलेस’ टैग से ही डर लगता है। मुझे बहुत सारी चीजों से डर लगता है। यह एक ऐसा शो है जहां आपको हाइट, पानी, कीड़े-मकोड़े हर तरह के डर का सामना करना पड़ता है। मैं बस यह उम्मीद कर रही हूं कि इस बार इन सबका सामना अच्छे से कर पाऊं। सवाल: आप पहले भी इस शो का हिस्सा रही हैं, क्या उस अनुभव से पुराने डर खत्म हुए? जवाब: कुछ भी खत्म नहीं हुआ, बल्कि मेरे डर और बढ़ गए हैं। सीजन-9 में जब मैं गई थी, तब मुझे लगता था कि मैं किसी चीज से नहीं डरती। वहां जाकर पता चला कि मुझे हाइट और पानी से बहुत डर लगता है। मैं बहुत ज्यादा ओवरकॉन्फिडेंस में थी और शायद इसीलिए पहली ही एलिमिनेशन में बाहर हो गई थी। सवाल: इस बार आपकी क्या तैयारी है? जवाब: इस बार मैं खुद को ज्यादा मैच्योर महसूस कर रही हूं। मेरी स्ट्रैटेजी बस इतनी है कि मैं ईमानदार रहूंगी। मैं यह सोचकर नहीं जाऊंगी कि सब कुछ आसान है। अगर मुझे डर लगेगा, तो मैं खुलकर बोलूंगी कि मुझसे नहीं हो रहा। मैं अपने डर का सामना एक ओपन माइंडसेट के साथ करना चाहती हूं। सवाल: आपने महज 7 साल की उम्र से काम करना शुरू कर दिया था, इतनी छोटी उम्र में कामयाबी के साथ क्या कोई खौफ भी आया? जवाब: शुरुआत से मेरे मन में बस एक ही डर था, मेरी जिंदगी में जो हो रहा है, वह सही है या गलत? 10 साल की उम्र में ‘बालिका वधू’ के बाद सब कुछ बदल गया। मैं हमेशा इस डर में रहती थी कि क्या मैं सच में एक्टिंग करना चाहती हूं या यह सब बस हो रहा है। सालों बाद मुझे समझ आया कि यही मेरा पैशन है। सवाल: आपने अपनी टीनेज के मुश्किल दौर का जिक्र किया था, वह क्या था? जवाब: हां, एक वक्त ऐसा था जब मैं खुद को बिल्कुल पसंद नहीं करती थी। मैं उस फेज से गुजर रही थी जहां मुझे आईने में खुद को देखना भी अच्छा नहीं लगता था। वह ‘सेल्फ-हेट’ का दौर था। लेकिन जैसे-जैसे मैं बड़ी हुई, मुझे समझ आया कि वह सिर्फ एक फेज था। मैंने खुद का ध्यान रखना शुरू किया और धीरे-धीरे मैं खुद को पसंद आने लगी। सवाल: आप खुद को मेंटली और इमोशनली कैसे बैलेंस रखती हैं? जवाब: मैंने एक बहुत अच्छी तकनीक अपनाई है। मैं दिन में 5 मिनट का एक टाइमर लगाती हूं। उस 5 मिनट में मुझे जिस चीज के बारे में शिकायत करनी होती है, रोना होता है या दुखी होना होता है, मैं कर लेती हूं। जैसे ही टाइमर बजता है, दुख वहीं खत्म। मैं फिर से नॉर्मल होकर काम पर लग जाती हूं। सवाल: क्या इतनी कम उम्र से पब्लिक आई में रहना किसी तरह का नुकसान भी पहुंचाता है? जवाब: बेशक, लोग आपको शुरुआत से देख रहे हैं तो आपकी हर चीज की स्क्रूटनी होती है। लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं। खासकर शो ‘पति पत्नी और पंगा’ के बाद, जहां मेरी लाइफ की पर्सनल चीजें भी सामने आ गईं। मुझे लगा कि अब जब सबको सब पता ही है, तो फिल्टर लगाने का क्या फायदा? अब मैं इंटरव्यू में भी वैसी ही रहती हूं जैसी असल जिंदगी में हूं। सवाल: इस बार जब आपने दोबारा शो पर जाने का फैसला लिया, तो घर वालों और आपके पार्टनर का क्या रिएक्शन