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लसोड़ा एक ऐसा देसी फल है, जिसे गांवों में सालों से अचार और सब्जी के रूप में खाया जाता रहा है. दिखने में साधारण लगने वाला यह छोटा-सा फल पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है और आयुर्वेद में भी इसका खास महत्व बताया गया है. यही वजह है कि अब लोग फिर से इस पारंपरिक फल की तरफ ध्यान देने लगे हैं.
गांव-कस्बों में पाए जाने वाला लसोड़ा एक ऐसा फल है, जिसे आज की नई पीढ़ी धीरे-धीरे भूलती जा रही है. हालांकि पुराने समय में यह लोगों की रसोई और घरेलू नुस्खों का अहम हिस्सा माना जाता था. लसोड़ा का पेड़ गर्म और सूखे इलाकों में आसानी से उग जाता है और ज्यादा देखभाल की जरूरत भी नहीं पड़ती. इसे कई जगहों पर “इंडियन चेरी” के नाम से भी जाना जाता है. इसका फल आकार में छोटा होता है, लेकिन स्वाद और पोषण के मामले में काफी खास माना जाता है. खासकर ग्रामीण इलाकों में लोग इसका अचार, सब्जी और कई पारंपरिक व्यंजनों में इस्तेमाल करते आए हैं.
स्वाद के साथ सेहत का भी खजाना
लसोड़ा देखने में भले साधारण लगे, लेकिन इसमें कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार इसमें फाइबर, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस और जिंक जैसे तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. यही वजह है कि पुराने समय में लोग इसे सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि सेहत को बेहतर रखने के लिए भी अपनी डाइट का हिस्सा बनाते थे. इसका कच्चा फल हल्का कसैला और चिपचिपा होता है, जबकि पकने के बाद इसमें हल्की मिठास आ जाती है. गांवों में आज भी कई घरों में इसका अचार बड़े चाव से खाया जाता है. वहीं कुछ जगहों पर इसकी मसालेदार सब्जी भी बनाई जाती है, जिसका स्वाद काफी अलग माना जाता है.
पाचन के लिए क्यों माना जाता है अच्छा?
लसोड़ा को पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद फाइबर पेट को साफ रखने और पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. यही वजह है कि जिन लोगों को कब्ज या पेट से जुड़ी समस्याएं रहती हैं, उनके लिए इसे उपयोगी माना जाता है. ग्रामीण इलाकों में पुराने समय से लोग इसे खाने के साथ-साथ घरेलू उपायों में भी इस्तेमाल करते रहे हैं. माना जाता है कि यह शरीर को अंदर से ताकत देने और कमजोरी कम करने में मदद कर सकता है.
आयुर्वेद में भी बताया गया खास
आयुर्वेद में लसोड़ा के फल, पत्तियों और बीजों तक का उपयोग बताया गया है. कई जगहों पर इसकी पत्तियों का इस्तेमाल सूजन और त्वचा संबंधी समस्याओं में भी किया जाता रहा है. वहीं कुछ लोग इसके गूदे को पारंपरिक घरेलू नुस्खों में शामिल करते हैं. हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि किसी भी चीज का औषधि की तरह इस्तेमाल बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए. हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक उपयोग से पहले योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी माना जाता है.
गांवों से शहरों तक फिर बढ़ रही लोकप्रियता
एक समय था जब लसोड़ा लगभग हर गांव में आसानी से मिल जाता था, लेकिन अब शहरों में बहुत कम लोग इसके बारे में जानते हैं. हालांकि पिछले कुछ वर्षों में पारंपरिक और देसी फूड्स की बढ़ती लोकप्रियता के कारण लोग फिर से ऐसे फलों की तरफ ध्यान देने लगे हैं. कई लोग अब ऑर्गेनिक और देसी खानपान को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें लसोड़ा जैसे पारंपरिक फल भी शामिल हो रहे हैं. खासतौर पर इसका अचार आज भी कई लोगों की पसंद बना हुआ है.
छोटा फल, बड़े फायदे
लसोड़ा भले ही दिखने में साधारण लगे, लेकिन इसके अंदर पोषण और पारंपरिक स्वाद दोनों छिपे हैं. गांवों में सालों से इस्तेमाल होने वाला यह फल आज भी लोगों की थाली और घरेलू परंपराओं का हिस्सा बना हुआ है. सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करने पर यह शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व देने में मदद कर सकता है.
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विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें









































