40°C में भी नहीं खलेगी गर्मी, रोज घर से निकलने से पहले पिएं ये ड्रिंक, मिलेगी दूध की भी शक्ति

Last Updated:May 10, 2026, 16:05 IST Body Cooling Drink Recipe: गर्मी में ठंडक महसूस करने के लिए एसी, कूलर, बर्फ और ठंडा पानी ही जरूरी नहीं होता है. डाइट में ठंडी तासीर वाले खानपान को शामिल करना जरूरी है. यहां हम आपको एक ऐसे कूलिंग ड्रिंक के बारे में बता रहे हैं, जिसे दशकों से लोग गर्मी के दिनों में शरीर को ठंडा रखने के लिए पीते आ रहे हैं. ख़बरें फटाफट गर्मी के मौसम में लोग अक्सर ठंडा महसूस करने के लिए बाजार में मिलने वाले कोल्ड ड्रिंक्स पीते हैं, लेकिन हमारे पारंपरिक देसी पेय शरीर को ज्यादा फायदा पहुंचाते हैं. भारत में सदियों से ऐसे कई घरेलू ड्रिंक्स बनाए जाते रहे हैं, जो स्वाद के साथ सेहत का भी ध्यान रखते हैं. रागी अंबली उन्हीं में से एक ड्रिंक है. यह दक्षिण भारत का बहुत पुराना और लोकप्रिय पेय है, जिसे खासतौर पर तेज गर्मी के दिनों में पिया जाता है. कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में लोग लंबे समय से इस ड्रिंक को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाते आए हैं. इसका इतिहास 200 साल पुराना बताया जाता है. ये ड्रिंक 40 डिग्री के तापमान में भी शरीर को ठंडा रखने में मददगार होती है. आज भी कई परिवार इस पारंपरिक रेसिपी को पसंद करते हैं. रागी अंबली के फायदेरागी अंबली सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं, बल्कि पोषण से भरपूर भी होती है. रागी में कैल्शियम काफी मात्रा में पाया जाता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है. कहा जाता है कि इसमें गाय के दूध से कई गुना ज्यादा कैल्शियम होता है. इसके अलावा यह पाचन को बेहतर बनाता है और शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देता है. गर्मियों में इसे पीने से शरीर ठंडा रहता है और थकान कम महसूस होती है. यही कारण है कि इसे प्राकृतिक कूलिंग ड्रिंक भी कहा जाता है. रागी अंबली बनाने की रेसिपीसामग्रीरागी का आटापानीखट्टा दहीअदरकहरी मिर्चप्याजकरी पत्ताधनियानमक विधि– सबसे पहले रागी के आटे को ठंडे पानी में अच्छे से घोल लिया जाता है ताकि उसमें गांठें न रहें. फिर पानी उबालकर उसमें यह घोल मिलाया जाता है और लगातार चलाते हुए पकाया जाता है. कुछ देर बाद यह गाढ़ा हो जाता है.– जब मिश्रण ठंडा हो जाए, तब उसके छोटे-छोटे गोले बना लिए जाते हैं. इन गोलों को पानी में डालकर रातभर के लिए रखा जाता है ताकि उनमें हल्का फर्मेंटेशन हो सके. सुबह इन्हें पानी में अच्छी तरह मिलाकर खट्टा दही डाला जाता है.– इसके बाद स्वाद बढ़ाने के लिए अदरक, प्याज, हरी मिर्च, करी पत्ता और धनिया मिलाया जाता है. आखिर में नमक डालकर इसे ठंडा-ठंडा पिया जाता है.– अगर इसे मिट्टी के बर्तन में तैयार किया जाए, तो इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. मिट्टी का बर्तन ठंडक बनाए रखने में मदद करता है और फर्मेंटेशन भी अच्छे से होता है. इससे रागी अंबली में हल्का देसी स्वाद आ जाता है, जो इसे और खास बना देता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi
'एक था टाइगर' लिखने वाले नीलेश मिश्रा का इंटरव्यू:‘कूद’ के जरिए मैं एक्टिंग के किंडरगार्टन में आया, शोहरत ही अंतिम लक्ष्य नहीं

पत्रकार, कहानीकार, गीतकार और अब अभिनेता के तौर पर नई पारी शुरू कर चुके नीलेश मिश्रा इन दिनों फिल्म ‘कूद’ को लेकर चर्चा में हैं। यह उनके यू-ट्यूब चैनल पर रिलीज हुई है। इस पर उन्होंने खुलकर बातचीत की… क्या एक्टिंग हमेशा से आपके सपनों का हिस्सा थी? सच कहूं तो मैंने कभी खुद को अभिनेता के तौर पर देखा ही नहीं था। कॉलेज के दिनों में एक नाटक लिखा था। उसमें मुख्य भूमिका एक दोस्त को करनी थी, लेकिन आखिरी वक्त पर उसने मना कर दिया। तब मजबूरी में मुझे खुद मंच पर उतरा। उसके बाद जीवन रेडियो, लेखन और कहानियों में आगे बढ़ गया। फिर एक बार विशाल भारद्वाज ने एक मुलाकात में कहा कि अभिनय में 60 प्रतिशत हिस्सा आवाज का होता है। अब जब ‘कूद’ के जरिए कैमरे के सामने आया हूं तो लगता है कि मैं अभी एक्टिंग के किंडरगार्टन में हूं। फिल्म के विषय पर आपके क्या विचार हैं? ‘अपनी मर्जी की मौत’ का अधिकार एक बहुत ही जटिल और दार्शनिक बहस है। जब कोई व्यक्ति किसी रिश्ते में होता है, तो सामने वाला उसमें अपनी संवेदनाएं और जीवन का हिस्सा निवेश करता है। मेरा मानना है कि हमें अपनी मर्जी की मौत के बजाय अपनी मर्जी की जिंदगी की तलाश करनी चाहिए। आपने ‘महारानी’ जैसी चर्चित वेब सीरीज छोड़ दी थी। आखिर ऐसा क्यों किया? ‘महारानी’ सीरीज का प्रस्ताव आया तो मैं लखनऊ से मुंबई गया, लेकिन मेरी एक शर्त थी कि स्क्रीन पर गाली-गलौज नहीं करूंगा। वर्कशॉप के पहले दिन ही एहसास हुआ कि ओटीटी कंटेंट की मांग मेरी ‘लक्ष्मण रेखा’ के बाहर हैं तो मैंने उसी शाम मुकेश छाबड़ा से मुक्त करने की विनती कर दी थी। आज गालियों और आक्रामक भाषा को ‘रियलिज्म’ भी तो कहा जाता है? मेरी परवरिश, संवेदनाएं और भाषा अलग है। मेरा मानना है कि शालीनता भी उतनी ही प्रभावशाली होती है। संवाद की ताकत सिर्फ गाली में नहीं, भाव में भी होती है। अगर मैं अपने मन के खिलाफ जाकर कुछ करूंगा तो वह ईमानदार अभिनय नहीं रह जाएगा। आपकी सफलता का रहस्य क्या है? मेरी सबसे बड़ी ताकत है- ‘किसी चीज के बारे में पहले से न जानना’। जब मैंने रेडियो पर कहानियां सुनाना शुरू किया, मुझे नहीं पता था कि यह कैसे होता है। जब ‘गांव कनेक्शन’ शुरू किया, तो मुझे बिजनेस की जानकारी नहीं थी। यह मेरे लिए एक बिजनेस नहीं, बल्कि ‘मिशन’ था। बस मुझे यह पता था कि गांवों की आवाज को मंच देना है। मैंने अपनी सारी जमा-पूंजी, अपना घर, सब कुछ उसमें लगा दिया। जब कैमरा के सामने इंटरव्यू लेना शुरू किया था तो मुझे कैमरा एंगल्स का ज्ञान नहीं था। चूंकि मुझे पता नहीं था कि यह कैसे किया जाता है, इसलिए मैंने इसे अपने तरीके से किया। यही अनभिज्ञता ही मुझे नए प्रयोग करने की आजादी देती है। मेरा जीवन एक खूबसूरत जर्नी है, जिसे मैं अपनी शर्तों और सादगी के साथ जी रहा हूं। आपके लिए जीवन की सबसे बड़ी विरासत क्या है। लोग आपको कैसे याद रखें? जब मैं पीछे मुड़कर देखूं तो अफसोस कम से कम हो। लोग मुझे एक ईमानदार इंसान और संवेदनशील रचनाकार के रूप में याद रखें। शोहरत आए या न आए, आपकी प्रामाणिकता, शालीनता और ईमानदारी ही अंत में असली विरासत बनती है।
पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी I GIMS Greater Noida

Last Updated:May 10, 2026, 15:34 IST ग्रेटर नोएडा के गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, जिम्स में बच्चों के लिए एडवांस पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी यूनिट शुरू की गई है. अब हड्डियों और जोड़ों की गंभीर समस्याओं से जूझ रहे बच्चों को सरकारी अस्पताल में ही आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की मदद से बेहतर इलाज मिल सकेगा. इस सुविधा से खासतौर पर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. ग्रेटर नोएडा. अब बच्चों के इलाज के लिए लोगों को प्राइवेट अस्पतालों के महंगे खर्च और लंबी भागदौड़ का सामना कम करना पड़ेगा. जिम्स हॉस्पिटल में बच्चों के लिए एडवांस पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी यूनिट की शुरुआत की गई है. इस नई हाईटेक सुविधा के शुरू होने से हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे बच्चों को अब सरकारी अस्पताल में ही आधुनिक इलाज मिल सकेगा. जिम्स के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश गुप्ता ने बताया कि नई यूनिट में बच्चों की सर्जरी के लिए आधुनिक मशीनें और अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जिनकी मदद से जटिल ऑपरेशन भी आसानी से किए जा सकेंगे. उन्होंने बताया की यूनिट में हाई-स्पीड इलेक्ट्रिक ड्रिल सिस्टम, पीडियाट्रिक हिप प्लेटिंग सेट, स्मॉल बोन ड्रिल सिस्टम और पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक इंस्ट्रूमेंट्स जैसी आधुनिक सुविधाएं स्थापित की गई हैं. इन उपकरणों के आने से बच्चों की हड्डियों की सर्जरी पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और बेहतर तरीके से हो सकेगी. खास बात यह है कि इन सेवाओं का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी मिलेगा, जो अब तक महंगे प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर थे. देश में मेडिकल डिवाइस की तेजी से बढ़ रही है मांग उन्होंने कहा कि देश में मेडिकल डिवाइस की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अभी भी बड़ी मात्रा में उपकरण विदेशों से मंगाने पड़ते हैं. ऐसे में सरकार मेडिकल सेक्टर को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि सेक्टर-28 में मेडिकल डिवाइस पार्क विकसित करने की योजना पर भी काम चल रहा है, जिससे आने वाले समय में चिकित्सा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और आधुनिक तकनीक आसानी से उपलब्ध हो सकेगी. उन्होंने यह भी कहा कि हमारा उद्देश्य है कि