था? जवाब: मेरे पापा को लगा कि मैं पागल हो गई हूं। वो सोच रहे थे कि पिछली बार जब चोट लगी थी, जिसके स्कार्स आज भी मेरे पैर पर हैं, तो मैं वापस वहां क्यों जाना चाहती हूं? लेकिन मेरे पार्टनर (मिलिंद) को मुझ पर मुझसे ज्यादा भरोसा था। उन्होंने मुझसे कहा कि तू कितना भी ड्रामा कर ले कि तुझे नहीं जाना, लेकिन तू जाएगी जरूर। और बिल्कुल वैसा ही हुआ। सवाल: इस सीजन में पुराने और नए खिलाड़ियों का कॉम्बिनेशन है, आप किसे लेकर ज्यादा एक्साइटेड हैं? जवाब: मैं पुराने लोगों को तो जानती हूं, जैसे विशाल, रुबीना, करण वाही ये सब बहुत अच्छा खेलते हैं। लेकिन मैं उन लोगों को जानने के लिए ज्यादा एक्साइटेड हूं जिन्हें मैं नहीं जानती, जैसे ओरी, हर्ष या रूहानिका। नए दोस्त बनाना और उनका माइंडसेट समझना मेरे लिए दिलचस्प होगा। सवाल: अक्सर लड़कियों को शारीरिक रूप से कमजोर माना जाता है, आप इस परसेप्शन को कैसे तोड़ेंगी? जवाब: पिछले सीजन्स में तेजू (तेजस्वी प्रकाश), निया शर्मा और जन्नत जुबैर ने साबित किया है कि लड़कियां किसी से कम नहीं हैं। उन्हें देखकर मुझे बहुत इंस्पिरेशन मिलता है। मैं इस बार जीत-हार के बारे में नहीं सोच रही, बस इतना चाहती हूं कि स्टंट के दौरान कॉकरोच मेरे सामने न आएं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Avika Gaur Back on TV for Khatron Ke Khiladi

40 मिनट पहले कॉपी लिंक ‘बालिका वधू’ बनकर घर-घर में अपनी पहचान बनाने वाली अविका गौर एक बार फिर छोटे पर्दे पर वापसी कर रही हैं। वह रोहित शेट्टी के स्टंट बेस्ड रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी’ में अपने डर का सामना करती नजर आएंगी। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अविका ने अपनी जिंदगी के सबसे बड़े खौफ, टीनेज के दौरान आए मानसिक बदलाव और खुद को संभालने की अपनी अनोखी तकनीक पर खुलकर बात की। अविका ने स्वीकार किया कि एक दौर ऐसा था जब वह खुद को नापसंद करने लगी थीं और आईना देखने से भी कतराती थीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी ‘रियल इमेज’ को लेकर भी दिलचस्प खुलासे किए। अविका गौर 7 साल की उम्र से काम करना शुरू कर दिया था। सवाल: आप एक बार फिर ‘खतरों के खिलाड़ी’ में नजर आने वाली हैं, क्या अब आप पूरी तरह ‘फियरलेस’ हो गई हैं? जवाब: सच कहूं तो मुझे इस ‘फियरलेस’ टैग से ही डर लगता है। मुझे बहुत सारी चीजों से डर लगता है। यह एक ऐसा शो है जहां आपको हाइट, पानी, कीड़े-मकोड़े हर तरह के डर का सामना करना पड़ता है। मैं बस यह उम्मीद कर रही हूं कि इस बार इन सबका सामना अच्छे से कर पाऊं। सवाल: आप पहले भी इस शो का हिस्सा रही हैं, क्या उस अनुभव से पुराने डर खत्म हुए? जवाब: कुछ भी खत्म नहीं हुआ, बल्कि मेरे डर और बढ़ गए हैं। सीजन-9 में जब मैं गई थी, तब मुझे लगता था कि मैं किसी चीज से नहीं डरती। वहां जाकर पता चला कि मुझे हाइट और पानी से बहुत डर लगता है। मैं बहुत ज्यादा ओवरकॉन्फिडेंस में थी और शायद इसीलिए पहली ही एलिमिनेशन