बिना अधिक मेहनत किए थकान कमजोरी हो रही महसूस, एनीमिया के संकेत तो नहीं? इन फू्ड्स से दूर करें इसकी कमी

आज के समय में एनीमिया एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जिसका असर खासतौर पर महिलाओं और बच्चों में ज्यादा देखने को मिलता है. शरीर में आयरन और जरूरी विटामिन्स की कमी होने पर थकान, कमजोरी, चक्कर आना, ध्यान न लगना और चेहरे की रंगत फीकी पड़ने जैसी परेशानियां होने लगती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि सही खानपान अपनाकर एनीमिया से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है. संतुलित आहार है सबसे असरदार उपाय राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मुताबिक, रोजाना पौष्टिक और संतुलित भोजन लेने से शरीर में आयरन, विटामिन और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की कमी नहीं होती. इससे न सिर्फ एनीमिया का खतरा कम होता है, बल्कि संपूर्ण सेहत भी बेहतर बनी रहती है. विशेषज्ञ बताते हैं कि महंगे सप्लीमेंट्स की बजाय प्राकृतिक और घरेलू खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करना ज्यादा फायदेमंद होता है. खासकर महिलाओं, गर्भवती मांओं और बच्चों को अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए. एनीमिया से बचने के लिए क्या खाएं? हरी पत्तेदार सब्जियां करें डाइट में शामिल- पालक, मेथी, सरसों का साग और बथुआ जैसी हरी सब्जियां आयरन का बेहतरीन स्रोत मानी जाती हैं. इनका नियमित सेवन शरीर में खून की कमी को दूर करने में मदद करता है. इन्हें हल्का पकाकर या सलाद के रूप में खाना ज्यादा लाभकारी हो सकता है. प्रोटीन युक्त भोजन बढ़ाए हीमोग्लोबिन- दालें, राजमा, छोले और सोयाबीन जैसे प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ शरीर को ऊर्जा देने के साथ ही हीमोग्लोबिन बढ़ाने में भी मदद करते हैं. शाकाहारी लोगों के लिए ये बेहतरीन विकल्प हैं. फल भी हैं बेहद जरूरी-केला, अनार, पपीता, संतरा और खजूर जैसे फल आयरन और विटामिन सी से भरपूर होते हैं. विटामिन सी शरीर में आयरन को बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद करता है, इसलिए फलों और आयरन युक्त चीजों का साथ में सेवन करना फायदेमंद माना जाता है. नट्स और बीज से मिलेगी ताकत- अखरोट, अलसी के बीज और कद्दू के बीज शरीर को जरूरी मिनरल्स और हेल्दी फैट्स प्रदान करते हैं. रोजाना थोड़ी मात्रा में इनका सेवन शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद कर सकता है. दूध और पनीर भी रखें सेहत का ख्याल- दूध, दही और पनीर कैल्शियम और प्रोटीन के अच्छे स्रोत होते हैं. ये हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाने के साथ शरीर को जरूरी पोषण भी देते हैं. खानपान में विविधता है जरूरी- हेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि रोजाना की डाइट में अलग-अलग तरह की मौसमी फल और सब्जियों को शामिल करना चाहिए. संतुलित और पौष्टिक भोजन अपनाकर एनीमिया जैसी समस्या से आसानी से बचाव किया जा सकता है.
माइक्रोवेव में भूलकर भी गर्म न करें ये 5 चीजें, खाना बन जाएगा खतरनाक! जानें वजह

Last Updated:May 11, 2026, 23:31 IST आजकल लोग जल्दी में खाना गर्म करने के लिए माइक्रोवेव का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, लेकिन हर चीज को माइक्रोवेव में गर्म करना सुरक्षित नहीं माना जाता. कुछ फूड्स ऐसे होते हैं, जिन्हें माइक्रोवेव में रखने से उनका स्वाद, पोषण और टेक्सचर खराब हो सकता है, वहीं कुछ मामलों में यह सेहत के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकता है. इसलिए एक्सपर्ट्स कुछ खास चीजों को माइक्रोवेव में गर्म करने से बचने की सलाह देते हैं. ख़बरें फटाफट आजकल लगभग हर घर की रसोई में माइक्रोवेव ओवन मौजूद है. खाना गर्म करने से लेकर जल्दी कुकिंग तक, यह लोगों की जिंदगी आसान बना चुका है. लेकिन कई बार लोग बिना सोचे-समझे हर चीज माइक्रोवेव में गर्म कर लेते हैं, जो सेहत और सुरक्षा दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है. कुछ फूड ऐसे होते हैं, जिन्हें माइक्रोवेव में गर्म करने पर उनका स्वाद, पोषण और टेक्सचर खराब हो