हर जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों, ताकि लोगों को इलाज के लिए बड़े शहरों या निजी अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े. जिम्स हॉस्पिटल के ऑर्थो डिपार्टमेंट के प्रोफेसर हेड विकास सक्सेना ने बताया कि इस यूनिट से हर साल एक हजार से अधिक बच्चों को फायदा मिलने की संभावना है. जन्मजात हड्डी संबंधी समस्याएं, दुर्घटनाओं में लगी चोटें और ऑर्थोपेडिक बीमारियों से पीड़ित बच्चों का इलाज अब बेहतर तरीके से हो सकेगा. उन्होंने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि समय पर इलाज मिलने से बच्चों को भविष्य में होने वाली गंभीर परेशानियों से भी बचाया जा सकेगा. अस्पताल में शुरू हुई इस नई सुविधा को लेकर मरीजों और उनके परिजनों में भी खुशी का माहौल है. लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा मिलने से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी. अब बच्चों के इलाज के लिए महंगे प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर लगाने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाएगी. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Greater Noida,Gautam Buddha Nagar,Uttar Pradesh
ISI से जुड़े MP के 3 युवक गिरफ्तार:दिल्ली पुलिस का खुलासा- मंदिर, ढाबा और सैन्य कैंप उड़ाने वाले थे, पाकिस्तान भेजी तस्वीरें

दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े होने का दावा करते हुए एमपी के तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि ये लोग दिल्ली का ऐतिहासिक मंदिर, दिल्ली-सोनीपत हाईवे स्थित एक ढाबा और हरियाणा का सैन्य कैंप उड़ाने वाले थे। इनकी पहचान टीकमगढ़, नेगुवां (पृथ्वीपुर थाना) निवासी अनमोल राय (24), ग्वालियर, डबरा निवासी राजवीर (21) और विवेक बंजारा (19) के रूप में की गई है। तीनों को दिल्ली पुलिस ने उनके गांव से गिरफ्तार किया और अपने साथ ले गई। आरोपियों के फोन से कई संदिग्ध ई-मेल मिले एसीपी स्पेशल सेल दिल्ली पीएस कुशवाहा के मुताबिक, तीनों ही आरोपी गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। तीनों के मोबाइल के ऑडियो, वीडियो कॉल से संदिग्ध नंबरों पर बात किए जाने, सोशल मीडिया से खास स्थानों के तस्वीरें पाकिस्तान भेजे जाने की पुष्टि हुई है। आरोपियों के मोबाइल से कई संदिग्ध ई-मेल भी मिले हैं। पुलिस यह पता लगा रही है कि आरोपियों को आतंकी साजिश में जोड़ने के एवज में क्या मिला था। तीनों की गिरफ्तारी शुक्रवार को हुई। तीनों दिल्ली में मजदूरी कर चुके हैं। गैंग बस्ट ऑपरेशन 2.0 में खुलासा दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ‘गैंग बस्ट ऑपरेशन 2.0’ के तहत विभिन्न राज्यों से शाहजाद भट्टी मॉड्यूल से जुड़े 9 संदिग्ध ऑपरेटिव्स को गिरफ्तार किया था। इनसे पूछताछ में जांच एजेंसियों को पता चला कि आरोपियों में से एक ने दिल्ली के एक ऐतिहासिक मंदिर की रेकी की थी और परिसर की तस्वीरें सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स को भेजी थीं। मॉड्यूल की योजना मंदिर में तैनात पुलिस और अर्धसैनिक बलों को निशाना बनाने तथा फायरिंग कर दहशत फैलाने की थी। ढाबे पर ग्रेनेड से हमला करने का था टास्क आरोपियों को दिल्ली-सोनीपत हाईवे पर स्थित एक प्रसिद्ध ढाबे पर ग्रेनेड से हमला करने का भी टास्क दिया गया था। यह ढाबा प्रतिदिन हजारों लोगों की आवाजाही वाला स्थान माना जाता है। जांच एजेंसियों का मानना है कि हमले का मकसद बड़े पैमाने पर नुकसान और जनहानि करना था। सैन्य कैंप और आसपास के वीडियो बनाए इसके अलावा हरियाणा के हिसार स्थित एक सैन्य कैंप की भी रेकी किए जाने की बात सामने आई है। आरोपियों ने कैंप और आसपास के इलाके के वीडियो बनाकर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को भेजे थे। पुलिस के अनुसार, उत्तर प्रदेश के कुछ थाने भी मॉड्यूल के निशाने पर थे। स्पेशल सेल अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर मॉड्यूल के अन्य नेटवर्क, फंडिंग और सीमा पार संपर्कों की जांच कर रही है।
रुबीना दिलाइक ने पहले ठुकराया था ‘खतरों के खिलाड़ी 15’:परिवार से दूर नहीं जाना चाहती थीं, जानिए फिर कैसे बदला फैसला