में बाहर हो गई थी। सवाल: इस बार आपकी क्या तैयारी है? जवाब: इस बार मैं खुद को ज्यादा मैच्योर महसूस कर रही हूं। मेरी स्ट्रैटेजी बस इतनी है कि मैं ईमानदार रहूंगी। मैं यह सोचकर नहीं जाऊंगी कि सब कुछ आसान है। अगर मुझे डर लगेगा, तो मैं खुलकर बोलूंगी कि मुझसे नहीं हो रहा। मैं अपने डर का सामना एक ओपन माइंडसेट के साथ करना चाहती हूं। सवाल: आपने महज 7 साल की उम्र से काम करना शुरू कर दिया था, इतनी छोटी उम्र में कामयाबी के साथ क्या कोई खौफ भी आया? जवाब: शुरुआत से मेरे मन में बस एक ही डर था, मेरी जिंदगी में जो हो रहा है, वह सही है या गलत? 10 साल की उम्र में ‘बालिका वधू’ के बाद सब कुछ बदल गया। मैं हमेशा इस डर में रहती थी कि क्या मैं सच में एक्टिंग करना चाहती हूं या यह सब बस हो रहा है। सालों बाद मुझे समझ आया कि यही मेरा पैशन है। सवाल: आपने अपनी टीनेज के मुश्किल दौर का जिक्र किया था, वह क्या था? जवाब: हां, एक वक्त ऐसा था जब मैं खुद को बिल्कुल पसंद नहीं करती थी। मैं उस फेज से गुजर रही थी जहां मुझे आईने में खुद को देखना भी अच्छा नहीं लगता था। वह ‘सेल्फ-हेट’ का दौर था। लेकिन जैसे-जैसे मैं बड़ी हुई, मुझे समझ आया कि वह सिर्फ एक फेज था। मैंने खुद का ध्यान रखना शुरू किया और धीरे-धीरे मैं खुद को पसंद आने लगी। सवाल: आप खुद को मेंटली और इमोशनली कैसे बैलेंस रखती हैं? जवाब: मैंने एक बहुत अच्छी तकनीक अपनाई है। मैं दिन में 5 मिनट का एक टाइमर लगाती हूं। उस 5 मिनट में मुझे जिस चीज के बारे में शिकायत करनी होती है, रोना होता है या दुखी होना होता है, मैं कर लेती हूं। जैसे ही टाइमर बजता है, दुख वहीं खत्म। मैं फिर से नॉर्मल होकर काम पर लग जाती हूं। सवाल: क्या इतनी कम उम्र से पब्लिक आई में रहना किसी तरह का नुकसान भी पहुंचाता है? जवाब: बेशक, लोग आपको शुरुआत से देख रहे हैं तो आपकी हर चीज की स्क्रूटनी होती है। लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं। खासकर शो ‘पति पत्नी और पंगा’ के बाद, जहां मेरी लाइफ की पर्सनल चीजें भी सामने आ गईं। मुझे लगा कि अब जब सबको सब पता ही है, तो फिल्टर लगाने का क्या फायदा? अब मैं इंटरव्यू में भी वैसी ही रहती हूं जैसी असल जिंदगी में हूं। सवाल: इस बार जब आपने दोबारा शो पर जाने का फैसला लिया, तो घर वालों और आपके पार्टनर का क्या रिएक्शन था? जवाब: मेरे पापा को लगा कि मैं पागल हो गई हूं। वो सोच रहे थे कि पिछली बार जब चोट लगी थी, जिसके स्कार्स आज भी मेरे पैर पर हैं, तो मैं वापस वहां क्यों जाना चाहती हूं? लेकिन मेरे पार्टनर (मिलिंद) को मुझ पर मुझसे ज्यादा भरोसा था। उन्होंने मुझसे कहा कि तू कितना भी ड्रामा कर ले कि तुझे नहीं जाना, लेकिन तू जाएगी जरूर। और बिल्कुल वैसा ही हुआ। सवाल: इस सीजन में पुराने और नए खिलाड़ियों का कॉम्बिनेशन है, आप किसे लेकर ज्यादा एक्साइटेड हैं? जवाब: मैं पुराने लोगों को तो जानती हूं, जैसे विशाल, रुबीना, करण वाही ये सब बहुत अच्छा खेलते हैं। लेकिन मैं उन लोगों को