सकता है, वहीं कुछ मामलों में यह खतरनाक भी साबित हो सकता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि हर चीज माइक्रोवेव के लिए बनी नहीं होती, इसलिए कुछ खाद्य पदार्थों को इससे दूर रखना बेहतर माना जाता है. बहुत से लोग ठंडे उबले अंडे को माइक्रोवेव में दोबारा गर्म कर लेते हैं, लेकिन ऐसा करना सही नहीं माना जाता. माइक्रोवेव में अंडे के अंदर तेजी से भाप बनती है, जिससे वह अचानक फट सकता है. कई बार यह बाहर निकालने के बाद भी फटने का खतरा पैदा कर सकता है. इसके अलावा अंडे की टेक्सचर और स्वाद भी खराब हो सकता है. अगर अंडा गर्म करना हो, तो उसे काटकर हल्की आंच पर गर्म करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. चावल को बार-बार गर्म करना सही नहींकई लोग बचा हुआ चावल माइक्रोवेव में बार-बार गर्म करके खाते हैं. हालांकि एक्सपर्ट्स के अनुसार लंबे समय तक बाहर रखा चावल बैक्टीरिया पैदा कर सकता है. माइक्रोवेव हर हिस्से को बराबर गर्म नहीं करता, जिससे कुछ बैक्टीरिया बच सकते हैं. यही वजह है कि चावल को सही तरीके से स्टोर करना और सिर्फ एक बार अच्छी तरह गर्म करके खाना बेहतर माना जाता है. हरी पत्तेदार सब्जियों में बदल सकता है स्वादपालक, मेथी और दूसरी हरी पत्तेदार सब्जियों को माइक्रोवेव में बार-बार गर्म करने से उनके पोषक तत्व प्रभावित हो सकते हैं. कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इनमें मौजूद नाइट्रेट्स ज्यादा गर्म होने पर ऐसे तत्वों में बदल सकते हैं, जो शरीर के लिए अच्छे नहीं माने जाते. इसके अलावा इन सब्जियों का स्वाद और टेक्सचर भी बदल सकता है, जिससे खाने का मजा खराब हो जाता है. मिर्च गर्म करते समय रखें सावधानीअगर आपने कभी माइक्रोवेव में हरी या लाल मिर्च गर्म की है, तो आपने उसकी तेज गंध जरूर महसूस की होगी. माइक्रोवेव में मिर्च गर्म करने पर उसमें मौजूद कैप्साइसिन हवा में फैल सकता है, जिससे आंखों और गले में जलन महसूस हो सकती है. कई बार माइक्रोवेव खोलते ही तेज धुआं जैसा असर महसूस होता है. इसलिए मिर्च को माइक्रोवेव में गर्म करने से बचना बेहतर माना जाता है. प्रोसेस्ड मीट हो सकता है नुकसानदायकसॉसेज, सलामी और दूसरे प्रोसेस्ड मीट को माइक्रोवेव में गर्म करने पर उनमें मौजूद प्रिजर्वेटिव्स और फैट्स पर असर पड़ सकता है. कुछ स्टडीज में माना गया है कि ज्यादा तापमान पर प्रोसेस्ड मीट में हानिकारक तत्व बनने का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा माइक्रोवेव में ऐसे फूड का स्वाद और टेक्सचर भी रबड़ जैसा हो सकता है, जिससे खाने का अनुभव खराब हो जाता है. माइक्रोवेव इस्तेमाल करते समय रखें ये बातेंमाइक्रोवेव का इस्तेमाल करते समय सही कंटेनर चुनना भी बेहद जरूरी है. प्लास्टिक के कुछ डिब्बे गर्म होने पर हानिकारक केमिकल छोड़ सकते हैं. इसलिए माइक्रोवेव-सेफ बर्तन ही इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है. इसके अलावा खाने को ढककर गर्म करना और बीच-बीच में चलाना जरूरी माना जाता है, ताकि खाना बराबर गर्म हो सके. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi
गोंद जैसा दिखने वाला ये देसी फल है पोषण का पावरहाउस, अचार से लेकर सेहत तक हर चीज में है सुपरहिट

Last Updated:May 11, 2026, 23:08 IST लसोड़ा एक ऐसा देसी फल है, जिसे गांवों में सालों से अचार और सब्जी के रूप में खाया जाता रहा है. दिखने में साधारण लगने वाला यह छोटा-सा फल पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है और आयुर्वेद में भी इसका खास महत्व बताया गया है. यही वजह है कि अब लोग फिर से इस पारंपरिक फल की तरफ ध्यान देने लगे हैं. ख़बरें फटाफट गांव-कस्बों में पाए जाने वाला लसोड़ा एक ऐसा फल है, जिसे आज की नई पीढ़ी धीरे-धीरे भूलती जा रही है. हालांकि पुराने समय में यह लोगों की रसोई और घरेलू नुस्खों का अहम हिस्सा माना जाता था. लसोड़ा का पेड़ गर्म और सूखे इलाकों में आसानी से उग जाता है और ज्यादा देखभाल की जरूरत भी नहीं पड़ती. इसे कई जगहों पर “इंडियन चेरी” के नाम से भी जाना जाता है. इसका फल आकार में छोटा होता है, लेकिन स्वाद और पोषण के मामले में काफी खास माना जाता है. खासकर ग्रामीण इलाकों