टीवी एक्ट्रेस रुबीना दिलाइक एक बार फिर टीवी शो ‘खतरों के खिलाड़ी’ में वापसी करने जा रही हैं। रुबीना इससे पहले शो के 12वें सीजन में भाग ले चुकी हैं। अब वह एक बार फिर ‘खतरों के खिलाड़ी’ के सीजन 15 में नजर आएंगी। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में रुबीना ने बताया कि मां बनने के बाद उनकी जिंदगी और सोच दोनों बदल चुकी हैं। बातचीत में रुबीना ने इंडस्ट्री में अपने शुरुआती संघर्ष, लोगों की जजमेंट, स्ट्रॉन्ग महिलाओं को लेकर बनी सोच और अपने डर पर भी बात की। सवाल: आप हमेशा एक स्ट्रॉन्ग, बोल्ड और टफ पर्सनैलिटी के तौर पर देखी जाती हैं। क्या इस इमेज का प्रेशर भी रहता है? जवाब: अगर मैं यह सोचने लगूं कि लोग मुझसे क्या उम्मीद कर रहे हैं, तो वह प्रेशर मेरे गेम को खराब कर सकता है। मुझे लगता है कि आपको बस अपनी जगह समझनी चाहिए और उसी सम्मान के साथ खेलना चाहिए। अगर मैं एक्सपेक्टेशन का बोझ लेकर स्टंट करूंगी, तो वह मुझे और ज्यादा परेशान करेगा। इसलिए जितना हो सके, उस प्रेशर को खुद से दूर रखना जरूरी है। सवाल: क्या कॉम्पिटिटिव होना इस शो के लिए जरूरी है? जवाब: बिल्कुल। हर इंसान के अंदर एक कॉम्पिटिटिव स्पिरिट होती है। कोई खुद से मुकाबला करता है, कोई दूसरों से। जब आप ऐसे शो में जाते हैं, तो आप अपनी बेस्ट फिजिकल और मेंटल कैपेसिटी दिखाना चाहते हैं। अगर आपके अंदर कॉम्पिटिटिवनेस नहीं है, तो शायद आप कहीं न कहीं फ्लैट पड़ जाएंगे। सवाल: कुछ लोगों का परसेप्शन है कि मां बनने के बाद महिलाएं कमजोर हो जाती हैं, आप इसे कैसे देखती हैं? जवाब: मुझे लगता है कि मदरहुड कमजोरी नहीं, बल्कि बहुत बड़ी ताकत है। लोग कहते हैं कि अब शायद आपके अंदर पहले जैसी स्टैमिना या ताकत नहीं होगी, लेकिन वही बातें मुझे खुद को साबित करने का और मोटिवेशन देती हैं। ताकत सिर्फ फिजिकल नहीं होती, मानसिक मजबूती और रेजिलिएंस भी बहुत मायने रखता है और एक मां के अंदर यह ताकत और ज्यादा बढ़ जाती है। सवाल: डर को आप कैसे देखती हैं? जवाब: डर ही तय करता है कि आप कितने मजबूत हैं। जिंदगी में हर इंसान किसी न किसी डर से लड़ रहा होता है। सवाल यह नहीं है कि डर है या नहीं, सवाल यह है कि आप डर को खुद पर हावी होने देते हैं या खुद उस डर पर जीत हासिल करते हैं। सवाल: इंडस्ट्री में शुरुआती दौर में सबसे बड़ा डर क्या था? जवाब: मैं गांव और बहुत कंजर्वेटिव माहौल से आती हूं। उस समय इस इंडस्ट्री को बहुत अच्छी नजर से नहीं देखा जाता था। जब मैं पहली बार मुंबई आई, तो मेरे अंदर बहुत डर था। पढ़ाई, करियर, नए शहर में खुद को स्थापित करना… हर चीज डराती थी, लेकिन शायद हर डर को पार करने की कोशिश ने मुझे मजबूत बनाया। सवाल: पहली बार ‘खतरों के खिलाड़ी’ करने के दौरान आपका सबसे बड़ा डर क्या था? जवाब: जब आप जिंदगी में पहली बार 80 फीट ऊंचाई से कूदते हैं या समुद्र में स्टंट करते हैं, तब समझ आता है कि डर क्या होता है। पानी तो पानी ही होता है, चाहे गिलास में हो या समुद्र में, लेकिन उसकी विशालता आपका डर तय करती है। उस पूरे सीजन में मैं लगातार अपने डर से जूझ रही थी। सवाल: क्या इस बार का अनुभव पहले से अलग होगा? जवाब: बिल्कुल। मां बनने के बाद बहुत कुछ बदल गया है। पिछले चार सालों में मैंने खुद को उस तरह से टेस्ट नहीं किया है। इसलिए मुझे खुद नहीं पता कि इस बार मैं अपने डर को उसी तरह फेस कर पाऊंगी या नहीं। लेकिन यह जर्नी मेरे लिए बहुत अलग होने वाली है। सवाल: स्ट्रॉन्ग और ओपिनियन रखने वाली महिलाओं को अक्सर जज किया जाता है। क्या आपने भी यह महसूस किया है? जवाब: हां, लेकिन यह मेरी जिंदगी जीने का तरीका है। अगर मैं खुद को सिर्फ लोगों को खुश करने के लिए बदल दूं, तो फिर मैं अपनी असली जिंदगी नहीं जी रही हूं। भगवान ने हर इंसान को अलग बनाया है। अगर मैं अपनी यूनिकनेस छोड़कर लोगों की उम्मीदों में फिट होने लगूं, तो मैं ऑथेंटिक नहीं रहूंगी। हां, ऐसा करने से कई लोग आपसे नाराज भी होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप खुद को बदल दें। सवाल: जब आपको दोबारा ‘खतरों के खिलाड़ी’ का ऑफर मिला, तब आपका पहला रिएक्शन क्या था? जवाब: मैंने शुरुआत में मना कर दिया था, क्योंकि यह बहुत लंबा इंटरनेशनल शेड्यूल है और अब मेरी बेटियां हैं। उन्हें छोड़कर इतनी दूर जाना आसान नहीं था। लगभग तीन महीने तक मैं यही सोचती रही कि करूं या नहीं, लेकिन फिर अभिनव ने कहा कि ‘रुबीना, यह मौका दोबारा नहीं मिलेगा। हम सब संभाल लेंगे।’ तब मुझे लगा कि मेरे पास बहुत मजबूत सपोर्ट सिस्टम है और मैं यह कर सकती हूं। सवाल: अब जीत और हार को किस नजरिए से देखती हैं? जवाब: अब मेरे लिए जीत-हार का मतलब बदल चुका है। अब मैं यह सोचती हूं कि हमारी चॉइसेस हमारी बेटियों को क्या सिखाएंगी। हम उनके पहले टीचर हैं। इसलिए हम उन्हें यह नहीं सिखाना चाहते कि सिर्फ जीतना जरूरी है। हम उन्हें यह सिखाना चाहते हैं कि कोशिश करना और हिम्मत दिखाना ज्यादा जरूरी है। सवाल: इस बार के कंटेस्टेंट्स को लेकर क्या सोचती हैं? जवाब: हर कोई अपने साथ एक अलग एनर्जी लेकर आया है। अविका गोर बहुत स्ट्रॉन्ग हैं। जैस्मिन भसीन के साथ मैंने बिग बॉस में काफी वक्त बिताया है और वह बहुत अच्छी इंसान हैं। करण वाही और ऋत्विक धनजानी यह शो तीसरी बार कर रहे हैं, इसलिए उनके पास अलग अनुभव है। वहीं रुहानिका धवन और शगुन शर्मा जैसे यंग कंटेस्टेंट्स का नजरिया अलग होगा। मुझे लोगों को ऑब्जर्व करना और उनकी बॉडी लैंग्वेज समझना बहुत पसंद है। इसलिए यह सफर मेरे लिए काफी दिलचस्प रहेगा।