जानने के लिए ज्यादा एक्साइटेड हूं जिन्हें मैं नहीं जानती, जैसे ओरी, हर्ष या रूहानिका। नए दोस्त बनाना और उनका माइंडसेट समझना मेरे लिए दिलचस्प होगा। सवाल: अक्सर लड़कियों को शारीरिक रूप से कमजोर माना जाता है, आप इस परसेप्शन को कैसे तोड़ेंगी? जवाब: पिछले सीजन्स में तेजू (तेजस्वी प्रकाश), निया शर्मा और जन्नत जुबैर ने साबित किया है कि लड़कियां किसी से कम नहीं हैं। उन्हें देखकर मुझे बहुत इंस्पिरेशन मिलता है। मैं इस बार जीत-हार के बारे में नहीं सोच रही, बस इतना चाहती हूं कि स्टंट के दौरान कॉकरोच मेरे सामने न आएं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
गर्मियों में चुकंदर पुदीना ड्रिंक: लू वाली हीट में कोल्ड ड्रिंक, चुकंदर-पुदीना ड्रिंक, चुकंदर ही चूसना ग्लो; आप भी कूल-कूल रहें

चुकंदर में आयरन, बीटरूट और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जहां पुदीना शरीर को ठंडक देने का काम करता है। छवि: फ्रीपिक सामग्री: 1 छोटा चम्मच, 1 छोटा चम्मच, 1 छोटा चम्मच, 1 छोटा चम्मच, 1 छोटा चम्मच, 1 चम्मच ठंडा पानी, 1 छोटा चम्मच, काला नमक, थोड़ा सा, जीरा पाउडर, बर्फ के टुकड़े छवि: एआई ड्रिंक बनाने की आसान विधि: सबसे पहले चुकंदर, खेड़ा और पुदीने की रोटी को अच्छी तरह धो लें। अब पिसाई यंत्र में डाला और साथ में ठंडा पानी अच्छी तरह से ब्लेंड कर लिया। छवि: एआई इसके बाद मिक्स तैयार करके अच्छा लें। अब इसमें नींबू का रस, काला नमक और अन्य जीरा पाउडर का मिश्रण अच्छी तरह से किया जा सकता है। तैयार है आपका मसाला और ताज़ा चुकंदर-पुदीना ड्रिंक। छवि: एआई इसे लैपटॉप में लगाएं और ऊपर से स्नो स्टोन ठंडा-ठंडा सर्व करें। यह ड्रिंक न सिर्फ आपको हीट में कूल रिटायरमेंट देता है, बल्कि स्किन को भी खरीदने में मदद करेगा। छवि: एआई इस ड्रिंक में मौजूद खेडा और पुदीना शरीर में पानी की कमी नहीं होती, जिससे आपको ताज़ा एहसास होता है। छवि: फ्रीपिक चुकंदर शरीर में खून बढ़ाने और कमजोरी को दूर करने में मदद करता है, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। गर्मी में रोज़ाना एक गिलास ड्रिंक पीने से शरीर को ठंडक मिलती है और आपको गंभीर तरोताजा महसूस होता है। छवि: एआई पुदीना और नींबू पेट को ठंडक देते हैं और गर्मी में होने वाली एसिडिटी या भारीपन की समस्या को कम करने में मदद करते हैं। हेल्थ और टेस्ट का ये कॉम्बिनेशन बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आए। छवि: फ्रीपिक चुकंदर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन स्किन को अंदर से फ्रेम बनाने में मदद मिलती है। नियमित सेवन से चेहरे पर नैचुरल चमक आती रहती है। छवि: फ्रीपिक ड्रिंक को हमेशा ताज़ा बनाये ही पियें। ज्यादा ठंडा पीने से परहेज, खासकर अगर गले की समस्या हो। स्वाद बढ़ाने के लिए ताड़ तो इसमें थोड़ा सा शहद भी मिलाया जा सकता है। छवि: फ्रीपिक
51-year-old Manjinder Nagra, who made rugby history, became Britain’s first Sikh sumo wrestler.