में लोग इसका अचार, सब्जी और कई पारंपरिक व्यंजनों में इस्तेमाल करते आए हैं. स्वाद के साथ सेहत का भी खजानालसोड़ा देखने में भले साधारण लगे, लेकिन इसमें कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार इसमें फाइबर, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस और जिंक जैसे तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. यही वजह है कि पुराने समय में लोग इसे सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि सेहत को बेहतर रखने के लिए भी अपनी डाइट का हिस्सा बनाते थे. इसका कच्चा फल हल्का कसैला और चिपचिपा होता है, जबकि पकने के बाद इसमें हल्की मिठास आ जाती है. गांवों में आज भी कई घरों में इसका अचार बड़े चाव से खाया जाता है. वहीं कुछ जगहों पर इसकी मसालेदार सब्जी भी बनाई जाती है, जिसका स्वाद काफी अलग माना जाता है. पाचन के लिए क्यों माना जाता है अच्छा?लसोड़ा को पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद फाइबर पेट को साफ रखने और पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. यही वजह है कि जिन लोगों को कब्ज या पेट से जुड़ी समस्याएं रहती हैं, उनके लिए इसे उपयोगी माना जाता है. ग्रामीण इलाकों में पुराने समय से लोग इसे खाने के साथ-साथ घरेलू उपायों में भी इस्तेमाल करते रहे हैं. माना जाता है कि यह शरीर को अंदर से ताकत देने और कमजोरी कम करने में मदद कर सकता है. आयुर्वेद में भी बताया गया खासआयुर्वेद में लसोड़ा के फल, पत्तियों और बीजों तक का उपयोग बताया गया है. कई जगहों पर इसकी पत्तियों का इस्तेमाल सूजन और त्वचा संबंधी समस्याओं में भी किया जाता रहा है. वहीं कुछ लोग इसके गूदे को पारंपरिक घरेलू नुस्खों में शामिल करते हैं. हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि किसी भी चीज का औषधि की तरह इस्तेमाल बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए. हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक उपयोग से पहले योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी माना जाता है. गांवों से शहरों तक फिर बढ़ रही लोकप्रियताएक समय था जब लसोड़ा लगभग हर गांव में आसानी से मिल जाता था, लेकिन अब शहरों में बहुत कम लोग इसके बारे में जानते हैं. हालांकि पिछले कुछ वर्षों में पारंपरिक और देसी फूड्स की बढ़ती लोकप्रियता के कारण लोग फिर से ऐसे फलों की तरफ ध्यान देने लगे हैं. कई लोग अब ऑर्गेनिक और देसी खानपान को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें लसोड़ा जैसे पारंपरिक फल भी शामिल हो रहे हैं. खासतौर पर इसका अचार आज भी कई लोगों की पसंद बना हुआ है. छोटा फल, बड़े फायदेलसोड़ा भले ही दिखने में साधारण लगे, लेकिन इसके अंदर पोषण और पारंपरिक स्वाद दोनों छिपे हैं. गांवों में सालों से इस्तेमाल होने वाला यह फल आज भी लोगों की थाली और घरेलू परंपराओं का हिस्सा बना हुआ है. सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करने पर यह शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व देने में मदद कर सकता है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi
क्या किडनी स्टोन के मरीजों के लिए टमाटर खाना नुकसानदायक? डॉक्टर से जान लीजिए हकीकत

Last Updated:May 11, 2026, 23:04 IST Kidney Stones and Tomatoes: किडनी स्टोन आजकल बेहद कॉमन समस्या है. कई लोग मानते हैं कि टमाटर खाने से स्टोन की परेशानी हो सकती है और पथरी के मरीजों को इसे अवॉइड करना चाहिए. डॉक्टर्स की मानें तो टमाटर खाने से पथरी का खतरा नहीं होता है. हालांकि किसी भी चीज का सेवन अत्यधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए. किडनी स्टोन के मरीज भी कम मात्रा में टमाटर खा सकते हैं. Tomatoes and Kidney Stone Risk: किडनी स्टोन की समस्या से बड़ी संख्या में लोग जूझ रहे हैं. आजकल युवाओं में पथरी की समस्या तेजी से बढ़ रही है. जिन लोगों को यह परेशानी होती है, वे अक्सर अपनी डाइट को लेकर काफी सतर्क हो जाते हैं. लंबे समय से यह धारणा बनी हुई है कि टमाटर खाने से पथरी बढ़ सकती है. कई लोग किडनी स्टोन होने पर टमाटर खाना पूरी तरह बंद कर देते हैं. अब सवाल है कि क्या वास्तव में टमाटर किडनी स्टोन के मरीजों के लिए नुकसानदायक होता है? इस बारे में डॉक्टर से हकीकत जानने की कोशिश करते हैं, ताकि लोगों का भ्रम दूर हो सके. नई दिल्ली के सर गंगाराम सिटी हॉस्पिटल के सीनियर यूरोलॉजिस्ट डॉ. अमरेंद्र पाठक ने News18 को बताया किडनी स्टोन कई प्रकार के होते हैं, लेकिन सबसे कॉमन कैल्शियम ऑक्सलेट स्टोन माना जाता है. टमाटर में ऑक्सलेट नामक तत्व थोड़ी बहुत मात्रा में पाया जाता है, लेकिन इससे किडनी स्टोन बनने का खतरा नहीं होता है. जिन लोगों को किडनी स्टोन है, वे भी टमाटर खा सकते हैं. सीमित मात्रा में टमाटर खाना सुरक्षित माना जाता है. हालांकि जिन लोगों में बार-बार कैल्शियम ऑक्सलेट स्टोन बनने की समस्या होती है, वे इस मामले में सावधानी बरतें और खानपान को लेकर डॉक्टर की सलाह लें. डॉक्टर के मुताबिक किडनी स्टोन बनने के पीछे पानी कम पीना, ज्यादा नमक, हाई ऑक्सलेट डाइट, आनुवंशिक कारण और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी जिम्मेदार हो सकती हैं. किडनी स्टोन से बचाव में सबसे जरूरी भूमिका पर्याप्त पानी की होती है. शरीर में पानी की कमी होने पर यूरिन ज्यादा कंसंट्रेट हो जाता है, जिससे मिनरल्स जमा होकर स्टोन बना सकते हैं. जरूरत से ज्यादा नमक, प्रोसेस्ड फूड और शुगरी ड्रिंक्स का सेवन भी स्टोन का खतरा बढ़ा सकता है. एक्सपर्ट का कहना है कि हर मरीज की स्थिति अलग होती है. इसलिए किडनी स्टोन का प्रकार, मेडिकल हिस्ट्री और टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर ही सही डाइट तय की जाती है. कई बार डॉक्टर कुछ समय के लिए हाई ऑक्सलेट फूड सीमित करने को कह सकते हैं, लेकिन यह फैसला पेशेंट की कंडीशन पर डिपेंड करता है. टमाटर में विटामिन C, पोटैशियम, एंटीऑक्सीडेंट और लाइकोपीन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. लाइकोपीन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है, जो कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है. किडनी स्टोन के मरीज भी टमाटर का सीमित मात्रा में सेवन करें और अगर कोई समस्या आए, तो इस बारे में एक्सपर्ट की सलाह लें. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
वेजिटेबल उपमा रेसिपी: फिट पर स्वाद से नहीं होता कॉम्प्रोमाइज? अनलॉस्ट सुपरमार्केट वाला उपमा, कम कैलोरी में भरेगा पेट

सामग्री: 1 कप सूजी, 1 छोटा चम्मच, 1 गाजर, 1/2 कप कप मटर, 1 काली मिर्च, 2 हरी मिर्च, 1 छोटा चम्मच राई, 7-8 करी पत्ते, 2 बड़े मसाले का तेल, 2 से 3 पानी, स्वाद नमक, थोड़ा हरा धनियां, 1/2 नींबू का रस छवि: फ्रीपिक बनाने की आसान विधि: सबसे पहले एक पैन में सूजी को अंधेरा होने तक सूखा भुन लें। जब सूजी से अच्छी क्वालिटी आने लगे, तो इसे एक प्लेट में निकाल लें। अब वही पैन में तेल या घी गर्म करें। छवि: फ्रीपिक इसमें राई और चटकने दें। फिर कारी पत्ता, हरी मिर्च और पेंसिल पेंटिंग भून लें। इसके बाद गाजर, मटर और नमक का टुकड़ा 2 से 3 मिनट तक टूट गया। अब इसमें पानी और नमक और मसाले शामिल हैं। छवि: एआई जब पानी भरने लगे, तब धीरे-धीरे-धीरे-धीरे भुनी हुई सूजी डालें और लगातार चाटते रहें ताकि घुटठियां न बनें। माप पर 3 से 4 मिनट तक का समय। अंतिम रूप से नींबू का रस और हरा धनियां स्टैक अच्छी तरह से मिक्स करें। छवि: फ्रीपिक आपका गरमा-गरम वेजिटेबल उपमा तैयार है। वेजिटेबल उपमा में सूजी के साथ कई तरह के पादप तत्व पाए जाते हैं, जिससे शरीर को विटामिन और आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं। छवि: फ्रीपिक यह कम तेल में बन जाता है, इसलिए वजन नियंत्रित करना भी लोगों के लिए अच्छा माना जाता है। छवि: फ्रीपिक उपमा में भुनी हुई मूँगफली दाल ले सकते हैं। प्रभाव कॅटपन पसंद हो तो थोड़ा सा न्यूनतम वाक्य। इसमें टमाटर तो टमाटर भी मिला सकते हैं। बच्चों के लिए छोटी बटरी का स्वाद और बढ़ना बढ़ता है। छवि: फ्रीपिक अगर आप रोज एक नाश्ता जैसा कि जरूरी बोर हो चुके हैं, तो इस रेफ्रिजरेटर और टेस्टी वेजिटेबल उपमा को जरूर ट्राई करें। यह जल्दी बनता है और पूरे परिवार को पसंद भी आता है। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)वेजिटेबल उपमा रेसिपी(टी)वेजिटेबल उपमा रेसिपी(टी)उपमा रेसिपी(टी)उपमा कैसे बनाएं(टी)नमकीन उपमा(टी)उपमा कैसे बनाएं
सुबह खाली पेट भूलकर भी न खाएं ये फल, वरना पेट से लेकर शुगर तक हो सकती है गड़बड़

सुबह का समय शरीर के लिए सबसे अहम माना जाता है. रातभर खाली रहने के बाद हमारा पाचन तंत्र सुबह काफी संवेदनशील स्थिति में होता है, इसलिए इस समय क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, इसका सीधा असर पूरे दिन की सेहत पर पड़ सकता है. कई लोग दिन की शुरुआत हेल्दी बनाने के लिए खाली पेट फल खाते हैं, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि हर फल सुबह खाली पेट खाना फायदेमंद नहीं होता. कुछ फल पेट में एसिडिटी, गैस, ब्लोटिंग और ब्लड शुगर बढ़ाने जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं. यही वजह है कि फलों को सही समय और सही तरीके से खाना बेहद जरूरी माना जाता है. Healthians की रिपोर्ट के अनुसार, संतरा, मौसमी, अनानास और अंगूर जैसे खट्टे फलों में प्राकृतिक एसिड की मात्रा काफी ज्यादा होती है. सुबह खाली पेट इन्हें खाने से पेट की अंदरूनी परत पर असर पड़ सकता है, जिससे एसिडिटी, जलन और गैस जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं. जिन लोगों को पहले से पाचन संबंधी दिक्कतें रहती हैं, उनके लिए यह परेशानी और बढ़ सकती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार खट्टे फलों को हल्का नाश्ता करने के बाद खाना ज्यादा बेहतर माना जाता है. इससे शरीर को इनके पोषक तत्व भी मिल जाते हैं और पेट पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं पड़ता. क्या खाली पेट केला खाना सही है?केला सबसे ज्यादा खाए जाने वाले फलों में से एक है. लोग इसे इंस्टेंट एनर्जी का अच्छा स्रोत मानते हैं, लेकिन कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि सुबह खाली पेट केला खाना हर किसी के लिए सही नहीं माना जाता. केले में प्राकृतिक शुगर और मैग्नीशियम होता है, जो कुछ लोगों में ब्लड शुगर तेजी से बढ़ा सकता है. इसके अलावा खाली पेट केला खाने से कुछ लोगों को पेट भारी लग सकता है या सुस्ती महसूस हो सकती है. हालांकि अगर इसे ड्राई फ्रूट्स, ओट्स या दूसरे फूड्स के साथ खाया जाए, तो यह शरीर के लिए ज्यादा संतुलित विकल्प बन सकता है. तरबूज और खरबूजा भी सोच-समझकर खाएंगर्मियों में लोग सुबह सबसे पहले तरबूज और खरबूजा खाना पसंद करते हैं, क्योंकि इनमें पानी की मात्रा काफी अधिक होती है. हालांकि बहुत ज्यादा मात्रा में खाली पेट इन्हें खाने से कुछ लोगों को पेट फूलना, जल्दी भूख लगना या पाचन संबंधी परेशानी महसूस हो सकती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि जिन लोगों का पाचन कमजोर है, उन्हें इन फलों का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए. साथ ही इन्हें दूसरे भारी भोजन के साथ मिक्स करके खाने से भी बचना बेहतर माना जाता है. ज्यादा मीठे फल भी बढ़ा सकते हैं शुगरआम, चीकू और अंगूर जैसे फलों में प्राकृतिक शुगर ज्यादा मात्रा में होती है. सुबह खाली पेट इनका अधिक सेवन ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकता है. खासतौर पर डायबिटीज या इंसुलिन रेजिस्टेंस से जूझ रहे लोगों को ऐसे फलों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार फल हेल्दी जरूर होते हैं, लेकिन उनका सेवन हमेशा संतुलित मात्रा में करना चाहिए. सुबह खाली पेट क्या खाना माना जाता है बेहतर?सुबह खाली पेट हल्के और आसानी से पचने वाले फल ज्यादा अच्छे माने जाते हैं. पपीता, सेब और भीगे हुए ड्राई फ्रूट्स के साथ फल खाना शरीर के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है. इसके अलावा सुबह उठते ही पहले पानी पीना और कुछ देर बाद फल खाना पाचन के लिए अच्छा माना जाता है. शरीर की जरूरत को समझना है जरूरीहर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से काम करता है. कोई फल किसी एक व्यक्ति को फायदा दे सकता है, जबकि वही फल दूसरे को परेशानी दे सकता है. इसलिए शरीर के संकेतों को समझना बेहद जरूरी माना जाता है. अगर किसी फल को खाने के बाद पेट में जलन, गैस या असहजता महसूस हो, तो उसे खाली पेट खाने से बचना चाहिए.
रेवंत रेड्डी ने कांग्रेस पर टिप्पणी को लेकर पीएम मोदी पर पलटवार किया, बीजेपी को ‘ब्रिटिश जनता पार्टी’ बताया | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:11 मई, 2026, 22:34 IST पश्चिम एशिया में तनातनी के बीच तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने भी सर्वदलीय बैठक की मांग की. तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी (पीटीआई/फ़ाइल) तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर तीखा हमला बोला और केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी पर विभाजनकारी राजनीति करने और संवैधानिक संस्थानों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी की कांग्रेस को “मुस्लिम लीग माओवादी कांग्रेस” बताने वाली टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई। भाजपा को “ब्रिटिश जनता पार्टी” कहते हुए रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि भगवा पार्टी समाज को “बांटने” और समुदायों के बीच “डर” पैदा करने का प्रयास कर रही है। सीएम रेड्डी ने कहा, “हम पीएम मोदी द्वारा दिए गए बयान की कड़ी निंदा करते हैं। मुस्लिम और माओवादी भी इस देश का हिस्सा हैं। एक प्रधानमंत्री के लिए इस तरह से बोलना दुर्भाग्यपूर्ण है। वे (बीजेपी) उन्हें खत्म करना चाहते हैं, लेकिन हमारा तरीका उन्हें मुख्यधारा के समाज में वापस लाना है। तेलंगाना में देश के किसी भी अन्य राज्य की तुलना में अधिक माओवादी आत्मसमर्पण हुए हैं।” तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार केवल बल पर केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के बजाय माओवादियों को मुख्यधारा में वापस लाने में विश्वास करती है। सीएम रेड्डी ने पीएम मोदी द्वारा घोषित प्रतिबंधों पर प्रतिक्रिया दी पश्चिम एशिया संकट और पीएम मोदी के आत्मनिर्भरता के प्रयास के बीच, सीएम रेवंत रेड्डी ने कहा कि “पीएम मोदी लोगों पर प्रतिबंध लगा रहे हैं, ऐसे सुझाव देना विदेश नीति की पूरी विफलता के अलावा कुछ नहीं है। उन्हें सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए और सभी से सुझाव लेने चाहिए। भारत ने भारत-पाकिस्तान युद्ध सहित कई युद्ध देखे हैं, लेकिन देश को कभी भी ऐसे प्रतिबंधों का सामना नहीं करना पड़ा।” उन्होंने आगे तर्क दिया कि संघर्षों में सीधे तौर पर शामिल कई देश स्थिति को अलग-अलग तरीके से संभाल रहे थे। रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया, “अमेरिका और संकट का सामना कर रहे अन्य देश सीधे तौर पर युद्ध में शामिल हैं, लेकिन भारत सीधे तौर पर इस युद्ध में शामिल नहीं है। पीएम मोदी को कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन वह कुछ नहीं कर रहे हैं। वे केवल किसी को संकट में डालना जानते हैं।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना समाचार राजनीति रेवंत रेड्डी ने कांग्रेस पर टिप्पणी को लेकर पीएम मोदी पर पलटवार किया, बीजेपी को ‘ब्रिटिश जनता पार्टी’ कहा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)रेवंत रेड्डी की पीएम मोदी की आलोचना(टी)तेलंगाना के मुख्यमंत्री(टी)नरेंद्र मोदी पर हमला(टी)भाजपा विभाजनकारी राजनीति(टी)मुस्लिम लीग माओवादी कांग्रेस(टी)ब्रिटिश जनता पार्टी की टिप्पणी(टी)संस्थाओं का दुरुपयोग भारत(टी)पश्चिम एशिया संकट भारत
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Hindi News National India Petrol Diesel Stock: 60 Days Supply; Forex $703B; Govt Loss ₹1000 Cr Daily नई दिल्ली9 मिनट पहले कॉपी लिंक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में वेस्ट एशिया पर मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (IGoM) की पांचवीं बैठक हुई। केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि बढ़ती वैश्विक कीमतों के बावजूद तेल कंपनियां रोज करीब ₹1000 करोड़ का नुकसान झेल रही हैं, ताकि आम लोगों पर बोझ न पड़े। हालांकि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में वेस्ट एशिया पर मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (IGoM) की पांचवीं बैठक हुई। इसमें पेट्रोलियम, रेलवे, सिविल एविएशन, उर्वरक, पोर्ट और साइंस से जुड़े मंत्री शामिल हुए रहे। बताया गया कि भारत के पास 60 दिन का कच्चा तेल और गैस का स्टॉक मौजूद है, जबकि LPG का 45 दिन का स्टॉक है। लोगों को घबराने या पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगाने की जरूरत नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, देश की विदेशी मुद्रा भंडार स्थिति भी मजबूत है और यह $703 अरब पर है। इधर पीएम मोदी ने 24 लगातार दूसरी बार देशवासियों से ईंधन और संसाधनों का कम इस्तेमाल करने की अपील की। बैठक में पेट्रोलियम, रेलवे, सिविल एविएशन, उर्वरक, पोर्ट और साइंस से जुड़े मंत्री शामिल रहे। तेल कंपनियों पर बढ़ा बोझ, ₹2 लाख करोड़ तक अंडर-रिकवरी अधिकारियों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसके चलते देश पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ रहा है। भारत उन गिने-चुने देशों में है जहां 70 दिन से ज्यादा समय से वैश्विक संकट के बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर हैं। हालांकि, इसके लिए तेल कंपनियां रोज करीब ₹1000 करोड़ का नुकसान उठा रही हैं। पहली तिमाही में ही अंडर-रिकवरी करीब ₹2 लाख करोड़ तक पहुंच गई है, ताकि वैश्विक कीमतों का असर सीधे उपभोक्ताओं पर न पड़े। PM लगातार दूसरे दिन बोले- पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करें पीएम नरेंद्र मोदी ने लगातार दूसरे दिन लोगों से ईंधन और संसाधनों का कम इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जहां संभव हो पेट्रोल डीजल का उपयोग कम करें और मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें। वडोदरा में मोदी ने कहा कि जैसे देश ने मिलकर कोरोना संकट का सामना किया था, वैसे ही मौजूदा संकट से भी देश बाहर निकल जाएगा। विदेश में रहने वाले भारतीयों से कहूंगा कि कम से कम पांच विदेशी मेहमानों को भारत घुमाने लाइए। उन्होंने कहा कि सोने के आयात पर भी देश का बहुत बड़ा पैसा विदेश जाता है। जब तक हालात सामान्य न हों हम सोने की खरीद टालें। गोल्ड की जरूरत नहीं है। मोदी ने खाने के तेल की खपत कम करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि खाद्य तेल के आयात पर भी देश की बड़ी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। अगर लोग खाने के तेल का कम उपयोग करें तो इससे देश और शहर दोनों को फायदा होगा। पूरी खबर पढ़ें… …………. यह खबर भी पढ़ें… तेल-कंपनियों को हर दिन ₹1,700 करोड़ का नुकसान: 10-हफ्ते में ₹1 लाख करोड़ का घाटा, वजह- वैश्विक तनाव के बीच पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 50% तक बढ़ चुकी हैं। इसके बावजूद भारतीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले दो साल के स्तर पर ही स्थिर बनी हुई हैं। सरकारी तेल कंपनियां देश के उपभोक्ताओं को ग्लोबल एनर्जी शॉक से बचाने के लिए भारी वित्तीय बोझ यानी नुकसान उठा रही हैं। पिछले 10 हफ्तों में इन कंपनियों को ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
60 Days Supply; Forex $703B; Govt Loss ₹1000 Cr Daily

Hindi News National India Petrol Diesel Stock: 60 Days Supply; Forex $703B; Govt Loss ₹1000 Cr Daily नई दिल्ली48 मिनट पहले कॉपी लिंक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में वेस्ट एशिया पर मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (IGoM) की पांचवीं बैठक हुई। केंद्र सरकार विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए इमरजेंसी एक्शन पर विचार कर रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के असर और बढ़ती तेल कीमतों के बीच सरकार ईंधन सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने पर विचार कर सकती है। TOI की खबर के मुताबिक इसका मकसद बढ़ती तेल कीमतों के असर को कंट्रोल करना और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना है। रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), वित्त मंत्रालय और RBI के अधिकारियों के बीच इस पर चर्चा हुई है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। इधर, सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में वेस्ट एशिया पर मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (IGoM) की पांचवीं बैठक हुई। इसमें कहा गया कि बढ़ती वैश्विक कीमतों के बावजूद तेल कंपनियां रोज करीब ₹1000 करोड़ का नुकसान झेल रही हैं, ताकि आम लोगों पर बोझ न पड़े। बैठक में पेट्रोलियम, रेलवे, सिविल एविएशन, उर्वरक, पोर्ट और साइंस से जुड़े मंत्री शामिल रहे। देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं बैठक में पेट्रोलियम, रेलवे, सिविल एविएशन, उर्वरक, पोर्ट और साइंस से जुड़े मंत्री शामिल हुए रहे। इसमें बताया भारत के पास 60 दिन का कच्चा तेल और गैस का स्टॉक मौजूद है, जबकि LPG का 45 दिन का स्टॉक है। लोगों को घबराने या पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगाने की जरूरत नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, देश की विदेशी मुद्रा भंडार स्थिति भी मजबूत है और यह $703 अरब पर है। सरकार सोना-इलेक्ट्रॉनिक्स इम्पोर्ट सीमित करने का सोच रही ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार सोना और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे गैर-जरूरी आयात को सीमित करने के उपाय भी देख रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन चीजों के आयात पर रोक या नियंत्रण लगाया जा सकता है, हालांकि इस पर भी अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। PM लगातार दूसरे दिन बोले- पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करें पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवा को लगातार दूसरे दिन लोगों से ईंधन और संसाधनों का कम इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जहां संभव हो पेट्रोल डीजल का उपयोग कम करें और मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें। वडोदरा में मोदी ने कहा कि जैसे देश ने मिलकर कोरोना संकट का सामना किया था, वैसे ही मौजूदा संकट से भी देश बाहर निकल जाएगा। विदेश में रहने वाले भारतीयों से कहूंगा कि कम से कम पांच विदेशी मेहमानों को भारत घुमाने लाइए। उन्होंने कहा कि सोने के आयात पर भी देश का बहुत बड़ा पैसा विदेश जाता है। जब तक हालात सामान्य न हों हम सोने की खरीद टालें। गोल्ड की जरूरत नहीं है। मोदी ने खाने के तेल की खपत कम करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि खाद्य तेल के आयात पर भी देश की बड़ी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। अगर लोग खाने के तेल का कम उपयोग करें तो इससे देश और शहर दोनों को फायदा होगा। पूरी खबर पढ़ें… …………. यह खबर भी पढ़ें… तेल-कंपनियों को हर दिन ₹1,700 करोड़ का नुकसान: 10-हफ्ते में ₹1 लाख करोड़ का घाटा, वजह- वैश्विक तनाव के बीच पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 50% तक बढ़ चुकी हैं। इसके बावजूद भारतीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले दो साल के स्तर पर ही स्थिर बनी हुई हैं। सरकारी तेल कंपनियां देश के उपभोक्ताओं को ग्लोबल एनर्जी शॉक से बचाने के लिए भारी वित्तीय बोझ यानी नुकसान उठा रही हैं। पिछले 10 हफ्तों में इन कंपनियों को ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
मोरिंगा के पकौड़े रेसिपी: पनीर-प्याज सब खा जाएंगे भूल, जब घर में बचे सहजन के पकौड़े; स्वाद और स्वास्थ्य दोनों का प्रभाव आदर्श है

मोरिंगा में प्रचुर मात्रा में आयरन, कैल्शियम और विटामिन पाए जाते हैं, जो शरीर को शक्ति प्रदान करने में मदद करते हैं। हां ये पकौड़े बहुत कम समय में बनकर तैयार हो जाते हैं. छवि: एआई सामग्री: 1 कप मोरिंगा की पत्तियां, 1 कप बेसन, 1 छोटा प्याज मोनोफोनिक कटा हुआ, 1-2 हरी मिर्च हरी मिर्च कटी हुई, 1/2 छोटा लाल मिर्च पाउडर, 1/2 छोटा प्याज हल्दी छवि: फ्रीपिक 1/2 छोटा चम्मच, नमक स्वाद अनुसार, थोड़ा सा हरा धनियां, पानी चाहिए, तलने के लिए तेल। इनका स्वाद इतना शानदार लगता है कि घर के लोग बार-बार बनते हैं। छवि: एआई बनाने की विधि: सबसे पहले मोरिंगा की निश्चिंतता को अच्छे तरीके से धोकर साफ़ कर लें। अब एक बड़े बाउल में बेसन शामिल है और इसमें प्याज, हरी मिर्च, अजमोद, हल्दी, लाल मिर्च, नमक और हरा धनिया शामिल है। छवि: फ्रीपिक इसके बाद इसमें मोरिंगा के टुकड़े और थोड़ा-थोड़ा पानी के टुकड़े डालकर तैयार कर लें। ध्यान दें कि बैटर ज्यादा पतला न हो, तभी पकौड़े अच्छे कुरकुरे लगेंगे। छवि: एआई अब कढ़ाही में तेल गर्म करें। जब तेल अच्छे से गर्म हो जाए, तब हाथ या घर की मदद से छोटे-छोटे पकौड़े तेल में डाल दीजिए। उदाहरण के तौर पर मध्यम आंच पर सोनार और क्रिस्पी होने तक तलें। छवि: एआई जब पकौड़े दोनों तरफ से अच्छे से पक जाएं, तो इसलिए प्लेट में निकाल लें। गरमा-गरम मोरिंगा के पकौड़े हरी चटनी, टमाटर मसाला या मसाला चाय के साथ सर्व करें। छवि: एआई शरीर की कमजोरी दूर करने में मदद मिलती है। प्रतिरक्षा को मजबूत करने में सहायता करता है। ट्रैक्टरों के लिए खतरनाक होता है। इसके अलावा पाचन को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है। छवि: फ्रीपिक