रुबीना दिलाइक ने पहले ठुकराया था ‘खतरों के खिलाड़ी 15’:परिवार से दूर नहीं जाना चाहती थीं, जानिए फिर कैसे बदला फैसला

टीवी एक्ट्रेस रुबीना दिलाइक एक बार फिर टीवी शो ‘खतरों के खिलाड़ी’ में वापसी करने जा रही हैं। रुबीना इससे पहले शो के 12वें सीजन में भाग ले चुकी हैं। अब वह एक बार फिर ‘खतरों के खिलाड़ी’ के सीजन 15 में नजर आएंगी। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में रुबीना ने बताया कि मां बनने के बाद उनकी जिंदगी और सोच दोनों बदल चुकी हैं। बातचीत में रुबीना ने इंडस्ट्री में अपने शुरुआती संघर्ष, लोगों की जजमेंट, स्ट्रॉन्ग महिलाओं को लेकर बनी सोच और अपने डर पर भी बात की। सवाल: आप हमेशा एक स्ट्रॉन्ग, बोल्ड और टफ पर्सनैलिटी के तौर पर देखी जाती हैं। क्या इस इमेज का प्रेशर भी रहता है? जवाब: अगर मैं यह सोचने लगूं कि लोग मुझसे क्या उम्मीद कर रहे हैं, तो वह प्रेशर मेरे गेम को खराब कर सकता है। मुझे लगता है कि आपको बस अपनी जगह समझनी चाहिए और उसी सम्मान के साथ खेलना चाहिए। अगर मैं एक्सपेक्टेशन का बोझ लेकर स्टंट करूंगी, तो वह मुझे और ज्यादा परेशान करेगा। इसलिए जितना हो सके, उस प्रेशर को खुद से दूर रखना जरूरी है। सवाल: क्या कॉम्पिटिटिव होना इस शो के लिए जरूरी है? जवाब: बिल्कुल। हर इंसान के अंदर एक कॉम्पिटिटिव स्पिरिट होती है। कोई खुद से मुकाबला करता है, कोई दूसरों से। जब आप ऐसे शो में जाते हैं, तो आप अपनी बेस्ट फिजिकल और मेंटल कैपेसिटी दिखाना चाहते हैं। अगर आपके अंदर कॉम्पिटिटिवनेस नहीं है, तो शायद आप कहीं न कहीं फ्लैट पड़ जाएंगे। सवाल: कुछ लोगों का परसेप्शन है कि मां बनने के बाद महिलाएं कमजोर हो जाती हैं, आप इसे कैसे देखती हैं? जवाब: मुझे लगता है कि मदरहुड कमजोरी नहीं, बल्कि बहुत बड़ी ताकत है। लोग कहते हैं कि अब शायद आपके अंदर पहले जैसी स्टैमिना या ताकत नहीं होगी, लेकिन वही बातें मुझे खुद को साबित करने का और मोटिवेशन देती हैं। ताकत सिर्फ फिजिकल नहीं होती, मानसिक मजबूती और रेजिलिएंस भी बहुत मायने रखता है और एक मां के अंदर यह ताकत और ज्यादा बढ़ जाती है। सवाल: डर को आप कैसे देखती हैं? जवाब: डर ही तय करता है कि आप कितने मजबूत हैं। जिंदगी में हर इंसान किसी न किसी डर से लड़ रहा होता है। सवाल यह नहीं है कि डर है या नहीं, सवाल यह है कि आप डर को खुद पर हावी होने देते हैं या खुद उस डर पर जीत हासिल करते हैं। सवाल: इंडस्ट्री में शुरुआती दौर में सबसे बड़ा डर क्या था? जवाब: मैं गांव और बहुत कंजर्वेटिव माहौल से आती हूं। उस समय इस इंडस्ट्री को बहुत अच्छी नजर से नहीं देखा जाता था। जब मैं पहली बार मुंबई आई, तो मेरे अंदर बहुत डर था। पढ़ाई, करियर, नए शहर में खुद को स्थापित करना… हर चीज डराती थी, लेकिन शायद हर डर को पार करने की कोशिश ने मुझे मजबूत बनाया। सवाल: पहली बार ‘खतरों के खिलाड़ी’ करने के दौरान आपका सबसे बड़ा डर क्या था? जवाब: जब आप जिंदगी में पहली बार 80 फीट ऊंचाई से कूदते हैं या समुद्र में स्टंट करते हैं, तब समझ आता है कि डर क्या होता है। पानी तो पानी ही होता है, चाहे गिलास में हो या समुद्र में, लेकिन उसकी विशालता आपका डर तय करती है। उस पूरे सीजन में मैं लगातार अपने डर से जूझ रही थी। सवाल: क्या इस बार का अनुभव पहले से अलग होगा? जवाब: बिल्कुल। मां बनने के बाद बहुत कुछ बदल गया है। पिछले चार सालों में मैंने खुद को उस तरह से टेस्ट नहीं किया है। इसलिए मुझे खुद नहीं पता कि इस बार मैं अपने डर को उसी तरह फेस कर पाऊंगी या नहीं। लेकिन यह जर्नी मेरे लिए बहुत अलग होने वाली है। सवाल: स्ट्रॉन्ग और ओपिनियन रखने वाली महिलाओं को अक्सर जज किया जाता है। क्या आपने भी यह महसूस किया है? जवाब: हां, लेकिन यह मेरी जिंदगी जीने का तरीका है। अगर मैं खुद को सिर्फ लोगों को खुश करने के लिए बदल दूं, तो फिर मैं अपनी असली जिंदगी नहीं जी रही हूं। भगवान ने हर इंसान को अलग बनाया है। अगर मैं अपनी यूनिकनेस छोड़कर लोगों की उम्मीदों में फिट होने लगूं, तो मैं ऑथेंटिक नहीं रहूंगी। हां, ऐसा करने से कई लोग आपसे नाराज भी होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप खुद को बदल दें। सवाल: जब आपको दोबारा ‘खतरों के खिलाड़ी’ का ऑफर मिला, तब आपका पहला रिएक्शन क्या था? जवाब: मैंने शुरुआत में मना कर दिया था, क्योंकि यह बहुत लंबा इंटरनेशनल शेड्यूल है और अब मेरी बेटियां हैं। उन्हें छोड़कर इतनी दूर जाना आसान नहीं था। लगभग तीन महीने तक मैं यही सोचती रही कि करूं या नहीं, लेकिन फिर अभिनव ने कहा कि ‘रुबीना, यह मौका दोबारा नहीं मिलेगा। हम सब संभाल लेंगे।’ तब मुझे लगा कि मेरे पास बहुत मजबूत सपोर्ट सिस्टम है और मैं यह कर सकती हूं। सवाल: अब जीत और हार को किस नजरिए से देखती हैं? जवाब: अब मेरे लिए जीत-हार का मतलब बदल चुका है। अब मैं यह सोचती हूं कि हमारी चॉइसेस हमारी बेटियों को क्या सिखाएंगी। हम उनके पहले टीचर हैं। इसलिए हम उन्हें यह नहीं सिखाना चाहते कि सिर्फ जीतना जरूरी है। हम उन्हें यह सिखाना चाहते हैं कि कोशिश करना और हिम्मत दिखाना ज्यादा जरूरी है। सवाल: इस बार के कंटेस्टेंट्स को लेकर क्या सोचती हैं? जवाब: हर कोई अपने साथ एक अलग एनर्जी लेकर आया है। अविका गोर बहुत स्ट्रॉन्ग हैं। जैस्मिन भसीन के साथ मैंने बिग बॉस में काफी वक्त बिताया है और वह बहुत अच्छी इंसान हैं। करण वाही और ऋत्विक धनजानी यह शो तीसरी बार कर रहे हैं, इसलिए उनके पास अलग अनुभव है। वहीं रुहानिका धवन और शगुन शर्मा जैसे यंग कंटेस्टेंट्स का नजरिया अलग होगा। मुझे लोगों को ऑब्जर्व करना और उनकी बॉडी लैंग्वेज समझना बहुत पसंद है। इसलिए यह सफर मेरे लिए काफी दिलचस्प रहेगा।
चेस कोई सस्ता खेल नहीं:एक ग्रैंडमास्टर बनने में खर्च होते हैं 50 से 70 लाख रुपए, हालिया ग्रैंडमास्टर्स के माता-पिता को बेचने पड़े गहने

अक्सर लोगों को लगता है कि शतरंज एक सस्ता खेल है, क्योंकि इसमें अन्य खेलों की तरह महंगे उपकरण, बड़े स्टेडियम या स्पोर्ट्स साइंस टीम की जरूरत नहीं होती। लेकिन भारत के नए शतरंज ग्रैंडमास्टर्स की सफलता की सच्चाई ने इस मिथक को पूरी तरह तोड़ दिया है। असलियत यह है कि आज एक बच्चे को ग्रैंडमास्टर (जीएम) बनाने में 50 से 70 लाख रुपए का भारी खर्च आता है। हाल ही में भारत के 95वें ग्रैंडमास्टर बने आरोन्यक घोष और 94वें ग्रैंडमास्टर मयंक चक्रवर्ती के परिवारों का संघर्ष इसका जीता-जागता प्रमाण है। आरोन्यक के पिता मृणाल घोष बताते हैं कि उन्होंने अपने बेटे के ऊपर पिछले 15 सालों में लगभग 46 लाख रुपए खर्च किए। उनका मानना है कि भारत में जीएम बनने के लिए यह शायद सबसे कम राशि है। बैंकॉक चेस क्लब ओपन में तीसरा और अंतिम जीएम नॉर्म हासिल करने वाले आरोन्यक के लिए पिता को पुश्तैनी जमीन और मां संचिता को शादी के गहने बेचने पड़े। इनामी राशि की पाई-पाई खेल में वापस लगा दी गई। वहीं, पूर्वोत्तर भारत के इकलौते जीएम मयंक की मां मोनोमिता चक्रवर्ती कहती हैं कि शुरुआत से जीएम बनने तक माता-पिता को 70 लाख रुपए तैयार रखने चाहिए। यह सिर्फ जीएम बनने तक का खर्च है। 12 वर्षीय फीडे मास्टर (जीएम से दो कदम पीछे) आरव सरबलिया के पिता यतिन का अनुमान है कि केवल 2025 में उन्होंने आरव पर 25-30 लाख रुपए खर्च किए। वे टूर्नामेंट के लिए 4 महीने तक विदेश में रहे। स्पॉन्सरशिप न मिलने पर उन्होंने कमाई के लिए सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाना शुरू कर दिया। चेस में सबसे बड़ा खर्च कोचिंग है। ग्रैंडमास्टर कोच की फीस 10,000 से 20,000 रुपए प्रति घंटा होती है और एक से ज्यादा कोच रखने पड़ते हैं। नॉर्म्स के लिए साल में 6-8 यूरोप दौरों का खर्च 15-20 लाख रुपए आता है। प्रैक्टिस के लिए ट्रेनिंग पार्टनर और ‘सेकेंड्स’ (जो मैच की तैयारी कराते हैं) को घंटे के हिसाब से भारी फीस देनी पड़ती है। कई बार ये कोच इनामी राशि में भी हिस्सा मांगते हैं। मृणाल घोष कहते हैं कि 2500 रेटिंग पार कर जीएम बनने पर आयोजक रुकने व फ्लाइट का खर्च उठाते हैं, लेकिन मेरा बेटा 2550 रेटिंग पर है। इसे 2650 तक ले जाने में इतना पैसा लगेगा कि मैं सपने देखने से भी डरता हूं। स्पॉन्सरशिप मुश्किल, शेयरिंग अपार्टमेंट्स में रहते हैं – चेस के खेल में स्पॉन्सर मिलना मुश्किल है। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की प्रोत्साहन राशि भी बंद हो गई है। ऐसे में गुवाहाटी से आने वाले मयंक को विदेशी दौरे पर कनेक्टिंग फ्लाइट का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। – खर्च बचाने के लिए परिवार यूरोप में सस्ते शेयरिंग अपार्टमेंट में रुकते हैं और घर का खाना ले जाते हैं।
This is the most expensive house in America, worth Rs 3778 crore

लॉस एंजिलिस25 मिनट पहले कॉपी लिंक इस घर में अत्याधुनिक जिम, पिलाटे स्टूडियो, स्पा और ब्यूटी सैलून भी है। अमेरिका के रियल एस्टेट इतिहास में एक नया रिकॉर्ड बना है। फोर्ब्स के अनुसार, लॉस एंजिल्स के बेल-एयर इलाके में स्थित एक आलीशान घर $400 मिलियन (करीब ₹3,778 करोड़ रु.) की कीमत के साथ ‘सबसे महंगी लिस्टिंग’ बना है। मतलब ये कि बिक्री के लिए रखे गए मकानों में ये सबसे महंगा है। इसे ‘लॉस एंजिलिस का क्राउन ज्वेल’ कहा जाता है। इस संपत्ति का स्वामित्व कतर के शाही परिवार (अल-थानी परिवार) से जुड़ी एक संस्था के पास है। उन्होंने 2010 में यह जमीन $35 मिलियन (करीब 330 करोड़ रुपए) में खरीदी थी। 10 साल लगे इसे बनाने में इस घर में अत्याधुनिक जिम, पिलाटे स्टूडियो, स्पा और ब्यूटी सैलून भी है। इस ‘मेगा-मेंशन’ को बनाने में लगभग 10 साल लगे थे। इसे मशहूर वास्तुकार पीटर मैरिनो ने डिजाइन किया है। इसके निर्माण में $350 मिलियन (3,304 करोड़) खर्च हुए। घर की खूबियां 39 बेडरूम 50 बाथरूम 3 स्विमिंग पुल 1 एक्स-रे रूम 1 सिनेमा हॉल 1 टेनिस कोर्ट 8 एकड़ स्पेस 70 हजार वर्ग फीट में घर है 25 कारों का अंडरग्राउंड गैरेज दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
विजय को कमल हासन और प्रकाश राज ने बधाई दी:एक्ट्रेस त्रिशा शपथ ग्रहण में शामिल हुईं, थलापति की मां और बहन से गले मिलीं

अभिनेता से नेता बने थलापति विजय ने रविवार को तमिलनाडु के 9वें मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित समारोह में राहुल गांधी और तृषा समेत कई हस्तियां मौजूद रहीं। विजय के सीएम की शपथ लेने के बाद साउथ सुपरस्टार कमल हासन और एक्टर प्रकाश राज ने उन्हें बधाई दी। कमल हासन ने कहा, ‘तमिलगा वेत्री कड़गम के अध्यक्ष और तमिलनाडु के माननीय मुख्यमंत्री मेरे भाई थिरु विजय को शुभकामनाएं। उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में तमिलनाडु नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। मैं उन्हें दिल से बधाई देता हूं।’ वहीं प्रकाश राज ने ट्वीट कर लिखा, ‘मुख्यमंत्री विजय को बहुत-बहुत बधाई। नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं। उम्मीद है कि आपके नेतृत्व में राज्य और तरक्की करेगा।’ तृषा ने विजय की मां से मुलाकात की शपथ ग्रहण समारोह में एक्ट्रेस तृषा कृष्णन भी पहुंचीं। उन्होंने विजय के परिवार से मुलाकात की और उनकी मां से गले मिलती नजर आईं। विजय ने सुबह 10.15 बजे तमिल में शपथ ली तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) चीफ और एक्टर से नेता बने सी जोसेफ विजय तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं। उन्होंने रविवार सुबह 10.15 बजे तमिल में शपथ ली। इस दौरान राहुल गांधी भी मौजूद रहे। थलापित विजय शपथ लेते समय निर्धारित लाइनों के अलावा और बातें बोलने लगे। इस पर राज्यपाल अर्लेकर ने उन्हें टोक दिया और कहा कि वही पढ़ें जो लिखकर दिया है। CM विजय के साथ 9 और मंत्रियों ने भी शपथ ली। इनमें एन आनंद, आधव अर्जुन, डॉ. केजी अरुणराज, केए सेंगोट्टैयन, पी वेंकटरमणन, आर निर्मलकुमार, राजमोहन, डॉ. टीके प्रभु, सेल्वी एस कीर्तना शामिल है। ये सभी विजय की पार्टी TVK के विधायक हैं। सहयोगी दलों के किसी विधायक को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है। 3 तस्वीरों में देखिए पूरा घटनाक्रम… विजय ने शपथ के दौरान कहा… मैं सी. जोसेफ विजय भारत की संविधान के प्रति सच्ची आस्था और निष्ठा रखूंगा। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में भारत की एकता, अखंडता को बनाए रखूंगा और अपने विवेक के अनुसार कर्तव्यों और कानून का पालन करूंगा। किसी से डरूंगा नहीं और ना ही एकतरफा आदेश मानूंगा। मैं न्याय करूंगा, सभी लोगों के साथ न्याय करूंगा। शपथ के दौरान CM विजय की 4 तस्वीरें… शनिवार को चौथी बार राज्यपाल से मिले थे विजय इससे पहले शनिवार को विजय ने राज्यपाल अर्लेकर को TVK, कांग्रेस, CPI, CPM, VCK और IUML के विधायकों के समर्थन पत्र सौंपे। इसके बाद राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने का न्योता दिया। विजय की दो साल पुरानी पार्टी TVK ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में 234 में 108 सीटें जीतीं। तमिलनाडु में 1967 के बाद पहली बार गैर-द्रविड़ दल (DMK या AIADMK) का मुख्यमंत्री बना है।
₹2 Lakh Crore Sold Amidst Global Market Uncertainty

मुंबई28 मिनट पहले कॉपी लिंक मई महीने में भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की निकासी जारी है। वैश्विक आर्थिक चिंताओं के कारण इस साल अब तक विदेशी निवेशक बाजार से ₹2 लाख करोड़ से ज्यादा निकाल चुके हैं। एनएसडीएल (NSDL) के डेटा के अनुसार, अकेले मई महीने में विदेशी निवेशकों ने अब तक ₹14,231 करोड़ की बिकवाली की है। 2025 के मुकाबले इस साल ज्यादा दबाव साल 2026 में अब तक की कुल निकासी पिछले पूरे साल के मुकाबले काफी ज्यादा है। साल 2025 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से कुल ₹1.66 लाख करोड़ निकाले थे। इस साल अब तक यह आंकड़ा ₹2 लाख करोड़ के पार जा चुका है, जो बाजार पर निरंतर बने बिकवाली के दबाव को दर्शाता है। सिर्फ फरवरी में आई थी खरीदारी, मार्च में हुई रिकॉर्ड बिकवाली इस साल विदेशी निवेशकों का रुख ज्यादातर निगेटिव ही रहा है। जनवरी में ₹35,962 करोड़ के शेयर बेचे गए थे। हालांकि, फरवरी एक अपवाद रहा जब निवेशकों ने ₹22,615 करोड़ का निवेश किया, जो पिछले 17 महीनों का सबसे बड़ा मंथली निवेश था। लेकिन यह बढ़त ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई। मार्च में अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर दिखा और रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ बाजार से बाहर निकल गए। इसके बाद अप्रैल में भी ₹60,847 करोड़ की निकासी दर्ज की गई है। महंगाई और ब्याज दरें बनी बड़ी वजह मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल मैनेजर रिसर्च, हिमांशु श्रीवास्तव के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई, ब्याज दरों में बदलाव की आशंका और जियोपॉलिटिकल रिस्क इस बिकवाली के मुख्य कारण हैं। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी है। इसी वजह से निवेशक अब जल्द ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद छोड़ रहे हैं और विकसित बाजारों के डेट इंस्ट्रूमेंट्स की ओर रुख कर रहे हैं। रुपए की कमजोरी से भी बढ़ा असर डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए में आने वाली अस्थिरता और कमजोरी भी विदेशी निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। इससे डॉलर के संदर्भ में उनका रिटर्न प्रभावित होता है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार का कहना है कि रुपए की गिरावट और भारत की अर्निंग ग्रोथ को लेकर चिंताओं ने इस साल आउटफ्लो बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है। पावर-कंस्ट्रक्शन सेक्टर में अभी भी रुचि लगातार हो रही बिकवाली के बावजूद विदेशी निवेशक पूरी तरह बाजार से बाहर नहीं हुए हैं। वे पावर, कंस्ट्रक्शन और कैपिटल गुड्स जैसे चुनिंदा सेक्टर्स में अभी भी निवेश कर रहे हैं। इसके अलावा मजबूत कमाई और अच्छी ग्रोथ वाले मिड-कैप और कुछ स्मॉल-कैप शेयरों में भी वे खरीदारी कर रहे हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर अब निवेशकों का रुझान दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों की ओर बढ़ रहा है, जहां AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के कारण बेहतर कमाई की उम्मीद है। क्या होता है FPI और डॉलर रिटर्न? FPI (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश): जब विदेशी नागरिक या कंपनियां किसी दूसरे देश के शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं, तो उसे FPI कहा जाता है। ये निवेशक मुनाफा होते ही जल्दी पैसा निकाल भी सकते हैं। डॉलर रिटर्न: विदेशी निवेशक भारत में रुपए में निवेश करते हैं। अगर रुपए की कीमत डॉलर के मुकाबले गिरती है, तो उन्हें अपना पैसा वापस डॉलर में बदलने पर कम मुनाफा होता है, जिसे डॉलर रिटर्न का नुकसान कहते हैं। ये खबर भी पढ़ें… इस हफ्ते ईरान-अमेरिका तनाव पर होगी निवेशकों की नजर: चौथी तिमाही के नतीजों समेत 5 फैक्टर्स तय करेंगे चाल; निफ्टी के लिए 24,500 पर रेजिस्टेंस कल 11 मई से शुरू होने वाले हफ्ते में शेयर बाजार में काफी हलचल रहने वाली है। कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे, अमेरिका-ईरान तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे फैक्टर बाजार की दिशा तय करेंगे। चलिए समझते हैं अगले हफ्ते बाजार में क्या हो सकता है। पूरी खबर पढ़ें…. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…