Hindi News Sports 51 year old Manjinder Nagra, Who Made Rugby History, Became Britain’s First Sikh Sumo Wrestler. गौरव मारवाह. चंडीगढ़16 मिनट पहले कॉपी लिंक तीन बच्चों की मां मनजिंदर अब सूमो रेसलिंग के रिंग में दुनिया को अपनी ताकत दिखाएंगी। जहां लोग 30 की उम्र में रिटायरमेंट का मन बनाने लगते हैं, वहीं पंजाब की बेटी मनजिंदर नागरा ने साबित कर दिया है कि हौसले की एक्सपायरी डेट नहीं होती। 1990 के दशक में ब्रिटेन की पहली सिख महिला रग्बी खिलाड़ी बनकर इतिहास रचने वाली 51 वर्षीय मनजिंदर अब एक नया अध्याय लिखने जा रही हैं। तीन बच्चों की मां मनजिंदर अब सूमो रेसलिंग के रिंग में दुनिया को अपनी ताकत दिखाएंगी। मनजिंदर ने रग्बी तब शुरू की थी, जब एशियाई मूल की महिलाओं के लिए यह खेल बिल्कुल अनजाना था। यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ में पढ़ाई के दौरान उन्होंने रग्बी को चुना और जल्द ही इंग्लैंड स्टूडेंट्स टीम में अपनी जगह पक्की कर ली। वे मैदान पर अकेली एशियाई खिलाड़ी थीं। मनजिंदर का यह सफर सिर्फ खेल बदलने की कहानी नहीं है। सिख गेम्स में एंबेसडर के तौर पर काम करते हुए उनकी मुलाकात सूमो चैंपियन मंदीप सिंह से हुई। उनकी मोटिवेशन पर मनजिंदर ने मार्च 2026 में सूमो इवेंट में कदम रखा। अप्रैल 2026 में उन्होंने अपनी एज कैटेगरी में नेशनल टाइटल जीता। अब जून में स्कॉटलैंड में होने वाली यूरोपियन सूमो रेसलिंग में वे इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करेंगीं। चुनौतियों पर भारी जीत मनजिंदर कहती हैं- दक्षिण एशियाई लड़कियों के लिए ड्रेस कोड और पारिवारिक दबाव जैसी कई बाधाएं हैं। अगर हम कोशिश नहीं करेंगे, तो कभी पता नहीं चलेगा कि हम क्या कर सकते हैं। बेटियों के लिए खोला रास्ता: 6 से 80 खिलाड़ियों तक का सफर मनजिंदर ने लॉ में करियर बनाया और अन्य लड़कियों के लिए भी रास्ता खोला, ताकि वे सपने पूरे कर सकें। – 2016 में शुरुआत में उन्होंने ‘होव रग्बी क्लब’ में लड़कियों के सेक्शन की शुरुआत की। – 6 लड़कियों से शुरू हुआ यह सफर 80 से ज्यादा विमन प्लेयर्स तक पहुंच चुका है। – वे हंगलटन एंड नॉल प्रोजेक्ट के तहत महिलाओं के लिए ‘वॉकिंग रग्बी’ ग्रुप भी चलाती हैं। ये भी सफलताएं मिल चुकी हैं मनजिंदर को – वे सिख गेम्स (2024) की ग्लोबल एंबेसडर रही हैं। गेम्स को प्रमोट किया। – क्रिकेट डिसिप्लिन पैनल की मेंबर के तौर पर भी काम किया है। – वे युवाओं के लिए मोटिवेशनल स्पीकर और मेंटॉर भी हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔








